#15 कामुकता एवं अश्लील सामग्री
स्कॉट एवं जेस
अभी तक मैं जितने भी लोगों को जानता हूँ, उनमें सबसे अधिक दुःखी लोग यौन पाप से पीड़ित और अपराधी हैं। जब मैंने सेवकाई में प्रवेश किया, तो मुझे नहीं पता था कि मुझे पापमय यौन सम्बन्धों के कारण होने वाली क्षति से पीड़ित और दुःखी लोगों के साथ बैठकर अनगिनत घंटे बिताने पड़ेंगे। मैं जितनी दर्दनाक कहानियाँ जानता हूँ, उतनी न तो मैं कभी सुना सकता हूँ और न ही आप कभी सुनना चाहेंगे। परन्तु मैं आपको और आपकी शुद्धता की खोज में सहायता करने के लिए केवल एक कहानी साझा करना चाहता हूँ।
यौन पाप की सबसे दु: खद कहानियों में से एक, जिसे मैं जानता हूँ, एक विवाहित व्यक्ति से जुड़ी है जो छह बच्चों का पिता था। बाहरी दृष्टिकोण से देखने पर वह एक आदर्श जीवन जी रहा था, उसका नाम स्कॉट था। वह एक अत्यंत सफल व्यापारी था, जिसकी एक सुन्दर सी पत्नी थी और छह अत्यंत बुद्धिमान बच्चे थे, जिन्हें वे घर पर ही पढ़ा रहे थे। वह और उसकी पत्नी जेस अपनी कलीसिया में सम्मानित सामान्य अगुवों में से एक थे और हमेशा मित्रों से घिरे रहते थे। फिर एक सुबह जेस का संसार ही उजड़ गया।
जब स्कॉट व्यावसायिक कार्य के कारण देश से बाहर था, तभी जेस को उसकी ओर से फोन पर एक सन्देश मिला। जब उसने उसे देखा, तो उसमें स्कॉट का एक वेश्या के साथ आपत्तिजनक वीडियो था। स्कॉट वह वीडियो अपने होटल के कमरे से कुछ ही दूरी पर ठहरे अपने व्यावसायिक साथी को भेजना चाहता था, परन्तु गलती से वह अपनी पत्नी को भेज बैठा। और उसी क्षण सब कुछ बदल गया।
अगले कई सप्ताह आतंक और त्रासदी से भरे रहे, क्योंकि जेस को यह समझ में आ गया था कि जिस व्यक्ति को वह अपना पति समझ रही थी, वह वास्तव में था ही नहीं। उसे यह पता चला कि उसके बच्चों का पिता सम्भवतः कोई दिन ऐसा बिताता हो, जब वह कई घण्टों तक अश्लील सामग्री न देखता हो। उसने यह भी उजागर किया कि उसके दो सहकर्मियों के साथ उसकी एक विकृत प्रतिस्पर्धा थी, जिसमें वे शहर से बाहर जाकर वेश्याओं के साथ सबसे घृणित यौन कुकर्मों का वीडियो बनाने का प्रयास करते थे। तब उसे यह भी पता चला कि जब वह उसके साथ आपसी सम्बन्ध में थी उस समय उसने अनगिनत महिलाओं के साथ विश्वासघात किया था और उसका पहला अवैध यौन सम्बन्ध उस रात उसी की सहेली के साथ बना था जब उसकी सगाई हुई थी।
जेस पूरी रीति से टूट गई, निराश हो गई और घृणा से भर गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह कैसे सोचे या क्या करे। उसने सहायता पाने के लिए कुछ मित्रों से सम्पर्क किया और उस जीवन को समझने का प्रयास किया जिसे वह नहीं जानती थी। परन्तु स्थिति और भी अधिक बिगड़ गई। एक रात जेस और स्कॉट को इस विषय में बात करनी थी कि अपने बिखरे हुए विवाह के बचे हुए सम्बन्धों के साथ कैसे आगे बढ़ा जाए, परन्तु किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहें, इसलिए वे दोनों चुपचाप बैठे रहे। बच्चे बिस्तर पर थे, और बाहर बारिश हो रही थी। तभी दरवाज़े की घंटी बजी, परन्तु न ही स्कॉट और न ही जेस यह सोच पा रहे थे कि वह कौन हो सकता है। जब दोनों ने घर के सामने वाला दरवाज़ा खोला, तो स्कॉट गाली देने लगा। वहाँ तामारा खड़ी थी।
जेस को बिल्कुल भी अनुमान नहीं था कि यह स्त्री कौन है, परन्तु स्कॉट जानता था कि वह कौन है, और जब उस महिला ने बोलना आरम्भ किया तो वह हक्का-बक्का रह गया। तामारा सामने के बरामदे में खड़ी थी और जेस को समझा रही थी कि उसकी भेंट स्कॉट से ऑनलाइन हुई थी, जहाँ विवाहित लोग विवाह के अतिरिक्त भी सम्बन्ध खोजते रहते हैं। उसने कहा कि वे कई महीनों से साथ में थे और एक-दूसरे से प्रेम करते हैं। उसने आगे कहा कि स्कॉट, जेस और बच्चों को छोड़कर उसके साथ रहना चाहता था, परन्तु वह यह कहने से बहुत डरता है, इसलिए वह स्वयं इस बात को कहने के लिए यहाँ आई है जो स्कॉट नहीं कह पा रहा था। उसके हाथों में कागजों का एक पुलिंदा था, जिसमें उन दोनों के अश्लील चित्र और सन्देशों की प्रतिलिपियाँ थी, जिनमें स्कॉट ने तामारा के लिए अपने प्रेम और अपनी पत्नी के प्रति घृणा को व्यक्त किया था।
यह सब कुछ एक-दो क्षणों में साझा करने के लिए बहुत अधिक था, परन्तु तामारा की बात अभी समाप्त नहीं हुई थी। जब उसने सारी बातें उगल दीं, तब उसने अनुरोध करना आरम्भ किया। उसने स्कॉट की ओर देखा और उससे अनुरोध किया कि वह अपना सामान उठाए और उसके साथ चल दे। उसने कहा कि वह जानती है कि स्कॉट जेस से प्रेम नहीं करता है, और अब जबकि सब कुछ सामने आ ही चुका है, तो अब वह स्वतंत्र है कि जो चाहे वही करे। उसी क्षण, जेस अचानक से स्थिति को जैसे थी वैसा ही स्वीकार करने के लिए विवश हो गई। वह दरवाज़े से हट गई और प्रवेश द्वार में रखी एक बेंच पर जाकर बैठ गई। उसका हाई स्कूल का प्रेमी और उसकी एक प्रेमिका, दोनों ही दरवाज़े के दोनों ओर खड़े थे, और तेज़ हवाओं के कारण उसके घर के अन्दर बारिश की बौछारें आ रही थीं। उसने अपने पति की ओर देखा और कहा, “अच्छा, स्कॉट, अब तुम क्या करना चाहते हो?”
स्कॉट को अब एक निर्णय लेना था और उसे यह निर्णय लेना ही होगा। यह निर्णय का वह क्षण होता है जिसका सामना हर वह व्यक्ति करता है जो यौन पाप से जूझ रहा होता है। यह निर्णय का वह क्षण है जिसका सामना आप अपने जीवन भर करते रहेंगे। आपके निर्णय के क्षण से अधिक, स्कॉट के निर्णय का बहुत अधिक महत्व और परिणाम होगा, परन्तु यह किसी भी प्रकार से कम गम्भीर नहीं होगा। ऐसा निर्णय लेना बुद्धि और धार्मिकता के बीच का चुनाव है या फिर दूसरी ओर मूर्खता और यौन पाप के बीच का है।
ऑडियो मार्गदर्शिका
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2 नीतिवचन एवं शुद्धता
नीतिवचन बुद्धि को व्यक्तिगत रूप में चित्रित करता है, जैसे कोई माता-पिता अपने पुत्र से धार्मिकता और अच्छे विवेक का अनुसरण करने के लिए कह रहे हों।
- “हे मेरे पुत्र, मेरी बुद्धि की बातों पर ध्यान दे, मेरी समझ की ओर कान लगा” (नीतिवचन 5:1)।
- “इसलिए अब हे मेरे पुत्रों, मेरी सुनो, और मेरी बातों से मुँह न मोड़ो” (नीतिवचन 5:7)।
- “हे मेरे पुत्र, अपने पिता की आज्ञा को मान, और अपनी माता की शिक्षा को न तज” (नीतिवचन 6:20)।
- “हे मेरे पुत्र, मेरी बातों को माना कर, और मेरी आज्ञाओं को अपने मन में रख छोड़” (नीतिवचन 7:1)।
- “अब हे मेरे पुत्रों, मेरी सुनो, और मेरी बातों पर मन लगाओ” (नीतिवचन 7:24)।
बुद्धि उस घनिष्ठ व्यक्तिगत मार्गदर्शक के रूप में आती है, जहाँ प्रेम करने वाले माता-पिता अपने बच्चे का मार्गदर्शन करते हैं जो पापमय संसार के कठोर चुनावों का सामना कर रहा होता है।
बुद्धि व्यक्तिगत अनुरोध इस आधार पर करती है कि वह उस युवक के जीवन को आशीषित करेगी यदि वह सुनने के लिए तैयार है, “आज्ञा तो दीपक है और शिक्षा ज्योति, और अनुशासन के लिए दी जानेवाली डाँट जीवन का मार्ग है” (नीतिवचन 6:23)। नीतिवचन का मार्गदर्शक अपनी समझ साझा करता है, इसलिए नहीं कि वह नियंत्रण करने का प्रयास कर रहा है और न ही अपने श्रोता को सुख से वंचित करता है, वरन् उसकी सहायता करने के लिए कर रहा है ताकि वह जीवन और आनन्द को जान सके। बुद्धि उस व्यक्ति के स्थायी कल्याण के लिए है जो उसका अनुसरण करता है।
इस जीवन देने वाली बुद्धि का एक विशेष केन्द्र बिन्दु उस स्त्री से सम्बन्धित है जिसे व्यभिचारिणी या वर्जित स्त्री कहा गया है: “आज्ञा तो दीपक है और शिक्षा ज्योति, और अनुशासन के लिए दी जानेवाली डाँट जीवन का मार्ग है,वे तुझको अनैतिक स्त्री से और व्यभिचारिणी की चिकनी चुपड़ी बातों से बचाएगी” (नीतिवचन 6:23-24)। पिता की अपने पुत्र को दी गई शिक्षा के रूप में, यह स्पष्ट रूप से एक स्त्री की ओर संकेत करता है। परन्तु यदि यह शिक्षा एक माता के द्वारा अपनी पुत्री को दी जाती, तो उसमें भी एक वर्जित पुरुष के विषय में वही मनाही सम्मिलित होती। यह पाठ स्पष्ट रूप से एक शारीरिक व्यक्ति की ओर संकेत करता है, क्योंकि प्राचीन काल में व्यभिचार के लिए शारीरिक उपस्थिति का होना आवश्यक था। परन्तु हमारे हृदय में कामुकता के विरुद्ध बाइबल की शिक्षा यह माँग करती है कि हम इस वर्जित स्त्री को अपने मन में किसी न किसी रूप में अवश्य पहचानें (मत्ती 5:28)। हाँ, यह सच है कि, इंटरनेट पर अश्लील सामग्री के आने का अर्थ यह भी है कि वर्जित स्त्री को भी हमारी स्क्रीन पर किसी भी अश्लील छवि के रूप में पहचाना जाना चाहिए। इसलिए, नीतिवचन हर प्रकार के पापपूर्ण यौन सम्बन्ध के लिए “वर्जित स्त्री” को दर्शाता है।
नीतिवचन की पुस्तक में, बुद्धि युवा पुरुषों से अनुरोध करती है कि इस वर्जित स्त्री से दूर रहें। परन्तु यह अनुरोध अकेले नहीं किया जाता। वर्जित स्त्री भी अनुरोध करती है। जैसे बलपूर्वक बुद्धि चिल्लाती है कि इस स्त्री से दूर भागो, ठीक वैसे ही बलपूर्वक यह वर्जित स्त्री भी चिल्लाती है कि उसके पीछे-पीछे आओ। बुद्धि या स्त्री का अनुसरण करने का यह अनुरोध ही वह विकल्प है जिसका सामना स्कॉट को उस दिन अपने घर के दरवाज़े पर करना पड़ा था। यह एक ऐसा विकल्प है जिसका सामना आपको भी करना पड़ सकता है। क्या आप बुद्धि के मार्ग पर चलेंगे या पाप का पीछा करेंगे? जब बुद्धि आपको अपने पीछे आने के लिए बुलाती है, तो उसका आग्रह इसीलिए होता है कि आप वर्जित स्त्री के भटकाने वाले और कपटी तर्कों को समझ सकें। नीतिवचन 5–7 में, एक बुद्धिमान और भक्तिपूर्ण मार्गदर्शक उन युवाओं से बात करता है, जो यह निर्णय लेने का प्रयास कर रहे हैं कि वे धार्मिकता का अनुसरण करें या मूर्खता का। वह स्पष्ट रूप से बताता है कि इस वर्जित स्त्री में ऐसा क्या है जो इतना आकर्षक है और ऐसा क्या है जो इतना घातक है। आगे हम इन तर्कों को विस्तार से देखेंगे ताकि हम साफ रीति से समझ सके कि क्या हो रहा है और साथ ही दाँव पर क्या लगा हुआ है, क्योंकि हम सभी इस वर्जित स्त्री का सामना करते हैं, चाहे वह स्त्री किसी भी रूप में क्यों न आए।
जब हम वर्जित स्त्री के प्रलोभनों के विषय में बात करते हैं, तो हमारा तात्पर्य यह है कि पापपूर्ण यौन सम्बन्धों में एक भयावह आकर्षण छिपा होता है। नीतिवचन 5:3 कहता है, “क्योंकि पराई स्त्री के होंठों से मधु टपकता है, और उसकी बातें तेल से भी अधिक चिकनी होती हैं।” और नीतिवचन 7:21 कहता है, “ऐसी ही लुभाने वाली बातें कह कहकर, उसने उसको फँसा लिया; और अपनी चिकनी चुपड़ी बातों से उसको अपने वश में कर लिया।” बात यह है कि इस पतित संसार में, पापमय यौन सम्बन्ध आकर्षक होते हैं; और यह हमें अपनी ओर खींचते हैं। पापमय यौन सम्बन्ध का आकर्षण प्रबल और विश्वासघाती दोनों होता है।
3 वर्जित स्त्री का प्रलोभन
यह समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि पापपूर्ण यौन सम्बन्ध का आकर्षण अति प्रबल होता है। पुरुषों के रूप में, परमेश्वर ने हमें यौन प्राणी के रूप में रचा है। परन्तु एक पापपूर्ण संसार में यह बन्धन टूट जाता है, और हम उन यौन वास्तविकताओं की ओर खिंचते चले जाते हैं जिनसे परमेश्वर घृणा करता है और वह सम्बन्ध हमारे लिए हानिकारक होते हैं। इस वास्तविक सच्चाई को नकारना न तो बुद्धिमानी है और न ही पवित्रता है। पापपूर्ण यौन सम्बन्ध का आकर्षण अति प्रबल तो होता है — परन्तु यह विश्वासघाती होता है। यौन अनैतिकता आनन्द और सुख देने की प्रतिज्ञा करती है, जिसे वह कभी पूरा नहीं कर सकती। नीतिवचन में बुद्धिमान व्यक्ति चिकनी-चुपड़ी बातों का अर्थ इस प्रकार से उजागर करता है कि हम उन्हें देखते ही पहचान लें और बुद्धि का अनुसरण करने का उत्तम अवसर पाएँ। आइए मैं इस चिकनी-चुपड़ी बातों की केवल तीन सच्चाइयों पर प्रकाश डालता हूँ।
- पापपूर्ण यौन सम्बन्ध सुन्दर दिखाई देता है।
वर्जित स्त्री के प्रति लालच करने के विरुद्ध चेतावनी देते हुए, नीतिवचन का बुद्धिमान व्यक्ति पापमय यौन सम्बन्धों की स्पष्ट सुन्दरता के विरुद्ध चेतावनी देता है: “उसकी सुन्दरता देखकर अपने मन में उसकी अभिलाषा न कर; वह तुझे अपने कटाक्ष से फँसाने न पाए” (नीतिवचन 6:25)। ये वचन जितने सच्चे हैं, उतने ही महत्वपूर्ण भी हैं। आप कल्पना कर सकते हैं कि एक बहुत ही धार्मिक सा दिखने वाला मार्गदर्शक यौन सम्बन्धों के प्रलोभनों के विषय में बात कर रहा है और यह तर्क दे रहा है कि किसी भी प्रकार का पापपूर्ण यौन सम्बन्ध कुरूप होता है। परन्तु यौन पाप को इतना प्रलोभनकारी बनाने वाली बात यह नहीं है कि वह कुरूप दिखाई देता है, वरन् यह है कि वह अत्यधिक सुन्दर दिखाई देता है।
नीतिवचन में बुद्धिमान व्यक्ति सच्चा है। वह यह नहीं कहता कि पापपूर्ण कामुकता कुरूप है। वह स्पष्ट करता है कि पापमय यौन सम्बन्धों के भ्रष्ट संसार में भी बहुत अधिक सुन्दरता है। परन्तु वह यह भी चाहता है कि हम इस बात को समझें कि यह सुन्दरता मूर्ख और अधर्मी पुरुषों को फँसाने के लिए खड़ी है जब वह लिखता है कि, “वह तुझे अपने कटाक्ष से फँसाने न पाए”। नीतिवचन का तर्क यह नहीं है कि वर्जित स्त्रियाँ कुरूप होती हैं, वरन् यह है कि वे खतरनाक होती हैं।
वर्जित स्त्रियों के पास जो सुन्दरता होती है, वह वास्तविक तो है परन्तु भ्रामक भी होती है। यहीं पर स्कॉट की कहानी हमारे लिए बहुत अधिक शिक्षाप्रद बन जाती है। स्कॉट अपने जीवन भर असंख्य स्त्रियों के साथ यौन सम्बन्धों में लिप्त रहा। स्कॉट को इन स्त्रियों के साथ पाप करने के लिए प्रेरित करने वाली वास्तविकताओं में से एक वास्तविकता उनकी शारीरिक सुन्दरता थी, जिसने उसे उसकी पत्नी, परिवार और साथ ही जीवित परमेश्वर के प्रति भी विश्वासयोग्यता से दूर कर दिया। स्कॉट के जीवन में परिवर्तन का अर्थ यह नहीं था कि उसे यह विश्वास दिलाया जाए कि जो उसे सुन्दर लगता था वह वास्तव में कुरूप है। परिवर्तन का अर्थ यह था कि उसकी सहायता की जाए ताकि वह देख सके कि जिस सुन्दरता को वह देख रहा था, वह वास्तविक सुन्दरता तो है, परन्तु वह सुन्दरता उसे कुछ बुरा करने के लिए लुभा रही है।
होमर लिखित महाकाव्य के ओडिसी में, सिर्स, आइया द्वीप पर रहने वाली एक देवी है। ट्रोजन युद्ध से वापस आते समय, ओडीसियस और उसके लोग द्वीप पर रुकते हैं और सिर्से की आकर्षक सुन्दरता पर मोहित हो जाते हैं। जब वे उसके वश में आ जाते हैं, तो उसने अपने काले जादू के ज्ञान का उपयोग करके उनमें से अधिकाँश पुरुषों को सूअर बना दिया। ओडीसियस के साथियों ने कठिनाई से जो सबक सीखा, वह यह नहीं था कि सर्सी कुरूप थी, वरन् यह कि वह दुष्ट थी।
इस सन्देश को पढ़ने वाले पुरुषों के लिए, आपके जीवन में, आपके मन में, या आपके कंप्यूटर के परदे पर जो वर्जित स्त्रियाँ आपको लुभाती है, उनके विषय में सच्चाई यह है कि वे वास्तव में सुन्दर है। परन्तु यह केवल आधा सच है। पूरा सच यह है कि जहाँ कहीं भी आप उसे पाएँ, वह वर्जित स्त्री खतरनाक है और वह आपके जीवन को नष्ट कर देगी। ऐसी घटना असंख्य पुरुषों के साथ पहले ही घट चुकी है और यही घटना आपके साथ भी घट सकती है। बुद्धि चिल्ला-चिल्लाकर कहती है कि आप अपने मन की आँखें खोलो और वर्जित स्त्री की बाहरी सुन्दरता से परे उन भयानक परिणामों को देखो जो रूप के धोखे में आने वाले पुरुषों के लिए वह स्त्री लाती है।
- पापपूर्ण यौन सम्बन्ध रुचि उत्पन्न करने की प्रतिज्ञा करता है।
नीतिवचन में बुद्धिमान व्यक्ति एक युवा पुरुष को बुद्धि की ओर मार्गदर्शन करने का प्रयास कर रहा है। जब वह उस व्यक्ति को उस प्रकार की बुद्धि में बढ़ने में सहायता करने पर ध्यान केंद्रित करता है जो यौन अनैतिकता से दूर भागेगा, तो वह नीतिवचन 7:6-9 में यौन पाप की खोज में लगे एक मूर्ख व्यक्ति का सजीव वर्णन करता है। यह युवा पुरुष मूर्ख के समान व्यवहार कर रहा है (नीतिवचन 7:7), क्योंकि वह अन्धेरा होने पर वर्जित स्त्री के घर के आस-पास होता है (नीतिवचन 7:8–9)। यह युवा पुरुष अपनी मूर्खता यह दिखाकर प्रकट करता है कि वह जानबूझकर गलत समय पर गलत स्थान पर उपस्थित है।
यहाँ उन सभी के लिए एक सामर्थी और व्यावहारिक सबक है जो बुद्धि की शुद्धता में बढ़ना चाहते हैं। जब आप उस समय पर वहीं होते हैं जहाँ आपको होना चाहिए, तो पाप करना बहुत कठिन हो जाता है। जब आप अकेले हों या बुरे प्रभाव वाले लोगों के साथ ऐसे समय और स्थान पर हों जहाँ बुरे-बुरे कार्य होते हैं, तब यौन पाप करना आपके लिए सरल हो जाता है। बाइबल में एक और उदाहरण राजा दाऊद के जीवन से मिलता है। दाऊद को बतशेबा के साथ पाप करने के लिए अपने सैनिकों से दूर, अपने महल में रहना अवश्य था, जबकि उस समय राजा युद्ध करने के लिए बाहर जाते थे (2 शमूएल 11:1)।
प्रश्न यह है कि कोई इतना स्पष्ट रूप से मूर्खतापूर्ण व्यवहार क्यों करता है। नीतिवचन में बुद्धि की वाणी इसका एक बहुत उपयोगी उत्तर देती है। युवा पुरुष वर्जित स्त्री की ओर उसके पहनावे के कारण आकर्षित होता है। नीतिवचन 7:10 कहता है कि उसका “भेष वेश्या के समान” था। बुद्धिमान व्यक्ति वस्त्रों का वर्णन नहीं करता, और उसे ऐसा करने की आवश्यकता भी नहीं है। क्योंकि सभी जानते हैं कि वस्त्र सन्देश देते हैं। एक दुल्हन अपने विवाह समारोह में जो वस्त्र पहनती है और हनीमून पर जो वस्त्र पहनती है, उन दोनों वस्त्रों में अन्तर होता है। यह अन्तर संचार से सम्बन्धित होता है। विवाह के दिन दुल्हन का पहनावा विवाह समारोह की सुन्दरता और महत्व को दर्शाता है। जबकि विवाह की रात दुल्हन का पहनावा उस यौन घनिष्ठता के उपहार को व्यक्त करता है जो वह अपने पति के साथ साझा करेगी। वहीं, वेश्या का पहनावा उसी यौन घनिष्ठता को भ्रष्ट रूप से दर्शाने के लिए होता है।
यह युवा पुरुष न केवल वर्जित स्त्री के पहनावे से वरन् उसके कार्यों से भी उसकी ओर आकर्षित होता है: “तब उसने उस जवान को पकड़कर चूमा” (नीतिवचन 7:13)। वर्जित स्त्री का आक्रामक शारीरिक स्नेह उस पुरुष को अत्यधिक आकर्षक लगता है जो पापपूर्ण यौन सम्बन्ध की खोज में रहता है।
वर्जित स्त्री क्या पहनती है और क्या करती है, इसका सीधा सम्बन्ध उसकी इच्छाओं से होता है। उस स्त्री के विषय में यह वर्णन है जो कहती है, “इसी कारण मैं तुझ से भेंट करने को निकली, मैं तेरे दर्शन की खोजी थी, और अभी पाया है” (नीतिवचन 7:15)। क्या आप उस स्त्री के मुँह से अपने प्रति आकर्षण की बात सुन रहे हैं? वर्जित स्त्री का आकर्षण, जो पुरुष को अपनी ओर खींचता है, वह इच्छा की प्रतिज्ञा है। पापपूर्ण यौन सम्बन्धों की खोज करने वाले पुरुषों में न केवल यौन इच्छा होती है, वरन् वे यह भी चाहते हैं कि उन्हें भी यौन रूप से चाहा जाए। वर्जित स्त्री के वस्त्र, व्यवहार और शब्द पुरुष के प्रति ऐसी इच्छा प्रकट करते हैं, जिसे वह उसी प्रकार ग्रहण करता है जैसे कोई नशेड़ी अवैध नशे को करता है।
समस्या केवल इतनी है कि यह वास्तविकता नहीं है। स्त्री केवल दिखावा कर रही है। नीतिवचन 7:11 कहता है, “वह शान्ति रहित और चंचल थी, और उसके पैर घर में नहीं टिकते थे।” नीतिवचन 7:19–20 यह स्पष्ट करता है कि उसका एक पति है। बात यह है कि जिस रुचि को वह स्त्री किसी विशेष पुरुष के प्रति प्रकट करती है, वही रुचि वह बहुत से अन्य पुरुषों के प्रति भी प्रकट करती है। उसका उस पुरुष के लिए कोई विशेष महत्व नहीं होता है। उसमें कुछ भी विशेष नहीं है। जब कोई पुरुष वर्जित स्त्री की यौन रुचि की प्रतिज्ञा में फँस जाता है, तो वह एक झूठ पर विश्वास करता है।
- यौन पाप गोपनीयता की प्रतिज्ञा करता है
वर्जित स्त्री का एक और मुख्य प्रलोभन गोपनीयता बनाए रखने का होता है। स्त्री कहती है, “इसलिए अब चल हम प्रेम से भोर तक जी बहलाते रहें; हम परस्पर की प्रीति से आनन्दित रहें।क्योंकि मेरा पति घर में नहीं है; वह दूर देश को चला गया है; वह चाँदी की थैली ले गया है; और पूर्णमासी को लौट आएगा” (नीतिवचन 7:18-20) जब स्त्री कहती है कि उसका पति लम्बी यात्रा पर गया है, वह बहुत सारा धन साथ ले गया है और एक महीने तक नहीं लौटेगा, तो वह एक दुष्ट प्रतिज्ञा कर रही होती है। वह कह रही होती है कि उनका पाप जिज्ञासा भरी दृष्टि से देखने वालों की आँखों से सुरक्षित रहेगा, और किसी को कभी भी कुछ पता नहीं चलेगा।
गोपनीयता अधिकाँश यौन पाप का एक मुख्य हिस्सा होता है। अधिकाँश पुरुष जो यौन पाप करते हैं, वे इसी प्रतिज्ञा के साथ करते हैं कि उनका भेद कभी नहीं खुलेगा। यह निश्चित रूप से स्कॉट के पाप का एक बहुत बड़ा हिस्सा था। उसका अधिक अश्लील सामग्री देखने, व्यभिचार करने और वेश्या खरीदने की सारी गतिविधियाँ उसकी पत्नी की जानकारी के बिना अन्धेरे में ही होती थीं। गोपनीयता आवश्यक थी। जब उसने स्वयं ही अपना भेद खोल दिया और गलती से अपनी पत्नी को अपने कुकर्मों के प्रमाण वाले सन्देश भेज दिए, तब उसके गुप्त जीवन से पर्दा उठ गया और उसे रुकना पड़ा।
वर्जित स्त्री के द्वारा की गई गोपनीयता की प्रतिज्ञा, और वह इच्छा जिसे व्यक्त करने के लिए वह इतना परिश्रम करती है, एक झूठ है। और पाप का स्वभाव ही ऐसा होता है कि वह अंततः प्रकट होकर सामने आ ही जाता है। वास्तव में यह नीतिवचन में की गई एक प्रतिज्ञा है, “क्या हो सकता है कि कोई अपनी छाती पर आग रख ले; और उसके कपड़े न जलें?क्या हो सकता है कि कोई अंगारे पर चले, और उसके पाँव न झुलसें? जो पराई स्त्री के पास जाता है, उसकी दशा ऐसी है; वरन् जो कोई उसको छूएगा वह दण्ड से न बचेगा” (नीतिवचन 6:27-29)। प्रतिज्ञा यह है कि वर्जित स्त्री के साथ हमारे सम्बन्ध के होने के परिणाम में हमें दण्ड मिलेगा। अब निर्णय क्या है? क्या हम वर्जित स्त्री की गोपनीयता बनाए रखने वाली प्रतिज्ञा पर विश्वास करेंगे या बाइबल की बुद्धिमानी वाली प्रतिज्ञाओं पर विश्वास करेंगे जो भेद खोलने की प्रतिज्ञा करती है।
चर्चा एवं मनन:
- पाप की इन झूठी प्रतिज्ञाओं ने आपको किन-किन तरीकों से आकर्षित किया है? आप इन प्रतिज्ञाओं पर विश्वास करने के लिए कैसे लुभाए जाते हैं?
- आप उन झूठी प्रतिज्ञाओं का सामना करने के लिए कौन सी सच्चाई का उपयोग कर सकते हैं?
4 वर्जित स्त्री का प्रलोभन
यौन पाप करने के लिए वर्जित स्त्री के प्रलोभन अत्यंत शक्तिशाली होते हैं। पापपूर्ण यौन सम्बन्ध के लिए भयावह प्रतिज्ञा यह होती है कि एक सुन्दर स्त्री आप में रुचि रखती है और यह भेद किसी को कभी भी पता नहीं चलेगा। बुद्धिमान मार्गदर्शक आत्मा को नाश करने वाले इस झूठ को उजागर करता है ताकि यह जीवन देने वाली सच्चाई प्रकट हो सके कि वास्तव में यह स्त्री आकर्षक नहीं, वरन् खतरनाक और घातक भी है। इस स्त्री के विषय में अपनी शिक्षा के आरम्भ में ही वह कहता है, “परन्तु इसका परिणाम नागदौना के समान कड़वा और दोधारी तलवार के समान पैना होता है। उसके पाँव मृत्यु की ओर बढ़ते हैं; और उसके पग अधोलोक तक पहुँचते हैं” (नीतिवचन 5:4-5)। अपने निर्देश के अन्त में वह कहता है, “क्योंकि बहुत से लोग उसके द्वारा मारे गए है; उसके घात किए हुओं की एक बड़ी संख्या होगी।उसका घर अधोलोक का मार्ग है, वह मृत्यु के घर में पहुँचाता है” (नीतिवचन 7:26-27)।
बुद्धिमान व्यक्ति उन प्रलोभनों का वर्णन करता है जो तब स्पष्ट होते हैं जब आप केवल वर्जित स्त्री को देखते हैं। जब वह उसकी खतरनाक प्रवृत्तियों को उजागर करने लगता है, तो वह हमसे कहता है कि इस स्त्री को और अधिक ध्यान से एवं निकटता से देखो। वह हमसे कहता है कि हम ऊपरी प्रलोभनों के नीचे झाँककर भीतर की वास्तविकता को देखें। जब आप उसके रूप-रंग, उसकी दिखावटी यौन रुचि और उसकी भ्रामक प्रतिज्ञाओं से आगे देखते हैं, तो आप एक ऐसी स्त्री को देखेंगे जो आपको विनाश के मार्ग पर ले जाएगी। हम उसके खतरों के विषय में बहुत सी बातें जानते हैं, परन्तु हम तीन खतरों पर विचार करेंगे।
- फँसाना
आप वर्जित स्त्री के द्वारा फँसाने को उस बुद्धिमान व्यक्ति की प्रतिज्ञा में देख सकते हैं, जो कहता है कि, “दुष्ट अपने ही अधर्म के कर्मों से फँसेगा, और अपने ही पाप के बन्धनों में बन्धा रहेगा” (नीतिवचन 5:22)। यौन पाप स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा करता है, परन्तु वास्तव में वह बन्धनों में बाँध देता है। यदि आप यौन शुद्धता की बुद्धि में बढ़ना चाहते हो, तो आपको इस पर विश्वास करना होगा।
यह वही सच्चाई थी जिसे स्कॉट ने समझने से अस्वीकार कर दिया था। स्कॉट उस झूठी प्रतिज्ञा पर मोहित हो गया था कि यौन पाप में भी स्वतंत्रता मिल सकती है। शहर से बाहर की यात्राओं में असंख्य वेश्याएँ उसे लाभ जैसी प्रतीत होती थीं। कई प्रेमिकाओं ने उसे ऐसी यौन सन्तुष्टि दी कि उसे लगता था कि ऐसी सन्तुष्टि वह अपनी पत्नी से नहीं पा सकता है। इंटरनेट पर उसका अश्लील सामग्री जिसमें बहु-विवाह सम्बन्ध दिखाया जाता है, उसमें उसे यौन सुखों का ऐसा संसार खुलता हुआ दिखाई देता था, जो विवाह के बिस्तर पर नहीं दिखाई देता। जबकि यह सब मूर्खतापूर्ण और स्पष्ट झूठ थे। उस रात उसने कठिनाई भरे तरीके से यह सच्चाई सीखी, जब वह अपने घर के मुख्य द्वार पर अपनी पत्नी और प्रेमिका के बीच खड़ा था। उस समय अपने आप को फँसा हुआ देखकर उसको यह बात समझ आ गई कि यौन पाप ने उसे स्वतंत्र करने के विपरीत बन्धनों में बाँध दिया है।
नीतिवचन का बुद्धिमान व्यक्ति इस सच्चाई को बताता है कि वर्जित स्त्री अपने पास आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को फँसा लेगी। हम सभी इस सच्चाई को किसी न किसी प्रकार से सीखेंगे। आप इसे बुद्धि की आवाज़ सुनकर और पापमय यौन सम्बन्धों से दूर रहकर सरल तरीके से सीख सकते हैं। या आप बुद्धि की आवाज़ को अनसुना करके, उस वर्जित स्त्री के पास जाकर, और अपने गले में फन्दा डालकर इस प्रकार के कठिन तरीके से सीख सकते हैं।
- अपमान
वर्जित स्त्री का एक और खतरनाक परिणाम यह होता है कि वह उस व्यक्ति के लिए अपमान सुनिश्चित करती है जो उसका पीछा करता है। नीतिवचन 6:32–33 के गम्भीर वचन इस बात को और अधिक स्पष्ट करते हैं: “जो परस्त्रीगमन करता है वह निरा निर्बुद्ध है; जो ऐसा करता है, वह अपने प्राण को नाश करता है।उसको घायल और अपमानित होना पड़ेगा, और उसकी नामधराई कभी न मिटेगी।”
यहाँ जो सत्य बताया जा रहा है, वह पहली दृष्टि में जितना प्रतीत होता है उससे कहीं अधिक गहरा है। यह चेतावनी इस महत्वपूर्ण वास्तविकता पर आधारित है कि हमारी सम्मान महत्वपूर्ण है, और हर कोई अच्छी प्रतिष्ठा चाहता है। इस वास्तविकता की पुष्टि पवित्रशास्त्र में नीतिवचन 22:1 में की गई है जो कहता है, “बड़े धन से अच्छा नाम अधिक चाहने योग्य है, और सोने चाँदी से औरों की प्रसन्नता उत्तम है।” हम सभी जानते हैं कि हमारा सम्मान महत्वपूर्ण है, और हम सभी अच्छा सम्मान पाना चाहते हैं। हम विश्वासयोग्यता और धार्मिकता के कार्यों के द्वारा बुद्धिमानी से इस लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। या फिर हम असावधान, मूर्ख और अधर्मी बनें रह सकते हैं।
पापपूर्ण यौन सम्बन्ध का तर्क उस अच्छे सम्मान के महत्व को गोपनीयता की प्रतिज्ञा के साथ प्रस्तुत करता है, जिसकी चर्चा हम पहले कर चुके हैं। वर्जित स्त्री हमारे कानों में धीमे से फुसफुसाती है कि हम इन घृणित कार्यों में लिप्त हो सकते हैं और किसी को कभी पता नहीं चलेगा। वह यह प्रतिज्ञा करके लुभाती है कि गुप्त तरीके से किए गए इस घृणित कार्य का लोगों पर प्रभाव नहीं पड़ेगा।
बुद्धि की आवाज़ झूठ को चीरते हुए किसी भी व्यक्ति के लिए एक झकझोर देने वाला निदान प्रस्तुत करती है अर्थात् उनके लिए जो इस पर विश्वास करेगा, “जो परस्त्रीगमन करता है वह निरा निर्बुद्ध है” (नीतिवचन 6:32)। आपको यह जानना चाहिए कि वर्जित स्त्री की ओर जाने वाला मार्ग घाव, अपमान और कलंक से भरा हुआ है। स्कॉट ने सोचा कि वह इस वास्तविकता से बच सकता है। उसने सोचा कि वह अपनी प्रेमिकाओं, वेश्याओं और अश्लील सामग्री को एक अच्छे मसीही, पारिवारिक पुरुष के रूप में अपने सम्मान के साथ बना कर रख सकता है। उसका अनुभव केवल एक दुखद उदाहरण है कि परमेश्वर का वचन हमेशा सत्य प्रमाणित होता है।
- विनाश
मैंने वर्जित स्त्री के परिणामों पर इस चर्चा का आरम्भ इस बात से किया कि यह स्त्री कितनी खतरनाक और विनाशकारी है। बाइबल स्पष्ट रूप से बताती है कि यौन पाप आपका विनाश कर देगा। यहाँ, मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूँ कि यौन पाप दूसरों को भी नष्ट करता है। नीतिवचन 6:34–35 इस वर्जित स्त्री के पति की ईर्ष्या और पीड़ा के विषय में बात करता है। यह व्यक्ति स्मरण कराता है कि यौन पाप केवल पाप करने वालों को ही नहीं, वरन् उनके आसपास रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भी हानि पहुँचाता है।
स्कॉट की कहानी इसी विनाश का एक उदाहरण है। उसके जीवन में जहाँ भी देखो, उसकी दुष्टता का ही कहर दिखाई देता है। सबसे स्पष्ट उदाहरण उसकी पत्नी, बच्चे, मित्र गण और विस्तृत परिवार हैं, जो उसकी अनैतिकता के कारण स्थायी रूप से घायल हो चुके हैं। यह देख पाना बहुत ही पीड़ादायक है कि उसकी प्रेमिका, जो मुख्य द्वार पर खड़ी थी, उस महिला का पति और उसके सभी बच्चे इस पीड़ा और विनाशकारी कार्य से बहुत अधिक प्रभावित हुए है। और उन अन्य स्त्रियों को देख पाना और भी अधिक कष्टकारी था जिनके विषय में किसी ने कभी कुछ सुना ही नहीं था और जिनके नाम स्कॉट को भी स्मरण नहीं थे। स्कॉट की वेश्याओं की अनगिनत कहानियाँ सुनना और भी अधिक पीड़ादायक है, जिन्हें उसने पाप और दुष्टता में धकेल दिया था।
यौन पाप की आपकी कहानी इस विनाश का और भी अधिक व्यक्तिगत उदाहरण है। यौन पाप की प्रतिज्ञा एक स्वार्थी प्रतिज्ञा होती है जो बहुत अच्छी लगती है, और किसी को भी ठेस नहीं पहुँचेगी। परन्तु सच्चाई यह है कि आपके पाप से प्रभावित हर व्यक्ति को पीड़ा होगी। आपका पाप किसे ठेस पहुँचा रहा है या किसे ठेस पहुँचाने की धमकी दे रहा है? अश्लील सामग्री की एक समस्या यह है कि यह झूठा दावा करती है कि यह ऐसा अपराध है जिसमें कोई भी पीड़ित नहीं होता है। इस प्रकार के मूर्खतापूर्ण तर्क अश्लील सामग्री और यौन व्यापार के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध को अनदेखा कर देते हैं। ऐसे मूर्खतापूर्ण तर्क इस बात की अनदेखी करते हैं कि जब भी हम अश्लील सामग्री देखते हैं, तो हम मूल रूप से भ्रष्ट उत्पाद की माँग को बढ़ा देते हैं, जिससे लोग कैमरे के सामने ऐसे घृणित कार्य करने के लिए विवश हो जाते हैं, जिसे करने से वह परमेश्वर, जिसके स्वरूप में वे रचे गए हैं, कहता है कि ऐसा नहीं करना चाहिए और इसके लिए उनका न्याय होगा। इस भयानक सौदेबाजी में, हर कोई अपने पाप के लिए उत्तरदायी है, जिसमें आप भी सम्मिलित हैं। कितने लोग जिनसे आप कभी मिले ही नहीं, उनके उन पापों के कारण हमेशा के लिए नरक में नष्ट हो जाएँगे, जिन्हें आप अपने फोन के पटल पर देखकर आनन्दित होते हैं?
इस सबका सार यह है कि, यद्यपि वर्जित स्त्री के प्रलोभन अति प्रबल हैं, फिर भी वे इस सच्चाई को बदल नहीं सकते कि पापपूर्ण यौन सम्बन्ध हर वस्तु और हर व्यक्ति को नष्ट कर देता है जिससे यह जुड़ा हुआ होता है। नीतिवचन का बुद्धिमान व्यक्ति आपसे यह विनती कर रहा है कि आप पाप के झूठ पर विश्वास करने से मना करें, और बुद्धि की सच्चाई को अपनाएँ, तथा मूर्खता से दूर भागकर यौन शुद्धता की ओर बढ़ें।
चर्चा एवं मनन:
- क्या आप अपने अनुभव के अनुसार सोच सकते हैं कि यौन पाप ने आपको किस प्रकार से फँसाया, अपमानित किया, या नष्ट किया है?
- जबकि यौन पाप हमारे जीवन में इतना अधिक विनाश लेकर आता है, फिर भी आपके विचार से यह इतना लुभावना क्यों बना रहता है?
5 वर्जित स्त्री के प्रति हमारी प्रतिक्रिया
वह बुद्धिमानी जो यौन पाप से शुद्धता की ओर ले जाती है, बताती है कि केवल वर्जित स्त्री के प्रलोभनों और परिणामों के विषय में ज्ञान की ही आवश्यकता नहीं होती, वरन् यह भी आवश्यकता होती है कि उस वर्जित स्त्री के प्रति कैसी प्रतिक्रिया करें। बुद्धिमान व्यक्ति हमें न केवल इस गम्भीर समस्या के विषय में चेतावनी देता है, वरन् इससे बचने के तरीके भी बताता है। नीतिवचन की पुस्तक में दिए गए अनेक बुद्धि से परिपूर्ण निर्देश दिए गए हैं, मैं उनमें से तीन पर ध्यान केंद्रित करना चाहूँगा।
- वर्जित स्त्री के पास न जाएँ
पहले, हमने देखा कि पाप में फँसने वाले मूर्ख व्यक्ति की एक गलती यह थी कि वह उस स्थान पर था जहाँ उसे होना ही नहीं चाहिए था: “तब मैंने भोले लोगों में से एक निर्बुद्धि जवान को देखा;वह उस स्त्री के घर के कोने के पास की सड़क से गुजर रहा था, और उसने उसके घर का मार्ग लिया” (नीतिवचन 7:7-8)। यह व्यक्ति जानता है कि यह खतरनाक स्त्री कहाँ है और मूर्खतापूर्ण ढँग से उसके पास जाता है। यह बिल्कुल उसके विपरीत है जो होना चाहिए था।
पाप का मूर्खतापूर्ण तर्क पुरुषों को वर्जित स्त्री के शब्दों, रूप-रंग और व्यवहार को देखने, मोहित होने और उसके द्वारा दिए गए वर्जित सुखों की उत्सुकता से प्रतीक्षा करते हुए उसकी ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है। अपने व्यक्तिगत अनुभव में, हम ऐसी स्त्रियों के अभद्र वस्त्र और लालसा भरी दृष्टि को देखते हैं; हम सोशल मीडिया पर उन अनैतिक लोगों की वेबसाइट के लिंक वाले पोस्ट देखते हैं, और हम आकर्षित होकर उनके समीप जाने का निर्णय लेते हैं। इस प्रकार का कदम उस बात के बिल्कुल विपरीत है जो बुद्धि सिखाती है। हम तभी बुद्धिमान बनेंगे जब हम उन भयावह संकेतों को, जो हमें समीप जाने के लिए आमंत्रित करते हैं, चेतावनी के रूप में देखेंगे और विपरीत दिशा में भागने का संकेत समझें।
ऐसे शक्तिशाली प्रलोभन से दूर भागने का कदम आरम्भ में हमारे पापपूर्ण स्वभाव के लिए विरोधाभासी लगेगा। इसी कारण नीतिवचन का बुद्धिमान मार्गदर्शक इस स्त्री के शक्तिशाली प्रलोभनों और निर्दयी खतरों का वर्णन करने में इतनी ऊर्जा लगाता है। हमें इन अन्धकारमय वास्तविकताओं को स्मरण रखना चाहिए कि जब पाप हमें अपनी ओर खींचने का प्रयास करे, तो समझ जाना चाहिए कि सुन्दरता का प्रदर्शन एक फन्दा है: “वह तुरन्त उसके पीछे हो लिया, जैसे बैल कसाई-खाने को, या हिरन फंदे में कदम रखता है।अन्त में उस जवान का कलेजा तीर से बेधा जाएगा; वह उस चिड़िया के समान है जो फंदे की ओर वेग से उड़ती है” (नीतिवचन 7:22-23) वह बुद्धि से परिपूर्ण सच्चाई जिसे हम सभी को सीखना चाहिए, यह है कि हम अपने स्वयं के जोखिम पर ऐसी वर्जित स्त्री के समीप जाते हैं।
वर्जित स्त्री से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप अपनी प्रिय पत्नी की ओर बढ़ें। पापपूर्ण यौन सम्बन्ध के विषय में चेतावनी देते हुए नीतिवचन का बुद्धिमान व्यक्ति विवाहित यौन सम्बन्ध की शुद्धता में भक्ति और धार्मिकता को अपनाने के लिए प्रेरित करता है (नीतिवचन 5:15–21)। यह शिक्षा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्पष्ट करती है कि परमेश्वर सामान्य रूप से यौन सम्बन्धों का विरोधी नहीं है, केवल पापपूर्ण यौन सम्बन्धों का विरोधी है। परमेश्वर को विश्वासयोग्य और शुद्ध यौन सम्बन्ध पसन्द हैं। क्योंकि उसने इसकी रचना इसी रीति से की है। इसीलिए परमेश्वर उन लोगों को बहुत आनन्द देने की प्रतिज्ञा करता है जो अपनी यौन इच्छाओं को विवाह के अन्तर्गत तक ही सीमित रखते हैं। अविश्वास पूर्ण यौन सम्बन्धों से बचने का सबसे उपयुक्त तरीका विवाह करना है।
शुद्धता की खोज करना हर किसी के लिए एक चुनौती होगी क्योंकि अविश्वासपूर्ण यौन सम्बन्धों में हमारी पापपूर्ण रुचि होती है। अविवाहित लोगों के लिए यह अधिक चुनौतीपूर्ण होगी। स्वाभाविक सी बात है कि यदि आपकी पत्नी नहीं है, तो आप अपनी यौन इच्छाओं को उसमें पूरा नहीं कर सकते हैं। केवल यौन संतुष्टि पाने के लिए किसी के साथ विवाह करना भी मूलतः स्वार्थी, अनुपयोगी और हानिकारक होगा। फिर भी, युवाओं के लिए यह प्रोत्साहन है कि वे प्रेम, उत्तरदायित्व, भक्ति और ऐसी परिपक्वता में आगे बढ़ें जो एक योग्य स्त्री को विश्वासयोग्यता के साथ ढूँढती है। यह प्रोत्साहन एक पिता के द्वारा अपने पुत्र को दिया गया है, जो सम्भवतः अभी भी अविवाहित है।
- छिपकर जीवन न जिएँ
नीतिवचन 7:9 कहता है कि यौन पाप की खोज में मूर्ख युवक वर्जित स्त्री के घर के पास जाता है, “उस समय दिन ढल गया, और संध्याकाल आ गया था, वरन् रात का घोर अन्धकार छा गया था।” मैंने इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका में यह देखा है कि पापपूर्ण यौन सम्बन्ध के जाल में फँसने वाले मूर्ख व्यक्ति को, गलत समय पर गलत स्थान पर होने के कारण, शुद्ध बुद्धिमान व्यक्ति के द्वारा डाँटा जाता है। परन्तु नीतिवचन 7:9 जैसे भागों से एक और सबक सीखा जा सकता है। यह पाठ केवल उस स्थान से सम्बन्धित नहीं है जहाँ अनैतिकता का पीछा करने वाला व्यक्ति जाता है, वरन् उसके उद्देश्य से भी सम्बन्धित है। वह व्यक्ति रात के घोर अन्धकार के समय पाप की खोज में जाता है। वह अपने पाप को दूसरों से छिपाने के प्रयास में अन्धेरे में छिपा रहता है।
बाइबल बार-बार बताती है कि पाप का जीवन रात के अन्धकार में इसलिए फलता-फूलता है ताकि उसे छिपाया जा सके, और धार्मिकता दिन के व्यापक उजियाले में प्रकट होती है (तुलना करें, यूहन्ना 3:20; रोमियों 13:12-13; इफिसियों 5:11; 1 थिस्सलुनीकियों 5:8)। इस प्रकार की शिक्षा के पीछे नैतिक समानता से भी बढ़कर अधिक कुछ है कि अन्धकार पाप के लिए वैसा ही है जैसा उजियाला धार्मिकता के लिए होता है। यह एक नैतिक उपदेश भी है कि पाप छल पूर्वक छिपाने के द्वारा होता है, जबकि धार्मिकता पारदर्शी प्रकटीकरण के द्वारा होती है: “जो अपने अपराध छिपा रखता है, उसका कार्य सफल नहीं होता, परन्तु जो उनको मान लेता और छोड़ भी देता है, उस पर दया की जाएगी” (नीतिवचन 28:13)।
मैं स्कॉट की कहानी पर बल देता रहा हूँ, परन्तु मेरे पास सुनाने के लिए केवल एक ही नहीं, वरन् और भी कई कहानियाँ हैं। वास्तव में, मेरी पूरी सेवकाई ऐसी कहानियों की सूची से भरी पड़ी हुई है —जो स्कॉट की कहानी की तुलना में कुछ ही कम गम्भीर हैं, परन्तु कुछ उससे भी बुरी हैं। इन पुरुषों और स्त्रियों से मैंने इतने वर्षों में एक गहरा सबक सीखा है, चाहे उनके यौन अपराध कितने भी बड़े क्यों न रहे हों। और वह सबक यह है कि यौन पाप कभी भी किसी के पतन की पहली सीढ़ी नहीं होता है। उस भयानक वास्तविकता को छिपाने की इच्छा हमेशा पहले से ही बनी रहती है। जब आप किसी ऐसे व्यक्ति की कहानियाँ सुनते हैं जो यौन पाप के विनाश में जकड़ा हुआ है, तो हमेशा एक ऐसा क्षण आता है जब उसने धार्मिकता के खुले उजियाले में जीने से मुँह मोड़ लिया और पाप के छल पूर्वक अन्धकार में जीने का निर्णय ले लिया है।
बुद्धिमानी इसी में है कि आप छिपाने की घातक इच्छा से मुड़कर विश्वासयोग्यता और खुलेपन में जीवन जीने की स्वतंत्रता में आगे बढ़ें। आपकी ढकने और छिपाने की इच्छा आपकी सहायता नहीं करेगी। यह आपको नष्ट कर रही है। मैं जानता हूँ कि आप अपने किए गए कार्यों और सोचे गए विचारों के विषय में बात करने में लज्जा का अनुभव करते हैं। मैं जानता हूँ कि आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ खुलकर बात करने के विचार से ही घबरा जाते हैं जिसे आप प्रेम करते हैं और जिस पर आप भरोसा भी करते हैं। मैं आपसे बुद्धि की बात सुनने के लिए अनुरोध कर रहा हूँ। स्कॉट के समान वह दिन आ रहा है जब आपके पाप भी उजागर होंगे। हर दिन जब आप खुलेआम अपने पापों का अंगीकार करने को टालते हैं, तो आप अधिक से अधिक अपराध जमा करते जा रहे होते हैं, जो अन्त में सब प्रकट हो जाएँगे। इसका अर्थ है कि यहाँ से आगे स्थिति अच्छी नहीं होगी, वरन् और भी अधिक बिगड़ती चली जाएगी। इसलिए आपको छल-कपट के साथ छिपाने की इच्छा से मुड़ना चाहिए, और अभी प्रभु से प्रार्थना करनी चाहिए, साथ ही शीघ्र किसी ऐसे व्यक्ति को ढूँढना चाहिए जिसके साथ आप इस सम्बन्ध में बात कर सकते हैं।
- वर्जित स्त्री की अभिलाषा न करें
जब आप पहले उन दो अनुरोधों का सामना करते हैं, तो आपको लग सकता है कि वे बहुत कठोर हैं। यह सोचना असम्भव सा हो सकता है कि आप अपना पाप किसी के सामने स्वीकार करें। आपको यह अकल्पनीय लग सकता है कि आप उस वर्जित स्त्री के सुन्दर आकर्षण से दूर रह सकते हैं, जो आपको अपने पास बुला रही है। मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि ऐसे अनुरोध इस अनुरोध की तुलना में कुछ भी नहीं हैं। हमें ऐसा सबसे कठिन और महत्वपूर्ण अनुरोध नीतिवचन 7:25 में मिलता है: “तेरा मन ऐसी स्त्री के मार्ग की ओर न फिरे, और उसकी डगरों में भूलकर भी न जाना।” यहाँ बाइबल सिखाती है कि हमें ऐसी वर्जित स्त्री की अभिलाषा नहीं करनी चाहिए।
बाइबल साफ रीति से बताती है कि हम सभी अपना जीवन अपने मन के द्वारा चलाए चलते है तथा निर्देश पाते हैं। इस अर्थ में, मन की भाषा का तात्पर्य उस शारीरिक अंग से संवाद करना नहीं है जो हमारे पूरे शरीर में रक्त पहुँचाता है। वरन् यह हमारे अस्तित्व के अमूर्त हिस्से की ओर संकेत करता है — अर्थात् हमारी आत्मा, जो वास्तव में हमारे भौतिक शरीर को प्रेरित करती है तथा मार्गदर्शन भी करती है। नीतिवचन 4:23 कहता है, “सबसे अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है।” इसका अर्थ यह है कि हम अपने जीवन में जो कुछ भी करते हैं, वह हमारे मन के ही द्वारा प्रेरित, निर्देशित और आरम्भ किया जाता है।
हम अपनी अमूर्त आत्मा के कार्यों को इच्छा के द्वारा पहचानते हैं। आप यह पता लगा सकते हैं कि आपके प्रत्येक कार्य के पीछे प्रेरणा क्या थी, इसके लिए आपको यह पूछना होगा कि आप क्या चाहते थे जिसके कारण आपने वह कार्य किया है। आपने इसलिए प्रार्थना की क्योंकि एक निराशाजनक स्थिति में आपको आत्मिक सामर्थ्य पाने की अत्यधिक इच्छा थी। किसी निराशाजनक स्थिति में या किसी असहमति पर अपना गुस्सा व्यक्त करने की इच्छा से आप अपने मित्र पर चिल्ला उठे। आपने वह अहंकारी टिप्पणी सोशल मीडिया पर इसलिए डाली क्योंकि आप चाहते थे कि हर कोई देखे कि आप सही हैं और जो आपके विरोध में हैं वे सब ग़लत हैं। आप समझ गए होंगे कि आप और मैं हमेशा इच्छा से प्रेरित होते हैं। नीतिवचन 7:25 में हम पढ़ते हैं कि मूर्ख लोग केवल तब ही वर्जित स्त्रियों के मार्ग में भटक जाते हैं जब वे अपने मन में उन्हें पाने की अभिलाषा करते हैं।
यह सत्य हमारी मूलभूत समस्या को प्रकट करता है। हम पापपूर्ण यौन सम्बन्ध के प्रति इसलिए लालायित और नष्ट होते हैं क्योंकि हम उसे चाहते हैं। वर्जित स्त्री का आकर्षण हम पर इसलिए प्रभाव डालता है क्योंकि हम उस स्त्री की अभिलाषा करते हैं। वर्जित स्त्री गम्भीर पाप की दोषी है, पर उसका पाप हमें ऐसा कुछ करने के लिए विवश नहीं कर सकता जिसे हम स्वयं नहीं करना चाहते हैं। याकूब 1:14 कहता है, “परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंचकर, और फँसकर परीक्षा में पड़ता है।” हम पापपूर्ण यौन सम्बन्धों में इसलिए फँस जाते हैं क्योंकि हम टूटे हुए और पापी है, हम वही चाहते हैं जिसे परमेश्वर अस्वीकार करता है और उसे अस्वीकार करते हैं जिसे परमेश्वर चाहता है।
यह सच्चाई स्थिति को पहले से भी अधिक बुरा बना देती है। वर्जित स्त्री से जुड़ी हमारी पापपूर्ण यौन सम्बन्ध की समस्या का समाधान, हमारे बाहरी स्थिति में परिवर्तन करने के द्वारा कभी भी नहीं होगा। अर्थात् केवल हमारे वातावरण में परिवर्तन करके, यौन अनैतिकता के जाल से बचने के लिए कभी भी पर्याप्त समाधान नहीं होगा। हमारे मन की अन्धेर इच्छाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन हमारे भीतर होना चाहिए।
जब हम यह समझ लेंगे कि इस परिवर्तन को कैसे करना है, तब यह मूलभूत समस्या ही हमारी मूलभूत समस्या का समाधान बन जाएगी। और बुरा समाचार यह है कि वर्जित स्त्री के प्रलोभन हम पर इसलिए प्रभाव डालते हैं क्योंकि हम वही चाहते हैं जो वह बेच रही है। परन्तु शुभ सन्देश यह है कि जब हमारे मन का परिवर्तन हो जाता है और जब हमें पापपूर्ण यौन सम्बन्धों की विनाशकारी सुख की कोई अभिलाषा नहीं रहती, तब प्रलोभन हमारे विरुद्ध निष्क्रिय हो जाते हैं और हम स्वतंत्र होकर बुद्धि, धार्मिकता और शुद्धता के साथ जीवन जी सकते हैं। वह प्रश्न जिसका हमें उत्तर देना है यह है कि हम अपने मन में परिवर्तन कैसे ला सकते हैं ताकि वह भिन्न-भिन्न अन्य कार्य की इच्छा करे? इसका उत्तर एक सीमा तक नीतिवचन में बुद्धिमान व्यक्ति की चेतावनियों को सुनने से मिलता है। जब हम सच में यह विश्वास करने लगेंगे कि वर्जित स्त्री का लालच करना विनाश का मार्ग है, तो इससे हमारी इच्छा उस स्त्री के प्रति कम हो जाएगी। परन्तु दुर्भाग्यवश, हमारी पापपूर्ण इच्छाएँ इतनी प्रबल हैं कि हमें इससे भी अधिक सहायता की आवश्यकता है। इसलिए उसी सहायता की ओर हम अपने अन्तिम भाग में आगे बढ़ेंगे।
चर्चा एवं मनन:
- नीतिवचन में यौन पाप के विषय में दिए गए इन तीन निर्देशों में से आपको कौन सा निर्देश शीघ्र ही लागू करने की आवश्यकता है?
- क्या कोई ऐसा है जिसके सामने आपको अपने पापों का अंगीकार करना चाहिए? आपके जीवन में कौन सी ऐसी अन्धकार भरी बातें हैं जिन्हें उजियाले में लाने की आवश्यकता है?
6 यीशु, बुद्धि तथा वर्जित स्त्री
नीतिवचन की पुस्तक में सम्पूर्ण बुद्धि की बातें सुलैमान की ओर से आती हैं। वह इस्राएल का बहुत बड़ा राजा था जिसे परमेश्वर ने अद्भुत स्तर की बुद्धि से संपन्न किया था: “और परमेश्वर ने सुलैमान को बुद्धि दी, और उसकी समझ बहुत ही बढ़ाई, और उसके हृदय में समुद्र तट के रेतकणों के तुल्य अनगिनत गुण दिए।और सुलैमान की बुद्धि पूर्व देश के सब निवासियों और मिस्रियों की भी बुद्धि से बढ़कर बुद्धि थी” (1 राजा 4:29-30)। परन्तु सुलैमान जितना बुद्धिमान था, उससे भी अधिक बुद्धिमान कोई और था। यीशु कहता है, “दक्षिण की रानी न्याय के दिन इस युग के लोगों के साथ उठकर उन्हें दोषी ठहराएँगी, क्योंकि वह सुलैमान का ज्ञान सुनने के लिये पृथ्वी की छोर से आई, और यहाँ वह है जो सुलैमान से भी बड़ा है” (मत्ती 12:42)। बहुत सी ऐसी सच्चाइयाँ हैं जो यीशु को सुलैमान से महान बनाती हैं।
पहला, यीशु सुलैमान की बुद्धि का स्रोत है। जब प्रेरित यूहन्ना यीशु के जगत में आने का वर्णन करता है, तो वह कहता है कि, “सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी” (यूहन्ना 1:9)। बाइबल सिखाती है कि मनुष्य पाप के कारण हुई हानि के कारण बौद्धिक रूप से अज्ञानी हो चुके हैं (इफिसियों 4:18)। परन्तु यीशु ही वह सच्ची ज्योति है जो हर अन्धकारमय पापी के विचारों को प्रकाशित करता है। इसका अर्थ यह है कि हम जो कुछ भी सच में जानते हैं, वह परमेश्वर के देहधारी वचन, अर्थात यीशु मसीह का वरदान है। सुलैमान इस योग्य नहीं था कि वह अपने आप ही बुद्धि प्राप्त ले, परन्तु वह परमेश्वर के पूर्व-देहधारी पुत्र के अनुग्रह से लाभान्वित हुआ था, जिसने उसे बुद्धि दी।
दूसरा, सुलैमान की बुद्धि का उद्देश्य यीशु है। प्रेरित पौलुस विश्वासियों के लिए प्रार्थना करता है कि, “उनके मनों को प्रोत्साहन मिले और वे प्रेम से आपस में गठे रहें, और वे पूरी समझ का सारा धन प्राप्त करें, और परमेश्वर पिता के भेद को अर्थात् मसीह को पहचान लें।जिसमें बुद्धि और ज्ञान के सारे भण्डार छिपे हुए हैं” (कुलुस्सियों 2:2-3)। इस अनुच्छेद से एक महत्वपूर्ण शिक्षा यह मिलती है कि सारा ज्ञान यीशु में अपना उद्देश्य पाता है, जिसका अर्थ है कि सारा सच्चा ज्ञान अंततः उसी की ओर जाता है जो परमेश्वर का ज्ञान है (1 कुरिन्थियों 1:30)। यदि बुद्धि यीशु की शिक्षाओं के अनुरूप नहीं है, तो वह बुद्धि ही नहीं है। क्योंकि यीशु समस्त बुद्धि का स्रोत है, इसका अर्थ है कि हम अंततः यीशु के व्यक्तिगत ज्ञान के द्वारा ही उस बुद्धि को प्राप्त करेंगे।
तीसरा, यीशु ने उस बुद्धि का पूर्ण रूप से पालन किया जो सुलैमान नहीं कर सका। सुलैमान वास्तव में एक बुद्धिमान व्यक्ति था। परन्तु उसके स्वयं के हृदय में पाप के दाग ने उसे अपनी ही सलाह को मानने की योग्यता पर एक सीमा निर्धारित कर दी। नहेम्याह 13:26 कहता है, “क्या इस्राएल का राजा सुलैमान इसी प्रकार के पाप में न फँसा था? बहुतेरी जातियों में उसके तुल्य कोई राजा नहीं हुआ, और वह अपने परमेश्वर का प्रिय भी था, और परमेश्वर ने उसे सारे इस्राएल के ऊपर राजा नियुक्त किया; परन्तु उसको भी अन्यजाति स्त्रियों ने पाप में फँसाया।” जिस व्यक्ति की बुद्धि हमने इस अध्याय में देखी, वह वर्जित स्त्री के विषय में अपनी ही सलाह से भटक गया, परन्तु यीशु का जीवन पूरी रीते से पाप रहित था और इसी से पहचाना जाता है, “क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुःखी न हो सके; वरन् वह सब बातों में हमारे समान परखा तो गया, तो भी निष्पाप निकला” (इब्रानियों 4:15)।
चौथा, यीशु हमारे भीतर वही बुद्धि उत्पन्न करता है जिसका वर्णन सुलैमान करता है। सुलैमान के वचन बुद्धि से परिपूर्ण हैं क्योंकि वह वर्जित स्त्रियों के खतरों का सही वर्णन करता है और हमें उनके प्रलोभनों से दूर भागने का दृढ़तापूर्वक आग्रह करता है। परन्तु हम पापी हैं, इसलिए हमारे कठोर मन में इन धार्मिकता के वचनों का पालन करने की सामर्थ्य नहीं है। पाप हमें ऐसी वस्तुएँ पाने के लिए विवश करता है जिनकी हमें अभिलाषा नहीं करनी चाहिए, और साथ ही पाप हमें परमेश्वर की सच्चाई का पालन करने के विपरीत उसकी आज्ञा का उल्लंघन करने का साहस देता है: “…वरन् बिना व्यवस्था के मैं पाप को नहीं पहचानता व्यवस्था यदि न कहती, “लालच मत कर” तो मैं लालच को न जानता। परन्तु पाप ने अवसर पा कर आज्ञा के द्वारा मुझ में सब प्रकार का लालच उत्पन्न किया…” (रोमियों 7:7-8)। परन्तु यीशु वह किया, जो व्यवस्था न कर सकी और हमें उसके जीवन, मृत्यु और पुनरुत्थान पर विश्वास करने के द्वारा सत्य का पालन करने की सामर्थ्य देता है (रोमियों 8:3-4)। हमारे पापी हृदयों के विषय में बुरा समाचार यह है कि हम स्वयं सुलैमान की बुद्धि का पालन नहीं कर सकते हैं। और यीशु के विषय में सुसमाचार यह है कि उसका सामर्थी अनुग्रह हमें बुद्धि का पालन करने और उसमें बुद्धिमान बनने के लिए तैयार करता है: “अब शान्तिदाता परमेश्वर जो हमारे प्रभु यीशु को जो भेड़ों का महान रखवाला है सनातन वाचा के लहू के गुण से मरे हुओं में से जिलाकर ले आया, तुम्हें हर एक भली बात में सिद्ध करे, जिससे तुम उसकी इच्छा पूरी करो, और जो कुछ उसको भाता है, उसे यीशु मसीह के द्वारा हम में पूरा करे, उसकी महिमा युगानुयुग होती रहे” (इब्रानियों 13:20-21)।
इसका अर्थ यह है कि यदि आप बुद्धि और पवित्रता में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो आपको सुलैमान के द्वारा बताए गए बुद्धि के वचनों से अधिक सीखने की आवश्यकता है। आपको उद्धारकर्ता, यीशु की आवश्यकता है, जिसकी ओर सुलैमान संकेत करता है। यीशु बुद्धि का साक्षात् रूप है। वह सिद्ध धार्मिकता है जो उस नैतिक शुद्धता को प्राप्त करती है जो आप कभी प्राप्त नहीं कर सकते। वह पाप के लिए सिद्ध बलिदान है जो क्रूस पर बहाए गए अपने लहू के द्वारा आपको आपके अपराधों से शुद्ध करता है। उसकी पुनरुत्थान की सामर्थ्य आपको पापमय यौन भ्रष्टता से धार्मिकता की ओर बढ़ने के लिए योग्य बनाती है। अतः यदि आप बुद्धिमान और पवित्र बनना चाहते हैं तथा कामुकता और अश्लीलता के द्वारा जो मृत्यु और विनाश आता है उससे बचना चाहते हैं, तो आपको यीशु पर विश्वास करना होगा। जितना अधिक आप उस पर विश्वास करेंगे, उतना अधिक आप पवित्रता में बढ़ते चले जाएँगे।
अच्छा होता, यदि मैं यह कह पाता कि स्कॉट की कहानी का सुखद अन्त हुआ, परन्तु ऐसा नहीं हुआ। उस तूफ़ानी रात में वह एक कठिन स्थिति से बच निकलने में सफल रहा, और उसने जेस से प्रतिज्ञा की कि वह अब अच्छा करेगा, और अंततः उसने जेस के साथ परामर्श लेना आरम्भ किया। मैं उनके विषय में तब जान पाया जब वे सहायता लेने के लिए मेरे पास आए थे। परामर्श के आरम्भिक सप्ताह आशाजनक लगे क्योंकि स्कॉट ने स्पष्ट रूप से अपने पाप को स्वीकार कर लिया था, और जेस अपनी समस्याओं का समाधान करने के लिए उसके साथ रहने को तैयार थी। यद्यपि लम्बे समय तक स्कॉट परिवर्तन करने के लिए तैयार नहीं था। इसलिए वह अन्त तक अपने दोहरे जीवन की चाल से कभी नहीं मुड़ा और न ही उन वर्जित स्त्रियों से फिरा, जो उसे बहुत आनन्द देती थीं। अन्त में उसने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया, अपने परिवार को छोड़ दिया, और अब अकेले ही बुढ़ापे के दिन झेल रहा है, और उन सभी से दूर है जो कभी उसके जानने वाले थे।
स्कॉट की कहानी एक सच्ची घटना है जो नीतिवचन की बुद्धि को दर्शाती है। यह कितना भी दुखद क्यों न हो, परन्तु मैं प्रार्थना करता हूँ कि आप उसकी कहानी सुनेंगे और उन प्राचीन वचनों को भी सुनेंगे जो स्कॉट के द्वारा विनाश का मार्ग चुनने से सदियों पहले जीवन के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। इससे भी बढ़कर, मैं प्रार्थना करता हूँ कि आप वर्जित स्त्री से भागकर यीशु की शरण में चले जाएँ जो आपसे प्रेम करता है, आपके लिए मरा, आपके लिए प्रार्थना करता है, और जब आप उस पर भरोसा करते हैं तो वह आपको अपनी शुद्धता प्रदान करता है।
चर्चा एवं मनन:
- जब यौन पाप की बात आती है तो सच्चे हृदय परिवर्तन के लिए यीशु ही हमारी एकमात्र आशा क्यों है?
- यौन पाप के प्रलोभन से लड़ने के लिए उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करने तथा प्रोत्साहन पाने के लिए आप किस से सम्पर्क कर सकते हैं?
हीथ लैम्बर्ट जैक्सनविले, फ्लोरिडा में फर्स्ट बैपटिस्ट चर्च के वरिष्ठ पास्टर हैं। वह लुइसविले, केंटकी में द सदर्न बैपटिस्ट थियोलॉजिकल सेमिनरी में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में भी कार्य करते हैं, और पूर्व में एसोसिएशन ऑफ सर्टिफाइड बाइबल काउंसलर्स के कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्य कर चुके हैं। वह कई पुस्तकों के लेखक भी हैं, जिनमें फाइनली फ्री और द ग्रेट लव ऑफ गॉड भी सम्मिलित हैं।