#22 बुलाहट: कार्यस्थल पर परमेश्वर की महिमा करने के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका

By स्टीफन जे. निकोल्स

परिचय

दो बिलकुल अलग समूहों के लोगों के पास, जो कि सोलहवीं शताब्दी के सुधारक और देशी-संगीत के गायक हैं, काम के बारे में कहने के लिए कुछ अत्यन्त रोचक बातें हैं। सन् 1980 में आया डॉली पार्टन का गीत और फिल्म “9 से 5” को कौन भूल सकता है? उस गीत के बोलों में, वह बस एक बेहतर जीवन के सपने देख सकती है। अभी के लिए वह बस दिन-रात-आने-जाने के काम का रोना रोती है। आज 9 से 5 है, कल 9 से 5 है, और 9 से 5 वाले दिनों के आगे सप्ताह, महीने, वर्ष और दशक हैं। और इतने प्रयास के बावजूद, पार्टन इस बात का रोना रोती है कि वह “कठिनाई से गुजारा कर पा रही है।”

 

या फिर एलन जैक्सन का गीत “अच्छा समय” है। आप उसकी आवाज में थकान को सुन सकते हैं, जब वह पीड़ा से भरकर कहता है कि, “काम, काम, पूरे सप्ताह काम।” सप्ताह का अन्त ही उसके लिए एकमात्र चमकता हुआ उजियाला है। काम से मुक्ति, मालिक से मुक्ति, समय की घड़ी से मुक्ति इत्यादि। जब शुक्रवार को काम छोड़ने का समय होता है, तो वह एक “अच्छा समय” बिता सकता है। वह इसके लिए इतना तरसता है कि वह “अच्छा” और “समय” शब्दों का संधि विच्छेद भी करता है।

 

जब से काम हो रहा है, तब से काम के गीत भी आते रहते हैं। दास आत्मिक गीतों में काम की कठिनाइयों के बारे में गाते थे। बीसवीं शताब्दी के मोड़ पर, रेलवे के काम करने वाले दल या कपास चुनने वाले बटाईदार क्रूर और निर्मम परिस्थितियों से बचने के साधन के रूप में एक-दूसरे के लिए “काम के नारे” गाकर समय बिताते थे। और वह धुन आज भी जारी है। न केवल देशी संगीत में, बल्कि अमेरिकी संगीत की लगभग सभी अन्य शैलियों में, काम को बुरा माना जाता है।

 

सप्ताहों के अन्त में आने वाली अस्थायी राहत, छुट्टियों के अनमोल और बहुत कम सप्ताह, तथा सेवानिवृत्ति के क्षणभंगुर वर्षों के साथ कार्य के सप्ताह को तो सहना ही पड़ता है। हममें से बहुत कम लोग काम में संतुष्टि पाते हैं, गरिमा की तो बात ही छोड़ दें।

 

पिछले कुछ वर्षों में काम करना और अधिक जटिल हो गया है। कोविड ने काम करने के मामले में सब कुछ बदल दिया। सन् 2020 की वसंत ऋतु में, सब कुछ रुक गया और कई लोगों के लिए, काम रुक गया। पर कुछ व्यवसाय फिर से चल पड़े। अन्य विलुप्त हो गए। कुछ अभी भी अपने पाँव जमाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दूरस्थ कार्य आया, और इसके साथ जीवन की लय एवं अनुभवों के लिए अधिक उपलब्ध होने की एक नयी प्रसन्नता मिली। कार्य और जीवन के संतुलन का प्रश्न पहले जैसा मार्मिक नहीं रहा। कुछ लोगों ने हमेशा के लिए 40-50 घण्टे के कार्य सप्ताह से दूरी बना ली है।

 

कुछ और भी घटित हुआ। नये और उभरते हुए कार्यबल, अर्थात् 18-28 वर्ष के युवाओं को एक डरावने नये संसार का सामना करना पड़ा। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भविष्य के रोजगार और आर्थिक सम्भावनाओं को लेकर भारी निराशा का समाचार दिया है। इस आयु वर्ग के एक बड़े हिस्से का मानना है कि वे आर्थिक रूप से अपने माता-पिता से बेहतर नहीं कर पाएँगे। कई पीढ़ियों से पश्चिमी संस्कृति की पहचान रही उन्नति की आशा, उभरते हुए लोगों की दृष्टि में धूमिल होती जा रही है। यह सारी निराशा अपने साथ अभूतपूर्व स्तर की चिन्ता, अवसाद और मानसिक बीमारियों का एक दु: खद सिलसिला लेकर आती है।

 

और फिर आता है ए.आई., जो सफेद कॉलर वाली नौकरियों के संसार के साथ वही करने का जोखिम उत्पन्न करता है, जो मशीनों और रोबोटों ने नीली कॉलर वाली नौकरियों के साथ किया था।

 

जब इस नये संसार के और भी डरावने गलियारे अपने आप को प्रकट करते हैं, तो हर दिन हमें और भी भयावह समाचार सुनने को मिलते हैं। मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप में क्षेत्रीय युद्धों का कोई अन्त दिखाई नहीं देता। क्या कोई आर्थिक पतन आने वाला है? क्या हम अमेरिकी साम्राज्य के धूमिल हो जाने के गवाह हैं?

 

परन्तु देशी गायकों, कोविड के बाद की बेचैनी, भयावह आर्थिक और राजनीतिक पूर्वानुमानों, और अगली बड़ी तकनीकी खोज के लगातार बदलते परिदृश्य के साथ, एक विचित्र और अप्रत्याशित समूह भी खड़ा हुआ है, जिसके पास काम के विषय पर कहने के लिए कुछ है। यह समूह सोलहवीं शताब्दी के प्रोटेस्टेंट सुधारकों का है। मानो या न मानो, उनके पास काम के बारे में कहने के लिए बहुत कुछ है। असल में, वे काम के लिए एक अलग शब्द पसन्द करते हैं। वे इसे वोकेशन कहते हैं। इस शब्द का अर्थ है “बुलाहट”, जो तुरन्त ही काम की अवधारणा को उद्देश्य, अर्थ, पूर्णता, गरिमा, और यहाँ तक कि संतोष और प्रसन्नता से भर देता है।

 

क्या आप निराशा, अवसाद, चिन्ता, या फिर अव्यवस्था से ग्रस्त हैं? तो बुलाहट की ओर जाएँ। जैसा कि यह क्षेत्रीय मार्गदर्शिका प्रदर्शित करेगी, मसीहियों को काम के बारे में एक क्रांतिकारी, एक परिवर्तनकारी तरीके से सोचने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। हमें अभी भी वेतन के भुगतानों और आर्थिक रुझानों और पूर्वानुमानों की चिन्ता करने की आवश्यकता है, परन्तु हम उस तूफानी समुद्र का सामना करने के लिए जिसमें हम सभी को फेंक दिया गया है, एक लंगर ढूँढ़ सकते हैं।

 

सुधारकों के हाथों में, काम का रूपांतरण होता है, या उसे उस स्थान और स्थिति में फिर से आकार दिया जाता है, जहाँ परमेश्वर ने उसके होने की मंशा की थी।

 

काम से सम्बन्धित सांस्कृतिक माहौल को देखते हुए, उस पर कुछ ऐतिहासिक, ईश-वैज्ञानिक और बाइबल आधारित चिन्तन हमारे लिए उपयोगी होंगे। घण्टों, सप्ताहों, महीनों और वर्षों को जोड़िए। काम हमारे जीवनों का सबसे बड़ा हिस्सा है। शुभ समाचार यह है कि: जब काम की बात आती है, तो परमेश्वर ने हमें अंधियारे में नहीं छोड़ा है। उसने हमें अपने वचन के पन्नों में बहुत कुछ सिखाया है।

 

जब काम की बात आती है, तो कई लोगों के लिए, डॉली पार्टन की यह पंक्ति बिलकुल सच साबित होती है कि हम “मालिक की सीढ़ी पर बस एक पायदान पर हैं।” यह कितनी दु: खद बात है, जब भजनकार की एक पंक्ति एक बिलकुल अलग धारणा की घोषणा करती है: “हमारे परमेश्वर यहोवा की मनोहरता हम पर प्रकट हो, तू हमारे हाथों का काम हमारे लिए दृढ़ कर, हमारे हाथों के काम को दृढ़ कर” (भज. 90:17)। कल्पना करें कि जिस परमेश्वर ने सभी वस्तुओं की रचना की है, वह हमारे निर्बल हाथों के काम की बहुत चिन्ता करता है।

 

यह उस कार्य का दर्शन है, जिसे हम सभी चाहते हैं। हम सभी काम करते हुए परमेश्वर की महिमा करना चाहते हैं — और केवल काम से छुट्टी के समय परमेश्वर की महिमा करने के लिए काम को एक साधन के रूप में उपयोग करना नहीं चाहते हैं। और ऐसा होना सम्भव है।

 

अब लातीनी भाषा के पाठ का समय है। जैसा कि बताया गया है, अंग्रेजी भाषा का शब्द “वोकेशन” (vocation) लातीनी भाषा के शब्द “वोकाटियो” या क्रिया रूप में “वोकेरे” से आया है। इसके मूल का अर्थ “बुलाहट” है। ऐसा प्रतीत होता है कि विलियम टिंडेल ने बाइबल के अपने अंग्रेजी भाषा के अनुवाद में पहली बार इस शब्द का अंग्रेजी भाषा में उपयोग किया था। टिंडेल ने बस लातीनी भाषा के शब्द को सीधे-सीधे अंग्रेजी भाषा में ला दिया।

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