#46 परमेश्वर की शान्ति और उसे कैसे पाएँ

By Dominic Avila

परिचय: वह शान्ति जिसकी आप खोज करते हैं

 

कल्पना करें कि कोई स्वर्ग नहीं होता

यह सोचना आसान है यदि आप प्रयास करें

हमारे नीचे कोई नरक नहीं

हमारे ऊपर केवल आकाश

कल्पना करें सभी लोग

आज के लिए जीवन जीते हुए. . .

कल्पना करें कि कोई देश न होते

यह सोचना कठिन नहीं है

न मारने को कुछ, न मरने को

और कोई धर्म भी नहीं

कल्पना करें सभी लोग

शान्ति से जीवन जीते हुए. . .

आप कह सकते हैं कि मैं एक स्वप्नदर्शी हूँ

परन्तु मैं अकेला नहीं हूँ. . .

मार्च 1971 में, वियतनाम युद्ध की उथल-पुथल के बीच, जॉन लेनन नाम के एक व्यक्ति ने बैठकर एक गीत लिखा, जिसमें सभी लोगों को एक ऐसे जीवन की “कल्पना” करने को कहा गया जिसमें “न मारने को कुछ हो न मरने को।” वह शान्ति के लिए एक “विज्ञापन अभियान” था। वह और उसकी पत्नी योको युद्ध से निराश होकर एक ऐसे संसार की “कल्पना” कर रहे थे जिसमें धर्म, संपत्ति और सीमाएँ न हों। उसने कहा कि उसका गीत “व्यावहारिक रूप से द कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो” है और वह मानता था कि इससे शान्ति बढ़ेगी और संसार एक हो सकेगा।

शान्ति, यह साठ और सत्तर के दशक के हर हिप्पी का जुनून थी, परन्तु वे अकेले नहीं थे। जॉन ने यह बात ठीक से समझी। हर पीढ़ी और हर व्यक्ति शान्ति की लालसा रखता है। कोई राजनीतिक संघर्ष और युद्ध से मुक्त जीवन चाहता है। कोई पीड़ित अंतरात्मा से छुटकारा चाहता है। कोई अपने व्यक्तिगत संबंधों में शान्ति चाहता है। हम सब शान्ति चाहते हैं और उसे पाने का प्रयास करते हैं, परन्तु स्थायी शान्ति अक्सर हमारे हाथ नहीं आती है।

ऐसा क्यों है? सम्भवतः इसलिए कि इसके असंख्य नकली रूप संसार में मौजूद हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि शान्ति धन से मिलती है। कुछ लोग लोगों को प्रसन्न करने की आदत में लग जाते हैं। और कुछ सच्चाई को दबाते हुए अपने-आपको व्यस्त रखते हैं, या समाप्त न होने वाले मनोरंजन में डूबे रहते हैं, यह आशा करते हुए कि भटकाव ही शान्ति दे देगा।

अन्ततः, नकली शान्ति कभी तृप्त नहीं करती है। यह अपनी प्यास बुझाने के लिए खारा पानी पीने के जैसा है: अर्थात् जितना अधिक आप इसे पीते हैं, उतनी ही अधिक प्यास लगती है। नकली शान्ति की मूल त्रुटि उसकी परिभाषा में ही छिपी है। सभी शब्दकोश शान्ति को केवल ‘परेशानी का न होना’ बताते हैं। यदि युद्ध नहीं है, विवाह में कलह नहीं है, नौकरी सुरक्षित है, परिवार स्वस्थ है, बिल चुकाए जा चुके हैं, तो संसार इसे “शान्ति” कहता है। किन्तु ऐसी शान्ति मुसीबत आते ही बिखर जाती है। नकली शान्ति केवल एक मृगतृष्णा है।

धन्यवाद हो कि परमेश्वर ने हमें सच्ची शान्ति की एक बिल्कुल भिन्न परिभाषा दी है। उसकी शान्ति परेशानी की अनुपस्थिति नहीं है; यह परेशानी के बीच में उसकी सामर्थी, शांत उपस्थिति है। यूहन्ना 16:33 में यीशु ने कहा, “मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कहीं हैं कि तुम्हें मुझ में शान्ति मिले। संसार में तुम्हें क्लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बाँधो, मैं ने संसार को जीत लिया है।” परमेश्वर की शान्ति कोई भावनात्मक अनुभूति नहीं है जिसका आप पीछा करें परन्तु यह एक व्यक्ति है जिस पर आप भरोसा रखते हैं।

अब उन नकली बातों को हटाने का समय है, परमेश्वर की चिरस्थायी शान्ति को ग्रहण करने का समय है, और उसकी अनन्त उपस्थिति के आनन्द का अनुभव करने का समय है। जिस शान्ति की आप लालसा करते हैं, वह आपके द्वारा परिस्थितियों को नियंत्रित करने से नहीं मिलती है, परन्तु वह उस परमेश्वर के प्रति समर्पण में मिलती है जो सब कुछ नियंत्रित करता है और अपनी सिद्ध शान्ति आपसे बाँटना चाहता है। आइए हम आरम्भ करें।

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