#12 पुरुषों की तरह व्यवहार करें

By रिचर्ड फिलिप्स

परिचय: आसानी से खो जाने वाली बहुमूल्य वस्तुएँ

यह मेरे लिए यह बात उल्लेखनीय है कि बहुमूल्य वस्तुएँ कितनी आसानी से खो सकती हैं। एक व्यक्ति अपने भोलेपन, ईमानदारी या अच्छी प्रतिष्ठा जैसी मूल्यवान सम्पत्तियाँ बहुत जल्दी खो सकता है। कलीसिया भी बहुमूल्य वस्तुएँ खो सकती है, और आज के समय में ऐसा होता हुआ दिख रहा है। एक आदर्श जो शायद हम खो रहे हैं, वह एक मजबूत, बाइबल आधारित और आत्म-विश्वासी मसीही पुरुषत्व है। इस बात को अधिक समय नहीं हुआ है, जब अमेरिकी पुरुषों से कहा गया था कि वे अपने “स्त्री पक्ष” से जुड़ें (मेरे वाले पक्ष का नाम शेरोन है), और इसी सांस्कृतिक मूर्खता के कारण एक धर्मी पुरुष, एक प्रेम करने वाले पति, एक अच्छे पिता और एक विश्वासयोग्य मित्र होने के अर्थ को लेकर मिथ्याबोध उत्पन्न हुए हैं।

 

मुझे इस बात में थोड़ा सन्देह है कि आज के समय के पुरुषत्व की समस्या आंशिक रूप से धर्मनिरपेक्ष संस्कृति की एक व्यापक समस्या से उत्पन्न होती है। आज के समय में बहुत सारे जवान अपने पिता के बिना बड़े होते हैं — या ऐसे पिता के साथ बड़े होते हैं, जो अपने पुत्रों के साथ ठीक से जुड़ नहीं पाता — अर्थात् पुरुषत्व को लेकर भ्रम होना बाध्यकारी है। धर्मनिरपेक्ष मीडिया हम सभी पर पुरुषत्व-स्त्रीत्व की ऐसी छवियों और नमूनों की बौछार करता है, जो पूरी तरह से बनावटी हैं। इस बीच, बढ़ती हुई संख्या में सुसमाचार प्रचार करने वाली कलीसियाओं में, स्त्री-केन्द्रित आत्मिकता के सामने मजबूत और धर्मी पुरुषों की उपस्थिति कम होती दिख रही है। हमारे आधुनिक पश्चिमी समाज के बाद वाली समृद्धि में, पुरुष अब जीवित रहने के लिए उस तरह के संघर्ष में शामिल नहीं होते, जो पहले लड़कों को पुरुष बनाता था। फिर भी, हमारे परिवारों और कलीसियाओं को मजबूत, पौरुष वाले मसीही पुरुषों की उतनी ही — या उससे भी अधिक — आवश्यकता है, जितनी पहले कभी नहीं थी। अत: हम अपने खतरे में पड़े पुरुषत्व को फिर से जीवित या फिर से प्राप्त कैसे कर सकते हैं? हमेशा की तरह, इसे आरम्भ करने का पड़ाव परमेश्वर का वचन है, जिसमें इस बात का मजबूत दृष्टिकोण और स्पष्ट शिक्षा मिलती है कि न केवल पुरुष होने का, बल्कि परमेश्वर का जन होने का क्या अर्थ है।

 

इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका का उद्देश्य इस बारे में सीधी, स्पष्ट और सटीक शिक्षा प्रदान करना है कि पुरुष होने के रूप में बाइबल पुरुषों से क्या कहती है। हमारे लिए ऐसा मसीही पुरुष बनने का क्या अर्थ है, जो हम बनना चाहते हैं, जिसकी हमारे परिवारों को आवश्यकता है कि हम वैसे बनें, और जैसा परमेश्वर ने मसीह में बनने के लिए हमें बनाया और छुड़ाया है? इसके बाइबल आधारित उत्तर बहुत ही सरल हैं, फिर भी आसान होने से बहुत दूर हैं। मैं आशा करता हूँ कि इस अध्ययन के माध्यम से, आप प्रबुद्ध एवं प्रोत्साहित होंगे और इसके परिणामस्वरूप, उन लोगों को भरपूर आशीष मिलेगी, जो आपके जीवन में पाए जाते हैं।

 

आगे जो लिखा है, वह हमें याद दिलाता है कि मनुष्य होने के रूप में हमारी पहली प्राथमिकता उस परमेश्वर के साथ हमारा वह रिश्ता है, जिसने हमें बनाया है। उसके बाद, सृष्टि में परमेश्वर की रचना से आगे बढ़ते हुए, हम बाइबल के तीन महत्वपूर्ण सिद्धान्तों पर ध्यान देते हैं। अन्त में, हम इन सिद्धान्तों को उन मुख्य रिश्तों पर लागू करेंगे, जिसे परमेश्वर मनुष्यों को प्रदान करता है।

 

पहली प्राथमिकता: परमेश्वर के साथ आपका रिश्ता महत्वपूर्ण है

हमें आरम्भ से ही यह स्पष्ट कर लेना चाहिए कि कोई भी पुरुष सच्चे पौरुष के लिए बाइबल की बुलाहट को तभी पूरा कर पाएगा, जब वह परमेश्वर के साथ अपने रिश्ते की आशीषों में होकर ही जीवन बिताएगा। पुरुषों के बारे में बाइबल आधारित दृष्टिकोण हमारे सृष्टिकर्ता के रूप में परमेश्वर के साथ आरम्भ होता है: “परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया” (उत्प. 1:27)। परमेश्वर ने स्त्री-पुरुषों को समान हैसियत और महत्व, परन्तु अलग-अलग रचनाओं और बुलाहटों के साथ बनाया था। परन्तु परमेश्वर को जानना और उसकी महिमा करना ही स्त्री-पुरुष दोनों की सर्वोच्च बुलाहट है।

 

जिस तरह से परमेश्वर ने हमें बनाया है, उसमें हम परमेश्वर और मानवजाति के बीच के विशेष रिश्ते को देख सकते हैं। मनुष्य को बनाने से पहले, अपने वचन मात्र से ही परमेश्वर वस्तुओं को अस्तित्व में लाया। परन्तु मनुष्य की रचना में, परमेश्वर ने व्यक्तिगत् निवेश का प्रदर्शन किया: “तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा, और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूँक दिया; और आदम जीवित प्राणी बन गया” (उत्प. 2:7)। यहोवा ने अपने हाथों से मनुष्य को रचा और प्रेम के आमने-सामने वाले रिश्ते के लिए उसकी रचना की। मनुष्य की रचना का वाचा वाला यह स्वभाव आपको बताता है कि परमेश्वर आपको जानना चाहता है और वह चाहता है कि आप उसे जानें। परमेश्वर आपके साथ एक व्यक्तिगत् सम्बन्ध रखना चाहता है। जिस प्रकार परमेश्वर ने प्रथम मनुष्य में जीवन “फूँक दिया”, ठीक उसी प्रकार मसीही लोग परमेश्वर के पवित्र आत्मा के निवास का अनुभव करते हैं, जो हमें उसकी धार्मिकता में होकर जीवन बिताने में सक्षम बनाता है। परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप में बनाया, कि वह पृथ्वी पर उसकी महिमा का विस्तार करे और उसकी आराधना करे। आज के समय में कुछ पुरुष आराधना को ऐसा कुछ मानते हैं, जिसे करने में एक वास्तविक व्यक्ति उत्साहित नहीं होता। हालाँकि, परमेश्वर को जानना और उसकी महिमा करना किसी भी पुरुष की सर्वोच्च बुलाहट और सौभाग्य है।

 

इस मामले में, बाइबल आधारित पुरुषत्व पर किसी भी चर्चा के लिए पहली प्राथमिकता यह है कि हम स्वयं को परमेश्वर के वचन — बाइबल — के दैनिक अध्ययन और प्रार्थना के लिए समर्पित करें। जिस प्रकार परमेश्वर का प्रकाश आदम के मुख पर चमका, ठीक उसी प्रकार परमेश्वर का वचन वह प्रकाश है, जिसके द्वारा हम उसे जानते हैं और उसकी आशीष का आनन्द मनाते हैं (भज. 119:105)।

 

प्रथम मनुष्य की रचना के तुरन्त बाद, परमेश्वर ने आदम को काम पर लगा दिया: “और यहोवा परमेश्वर ने पूर्व की ओर अदन में एक वाटिका लगाई, और वहाँ आदम को जिसे उसने रचा था, रख दिया” (उत्प. 2:8)। आरम्भ से ही, मनुष्यों को यहोवा की सेवा में फलदायी रहना था। वैसे भी, अधिकांश मनुष्यों से सबसे पहला प्रश्न क्या पूछा जाता है? “आप क्या काम करते हैं?” मनुष्य और उसके काम के बीच यह पहचान बाइबल के चित्रण के अनुरूप है। मनुष्यों को परमेश्वर को जानने, उसकी आराधना करने, और अपने काम में उसकी सेवा करने के लिए रचा गया था। इसी कारण परमेश्वर ने आदम और हव्वा को आज्ञा दी: “फूलो–फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुद्र की मछलियों, तथा आकाश के पक्षियों, और पृथ्वी पर रेंगने वाले सब जन्तुओं पर अधिकार रखो” (उत्प. 1:28)।

 

उत्पत्ति की पुस्तक के आरम्भिक अध्यायों से हम मसीही पुरुषत्व के बारे में जो सीखते हैं, आइए उसे सारांशित करें:

 

  1. परमेश्वर ने मनुष्य की रचना की, जिसका अर्थ है कि उसे हमें यह बताने का अधिकार है कि हमें क्या करना है।
  2. हमें परमेश्वर के साथ एक रिश्ते के लिए बनाया गया था। इस कारण सच्चा पुरुषत्व परमेश्वर और उसके तरीकों के हमारे ज्ञान से प्रवाहित होता है।
  3. परमेश्वर ने अपना आत्मा हमारे भीतर रखा है, जिससे कि हम उसकी महिमा और आराधना करने के लिए जीवन बिता सकें।
  4. परमेश्वर ने पहले मनुष्य को तुरन्त काम करने के लिए नियुक्त किया, जो यह दर्शाता है कि मसीही पुरुषों को कड़ा परिश्रम करना है और फलदायी होना है।

 

हमें बाइबल की सृष्टि सम्बन्धी शिक्षा के बारे में इस बात को ध्यान में रखे बिना कभी बात नहीं करनी चाहिए कि पहला मनुष्य परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन करके पाप में गिर गया था (उत्प. 3:1-6)। उसके परिणामस्वरूप, हम सब के सब पापी हैं, जो परमेश्वर की सृष्टि की योजना से रहित हो गए हैं (रोमि. 3:23; 5:19)। इसी कारण से परमेश्वर ने अपने पुत्र, यीशु मसीह को हमें पाप से बचाने के लिए भेजा कि हमारे स्थान पर मरे और हमें नया जीवन देने के लिए मरे हुओं में से जी उठे। मसीही पुरुष न केवल परमेश्वर की सृष्टि की योजना के अनुसार, बल्कि परमेश्वर के उद्धारक अनुग्रह के द्वारा भी जीवन बिताते हैं। हालाँकि, हमें यह समझना चाहिए कि परमेश्वर की महिमा और हमारी अपनी आशीष के लिए उत्पत्ति के आरम्भिक अध्यायों में प्रकट की गई योजना को पूरा करने के लिए मसीह हमें उद्धार देता है। पापियों के रूप में, परमेश्वर के साथ हमारा रिश्ता उसके पुत्र, यीशु मसीह के माध्यम से है, जो हमें पाप से छुड़ाने वाला अनुग्रह के द्वारा है और जो हमें परमेश्वर के वचन का पालन करने में सक्षम बनाता है।

 

पुरुषों के रूप में इसी पहली प्राथमिकता से विश्वासयोग्यता के लिए महत्वपूर्ण सिद्धान्त निकलते हैं।

ऑडियो मार्गदर्शिका

ऑडियो ऑडियो
album-art

00:00

#12 पुरुषों की तरह व्यवहार करें

हमारे समाचार पत्र की सदस्यता लें और साप्ताहिक बाइबल और शिष्यत्व सुझाव प्राप्त करें।