#32 अग्नि-परीक्षा का सामना करना

By द्वारा Derek Thomas

परिचय: अग्नि परीक्षाएँ

मेरी पहली कलीसिया की मण्डली में, जहाँ मैं पास्टर का कार्य करता था, एक स्त्री ने एक ऐसी बच्ची को जन्म दिया, जिसे एक बहुत ही कम देखी जाने वाली, आनुवांशिक बीमारी, ट्यूबरस स्कलिरोसिस थी, इससे उसके मस्तिष्क में अनेकों गाँठें बनती थीं। डॉक्टरों ने कहा कि वह जीवित तो रह पाएगी। उसका पति उन्हें छोड़ कर भाग गया और लौटकर कभी नहीं आया। वर्षों बाद, उस बच्ची की आयु बढ़ने के साथ (उसकी आयु के चालीसवें दशक में उसकी मृत्यु हुई), जब भी मैं पास्टर के रूप में उन से मिलने जाता था, उसकी माँ हमेशा मुझ से पूछती थी, “क्या आप बता सकते हैं कि मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ?” वह इस प्रश्न को कठोरता से नहीं पूछती थी। सच में, मुझे हमेशा ही उसका प्रश्न विनम्रता से पूछा गया लगा। मैं उत्तर देता, नहीं, “मुझे नहीं पता।” और वह उस उत्तर से सन्तुष्ट हो जाती, और हम अन्य बातों के बारे में बातें करते।

उसका यह प्रश्न करना उचित था। आखिरकार, उसका हर सपना चकनाचूर हुआ था। एक अग्नि परीक्षा आई, और उससे उसका जीवन उलट-पुलट हो गया। यह तथ्य कि, उस कारण के बारे में, मैं उसे उपयुक्त उत्तर नहीं दे सका, यह स्वीकार करना था कि, “गुप्त बातें हमारे परमेश्वर यहोवा के वश में हैं; परन्तु जो प्रगट की गई हैं वे सदा के लिये हमारे और हमारे वंश के वश में रहेंगी, इसलिये कि इस व्यवस्था की सब बातें पूरी की जाएँ” (व्यवस्थाविवरण 29:29)।

परीक्षाएँ भिन्न प्रकार की तथा भिन्न तीव्रता की होती हैं। परन्तु वे सभी, उसका एक भाग होती हैं जिसे हम ईश्वरीय-विधान कहते हैं: कि परमेश्वर की इच्छा के बिना कुछ भी नहीं होता है। परीक्षाएँ कभी निरुद्देश्य नहीं होती हैं। वे हमेशा परमेश्वर की आज्ञानुसार होती हैं, जिसने हम से इतना प्रेम किया कि हम पापियों को बचाने के लिये उसने हमारे स्थान पर मृत्यु सहने के लिये अपने पुत्र को भेजा। मसीही होने के नाते, हमें यह कभी नहीं सोचना चाहिये कि परीक्षाएँ दिखाती हैं कि परमेश्वर अब हम से घृणा करता है। नहीं, ऐसा कभी नहीं होता है, चाहे शैतान प्रयास करे कि हम यह मानें। और वह करेगा।

दुःख उठाने का हमेशा कोई कारण होता है, चाहे हम पूरी रीति से उस कारण को समझ न भी पाएँ। अन्ततः परीक्षाएँ इसलिये आती हैं कि हम स्वयं को परमेश्वर की दया पर छोड़ दें, और उसके आलिंगन का अनुभव करें। परीक्षाएँ हमें परिपक्व होने में सहायता करती हैं। वे हमें प्रार्थना में उसे पुकारने के लिये प्रेरित करती हैं। वे हमें दिखाती हैं कि प्रभु के बिना, हम नष्ट हो जाएँगे।

कुछ परीक्षाएँ हमारे पाप के कारण आती हैं। हम इस निष्कर्ष से बच नहीं सकते हैं। यौन विश्वासघात के कारण विवाह सम्बन्धों का टूटना और पारिवारिक सम्बन्धों में तनाव आना, पाप का परिणाम है। इसके बारे में कभी गलती नहीं करें। परन्तु कुछ परीक्षाएँ रहस्यमयी होती हैं। उदाहरण के लिये, अय्यूब को ही लीजिये। वह उस बात का उदाहरण है, जिसे हम “निरपराध दुःख उठाना” कह सकते हैं। वास्तव में अय्यूब को “क्यों” का उत्तर कभी नहीं प्रदान किया गया।

मेरा अंदाज़ा है कि, यदि आप अभी इन शब्दों को पढ़ रहे हैं, तो वह इसलिये है क्योंकि आपके जीवन में कोई परीक्षा आई है, और आपको उसे समझने के लिये सहायता चाहिये। आप को किसी सलाहकार की आवश्यकता है जो आप के पास आकर, आप से बुद्धिमानी की कुछ बातें कहे। आपको एक मित्र की आवश्यकता है जो इन परेशानियों में से आप को मार्ग दिखाये कि आप इनसे अनुग्रह में बढ़ सकें। यह क्षेत्रिय मार्गदर्शिका ठीक यही करने का प्रयास है। यह आपके सारे प्रश्नों के उत्तर तो नहीं प्रदान करेगी, परन्तु मेरी आशा है कि यह आप को वह शान्ति जो “सारी समझ से परे है” (फिलिप्पियों 4:7), प्राप्त करने में सहायता करेगी, और आप को सक्षम करेगी, कि आप पीड़ा के समय में भी, परमेश्वर की आराधना — मेरा अर्थ है कि सच्ची आराधना — कर सकें।

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