#9 अनुग्रह में बढ़ना

By कर्ट गेबहार्ड्स

परिचय

 

ऐसा कहा जाता है कि एक औसत वयस्क के पास लगभग 30,000 शब्दों की शब्दावली होती है। बाइबल मसीहियों के लिए इस संख्या में कुछ और आवश्यक शब्द जोड़ती है। हमारे ईश्वर विज्ञान की अपनी एक विशेष शब्दावली होती है — ऐसे शब्द जो सटीक और गहरे अर्थ वाले होते हैं। परन्तु ये शब्द अधिकाँश पूरी रीति से या ठीक प्रकार से समझ में नहीं आते हैं। ऐसी उपेक्षा जानबूझकर नहीं की जाती है; ये शब्द इतने सामान्य हो गए हैं कि इन पर ध्यान ही नहीं दिया जाता है। यदि हम सावधान नहीं रहे, तो हम मसीही विश्वास की मूल भाषा का उपयोग तो करेंगे, परन्तु उसकी गहराई को समझे बिना ही करेंगे। “परमेश्वर की महिमा” जैसे वाक्यांश और “सुसमाचार” तथा “पवित्रीकरण” जैसे शब्द प्रचलित शब्द बन गए हैं — जिनका नियमित रूप से उपयोग तो होता है, परन्तु बिना पर्याप्त ज्ञान या समझ के साथ। परिणामस्वरूप, इन शब्दों का अर्थ जो इतने गहरे हैं, प्रभावहीन हो सकते हैं, जिससे मसीह के प्रति हमारा भय कम हो जाता है और अंततः एक विश्वासी के रूप में हमारी आत्मिक उन्नति भी रुक जाती है। हमारी मसीही संस्कृति में इन गहरे अर्थ वाले शब्दों के साथ हम अधिकतर सार (मुख्य बात) के बजाय केवल खोखला छिलका पकड़ने का जोखिम उठाते हैं।

“अनुग्रह” शब्द इसका एक अच्छा उदाहरण है। इस शब्द को बार-बार तोड़ा-मरोड़ा गया है, और यह हमारी भाषा में किसी महिला के नाम, भोजन से पहले की गई छोटी प्रार्थना, किसी शिक्षक के द्वारा देर से किए गए कार्य के प्रति सहानुभूति हेतु पूर्ण प्रतिक्रिया, रात भर की प्रार्थना-आराधना में गाया जाने वाले गीत, या यहाँ तक कि किसी कलीसिया के नाम के रूप में बना हुआ है। और इसके अत्यधिक उपयोग के कारण हो सकता है कि इसने अपना अर्थ, अपनी शक्ति और यहाँ तक कि हमारे जीवन में अपना कार्य भी खो दिया है। सम्भवतः हम “अनुग्रह” से ऊब गए हैं क्योंकि हमने इसे गलत रूप में अपनाया है या समझा ही नहीं कि यह क्या है, यह कैसे कार्य करता है, और एक विश्वासी के जीवन में यह कितना आवश्यक है।

इफिसियों 2:8 कहता है, “क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है …” दूसरे शब्दों में, अनुग्रह किसी कोमल और दयालु परमेश्वर का केवल शान्त स्वभाव नहीं है जो उसके क्रोध को कम कर देता है, वरन् वह एक प्रभावशाली युद्ध का हथियार है जिसका उपयोग परमेश्वर ने हमारे पत्थर जैसे कठोर हृदयों को तोड़ने के लिए किया है। अनुग्रह में कुछ भी कोमल नहीं है। यह केवल हमारा उद्धार करने, परिवर्तित करने और स्वर्ग तक पहुँचाने के लिए परमेश्वर की सामर्थ्य है।

जब पत्र लिखते समय प्रेरित पौलुस ने “अनुग्रह” शब्द को समापन अभिवादन के रूप में प्रयोग किया, तो वह केवल एक औपचारिक वाक्यांश के साथ पत्र समाप्त नहीं कर रहा था। परन्तु वह अपने पाठकों को एक सामर्थ्य भरी सच्चाई के साथ छोड़ रहा था, जो उस सम्पूर्ण गहराई को दर्शाती है जिस सच्चाई पर उसने अभी-अभी प्रकाश डाला था। दूसरे शब्दों में, वह कहता है, “यदि मैं आपको अपने कहे गए सभी शब्दों का सार केवल एक या दो शब्दों में दूँ, तो वह शब्द “अनुग्रह’ ही होगा।” और यह शब्द केवल उसकी पत्रियों के अन्त में ही नहीं आया है, वरन् यह शब्द उसकी पत्रियों के ताने-बाने में सौ से भी अधिक बार बुना गया है। इसका महत्व हम से यह माँग करता है कि हम इस गौरवशाली विचार पर लगी धूल को साफ करें, और इसकी सुन्दरता को अपने मन में फिर से स्थापित करें, तथा इसे अपनी नसों में प्रवाहित होने दें ताकि यह फिर से अद्भुत बन सके।

इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका में आप सीखेंगे: 1. अनुग्रह क्या है, 2. अनुग्रह एक पापी को कैसे बचाता है, 3. अनुग्रह में बढ़ोतरी की आवश्यकता क्यों है, और 4. अनुग्रह में कैसे बढ़ें। आप समझेंगे कि अनुग्रह क्या है, जैसा कि पवित्रशास्त्र में परिभाषित किया गया है, कि यह परमेश्वर के द्वारा पापियों को उद्धार के लिए दिया गया एक वरदान है, साथ ही यह मसीही जीवन में हर समय और हर कार्य में आनन्द के साथ अनुभव किया जाता है। हर अध्याय पिछले अध्याय पर आधारित होते हुए उद्धार से लेकर उस अनुग्रह तक की यात्रा की सुन्दरता को पूरी रीति से प्रकट करता है, जो “हमें अनन्त जीवन में पहुँचाता है।”

पवित्रशास्त्र में अनुग्रह शब्द का प्रयोग कई अलग-अलग और अद्भुत तरीकों से किया गया है। उदाहरण के लिए, अनुग्रह का प्रयोग उद्धार के सम्बन्ध में किया जाता है, परन्तु यह एक विश्वासी को पवित्रता और दुखों में स्थिर बनाए रखने में भी सहभागी होता है। पवित्रशास्त्र के सावधानी पूर्वक अध्ययन करने वाले विद्यार्थी यह समझेंगे कि इसका अर्थ ईश्वर विज्ञान के अलग-अलग सन्दर्भ पर निर्भर करता है। “अनुग्रह” शब्द की व्यापकता और गहराई स्वयं परमेश्वर का एक निमंत्रण है कि हम पूरे उत्साह के साथ अनुग्रह की सम्पूर्ण समझ को प्राप्त करने के लिए प्रयास करते रहें।

फिर भी, इसके सन्दर्भ या उपयोग चाहे जैसे भी हों, परन्तु अनुग्रह परमेश्वर के अनपेक्षित अनुग्रह के रूप में कार्य करता है। यह एक रंगीन दूरबीन के समान है, अर्थात् यह विचार इस बात को दर्शाता है कि जटिल प्रणालियाँ और सूक्ष्म भिन्नताएँ अपने स्वाभाविक मूल्य और गहराई के लिए प्रशंसा के योग्य हैं। पौलुस इस बहुतायत की उदारता का वर्णन इस प्रकार करता है, “कि वह अपनी उस दया से जो मसीह यीशु में हम पर है, आनेवाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए।” (इफिसियों 2:7) यह अध्याय 1) अनुग्रह को परिभाषित करेगा, 2) यह बताएगा कि अनुग्रह परमेश्वर के स्वभाव का एक स्वाभाविक पहलू है, और 3) उन अयोग्य पापियों को दिए गए अनुग्रह की उदारता को दर्शाएगा। आइए हम अपने अध्ययन का आरम्भ परमेश्वर के अनुग्रह को परिभाषित करते हुए करें।

अनुग्रह की परिभाषा

यद्यपि परमेश्वर के सभी गुण योग्य और सुन्दर हैं, फिर भी सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र में अनुग्रह के साथ विशेषण जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे लेखकों ने पर्यायवाची शब्दों की एक पूरी सूची निकाल ली हो और अनुग्रह के गुणों की व्याख्या करने के लिए जितने शब्द मिल सके, उन्हें खोज निकाल लिया हो।

पौलुस के द्वारा परमेश्वर के अनुग्रह का उत्सव मनाने पर ध्यान दीजिए: “कि उसके उस अनुग्रह की महिमा की स्तुति हो, जिसे उसने हमें अपने प्रिय पुत्र के द्वारा सेंत-मेंत दिया। हमको मसीह में उसके लहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात् अपराधों की क्षमा, परमेश्वर के उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है, जिसे उसने सारे ज्ञान और समझ सहित हम पर बहुतायत से किया।” (इफिसियों 1:6-8) प्रशंसनीय, महिमामय, बहुतायत और भव्य — ये अनुग्रह की विशेषताओं और गुणों का वर्णन करने के लिए असाधारण शब्द हैं।

ऑडियो मार्गदर्शिका

ऑडियो ऑडियो
album-art

00:00

#9 अनुग्रह में बढ़ना

PDF PDF

विषयसूची

हमारे समाचार पत्र की सदस्यता लें और साप्ताहिक बाइबल और शिष्यत्व सुझाव प्राप्त करें।