#13 परमेश्वर की योजना के अनुसार विवाह

By द्वारा Bob Kauflin

परिचय

 

मुझे ठीक से स्मरण नहीं है कि मैं अपनी पत्नी जूली से कब मिला था। परन्तु मुझे एक क्षण स्मरण है।

यह 1972 का प्रेम दिवस था, जब हम हाई स्कूल के अन्तिम वर्ष में थे। मैंने उसे हाथ से बना हुआ एक कार्ड दिया, जिस पर लिखा हुआ था: “आनन्द वस्तुओं में नहीं होता, वह हम में होता है… और विशेष रूप से तुम में।”

यह एक मार्मिक भावना थी, जिसका उद्देश्य एक ऐसी लड़की को उत्साहित करना था जो थोड़ी अंतर्मुखी लग रही थी। उच्च कक्षा के अध्यक्ष और संगीत मण्डली के सहायक कलाकार, और (मेरे अपने विचार में) मुझे सच में पसन्द किए जाने वाले लड़के के रूप में, मैंने सोचा कि जूली मेरे द्वारा दिया गया कार्ड पाकर सम्मानित होने का अनुभव करेगी। ठीक वैसे ही जैसे शेष 16 लड़कियों ने किया जिन्हें एक-एक कार्ड मिला था।

वे लड़कियाँ प्रभावित हुईं या नहीं, यह मैं कभी नहीं जान पाऊँगा। परन्तु जूली ने वास्तव में उत्तर दिया। उसने मुझे एक लम्बा पत्र लिखा, जिसमें उसने बताया कि वह मुझे बहुत अधिक पसन्द करती है। परन्तु मेरा उद्देश्य इस कार्ड को देकर किसी गहरे सम्बन्ध की ओर बढ़ने का नहीं था। कम से कम जूली के साथ तो नहीं। इसलिए मैं उसके आसपास अटपटा व्यवहार करने लगा और एक समय तो मैंने उसके लिए एक गीत भी लिखा, जो इस प्रकार से था “तुम वही मार्ग चुनो, जिस पर तुम जाना चाहती हो।” मैं तुम्हें बहुत लम्बी-चौड़ी बात नहीं लिखना चाहता परन्तु मुख्य बात यह है कि “मुझे तुम्हारा मित्र बने रहने में कोई आपत्ति नहीं है, परन्तु तुम्हारा प्रेमी बनने में है।”

परन्तु जूली निरन्तर प्रयास करती रही और अंततः उसने मुझे मना ही लिया, इसका एक कारण यह भी था कि वह बहुत अच्छी ब्राउनी मिठाई बनाती थी और उसके पास एक कार भी थी। उन गर्मियों में हमने मिलना-जुलना आरम्भ कर दिया और शरद ऋतु में मैं टेम्पल विश्वविद्यालय चला गया, जबकि वह एक ऐसे प्रतिष्ठान में कार्य करने के लिए चली गई, जहाँ घोड़ों को प्रजनन के लिए रखा जाता है।

एक वर्ष के पश्चात् उसने भी टेंपल विश्वविद्यालय में आवेदन किया और उसे भी विश्वविद्यालय के ओर से स्वीकृति मिल गई थी। हम अभी भी आपस में मिल-जुल रहे थे, पर मुझे सन्देश था कि क्या वह “वही” जूली है। इस सन्देह के कारण मैंने धन्यवाद दिवस के दिन उसे फिल्म “द वे वी वेयर” दिखाने ले जाने के ठीक बाद उससे सम्बन्ध तोड़ दिया। जो कि एक बहुत ही उत्कृष्ट फिल्म थी।

अगले दो वर्षों में, हमारी अधिकाँश बातचीत इसी विषय पर आधारित रही कि मैं उसे प्रभु में आनन्दित रहने (तब तक हम दोनों मसीही बन चुके थे) और कहीं और प्रेम सम्बन्ध ढूँढने के लिए कहता रहा। परन्तु समय के साथ, परमेश्वर ने जूली के द्वारा मेरे गहरे और व्यापक अहंकार को उजागर किया। मैं चाहता था कि वह 10 में से 10 हो जबकि मैं स्वयं मात्र 3 के बराबर था। मुझे समझ आने लगा कि मेरे लगातार इनकार के बाद भी जूली जैसा प्रेम मुझे किसी से नहीं मिला था। कोई भी मेरे प्रति इतना अधिक विश्वासयोग्य, उत्साह देने वाला या उदार हृदय वाला नहीं था। और जब मैं प्रभु के साथ निकटता में चल रहा था, तो यह स्पष्ट प्रतीत हुआ कि मुझे उससे विवाह करना चाहिए।

अतः हमारे सम्बन्ध टूटने के दो वर्ष बाद, फिर उसी धन्यवाद दिवस के दिन मैंने जूली से विवाह के लिए पूछा। अद्भुत ढँग से उसने “हाँ” कह दिया। पाँच दशकों से भी अधिक समय के बाद, मैं पहले से कहीं अधिक आभारी हूँ कि उसने ऐसा किया।

मैं इस कहानी का आरम्भ इसलिए कर रहा हूँ ताकि यह सच्चाई सामने आ सके कि परमेश्वर निराशाजनक सम्बन्धों को अपनी महिमा के लिए परिवर्तित करना पसन्द करता है। वह हमारी कमियों, पापों, निर्बलताओं और अन्धेपन से न तो भयभीत होता है और न ही आश्चर्यचकित होता है। इसके विपरीत, उसके बुद्धिमान और प्रभुता सम्पन्न हाथों में ये सब कमियाँ वह साधन बन जाते हैं जिनके द्वारा वह अपना कार्य पूरा करता है। जिस प्रकार कोई भी विवाहित जोड़ा अपने आप में पूर्ण नहीं होता, ठीक उसी प्रकार कोई भी जोड़ा अपूरणीय नहीं होता है।

हो सकता है कि आप अविवाहित हों, या हाल ही में विवाह किया हो, या कुछ वर्ष पहले विवाह किया होगा। हो सकता है कि आप हनीमून पर रोमांच का आनन्द ले रहे हों, या पहले से ही अपने वैवाहिक सम्बन्ध को और अधिक दृढ़ करना चाहते हों। या फिर आप यह सोच रहे होंगे कि पति-पत्नी बनना उतना आसान नहीं है जितना कि बताया जाता है। सम्भवतः आप बड़ी उतावली से आशा लगाए बैठें होंगे और इधर-उधर जीवन साथी ढूँढ रहे होंगे और साथ ही यह भी सोच रहे हैं कि आप कितने समय तक सम्भले रह पाएँगे।

आप किसी भी परिस्थिति में हों, परन्तु मेरी प्रार्थना है कि यह क्षेत्रीय मार्गदर्शिका आपको वर्तमान या भविष्य के जीवन साथी के रूप में नया विश्वास दे और आपको परमेश्वर की उस बुद्धि और भलाई पर अचम्भित कर दे, जिसने इस सम्बन्ध को रचा है जिसे हम “विवाह” कहते हैं।

हमारे वर्तमान सांस्कृतिक समय में विवाह हर ओर से आक्रमण के अधीन है। लोग इस बात को लेकर असमंजस और दुविधा में हैं कि कौन विवाह कर सकता है, विवाह में कितने लोग सम्मिलित हो सकते हैं, और क्या विवाह करना वास्तव में आवश्यक है या इच्छा पर निर्भर है। इसलिए हम एकमात्र अधिकारपूर्ण, विश्वसनीय और अनन्त स्रोत की ओर देखेंगे: अर्थात् परमेश्वर के वचन की ओर। ये चार बाइबल आधारित सत्य उन सभी बातों में अगुवाई करेंगे जिन्हें हम आगे देखेंगे।

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