#6 समय और तकनीक परमेश्वर की महिमा के लिए

By Daniel S. Dumas

परिचय: एक चींटी पर विचार करें

 

आप मुझे पागल कह सकते हैं, परन्तु मैं चाहता हूँ कि आप अपने जीवन में इस श्रेणी के प्रबन्धन की प्रक्रिया को जानते समय एक चींटी पर विचार करें। यह छोटा सा जीव समय और तकनीक के सम्बन्ध में हमारे प्रबन्धन पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। सुलैमान के नीतिवचन (नीति. 6:6–11) हमारा ध्यान सूक्ष्म चींटी की ओर लगाते हैं, जिससे कि हम उसकी उद्देश्यपूर्णता, उद्योग, प्रबन्धन, योजना और परिश्रम से सीख सकें। आपने शायद अपने जीवन में इतने बड़े क्षेत्र के लिए चींटी पर विचार नहीं किया होगा, परन्तु आज आपका भाग्यशाली दिन है।

पवित्रशास्त्र उत्पादकता की कमी, टालमटोल और अपने जीवन को संयोग पर छोड़ देने से निपटने के लिए हमारा ध्यान चींटी की ओर लगाता है। यह बहुत ही आश्चर्यजनक बात है, क्योंकि परमेश्वर ने इसके लिए कई उपमाएँ उपयोग की हैं। वास्तविकता तो यह है कि हमें इस जीवन को बर्बाद नहीं करना है और न ही हमें बिना किसी योजना के जीवन जीना है। पवित्रशास्त्र हमें योजना बनाने का आदेश देता है। हम अपनी योजनाएँ बनाते हैं और परमेश्वर प्रभुतापूर्वक हमारे कदमों का मार्गदर्शन करता है, अर्थात् मसीही सिद्धान्त यह मानता है कि सौरमण्डल का हर अणु उसके प्रभुता सम्पन्न निर्देश और देखभाल के अधीन है। या दूसरे शब्दों में कहें तो हमारी योजनाएँ पेंसिल से लिखी जाती हैं, जबकि परमेश्वर की योजनाएँ स्थायी स्याही से लिखी जाती हैं। याकूब ने पहली शताब्दी में इस बात पर विचार किया और हमें याद दिलाया कि हमें अपनी योजनाएँ बिना किसी अहंकार के बनानी चाहिए। इसका अर्थ है कि हम अपनी योजनाओं को परमेश्वर की मूल योजना के अधीन कर देते हैं (याकूब 5:13-17)। अधीनता में होकर योजना बनाना पवित्रशास्त्र की निर्धारित विधि है। हम अपना समय कहाँ बिताते हैं, यह वास्तव में प्रकट करता है कि हम किस बात को महत्व देते हैं। रुपये के हमारे उपयोग की तरह, समय का हमारा उपयोग यह दर्शाता है कि हम किस बात की सबसे अधिक चिन्ता करते हैं।

समय मनुष्य के लिए बड़ा तुल्यकारक है, क्योंकि हम सभी को एक दिन में समान समय मिलता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति, जिनके कंधों पर सभी जिम्मेदारियाँ हैं, उनके पास हम में से बाकी लोगों की तुलना में एक दिन में अधिक समय नहीं होता। कुछ अगुवों के पास अधिक योग्यता, रुपया और क्षमता होती है, परन्तु किसी के पास अधिक समय नहीं होता।

हम नहीं जानते कि इस ग्रह पर हमारे पास कितने दिन हैं। परिश्रमी आविष्कारक बेंजामिन फ्रैंकलिन ने कहा, “समय ही वह वस्तु है, जिससे जीवन बना है।” हमारे जीवन की लम्बाई केवल एक पवित्र, सम्प्रभु और न्यायप्रिय परमेश्वर के द्वारा निर्धारित की जाती है।

पवित्रशास्त्र में समय का सावधानीपूर्वक उपयोग करने के परामर्श भरे पड़े हैं। उदाहरण के लिए, मूसा ने भजन संहिता में लिखा है, “हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएँ” (भज. 90:12)। इसी तरह, प्रेरित पौलुस ने कहा कि “ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो: निर्बुद्धियों के समान नहीं पर बुद्धिमानों के समान चलो। अवसर को बहुमूल्य समझो, क्योंकि दिन बुरे हैं” (इफि. 5:15-16)।

अपने जीवनों और दिनों को संयोग पर छोड़ना न तो चतुराई है और न ही समझदारी। इसकी वास्तविकता यह है कि यदि आप अपने समय और तकनीक का अच्छा प्रबन्धन नहीं करते, तो कोई और बड़े आनन्द से आपके लिए यह काम कर देगा। एक पुराना विज्ञापन है, जिसका शीर्षक है “अत्यावश्यक वस्तुओं का अत्याचार।” इसका आधार सरल और गहरा था कि यदि अत्यावश्यक वस्तुओं पर ध्यान न दिया जाए, तो वे अन्त में हम पर हावी हो जाएँगी और जो अच्छा, सही और सुन्दर है, उसे दबा देंगी। यह दु: ख की बात है कि हमारा बहुत सारा समय किसी सोची-समझी कार्य योजना से नहीं, वरन् उन वस्तुओं से निर्धारित होता है, जिन्हें हम ने नहीं चुना है। इस तेज-गति वाले संसार में हमारे समय के लिए बहुत सी वस्तुएँ होड़ कर रही हैं। अक्सर हमें यह चुनना पड़ता है कि हमारे लिए क्या ठीक है और क्या सबसे अच्छा है। आज यह रुक जाता है, और मैं प्रार्थना करता हूँ कि यह क्षेत्रीय मार्गदर्शिका आपको अपने समय और तकनीक दोनों पर नियंत्रण वापस पाने में सहायता करेगी।

याद रखें कि, हर समय एक जैसा नहीं होता। हमारे पास अपना समय गँवाने, समय खोने, अपने समय को गलत प्राथमिकता देने, अपने समय को टालने, समय बर्बाद करने और यहाँ तक कि समय को भुनाने की क्षमता होती है। समय का विश्वासयोग्यता के साथ उपयोग करना इस बात को स्वीकार करने से आरम्भ होता है कि इस जीवन में हमारा समय सीमित है। परमेश्वर अनन्त है और हम सीमित हैं (भज. 90:1–3)। आपको जीने के लिए एक ही जीवन मिलता है, और आप एक और मिनट नहीं खरीद सकते। इसका अर्थ है कि समय एक सीमित इकाई है और आपकी सबसे मूल्यवान सम्पत्ति है। हम सभी को जॉन पाइपर की इस बुलाहट पर ध्यान देने के लिए प्रेरित होना चाहिए, “अपना जीवन बर्बाद मत करो!”

समय के साथ हमारे अधिकांश संघर्ष इसके पर्याप्त न होने से आते हैं, परन्तु संतुलित होने की भावना में (मुझे लगता है कि मत्ती 5 अध्याय में एक अतिरिक्त प्रेरणाहीन आशीष “धन्य हैं वे जो संतुलित हैं” होनी चाहिए), मैं आपके प्रति विश्वासघाती होऊँगा, यदि मैं आपको यह याद न दिलाऊँ कि यह सम्भव है कि आपके हाथों में बहुत अधिक समय हो सकता है। हमारे जीवन के विभिन्न चरणों में, हमारे हाथों में बहुत अधिक समय होगा, जो हमारे लिए और हमारे आत्मिक गठन के लिए खतरनाक हो सकता है। उदाहरण के लिए, एक जवान व्यक्ति के पास बहुत अधिक समय शैतान के खेल का मैदान बन सकता है, अर्थात् एक ऊबा हुआ किशोर एक खतरनाक किशोर में बदल सकता है। यही बात हम में से किसी के लिए भी सच हो सकती है, जिसके पास बिना किसी मंशा के समय का एक बड़ा हिस्सा है। मैं यह नहीं कह रहा कि आप आराम नहीं कर सकते और मौज-मस्ती नहीं कर सकते, परन्तु मेरा अवलोकन यह है कि वीडियो गेम, टीवी, सोशल मीडिया और इस तरह की बातों में बहुत समय बर्बाद होता है। समय के सभी अच्छे उपयोगों के लिए एक ढाँचे की आवश्यकता होती है, जिसमें हमारा अवकाश भी शामिल है। तकनीक ने समय बर्बाद करना आसान बना दिया है।

नीचे दस सिद्धान्त दिए गए हैं, जो परमेश्वर की इच्छा से, आपको अपना समय और तकनीक परमेश्वर की महिमा के लिए संचालन करने में सहायता करेंगे। अपने समय का दुरुपयोग करने और तकनीक के दास बनने की परीक्षा से हम सभी को सावधान रहना चाहिए। इन सिद्धान्तों को आपको विश्वासयोग्य और फलदायी जीवन बिताने में मार्गदर्शन करने दें।

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