#3 सम्बन्ध

By Jonathan Parnell

परिचय

 

जीवन सम्बन्धों से मिलकर बनता है और सम्बन्ध जटिल होते हैं। इस बात को जितनी जल्दी समझ लें, उतना ही अच्छा है।

अमेरिका की अधिकतर पीढ़ियों में आपसी सम्बन्धों का महत्व कम होना एक प्रकार की सांस्कृतिक समस्या बन गई है। मुझे स्मरण नहीं है कि मैंने यह बात कब सुनी थी, परन्तु अब तो यह समस्या प्रत्येक स्थान में देखी जा सकती है: कई युवा, जो 20 वर्ष की आयु के आसपास हैं, वे काम-धन्धे के प्रति कमी होने की मानसिकता रखते हैं। हाई स्कूल और कॉलेज के समय, उनके कई सगे-सम्बन्धी होते थे। अधिकतर बच्चों के लिए मित्र ढूँढना कठिन नहीं होता है। परन्तु स्कूल के पश्चात् के वातावरण में आने वाले युवा पुरुष एवं महिलाओं के लिए जो बात सबसे कठिन होती है, वह है आजीविका की खोज करना। अभाव वाली मानसिकता कहती है कि पर्याप्त नौकरियाँ उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए एक नौकरी पाना सर्वोच्च प्राथमिकता बन जाती है। परन्तु बड़े दुःख की बात यह है कि कई युवा, अच्छी नौकरी की खोज में अपने पुराने, गहरे सम्बन्धों को त्याग देते हैं और फिर वर्षों बाद उन्हें अनुभव होता है कि नौकरियाँ तो बहुत हैं, परन्तु अब अच्छे सगे-सम्बन्धी मिलना कठिन है।

इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि हमारे समाज में अकेलेपन की समस्या व्यापक रूप से फैली हुई है। यह बात हर कोई जानता है कि डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के बावजूद, जो हमें पहले से कहीं अधिक ‘जुड़े हुए’ होने का दावा करती है, पश्चिमी देशों के लोग पहले इतने अकेले कभी नहीं थे। आनन्दमय जीवन के मूल तत्व को हमने महत्व देना छोड़ दिया है। इसलिए हमें अपनी सोच में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। क्योंकि जीवन सम्बन्धों पर ही टिका हुआ होता है।

सच्चाई तो यह है, कि अधिकाँश लोग इस बात को समझते हैं। सम्बन्ध ही तो जीवन का आधार हैं। हमारी मन पसन्द कहानियाँ, चाहे किताबें हों, फिल्में हों या गाने, सभी सम्बन्धों पर ही आधारित होते हैं। चाहे सम्बन्ध अच्छे हों, बिगड़े हों या टूटे हों (क्या आपने कभी कोई देशी गाना सुना है?), हम लोगों से नहीं, वरन् आपसी सम्बन्धों में बंधे हुए लोगों से आकर्षित होते हैं। यह बात हम अपने समाज में प्रसिद्ध व्यक्तियों के प्रति मोह में भी साफ देखते हैं। भले ही ऐसा लगता है कि हम उनकी प्रतिभा और उपलब्धियों के कारण उन्हें महत्व देते हैं, परन्तु वास्तव में इस सम्मान के पीछे उनका व्यक्तिगत जीवन और सम्बन्धों को जानने की उत्सुकता कार्य करती है। हम किसी व्यक्ति को उसके साथियों के माध्यम से जानते हैं, जो कि प्रसिद्ध व्यक्तियों के जीवन पर आधारित दूरदर्शन के कार्यक्रमों का उद्देश्य भी होता है, और साथ ही मनोरंजन समाचार पत्रों और किराने की दुकानों पर रखे समाचार पत्रों के शीर्षक भी इन्हीं से सम्बन्धित होते हैं। क्या ये मुख्य समाचार कभी किसी के कौशल के विषय में होते हैं? वे व्यक्तियों के आपसी सम्बन्धों के विषय में होते हैं, और नाटक जितना अधिक विचित्र होगा, उससे दृष्टि हटाना उतना ही कठिन होगा। हम जानते हैं कि किसी व्यक्ति का वास्तविक धन (या निर्धनता) उसके आस-पास के लोगों से उसके सम्बन्ध में होता है।

क्या मृत्यु के समय यही सबसे महत्वपूर्ण नहीं होता? हम चाहते हैं कि हमारी मृत्यु के पश्चात् कोई ऐसा व्यक्ति हो जो हमारी इतनी चिन्ता करे कि हमारे मरने के पश्चात् हमारी मृत्यु का शोक सन्देश लिख सके। जैसे शव वाहन बड़ी-बड़ी गाड़ियों या ट्रकों को नहीं खींचते, वैसे ही यह एक भद्दी (पर सच्ची) कहावत बन गई है कि अपने अन्तिम क्षणों में किसी ने भी ऐसा नहीं चाहा था, अर्थात् यह एक सामान्य बात है जो कार्य से अधिक सम्बन्धों और व्यक्तिगत अनुभवों को महत्व देने की आवश्यकता को दर्शाती है। जीवन के अन्तिम क्षणों में यदि हम भाग्यशाली रहे, तो मुझे लगता है कि हमारे दिमाग में उन लोगों के चेहरे और नाम होंगे, जिनसे हमारा सबसे घनिष्ठ सम्बन्ध रहा होगा, जिनके साथ हम और अधिक समय बिताना चाहते थे, और उनसे प्रेम करना चाहते थे। सम्बन्धों के महत्व को बढ़ा-चढ़ाकर बताना लगभग असम्भव सा लगता है।

क्या यही तो बात नहीं है उस प्रसिद्ध फ़िल्म की? यह जीवन अद्भुत है। अन्तिम दृश्य में, पड़ोसियों से भरे घर में, जहाँ हर कोई जॉर्ज की सहायता करने के लिए हाथ बढ़ा रहा होता है, और उसका भाई हैरी अचानक से वहाँ पहुँचता है, जिससे भीड़ अचम्भित हो जाती है। सन्नाटा छा गया और हैरी ने गिलास उठाकर कहा, “मेरे बड़े भाई जॉर्ज, शहर के सबसे धनी व्यक्ति के लिए!” जयकारे गूँज उठते हैं, और जॉर्ज स्वर्गदूत क्लेरेंस द्वारा छोड़ी गई टॉम सॉयर की एक प्रति उठाता है। दृश्य को बड़ा करके हम क्लेरेंस द्वारा जॉर्ज को लिखे गए सन्देश को पढ़ सकते हैं: इस बात को स्मरण रखना चाहिए कि जिसके पास सच्चे मित्र होते हैं, वे कभी असफल नहीं होते हैं! हाँ, फिल्म में स्वर्गदूतों की व्याख्या भले ही गलत हो, परन्तु मित्रता का सन्देश अत्यधिक सटीक और हृदय को छू लेने वाला है। जीवन सम्बन्धों से ही चलता है।

पर साथ ही, सम्बन्धों को आदर्शवादी होने के रूप में न देखें, क्योंकि ये जटिल भी हो सकते हैं। हमारे जीवन की कहानियों में सबसे बड़ी पीड़ा और अधिकाँश उलझनें, सम्बन्धों से ही जुड़ी हुई होती हैं। परिणामस्वरूप, हम दूसरों को ठेस पहुँचाते हैं और स्वयं भी दुखी होते हैं, विश्वास को नष्ट कर देते हैं और सन्देह उत्पन्न करते हैं। सम्बन्ध अधिकतर हमारे लिए सबसे बड़ी आशीष होती हैं परन्तु जब वे टूट जाते हैं तो वही सम्बन्ध हमारे लिए अभिशाप बन जाते हैं। सम्बन्धों को निभाना कठिन तो होता ही है।

इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका का उद्देश्य सामान्य रूप से सम्बन्धों के विषय में अधिक वास्तविक दृष्टिकोण प्रदान करना है, जो हमें यह समझने में सहायता करता है कि सम्बन्ध कैसे निभाए जाएँ।

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