#19 अपने समय का प्रबन्धन करना
परिचय
मैं आपके समय के प्रबन्धन और देखभाल के विषय में इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका का आरम्भ उस बात से कर रहा हूँ जिसे मैं सबसे महत्वपूर्ण सुझाव मानता हूँ जिसे आप अपने समय पर नियंत्रण करते हुए परमेश्वर के उद्देश्यों के लिए उपयोग करने के विषय में कभी भी सीख सकते हैं। सम्भवतः यह वह सुझाव न हो जो आप चाहते हैं, परन्तु मुझे पूरा विश्वास है कि यह वही सुझाव है जिसकी आपको आवश्यकता है। यह बात अतिशयोक्ति लग सकती है, परन्तु मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि यह वास्तविकता है। यह वास्तविकता इसलिए है क्योंकि इस सुझाव में समय प्रबन्धन के विषय में आपके विश्वास, ज्ञान या व्यवहार को बदलने की सामर्थ्य है। इसने मेरे और अन्य कई लोगों के जीवन में ऐसा ही किया है।
किसी भी उत्पादकता व्यवस्था या किसी भी ऐसी व्यवस्था से अधिक महत्वपूर्ण जो आपको अपने समय पर नियंत्रण करना सिखाती है, वह अपने उद्देश्य को निर्धारित करना है।
बहुत से लोग इसलिए एक स्थायी उत्पादकता व्यवस्था बनाने में असफल हो जाते हैं और अपने समय का सच्चाई से प्रबन्धन करना कभी नहीं सीख पाते, क्योंकि वे उद्देश्य निर्धारित करने से पहले ही व्यवस्थाओं पर ध्यान केंद्रित कर देते हैं। इस विश्वास से निराश होकर कि वे समय को व्यर्थ गँवाने के आदी हैं, और नियमित रूप से लोगों भेंट करने से चूक जाते हैं या समय-सीमा को पूरा नहीं कर पाते है, वे व्यवस्थाओं और तकनीक की खोज करते हैं। यह एक समझ में आने वाली प्रतिक्रिया है, परन्तु इसकी समस्या यह है कि वे कारण की उपेक्षा करते हुए केवल लक्षणों का ही समाधान करने का प्रयास करते हैं। वे तुरन्त सुझावों या आसान उपायों की खोज में रहते हैं, जबकि वास्तविक समाधान उससे कहीं अधिक जटिल होता है। वे पाइप की दरार को ठीक किए बिना केवल भूमि पर गिरे पानी को पोंछ रहे होते हैं — अर्थात् समस्या के लक्षणों से जूझ रहे हैं, परन्तु उसके मुख्य कारण तक नहीं पहुँच रहे हैं।
इसी कारण, समय के प्रबन्धन और उसके अच्छे उपयोग के लिए यह क्षेत्रीय मार्गदर्शिका सबसे पहले उद्देश्य के विषय से आरम्भ होनी चाहिए — अर्थात् “कैसे” से पहले “क्यों” जैसे प्रश्न का उत्तर दिया जाना आवश्यक है। जब आप यह निर्धारित कर लेते हैं कि आपको अपने समय का प्रबन्धन क्यों करना चाहिए, तब आप स्वयं को एक ऐसी व्यवस्था बनाने के लिए तैयार कर पाते हैं जो आपको आत्मविश्वास और धीरज के साथ ऐसा करने के लिए योग्य बनाएगी।
इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका में आपको एक पूरा खण्ड ऐसा मिलेगा जो उत्पादकता के लिए तकनीकों और सम्पूर्ण व्यवस्था बनाने की योजना को बताता है। हो सकता है कि आप अभी इसे नीचे की ओर ले जाकर देखने का प्रयास करें, परन्तु मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप स्वयं को संयमित रखें। मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि आप स्वयं को अनुशासित रखें, ताकि इन तैयारियों से सम्बन्धित बातों में सम्मिलित हो सकें, और यह विचार करें कि परमेश्वर स्वयं आपके समय के प्रबन्धन और अच्छे भण्डारी होने के विषय में क्या कहता है। मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप एक ठोस नींव रखें और उसके बाद ही उस पर एक व्यवस्था का निर्माण आरम्भ करें। इसमें अधिक समय लगेगा और प्रयास भी करना होगा, परन्तु मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि ऐसा करके आपको अधिक प्रतिफल मिलेगा।
योजना
मैं आपको बताना चाहता हूँ कि यह क्षेत्रीय मार्गदर्शिका किस प्रकार से रहस्य को प्रकट करेगी।
सर्व प्रथम, मैं आपको बाइबल के एक ऐसे भाग पर ले जाऊँगा जो आपको चुनौती भी देगा और प्रेरित भी करेगा। इससे आपको यह समझने में सहायता मिलेगी कि यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है कि आप विश्वासयोग्यता के साथ समय प्रबन्धन के द्वारा प्रभु के प्रति अपने समर्पण को व्यक्त करें। और इससे आपको अपने समय के प्रबन्धन के उद्देश्य को समझने में भी सहायता मिलेगी।
ऐसा करने के पश्चात्, हम उत्पादकता के सम्बन्ध में एक विधि पर चर्चा आरम्भ करेंगे। इसमें एक प्रकार की स्वयं की जाँच/मूल्याँकन करना सम्मिलित होगा, जिससे आप यह निर्धारित कर पाएँगे कि परमेश्वर चाहता है कि आप किसी कार्य का भली-भाँति प्रबन्धन और देखभाल करें। और फिर यह आपको एक सरल व्यवस्था बनाने के लिए प्रेरित करेगा जिसे आप अपने जीवन में लागू कर सकेंगे — ऐसी सरल व्यवस्था जो आपके व्यक्तिगत संगठन में बहुत लाभदायक होगी और आपको इस विश्वास में दृढ़ बनाएगी कि आप विचार पूर्वक अपने जीवन को सर्वोत्तम और सर्वोच्च प्राथमिकताओं की ओर निर्देशित कर रहे हैं।
और फिर, जैसे ही आप निष्कर्ष पर पहुँचेंगे, तो आप उस व्यवस्था को इस आनन्द के साथ जीना आरम्भ करेंगे कि आप वह सब स्मरण कर रहे हैं जिसे स्मरण करना आवश्यक है, और वह सब कुछ कर रहे हैं जिसे करना आवश्यक है, और उस पर भी ध्यान दे रहे हैं जो आपके ध्यान देने के योग्य है (साथ ही आत्मविश्वास के साथ उसे दूर कर रहे होंगे जो आपके ध्यान देने के योग्य बात नहीं है)। आप सफलतापूर्वक उस समय का प्रबन्धन भली-भाँति उपयोग कर रहे होंगे जो परमेश्वर ने आपको इस संसार में उसके उद्देश्यों को पूरा करने के लिए दिया है।
कार्य और विश्राम
जीवन में कुछ ही चीजें दिन भर के कठिन परिश्रम करने के बाद रात को अच्छी नींद लेने से अधिक मधुर होती हैं। यदि आपने कभी बाहर कठिन शारीरिक श्रम करते हुए पूरा दिन बिताया है — जैसे भारी बोझ उठाना, कुल्हाड़ी चलाना, गड्ढा खोदना – तो आप बिस्तर पर लेटकर आराम करने के आनन्द को भली-भाँति जानते होंगे। जीवन में अच्छी नींद से अधिक मधुर कुछ ही कार्य होते हैं।
परन्तु जीवन में कुछ कार्य इतने अधिक लज्जाजनक होते हैं जैसे कि जब आपको कार्य करना चाहिए उस समय आप सो रहे हों। जब करने के लिए कार्य हों और निभाने के लिए कर्तव्य हों, तब न तो आपको सोने की आवश्यकता है और न ही विश्राम करने की। आपकी बुलाहट उठने की, सेवा करने और आशीष देने की, प्रेम करने और देखभाल करने की है। जब कार्य किया जाना चाहिए, तो कार्य ही करना चाहिए उस समय सोते रहना लज्जाजनक बात है।
विश्राम और नींद, उठना और कार्य करना — ये सब बातें प्रेरित पौलुस के मन में उस समय थी जब उसने रोमियों को पत्र लिखा। आइए, मैं समझाता हूँ।
अध्याय 12 से आरम्भ करते हुए, वह यह समझाना आरम्भ करता है कि मसीही लोग एक-दूसरे के प्रति कैसे जीवन व्यतीत करें और यह भी कि अपने चारों ओर के संसार के प्रति कैसे जीवन जिएँ। मुख्य बात प्रेम है। मसीहियों को सदैव दूसरों के साथ ऐसे सम्बन्ध रखने चाहिए जो प्रेम को प्रकट करे।
इसी कारण वह ऐसे निर्देश देता है कि, “प्रेम निष्कपट हो” (आयत 9) और “भाईचारे के प्रेम से एक-दूसरे पर स्नेह रखो” (आयत 10)। वह आगे कहता है कि, “आपस में एक सा मन रखो” (आयत 16) और “जहाँ तक हो सके, तुम भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो” (आयत 18)। अध्याय 13 में वह सब का सार प्रस्तुत करते हुए कहता है: “अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख” (आयत 9)। एक मसीही होने के नाते, आपको दूसरों से उसी प्रकार प्रेम करने के लिए कहा गया है जिस प्रकार मसीह ने आपसे प्रेम किया है — अर्थात् नम्रता से, निःस्वार्थ भाव से, बलिदानी रूप से, रचनात्मक ढँग से और उदारता से।
और यही वह प्रसंग है, जहाँ दूसरों के प्रति प्रेम की बात करते हुए पौलुस अचानक एक चेतावनी देने वाली घड़ी उठाकर दिखाता है, जिसकी घंटी बज रही है और ऊँची आवाज के साथ टनटन कर रही है — ऐसे चेतावनी जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है। प्रेम के इसी सन्दर्भ में पौलुस मसीहियों से कहता है, “जागने का समय आ गया है।” देखिए वह 13:11–14 में क्या कहता है:
और समय को पहचान कर ऐसा ही करो, इसलिए कि अब तुम्हारे लिये नींद से जाग उठने की घड़ी आ पहुँची है; क्योंकि जिस समय हमने विश्वास किया था, उस समय की तुलना से अब हमारा उद्धार निकट है। रात बहुत बीत गई है, और दिन निकलने पर है; इसलिए हम अन्धकार के कामों को तजकर ज्योति के हथियार बाँध लें। जैसे दिन में, वैसे ही हमें उचित रूप से चलना चाहिए; न कि लीलाक्रीड़ा, और पियक्कड़पन, न व्यभिचार, और लुचपन में, और न झगड़े और ईर्ष्या में। वरन् प्रभु यीशु मसीह को पहन लो, और शरीर की अभिलाषाओं को पूरा करने का उपाय न करो।
मैं चाहता हूँ कि आप इस जागने के बुलावे को सुनें। और साथ ही मैं यह भी चाहता हूँ कि आप इसका पालन करें। मैं चाहता हूँ कि आप जागें ताकि आप उन उत्तरदायित्वों को पूरा कर सकें जिन्हें परमेश्वर ने आपको सौंपा है।
मैं पहले ही कह चुका हूँ कि इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका का उद्देश्य व्यावहारिक होना है — ताकि अन्त में यह कार्य व्यवस्था की ओर मार्गदर्शन करे। और मैंने पहले ही प्रतिज्ञा की है कि हम वहाँ तक पहुँचेंगे। परन्तु इससे पहले कि हम यह तय करें कि कार्य कैसे किया जाए, हमें यह निर्धारित करना होगा कि क्या किया जाना चाहिए, और उससे भी पहले, यह समझना होगा कि हम जो करते हैं उसका महत्व प्रथम स्थान परक्यों है। इसलिए हम अपना ध्यान रोमियों में इन वचनों से मिलने वाले दो कार्य के बुलावे की ओर मोड़ते हैं — ऐसे बुलावे जो हमें यह सिखाएँगे कि परमेश्वर के द्वारा हमें दिए गए समय का विश्वासयोग्य से प्रबन्धन और देखभाल करना कितना महत्वपूर्ण है। उचित आधारशिला रखने के पश्चात् ही हम ऐसी व्यवस्था बना सकते हैं जो सफल और दीर्घकालिक सिद्ध होगी।
इन आयतों के माध्यम से, परमेश्वर हमें जागने और कार्य करने के लिए कहता है। और अपने समय का प्रबन्धन और देखभाल करने में विश्वासयोग्य होने के लिए, हमें ठीक यही करने की आवश्यकता है — अर्थात् अपनी नींद से जागना और पूरी लगन से वह बनना जो परमेश्वर हमें बनने के लिए कहता है और वह करना जो परमेश्वर हमें करने के लिए कहता है।
प्रबन्धन
पौलुस के निर्देशों पर ध्यान देने से पहले, हमें अपने समय और जीवन जीने के तरीके से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धारणा पर ध्यान देना होगा: और वह भण्डारी होना है। भण्डारी एक प्रबन्धक या पर्यवेक्षक होता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि एक भण्डारी स्वामी नहीं होता है। एक भण्डारी का कार्य दूसरे व्यक्ति की सम्पत्ति के उत्तरदायित्व को स्वीकार करना होता है। जब बात धन की आती है तो मसीही लोग भण्डारीपन से पहले ही परिचित होते हैं — क्योंकि हम जानते हैं कि सारा धन अंततः परमेश्वर का ही है, इसलिए हम अपने धन के स्वामी नहीं हैं, वरन् परमेश्वर के धन के भण्डारी हैं। इसी प्रकार, हम अपने वरदानों और योग्यताओं के भी स्वामी नहीं हैं, वरन् उन वरदानों और योग्यताओं के भण्डारी हैं जिन्हें परमेश्वर ने अनुग्रह के साथ हमें दिया है। और जो बात धन और गुणों के विषय में सत्य है, वही समय के विषय में भी सत्य है। समय परमेश्वर का है, क्योंकि वही इसे हमें देता है और वही हमें इसके उपयोग के तरीके का लेखा देने के लिए उत्तरदायी ठहराएगा।
इसलिए, इफिसुस की कलीसिया को लिखे अपने पत्र में पौलुस कहता है, “इसलिए ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों के समान नहीं पर बुद्धिमानों के समान चलो। और अवसर को बहुमूल्य समझो, क्योंकि दिन बुरे हैं” (इफिसियों 5:15-16)। अतः हमें केवल दिए गए समय का उपयोग ही नहीं करना है, वरन् समय का सर्वोत्तम रीति से उपयोग करना है। और भी अधिक शाब्दिक रूप से कहें, तो हमें समय का “बहुत अच्छा” उपयोग करना है, अर्थात् समय का इस प्रकार से उपयोग करना है कि हमें सबसे उच्च और सर्वोत्तम परिणाम मिल सकें।
इसी प्रकार, मूसा प्रार्थना करता है, “हमको अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएँ” (भजन संहिता 90:12)। हमारे दिनों की गिनती करने का अभिप्राय यह है कि हम उन दिनों के महत्व के प्रति सचेत रहें और प्रत्येक दिन को सावधानी पूर्वक जीने के लिए समर्पित रहें। हमारा जीवन बहुत छोटा है, परन्तु प्रत्येक दिन परमेश्वर की ओर से दान दिया गया है जिसे उसके उद्देश्यों के लिए ग्रहण किया जाना चाहिए और अधिक से अधिक उपयोग किया जाना चाहिए।
इसलिए, हम समय के साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं जैसा कि हम धन, योग्यताओं और अन्य बहुत सी वस्तुओं के साथ करते हैं — अर्थात् ऐसे लोगों के रूप में जिन्हें परमेश्वर की ओर से एक बहुमूल्य वरदान मिला है और जिन्हें इसे विश्वासयोग्यता के साथ तथा भली-भाँति प्रबन्ध करने के लिए बुलाया गया है। अच्छे ढँग से जिया गया जीवन ही भण्डारी का जीवन होता है।
यह समझते हुए कि हम समय के स्वामी नहीं हैं, वरन् भण्डारी हैं, और यह जानते हुए कि परमेश्वर के सामने हमें उस समय के लिए उत्तरदायी ठहराया जाएगा जो वह हमें देता है, आइए अब हम पौलुस की चेतावनी पर ध्यान देंगे।
चर्चा एवं मनन:
- क्या आप भण्डारीपन की बाइबल आधारित धारणा और उसका स्वामित्व से तुलना करना समझते हैं? क्या आप इस बात से सहमत हैं कि भण्डारीपन आपको इस बात के लिए उत्तरदायी ठहराता है कि आप अपना समय अपने उद्देश्यों को पूरा करने के नहीं, परन्तु परमेश्वर के उद्देश्यों को पूरा करने में बिताएँगे?
- क्या आपको लगता है कि आप वर्तमान में अपने समय के प्रति एक विश्वासयोग्य भण्डारी हैं? यदि आज परमेश्वर आपको वह सारा समय स्मरण कराए जो उसने आपको मसीही में आने के बाद से दिया है, और फिर उस समय का लेखा-जोखा माँगे, तो आप उसे क्या उत्तर देंगे?
- आपको क्या लगता है कि आप वर्तमान में किस प्रकार से अपने समय का अच्छा उपयोग कर रहे हैं और किन तरीकों से आप उन्नति करने की आवश्यकता के प्रति सचेत हैं?
ऑडियो मार्गदर्शिका
ऑडियो#19 अपने समय का प्रबन्धन करना
1 जागो
किसी ऐसे व्यक्ति से “जागो” कहना विचित्र बात होगी जो पहले से ही जागा हुआ है। एक किशोर अपने माता या पिता से यह कह सकता है कि वे उसे अगली सुबह जगा दें ताकि वह सुनिश्चित कर सके कि वह काम पर समय से पहुँच जाए। पर यदि अगली सुबह उसके माता-पिता उसे रसोई घर में पहले से ही तैयार होकर नाश्ता करते हुए पाते हैं, तो वे घंटी बजाना और चिल्लाना आरम्भ नहीं करेंगे कि, “जागने का समय हो गया!” क्योंकि यह स्पष्ट हो गया है कि अब उसे जगाने की आवश्यकता नहीं है (यह भी स्पष्ट है कि उन्होंने एक अद्भुत काम देख लिया है!)।
इस प्रकार, यह कहना उचित होगा कि यदि लोग सोये हुए न होते, तो परमेश्वर प्रेरित पौलुस के द्वारा उन्हें जागने के लिए नहीं कहता। वह उनसे वह करने के लिए नहीं कहता जो वे पहले से ही कर रहे हैं, क्योंकि वह अपने वचनों को व्यर्थ नहीं जाने देता है। यह हमें बताता है कि जब वह रोम की कलीसिया को पत्र लिख रहा था, तो कम से कम कुछ लोग जो उसके मन में थे, वे अवश्य ही सोए हुए होंगे। और यदि यह बात उनमें से कुछ लोगों के लिए सच थी, तो यह सम्भव है कि यह आप पर भी लागू हो सकती है।
निश्चित रूप से, ये लोग वास्तव में सोए हुए नहीं थे, परन्तु वे सचेत नहीं थे। परमेश्वर ने उन्हें उत्तरदायित्व सौंपा था परन्तु वे उन उत्तरदायित्वों को गम्भीरता से नहीं निभा रहे थे। परमेश्वर ने उन्हें सक्रिय रहने के लिए बुलाया था, परन्तु वे निष्क्रिय थे। परमेश्वर ने उन्हें गम्भीरता से जीवन जीने के लिए बुलाया था, परन्तु वे असावधानी से जीवन जी रहे थे। पौलुस की उन्हें जगाने के शीघ्र माँग सीधे उनके उदासीनता से जुड़ी हुई थी।
क्या आप सोए हुए हैं?
क्या यह सम्भव है कि आप उसी प्रकार “सोए हुए” हैं जिसकी चिन्ता पौलुस को थी? आप इसे कैसे समझ सकते हैं? आप यह कैसे जान सकते हैं कि आपको इस चेतावनी की आवश्यकता है?
सबसे स्पष्ट संकेत तुरन्त सन्दर्भ में मिलेंगे, अर्थात् जो पौलुस ने पहले ही सिखाया और जिस पर बल दिया है। इसलिए आइए संक्षेप में उन कुछ संकेतों पर विचार करें जो यह दर्शाते हैं कि कोई मसीही जन सक्रिय होने के विपरीत आलसी हो गया है, अर्थात् ऐसा मसीही जन जिसे जागने की आवश्यकता है (जिसका सरल अर्थ यह है कि वह अपने समय का विश्वासयोग्यता के साथ भण्डारी होते हुए भी सही से प्रबन्ध नहीं कर रहा है)।
- पहला, यदि आप मसीह के समान बनने के विपरीत संसार के सदृश्य ढल रहे हैं, तो हो सकता है कि आप सोए हुए हैं। रोमियों 12:2 में हमें बताया गया है कि, “इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए।” मसीहियों को उस स्थिति से स्पष्ट रूप से भिन्न होना चाहिए जो वे मसीह को अपना जीवन समर्पित करने और उसके द्वारा उद्धार पाने से पहले थे। यदि आप सांसारिक सुखों एवं महत्वाकांक्षाओं से प्रेम करते हैं, और उनका पीछा करते हैं, यदि आप सांसारिक मनोरंजन में लिप्त रहते हैं, तो आप उस बुलाहट के प्रति सोए हुए हैं जिसके लिए परमेश्वर ने आपको बुलाया है। आपके मन का नया होना आवश्यक है ताकि आपका सम्पूर्ण व्यक्तित्व नया हो जाए। यदि आप मसीह के समान बनने के लिए परिवर्तित नहीं हुए हैं, तो आप अभी तक जागे नहीं हैं।
- दूसरा, यदि आप परमेश्वर के द्वारा आपको दिए गए आत्मिक वरदानों को पहचानने और उनका उपयोग करने में असफल हो रहे हैं, तो आप सो रहे हैं। रोमियों 12:6 में यह आज्ञा दी गई है: “और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न-भिन्न वरदान मिले हैं, तो आइए हम उनका उपयोग करें।” पवित्र आत्मा हममें से प्रत्येक को ऐसे वरदान देता है जो हमें एक-दूसरे को आशीष देने, प्रेम करने और सेवा करने में सक्षम बनाते हैं। वह हमें इन वरदानों को परिश्रम के साथ खोजने और उनका उपयोग करने के लिए कहता है। यदि आप अपने वरदानों का उपयोग दूसरों की सेवा करने के लिए नहीं कर रहे हैं, और विशेष रूप से स्थानीय कलीसिया के भीतर अन्य मसीही भाइयों-बहनों की सेवा के लिए नहीं कर रहे हैं, तो आपको सच में जागने की आवश्यकता है।
- तीसरा, यदि आप दूसरों के प्रति सक्रिय रूप से प्रेम प्रकट नहीं कर रहे हैं, तो आप सोए हुए हैं। रोमियों 12:9–10 के वचनों पर विचार करें और अपने आप से पूछें: क्या यह मेरा वर्णन करता है? “प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई में लगे रहो। भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर स्नेह रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।” क्या यह आपके विषय में कहा जा सकता है? क्या आपका सम्पूर्ण व्यक्तित्व और सम्पूर्ण जीवन दूसरों से प्रेम करने के लिए समर्पण करने से पहचाना जाता है? क्या यह बात आपके मन में तब आती है जब आप रविवार को कलीसिया में जाते हैं, या जब आप अपने छोटे समूह के साथ समय बिताते हैं, या जब आप मित्रों से मिलते हैं? यदि आप ऐसा नहीं कर रहे हैं, तो सम्भवतः इसका कारण यह है कि आप अभी तक जागे नहीं हैं।
- चौथा, यदि आप हर एक को वह बकाया वापस नहीं कर रहे हैं जो आप पर उनका ऋण है, तो आप सोए हुए हैं। रोमियों 13:7 में आग्रह किया गया है, “इसलिए हर एक का हक़ चुकाया करो; जिसे कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे चुंगी चाहिए, उसे चुंगी दो; जिससे डरना चाहिए, उससे डरो; जिसका आदर करना चाहिए उसका आदर करो।” यदि आप उन अधिकारियों के प्रति समर्पित नहीं हैं जिन्हें परमेश्वर ने आपके जीवन में नियुक्त किया है, यदि आप उनका अनादर कर रहे हैं जिनका आपको आदर करना चाहिए और उनका अपमान कर रहे हैं जिनका आपको सम्मान करना चाहिए, तो आप अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम नहीं कर रहे हैं। आप सो रहे हैं और आपको जागने की आवश्यकता है।
क्या यह आपके जीवन का वर्णन है? क्या आपका जीवन परमेश्वर के द्वारा परिवर्तित हो रहा है? क्या आप अपने जीवन में अधिकारियों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक को सम्मान दे रहे हैं? क्या आप अपने वरदानों को जो परमेश्वर ने आपको दिए हैं उन्हें इस प्रकार से उपयोग कर रहे हैं कि दूसरे लोगों को भी लाभ मिले? और क्या आप दूसरों से प्रेम कर रहे हैं, यहाँ तक कि जिस प्रकार से आपको प्रेम किया जा रहा है उससे भी कहीं अधिक बढ़कर प्रेम आप करते हैं?
सच्चाई तो यह है कि बहुत से मसीही लोग सोए ही रहते हैं। उन्होंने यीशु पर विश्वास किया है, उन्होंने उससे क्षमा पायी है, परन्तु वे अभी तक उस रीति से नहीं जी रहे हैं जैसा परमेश्वर उनसे चाहता है। वे अभी भी परमेश्वर के महान उद्देश्य के प्रति सोये हुए हैं। वे अब भी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि सुसमाचार किस प्रकार से एक विशेष जीवन जीने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करता है। रोमियों के प्रथम ग्यारह अध्यायों का सुसमाचार उन अन्तिम पाँच अध्यायों में वर्णित जीवन में प्रकट होने के लिए है। इसलिए यदि आप रोमियों में दिए गए सिद्धान्तों से प्रेम करते हैं, तो आपको यह प्रश्न पूछना चाहिए कि क्या आप उस प्रकार का जीवन जी रहे हैं जिसका वर्णन रोमियों में किया गया है। और यदि आप रोमियों में वर्णन किया गया जीवन नहीं जी रहे हैं, तो आपको यह पूछना चाहिए कि क्या आप वास्तव में रोमियों के सिद्धान्तों को समझते हैं।
यदि आप उस प्रकार से जीवन नहीं जी रहे हैं, या यदि आप अनिश्चित हैं कि आप उस प्रकार का जीवन जी रहे हैं या नहीं, तो पौलुस आपके लिए कहता है कि जागो। वह चेतावनी रूपी घड़ी को हवा में ऊँचा उठाए हुए है और चाहता है कि आप उसकी आवाज़ सुनें। यह आपको जगाने के लिए बज रही है।
यह जागने का समय है
क्योंकि रोम में कुछ मसीही लोग सो रहे थे, और हो सकता है कि आप भी सो रहे हों, इसलिए आपको पौलुस की चेतावनी सुननी चाहिए। आयत 11 में वह कहता है: “और समय को पहचान कर ऐसा ही करो, इसलिए कि अब तुम्हारे लिये नींद से जाग उठने की घड़ी आ पहुँची है; क्योंकि जिस समय हमने विश्वास किया था, उस समय की तुलना से अब हमारा उद्धार निकट है।”
सबसे पहले वह कहता है कि “तुम समय को जानते हो।” उसका अर्थ है कि आप समय को पहचानते हो, आप इस विषय में जानते हो, आप उस वास्तविकता को जानते हो जिसमें हम अभी रह रहे हैं — अर्थात् वह वास्तविकता जिसमें हम मसीह के स्वर्गारोहण और पुनरागमन के बीच के समय में रह रहे हैं। हम ऐसे समय में रह रहे हैं जब परमेश्वर ने हम में से प्रत्येक को पवित्र कार्य सौंपे हैं। उसने हमारे लिए एक विशेष प्रकार का जीवन जीने के लिए निर्धारित किया है, और एक विशेष प्रकार की साक्षी भी निर्धारित की है जो हमें देनी है।
फिर वह कहता है, “क्योंकि जिस समय हमने विश्वास किया था, उस समय की तुलना से अब हमारा उद्धार निकट है।” दूसरे शब्दों में, यह ऐसा है जैसे वह एक बड़ी समय-रेखा खींचता है — एक ओर तो वह दिन है जब आप मसीह के पास आए थे, और दूसरी ओर वह दिन है जब आप मसीह के साथ रहने के लिए जाएँगे। आपको इस बात पर विचार करना चाहिए: कि आप उस समय रेखा पर कहाँ हैं? आप वास्तव में नहीं जानते कि आप अन्त के कितने निकट हैं, परन्तु आप यह जानते हैं कि आरम्भ से लेकर अब तक का समय बीत चुका है। आपके पास परमेश्वर के उद्देश्य को पूरा करने के लिए सीमित समय है और इसका एक भाग पहले ही बीत चुका है। आप कल की तुलना में आज अपने समय के अन्त के बहुत अधिक निकट हैं, तथा पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष के अन्त के अधिक निकट हैं। अब प्रश्न यह उठता है कि बीते हुए समय में आपने क्या किया? और बचे हुए समय में आपका क्या करने का उद्देश्य है? क्योंकि समय अब कम है।
कितना कम समय है? आयत 12 इसका उत्तर देती है: “रात बहुत बीत गई है, और दिन निकलने पर है।” पौलुस चाहता है कि आप कल्पना करें कि अभी आप उस अन्धकार में हैं जो पौ फटने से ठीक पहले होता है। रात लगभग समाप्त होने वाली है और दिन का उजियाला लगभग आ पहुँचा है। और उसकी इस कल्पना में, जब सूर्य उदय होगा तब यीशु मसीह लौटकर आ जाएगा। यही चित्र वह प्रस्तुत कर रहा है। और आकाश पहले ही थोड़ा उज्ज्वल होने लगा है, पहले ही पक्षी गाना आरम्भ कर चुके हैं, अन्धकार पहले ही भोर के आगे झुकने लगा है। अब आप दहलीज़ पर खड़े हैं। आप किनारे पर हैं। समय कम है। और अन्त लगभग आ पहुँचा है।
पौलुस के वचनों में शीघ्रता का सन्देश है। यदि मसीह सूर्यास्त पर लौटने वाला होता, तो आपके पास देर करने के लिए बहुत समय होता। परन्तु पौलुस की इस कल्पना में मसीह सूर्योदय होने पर लौटेगा, जिसका अर्थ है कि समय कम है। कार्य अत्यन्त आवश्यक है। समय अभी है — अर्थात् जागते रहने का समय और कार्य करने का समय।
मैंने पहले ही कहा था कि जीवन में कुछ बातें बहुत लज्जाजनक होती हैं जैसे कि उस समय नींद में होना जब आपको कार्य पर होना चाहिए। जब करने के लिए कार्य हों और निभाने के लिए उत्तरदायित्व हों, तो आपको सोने या आराम करने की कोई आवश्यकता नहीं है। जब कार्य करने के समय पर सोया जाता है, तो वह लज्जाजनक बात है। और पौलुस यह स्पष्ट करता है कि अब आपके पास सोने या आलस्य करने का कोई समय नहीं है — परन्तु आपके पास कार्य है जो आपको पूरा करना है।
निश्चित रूप से, प्रश्न अभी भी शेष रह गए हैं: यह कार्य क्या है? यह कैसा दिखता है? आप परमेश्वर और उसके उद्देश्यों के प्रति पूरी रीति से सचेत व्यक्ति के होने के नाते कैसे जीवन व्यतीत करते? यही हमें हमारे अगले शीर्षक तक ले आता है: परमेश्वर ने आपके लिए कार्य ठहराया है जो आपको करना है।
चर्चा एवं मनन:
- क्या कुछ ऐसे तरीके हैं जिनके कारण आप सोते रहते हैं? क्या ऊपर दी गई किसी भी बात ने आपको दोषी ठहराया है?
- जब आप नीतिवचन 6:9-11 और आलस्य से सम्बन्धित अन्य भाग पढ़ते हैं, तो क्या यह आपके जीवन की किसी वर्तमान वास्तविकता और आदतों का वर्णन करता है? और पश्चाताप करने के लिए आप किस प्रकार उत्तर दे सकते हैं?
2
परमेश्वर ने आपके लिए कार्य ठहराया है।
वे कौन से कार्य हैं जिनके लिए परमेश्वर आपको जागने के लिए कहता है? कौन से कार्य आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं? विश्राम करने और ऊँघते रहने के विपरीत आपको क्या करना है? दूसरे शब्दों में कहें तो: आपको अपने समय का प्रबन्धन और भण्डारी का कार्य किस दिशा में आगे बढ़ना है?
पौलुस कहता है कि, “रात बहुत बीत गई है, और दिन निकलने पर है।” और फिर वह ये शब्द जोड़ता है, “इसलिए।” ये उद्देश्यपूर्ण शब्द हैं, ये शब्द हमें जागने से लेकर सक्रिय होने तक ले जाते हैं। वह जागने की चेतावनी से उस व्याख्या को जोड़ता है कि एक बार जब मसीही लोग उस चेतावनी को सुन लेते हैं, तो उन्हें क्या करना चाहिए: “इसलिए हम अन्धकार के कामों को तजकर ज्योति के हथियार बाँध लें” (रोमियों 13:12)।
जागे हुए लोगों के दो कार्य
पौलुस को यह उतारने और पहनने का रूपक बहुत पसन्द है। वह इस बात को अपने कई पत्रों में इस विचार को व्यक्त करने के लिए उपयोग करता है कि जब आप मसीह के पास आते हैं, तो आपके सामने दोहरा कार्य प्रतीक्षा कर रहा होता है। आपको कुछ कार्यों को बन्द करना होगा और कुछ को आरम्भ करना होगा। आपको कुछ व्यवहारों को छोड़ना होगा और कुछ नए व्यवहार अपनाने होंगे। और वह इसे वस्त्रों के रूप में चित्रित करता है।
इस छोटे से दृष्टान्त में, एक सैनिक सो रहा है, तभी अचानक तुरही बजती है, जो चेतावनी देती है कि शत्रु आक्रमण करने वाला है। वह अपना पजामा पहने हुए बिस्तर पर लेटा हुआ था, परन्तु चेतावनी का सायरन बज गया और उसे बिस्तर से उठकर अपनी वर्दी पहननी पड़ी। इसी प्रकार जब आप मसीह के पास आते हैं तो आपको भी ऐसा ही कुछ करने की आवश्यकता होती है। निश्चित रूप से, आपको जो उतारना और पहनना है, वह वस्त्र नहीं हैं, वरन् व्यवहार, दृष्टिकोण, इच्छाएँ और अन्य बातें है जो पुराने मनुष्यत्व के साथ जुड़ी हुई हैं — वह मनुष्यत्व जो परमेश्वर के उद्देश्य के प्रति आलसी बनकर सोया हुआ था। इन सब को नए मनुष्यत्व में लाने की आवश्यकता है।
यहाँ पौलुस आपको न केवल आगे बढ़ने के लिए वरन् अन्धकार के कामों को त्यागने के लिए भी कहता है। आलस्य करना और धीरे-धीरे बदलाव करना पर्याप्त नहीं है। उस सैनिक को अपने रात्रि में सोने के वस्त्र उतारकर, युद्ध के वस्त्र पहनने होंगे, और मोर्चे की ओर बढ़ना होगा। वह सैनिक अब जाग चुका है, बिस्तर छोड़ चुका है, वर्दी पहन चुका है और कार्रवाई करने के लिए तैयार है।
क्या आप भी ऐसे ही हैं? क्या आप परमेश्वर के महान उद्देश्य के प्रति सचेत हैं और क्या आप उचित कार्यों और दृष्टिकोण को अपना रहे हैं? दूसरे शब्दों में, क्या आप पुराने मनुष्यत्व को त्यागकर नए को अपनाने के लिए परिश्रम कर रहे हैं? मसीही उन्नति केवल कार्यों का विषय नहीं है, वरन् चरित्र का भी है — यह केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आप क्या करते हो, परन्तु इस पर भी कि आप कौन हैं। वास्तव में, यदि आप मसीह के समान व्यवहार करना चाहते हो, तो आपको मसीह के समान बनना भी पड़ेगा। जितना महत्वपूर्ण करना है, उतना ही महत्वपूर्ण बनना भी है, क्योंकि आपके कार्य हमेशा आपके चरित्र का ही अनुसरण करेंगे।
पौलुस अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाते हुए समझाता है कि रात के वस्त्रों को उतारने (या इसके विपरीत, उन्हें पहने रहना) का क्या अर्थ है। आयत 13 में वह कहता है, “जैसे दिन में, वैसे ही हमें उचित रूप से चलना चाहिए; न कि लीलाक्रीड़ा, और पियक्कड़पन, न व्यभिचार, और लुचपन में, और न झगड़े और ईर्ष्या में।”
उचित तरीके से चलने का अर्थ है शालीनता से चलना, गरिमा के साथ चलना, उस तरीके से जीवन जीना जो उस व्यक्ति के लिए उचित और उपयुक्त है जिसका परमेश्वर ने उद्धार किया है और जो परमेश्वर के परिवार का हिस्सा बन गया है। एक मसीही व्यक्ति होने के नाते आपको अशोभनीय रीति से नहीं, वरन् शालीनता से चलना है, नीचता से नहीं, वरन् श्रेष्ठता से चलना है।
पौलुस तीन शब्दों को सूचीबद्ध करता है, जो प्रत्येक मसीही के लिए अशोभनीय और अनुचित जीवन-शैली का वर्णन करती हैं — ऐसे कार्य या मनोभाव जो पुराने जीवन के तरीके से जुड़े हैं, न कि नए जीवन से। यह कोई सम्पूर्ण सूची तो नहीं है, परन्तु यह प्रतिनिधि है।
- सबसे पहले वह “लीला-क्रीड़ा और पियक्कड़पन” का वर्णन करता है। मैं समझता हूँ कि यदि आप ऐसे व्यक्ति हैं जो क्षेत्रीय मार्गदर्शिका में से कुछ हजार शब्द पढ़ते हैं, तो आप सम्भवतः ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो नशे में धुत हो जाते हैं या लीलाक्रीड़ा में भाग लेते हैं (जिनका उल्लेख बाइबल में प्रायः मद्यपान की सभाओं के लिए होता है, न कि केवल यौन अवसरों के लिए)। पर हमें यह भी सोचना चाहिए कि इन शब्दों के पीछे क्या छिपा हुआ है। यद्यपि वे स्पष्ट रूप से मौज-मस्ती और रंगरलियों, पीने-पिलाने और लत-लगने वाले जीवन की ओर संकेत करते हैं, फिर भी वे वास्तव में भटकाने वाले जीवन का प्रतिनिधित्व करते हैं — ऐसा जीवन जो गम्भीर नहीं है और परमेश्वर के द्वारा सौंपे गए कार्यों को पूरा करने जी चराता है। और यह बात सम्भवतः आपको सीधे नशे की तुलना में अधिक समझ में आ सकती है।
- दूसरा “व्यभिचार और लुचपन” है। ये शारीरिक पापों, अर्थात् यौन पापों की ओर संकेत करते हैं। यह दूसरों को अपने सुख के लिए उपयोग करना है और परमेश्वर के उत्तम वरदानों का दुरुपयोग करना है — अर्थात् स्वार्थी उद्देश्यों के उपयोग के लिए, न कि परमेश्वर के उद्देश्यों के लिए। आज के समाज में समय के प्रबन्धन और उसके उचित उपयोग पर जितना गहरा प्रभाव कुछ बातों ने डाला है, उनमें से एक व्यभिचार में फँस जाना है, विशेषकर अश्लील सामग्री के द्वारा।
- फिर आता है “झगड़ा और ईर्ष्या।” ये ऐसे सामाजिक पाप हैं जो आपके सम्बन्धों को दूसरों के साथ प्रभावित करते हैं। आप इतनी सच्चाई और खराई से चलने वाले हो सकते हैं कि स्वयं शराब पीकर नशे में न रहें और न ही किसी ऐसे व्यक्ति के साथ सोएं जो आपका जीवनसाथी न हो, परन्तु यदि आप झगड़ालू हैं, यदि आप लड़ाई-झगड़ा करना पसन्द करते हैं, यदि आप तुच्छ और ईर्ष्यालु हैं, और जो परमेश्वर ने आपको दिया है यदि आप उससे असन्तुष्ट हैं और उसने दूसरों को जो दिया है उससे ईर्ष्या करते हैं, तो आप ऐसे तरीके से जी रहे हैं जो परमेश्वर का अपमान करता है। आप अभी भी सोए हुए हैं, अभी भी ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे कोई पूरी रात सोते हुए बिताता है, विपरीत इसके कि दिन भर प्रभु की सेवा करने के लिए जागे। आप अपने समय के प्रबन्धन को उच्चतम उद्देश्यों की ओर ले जाने वाले अवसरों को खो सकते हैं, क्योंकि आप अपने समय को निम्न स्तर के उद्देश्यों पर गँवा रहे हैं।
आपको जीवन के अप्रिय पहलुओं, भोग-विलास और व्यभिचार तथा निरर्थक झगड़ों में पड़ने के विपरीत यह सोचना चाहिए कि आपको किस कार्य के लिए बुलाया गया है? हम यह सुनने के आदी हो चुके हैं कि हमें मसीह का अनुकरण करना चाहिए या मसीह के समान बनना चाहिए। यहाँ पर पौलुस इस बात को थोड़ा भिन्न तरीके से व्यक्त करता है। आयत 14 में वह कहता है कि, “वरन् प्रभु यीशु मसीह को पहन लो।” जैसे ही आप उन कुरूप व्यवहारों को उतार फेंकते हो, वैसे ही आपको मसीह को पहन लेना है। दूसरे शब्दों में, आपको मसीह को अपने वस्त्र या अपने हथियार के रूप में पहनना है। यह उस पर पूरी रीति से निर्भर होने, उसके प्रति पूरी रीति से समर्पित होने, पूरी रीति से उसके अधीन होने, तथा हर प्रकार से उसका अनुकरण करने का प्रयास करने का चित्र है।
पौलुस इस आयत पर बल देते हुए समाप्त करता है कि आपको “शरीर की अभिलाषाओं को पूरा करने के लिए कोई प्रावधान नहीं करना चाहिए।” इसका अर्थ है कि यह भी विचार न करना कि शरीर को कैसे तृप्त किया जाए या उसकी बुरी लालसाओं को कैसे पूरा किया जाए। इसका अर्थ है पाप की लालसा न करना या पाप करने के विषय में कल्पना भी न करना। इसका अर्थ यह भी है कि उस सन्तुष्टि पर मन न लगाना जो पाप करने से मिलती है, वरन् उस सन्तुष्टि पर मन लगाना जो परमेश्वर की आज्ञा मानने और उसकी इच्छा पूरी करने से मिलती है। यह आपको इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कहता है कि आपका मन पाप करने पर न लगा हो परन्तु उसे मसीह पर लगा होना चाहिए, और आप अपना समय यह सोचने में न बिताओ कि पाप कैसे करना है, वरन् ऐसी योजना बनाने में बिताओ कि प्रभु की सेवा कैसे करनी है। दूसरे शब्दों में, यह तुम्हें अपने समय का प्रबन्धन इस प्रकार से करने के लिए कहता है कि वह समय परमेश्वर को प्रसन्न करने वाली बातों में लगे और उन सब बातों से दूर रहे जो उसे ठेस पहुँचाती हैं।
पापों को एक साथ क्या बाँधता है?
अब हम मूल बात पर आते हैं। इन सभी पापों को जो एक साथ बाँधता है, वह है: प्रेम करने में असफलता होना। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि रोमियों की पुस्तक के अध्याय 1 से 11 तक पौलुस ने सुसमाचार का जो अद्भुत वर्णन किया है, उसमें छिपा हुआ अर्थ प्रेम है! प्रेम करने में असफल होना, सुसमाचार को समझने और लागू करने में असफल होना है। यदि आप रोमियों 1–11 के सिद्धान्तों पर विश्वास करते हैं, तो आपको रोमियों 12–16 के अनुसार जीवन जीना होगा। और वह जीवन पूरी रीति से प्रेम केप्रति समर्पित जीवन है।
सुसमाचार आपको उसी प्रकार प्रेम करने के लिए कहता है जैसे आपसे प्रेम किया गया है। यह आपको मसीह को पहनने के लिए कहता है, जो स्वयं प्रेम का प्रतिरूप हैं। आपका कर्तव्य, आपकी बुलाहट, आपका उत्तरदायित्व, आपको दिया गया सुअवसर यह है कि आप अपना जीवन प्रेम के साथ जिएँ और — दूसरों से भी प्रेम करें, ताकि आपके लिए परमेश्वर का प्रेम, और आपका प्रेम उसके लिए प्रदर्शित हो सके।
इसका अर्थ यह है कि आपकी उत्पादकता (फल) आपसे कहीं अधिक बढ़कर है। आपका कार्य यह नहीं है कि आप कोई अपना ही सोचा हुआ निजी उद्देश्य बनाओ और उसी के लिए जियो, न ही यह कि अपने हृदय की गहराइयों में झाँको और भीतर से कोई मनगढ़ंत अर्थ निकालो। आपका कार्य प्रेम करना है, और अपने समय का प्रबन्धन व देखभाल प्रेम के लिए करना है। फलवन्त होने का सबसे अच्छा कारण यह है कि आप दूसरों के प्रति प्रेम और सेवा के द्वारा परमेश्वर के प्रति अपना प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त कर सको। यही वह जीवन है जिसके लिए परमेश्वर आपको बुलाता है। यही आपका भण्डारी होना और प्रबन्धन करना है।
अपने पड़ोसी से प्रेम करो
प्रत्येक मसीही जन के भीतर फल उत्पन्न करने की गहरी लालसा होनी चाहिए। आपके भीतर बुद्धिमानी के साथ अपने समय का उपयोग करने की गहरी लालसा होनी चाहिए — अर्थात् अपने समय के सर्वोत्तम हिस्से को उत्तम उद्देश्यों के लिए समर्पित करने की, अपने समय का विश्वासयोग्यता और सोच-समझकर इस प्रकार प्रबन्धन करने की लालसा होनी चाहिए कि आप अपने लिए परमेश्वर की इच्छा को पूरा कर सको। उत्पादकता, जैसा कि मैंने परिभाषित किया है कि, “दूसरों की भलाई और परमेश्वर की महिमा के लिए अपने वरदानों, योग्यताओं, समय, ऊर्जा और उत्साह का प्रभावी ढँग से उपयोग करना है।”
उत्पादकता का अर्थ है कि अपने वरदानों का उपयोग करना (वे आत्मिक वरदान जो परमेश्वर ने आपको मुख्यतः अन्य मसीहियों की सेवा के लिए दिए हैं), आपकी योग्यताओं का (वे जन्मजात योग्यताएँ जो उसने आपको दी हैं), आपके समय का (वे दिन और वर्ष जो उसने आपके लिए निर्धारित किए हैं), आपकी ऊर्जा का (आपकी क्षमताओं का उतार-चढ़ाव जो दिन, सप्ताह और यहाँ तक कि जीवन भर चलता है), और आपके उत्साह का (वे विषय जिनके लिए उसने आपको विशेष रूप से प्रबल उत्साह दिया है) — और यह सब इस उद्देश्य से कि दूसरों के लिए भलाई करते हुए उसके नाम की महिमा हो। इसका अर्थ है कि आप जो कुछ हैं और जो कुछ आपके पास है, उसे दूसरों की सेवा में समर्पित कर देना है। “क्योंकि हम परमेश्वर की रचना हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहले से हमारे करने के लिये ठहराए हैं” (इफिसियों 2:10)। जब आप दूसरों की सेवा करके परमेश्वर की महिमा करने के लिए विश्वासयोग्यता के साथ अपने समय की देखभाल और प्रबन्धन करते हैं, तो आप हमारे उद्धारकर्ता के पद चिन्हों पर चल रहे होते हैं, जिसने आपकी सेवा करके परमेश्वर की महिमा करने के लिए अपने समय का प्रबन्धन विश्वासयोग्यता के साथ किया है।
और यही मैं चाहता हूँ कि आप क्षेत्रीय मार्गदर्शिका से सबसे अधिक यह सीखें — कि आपको अपने जीवन को प्रेम की ओर आगे बढ़ाने के लिए कहा गया है। तथा आपको अपने जीवन को लगातार इस सर्वोच्च और उत्तम उद्देश्य की ओर निर्देशित करने के लिए बुलाया गया है।
चर्चा एवं मनन:
- पूर्ण सच्चाई से सोचें, क्या आप उन पापों में से किसी के बन्धन में हैं, जिनका पौलुस ने वर्णन किया है? यदि आप हैं, तो क्या आप समझ सकते हैं कि इसका आपके समय का सच्चाई से प्रबन्धन एवं देखभाल करने की योग्यता पर क्या प्रभाव पड़ेगा? परमेश्वर आपको उन पापों के विषय में क्या करने के लिए कह रहा है?
- दूसरों से प्रेम करके परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने की दिशा में बिताया गया जीवन इतना सन्तुष्टि दायक क्यों होता है? तथा आन्तरिक उद्देश्य की भावना के साथ जीने से यह अधिक सन्तुष्टि दायक क्यों हो जाता है? 3.
- यीशु पर विचार करें और देखें कि उसने अपने समय का कैसे प्रबन्धन किया। आप उसके उदाहरण से क्या सीख सकते हैं?
- परमेश्वर आपको कौन से विशेष कार्य करने के लिए बुला रहा है ताकि आप स्वार्थी जीवन को निःस्वार्थ जीवन में बदल सकें तथा अपनी भोग-विलासिता को दूसरों के प्रति प्रेम व्यक्त करने में बदल सकें?
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प्रबन्धन और देखभाल
की विधि
अंततः यह हमें कार्य करने की विधि की ले जाता है। और कार्य करने की विधि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आपकी बुलाहट बहुत महत्वपूर्ण और आपका कार्य अति आवश्यक है। प्रेम करने के लिए लोग हैं। और सेवा करने के अवसर हैं। तथा देने के लिए आशीष है। और कुछ तरीकों को अपनाकर, आप हर एक अवसर का अधिकतम लाभ उठाने की अपनी योग्यता को बढ़ा सकते हैं।
इसलिए, मैं आपको एक विधि बनाने में सहायता करना चाहूँगा — अर्थात् आदतों और प्रतिबद्धता का एक समूह — जो आपको अपना समय प्रबन्धन में सक्षम बनाएगा। यह केवल विधि नहीं है, और न ही यह परिपूर्ण विधि है। परन्तु यह ऐसी विधि है जो मेरे लिए तथा कई अन्य लोगों के लिए वर्षों से प्रभावी ढँग से सिद्ध हुई है, और तब से ही मैं इसे सिखा रहा हूँ। यह आरम्भ करने के लिए एक बहुत ही अच्छा स्थान है और जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते चले जाएँगे, आप इसे अपने जीवन, अपनी परिस्थितियों और अपने व्यक्तित्व के अनुरूप ढाल सकते हैं। इसमें छह चरण हैं।
पहला चरण: अपनी उत्तरदायित्वों की सूची बनाएँ
पहला चरण यह है कि आप उन उत्तरदायित्वों की सूची बनाएँ जो परमेश्वर ने आपको सौंपी हैं। आपके पास सीमित समय है, परन्तु उसे समर्पित करने के लिए असीमित अवसर हैं। एक वित्तीय प्रबन्धक को न केवल यह निर्धारित करना होता है कि किसमें निवेश करना है, वरन् यह भी कि किसमें निवेश नहीं करना है। और यही बात समय के प्रबन्धक के लिए भी सत्य है। आपको यह विचार करना होगा कि आपके समय का सावधानी पूर्वक उपयोग क्या होगा और आपके समय का असावधानी पूर्वक उपयोग क्या होगा। इस चरण और उसके बाद के चरणों के लिए उत्पादकता कार्य सूची का उपयोग करें।
मैं आपसे यह चाहूँगा कि आप अपने उत्तरदायित्व के क्षेत्रों पर विचार करने के लिए कुछ समय निकालें। उत्तरदायित्व का क्षेत्र वह भूमिका होती है जो परमेश्वर ने आपको सौंपी है या वह कार्य है जो उसने आपको दिया है। उनमें से कुछ आपकी मानवीय रूप से जुड़े हुए स्वाभाविक उत्तरदायित्व होते हैं, और कुछ आपकी परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।
उत्तरदायित्व का एक क्षेत्र जो हम सभी के लिए समान है, वह हम स्वयं हैं। इसे हम “व्यक्तिगत” भी कह सकते हैं। हमें अपने शरीर, आत्मा और मन की देखभाल करनी है — और उन्हें उस वस्तु से परिचित कराना है जो लाभदायक है और उस वस्तु से बचाना है जो हानिकारक है। एक और सर्वव्यापी उत्तरदायित्व का क्षेत्र “परिवार” है, क्योंकि हम सब एक परिवार की इकाई के सदस्य हैं और हमें अपने माता-पिता, बच्चों, भाई-बहनों और सम्भवतः अन्य सगे-सम्बन्धियों के प्रति भी कुछ न कुछ दायित्व निभाने होते हैं। क्योंकि हम मसीही हैं, इसलिए हमारे पास उत्तरदायित्व का एक क्षेत्र “कलीसिया” भी है, क्योंकि परमेश्वर ने हमें आराधना करने वाले और सेवा करने वाले समुदाय के भीतर अपने विश्वास को जीने के लिए बुलाया है। हममें से लगभग सभी के पास “काम” या “व्यवसाय” को करने का उत्तरदायित्व का क्षेत्र होता है, जो उस मुख्य भूमिका को दर्शाता है जो हमारे समय का अधिकाँश भाग ले लेता है — चाहे वह कार्यालय में कार्य करना हो, या स्कूल में पढ़ाई करना हो, या बच्चों की देखभाल करना हो। अन्य क्षेत्रों में “सामाजिक,” “मित्र,” “शौक,” या “पड़ोसी” सम्मिलित हो सकते हैं। ये हमारे जीवन की विविधताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
कुछ मिनट निकालकर ऐसे क्षेत्रों पर विचार करें और उनकी एक सूची तैयार करें। प्रयास कीजिए कि श्रेणियाँ इतनी व्यापक हों कि आपके जीवन का हर उत्तरदायित्व उनमें समा जाए, परन्तु श्रेणियों को इतना छोटा बनाए कि वे पाँच या छह से अधिक न हों। व्यक्तिगत रूप से कहूँ तो मेरे जीवन में निम्नलिखित पाँच श्रेणियाँ हैं: जो इस प्रकार हैं, व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, कलीसिया और व्यवसाय। योजना के अनुसार, मेरे जीवन में ऐसा कुछ भी नहीं है जो मुझे करना हो या जिसका उत्तरदायित्व मुझ पर हो और जो इन श्रेणियों में से किसी एक के अन्तर्गत न आता हो।
एक बार जब आप इन प्रमुख श्रेणियों को निर्धारित कर लें, तो प्रत्येक पर अधिक विस्तार से विचार करने के लिए उन पर पुनः विचार करें। और अब उन उत्तरदायित्वों के क्षेत्रों के अन्तर्गत आने वाले विभिन्न कार्यों, भूमिकाओं या कर्तव्यों की सूची बनाना आरम्भ करें। इसके लिए एक ऐसा प्रश्न सोचें कि: प्रत्येक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में आपको कौन-कौन से विशेष कार्य, भूमिकाएँ, कार्य योजनाएँ या उत्तरदायित्व सौंपे गए हैं? या फिर इसे इस प्रकार से समझें: जब वह दिन आएगा जब परमेश्वर आपसे लेखा-जोखा माँगेगा, तब आपको किन बातों का विश्वासयोग्यता के साथ अपने भण्डारी होने का लेखा-जोखा देना होगा?
“व्यक्तिगत” के अन्तर्गत आप कुछ इस प्रकार से सूची बना सकते हैं:
- शारीरिक स्वास्थ्य (व्यायाम)
- आत्मिक स्वास्थ्य (पवित्रशास्त्र, प्रार्थना, मसीही पुस्तकें)
- व्यक्तिगत उन्नति (सीखना, स्मरण, उन्नति करने के लिए पढ़ना)
या “परिवार” के अन्तर्गत:
- आत्मिक देखभाल और अगुवाई (पत्नी, बच्चे, पारिवारिक आराधना)
- घर (मरम्मत, रख-रखाव)
- आर्थिक देखभाल (बजट, बिल, वित्तीय योजना)
- परिवार की उन्नति (छुट्टियाँ, मनोरंजन)
प्रत्येक उत्तरदायित्व वाले क्षेत्र के लिए ऐसा तब तक करते रहें जब तक कि आपके पास प्रत्येक के अन्तर्गत कई भूमिकाएँ या कार्य सूचीबद्ध न हो जाए।
इस समय तक, आपको यह अच्छी रीति से समझ में आ जाना चाहिए कि आपके जीवन को किसने बनाया है। इस लेखा-जोखा की जाँच करने के पश्चात् आप यह समझ गए होंगे कि परमेश्वर ने आपको किस कार्य के लिए उत्तरदायी ठहराया है और आप यह भी समझ गए होंगे कि वह प्रत्येक कार्य में आपकी सफलता का आकलन करने के लिए किन मानदण्डों का उपयोग करेगा। आप अपने मार्ग पर सही रीति से आगे बढ़ रहे हैं!
दूसरा चरण: अपना उद्देश्य परिभाषित करें
दूसरा चरण वैकल्पिक तो है परन्तु उपयोगी है। अब जब आपने अपने जीवन को समझ लिया है, तो यह विचार करना उपयोगी होगा कि: सफलता क्या होती है? आप कैसे समझ सकते हैं कि आप सफल हो रहे हैं? या उत्तरदायित्व के इन क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए आपको कुछ हफ़्तों या महीनों के पश्चात् किस प्रकार के प्रोत्साहन की आवश्यकता होगी?
मेरा सुझाव है कि आप अपने उद्देश्य का विवरण तैयार करें। इसके लिए दो विकल्प हैं: आप अपने उद्देश्य का मात्र एक ऐसा विवरण तैयार कर सकते हैं जो आपके पूरे जीवन को समाहित करे, या आप जीवन के प्रत्येक क्षेत्र के लिए अलग-अलग उद्देश्यों के विवरण की एक सूची तैयार करें। उद्देश्य का विवरण केवल उद्देश्य का वर्णन है, जो मापदण्ड या मानक के रूप में कार्य करता है। जब आप बीते हुए सप्ताह पर विचार करें, तो आप अपने उद्देश्य का विवरण पढ़ सकते हैं और स्वयं से पूछ सकते हैं कि: “क्या मैंने इसे पूरा किया है?” जब आप आने वाले सप्ताह पर विचार करें, तो आप अपना उद्देश्य विवरण पढ़ सकते हैं और स्वयं से पूछ सकते हैं: “मैं इसे कैसे पूरा करूँगा?”
यहाँ मेरा उस उद्देश्य के विवरण का उदाहरण है जिसे मैं अपनी “कलीसिया” के उत्तरदायित्व के क्षेत्र में पूरा करने के लिए उपयोग करता हूँ: अर्थात् “सिखाना, प्रशिक्षित करना और प्रबन्ध करना ताकि कलीसिया के सदस्य परिपक्व हों और आगे बढ़ते चले जाएँ।” यह मुझे विशेष कार्यों (सिखाना, प्रशिक्षित करना, प्रशासन करना) के लिए प्रेरित करता है, जिनका उद्देश्य एक विशेष उद्देश्य (कलीसिया के सदस्यों का विश्वास में परिपक्व होना और सुसमाचार को साझा करना) को बढ़ावा देना है। यह एक उद्देश्य भी है और उत्तरदायित्व का एक रूप भी है, क्योंकि यह मुझे यह पूछने की अनुमति देता है कि: “क्या मैंने यह किया है?” और “मैं यह कैसे करूँगा?”
इसी विचार के साथ, मैं आपसे यह विचार करने के लिए कहूँगा कि आप या तो एक ऐसा उद्देश्य विवरण तैयार करें जिसमें आपके सभी उत्तरदायित्व के क्षेत्र सम्मिलित हों, या प्रत्येक उत्तरदायित्व क्षेत्र के लिए अलग-अलग उद्देश्य विवरण तैयार करें। ऐसे विवरण तैयार करना कठिन हो सकता है, परन्तु क्यों न प्रयास करके देखा जाए और आने वाले हफ्तों और महीनों में इन्हें लगातार संशोधित करते हुए सुधारते रहें। आपके जीवन की परिस्थितियाँ बदलने के साथ ही वे भी बदल सकते हैं। स्मरण रहे कि प्रमुख सिद्धान्त प्रेम है, और किसी न किसी रूप में इन प्रत्येक उद्देश्यों का सम्बन्ध उसी उद्देश्य को जीने से होना चाहिए।
अपने उद्देश्य को निर्धारित करने की सुन्दरता का एक हिस्सा यह है कि यह आपको आपके समय का उपयोग करने के तरीके के विषय में प्रश्नों का उत्तर देने में सहायता करता है। इससे आपको आने वाले विभिन्न अवसरों के लिए “हाँ” या “न” कहने में अधिक आत्मविश्वास मिलेगा। आप उन अवसरों के लिए “हाँ” कहना सीखेंगे जो आपके उद्देश्य के अनुरूप हैं और उन अवसरों के लिए “न” कहना सीखेंगे जो इसमें बाधा उत्पन्न करते हैं या जो विरोधाभासी हैं।
तीसरा चरण: अपने संसाधनों को चुनें
अब तक आपने अपने जीवन का लेखा-जोखा तैयार कर लिया है और अपना लक्ष्य भी निर्धारित कर लिया है। अब तीसरा चरण अपने संसाधन चुनने का है।
किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए संसाधन आवश्यक होते हैं। कार्य को सही रीति तथा कुशलतापूर्वक पूरा करने के लिए अच्छे संसाधन आवश्यक होते हैं। इसलिए, यह समझदारी होगी कि आप कार्य करने के लिए सही संसाधन चुनने में कुछ प्रयास करें। उत्पादकता की कुशल और विश्वसनीय व्यवस्था के लिए तीन संसाधन आवश्यक हैं। ये तीनों भिन्न-भिन्न हैं, परन्तु परस्पर एक-दूसरे के पूरक हैं। इन तीनों के सहयोग से ही आपकी सामर्थ्य बढ़ती है।
सूचना संसाधन। सूचना संसाधन आपको सूचना एकत्र करने, व्यवस्थित करने, संग्रहीत करने और सूचना प्राप्त करने में सहायता करता है। इस संसाधन का पारम्परिक रूप फाइल रखने की अलमारी है। एक अलमारी में विभिन्न श्रेणियों के अभिलेख रखने के लिए अलग-अलग खाने होते हैं, उन खानों को छोटे हिस्सों में बाँटने के लिए कागज या कपड़े की पट्टी लगी होती है, और व्यक्तिगत चित्र या अभिलेख रखने के स्थान होते हैं। यह एक सरल और प्रभावी व्यवस्था पहले के समय में भी थी और आज भी है। परन्तु आजकल भौतिक की तुलना में बहुत अधिक जानकारी डिजिटल है, इसलिए अधिकाँश लोग अपने कार्यालय में अलमारी के स्थान पर डिवाइस पर ऐप को प्राथमिकता देते हैं। इसके उत्तम विकल्पों में ड्रॉपबॉक्स, एप्पल नोट्स, माइक्रोसॉफ्ट वननोट, नोशन और एवरनोट सम्मिलत हैं।
समय सारणी संसाधन। समय सारणी संसाधन आपको समय को प्रत्यक्ष रूप से देखने, उसे व्यवस्थित करने, तथा यह स्मरण दिलाने की सुविधा देता है कि निकट भविष्य में क्या होने वाला है और साथ ही क्या आवश्यक है। दूसरे शब्दों में, यह एक कैलेंडर है। जहाँ पहले यह आपके फ्रिज या दीवार पर लटका हुआ एक कागज का कैलेंडर हुआ करता था, वहीं अब अधिकाँश लोग अपने फोन पर ऐप आधारित कैलेंडर का उपयोग करने लगे हैं। हर ऐप निर्माता और संचालन तंत्र में एक कैलेंडर सम्मिलित होता है, और ये सामान्यतः अपनी विशेषताओं और क्षमताओं में एक-दूसरे के समान होते हैं। एप्पल कैलेंडर, गूगल कैलेंडर, आउटलुक कैलेंडर— ये कोई भी गलत कार्य नहीं करते हैं, और इनमें गलती ढूँढना बहुत कठिन है।
कार्य संसाधन। कार्य संसाधन आपको अपने कार्य-सूचीबद्ध कार्यों को एकत्रित करने और व्यवस्थित करने की सुविधा देता है, तथा उनकी समय-सीमा निकट आने पर उन्हें स्मरण कराता है। यह संसाधन सूचना संसाधनों और समय सारणी संसाधनों की तुलना में नया है, परन्तु कम महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह उत्पादकता की प्रभावी व्यवस्था में तीसरा और अन्तिम तत्व जोड़ता है। कैलेंडर के ही समान अब लगभग हर ऐप निर्माता और संचालन तंत्र में एक कार्य संसाधन सम्मिलित होता है। एप्पल रिमाइंडर्स, गूगल टास्क और माइक्रोसॉफ्ट टू डू सभी ऐप तुलना करने योग्य और पर्याप्त हैं।
इनमें से प्रत्येक संसाधन के लिए, मैं सुझाव दूँगा कि आप अपने फोन पर उपलब्ध सरल विकल्प से आरम्भ करें और केवल तभी अतिरिक्त विशेषताएँ और चुनौतियों को सम्मिलित करें जब आपको इसकी आवश्यकता हो। अधिकाँश लोगों के लिए अधिकतर परिस्थितियों में, मूलभूत विकल्प ही पर्याप्त होंगे।
अतः विकल्पों पर विचार करने और उनका चयन करने में कुछ समय निकालें जिनका आप उपयोग करेंगे। एक सूचना संसाधन, एक समय सारणी संसाधन और एक कार्य संसाधन चुनें और कुछ मिनट बिताकर यह सीखें कि प्रत्येक कैसे काम करता है।
चौथा चरण: एक व्यवस्था बनाएँ
चौथा चरण एक व्यवस्था का निर्माण करना होता है, जो दोहराई गई और समन्वित विधियों, प्रक्रियाओं और दिनचर्या का एक समूह होता है। एक ऐसी व्यवस्था जो आपके संसाधनों का उपयोग करके यह सुनिश्चित करने में आपकी सहायता करेगी कि आप वही कर रहे हैं जो आपको करना चाहिए, और जो आपको स्मरण रखना चाहिए उसे स्मरण कर रहे हैं, तथा जो सबसे अधिक महत्वपूर्ण है उस पर ध्यान दे रहे हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको एक ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिस पर आप भरोसा कर सकें। आप एक ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जो इतनी विश्वसनीय हो कि आप उस पर भरोसा कर सकें कि वह भविष्य में आपके लिए आवश्यक जानकारी जुटाएगी और जब आपको उन जानकारियों की आवश्यकता होगी, तब उसे एकत्रित कर लेगी, आपको जो कार्य पूरे करने हैं उन्हें स्मरण रखेगी और आपको उन्हें समय पर पूरा करने के लिए मार्गदर्शन करेगी, तथा यह जान सकेगी कि आपको कहाँ होना चाहिए और यह सुनिश्चित करेगी कि जब आपको आवश्यकता हो, तब आप वहाँ पर उपस्थित हों। आप यह सम्पूर्ण सूचनाएँ अपने संसाधनों को सौंप देंगे और अपनी बनाई गई व्यवस्था पर भरोसा करेंगे कि वह इन सूचनाओं को आप तक पहुँचा देंगे।
आपका सूचना संसाधन जानकारी इकट्ठा करने के लिए होता है। इसका उपयोग फ़ाइलें, अभिलेख और अन्य छोटी-छोटी जानकारियाँ जैसे बैठक का विवरण या अचानक मन में आने वाले विचार सुरक्षित रखने के लिए करें। जब भी आपको कोई ऐसी जानकारी मिले जिसकी भविष्य में आवश्यकता हो सकती है, उसे अपने सूचना संसाधन में सुरक्षित कर लें।
आपकी समय सारिणी संसाधन वह स्थान होता है जहाँ आप अपने समय को देखते हुए यह तय कर सकते हैं कि उस समय में क्या-क्या कार्य करने हैं। यह वह स्थान होता है जहाँ आप बैठकों, लोगों से भेंट और अन्य कार्यक्रमों की जानकारी सुरक्षित रख सकते हैं, जिन्हें किसी विशेष स्थान और विशेष समय पर उपलब्ध होना चाहिए। जब आप किसी बैठक की योजना बनाते हैं या किसी कार्यक्रम के लिए समर्पित होते हैं, तो उसे अपनी समय सारिणी में सुरक्षित कर लें।
कार्य संसाधन वह स्थान होता है जहाँ आप कार्य पूरा करने के लिए तय किए गए कार्यों का उल्लेख करेंगे और उन्हें एक निर्धारित तिथि देंगे। सामान्यतः ये पूरी परियोजना के स्थान पर छोटे-छोटे कार्य होंगे। “पुस्तक लिखना” जैसा कार्य करना सम्भवतः उपयोगी न हो, क्योंकि यह बहुत बड़ा, बहुत कठिन कार्य है, तथा इसे पूरा करने में महीनों लग जाते हैं। अधिक उपयोगी यह होगा कि उस बड़े कार्य को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँट दिया जाए, जिन्हें धीरे-धीरे करके पूरा किया जा सके: जैसे—“रूपरेखा बनाना,” “शीर्षकों पर शोध करना,” “भूमिका लिखना,” इत्यादि। मैं प्रत्येक कार्य को क्रिया (अर्थात् क्रिया शब्द) से आरम्भ करने का सुझाव देता हूँ ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उस कार्य को पूरा करने के लिए वास्तव में क्या करने की आवश्यकता है।
एक सुव्यवस्थित संगठनात्मक सिद्धान्त यह है कि “हर वस्तु के लिए एक स्थान हो और समान वस्तुएँ एक साथ जुड़ी हुई हों।” इसका अर्थ यह है कि आपके कार्य, आपके कार्यक्रम, और आपकी जानकारी—सभी का एक निश्चित स्थान होना चाहिए और प्रत्येक वस्तु को उसके उचित स्थान पर रखा जाना चाहिए। इतना ही नहीं, वरन् आपके सूचना संसाधन के भीतर सम्बन्धित जानकारियों को किसी न किसी प्रकार से एक साथ जोड़ा जाना चाहिए, ताकि आपके सभी कर से सम्बन्धित अभिलेख एक स्थान पर हों, साथ ही आपके सभी पारिवारिक चित्र किसी अन्य स्थान पर सुरक्षित रहें।
इसलिए जब आपको किसी महत्वपूर्ण अभिलेख वाला पी.डी.एफ, ईमेल मिले, तो उसे अपने सूचना संसाधन में सुरक्षित करें। और जब आपका अधिकारी आपको अगले मंगलवार को 3 बजे अपने कार्यालय में मिलने के लिए कहे, तो उस बैठक को अपनी समय सारिणी लिख लें। जब आपका जीवनसाथी आपसे घर आते समय दुकान पर रुकने के लिए कहे, तो उस कार्य को अपने कार्य संसाधन में सुरक्षित कर लें। प्रत्येक संसाधन का उपयोग उसी कार्य के लिए करें, जिसके लिए वह बनाया गया है, और उनके बीच स्पष्ट अन्तर बनाए रखने का पूरा प्रयास करें।
पाँचवाँ चरण: समीक्षा करें
पाँचवाँ चरण ऐसा है जो नियमित रूप से चलता रहेगा — कुछ लोगों के लिए दैनिक, कुछ के लिए साप्ताहिक, और शेष लोगों के लिए केवल मासिक होगा। इस चरण में आप अपनी व्यवस्था और संसाधनों की समीक्षा करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सब कुछ सही से चल रहा है। क्योंकि हर व्यवस्था व्यवस्थित होने के विपरीत अव्यवस्था की ओर बढ़ती है और हर व्यक्ति प्रयास करने के विपरीत उदासीनता की ओर बढ़ता है। इसी कारण से कोई भी व्यवस्था एक सीमा तक देखभाल और रखरखाव पर निर्भर करती है।
मैं सुझाव देना चाहता हूँ कि प्रत्येक दिन, या कम से कम प्रत्येक कार्य दिवस के आरम्भ में कुछ समय निकालकर यह सुनिश्चित कर लें कि आपने अपने कार्य संसाधन को देखा है कि उस दिन और आने वाले दिनों में कौन-कौन से कार्य पूरे करने हैं। अपनी समय सारिणी संसाधन पर भी दृष्टि डालें और देखें कि आने वाले दिनों में किन-किन लोगों से भेंट तथा बैठकें निर्धारित की गई हैं। इससे आपको यह समझने में सहायता मिलेगी कि आपके पास कार्यों को पूरा करने के लिए कितना समय उपलब्ध है। एक दृष्टि डालें और फिर यह तय करें कि आप कौन से कार्य पूरे कर सकते हैं या कम से कम उपलब्ध समय में उन्हें पूरा करने की ओर आगे बढ़ सकते हैं। आपकी समय सारिणी आपको बताती है कि कितना समय उपलब्ध है और उस समय में कौन-कौन से कार्य करने के लिए निर्धारित किए जा सकते हैं।
दूसरी नियमित समीक्षा साप्ताहिक या मासिक रूप से की जाती है। इस समीक्षा में आप अपने उद्देश्यों के विवरण के साथ-साथ अपने उत्तरदायित्व के क्षेत्रों पर भी विचार करेंगे कि क्या आप उस प्रकार का जीवन जी रहे हैं जिसके लिए परमेश्वर ने आपको बुलाया है। “मूल रूप से, आप यह पूछेंगे कि क्या आप अपने प्रत्येक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में परमेश्वर और अपने संगी-साथी मनुष्यों के प्रति प्रेम व्यक्त कर रहे हैं।” इतना ही नहीं, वरन् आप यह भी पूछेंगे कि आने वाले सप्ताहों या महीनों में ऐसा करने के लिए आप क्या कदम उठा सकते हैं। यह एक आदर्श समीक्षा है जिसे हर शुक्रवार दोपहर को या सम्भवतः महीने में एक बार किसी शुक्रवार दोपहर को निर्धारित किया जा सकता है।
ये दो समीक्षाएँ आपकी व्यवस्था की देखभाल करने और इसे भली प्रकार से बनाए रखने में सहायता करेंगी। इन्हीं जैसी समीक्षाओं के माध्यम से आप वास्तव में व्यवस्था के अन्तर्गत जीवन जीना आरम्भ करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि यह सही रीति से कार्य कर रही है और भरोसेमंद सिद्ध हो रही है।
छठवाँ चरण: कार्यों को पूरा करें
छठवाँ और अन्तिम चरण है कि कार्यों को पूरा करें! यह आपके समय का प्रबन्धन और देखभाल करने के विषय में है। और आप ऐसा अपनी व्यवस्था का पालन करके और अपने संसाधनों का उपयोग करके करते हैं। अपने संसाधनों का प्रतिदिन उपयोग करें, अपनी नियमित समीक्षाएँ पूरी करें, और व्यवस्था को आपका भरोसा जीतने दें। व्यवस्था को इस प्रकार विकसित करें कि आप उस पर भरोसा कर सकें कि यह वह सब कार्य स्मरण रखे जिन्हें स्मरण रखने की आवश्यकता है, आपको जिस समय पर जहाँ होना चाहिए वहाँ पहुँचने के लिए स्मरण कराए, और आपको उन कार्यों की ओर निर्देशित करे जो परमेश्वर के द्वारा आपको दिए गए उद्देश्य को सबसे अधिक पूरा करते हैं। व्यवस्था को बनाएँ, व्यवस्था का उपयोग करें, व्यवस्था की देखभाल करें, और अपने जीवन की बदलती परिस्थितियों के अनुसार इसे ढालने के लिए तैयार रहें।
चर्चा एवं मनन:
- इनमें से कौन-से चरण आप पहले से लागू कर चुके हैं, चाहे वे यहाँ बताए गए तरीके से हों या किसी अन्य तरीके से हों? कौन सा चरण आपके लिए नया होगा? क्या कोई ऐसा चरण है जो आपको विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण लगता है?
- वह कौन सा मार्गदर्शक या विश्वासयोग्य मित्र है जिसे आप अपनी उत्पादकता व्यवस्था को विकसित करते समय अपना उत्तरदायी बनाए रखने में सहायता के लिए पूछ सकते हैं?
निष्कर्ष
मैंने इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका का आरम्भ इस बात पर बल देकर किया था कि कोई भी उत्पादकता व्यवस्था या समय प्रबन्धन व्यवस्था, अधिक महत्वपूर्ण अपने उद्देश्य को निर्धारित करने से होती है। मुझे विश्वास है कि आपने यह सीखा है कि उद्देश्य महत्वपूर्ण होते हैं और उत्तम प्रबन्धन करना सर्वोच्च उद्देश्यों से ही होता है। मुझे विश्वास है कि आपने यह सीखा है कि अपने समय का प्रबन्धन और देखभाल करने का सबसे उत्तम उद्देश्य प्रेम है—अपने जीवन को सावधानी पूर्वक और आनन्द के साथ दूसरों से प्रेम करने के बड़े उद्देश्य की ओर निर्देशित करके परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम और उसके द्वारा आपके लिए किए गए कार्यों के प्रति अपने सम्मान को प्रदर्शित करना है।
अनुशंसित संसाधन
- डू मोर बेटर: उत्पादकता के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका, टिम चैलिस द्वारा
- व्हाट्स बेस्ट नेक्स्ट: कैसे सुसमाचार आपके कार्य करने के तरीके को बदल देता है, मैट पर्मन द्वारा
- रीडीमिंग प्रोडक्टिविटी: परमेश्वर की महिमा के लिए अधिक कार्य करना, रीगन रोस द्वारा
इन तीनों पुस्तकों में उत्पादकता और समय प्रबन्धन के प्रति स्पष्ट रूप से मसीही दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है, और ये तीनों पुस्तकें आपका ऐसे संसाधनों की ओर मार्गदर्शन करेंगी जो आपके ज्ञान और कार्यान्वयन दोनों में बढ़ने के लिए सहायक सिद्ध होंगे।
विषयसूची
- 1 जागो
- क्या आप सोए हुए हैं?
- यह जागने का समय है
- चर्चा एवं मनन:
- 2
- परमेश्वर ने आपके लिए कार्य ठहराया है।
- जागे हुए लोगों के दो कार्य
- पापों को एक साथ क्या बाँधता है?
- अपने पड़ोसी से प्रेम करो
- चर्चा एवं मनन:
- 3
- प्रबन्धन और देखभाल
- की विधि
- पहला चरण: अपनी उत्तरदायित्वों की सूची बनाएँ
- दूसरा चरण: अपना उद्देश्य परिभाषित करें
- तीसरा चरण: अपने संसाधनों को चुनें
- चौथा चरण: एक व्यवस्था बनाएँ
- पाँचवाँ चरण: समीक्षा करें
- छठवाँ चरण: कार्यों को पूरा करें
- चर्चा एवं मनन:
- निष्कर्ष
- अनुशंसित संसाधन