#19 अपने समय का प्रबन्धन करना

By टिम चैलीज

परिचय

मैं आपके समय के प्रबन्धन और देखभाल के विषय में इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका का आरम्भ उस बात से कर रहा हूँ जिसे मैं सबसे महत्वपूर्ण सुझाव मानता हूँ जिसे आप अपने समय पर नियंत्रण करते हुए परमेश्वर के उद्देश्यों के लिए उपयोग करने के विषय में कभी भी सीख सकते हैं। सम्भवतः यह वह सुझाव न हो जो आप चाहते हैं, परन्तु मुझे पूरा विश्वास है कि यह वही सुझाव है जिसकी आपको आवश्यकता है। यह बात अतिशयोक्ति लग सकती है, परन्तु मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि यह वास्तविकता है। यह वास्तविकता इसलिए है क्योंकि इस सुझाव में समय प्रबन्धन के विषय में आपके विश्वास, ज्ञान या व्यवहार को बदलने की सामर्थ्य है। इसने मेरे और अन्य कई लोगों के जीवन में ऐसा ही किया है।

 

किसी भी उत्पादकता व्यवस्था या किसी भी ऐसी व्यवस्था से अधिक महत्वपूर्ण जो आपको अपने समय पर नियंत्रण करना सिखाती है, वह अपने उद्देश्य को निर्धारित करना है।

 

बहुत से लोग इसलिए एक स्थायी उत्पादकता व्यवस्था बनाने में असफल हो जाते हैं और अपने समय का सच्चाई से प्रबन्धन करना कभी नहीं सीख पाते, क्योंकि वे उद्देश्य निर्धारित करने से पहले ही व्यवस्थाओं पर ध्यान केंद्रित कर देते हैं। इस विश्वास से निराश होकर कि वे समय को व्यर्थ गँवाने के आदी हैं, और नियमित रूप से लोगों भेंट करने से चूक जाते हैं या समय-सीमा को पूरा नहीं कर पाते है, वे व्यवस्थाओं और तकनीक की खोज करते हैं। यह एक समझ में आने वाली प्रतिक्रिया है, परन्तु इसकी समस्या यह है कि वे कारण की उपेक्षा करते हुए केवल लक्षणों का ही समाधान करने का प्रयास करते हैं। वे तुरन्त सुझावों या आसान उपायों की खोज में रहते हैं, जबकि वास्तविक समाधान उससे कहीं अधिक जटिल होता है। वे पाइप की दरार को ठीक किए बिना केवल भूमि पर गिरे पानी को पोंछ रहे होते हैं — अर्थात् समस्या के लक्षणों से जूझ रहे हैं, परन्तु उसके मुख्य कारण तक नहीं पहुँच रहे हैं।

 

इसी कारण, समय के प्रबन्धन और उसके अच्छे उपयोग के लिए यह क्षेत्रीय मार्गदर्शिका सबसे पहले उद्देश्य के विषय से आरम्भ होनी चाहिए — अर्थात् “कैसे” से पहले “क्यों” जैसे प्रश्न का उत्तर दिया जाना आवश्यक है। जब आप यह निर्धारित कर लेते हैं कि आपको अपने समय का प्रबन्धन क्यों करना चाहिए, तब आप स्वयं को एक ऐसी व्यवस्था बनाने के लिए तैयार कर पाते हैं जो आपको आत्मविश्वास और धीरज के साथ ऐसा करने के लिए योग्य बनाएगी।

 

इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका में आपको एक पूरा खण्ड ऐसा मिलेगा जो उत्पादकता के लिए तकनीकों और सम्पूर्ण व्यवस्था बनाने की योजना को बताता है। हो सकता है कि आप अभी इसे नीचे की ओर ले जाकर देखने का प्रयास करें, परन्तु मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप स्वयं को संयमित रखें। मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि आप स्वयं को अनुशासित रखें, ताकि इन तैयारियों से सम्बन्धित बातों में सम्मिलित हो सकें, और यह विचार करें कि परमेश्वर स्वयं आपके समय के प्रबन्धन और अच्छे भण्डारी होने के विषय में क्या कहता है। मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप एक ठोस नींव रखें और उसके बाद ही उस पर एक व्यवस्था का निर्माण आरम्भ करें। इसमें अधिक समय लगेगा और प्रयास भी करना होगा, परन्तु मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि ऐसा करके आपको अधिक प्रतिफल मिलेगा।

 

योजना

मैं आपको बताना चाहता हूँ कि यह क्षेत्रीय मार्गदर्शिका किस प्रकार से रहस्य को प्रकट करेगी।

 

सर्व प्रथम, मैं आपको बाइबल के एक ऐसे भाग पर ले जाऊँगा जो आपको चुनौती भी देगा और प्रेरित भी करेगा। इससे आपको यह समझने में सहायता मिलेगी कि यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है कि आप विश्वासयोग्यता के साथ समय प्रबन्धन के द्वारा प्रभु के प्रति अपने समर्पण को व्यक्त करें। और इससे आपको अपने समय के प्रबन्धन के उद्देश्य को समझने में भी सहायता मिलेगी।

 

ऐसा करने के पश्चात्, हम उत्पादकता के सम्बन्ध में एक विधि पर चर्चा आरम्भ करेंगे। इसमें एक प्रकार की स्वयं की जाँच/मूल्याँकन करना सम्मिलित होगा, जिससे आप यह निर्धारित कर पाएँगे कि परमेश्वर चाहता है कि आप किसी कार्य का भली-भाँति प्रबन्धन और देखभाल करें। और फिर यह आपको एक सरल व्यवस्था बनाने के लिए प्रेरित करेगा जिसे आप अपने जीवन में लागू कर सकेंगे — ऐसी सरल व्यवस्था जो आपके व्यक्तिगत संगठन में बहुत लाभदायक होगी और आपको इस विश्वास में दृढ़ बनाएगी कि आप विचार पूर्वक अपने जीवन को सर्वोत्तम और सर्वोच्च प्राथमिकताओं की ओर निर्देशित कर रहे हैं।

 

और फिर, जैसे ही आप निष्कर्ष पर पहुँचेंगे, तो आप उस व्यवस्था को इस आनन्द के साथ जीना आरम्भ करेंगे कि आप वह सब स्मरण कर रहे हैं जिसे स्मरण करना आवश्यक है, और वह सब कुछ कर रहे हैं जिसे करना आवश्यक है, और उस पर भी ध्यान दे रहे हैं जो आपके ध्यान देने के योग्य है (साथ ही आत्मविश्वास के साथ उसे दूर कर रहे होंगे जो आपके ध्यान देने के योग्य बात नहीं है)। आप सफलतापूर्वक उस समय का प्रबन्धन भली-भाँति उपयोग कर रहे होंगे जो परमेश्वर ने आपको इस संसार में उसके उद्देश्यों को पूरा करने के लिए दिया है।

 

कार्य और विश्राम

जीवन में कुछ ही चीजें दिन भर के कठिन परिश्रम करने के बाद रात को अच्छी नींद लेने से अधिक मधुर होती हैं। यदि आपने कभी बाहर कठिन शारीरिक श्रम करते हुए पूरा दिन बिताया है — जैसे भारी बोझ उठाना, कुल्हाड़ी चलाना, गड्ढा खोदना – तो आप बिस्तर पर लेटकर आराम करने के आनन्द को भली-भाँति जानते होंगे। जीवन में अच्छी नींद से अधिक मधुर कुछ ही कार्य होते हैं।

 

परन्तु जीवन में कुछ कार्य इतने अधिक लज्जाजनक होते हैं जैसे कि जब आपको कार्य करना चाहिए उस समय आप सो रहे हों। जब करने के लिए कार्य हों और निभाने के लिए कर्तव्य हों, तब न तो आपको सोने की आवश्यकता है और न ही विश्राम करने की। आपकी बुलाहट उठने की, सेवा करने और आशीष देने की, प्रेम करने और देखभाल करने की है। जब कार्य किया जाना चाहिए, तो कार्य ही करना चाहिए उस समय सोते रहना लज्जाजनक बात है।

 

विश्राम और नींद, उठना और कार्य करना — ये सब बातें प्रेरित पौलुस के मन में उस समय थी जब उसने रोमियों को पत्र लिखा। आइए, मैं समझाता हूँ।

 

अध्याय 12 से आरम्भ करते हुए, वह यह समझाना आरम्भ करता है कि मसीही लोग एक-दूसरे के प्रति कैसे जीवन व्यतीत करें और यह भी कि अपने चारों ओर के संसार के प्रति कैसे जीवन जिएँ। मुख्य बात प्रेम है। मसीहियों को सदैव दूसरों के साथ ऐसे सम्बन्ध रखने चाहिए जो प्रेम को प्रकट करे।

 

इसी कारण वह ऐसे निर्देश देता है कि, “प्रेम निष्कपट हो” (आयत 9) और “भाईचारे के प्रेम से एक-दूसरे पर स्नेह रखो” (आयत 10)। वह आगे कहता है कि, “आपस में एक सा मन रखो” (आयत 16) और “जहाँ तक हो सके, तुम भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो” (आयत 18)। अध्याय 13 में वह सब का सार प्रस्तुत करते हुए कहता है: “अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख” (आयत 9)। एक मसीही होने के नाते, आपको दूसरों से उसी प्रकार प्रेम करने के लिए कहा गया है जिस प्रकार मसीह ने आपसे प्रेम किया है — अर्थात् नम्रता से, निःस्वार्थ भाव से, बलिदानी रूप से, रचनात्मक ढँग से और उदारता से।

 

और यही वह प्रसंग है, जहाँ दूसरों के प्रति प्रेम की बात करते हुए पौलुस अचानक एक चेतावनी देने वाली घड़ी उठाकर दिखाता है, जिसकी घंटी बज रही है और ऊँची आवाज के साथ टनटन कर रही है — ऐसे चेतावनी जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है। प्रेम के इसी सन्दर्भ में पौलुस मसीहियों से कहता है, “जागने का समय आ गया है।” देखिए वह 13:11–14 में क्या कहता है:

 

और समय को पहचान कर ऐसा ही करो, इसलिए कि अब तुम्हारे लिये नींद से जाग उठने की घड़ी आ पहुँची है; क्योंकि जिस समय हमने विश्वास किया था, उस समय की तुलना से अब हमारा उद्धार निकट है। रात बहुत बीत गई है, और दिन निकलने पर है; इसलिए हम अन्धकार के कामों को तजकर ज्योति के हथियार बाँध लें। जैसे दिन में, वैसे ही हमें उचित रूप से चलना चाहिए; न कि लीलाक्रीड़ा, और पियक्कड़पन, न व्यभिचार, और लुचपन में, और न झगड़े और ईर्ष्या में। वरन् प्रभु यीशु मसीह को पहन लो, और शरीर की अभिलाषाओं को पूरा करने का उपाय न करो।

 

मैं चाहता हूँ कि आप इस जागने के बुलावे को सुनें। और साथ ही मैं यह भी चाहता हूँ कि आप इसका पालन करें। मैं चाहता हूँ कि आप जागें ताकि आप उन उत्तरदायित्वों को पूरा कर सकें जिन्हें परमेश्वर ने आपको सौंपा है।

 

मैं पहले ही कह चुका हूँ कि इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका का उद्देश्य व्यावहारिक होना है — ताकि अन्त में यह कार्य व्यवस्था की ओर मार्गदर्शन करे। और मैंने पहले ही प्रतिज्ञा की है कि हम वहाँ तक पहुँचेंगे। परन्तु इससे पहले कि हम यह तय करें कि कार्य कैसे किया जाए, हमें यह निर्धारित करना होगा कि क्या किया जाना चाहिए, और उससे भी पहले, यह समझना होगा कि हम जो करते हैं उसका महत्व प्रथम स्थान परक्यों  है। इसलिए हम अपना ध्यान रोमियों में इन वचनों से मिलने वाले दो कार्य के बुलावे की ओर मोड़ते हैं — ऐसे बुलावे जो हमें यह सिखाएँगे कि परमेश्वर के द्वारा हमें दिए गए समय का विश्वासयोग्य से प्रबन्धन और देखभाल करना कितना महत्वपूर्ण है। उचित आधारशिला रखने के पश्चात् ही हम ऐसी व्यवस्था बना सकते हैं जो सफल और दीर्घकालिक सिद्ध होगी।

 

इन आयतों के माध्यम से, परमेश्वर हमें जागने और कार्य करने के लिए कहता है। और अपने समय का प्रबन्धन और देखभाल करने में विश्वासयोग्य होने के लिए, हमें ठीक यही करने की आवश्यकता है — अर्थात् अपनी नींद से जागना और पूरी लगन से वह बनना जो परमेश्वर हमें बनने के लिए कहता है और वह करना जो परमेश्वर हमें करने के लिए कहता है।

 

प्रबन्धन

पौलुस के निर्देशों पर ध्यान देने से पहले, हमें अपने समय और जीवन जीने के तरीके से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धारणा पर ध्यान देना होगा: और वह भण्डारी होना है। भण्डारी एक प्रबन्धक या पर्यवेक्षक होता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि एक भण्डारी स्वामी नहीं होता है। एक भण्डारी का कार्य दूसरे व्यक्ति की सम्पत्ति के उत्तरदायित्व को स्वीकार करना होता है। जब बात धन की आती है तो मसीही लोग भण्डारीपन से पहले ही परिचित होते हैं — क्योंकि हम जानते हैं कि सारा धन अंततः परमेश्वर का ही है, इसलिए हम अपने धन के स्वामी नहीं हैं, वरन् परमेश्वर के धन के भण्डारी हैं। इसी प्रकार, हम अपने वरदानों और योग्यताओं के भी स्वामी नहीं हैं, वरन् उन वरदानों और योग्यताओं के भण्डारी हैं जिन्हें परमेश्वर ने अनुग्रह के साथ हमें दिया है। और जो बात धन और गुणों के विषय में सत्य है, वही समय के विषय में भी सत्य है। समय परमेश्वर का है, क्योंकि वही इसे हमें देता है और वही हमें इसके उपयोग के तरीके का लेखा देने के लिए उत्तरदायी ठहराएगा।

 

इसलिए, इफिसुस की कलीसिया को लिखे अपने पत्र में पौलुस कहता है, “इसलिए ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों के समान नहीं पर बुद्धिमानों के समान चलो। और अवसर को बहुमूल्य समझो, क्योंकि दिन बुरे हैं” (इफिसियों 5:15-16)। अतः हमें केवल दिए गए समय का उपयोग ही नहीं करना है, वरन् समय का सर्वोत्तम रीति से उपयोग करना है। और भी अधिक शाब्दिक रूप से कहें, तो हमें समय का “बहुत अच्छा” उपयोग करना है, अर्थात् समय का इस प्रकार से उपयोग करना है कि हमें सबसे उच्च और सर्वोत्तम परिणाम मिल सकें।

 

इसी प्रकार, मूसा प्रार्थना करता है, “हमको अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएँ” (भजन संहिता 90:12)। हमारे दिनों की गिनती करने का अभिप्राय यह है कि हम उन दिनों के महत्व के प्रति सचेत रहें और प्रत्येक दिन को सावधानी पूर्वक जीने के लिए समर्पित रहें। हमारा जीवन बहुत छोटा है, परन्तु प्रत्येक दिन परमेश्वर की ओर से दान दिया गया है जिसे उसके उद्देश्यों के लिए ग्रहण किया जाना चाहिए और अधिक से अधिक उपयोग किया जाना चाहिए।

 

इसलिए, हम समय के साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं जैसा कि हम धन, योग्यताओं और अन्य बहुत सी वस्तुओं के साथ करते हैं — अर्थात् ऐसे लोगों के रूप में जिन्हें परमेश्वर की ओर से एक बहुमूल्य वरदान मिला है और जिन्हें इसे विश्वासयोग्यता के साथ तथा भली-भाँति प्रबन्ध करने के लिए बुलाया गया है। अच्छे ढँग से जिया गया जीवन ही भण्डारी का जीवन होता है।

यह समझते हुए कि हम समय के स्वामी नहीं हैं, वरन् भण्डारी हैं, और यह जानते हुए कि परमेश्वर के सामने हमें उस समय के लिए उत्तरदायी ठहराया जाएगा जो वह हमें देता है, आइए अब हम पौलुस की चेतावनी पर ध्यान देंगे।

 

चर्चा एवं मनन:

  1. क्या आप भण्डारीपन की बाइबल आधारित धारणा और उसका स्वामित्व से तुलना करना समझते हैं? क्या आप इस बात से सहमत हैं कि भण्डारीपन आपको इस बात के लिए उत्तरदायी ठहराता है कि आप अपना समय अपने उद्देश्यों को पूरा करने के नहीं, परन्तु परमेश्वर के उद्देश्यों को पूरा करने में बिताएँगे?
  2. क्या आपको लगता है कि आप वर्तमान में अपने समय के प्रति एक विश्वासयोग्य भण्डारी हैं? यदि आज परमेश्वर आपको वह सारा समय स्मरण कराए जो उसने आपको मसीही में आने के बाद से दिया है, और फिर उस समय का लेखा-जोखा माँगे, तो आप उसे क्या उत्तर देंगे?
  3. आपको क्या लगता है कि आप वर्तमान में किस प्रकार से अपने समय का अच्छा उपयोग कर रहे हैं और किन तरीकों से आप उन्नति करने की आवश्यकता के प्रति सचेत हैं?

ऑडियो मार्गदर्शिका

ऑडियो ऑडियो
album-art

00:00

#19 अपने समय का प्रबन्धन करना

हमारे समाचार पत्र की सदस्यता लें और साप्ताहिक बाइबल और शिष्यत्व सुझाव प्राप्त करें।