#91 धन और सम्बन्ध: आर्थिक विश्वासघात के बाद बाइबल आधारित शान्ति पाना

By Dr. Richard Perhai Dr. Larry Oats

परिचय

मैंने इसी दृश्य को बार-बार घटित होते हुए देखा है, इतनी बार कि अब गिनना भी कठिन हो गया है। यह प्रायः सहायता करने की एक सच्ची इच्छा से आरम्भ होता है। मैं गैरी नामक एक व्यक्ति को जानता था, जो एक अच्छा और भरोसेमन्द व्यक्ति था, जिसने कड़ा परिश्रम किया और थोड़ी बचत भी कर रखी थी। उसके साले पीट का सपना था कि वह उद्यान-सज्जा का व्यवसाय आरम्भ करे। उसके पास दूरदृष्टि और कठोर परिश्रम करने की इच्छा तो थी, परन्तु उसके पास पूँजी नहीं थी। इसलिए गैरी ने वही किया जो उसके विचार में एक अच्छा मसीही परिवार के पुरुष को करना चाहिए था: उसने पीट को पन्द्रह हजार डॉलर (लगभग चौदह लाख रुपये) उधार दे दिए। न कोई ब्याज, न कोई औपचारिक अनुबन्ध, केवल हाथ मिलाया और कहा—कि “जब तुम्हारे पास हो, तब मुझे लौटा देना।”

छः महीने के भीतर ही वह व्यवसाय बन्द हो गया। कुछ घाटे वाले अनुबन्ध और एक खराब हो चुके ट्रक ने उस पन्द्रह हजार डॉलर को डूबा देने के लिए पर्याप्त काम किया। और तभी से उनमें बातचीत बंद हो गई। पीट ने फ़ोन करना बन्द कर दिया। उसने रविवार के दिन दोपहर के भोजन पर आना भी छोड़ दिया। धन्यवाद-दिवस तक आते-आते गैरी के सामने एक कुर्सी खाली पड़ी रहती थी। पीट उस व्यक्ति का सामना करने में बहुत लज्जित था, जिसका वह ऋणी था, और गैरी इतना क्रोधित था कि पहल करके उस दूरी को मिटा नहीं सका। वह खाली कुर्सी केवल किसी व्यक्ति की अनुपस्थिति का प्रतीक नहीं थी; वह टूटी हुई प्रतिज्ञा और उस ऋण का स्मारक बन गई थी, जो अब दोनों के बीच एक दीवार बन चुकी थी।

गैरी ने बाद में मुझे बताया कि अब उसे उस धन की कोई चिन्ता नहीं है। वह अपने मित्र को वापस पाने के लिए तीस हजार डॉलर भी दे देता। परन्तु ऋण और उससे उत्पन्न आर्थिक तनाव ने अपना ही एक जीवन धारण कर लिया था। वह बैंक खाते से निकलकर भोजन-कक्ष की मेज तक आ पहुँचा था और अब सबके जीवन से शान्ति और आनन्द को धीरे-धीरे छीन रहा था।

जब आप अपने निकट सम्बन्धियों में से किसी व्यक्ति—किसी मित्र, भाई या चचेरे भाई—को पैसा उधार देते हैं, तो आपको लगता है कि आप केवल एक आर्थिक लेन-देन कर रहे हैं। परन्तु ऐसा नहीं है। आप एक ऐसी परछाई को उत्पन्न कर रहे होते हैं, जो आप दोनों के साथ उन प्रत्येक स्थानों तक जाती है, जहाँ आप साथ-साथ होते हैं। मैं इसे बकाए धन की परछाईं कहता हूँ।

यह वह असहज क्षण होता है जब किसी जन्मदिन की पार्टी में आप देखते हैं कि वे किसी और के लिए उपहार खरीद रहे हैं, और तब आपके मन में आता है कि उनके पास उसके लिए पैसे हैं, पर मेरे लिए नहीं हैं? यह उस समय दिखाई देता है जब आपके कमरे में प्रवेश करने पर वे अपनी दृष्टि भूमि की ओर झुका लेते हैं। मित्रों के बीच का ऋण सम्बन्धों की शक्ति-सन्तुलन को बदल देता है। यह बराबरी के सम्बन्ध को स्वामी और सेवक के सम्बन्ध में बदल देता है। नीतिवचन 22:7 कहता है कि उधार लेने वाला उधार देने वाले का दास होता है। जब हम बाइबल में ऋणों को देखते हैं, तो प्रायः हम इसे बैंकों और ब्याज-दरों के सन्दर्भ में समझते हैं, परन्तु यह बात घर के बैठक-कक्ष में भी उतनी ही सत्य है।

बकाया धन की परछाईं ईमानदारी को असम्भव बना देती है। जब ऋण का विषय सामने आता है, तो आप केवल “गैरी और पीट” नहीं रह जाते। अब आप “वह व्यक्ति बन जाते है जो ऋणी है” और “वह व्यक्ति जिसका पैसा लिया गया है।” देनदारी वह दृष्टिकोण बन जाता है जिसके द्वारा आप हर व्यवहार को देखने लगते हैं। यह ऋण देने वाले को सन्देह पूर्ण बना देता है और ऋण लेने वाले को अपनी सफाई देने की स्थिति में ला देता है। और सबसे बुरी बात यह है कि आप दोनों में से कोई भी इसके विषय में बात नहीं करना चाहता है, इसलिए वह परछाई और भी बड़ी और अधिक कठोर होती चली जाती है, जब तक कि अन्ततः वह किसी एक व्यक्ति को उस स्थान से बाहर जाने के लिए विवश नहीं कर देती।

कड़वाहट की गणना

मैं ऐसे पुरुषों के साथ बैठा हूँ जिन्होंने अपने जीवन के कई वर्ष आर्थिक समस्याओं से जूझते हुए बिताए हैं और जिसे मैं कड़वाहट की गणना कहता हूँ, वे ऐसा करते रहे हैं। वे रात में जागते रहते हैं, छत को देखते हुए यह गणना करते रहते हैं कि उनसे वास्तव में क्या “छीन लिया गया” है। वे केवल मूलधन की गिनती नहीं करते; वरन् वे छूटे हुए अवसरों, खोई हुई नींद और उस कथित अनादर को भी गिनते रहते हैं जो उस आर्थिक विश्वासघात के कारण उन्हें सहना पड़ा, वे इस प्रयास में अपने मन में बार-बार गणना करते रहते हैं, कि आर्थिक कड़वाहट के तराजू को बराबर करने का कोई उपाय मिल सके।

परन्तु इस प्रकार की गणना के विषय में बात यह है कि यह आत्मा को सड़ा देती है। कड़वाहट एक बार-बार दोहराई जाने वाली गणना है। जितना अधिक आप अपनी हानि की गणना करते हैं, उतना ही अधिक आप खोते चले जाते हैं। आप अपनी शान्ति खो देते हैं, अपने परिवार के साथ वर्तमान में रहने की योग्यता को खो देते हैं, और साथ ही अपना आनन्द भी खो देते हैं। बाइबल में क्षमा के विषय में देखते हुए, इब्रानियों 12:15 हमें चेतावनी देता है कि हम इस बात का ध्यान रखें कि कोई “कड़वाहट की जड़” न फूट निकले, जो कष्ट उत्पन्न करे और बहुतों को अशुद्ध कर दे। कड़वाहट केवल एक व्यक्तिगत भावना नहीं है; वरन् यह एक विष है जो आपके सभी अन्य सम्बन्धों में फैल जाता है।

जब आप कड़वाहट की गणना करने में फँसे रहते हैं, तब वास्तव में आप स्वयं ही अपना न्यायी और न्यायपीठ बनने का प्रयास कर रहे होते हैं। आप संसार को अपनी शर्तों के अनुसार न्यायपूर्ण बनाने का प्रयास कर रहे होते हैं। परन्तु जितना अधिक आप यह माँग करते हैं कि दूसरा व्यक्ति अपने किए हुए का मूल्य चुकाए, उतना ही आपको यह समझ में आने लगता है कि वास्तव में आप धन की खोज में नहीं हैं। आप तो अपने पक्ष की पुष्टि चाहते हैं। आप चाहते हैं कि उन्हें अपने किए का बोझ महसूस हो। परन्तु प्रायः वे पहले से ही उस बोझ को महसूस कर रहे होते हैं। वे भी उतने ही इस गणना में फँसे हुए होते हैं जितने आप फँसे होते हैं। अन्तर केवल इतना है कि वे अपनी लज्जा की गणना कर रहे होते हैं, जबकि आप अपने क्रोध की गणना कर रहे होते हैं।

सुसमाचार का दृष्टिकोण

आप संभवतः यह सोच रहे होंगे कि एक पास्टर आपके बटुए या आपके साले के असफल व्यवसाय के विषय में इतना अधिक समय क्यों दे रहा है। इसका कारण यह है कि यीशु ने स्वर्ग और नरक के विषय में जितना कहा, उससे भी अधिक धन, सम्बन्धों, विरासत और व्यवसाय जैसे विषयों के विषय में शिक्षा दी है। यीशु के एक-चौथाई से अधिक दृष्टान्त धन और सम्बन्धों, विरासत और व्यवसाय से सम्बन्धित हैं। और यीशु ने हमारे खजाने और हमारे हृदय के बीच के सम्बन्ध को बहुत स्पष्ट रूप से बताया है। मत्ती 6:21 में वह कहता है, क्योंकि जहाँ तेरा धन है, वहाँ तेरा मन भी लगा रहेगा।

परन्तु यह बात दूसरी ओर से भी उतनी ही सत्य है। जहाँ आपकी हानि हुई होती है, वहीं आपका मन लगा रहता है। यदि आपका मन पन्द्रह हज़ार डॉलर के गड्ढे में दबा हुआ है, तो आप मसीह के पीछे चलने के लिए स्वतन्त्र नहीं हैं। आप उस ऋण से बँधे हुए हैं। आप ऐसे जी रहे हैं मानो आपकी सुरक्षा और आपका मूल्य इस बात पर निर्भर करता हो कि पीट कभी आपका पैसा लौटाएगा या नहीं।

यह मार्गदर्शिका आपका पैसा वापस पाने के विषय में नहीं है। यह उससे कहीं अधिक मूल्यवान बात के विषय में है: यह क्षमा करना सीखने और अपने प्राण को फिर से पाने के विषय में है। यह इस बात को सीखने के विषय में है कि क्रूस के दृष्टिकोण से अपनी हानि को कैसे देखें, ताकि क्षमा के विषय में बाइबल-आधारित समझ प्राप्त हो सके। हम ऐसे उद्धारकर्ता की सेवा करते हैं जिसने सबसे बड़ी हानि स्वयं उठाई, ताकि हमें सबसे बड़ी विरासत प्राप्त हो सके। यदि हम उसके अनुयायी होने का दावा करते हैं जिसने हमारा अनन्त ऋण चुका दिया है, तो हमें बाइबल में ऋण-क्षमा के विषय में बात करनी होगी और यह भी समझना होगा कि अपने आसपास के लोगों के सीमित ऋणों के साथ कैसे व्यवहार करें।

अब हम इस विषय की गहराई में उतरेंगे अर्थात् ऐसे संसार में, जहाँ लोग असफल हो जाते हैं, जब व्यवसाय बन्द हो जाते हैं, और भाई एक-दूसरे को निराश कर देते हैं, वहाँ प्रबन्ध के बाइबल-आधारित सिद्धान्तों को कैसे लागू किया जाए। हम ऋण से कैसे निपटें, बोने और काटने के सिद्धान्त का एक सरल ईश्वर विज्ञान सम्बन्धी आधार क्या है, और क्यों कभी-कभी आपके आत्मिक स्वास्थ्य के लिए सबसे उत्तम बात यह होती है कि आप ऋण को क्षमा करना सीखें, उधारी की पर्ची को उठाएँ और उसे जला दें। यह आसान नहीं होगा, और उस समय यह आपको निश्चित रूप से “न्यायसंगत” भी नहीं लगेगा। परन्तु उस छोटी सी आग के दूसरी ओर ऐसी शान्ति है, जिसे कोई भी बैंक खाता कभी नहीं दे सकता। आइए, यहीं से आरम्भ करते हैं।

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