#90 परमेश्वर का समय: परमेश्वर की योजना पर भरोसा करना सीखना

By Alex Hammond

परिचय

“परन्तु मुझे यह अभी चाहिए!” उस बच्चे की अधीरता अब भयंकर जिद में बदल रही थी। यह मायने नहीं रखता कि माँ ने उसे कितने भी तर्क देकर बता दिया हो, परन्तु वह अपने बेटे को यह नहीं समझा पाई कि केक अभी पूरी तरह से पका नहीं है, और पकने के बाद भी, उस पर सजावट करने से पहले उसे ठण्डा होने देना आवश्यक होगा। वह जानती है कि अधपका केक अच्छा नहीं लगता – और स्प्रिंकल्स, फ्रॉस्टिंग और मोमबत्तियाँ लगे हुए – केक के लिए प्रतीक्षा करनी ही पड़ेगी। परन्तु उस बेटे की दृष्टि में, अभी और केक खाने के बीच का समय उसे अनन्तकाल जैसा लग रहा था, और जो स्त्री उसे वह वस्तु खाने से रोक रही थी, शायद वही इस बात को सबसे अच्छे से जानती थी। इसलिए, अपनी जिद पूरी करवाने के लिए, वह छोटा बच्चा अपनी चम्मच उठाकर उसे कमरे के दूसरी तरफ फेंकने की तैयारी करता है, क्योंकि इसमें कोई सन्देह नहीं कि जिसे वह चाहता है, उसे पाने का यही आसान तरीका है।

“परन्तु मुझे यह अभी चाहिए!” अन्तिम बार ये शब्द आपके मुँह से कब निकले थे? या, इसके बजाय, अन्तिम बार आपने ये शब्द अपने हृदय में कब दोहराए थे? अन्तिम बार आपको यह दृढ़ विश्वास कब हुआ था कि सबसे अच्छा तो यही होता कि आपको जो चाहिए था, वह आपको तभी मिल जाता, जब आप उसे चाहते थे?

शायद मैं आपको नहीं जानता, और शायद इस जीवन में हम कभी आमने-सामने न मिल पाएँ, फिर भी मुझे निश्चय है कि आप धीरज धरने और परमेश्वर के समय पर भरोसा करने में संघर्ष करते होंगे। हो सकता है कि आपके जीवन के हर क्षेत्र में ऐसा न हो, परन्तु मुझे लगता है कि यदि आप एक पल रुककर सोचें, तो आप तुरन्त ही अपने जीवन के उन क्षेत्रों के बारे में सोच पाएँगे, जिनमें आप जानते हैं कि आपमें धीरज की कमी है: जैसे केक के पकने की प्रतीक्षा करना; रेस्त्राँ में मेज के लिए प्रतीक्षा करना; या अपने आगे वाली गाड़ी के हटने की प्रतीक्षा करना, क्योंकि उसे यह नहीं दिख रहा कि बत्ती हरी हो चुकी है?

और धीरज या भरोसे से जुड़ा हर संघर्ष इतना मूर्खतापूर्ण नहीं होता, जितने कि ये हैं। आप अपने परिवार के उस सदस्य के लिए कब से प्रार्थना कर रहे हैं, जिसने उद्धार नहीं पाया है? आपकी प्रार्थना-डायरी के कितने पन्ने आपके आँसुओं की बूंदों से दागदार हुए, जब आपने परमेश्वर से एक सन्तान पाने की याचना की? कितनी बार आप इस पर हैरान रह गए हैं कि आखिरकार कब प्रभु आपके शरीर की पीड़ा दूर करेगा, ताकि आप फिर से एक सामान्य जीवन में लौट सकें? आप परमेश्वर के समय की प्रतीक्षा करने में फँसे हुए हैं, और यह दु:ख देता है।

स्पष्ट रूप से कहें तो, बदलाव की हर चाहत अविश्वास का उदाहरण नहीं होती। कभी-कभी “हे यहोवा, कब तक?” एक भरोसेमन्द, फिर भी दु:खी हृदय की पुकार होती है। परन्तु हमारा कुड़कुड़ाना शायद ही कभी पूरी तरह भरोसे के साथ होता है, और अक्सर अच्छी बातों के लिए की गई प्रार्थनाएँ भी हमारे हृदयों में अविश्वास उत्पन्न कर सकती हैं। ऐसा विशेष रूप से उस समय अधिक होता है, जब हमें लगता है कि जिस बात की हम इच्छा रखते हैं, उसकी प्राप्ति के लिए हम उसके समीप नहीं हैं। इसी कारण से सुलैमान ने लिखा, “जब आशा पूरी होने में विलम्ब होता है, तो मन शिथिल होता है, परन्तु जब लालसा पूरी होती है, तब जीवन का वृक्ष लगता है” (नीति. 13:12)। धीरज और परमेश्वर के समय के बारे में यह बाइबल की एक महत्वपूर्ण आयत है, जिसे याद रखा जाना चाहिए। प्रतीक्षा करना दु:ख देता है, और दु:खी लोग हमेशा तर्कसंगत रूप से काम नहीं करते।

तो फिर हम धीरज धरने में संघर्ष क्यों करते हैं? परमेश्वर के समय के अधीन होना इतना कठिन क्यों है? यह बात एक अकाट्य सत्य पर आकर टिक जाती है कि: हम पापी हैं।

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