#31 मसीह में बने रहना

By द्वारा Vince Antonucci

परिचय

“जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा; मेरे प्रेम में बने रहो” (यूहन्ना 15:9)

परमेश्वर आप से क्या चाहता है?

कुछ लोग कहते हैं – धर्म। मैं ऐसा नहीं मानता हूँ। मेरा मानना है कि हम इससे बेहतर तर्क दे सकते हैं कि यीशु धर्म को स्थापित करने नहीं, बल्कि उसे नष्ट करने आया।

अन्य लोग कहते हैं कि यह धर्म नहीं है; परमेश्वर संबंध चाहता है। मैं मानता हूँ कि यह सत्य है। किन्तु मुझे नहीं लगता कि यह पर्याप्त है।

एक बार यीशु ने कहा,

मैं दाखलता हूँ: तुम डालियाँ हो। जो मुझ में बना रहता है और मैं उसमें, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली के समान फेंक दिया जाता, और सूख जाता है; और लोग उन्हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं। यदि तुम मुझ में बने रहो और मेरा वचन तुम में बना रहे, तो जो चाहो माँगो और वह तुम्हारे लिए हो जाएगा। मेरे पिता की महिमा इसी से होती है कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे। जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा; मेरे प्रेम में बने रहो। (यूहन्ना 15:5-9)

“बने रहने” का अर्थ है भीतर निवास करना। यीशु कहता है कि वह चाहता है कि आप उसमें निवास करें, और वह आप में निवास करे। यह मेरे लिए मात्र संबंध से कहीं अधिक प्रतीत होता है।

मान लीजिए कि आप गर्भ में एक शिशु का साक्षात्कार करें और पूछें, “क्या आपका अपनी माता के साथ संबंध है?”

मुझे पूरा विश्वास है कि शिशु आपको उलझन-भरी दृष्टि से देखेगा। गर्भ में बच्चे कुछ हद तक अजनबी जैसे दिखाई देते हैं, इसलिए हो सकता है कि आपको उनकी उलझन का भाव न समझ में आए, परन्तु वह ऐसा करेगा।

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#31 मसीह में बने रहना

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