#26 डिजिटल युग में शिष्यता
परिचय
आज, सोशल मीडिया तथा हमारे ईमेल इन-बॉक्स उन बातों के सारांशों से, जिन्हें लोग सोचते हैं कि हमें पता होनी चाहियें, भरे पड़े हैं, इसलिये कि कहीं आप इन से चूक गए हों।
यह लिखते समय, प्रतिदिन, मैं सन्देशों की एक और श्रृंखला देखता हूँ, जो मुझे बताती है कि AI के संसार में नवीनतम खोज क्या हैं — केवल उसी सप्ताह या महीने की ही नहीं, परन्तु पिछले चौबीस घण्टों में, और मैं किस जानकारी से चूक गया हूँ! चीजें बहुत तेज़ी से आगे बढ़ और बदल रही हैं।
धन्यवाद की बात है कि परमेश्वर का वचन न तो बढ़ रहा है, और न ही बदल रहा है। इस प्राचीन पुस्तक में वह सब कुछ है जो हमें, फ्लिप-फोन, आई-फोन, या मेटावर्स के युग में भी, विश्वासयोग्यता से मसीही जीवन जीने के लिए पता होना चाहिये।
जैसे कि हम बाद के अध्यायों में देखेंगे, इक्कीसवीं सदी में तेज़ी से हुई तकनीकी प्रगति के कई नकारात्मक परिणाम भी हुए हैं, परन्तु अनेकों आशीषें भी आई हैं। मैं अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता हूँ कि जिस समय हम ऑस्ट्रेलिया से आकर अमेरिका में बसे थे, तब मेरे और मेरी पत्नी के लिए कितना कठिन होता, यदि ऑस्ट्रेलिया में पीछे छूटे हुए हमारे परिवार तथा मित्र जनों को हम सन्देश नहीं भेज पाते, या फेस टाईम पर उन से संपर्क नहीं कर पाते। जब हम उस भलाई को देखते हैं जो आई है, तो हमें परमेश्वर को धन्यवाद देना चाहिये, क्योंकि हम जानते हैं कि अन्ततः प्रत्येक अच्छी बात उसी से आती है (याकूब 1:17)। सुसमाचार के प्रचार को बढ़ावा देने के लिये, आज हमें जो भी उपलब्ध करवाया गया है, हमें गम्भीरता से उसका भण्डारी होना है। आप कलीसिया के इतिहास में एक ऐसे समय में रहते हैं, जो पिछली किसी भी सदी से बिलकुल भिन्न है। कोई भी, तोड़ों के दृष्टान्त (मत्ती 25:14-30) के दुष्ट सेवक के समान नहीं होना चाहता है, और न ही भयभीत होकर, हमें सौंपे गए की बढ़ोतरी की संभावनाओं को छुपाए रखना और बाधित करना चाहता है।
किन्तु साथ ही, मसीही होने के नाते, हमारी बुलाहट न केवल सुसमाचार की बढ़ोतरी के लिए, हमें उपलब्ध तकनीकी के भण्डारी होना है, वरन् उसकी कमियों — और उन बुराइयों — से भी अच्छी तरह से अवगत होना है जो तकनीक से आ सकती हैं। मान लीजिये कि आप निष्क्रिय रहते हैं, संसार जिसे स्वीकार कर लेता है, उसे आप भी बिना जाँचे, स्वीकार कर लेते हैं। ऐसे में, निःसन्देह, यह कार्य-विधि आप के मसीही जीवन के फलवन्त होने पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी, क्योंकि अपनी स्वाभाविक रीति से, संसार न तो परमेश्वर को आदर देने की ओर जा सकता है, और न ही जाता है।
हमारा यह डिजिटल युग बहुत कठिन, और कभी-कभी घबरा देने वाला प्रतीत हो सकता है। परन्तु, फिर भी मेरी यह प्रार्थना है कि, जैसे-जैसे आप इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका को उपयोग में लाते चले जाएँगे, सम्भवतः किसी मार्गदर्शक के साथ, तो आप न केवल उस बड़ी जिम्मेदारी को स्वीकार करेंगे, जो इक्कीसवीं सदी में उस मसीही पर है, जो वर्तमान के परस्पर सम्बन्धित साधनों को उपयोग करने का निर्णय लेता है, वरन् परमेश्वर आप को अपने अपरिवर्तनीय वचन की बुद्धिमानी तथा व्यावहारिक उपयोगिता से भी लैस कर दे।
ऑडियो मार्गदर्शिका
ऑडियो#26 डिजिटल युग में शिष्यता
1 उस का भला या बुरा
“पिताजी, क्या मुझे जन्मदिन पर एक आई-फोन मिल सकता है?” मेरी आशा है कि प्रत्येक विचारशील मसीही माता-पिता इस प्रश्न को एक भय के भाव से सुनते हैं। दुःख की बात है, मैंने जैसा ध्यान किया है, यह वास्तविकता नहीं है। यदि आप एक जवान व्यक्ति हैं: जब आप को आप का पहला फोन मिला था, क्या उसके लिये माता-पिता से बहुत मोल-भाव भी हुआ था?
जब मेरी सबसे बड़ी बेटी ने मुझ से यह प्रश्न पूछा था, तब मेरे हृदय की धड़कन बहुत तेज हो गई, क्योंकि मुझे पता था कि खतरा क्या था। परन्तु चिन्ता किस बात की थी? यह स्मार्टफोन, स्वयं तो सोच नहीं सकता है, और न ही उस का अपना कोई पतित स्वभाव होता है, इसलिये वह तो बुरा नहीं हो सकता है, है न?
यदि आप ने मुझ से यह तब पूछा होता, जब मेरे बच्चे काफी छोटे थे, तब सम्भवतः मैं सहमत हो गया होता। तब मेरा विचार होता कि हमारे स्मार्टफोन और उस के सारे एप्पस सामान्यतः तटस्थ होते हैं — आवश्यक नहीं कि वे अच्छे या बुरे हों। यह तो आप के द्वारा उन्हें उपयोग करने पर निर्भर करता है। परन्तु पिछले दशक में इस पर और अधिक अध्ययन करने, हाल ही में किये गए उस शोध के बारे में पढ़ने, जो किशोरों पर सोशल मीडिया, इंटरनेट, और स्मार्टफोन्स से आया है (और स्वयं भी उस प्रभाव को देखने) के बाद, आज अब मेरा दृष्टिकोण बदल गया है।
जब मैं बड़ा हो रहा था, तब मेरा फोन स्मार्ट नहीं था। वह तो मेरी जेब में भी नहीं आ सकता था। वह एक दीवार पर लगा होता था (मुझे पता है, बहुत असुविधाजनक था!)। मुझे वह सप्ताहान्त याद है, जब मेरे माता-पिता ने, उठा कर यहाँ से वहाँ ले जाया जा सकने वाला एक फोन खरीदा था। उसे परखने के लिये मैंने सारे सप्ताहान्त प्रतीक्षा की, कि कोई फोन करे, परन्तु किसी ने भी फोन नहीं किया। परन्तु तकनीकी का वह नमूना, अधिक सटीक रीति से तटस्थ कहा जा सकता था। आप उस फोन से 911 पर बात करके किसी का जीवन बचा सकते थे। और यह एक अच्छी बात होती। परन्तु आप उसी फोन से किसी के साथ चालाकी भी कर सकते थे, या देर रात टी.वी. पर दिखाए जाने वाले, प्रति-मिनट की दर से कीमत चुकाने वाले अनुचित नम्बरों पर भी बात कर सकते थे। ऐसे निर्णय अनैतिक होते।
ऐसी बातों में, तुलनात्मक रीति से फोन तटस्थ है और वह आप के द्वारा उसे उपयोग करने पर निर्भर है।
यद्यपि 90 के दशक के फोन मुख्यतः तटस्थ ही थे, परन्तु उनसे भी प्रभाव पड़ा था। उसने मुझे बदलना आरम्भ कर दिया था। उस पहले सप्ताहान्त मैं कहीं बाहर नहीं गया, क्योंकि मैं किसी फोन-कॉल से चूकना नहीं चाहता था। मेरे मित्र थे, जो केवल 10-20 मिनट तक चलने की दूरी पर रहते थे, और मैं उनके यहाँ कम जाने लगा, क्योंकि मैं फोन उठाकर उनसे बात कर सकता था। यद्यपि बहुत कम स्तर पर, किन्तु वह फोन मेरे बाहर के और आमने-सामने की बातचीत के समय में हस्तक्षेप करने लग गया था।
आज, हमारे फोन स्मार्ट होते हैं, और उन्हें लोगों को कॉल करने, या लोगों से आने वाली कॉल को स्वीकार करने के लिए बहुत ही कम प्रयोग किया जाता है। इसके स्थान पर हमारी जेबों में रहने वाले इन उपकरणों में सैंकड़ों एप्पस होते हैं और ये 24/7 इंटरनेट से जुड़े रहते हैं। हम अपना समय सोशल मीडिया पर कुछ देखने, सन्देश भेजने की हमारी एप्पस पर विचार साझा करने और विनोदपूर्ण तथा चतुर उत्तर लिखने, और फोन-कॉल्स को वॉयस-मेल पर भेज देने बिताते हैं।
इसका एक उदाहरण कि बातें कितनी तेज़ी से बदली हैं, यह है कि आज के “वार्तालाप” का विषय अश्लील बातों, ऑनलाइन संचार के खतरे, तथा कुछ अन्य विषय, जिन के बारे में हम बाद में क्षेत्रीय मार्गदर्शिका में देखेंगे, अधिक होते हैं, न कि प्रतिदिन की सामान्य बातें।
इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका के लिए, जब मैं आज की तकनीकी के तटस्थ होने या न होने को सम्बोधित करता हूँ, तब मेरा सन्दर्भ — विशेषकर सोशल मीडिया पर ध्यान केन्द्रित करते हुए, मुख्यतः वे एप्पस और ऑनलाइन सेवाएँ हैं, जिन पर हम अपना इतना अधिक समय बिताते हैं। हम उन माध्यमों, जैसे कि इंस्टाग्राम, टिक टॉक, यू ट्यूब, तथा औरों के बारे में विचार करते हैं। क्या ये वास्तव में तटस्थ हैं? क्या ये मानवता के लिए “अच्छे” है?
मुफ्त टी. वी. प्रसारण (हाँ, माँग के अनुसार टी.वी. और केबल से पहले ऐसा समय भी था) के बारे में, रिचर्ड सेरा ने कहा, “यदि कुछ मुफ्त में है, तो वह आप हैं।” यह कथन उस समय सच था, और आज भी सोशल मीडिया के लिए सच है। आप ही वह उत्पाद हैं। इस बात को अच्छे से समझ लीजिये। यद्यपि किसी मीडिया कम्पनी के उद्देश्यों का कथन, उसे संसार को परस्पर सम्बन्धित करने वाला होना बता सकता है, परन्तु उसके उत्पादों का व्यवहारिक कार्य उसके द्वारा, उसके बनाने वालों या हिस्सेदारों के लिये, विज्ञापनों को बेचने (मुख्यतः) के द्वारा पैसा कमाना होता है। यह सक्रिय मासिक उपभोगताओं तथा उन के द्वारा उस माध्यम पर बिताए गए समय से होता है।
इस का व्यवहारिक अर्थ क्या है? यदि वह माध्यम यह देखता है कि लोग, सकारात्मक या तटस्थ सन्देशों की तुलना में, विरोधी और क्रोधी सन्देशों तथा सन्देश श्रृंखलाओं को अधिक प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं (और सच में, ऐसा होता भी है), तो वे अपने प्रोग्राम को संशोधित करके सकारात्मक को दबा देंगे, तथा नकारात्मक के पक्ष में कर देंगे। इसीलिए 6:00 बजे के समाचारों में उस दिन लोगों ने जो अच्छी बातें कीं, वे नहीं होती हैं। मान लीजिये, आप कोविड-19 या अमेरिका के चुनाव काल के दौरान सोशल मीडिया पर सक्रिय थे। तब आप ने इस वास्तविकता को अवश्य ही अनुभव किया होगा, चाहे आप के सामाजिक, चिकित्सीय, या राजनैतिक विचार कैसे भी हों। परिणामस्वरूप, हमें सुनाए जाने वाले समाचार, हमें वास्तविकता तथा हमारे समाज के बारे में एक बिगाड़ा हुआ दृष्टिकोण प्रदान किया जाता है। और यह होना ज़ारी रहेगा, क्योंकि अधिकाँश माध्यमों के पीछे, उन्हें सक्रिय रखने वाले बल सत्य, जागरूकता, और मानवीय उत्थान नहीं, वरन् दर्शकों की संख्या और कमाई होते हैं।
क्योंकि हम सामान्यतः मित्रों या अजनबियों के चित्रों को बिल्कुल सटीक हालत में, अच्छी स्थिति में, फैशन के सबसे नए वस्त्र पहने हुए देखना चाहते हैं, इसलिये प्रोग्राम ऐसे चित्रों को अधिक लोगों तक प्रसारित करता है। जब लोग उन चित्रों को देखते हैं, उन्हें पसन्द करते हैं, उन पर प्रतिक्रिया देते हैं, तो उन चित्रों को डालने वाले के लिए जो प्रति पुष्टि का प्रोग्राम है, वह उसे उसी प्रकार के अन्य चित्रों को लेने और डालने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिससे उसे और अधिक दर्शक और पुष्टि मिलें।
परिणामस्वरूप, हमारे इंस्टाग्राम में सुन्दर लोगों के द्वारा मनोहर जीवन जीने के चित्र भरे पड़े हैं, जबकि सम्भव है कि इन चित्रों को डालने वाले अपनी परीक्षाओं में फेल हो रहे होंगे, मित्रों से उनके सम्बन्ध टूटे हुए होंगे, वे माता-पिता से झगड़े कर रहे होंगे, या घर पर दुर्व्यवहार झेल रहे होंगे।
हमारी लालसा होती है कि उन लोगों की सिद्ध-छवि के समान हमारा भी सिद्ध जीवन हो, और हम अपने जीवन से असन्तुष्ट होने लग जाते हैं — कुछ तो अपनी ही हानि भी कर बैठते हैं।
हमने, 2007 में आई-फोन के आने के बाद, किशोरों की एक पीढ़ी को इतना टूटते और बिखरते देखा है कि कोई भी विवेकशील व्यक्ति इस डिजिटल युग को तटस्थ नहीं कह पाएगा। हमें स्वयं की और अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए तथा मसीह के आदर के लिए गंभीर और पहले से ही सक्रिय बनना होगा।
चर्चा और विचार:
- आप के फोन के साथ आप का सम्बन्ध कैसा है? क्या आप यह कह सकते हैं कि आप उस के स्वामी हैं, या वह आप का स्वामी है?
- इस अध्याय ने आप को तकनीकी के प्रयोग के प्रति परिवर्तन लाने के लिए किस प्रकार से कायल किया?
2 डिजिटल युग और पहचान
“मैं कौन हूँ?” यह उन बुनियादी प्रश्नों में से एक है जिन का उत्तर देने का प्रयास, दार्शनिक और संसार के धर्म, सदियों से करते चले आ रहे हैं। परन्तु यह प्रश्न केवल दार्शनिकों के लिए ही आरक्षित नहीं है। प्रत्येक किशोर इस प्रश्न से जूझता है, और यदि हम ईमानदार हों, तो यह प्रश्न केवल हमारी किशोरावस्था तक ही सीमित नहीं है।
जॉन कैल्विन का प्रसिद्ध कथन है कि मनुष्य का मन, निरन्तर मूर्तियाँ बनाने का कार्य करते रहने वाला कारखाना है। इसका अर्थ है कि हम, आराधना करने के लिये, उस एकमात्र और सच्चे, जीवित परमेश्वर के स्थान पर, अन्य कुछ-न-कुछ गढ़ते ही रहते हैं। यदि आप पुराना नियम पढ़ें, तो वहाँ लोगों द्वारा सच में पेड़ों को काट कर अपने लिए मूर्तियाँ तराशने का वर्णन मिलता है, जिनको रंगने के बाद, फिर वे उन के सामने दण्डवत् करते थे, परन्तु यह वह संसार नहीं है, जिसमें हम में से अधिकाँश आज रहते हैं। इसके बावजूद, मूर्तियाँ बनाने का हमारा कारखाना पूरी तरह से सक्रिय है। वह मूर्तियाँ बनाने में व्यस्त है, किसी मूर्ति-पूजकों की आराधना सभा में प्रयोग करने के लिए नहीं, परन्तु उसी के समान अन्य मूर्ति-पूजक तथा विनाशकारी बातों के लिए। और आज की सबसे खतरनाक मूर्तियों में से एक है पहचान की मूर्ति।
मेरे विचार से यह कथन कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि पहचान की यह मूर्ति महामारी का रूप ले चुकी है। पहचान और LGBTQ+ समुदाय, तथा उभरती हुई पीढ़ी से यह कहने कि वे अपनी पसन्द के लिंग को अपना सकते हैं, अपना लिंग बदल सकते हैं, जैसे विषयों के अतिरिक्त भी, यह बात सत्य है।
यह महामारी हम सभी को दिख रही है (यदि हम देखना चाहते हों, तो), इस के लिए सोशल मीडिया को धन्यवाद देना चाहिए जो लोगों के जीवनों की झलकियों को हमें दिखाता रहता है, क्योंकि लोग अपने सबसे व्यक्तिगत और आलोचनीय वीडियो भी संसार भर के अजनबी दर्शकों को दिखाने के लिए तैयार रहते हैं (जो इस महामारी का एक लक्षण है)। परन्तु इस महामारी को सोशल मीडिया के स्वरूप ने ही ईधन दिया तथा बढ़ाया है।
यदि आप सोशल मीडिया को एक सरसरी दृष्टि से देखें, आप को यह आभास होगा कि अन्य सभी लोगों के साथ सब कुछ ठीक है। परन्तु क्या यह सच्चाई है?
मुझे याद है मैं कुछ वर्ष पहले, इंस्टाग्राम पर ऑस्ट्रेलिया की एक प्रभाव डालने वाली महिला ने बिकिनी में, और मोहक चित्रों को यह कह कर डालना बन्द कर दिया, कि यह “ध्यान आकर्षित करने के लिए, कृत्रिम रीति से सिद्धता दिखने के लिए किया गया था…” वास्तविकता तो यह थी कि वह अपनी शारीरिक मुद्रा को अच्छा दिखाने के लिए अनेकों चित्र लेती, और अच्छी दिखने के लिए अपने पेट को अन्दर खींच कर रखती थी। उसके लिए बाहर सार्वजनिक रूप से मजेदार शाम बिताना, कोई मजेदार बात नहीं थी; यह तो उसके लिए सही चित्र खींच पाने के लिए बिताई गई एक पूरी शाम होती थी। याद रखिये, इंस्टाग्राम वास्तविकता नहीं है। परन्तु इसमें पसन्द किये जाने, ध्यान आकर्षित करने, और लोकप्रियता प्राप्त करने की लालसा बहुत शक्तिशाली होती है, और हम लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए बहुत कुछ सह लेते हैं।
आप और मैं इंस्टाग्राम (या आप जब यह पढ़ रहे हैं तब आप की पसन्द का माध्यम जो भी हो) पर लोकप्रिय मॉडल्स चाहे न भी हों। फिर भी, मसीही होने के नाते भी, हम भी इसी जाल में फंस सकते हैं। आप के लिए, जल्दी से जाँचने के लिए ये कुछ प्रश्न हैं: जब आप सोशल मीडिया पर कुछ डालते हैं, तब डालने के बाद छोड़ कर भाग जाते हैं, या डालने के बाद पता करते हैं, फिर से पता करते हैं, और फिर से पता करते हैं, कि क्या प्रतिक्रिया मिल रही है? इसे और भी अधिक गहराई से जाँचने के लिए, क्या होता है यदि प्रतिक्रिया धीमी होती है? आप को कैसा लगता है? मान लीजिये आप इसे व्यक्तिगत रीति से लेते हैं, और निराश हो जाते हैं। तो फिर उस स्थिति में आप अपनी पहचान उन बातों में रख रहे हैं जो अन्ततः आप को निराश करेंगी।
प्रभाव डालने वाले लोकप्रिय मॉडल्स, परिवार, या [रिक्त स्थान भर लीजिये] के होने का एक अन्य दुष्प्रभाव भी है: लोभ। जब हम सोशल मीडिया पर लोगों की छवियों को देखते हैं, तब हम सच में चित्र में दिखाये गये उस व्यक्ति के समान होने का लोभ कर सकते हैं, और वासना (हम इस पर अध्याय पाँच में चर्चा करेंगे) का पाप भी कर सकते हैं, परन्तु अप्रत्यक्ष रूप में, हम उनकी प्रसिद्धि, उनकी सुन्दरता, उनकी सफलता, और उनकी प्रसन्नता का लोभ कर सकते हैं। हम स्वयं से प्रश्न करते हैं, “मैं उन चित्रों के समान क्यों नहीं दिखता हूँ?” “जब मैं सोशल मीडिया पर कुछ डालता हूँ, तो मुझे उतने अधिक पसन्द क्यों नहीं मिलते हैं?” “मेरी वैवाहिक स्थिति या मेरी छुट्टियाँ, उन के समान मजेदार क्यों नहीं हैं?”
हम अपने व्यक्तिगत मूल्य और मान्यता को सफलता, प्रसिद्धि, और बाहरी सुन्दरता की मूर्तियों में रखने लगते हैं, जो दिखाता है कि हम अपनी पहचान के बारे में संकट की स्थिति से होकर निकल रहे हैं। परन्तु याद रखिये, सफलता और प्रसिद्धि जाते रहेंगे। बाहरी सुन्दरता हमेशा निराश ही करेगी, क्योंकि उसके पीछे भागने वाले पाएँगे कि हमेशा ही कुछ ऐसा होगा जिसे और सुधारा जा सकता है, और आयु बढ़ते जाने की प्रक्रिया हमेशा ही अन्तिम रेखा तक पहुँचने से पहले, आप से आगे निकल जाएगी।
यह मुझे इस कथन का सुनना याद दिलाता है कि धनी लोग इस ग्रह पर विद्यमान सबसे हताश जन हो सकते हैं, निर्धनों से भी कहीं अधिक हताश। क्यों? क्योंकि, निर्धन दिन-प्रतिदिन का जीवन यह सोचते हुए जीते हैं कि कभी उनके दिन भी बदलेंगे, और वे भी बड़े बन जाएँगे, और उनकी सभी आर्थिक और व्यक्तिगत समस्याएँ जाती रहेंगी। इसकी तुलना धनी लोगों से कीजिये। वे बड़े बन चुके हैं, परन्तु फिर भी असुरक्षित अनुभव करते हैं, अपनी पहचान के बारे में असमंजस में हैं, और संसार से स्वीकृति प्राप्त करने के पीछे भाग रहे हैं। निर्धनों के पास आशा है, परन्तु मसीह से बाहर, धनी लोगों के पास कोई आशा नहीं है। इतने वर्ष पहले, सन्त अगस्तीन सही थे, जब उन्होंने कहा कि, परमेश्वर ने हमें अपने लिए बनाया है, और जब तक हम उसमें विश्राम न पाएँ, तब तक हमारे मन बेचैन ही रहेंगे। आप का सोशल मीडिया का उपयोग, क्या आप को कम, या अधिक बेचैन बनाता है?
यदि आप सोशल मीडिया पर दृष्टि दौड़ाते हुए असन्तुष्ट रहते हैं, तो आप कुछ बातों को, जितना परमेश्वर उन्हें देता है, उस से अधिक मूल्य दे रहे हैं। परमेश्वर केवल साहसी और सुन्दर लोगों को ही नहीं बचा रहा है। सच तो यह है कि यदि आप एक मसीही हैं, तो हो सकता है कि परमेश्वर ने आप को बुद्धिमानों को लज्जित करने के लिए बचाया हो, यह सुनिश्चित करने के लिये कि परमेश्वर के सामने कोई घमण्ड नहीं कर सकता है:
…न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है कि ज्ञानवानों को लज्जित करे, और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है कि बलवानों को लज्जित करे; और परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्छों को, वरन् जो हैं भी नहीं उनको भी चुन लिया कि उन्हें जो हैं, व्यर्थ ठहराए। ताकि कोई प्राणी परमेश्वर के सामने घमण्ड न करने पाए (1 कुरिन्थियों 1:26-29)।
बाइबल का यह अंश, बहुत नम्र कर देने वाला है। परमेश्वर जब लोगों को अपने लिए बचाता है, तब ऐसे सुन्दर लोगों को, जिनके सोशल मीडिया खातों में उनके बिलकुल सिद्ध वर्णन दिए गए हैं, नहीं ढूँढ़ता है। उसे पता है कि अन्ततः हम में से अनेकों लोग सोशल मीडिया पर जो करते हैं, वह शव-गृह में कार्य करने वाले: एक शव को सँवारने और सुन्दर दिखने वाला बनाने में अपने समय को लगाने के समान ही है। हम बाहर से जीवित प्रतीत हो सकते हैं, परन्तु परमेश्वर की कृपा और अनुग्रह के बाहर, हम अपने पापों में मरे हुए हैं (इफिसियों 2:1)। और यह हमारी इसी मृत अवस्था में ही था, हमारी सारी बुराई के होते हुए भी, कि परमेश्वर ने हम से प्रेम किया और हमारे उद्धार के लिए यीशु को भेजा, कि वह जिया, मरा, और फिर जी उठा। अब, यह अच्छा समाचार है, और ऐसा, जो हमें संसार को प्रभावित करने के प्रयासों से मुक्त कर देता है।
अब, पहचान के बारे में, इस महामारी के स्तर के संकट का क्या समाधान है? मसीह में अपनी पहचान को खोजना। यदि आप एक मसीही नहीं हैं, तो आप उसी बेचैनी की अवस्था में बने रहेंगे जिस का वर्णन सन्त अगस्तीन, ने किया था, जब तक कि आप पश्चाताप न करें, उद्धार के लिए केवल मसीह में ही विश्वास न करें, और उस में अपनी पहचान न खोज लें। परन्तु मसीही के लिए, यहाँ अच्छा समाचार है, जिस पर उसे प्रतिदिन विश्वास करना है और स्वयं को प्रचार करना है।
प्रेरित पौलुस हमें बताता है कि, “इसलिये यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, सब बातें नई हो गई हैं” (2 कुरिन्थियों 5:17)। आप वह नहीं हैं, जो कभी हुआ करते थे। आप की एक नई पहचान है, वह जो मसीह में है। इससे आगे, पौलुस और भी अच्छे समाचार को बताता है: “जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया कि हम उसमें होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन जाएँ” (2 कुरिन्थियों 5:21)। इसका अर्थ हुआ कि आप एक नई सृष्टि हैं, उस पर्याप्त धार्मिकता के साथ, जो परमेश्वर को स्वीकार्य होने के लिये कभी भी हमें चाहिये हो सकती है।
जब आप को यह पता चलता है कि परमेश्वर पुत्र द्वारा किये गये कार्य से, परमेश्वर पिता आप को पूर्णतः स्वीकार करता है, तब आप संसार में अपनी पहचान को प्राप्त करने और संसार को स्वीकार्य बनने से मुक्त हो सकते हैं। तब, यदि आप सोशल मीडिया पर कुछ डालेंगे, तो आप संसार से प्रशंसा प्राप्त करने के लिए नहीं डालेंगे। तब आप यह, जैसा पौलुस कहता है कि, “परमेश्वर की महिमा के लिये” (1 कुरिन्थियों 10:31) कर सकते हैं। आखिरकार, मसीह में आप की एक नई पहचान है, ताकि, अन्ततः, आप खोये और मरते हुए संसार को अपनी नहीं बल्कि, उसकी पहचान बता सकें।
चर्चा और विचार:
- हमारे डिजिटल युग के साथ व्यवहार करने के लिए, ऐसे कुछ अति-महत्वपूर्ण कारण कौन से हैं, जिनसे हम मसीह में अपनी पहचान को समझ सकें?
- मसीह के साथ केवल विश्वास ही के द्वारा जुड़ जाने के प्रेम भरे उपहार के प्रति, आप की क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिये?
3 डिजिटल युग और समय
मुझे याद है कि मैंने एक मसीही प्रचारक और शिक्षक की बात को पढ़ा था कि, सोशल मीडिया के सबसे बड़े उपयोगों में से एक होगा, अन्त के दिन यह प्रमाणित करना कि प्रार्थना न कर पाना, कभी भी समय की कमी के कारण नहीं था। प्रार्थना के अपने जीवन पर विचार करते हुए, मैंने पहले भी कहा है कि मेरा संघर्ष प्रार्थना के लिए नहीं है; मेरा संघर्ष मेरी प्राथमिकताओं के लिये है। वास्तविकता तो यही है कि परमेश्वर जो चाहता है कि हम उसके लिए करें, उसके लिए उसने हम सभी को पर्याप्त समय भी दिया है। हम सभी के लिए प्रश्न यह है कि हम उस समय का प्रयोग कैसे करते हैं और क्या हम उस समय के अच्छे भण्डारी हैं?
मैंने अभी एक ऐसी धारणा का उल्लेख किया है, जिस के बारे में आज सामान्यतः कोई बात नहीं होती है: भण्डारी होना। मसीही होने के नाते हमारे समझने के लिए, यह एक महत्वपूर्ण धारणा है। पुराने समयों में, भण्डारी वह होता था, जिसे किसी घराने की बातों का प्रबन्धन करने की ज़िम्मेदारी दी जाती थी, विशेषकर उस घराने की सम्पत्ति के बारे में बुद्धिमानी के निर्णय लेने की। एक अयोग्य भण्डारी वह होता था जो घराने की सम्पत्ति से अधिक खर्च कर देता था, या संसाधनों का निवेश, बुद्धिमानी से नहीं करता था।
भण्डारी होना, हमें सौंपे गए आर्थिक संसाधनों का प्रबन्धन करने से कहीं अधिक बढ़कर है। आर. सी. स्पराउल भण्डारी होने को, परमेश्वर द्वारा आदम और हव्वा को उत्पत्ति 1:28 में सौंपे गए आदेश के साथ जोड़ते हैं, जहाँ परमेश्वर ने उनसे कहा “फूलो–फलो, और पृथ्वी में भर जाओ।” स्पराउल भण्डारी होने को इस प्रकार परिभाषित करते हैं, “परमेश्वर द्वारा, उसकी सृष्टि पर, हमें दिये गये अधिकार का प्रयोग करना …”1 हमारा न्याय किया जाएगा कि हमने उस अधिकार को योग्य रीति से प्रयोग किया, या फिर अयोग्य रीति से किया। और इस में हम अपने समय का किस प्रकार उपयोग करते हैं, भी सम्मिलित है।
समय, सम्भवतः हमारा सबसे दुर्लभ संसाधन है। यदि आप का धन समाप्त हो गया है तो आपकी माता, या पिता आपको और दे सकते हैं। परन्तु हमारे पास प्रतिदिन 86,400 सेकेण्ड होते हैं। आप अपने माता-पिता से, या किसी बैंक से चाहे जितना माँगें या विनती करें, आप इस संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं कर सकते हैं। ना ही आप पृथ्वी पर निर्धारित आप के दिनों की संख्या को बढ़ा सकते हैं। आने वाले कल के बारे में, हम में से किसी से भी, कोई भी प्रतिज्ञा नहीं की गई है। हमारे पास जो भी है, वह यही वर्तमान ही है।
पौलुस हमें बताता है कि “अवसर को बहुमूल्य समझो, क्योंकि दिन बुरे हैं” (इफिसियों 5:16)। वह यह भी कहता है कि, “अवसर को बहुमूल्य समझकर” (कुलुस्सियों 4:5)। भजनकार ने प्रार्थना की, कि “हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएँ” (भजन 90:12)। और सुलैमान ने अपने पाठकों को याद दिलाया कि बुद्धिमान होने के लिए चींटी के भण्डारी होने और कड़े परिश्रम करने के स्वभाव पर विचार करें (नीतिवचन 6:6)।
जिस प्रकार से हम अपने समय का प्रयोग करते हैं, यह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना हमारा अपने धन का प्रयोग करना, और समय के दुर्लभ होने के कारण, हमारे विचारों में उसे प्राथमिकता मिलनी चाहिए। कलीसिया के इतिहास से अगर देखा जाए, तो मसीहियों के पास उपयोग करने के लिये, यद्यपि आज अधिक समय उपलब्ध है, परन्तु हम में से बहुतेरे, बिना सोचे, उसे व्यर्थ गँवा देते हैं। उन्नीसवीं शताब्दी के अन्त की ओर के समय से पहले, किसी के भी पास कृत्रिम प्रकाश नहीं था। यदि मोमबत्ती की सहायता न हो, तो सूर्यास्त होने के साथ ही दिन भी समाप्त हो जाता था। आज हम, आज के कल में बदल जाने पर भी, इधर-उधर की बातों को देखते रहने में लगे रहते हैं।
मैंने पहले अध्याय में सेरा का कथन कहा था, जिस ने हमें याद दिलाया था कि यदि कुछ मुफ्त है, तो वह आप हैं। यह सत्य है, विशेषकर उस जानकारी के बारे में जो आप इन तकनीकी कम्पनियों को देते हैं, कि अध्ययन करें, अनूकूलित करें, और कभी-कभी सम्भवतः उस जानकारी को बेच भी दें। आप की डिजिटल जानकारी बहुत सफाई से प्रकट है, और एक मूल्यवान सामग्री है। परन्तु अधिकाँश तकनीकी कम्पनियों के लिये, आप का समय, उस से भी अधिक मूल्य रखता है। उनकी एप्प के प्रयोग पर आप जितना अधिक समय बिताएँगे, वे विज्ञापनों को बेचने के द्वारा उतना ही अधिक कमा सकेंगे। जो सबसे बुरी बात ये कम्पनियाँ अपने शेयर धारकों को बता सकती हैं, वह होती है कि मासिक सक्रिय उपभोगताओं की संख्या घट गई है, या दैनिक उपयोगिता कम हो रही है। कम समय का वास्तविक अर्थ है कम कमाई का होना। और इसे “ध्यान की अर्थव्यवस्था” कहते हैं।
जो इस क्षेत्र में कार्य करते हैं, उन्हें अनायास ही एक महत्वपूर्ण बात — एक धारणा, जिस पर हम मसीहियों को गम्भीरता से विचार करना चाहिए, पता चली है, कि: समय एक सीमित सामग्री है। कम्पनियाँ यह जानती हैं, इसलिये वे आप के समय और ध्यान को, अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में, अपने प्रति अधिक सुनिश्चित करने के प्रयासों में लगी हुई हैं। मुझे और आप को भी एक संघर्ष में लगे हुए होना चाहिए: संसार, शरीर, और शैतान के विरुद्ध संघर्ष, यह सुनिश्चित करने के लिए कि इस बहुमूल्य और सीमित सामग्री (समय) को प्रतिदिन कार्य में ऐसे लगाएँ, कि परमेश्वर द्वारा हमें दिये गए संसाधनों, कौशलों, और ज़िम्मेदारियों का, उसे सर्वाधिक सम्भव महिमा प्रदान करने के लिये, उपयोग हो सके।
यद्यपि सोशल मीडिया पर यह कर पाना असंभव तो नहीं है, परन्तु हम सोशल मीडिया पर जितना निष्फल समय बिताते हैं, यदि उस पर गम्भीरता से विचार करें, तो बहुत अनुशासन रखे बिना, मसीही जीवन में उसके लिए स्थान देख पाना कठिन है। हाल ही के एक गैलप सर्वेक्षण से पता चला है कि अमेरिका के अधिकाँश किशोर, सोशल मीडिया पर प्रति दिन लगभग 4.8 घण्टे बिताते हैं। इसे अपने अन्दर समा लेने दीजिये। इसका अर्थ हुआ प्रति महीने, चौबीस घण्टे वाले पूरे छः दिन, या प्रति वर्ष लगभग 2.5 महीने सोशल मीडिया पर बिताए जाते हैं। भण्डारी होने के नाते, हम परमेश्वर को इस समय का हिसाब कैसे दे सकेंगे?
चाहे आप प्रतिदिन सक्रिय होकर घण्टों सोशल मीडिया पर नहीं भी बिता रहे हैं, फिर भी स्मार्टफोन पर सोशल मीडिया और अन्य एप्पस का होना एक अन्य चुनौती को लाता है: ध्यान भंग करना। क्या आप बिना यह एहसास किये कि आप ने यह क्यों किया, अपने फोन को उठा लेते हैं? कोई उद्देश्य नहीं था, न ही किसी जानकारी का कोई सन्देश आया था। फिर भी प्रति पुष्टि का जो प्रोग्राम, जिसे जानकारी सन्देशों, लेखों, और FOMO — अर्थात् कहीं कुछ चूक न जाए — के द्वारा बनाया गया है, उसने आप को प्रशिक्षित कर दिया है कि आप इस उपकरण की ओर हाथ बढ़ाएँ, और बस “देख” लें। एक लेखक ने, चाहे कोई ईमेल न भी आई हो, फिर भी, ईमेल के इनबॉक्स को खोल कर देखने की लत को, उतनी ही प्रबल बताया है, जितनी एक लत लगे हुए जुआरी के लिए जुए की मशीन के लीवर को खींचना होता है। हमारे फोन के प्रति हमारा यह खिंचाव इतना प्रबल होता है कि एक शोध ने यह दिखाया है कि पढ़ाई करने में केवल छः मिनट ही व्यतीत करने के बाद, किशोर अपने फोन को उठा लेते थे और उनका ध्यान भंग हो जाता था।
इसलिये, चाहे आप अपना समय इधर-उधर की बातों को देखने में लगा रहे हों, या आप को जितना प्रभावी होना चाहिए, आप का ध्यान भंग होते रहने के कारण आप उतना प्रभावी नहीं हो पा रहे हैं, इक्कीसवीं सदी में जीने वाले मसीही होने के नाते, हमें अपने समय को और इन माध्यमों के द्वारा उसे जो खतरा है, उसको गम्भीरता से लेना चाहिये।
अपने जीवनों के अन्त में, हम बिना विचारे अपना समय व्यर्थ करने के लिए खेदित हो सकते हैं, परन्तु हम परमेश्वर के वचन और प्रार्थना में जो समय बिताएँगे, उसके लिए कभी खेदित नहीं होंगे।
मैं आप की कुछ प्रतिक्रियाओं को सुन सकता हूँ, और हाँ, हम सभी व्यस्त हैं। और हमारा समय पूरी तरह से भरा हुआ है, और सम्भवतः हमेशा ही भरा भी रहेगा। इसीलिए मार्टिन लूथर के इस कथन ने मुझे बहुत कायल किया कि, “मेरे पास करने के लिये इतना कुछ है कि मैं पहले तीन घण्टे प्रार्थना में बिताऊँगा।” परमेश्वर को जो आदर देता है तथा बुद्धिमान भण्डारी होता है, उसे “हाँ” कहने के लिये, अन्य बातों को “नहीं” कहना ही पड़ेगा।
चर्चा और विचार:
- वे संसाधन और कौशल कौन से हैं, परमेश्वर ने जिनका भण्डारी केवल आप ही को बनाया है?
- यह जानते हुए कि “समय एक सीमित सामग्री है” आप को जीवन में क्या भिन्नताएँ लानी चाहियें?
4 डिजिटल युग और समाज
एक के बाद एक रिपोर्ट तथा एक के बाद एक सर्वेक्षण यह प्रकट कर रहे हैं कि हम एकाकीपन और व्यग्रता में बढ़ोतरी के संकट का सामना कर रहे हैं। आप जितने युवा होंगे, आप पर प्रभाव उतना ही अधिक होगा। इसके लिए बहुत सी बातें ज़िम्मेदार हैं, परन्तु एक प्रमुख बात है स्मार्टफोन का आना और उसके प्रयोग का बढ़ते चले जाना। यद्यपि इन उपकरणों का वायदा था कि वे संसार को परस्पर जोड़ देंगे, परन्तु उन्होंने अपने वायदे को तोड़ दिया और इसका ठीक विपरीत किया है। आज, जो इनके माध्यम से सर्वाधिक जुड़े हुए हैं, वे ही वास्तविक समाज और गहरे सम्बन्धों से सर्वाधिक कटे हुए हैं।
पिछले अध्याय में हमने विचार किया था कि किस प्रकार से हम ध्यान भंग रहने की दशा में रहते हैं, और किस प्रकार से इसका प्रभाव हमारे समय और फलवन्त होने पर पड़ता है। परन्तु ध्यान भंग रहना हमारे सम्बन्धों को भी प्रभावित करता है: उन किशोरों के बारे में विचार कीजिए जो अपनी साइकल चला कर एक दूसरे के घर साथ समय बिताने के लिए जाया करते थे, परन्तु आज वे केवल एक माइक्रोफोन के द्वारा, अन्य ऑनलाइन लोगों की उपस्थिति में, तथा आने वाले सन्देशों से ध्यान भंग होते रहने और रणनीतियों के बदलते रहने के साथ, एक दूसरे से बात करते हैं। या उन मित्रों के बारे में सोचिए जो साथ मिलकर कॉफी पीने और जल्दी से कुछ बात करने के लिए बैठते थे, और उन्हें पता ही नहीं चलता था कि कब दो घण्टे बीत गए, तथा दो कॉफी पी ली गई हैं। परन्तु आज वे कैफे में बैठे अपने फोन को ही देखते रहते हैं। या, एक पिता होने के नाते, मेरे लिए सबसे दुःखदायी यह देखना होता है कि परिवार भोजन करने के लिये बाहर आया है, और बच्चे अपनी-अपनी टैबलेट में व्यस्त हैं, और माता-पिता अपने-अपने फोन में। हमारा ध्यान भंग रहना, और हमारे द्वारा लिखित सन्देश से संचार करने पर निर्भर रहने ने हमें सिर उठाकर व्यक्ति से आँख मिलाकर, उसे “नमस्ते” कहने से भी बाधित कर दिया है।
इसकी तुलना में, प्रेरित यूहन्ना के, उसकी दूसरी पत्री में दिये दृष्टिकोण को देखिए:
मुझे बहुत सी बातें तुम्हें लिखनी हैं, पर कागज और सियाही से लिखना नहीं चाहता; पर आशा है, कि मैं तुम्हारे पास आऊँगा, और आमने-सामने बातचीत करूंगा: जिस से तुम्हारा आनन्द पूरा हो (2 यूहन्ना 1:12)।
एक माध्यम (कागज़ और स्याही) के प्रयोग से बढ़कर, उसकी आशा थी कि वह उनसे “आमने-सामने बातचीत करे, जिससे तुम्हारा आनन्द पूरा हो।” फिर भी, आप को कैसा लगता है जब कोई आप का द्वार खटखटाता है? या यदि आपके फोन की घण्टी भी बजती है? आज बहुतेरे युवाओं के लिए, यह बातें हस्तक्षेप होती हैं और व्यग्रता को उत्पन्न कर देती हैं। परन्तु हमें ऐसे ही सम्बन्धों के लिये रचा गया है— “आमने-सामने” के सम्बन्ध — न कि उनसे भयभीत होने के लिये।
आप और मैं, परमेश्वर के स्वरूप में बनाए गए हैं, और हमारा परमेश्वर त्रिएक परमेश्वर है — पिता, पुत्र, और पवित्र आत्मा। परिणामस्वरूप हमें सामाजिक सम्बन्धों के लिए सृजा गया है। सृष्टि के वृतान्त पर विचार कीजिए। पाप में गिरने से पहले वह एक बात क्या थी, जिस के लिए परमेश्वर ने कहा कि अच्छी नहीं है? कि, आदम अकेला था। अदन में हव्वा को समाधान के रूप में सृजा गया, परन्तु आज, ऐसा लगता है मानो आदम और हव्वा दोनों ही अकेले हैं। क्या आप भी अकेले हैं?
न केवल इन उपकरणों के कारण हमारी आँखें नीचे की ओर ही रहती हैं, बजाए किसी प्रिय जन अथवा मित्र की आँखों में देखने के, बल्कि उनके कारण हम में एक झूठा भरोसा आ गया है कि ऑनलाइन, बिना किसी संकोच के, कुछ भी बोल दें। ऐसे शब्द, जिन्हें हम “आमने-सामने” किसी से कभी नहीं कह पाते, उन्हें हम निर्भीक होकर टिप्पणी के रूप में लिख देते हैं। याकूब कहता है कि, “पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता” (याकूब 3:8), और सोशल मीडिया ने इस बात को एक विशाल रीति से सत्य प्रमाणित कर दिया है। साधारण शिष्टाचार तथा पड़ोसी से प्रेम रखने की बाइबल की आज्ञा को एक ओर कर दिया गया है, बहुतेरे सक्रिय मसीहियों के द्वारा भी। यीशु ने कहा, “यदि आपस में प्रेम रखोगे, तो इसी से सब जानेंगे कि तुम मेरे चेले हो” (यूहन्ना 13:35)। फिर भी अनेकों मसीहियों ने ऑनलाइन एक दूसरे से दुर्व्यवहार करने को आदत बना लिया है। जब हम ऐसा करते हैं, तब हम पाप करते हैं, और इन पापों के लिए पश्चाताप अनिवार्य है।
मैंने अभी केवल सतह को ही खुरचा है, परन्तु आज के डिजिटल युग के पारिवारिक तथा व्यक्तिगत सम्बन्धों पर नकारात्मक प्रभाव से हमें दुःखी होना चाहिये। मसीही होने के नाते हमें बचाए जाकर एक अन्य परिवार में भी जोड़ दिया गया है: मसीह की देह में। इसलिये, जब कलीसिया से बाहर की ये प्रवृत्तियाँ इस अनन्तकालीन परिवार में घुस आती हैं, तो हमें इससे बहुत चिन्तित होना चाहिये।
सीधे तौर से कहें तो, मसीहियों के साप्ताहिक एकत्रित होने से बहुत से विश्वासी कतराने लगे हैं, और उनकी संख्या बढ़ती ही चली जा रही है, और यह पवित्रशास्त्र की अनाज्ञाकारिता है। इब्रानियों में आज्ञा दी गई है कि, “और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना न छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो त्यों–त्यों और भी अधिक यह किया करो” (इब्रानियों 10:25)। परन्तु हमारे मनों और आदतों में आराधना सभा को भी उसी तरह से काट-छाँट दिया गया है, जिस तरह से हम किसी पॉडकास्ट के प्रकरणों को काट-छाँट कर ऑनलाइन डाल देते हैं। पूरे सप्ताह हम किसी ऑनलाइन सेवा द्वारा प्रसारित किये जा रहे, अन्य लोगों के द्वारा परमेश्वर की स्तुति के लिए गाए जा रहे स्तुतिगान को सुनते रहते हैं। हम स्क्रीन पर एक थपकी देकर विश्व-विख्यात प्रचारकों के उपदेश सुनते हैं। तो फिर इतवार प्रातः जल्दी उठने की क्या आवश्यकता है, जब हम कलीसिया की सभा के साथ एक ज़ूम सभा के समान व्यवहार कर सकते हैं? क्योंकि हमें परमेश्वर के सदेह लोगों के साथ आराधना करने के लिए बनाया गया है। परमेश्वर उन सभाओं पर आशीष देता है, और अपनी बढ़ोतरी के लिए, हमें उनकी आवश्यकता है। चाहे उनके पास एक इंटरनेट कनेक्शन हो, तो भी कभी कोई अकेला मसीही नहीं होना चाहिए।
कोविड-19 के आने से कलीसियाओं द्वारा अपनी सभाओं के प्रसारणों को बढ़ाने से पहले, मैंने सार्वजनिक रूप में कहा था कि अपने सर्वोत्तम रूप में भी, एक ऑनलाइन कलीसिया निम्न स्तर की ही है, और उसके सबसे बिगड़े हुए रूप में, वह एक विरोधाभास है। मैं अभी भी इस पर कायम हूँ। इसलिये, यद्यपि ऑनलाइन प्रसारण देखना उस जन के लिए सहायक हो सकता है जो किसी कारणवश कलीसिया नहीं आ सकता है, कहीं पर अन्दर ही रहने के लिए मजबूर है, परन्तु यह निरन्तर आत्मिक बढ़ोतरी तथा जवाबदेह होने की विधि नहीं है।
मुझे याद है, मैं तब नया मसीही था और कलीसिया में नियमित नहीं जाया करता था, और मैंने एक जीवनपर्यन्त मसीही से मसीहियत के बारे में कुछ प्रश्न पूछे, जिनके उत्तर वह नहीं दे सका। सत्य को जानने की मेरी लालसा में असन्तुष्ट होने के कारण, मेरा प्रत्युत्तर सीधा सा था: “फिर तो मुझे कलीसिया में जाना ही होगा।” उस समय मैं विश्वास में बहुत छोटा था, परन्तु मेरी स्वाभाविक प्रवृत्ति अच्छी थी। दुःख की बात है कि आज हमारी स्वाभाविक प्रवृत्ति सीधे गूगल पर खोजने की होती है, जबकि हमें अपनी स्थानीय कलीसिया में जाना चाहिये।
मैं इन तकनीकी उन्नतियों के लिए कृतज्ञ हूँ, जिन के द्वारा विश्वासयोग्य शिक्षाएँ उन तक पहुँच पा रही हैं, जिन्हें वे अन्यथा नहीं मिल पातीं, तथा सप्ताह भर आत्मिक रीति से भूखे मसीहियों तक सहायता उपलब्ध रहती है। परन्तु विश्वासयोग्य यू ट्यूब चैनलों तथा मसीही एप्पस में जो मिलता है, उसे हमेशा ही सहायक होना चाहिए, न कि स्थानीय कलीसिया में सदस्यता और भाग लेने का विकल्प। मैं Renewing Your Mind (अपने मस्तिष्क का नवीकरण करें) नामक एक दैनिक पॉडकास्ट और रेडियो कार्यक्रम को प्रस्तुत करता हूँ, जो ऐसी ही विश्वासयोग्य बाइबल शिक्षा प्रदान करता है। परन्तु फिर भी, जब स्वस्थ मसीही, उस कार्यक्रम में दी गई शिक्षाओं को सुनते हैं, और परमेश्वर के वचन की गहराइयों से जुड़ते हैं, तो इससे उन्हें स्थानीय कलीसिया के साथ और निकट होना चाहिये, न कि उससे दूर जाना चाहिये।
उपदेशों के संग्रह ऑनलाइन उपलब्ध हो जाने के कारण कलीसिया अप्रासंगिक नहीं हो गई है। आप एक छवि को दिखाते हैं, क्योंकि आप लोगों की आँखों के स्थान पर एक स्क्रीन को देखते हुए बड़े हुए हैं, इसलिये मानवीय संबंधों की आप की आवश्यकता बदली नहीं है। हमें अपने परिवारों, मित्रगणों, और स्थानीय कलीसिया में ऐसे स्वस्थ समुदायों की आवश्यकता है, जो साहस के साथ खड़े होकर आज की चुनौतियों का सामना कर सकें।
गूगल पर मत खोजिए। कलीसिया में जाकर सीखिए।
चर्चा और विचार:
- तकनीकी के आप के प्रयोग के कारण आप के सम्बन्धों पर क्या प्रभाव आया है?
- तकनीकी के प्रयोग के कुछ लाभकारी तरीके कौन से हैं?
5 डिजिटल युग और यौन पाप
यौन पाप हमारे समय के लिए कोई नई बात नहीं हैं। जैसा कि हम बाद में देखेंगे, पुराने तथा नए नियम के लेखकों तथा यीशु ने यौन दुराचार का प्रतिरोध सीधे और स्पष्टता से किया था। क्या आप ने कभी विचार किया कि लैव्यव्यवस्था की पुस्तक में स्पष्टता से वर्जित यौन सम्बन्धों का विवरण, हमें मानवीय स्वभाव के बारे में कितना कुछ बताता है? अपने पापी मनों को नियन्त्रित रखने के लिए, हमें इस प्रकार स्पष्ट निर्देशों की आवश्यकता वास्तव में है।
यौन पाप एक बहुत विस्तृत विषय है, इसलिये, इस अध्याय में, मैं हमारा ध्यान अश्लीलता के पाप पर केन्द्रित रखना चाहता हूँ। क्यों? क्योंकि हमारे डिजिटल युग ने अश्लीलता को दो महत्वपूर्ण तरीकों से बदल दिया है, और कलीसिया को इस जटिल विषय पर चर्चा करने की आवश्यकता है, ताकि युवा मसीहियों को तैयार करे और उन्हें सुरक्षित रखे, उन्हें उपयुक्त सहायता और सही शिष्यता दे, तथा परिपक्व मसीहियों को पतित होने से रोके रखे।
पहले, हमारे डिजिटल युग ने अश्लीलता तक पहुँचना बहुत सहज बना दिया है। और इसके साथ ही अश्लीलता के खुले प्रकटीकरण को बहुत बढ़ा दिया है, जिससे स्क्रीन पर बस एक थपकी के द्वारा, लगभग कोई भी उस तक पहुँच सकता है।
मेरी किशोरावस्था से पहले के अधिकाँश तथा किशोरावस्था के आरम्भिक वर्षों में अश्लीलता के बारे में विचार भी नहीं किया जाता था। उस समय मैं एक मसीही नहीं था, परन्तु यदि मैं चाहता भी, तो भी मैं उस तक पहुँच नहीं सकता था। इंटरनेट नया था, और मेरे घर में उपलब्ध नहीं था। सच में, पहली बार जब मैंने इंटरनेट का प्रयोग किया, तो वह 90 के दशक के एक मैक कम्प्यूटर पर केवल लेख दिखाने वाले ब्राउज़र के द्वारा था। ऐसे किशोर के लिए, जो 70, 80, 90 के दशकों में बड़ा हो रहा था, अश्लीलता तक पहुँचना केवल तब ही सम्भव था, यदि किसी मित्र के हाथ अपने पिता का पत्रिकाओं का संग्रह लग जाता था, या उन पत्रिकाओं में से फाड़ा गया कोई चित्र यदि नगर के किसी छिछोरे भाग में मिल जाता था। किन्तु आज के किशोरों और किशोरावस्था से पहले के वर्षों के बच्चों के लिये यह सच नहीं है। उनके लिये, यदि वे इंटरनेट का प्रयोग करते हैं, तो अश्लीलता उन पर लगभग थोप दी जाती है, चाहे वे उसे खोजें अथवा नहीं। एक अध्ययन ने सुझाया कि इंटरनेट का उपयोग करने वाले लगभग 34% लोग, विज्ञापनों, दिखाए जाने वाले सन्देशों, सही दिखने परन्तु अनुचित स्थानों पर ले जाने वाले लिंक्स, या ईमेल के द्वारा अनायास ही, अश्लीलता का सामना करते हैं। क्या ऐसा कभी आप के साथ भी हुआ है?
दुःख की बात है कि, यद्यपि यह सामना अनायास होता है, परन्तु यह भी सच है कि इंटरनेट से किये जाने वाले डाउनलोड का लगभग एक तिहाई भाग, अश्लीलता से सम्बन्धित होता है, और इंटरनेट पर प्रतिदिन 680 लाख अश्लीलता से सम्बन्धित खोज की जाती हैं। इसकी माँग इतनी अधिक है कि, ऑनलाइन सबसे अधिक उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करने वाली शीर्ष 20 वेबसाइट्स में, अश्लीलता से सम्बन्धित अनेकों वेबसाइट्स भी स्थान पाती हैं। जिस समय मैं यह लिख रहा हूँ, ऐसी ही एक साइट, शीर्ष दस में भी स्थान पा चुकी है।
यह कहा जाता है कि आप को उसी की भूख लगती है, जिसका आप उपभोग करते हैं, और जैसे-जैसे अश्लीलता की चाह बढ़ती जाती है, उसी अनुपात में अश्लीलता का बुरा और घिनौना स्वरूप भी बढ़ता चला जाता है। कल की छवि आज की भूख को नहीं मिटा पाती है। परन्तु इस डिजिटल युग से पहले, वर्तमान की इस प्रकार की खुली और अवैध अश्लीलता तक पहुँच पाना बहुत कठिन था। जिन लोगों को आप जानते थे, उनसे इस के बारे में कुछ कहना लज्जाजनक होता था, इसलिये इसकी माँग करके डाक के द्वारा उस तक पहुँचना बहुत गुप्त और महँगा होता था। परन्तु अब ऐसा नहीं है, और ऑनलाइन बाज़ारों तथा समुदायों ने ऐसे लोगों में भी इस पापी लालसा और पापी जिज्ञासा को जागृत कर दिया है, जिन के पास, हमारे इस डिजिटल युग से पहले, कभी यह अवसर या जिज्ञासा नहीं होती थी। क्या आप को कभी किसी ऐसी लिंक या छवि पर क्लिक करने का प्रलोभन हुआ है, जिसे आप जानते हैं कि वह अनुचित होगी? क्या आप कहेंगे कि, जब आप को स्मार्टफोन या इंटरनेट से जुड़ सकने वाले किसी उपकरण को उपलब्ध करवाया गया, तब आप के परिवार और स्थानीय कलीसिया ने, आप की ओर आने वाली प्रलोभन की इस बाढ़ का सामना करने के लिए आप को तैयार रहने में सहायता की थी?
भली मनसा वाले मसीहियों ने आर. सी. स्पराउल से कई बार यह प्रश्न किया था, “मेरे जीवन के लिये परमेश्वर की इच्छा क्या है?” उनका उत्तर होता था कि उस व्यक्ति के लिए परमेश्वर की विशिष्ट इच्छा का उन्हें पता नहीं है, क्योंकि वह बाइबल में लिखी हुई नहीं है, परन्तु उन्हें 1 थिस्सलुनीकियों 4:3 पता है, जहाँ यह लिखा है: “क्योंकि परमेश्वर की इच्छा यह है कि तुम पवित्र बनो…”।
आप के जीवन के लिए परमेश्वर की इच्छा क्या है? कि आप पवित्रता में बढ़ते जाएँ, और आप के जीवन में पवित्र आत्मा के कार्य के द्वारा, आप अपने विचारों, शब्दों, और कार्यों में संसार से अधिक, और अधिक, अलग होते चले जाएँ। परन्तु पौलुस यहाँ पर बहुत विशिष्ट हो जाता है। इस अंश में आगे यह लिखा है:
क्योंकि परमेश्वर की इच्छा यह है कि तुम पवित्र बनो: अर्थात् व्यभिचार से बचे रहो, और तुम में से हर एक पवित्रता और आदर के साथ अपनी पत्नी को प्राप्त करना जाने, और यह काम अभिलाषा से नहीं, और न उन जातियों के समान जो परमेश्वर को नहीं जानतीं (1 थिस्सलुनीकियों 4:3-5)।
आप के जीवन के लिये परमेश्वर की इच्छा, आप का पवित्र बने रहना है, परन्तु पौलुस विशेषकर यौनाचार में पवित्रता के लिये कहता है। जिससे मसीही आवेश नहीं, संयम रखने वाले पुरुष और स्त्री हों; वासना के आवेश में नहीं, पवित्रता और आदर के साथ जीने वाले लोग हों। इसलिये, यदि आप इस बात पर विवाद कर रहे हैं कि क्या आप को अश्लीलता का प्रयोग बंद करना चाहिये या नहीं, या यदि अचानक ही आप का उससे सामना हो जाए तो क्या करें, उत्तर बड़ा सीधा है। परमेश्वर की इच्छा है कि आप आज ही उसे बन्द कर दें, और उससे बचकर भागें। हम पाप को उचित ठहराने और उसके लिये बहाने बनाने में बहुत निपुण होते हैं। कभी तो हम हम स्वयं से यह वायदा भी करते हैं कि हम कल से बन्द कर देंगे, और आज यह आखिरी बार होगा। परन्तु इससे बच निकलने का और कोई तरीका नहीं है। परमेश्वर की इच्छा है कि आप एक और पल भी यौनाचार के पाप में न बिताऐं।
परमेश्वर की इच्छा यह भी है कि आप इस पाप के लिए पश्चाताप करें। यीशु ने सचेत किया है कि, “जो कोई किसी स्त्री पर कुदृष्टि डाले वह अपने मन में उस से व्यभिचार कर चुका” (मत्ती 5:28)। यह दिखाने के लिये कि हमें यौनाचार के पाप के साथ कितनी गम्भीरता से संघर्ष करना चाहिए, और उससे पलट जाना चाहिये, यीशु ने अतिशयोक्ति का उपयोग करते हुए आगे कहा, “यदि तेरी दाहिनी आँख तुझे ठोकर खिलाए, तो उसे निकालकर फेंक दे” (मत्ती 5:29)। पौलुस भी हमसे कहता है कि, “व्यभिचार से बचे रहो” (1 कुरिन्थियों 6:18)।
किसी पाप के लिये पश्चाताप करने का यह अर्थ नहीं है कि आप फिर कभी उसके प्रलोभन में नहीं पड़ेंगे, या उसमें फिर कभी नहीं गिरेंगे। इसीलिए, सही सन्दर्भ में, इससे अगला कदम बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है: किसी को बताइये। क्या आप अपने माता-पिता पर भरोसा करते हैं? ऐसा कोई पास्टर या अगुवा हो, जिस से आप कह सकते हैं? या आपका कोई साथी जो न केवल विश्वासयोग्य है, बल्कि आत्मिकता में आप से अधिक परिपक्व है? यदि है, तो इस पाप का उसके सामने अंगीकार करें और उससे सहायता माँगें कि वह आप के लिये प्रार्थना करे और आप को पवित्रता में बने रहने के लिए प्रोत्साहित करता रहे; यह आप की बढ़ोतरी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है। पाप पर प्रकाश चमकाना उसे नष्ट करने के लिये बहुत कारगर होता है। हम जब भी अपने पापों को छिपाते हैं, उन्हे परमेश्वर तथा औरों के सामने अंगीकार नहीं करते हैं, तब वे और अधिक सड़ते तथा बढ़ते रहते हैं।
अन्य कारण भी हैं, जिन से हम प्रलोभनों में पड़ सकते हैं, उन्हीं पापों में फिर से गिर सकते हैं, जिन से हमने पश्चाताप किया था। उन कारणों में से एक दोष-बोध और लज्जा है। जब हम किसी पाप के लिये लज्जा अनुभव करते हैं, तो यह उसे छोड़ देने या उसमें फिर से गिर जाने, दोनों को सहज कर देता है। हम स्वयं से कह सकते हैं कि, “मैं तो बस ऐसा ही हूँ। मैं क्षमा किये जाने के योग्य नहीं हूँ।” प्रकाशितवाक्य 12:10 में शैतान को हम पर “दोष लगाने वाला” कहा गया है, और उसे मसीहियों पर दोष लगाने में मज़ा आता है, उन्हें उनके पापों से बुलाने में, न कि उन्हें परमेश्वर के पुत्र या पुत्री होने की उपाधि द्वारा बुलाने में।
यद्यपि, कभी-कभी पश्चाताप करने के बाद भी पापों के लिए लज्जा और दोषी अनुभव करते रहना, शैतान का कार्य नहीं होता है। यह कभी-कभी हमारे शरीर का कार्य होता है, यदि हम परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं में विश्वास नहीं करते हैं। परमेश्वर कभी झूठ नहीं बोलता है, इसलिये 1 यूहन्ना 1:9 अवश्य ही सच होगा, और हमें उस पर विश्वास रखना है: “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है।”
यहाँ पर छुटकारा भी मिलता है। किसी भी प्रकार का यौनाचार का पाप, क्षमा न हो सकने वाला पाप नहीं है। जितने भी पश्चाताप करते हैं — अपने पापों का अंगीकार करते — और उद्धार के लिए केवल मसीह पर भरोसा रखते हैं, वे क्षमा किये जाते हैं, और यूहन्ना के शब्दों में, “सब अधर्म से शुद्ध” हो जाते हैं।
हमारे अन्तिम अध्याय में, मैं कुछ सुझाव दूँगा, जिन में ऑनलाइन अश्लीलता के प्रलोभन से बचने के तरीके भी हैं, जिन से आप इस डिजिटल युग के साधनों को वश में कर सकेंगे, बजाए उन के आप को वश में कर लेने के।
चर्चा और विचार:
- अश्लीलता के विरुद्ध आप का संघर्ष कैसा चल रहा है?
- आप अपने जीवन में यौनाचार में पवित्रता के लिए, किस से सहायता माँग सकते हैं?
6 वर्तमान साधनों में निपुण बनें
साधन तभी तक आशीष होते हैं, जब तक वे साधन के रूप में प्रयोग किये जाएँ। आप को अपने साधनों का प्रयोग करने में निपुण बनना होगा, ताकि वे आप को वश में न कर लें। हम में से अनेक, अपने छुड़ाए जाने की किसी भी योजना के बिना ही, हमारे डिजिटल युग की तकनीकी के दास बन गए हैं। इस अध्याय में मैं जिन बातों को सूचीबद्ध करूँगा, वे ऐसी युक्तियाँ, चालाकियाँ, और सिद्धान्त हैं, जो डिजिटल उत्पीड़न से बच निकलने में आप की सहायता कर सकते हैं।
मैं इस सत्र में पहले ही यह कहना चाहता हूँ कि जहाँ पर बाइबल से कोई आज्ञा नहीं है, वहाँ मेरे ये सुझाव आप पर बाध्य नहीं हैं। ये युक्तियाँ ऐसे विकल्प हैं जो आप की सहायता लम्बे समय तक, कुछ समय के लिये, या हो सकता है कि आप की वर्तमान परिस्थिति में, बिल्कुल भी कारगर न हों। आप को पूरी स्वतन्त्रता है कि आप अपनी पसन्द के अनुसार कुछ को चुन लें, उन्हें सुधार या अनुकूलित कर लें। उद्देश्य, इस डिजिटल संघर्ष में, आप को, निष्क्रिय नहीं, बल्कि पहले से सक्रिय बनाना है।
मसीह की ओर देखें
रॉबर्ट मुर्रे म्कशेयन इस कथन के लिए प्रसिद्ध हैं, “जब आप अपनी ओर एक बार देखें, तब मसीह की ओर दस बार देखें।” यह कथन सेल्फी और व्यर्थता के इस युग में सही दृष्टिकोण को याद दिलाते रहने के लिए सहायक है। यदि आप स्वयं से ही भरे हुए हैं, तो आप के लिये मसीही होकर बढ़ना चुनौतीपूर्ण होगा। आप इसके साथ सोशल मीडिया को भी जोड़ लें, और तब आपका स्वयं पर ध्यान केन्द्रित रखना तेज़ी से कई गुना बढ़ जाता है। मसीही का दैनिक व्यवहार यीशु की ओर देखना है (इब्रानियों 12:2)।
स्वयं से पूछें, क्यों?
“क्यों?“ यह एक साधारण किन्तु सामर्थी प्रश्न है। इसे कई बार पूछिये, और यह गहराई से खोद कर, समस्या की जड़ के मूल कारण को प्रकट कर देगा। जब बात आप के सोशल मीडिया पर उपस्थित होने की होती है, तब कुछ भी डालने से पहले स्वयं से पूछें कि आप क्यों डाल रहे हैं? क्या इससे परमेश्वर की महिमा होगी? क्या यह मेरी मसीही गवाही की हानि करेगा? क्या यह मेरे पड़ौसी से प्रेम करना है? क्या मैं औरों को जलाने के लिये इसे डाल रहा हूँ? क्या मैं औरों से प्रशंसा प्राप्त करने के लिए इसे डाल रहा हूँ?
सन्तुष्टि के लिए प्रार्थना करें
इस डिजिटल युग में, जहाँ सिद्ध छवि दिखाने वाले लोगों और ऐसे विज्ञापनों की भरमार है, जो आपको यही दिखाते रहे हैं कि उनके उत्पाद को खरीदने से आप कितने प्रसन्न रहेंगे, सन्तुष्ट रहना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह झूठ है, परन्तु फिर भी हमें सन्तुष्टि को विकसित करना है। धन्यवाद की बात है कि प्रेरित पौलुस ने हमें यह करने का तरीका बताया है। उसने कहा कि, “मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूँ; उसी में सन्तोष करूँ…” (फिलिप्पियों 4:11)। इससे पहले कि हम उस रहस्य में जाएँ, ध्यान कीजिये कि पौलुस ने कहा कि उसने यह सीखा है। यह स्वाभाविक रीति से नहीं आता है, और हम इस में समय के साथ बढ़ते जाते हैं। तो फिर, रहस्य क्या है?
हर एक बात और सब दशाओं में मैं ने तृप्त होना, भूखा रहना, और बढ़ना–घटना सीखा है। जो मुझे सामर्थ्य देता है उसमें मैं सब कुछ कर सकता हूँ (फिलिप्पियों 4:12b-13)।
पौलुस का रहस्य था कि मसीह में होकर, उसमें विश्वास के तथा उससे जुड़ जाने के द्वारा, चाहे वह थोड़े में हो या बहुतायत में, विश्वासी सन्तुष्ट रह सकता है। क्यों? क्योंकि मसीह के साथ आप को जो भी आवश्यक होता है, वह सब उपलब्ध रहता है। इसलिये, आप वास्तव में कभी निर्धन नहीं होंगे। यदि आप धनी हैं, तो इस युग की बातें आप का ध्यान नहीं बँटाएगी, क्योंकि आप स्वयं मसीह के धन को जानते हैं।
आप जब भी असन्तुष्ट अनुभव करें, सन्तुष्टि के लिये प्रार्थना करें। प्रार्थना करें, जैसे पौलुस ने इफिसुस के पवित्र लोगों के लिए की, कि “सब पवित्र लोगों के साथ भली–भाँति समझने की शक्ति पाओ कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊँचाई, और गहराई कितनी है, और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ” (इफिसियों 3:18-19)। मसीह के प्रेम को जानना ही पूर्ण सन्तुष्टि है।
स्वयं पर केन्द्रित रहें
ध्यान केन्द्रित करने के लिए प्रयास करना पड़ता है, और आज, हमारे चारों ओर विद्यमान ध्यान बँटाने और बात को टालने की इतनी बातें होने के कारण, और भी अधिक परिश्रम करना पड़ता है।
एक तरीका जिसे मैंने सहायक पाया है, वह पोमोडोरो विधि है। यह एक साधारण विधि है, जो ध्यान केन्द्रित करने के थोड़े से समय के लिये फोन को अलग रख देने और सभी सन्देशों को बन्द कर देने को सरल बना देती है। इसका साधारण सा ढाँचा यह है:
- सुनिश्चित करें कि उपकरण आवाज बंद कर के अलग रख दिये गये हैं।
- आप जिस कार्य को करना चाहते हैं, उसे चुनें।
- किसी समय-सूचक को 25 मिनट के लिए निर्धारित करें और जब तक अलार्म नहीं बजता, तब तक निरन्तर कार्य करते रहें (सोशल मीडिया को देखने के प्रलोभन में न पड़ें)।
- अपनी टाँगों को फैलाने, शौचालय जाने, या जल्दी से फोन को देखने के लिए 5 मिनट का अवकाश लें।
- कदम 3 और 4 को 2 घंटों तक दोहराते रहें।
- थोड़ा लम्बा अवकाश लें।
इस विधि का नाम टमाटर के आकार की सामान्य घड़ी से पड़ा, जिसे इसके आविष्कारक ने, समय की सूचना देने के लिए, कॉलेज में प्रयोग किया था (इतालवी भाषा में “पोमोडोरो” का अर्थ टमाटर होता है)। एक अतिरिक्त युक्ति है कि समय-सूचना के लिए इसी प्रकार की सामान्य घड़ी का प्रयोग कीजिये, ताकि आप को यह करने के लिए अपने किसी डिजिटल उपकरण का प्रयोग न करना पड़े। समय का ध्यान रखने के लिए अपने स्मार्टफोन का उपयोग न करना, निर्णय को टालने के प्रलोभन को कम करेगा।
उपकरणों से मुक्त स्थान
यदि आप नहीं चाहते हैं कि आप के उपकरण के कारण आप का ध्यान बँटे, तो उसे पीछे छोड़ दें। इसे एक पारिवारिक नियम समझें: जब आप भोजन की मेज़ पर बैठे हों तो अपने उपकरणों को रसोई में छोड़ दें, किसी भोजनालय में हों तो किसी के बैग में रख दें, और अपने शयनकक्ष में न तो उनका प्रयोग करें और न ही उन्हें चार्ज करें। यदि आप भोजन करते समय परस्पर गहन चर्चा करना चाहते हैं, या सोने के लिए जल्दी जाना चाहते हैं, तो बिना उपकरण क्षेत्र बनाना सहायक होता है।
कीमत का ध्यान रखिए
आप अपने फोन पर नेटफ्लिक्स या अन्य किसी मनोरंजन या ध्यान बँटाने वाली बात में कितना समय गँवा देते हैं, इसका आँकलन कीजिए। यह करना बहुत कुछ प्रकट करेगा और आप को उस समय को बचाने के लिए एक आधार प्रदान करेगा।
किसी अच्छी आदत को अपनाइये
कीमत का आँकलन कर लेने, तथा यह एहसास कर लेने के बाद कि आप प्रतिदिन 90 मिनट अपने फोन पर इधर-उधर की व्यर्थ बातों को देखने में लगा देते हैं, बजाए पूरे 90 मिनटों को एक ही बार में मिटा देने के, उस समय में किसी अच्छी आदत को भी सम्मिलित कर लें। उदाहरण के लिये, किसी पुस्तक को पढ़ने, या पुस्तक लिखने, या 30 मिनट व्यायाम करने के लिए यह ध्यान में रखते हुए प्रतिबद्ध हों कि आप के लिए इसका प्रतिफल शेष 60 मिनट हैं। आप जैसे-जैसे बढ़ते जाते हैं, और अपनी बुरी आदतों की शक्ति को घटते हुए देखते हैं, इसे 45 मिनट कर लें।
स्मार्टफोन से पहले पवित्रशास्त्र
यदि आप अपने दिन का आरम्भ अपने उपकरण को उठाने और फिर व्यर्थ की बातों को देखने से करते हैं, तो आप पाएँगे कि आप सारे दिन व्यर्थ बातें ही देखते रहेंगे। क्योंकि आप का फोन आपके साथ होता है, इसलिए, इससे पहले कि सुबह के भोजन के समय आप अपनी बाइबल को उठाएँ, फोन पर आया हुआ कोई सन्देश आप को वापस उस पर ले जा सकता है। या, यदि आप की बाइबल आप के उपकरण में ही है, तो आप नवीनतम लोकप्रिय वीडियो से इतने आकर्षित हो सकते हैं, कि आप बाइबल की अपनी एप्प को खोल ही नहीं पाते हैं। कोई समाधान? एक लेखक द्वारा बनाये गये एक नियम पर विचार कीजिये, “स्मार्टफोन से पहले पवित्रशास्त्र।” जब तक आप अपना दैनिक बाइबल भाग नहीं पढ़ लेते हैं, तब तक आप फोन को छूएँगे भी नहीं। इसी बात को एक अन्य लेखक ने भिन्न शब्दों में कहा: “यदि बाइबल नहीं तो सुबह का भोजन भी नहीं।” वास्तविकता यही है कि यदि आप प्रति दिन अपनी बाइबल पढ़ना चाहते हैं, तो आप को, उसे अन्य बातों पर प्राथमिकता देनी होगी।
दो बार विचारें, एक बार पोस्ट करें
भवन-निर्माण व्यवसाय में एक अभिव्यक्ति है, “नापो दो बार, काटो एक बार।” यदि आप लकड़ी के लट्ठे को गलत स्थान से काट देंगे, तो यह गलती बहुत महँगी हो सकती है। इससे भी कहीं अधिक महँगा, सारे संसार के लोगों के लिये कुछ ऐसा ऑनलाइन पोस्ट कर देना है, जिसके परिणाम तुरन्त या फिर महीनों या वर्षों बाद तक भी होते रहेंगे। याकूब हमसे कहता है, “…सुनने के लिये तत्पर और बोलने में धीर और क्रोध में धीमा हो” (याकूब 1:19)। क्रोध में, या खिसिया कर कोई भी ऑनलाइन प्रतिक्रिया देने से बचें। सोशल मीडिया पर होने वाले अधिकाँश विवाद बच सकते थे, यदि जिन के कारण वे हुए, उन्होंने उस पोस्ट को डालने से पहले, रात भर उस पर विश्राम कर के, अगले दिन उसे फिर से पढ़ने, और पुनः विचार करने के बाद, उसे डाला होता।
आमने-सामने मुलाकात करने को प्राथमिकता दें
आप के ऑनलाइन कितने मित्र हैं? यदि हज़ारों नहीं, तो सैकड़ों तो होंगे। परन्तु आप के घनिष्ठ मित्र कितने हैं? यदि आप के दो-चार भी घनिष्ठ मित्र हैं, तो आप आशीषित हैं। आप को इन लोगों को सन्देश भेजने की अपेक्षा, उन से आमने-सामने मिलने को प्राथमिकता देनी चाहिये। प्रयास कीजिए कि उनसे महीने में एक बार (या और अधिक बार) कॉफी या किसी अन्य गतिविधि के लिये मिलें। इन सम्बन्धों को सींचिये, और आने वाले वर्षों में फलवन्त होते हुए देखिये।
मान लीजिये कि आप किसी से इसलिये नहीं मिल पाते हैं, क्योंकि वह किसी अन्य प्रान्त में रहता है। ऐसे में एक वीडियो कॉल के द्वारा फिर भी चेहरे तथा शरीर के हाव-भाव देखे जा सकते हैं, और सम्बन्धों की घनिष्ठता बढ़ती रह सकती है।
अपने उपकरण का चेहरा बदल दें
हमेशा ही बिना उपकरण का क्षेत्र बनाए रखना सम्भव नहीं होता है। इसलिये, जब आप किसी से वार्तालाप कर रहे हैं, उसकी बात सुन रहे हैं, तो अपने उपकरण को उलटा करके रख दें, जिससे आप को स्क्रीन पर कोई सन्देश न दिखाई दे। चाहे आप का उपकरण शान्त अवस्था में ही क्यों न हो, यदि कोई महत्वपूर्ण कॉल आती है, तो आप उसे कंपन उत्पन्न करते हुए सुन सकते हैं।
अपने संचार को उन्नत कीजिये
आज संचार का स्तर गिर गया है। फोन पर बात करने की बजाए लोग सन्देश भेजते हैं, और आमने-सामने की जाने वाली वार्तालाप का विचार भी उन्हें घबरा देता है। क्यों न स्वयँ को चुनौती दें कि अपने मित्र-समूह तथा परिवार जनों के साथ, जब भी सम्भव हो, आमने-सामने बात करेंगे? आप जिनके बारे में सोचते हैं, परन्तु उन्हें कभी सन्देश भी नहीं भेजते हैं, उन्हें सन्देश भेजें कि आप उनके बारे में सोच रहे थे। जिन्हें आप बहुधा सन्देश भेजते रहते हैं, क्यों न उनसे फोन पर बात करें? और जिनके साथ फोन पर बात करने में निःसंकोच हैं, उन्हें कॉफी पीने के लिए आमन्त्रित करें।
यदि आप सच में संस्कृति को चुनौती देना तथा किसी पर प्रभाव डालना चाहते हैं, तो उन्हें, एक अच्छा सा हस्त-लिखित पत्र, डाक से भेजिये।
स्क्रीन पर समय को सीमित करें
हम सभी को स्क्रीन पर बिताये समय को सीमित करना है, चाहे इसे कहा जाये या नहीं; क्योंकि हम में से कोई भी अपने उपकरण पर 24 घण्टे इधर-उधर की बातें देखता हुआ, या वीडियो खेलों को खेलता हुआ नहीं रह सकता है।
हम जितने वयस्क होते जाते हैं, हमारी ज़िम्मेदारियाँ, उतनी ही बढ़ती चली जाती हैं, और हमारे दिन भर के समय पर उतनी ही माँगें भी बढ़ती चली जाती हैं। परन्तु यह बच्चों पर लागू नहीं होता है, जो बड़ी प्रसन्नता से सारा दिन कुछ-न-कुछ देखते रह सकते हैं। यदि आप अपने फोन को प्रयोग करने के साथ सन्घर्ष कर रहे हैं, तो विचार कीजिये कि आप स्वयं पर क्या सीमाएँ लागू करना चाहते हैं। माता-पिता को, बच्चों के साथ बात करके उनके लिए समय-सीमाओं को स्थापित करना चाहिये। जब मेरे चारों बच्चे छोटे थे, हम उनमें से प्रत्येक को 15-15 मिनट तक ही फोन देखने की अनुमति देते थे, अगर सप्ताहान्त न हो, और हम कोई फिल्म न देख रहे हों। वे अपने उस समय को कोई साधारण सा वीडियो खेल खेलने में लगाते थे, और वे बारी-बारी उसे खेलते थे, और चारों एक घण्टे को आपस में बाँट लेते थे।
आज के परिवार पृथक हो गए हैं, क्योंकि बच्चे अपने-अपने कमरों में जाकर अपने फोन प्रयोग करते हैं, जबकि पहले परिवार खाने की मेज़ पर एकत्रित होकर साथ मिलकर कोई बोर्ड खेल खेलते थे। ऐसे पलों को बनाना तब ही सहज होता है, यदि स्क्रीन पर बिताए जाने वाले समय की सीमाएँ निर्धारित हों।
शयनकक्ष में कोई उपकरण नहीं
उन बातों को जिन्हें आप को नहीं देखना चाहिये, कहाँ पर ऑनलाइन देखने के लिए सबसे अधिक प्रलोभन अनुभव करते हैं? या कहाँ पर देर रात तक इधर-उधर की बातें देखते रहने में लगे रहते हैं? अधिकाँश के लिये, यह उनका शयनकक्ष होता है। मैं माता-पिता को सुझाव देता हूँ कि बच्चों, और अधिकाँश किशोरों के पास उनके शयनकक्ष में कम्प्यूटर या उपकरण नहीं होने चाहिये। किसी उपकरण का व्यक्तिगत प्रयोग एक विशेषाधिकार समझा जाना चाहिये, जिसे परिपक्वता दिखाने के द्वारा प्राप्त किया जाता है।
यदि आप के घर में इतना स्थान है, तो परिवार के कम्प्यूटर के लिये कोई सार्वजनिक स्थान उपयोग करें, और सुनिश्चित करें कि स्मार्टफोन, रात को बच्चों के सोने के लिए बिस्तर में जाने से पहले, चार्जिंग के लिये लगा कर, रसोई की मेज़ पर रख दिए जाते हैं।
सम्भव है कि आप के प्रलोभन का स्थान, आप का शयनकक्ष नहीं है। पता लगाएँ कि वह कहाँ है, और अपने उपकरण को वहाँ न ले जाने का तरीका भी सुनिश्चित करें।
उस एप्प को हटा दें।
यदि आपका उपकरण आपके पास होगा, तो अवश्य ही ऐसे समय आएँगे, जब आप को उन अनुचित बातों को देखने, या इधर-उधर की बातों को देखने में समय व्यर्थ करने का प्रलोभन होगा। विचार कीजिये कि यह करने के लिये आप किस एप्प का प्रयोग करते हैं। क्या आप ने कभी यह सोचा कि आप उस एप्प को हटा सकते हैं? यदि आप का प्रलोभन कोई वेबसाइट है, तो आप उसे ब्लॉक कर सकते हैं।
लोगों के लिए यह सामान्य होता चला जा रहा है कि अपने स्मार्टफोन्स से एप्पस को हटा दें, और सोशल मीडिया का प्रयोग केवल लैपटॉप या डेस्कटॉप द्वारा ही करें। इससे हर दूसरे मिनट उन एप्पस को देखते रहने का प्रलोभन हट जाता है। आप को प्रलोभन और स्वयँ के बीच अधिक से अधिक गतिरोध बनाए रखना चाहिये।
अपने इंटरनेट को फिल्टर करें
हम में से अधिकाँश, पानी को छानकर साफ किये बिना नहीं पीते हैं, तो फिर हम इसी सावधानी के बिना इंटरनेट का प्रयोग क्यों करें? एक इंटरनेट फिल्टर लगाने से, अनुचित सामग्री तक आप का पहुँचना कठिन हो जाता है, तथा अनायास ही अश्लीलता का सामने आ जाना भी कठिन हो जाता है।
इसके लिये कई विकल्प हैं, जैसे कि कॉवेननेन्ट आइज़ और कैनोपी। किसी भी फिल्टर से बच निकलने का कोई-न-कोई तरीका भी अवश्य होगा, और कोई भी फिल्टर किसी भी मानवीय हृदय को पाप से स्वच्छ नहीं कर सकता है। परन्तु, पाप को मार डालने का एक तरीका है, उसे पोषित नहीं करना, और इसके लिए इंटरनेट फिल्टर एक सहायक है, तथा आप के और आप के परिवार के लिये एक अच्छा साधन हो सकता है।
शुद्धता के लिए प्रार्थना करें
ध्यान रखिए कि आप के जीवन के लिये परमेश्वर की इच्छा आपका पवित्र बनना है (1 थिस्सलुनीकियों 4:3)।
तो फिर आप को परमेश्वर से सहायता के लिये प्रार्थना करनी चाहिये। ये कुछ पद हैं जिन्हें आप अपनी प्रार्थनाओं में बहुधा सम्मिलित कर सकते हैं:
- प्रभु, मेरी सहायता करें कि मैं “जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, अर्थात् जो भी सद्गुण और प्रशंसा की बातें हैं उन …” (फिलिप्पियों 4:8) के बारे में ही सोचूँ।
- “मेरे मुँह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले” (भजन संहिता 19:14)।
- प्रभु, मेरी सहायता करें कि मैं “सबसे अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है” (नीतिवचन 4:23)।
- “हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर” (भजन 51:10)।
- हे प्रभु मैं आप के वचन पर विश्वास करता हूँ, जो कहता है कि, “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (1 यूहन्ना 1:9)।
किसी मार्गदर्शक को खोजें
जीवन में किसी मार्गदर्शक का होना, बढ़ने में सहायक होता है। चाहे आप को अश्लीलता पर विजयी होने के लिए सहायता चाहिये, या नियमित बाइबल पढ़ने और प्रार्थना करने की आदत बनाने के लिए, या अपने मार्ग पर चलते हुए केवल कुछ प्रोत्साहन ही की आवश्यकता है, समस्या का समाधान, एक मार्गदर्शक का होना, हो सकता है।
यह मार्गदर्शक आपके माता-पिता, या बड़े भाई-बहनों, या स्थानीय कलीसिया के सदस्यों, या आप के उन साथियों में से जो आप से थोड़ा आगे बढ़ चुके हैं, कोई हो सकता है। आशा है कि आप इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका को एक मार्गदर्शक के साथ पढ़ रहे हैं।
जिस मार्गदर्शक पर आप भरोसा करते हैं, उससे आप निःसंकोच होकर अपनी उन चुनौतियों के बारे में बात कर सकते हैं जिनका सामना आप इस डिजिटल युग में, मसीह के प्रति विश्वासयोग्य रहने के प्रयास में, करते हैं। चाहे वे तकनीकी को भली-भाँति न भी जानते हों, बहुत सम्भव है कि वे परमेश्वर के वचन को भली-भाँति जानते होंगे, और आप साथ मिलकर, परमेश्वर की बुद्धिमानी को किसी भी परिस्थिति पर लागू कर सकेंगे।
चर्चा और विचार:
- इन में से कौन से सुझाव, अपने दैनिक जीवन में सम्मिलित करने के लिये, आप के लिए लाभकारी होंगे?
- तकनीकी के योग्य भण्डारी बनने के अपने प्रयास में, आप किस से आप के साथ सम्मिलित होने का अनुरोध कर सकते हैं?
उपसंहार
डिजिटल युग कोई “सुनहरा युग” नहीं है। जिन चुनौतियों के बारे में चर्चा की जा चुकी है, उनके अतिरिक्त, साइबर धमकियाँ, किशोरों द्वारा आत्महत्या, और युवाओं के यौन शोषण के दर बढ़ते ही चले जा रहे हैं। बहुतेरे अपने कार्य को लेकर हताश हो चुके हैं, क्योंकि वे अपने कार्य को बन्द नहीं कर पाते हैं (क्योंकि स्मार्टफोन की कृपा से, वे न तो ईमेल और न ही अपने अधिकारी से बच पाते हैं)। इन बातों को ध्यान में रखते हुए, क्या हम इस डिजिटल युग के लिये धन्यवादी हो सकते हैं?
जी हाँ, हम हो सकते हैं। वर्तमान की तकनीकी उन्नतियों ने चिकित्सा में सुधार किए हैं, अनेकों उद्योगों को बिगाड़ा और सुधारा है, वह ज्ञान जो कभी केवल पुस्तकालयों में या उच्च प्रतिभा वालों के पास ही सीमित था, उसे लगभग सारे विश्व को उपलब्ध करवा दिया है, गिर जाने या दिल का दौरा पड़ने से जीवन की हानि होने से बचाया है, स्मार्ट घड़ियों और स्मार्टफोन्स में खराबी आने का पता करना सहज किया है, और सबसे अधिक महत्वपूर्ण, परमेश्वर के वचन का प्रचार और वितरण तेज़ी तथा बहुतायत से सम्भव कर दिया है। सूची और भी बड़ी हो सकती है, विशेषकर, यदि आप विचार करें कि आज के डिजिटल युग ने किस प्रकार से आप की सहायता की है।
मेरा जीवन उन सन्देशों और उपदेशों से बहुत प्रभावित हुआ जिन्हें मैं इस लिए सुनने पाया, क्योंकि किसी व्यक्ति या सेवकाई ने उन्हें ऑनलाइन डालने का निर्णय लिया। क्या यह आप के लिए भी सच है? इंटरनेट ने मुझे वे अवसर प्रदान किए, जिनके बिना मैं आज लिगोनियर मीनिस्ट्रीस में अपनी इस भूमिका में सेवा नहीं कर रहा होता, या मुझे इस तरह की क्षेत्रीय मार्गदर्शिका लिखने का निमन्त्रण नहीं मिला होता। मुझे पता है कि प्रतिदिन संसार भर में असंख्य मसीही वह विश्वासयोग्य बाइबल शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जो उन्हें अन्यथा उपलब्ध नहीं हो पाती। और जहाँ पर ईश-विज्ञान का प्रशिक्षण बहुत कम है, इंटरनेट का धन्यवाद हो कि उसके माध्यम से, संसार के उन कम संसाधनों वाले क्षेत्रों के पास्टरों को उपयुक्त सहायता प्राप्त हो रही है, जिस से फिर उनकी मण्डलियों को उपयुक्त सहायता मिल रही है।
यद्यपि इस तरह की किसी क्षेत्रीय मार्गदर्शिका के साथ समय बिताना कुछ भारी हो सकता है, परन्तु फिर भी हमें धन्यवादी लोग होना चाहिये। डर के मारे आज की समस्त तकनीकी का तिरस्कार कर देने का प्रलोभन आ सकता है। परन्तु अन्ततः, परमेश्वर ही इतिहास का लेखक, और इतिहास के इस अध्याय पर भी अधिकारी है। जैसा मैं कह चुका हूँ, आप और मैं भण्डारी हैं, और हम केवल अपने समय और कौशलों के ही भण्डारी नहीं हैं, इस में हमारे संसाधन और उपकरण भी सम्मिलित हैं। इसलिए, हमारी बुलाहट, आज की तकनीकी की अनदेखी करना या उसका तिरस्कार करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि, हमें जो दिया गया है, हम उसका सदुपयोग महान आदेश के प्रसार तथा सम्पूर्ण जीवन में परमेश्वर को महिमा देने के लिये कर रहे हैं।
इस विषय पर क्षेत्रीय मार्गदर्शिका का एक अन्य सम्भावित परिणाम अपने पाप से बोझिल होना तथा दोषी अनुभव करना हो सकता है। ईमानदारी से, कोई भी ऐसा नहीं होगा जो इन अध्यायों को पढ़े और अपने जीवन में कुछ स्थानों पर चूका हुआ अनुभव न करे। परन्तु चूकने से बढ़कर, हो सकता है कि आप स्वयं को गहराई से घोर पाप में पड़ा हुआ पाएँ। यदि आप के साथ ऐसा है, तो जान लीजिये कि मसीह में क्षमा और स्वतन्त्रता है। अपने पाप के कारण उससे भागिये मत; बल्कि क्योंकि आप पापी हैं, और आप को उसके अनुग्रह की आवश्यकता है, ठीक इसी कारण से भाग कर उस की ओर आइये। मसीही जीवन तेज़ी से दौड़ी गई थोड़ी सी दूरी की एक दौड़ नहीं है; यह लम्बी दूरी की दौड़ है। विश्वास की इस दौड़ का मार्ग ऊबड़-खाबड़ हो सकता है, परन्तु हम जब भी गिरते हैं, परमेश्वर के अनुग्रह से, हम फिर से उठकर खड़े हो जाते हैं, और फिर दौड़ने लगते हैं।
अन्त में, मेरी प्रार्थना है कि इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका को पढ़ने के कारण आप के मनन, वार्तालाप, और आप में आए हुए परिवर्तन आप की सहायता करेंगे कि आप मसीह में अपनी पहचान प्राप्त कर सकें, अपने समय के अच्छे भण्डारी बनें, अपने मित्रों को और भी अधिक घनिष्ठ बनाएँ, और अपनी स्थानीय कलीसिया की ज़िम्मेदारियों में भाग लें, तथा पवित्रता और शुद्धता के अनुसरण में लगे रहें, सारी महिमा केवल परमेश्वर ही की हो।
हाँ, यह डिजिटल युग है, परन्तु यह वह समय भी है जिस में प्रभु यीशु ने निर्धारित किया कि आप जीवन जीयें; आनन्द के साथ उसकी सेवा करें (भजन 100:2)।
पाद-टिप्पणियाँ
- आर. सी. स्पराउल, “What Is Biblical Stewardship?” (बाइबल के अनुसार भण्डारी होना क्या है?) लिगोनियर मीनिस्ट्रीस. https:// www.ligonier.org/learn/articles/what-biblical-stewardship
विषयसूची
- 1 उस का भला या बुरा
- चर्चा और विचार:
- 2 डिजिटल युग और पहचान
- चर्चा और विचार:
- 3 डिजिटल युग और समय
- चर्चा और विचार:
- 4 डिजिटल युग और समाज
- चर्चा और विचार:
- 5 डिजिटल युग और यौन पाप
- चर्चा और विचार:
- 6 वर्तमान साधनों में निपुण बनें
- मसीह की ओर देखें
- स्वयं से पूछें, क्यों?
- सन्तुष्टि के लिए प्रार्थना करें
- स्वयं पर केन्द्रित रहें
- उपकरणों से मुक्त स्थान
- कीमत का ध्यान रखिए
- किसी अच्छी आदत को अपनाइये
- स्मार्टफोन से पहले पवित्रशास्त्र
- दो बार विचारें, एक बार पोस्ट करें
- आमने-सामने मुलाकात करने को प्राथमिकता दें
- अपने उपकरण का चेहरा बदल दें
- अपने संचार को उन्नत कीजिये
- स्क्रीन पर समय को सीमित करें
- शयनकक्ष में कोई उपकरण नहीं
- उस एप्प को हटा दें।
- अपने इंटरनेट को फिल्टर करें
- शुद्धता के लिए प्रार्थना करें
- किसी मार्गदर्शक को खोजें
- चर्चा और विचार:
- उपसंहार
- पाद-टिप्पणियाँ