#26 डिजिटल युग में शिष्यता

By नेथन डब्ल्यू. बिनघ्म

परिचय

आज, सोशल मीडिया तथा हमारे ईमेल इन-बॉक्स उन बातों के सारांशों से, जिन्हें लोग सोचते हैं कि हमें पता होनी चाहियें, भरे पड़े हैं, इसलिये कि कहीं आप इन से चूक गए हों

यह लिखते समय, प्रतिदिन, मैं सन्देशों की एक और श्रृंखला देखता हूँ, जो मुझे बताती है कि AI के संसार में नवीनतम खोज क्या हैं — केवल उसी सप्ताह या महीने की ही नहीं, परन्तु पिछले चौबीस घण्टों में, और मैं किस जानकारी से चूक गया हूँ! चीजें बहुत तेज़ी से आगे बढ़ और बदल रही हैं।

धन्यवाद की बात है कि परमेश्वर का वचन न तो बढ़ रहा है, और न ही बदल रहा है। इस प्राचीन पुस्तक में वह सब कुछ है जो हमें, फ्लिप-फोन, आई-फोन, या मेटावर्स के युग में भी, विश्वासयोग्यता से मसीही जीवन जीने के लिए पता होना चाहिये।

जैसे कि हम बाद के अध्यायों में देखेंगे, इक्कीसवीं सदी में तेज़ी से हुई तकनीकी प्रगति के कई नकारात्मक परिणाम भी हुए हैं, परन्तु अनेकों आशीषें भी आई हैं। मैं अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता हूँ कि जिस समय हम ऑस्ट्रेलिया से आकर अमेरिका में बसे थे, तब मेरे और मेरी पत्नी के लिए कितना कठिन होता, यदि ऑस्ट्रेलिया में पीछे छूटे हुए हमारे परिवार तथा मित्र जनों को हम सन्देश नहीं भेज पाते, या फेस टाईम पर उन से संपर्क नहीं कर पाते। जब हम उस भलाई को देखते हैं जो आई है, तो हमें परमेश्वर को धन्यवाद देना चाहिये, क्योंकि हम जानते हैं कि अन्ततः प्रत्येक अच्छी बात उसी से आती है (याकूब 1:17)। सुसमाचार के प्रचार को बढ़ावा देने के लिये, आज हमें जो भी उपलब्ध करवाया गया है, हमें गम्भीरता से उसका भण्डारी होना है। आप कलीसिया के इतिहास में एक ऐसे समय में रहते हैं, जो पिछली किसी भी सदी से बिलकुल भिन्न है। कोई भी, तोड़ों के दृष्टान्त (मत्ती 25:14-30) के दुष्ट सेवक के समान नहीं होना चाहता है, और न ही भयभीत होकर, हमें सौंपे गए की बढ़ोतरी की संभावनाओं को छुपाए रखना और बाधित करना चाहता है।

किन्तु साथ ही, मसीही होने के नाते, हमारी बुलाहट न केवल सुसमाचार की बढ़ोतरी के लिए, हमें उपलब्ध तकनीकी के भण्डारी होना है, वरन् उसकी कमियों — और उन बुराइयों — से भी अच्छी तरह से अवगत होना है जो तकनीक से आ सकती हैं। मान लीजिये कि आप निष्क्रिय रहते हैं, संसार जिसे स्वीकार कर लेता है, उसे आप भी बिना जाँचे, स्वीकार कर लेते हैं। ऐसे में, निःसन्देह, यह कार्य-विधि आप के मसीही जीवन के फलवन्त होने पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी, क्योंकि अपनी स्वाभाविक रीति से, संसार न तो परमेश्वर को आदर देने की ओर जा सकता है, और न ही जाता है।

हमारा यह डिजिटल युग बहुत कठिन, और कभी-कभी घबरा देने वाला प्रतीत हो सकता है। परन्तु, फिर भी मेरी यह प्रार्थना है कि, जैसे-जैसे आप इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका को उपयोग में लाते चले जाएँगे, सम्भवतः किसी मार्गदर्शक के साथ, तो आप न केवल उस बड़ी जिम्मेदारी को स्वीकार करेंगे, जो इक्कीसवीं सदी में उस मसीही पर है, जो वर्तमान के परस्पर सम्बन्धित साधनों को उपयोग करने का निर्णय लेता है, वरन् परमेश्वर आप को अपने अपरिवर्तनीय वचन की बुद्धिमानी तथा व्यावहारिक उपयोगिता से भी लैस कर दे।

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