#14 परमेश्वर की महिमा के लिए पितृत्व

By काइल क्लांच

परिचय

“अब मैं आपको पति-पत्नी घोषित करता हूँ।”

 

एक अनुभवी पास्टर होने के रूप में, मैंने ये शब्द पहले भी कई बार कहे थे। परन्तु इस बार बात कुछ अलग ही थी। मैंने ये शब्द केवल एक पास्टर के रूप में किसी कलीसिया के सदस्य से नहीं कहे थे। मैंने ये शब्द एक पिता के रूप में अपने पुत्र और उस प्यारी सी स्त्री से कहे थे, जो उस पल मेरी पुत्र-वधु बन गई थी।

 

उस पल कुछ अद्भुत घटित हुआ, जो मेरे लिए अत्यन्त निजी था। एक नये सिर अर्थात् मुखिया के साथ एक नये घराने का निर्माण हुआ। उस पल तक मेरा पुत्र अपने पूरे जीवन में मेरे घराने का सदस्य रहा था, और उस घर में वह मेरी प्रधानता के अधीन, मेरे अधिकार के अधीन था। अब, वह एक और घराने का मुखिया है। मूसा ने उत्पत्ति 2:24 में लिखा है, “पुरुष अपने माता–पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा, और वे एक ही तन बने रहेंगे।” इस आयत के एक पुराने अनुवाद पर आधारित यह पुरानी लोकोक्ति कहती है, “छोड़ना और एक तन हो जाना।” उस पल ने मुझे कैसा महसूस कराया, उसे बताने के लिए मेरी जानकारी में सबसे अच्छा तरीका यह है कि मुझे अपार प्रसन्नता हुई। इस घटना की गहराई और इस अहसास के कारण मेरी भावनाएँ बहुत भारी थीं कि इस पल तक पहुँचने से पहले पितृत्व के वर्षों में ऐसा कोई और अवसर नहीं मिलता। मुझे प्रसन्नता इसलिए हुई, क्योंकि मेरा पुत्र एक धर्मी पुरुष बन रहा है

— जो अपने स्वयं के घराने का एक विश्वासयोग्य मुखिया होगा — और यह उन बड़े-बड़े लक्ष्यों में से एक है, जिसकी ओर मेरे सभी पितृत्व के प्रयत्न कई वर्षों से निर्देशित थे। उस घटना के आसपास के दिनों में, मैंने पितृत्व पर बहुत अधिक चिन्तन किया। क्या मैं अपने सबसे बड़े पुत्र के लिए वैसा पिता था, जैसा मुझे होना चाहिए था? क्या मैंने भक्ति, दीनता, विश्वासयोग्यता, पवित्रता और प्रेम का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया था कि मेरा पुत्र पवित्र जीवन जीने में आगे बढ़ते हुए मेरे जीवन को एक उदाहरण के रूप में देखे? इस पड़ाव पर पहुँचकर, मैं अपने दूसरे बच्चों की देखभाल और नेतृत्व में क्या अलग कर सकता हूँ?

 

मेरे चिन्तन ने कुछ ऐसी बातें सामने ला दीं, जिन्हें मैं पछतावे की श्रेणी में डाल दूँगा और कुछ बातें ऐसी थीं, जिनके लिए मैं विश्वास करता हूँ कि मैंने सही किया। परन्तु सब बातों से बढ़कर, इस चिन्तन ने मुझे मसीह के सुसमाचार की आशा की ओर प्रेरित किया है। मैं मसीही इसलिए नहीं हूँ, क्योंकि मैं विश्वास करता हूँ कि मैं सिद्ध पितृत्व (या किसी और सिद्ध बात) के सूत्र का पालन कर पाने में सक्षम हूँ। मैं सही रीति से मसीही इसलिए हूँ, क्योंकि मैं सिद्धता के सूत्र, अर्थात् परमेश्वर की व्यवस्था का पालन नहीं कर सकता हूँ। मेरे सारे बेहतरीन प्रयत्न परमेश्वर की पवित्रता के मानक से बहुत कम हैं: “सब ने पाप किया है, और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं” (रोमि. 3:23)। परन्तु जबकि मैं एक पिता के रूप में पापी होकर परमेश्वर की महिमा से रहित हूँ, तो मैं इस ज्ञान में विश्राम पाता हूँ कि परमेश्वर, अर्थात् महिमामय रूप से सिद्ध पिता ने मेरे लिए अपना एकलौता पुत्र दे दिया (यूह. 3:16)। क्योंकि यीशु ने मेरे पापों के लिए क्रूस पर दुःख सहा और तीसरे दिन फिर से जी उठा, इसलिए मुझे पापों की क्षमा और अनन्त जीवन की आशा मिलती है। एक तरफ तो मसीह का सुसमाचार मुझे स्वयं की-घृणा से बचाता है, क्योंकि मैं व्यवस्था के कार्यों से नहीं, बल्कि मसीह पर विश्वास करने के द्वारा धर्मी ठहराया गया हूँ, जिसमें एक पिता के रूप में मेरे परिश्रम भी शामिल हैं (रोमि. 3:28 और गला. 2:16)। और दूसरी तरफ, सुसमाचार मुझे एक विश्वासयोग्य पिता के रूप में अपनी बुलाहट और कर्तव्य को पूरा करने के लिए बाध्य करता है, क्योंकि मैं जानता हूँ कि परमेश्वर ने मुझे अपने उद्धार की दैनिक वास्तविकता को कार्यान्वित करने के लिए अपना पवित्र आत्मा दिया है, जिसमें एक पिता के रूप में मेरे परिश्रम भी शामिल हैं (फिलि. 2:12-13)।

 

इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका में, मैं यह देखने में आपकी सहायता करना चाहता हूँ कि एक पिता होने का कार्य किस प्रकार परमेश्वर की अपनी वाचा के लोगों के प्रति पितृत्व देखभाल के अनुरूप है, जिससे कि जब आप अपने बच्चों के लिए एक अच्छे पिता बनने का प्रयत्न करें, तो परमेश्वर के पुत्र, यीशु मसीह में दिखाए गए छुटकारे के प्रेम में सांत्वना, आत्मविश्वास और सामर्थ्य प्राप्त करने में पवित्र आत्मा आपकी सहायता करे।

 

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