#45 जुआ: छिपी हुई कीमत
परिचय
बहुधा जुए का आरम्भ एक उत्तेजना से होता है—एक छोटा सा रोमाँच, सम्भावना की एक चिंगारी। इस का आरम्भ एक बार खेल पर दाँव लगाने, मार्च मैडनेस में एक बार भाग लेने, या जुआघर में जाकर उस “असफल न होने वाली” प्रणाली को परखने, जिसे आप ने बनाया है, के द्वारा हो सकता है। कुछ समय के लिये ऐसा लग सकता है कि जुआ कार्य कर रहा है। जुआघर की रौशनियाँ, ऊर्जा, और एड्रीनलीन—ये आप को अन्दर खींच लेते हैं। हो सकता है कि आप जितना लेकर आये थे उससे अधिक लेकर जाएँ। जुआ एक उत्तेजना के साथ आता है और यह वास्तविक होती है तथा बहुत अधिक लत लगाने वाली भी।
ईमानदार रहिये—जुआघर के पैसे समाप्त होने से पहले आप के पैसे समाप्त हो जाएँगे। उस घर को जीतने के लिये ही बनाया गया है। ये करोड़ों डॉलर का व्यवसाय है क्योंकि आप के और मेरे जैसे लोग वहाँ लौट कर जाते रहते हैं। समय के साथ, वह जो कभी अहानिकारक एवं मजेदार लगता था, चुपचाप ही ऐसा बन जाता है जिसे आप और अधिक नियन्त्रित नहीं कर पाते हैं। आप मनोरंजन के लिये जुआ खेलने के स्थान पर बाध्य होकर खेलने लग जाते हैं। और शीघ्र ही, उसकी लत, जितना आप ने दिया था, उसे कहीं अधिक आप से ले लेती है।
यदि आप इसे पढ़ रहे हैं, तो हो सकता है कि आप को इस प्रकार की हानि अनुभव होने लगी है। यह हानि आर्थिक हो सकती है—पैसा जो आप के पास नहीं था, ऐसे कर्ज़ जिनकी आप ने अपेक्षा नहीं की थी। हो सकता है वह सम्बन्धों में हो—टूटा हुआ भरोसा, सम्बन्धों में तनाव, अवहेलना की हुई फोनकाल्स हो। या हो सकता है कि हानि आत्मिक है। आप परमेश्वर से दूर अनुभव करते हैं, प्रार्थना करने के लिये भावना हीन हैं, हर दाँव के बाद खालीपन हो। हो सकता है कि आप छिपने से थक चुके हैं, उस अगली जीत के पीछे भागने से थक चुके हैं, या स्वयं से यह पूछते-पूछते थक गए हैं कि बात नियंत्रण से इतनी बाहर कैसे निकल गई। यदि यह आप की दशा है, तो आप अकेले नहीं हैं—और निश्चय ही आप आशा की सीमा से बाहर भी नहीं हैं।
यह जीवन कौशल मार्गदर्शिका आप को लज्जित करने के लिये नहीं है। यह ईमानदारी के साथ प्रलोभन से निकलने में आप की सहायता करने तथा यीशु की सहायता पर भरोसा रखने के लिये है। उसकी ओर मुड़ने से पहले, आप को स्वयं को स्वच्छ करने की आवश्यकता नहीं है। यीशु स्वयं ही सफाई करता है, और वह चाहता है कि सभी बातों के लिये आप उस पर भरोसा रखें। इस मार्गदर्शिका को, आप को सतह के नीचे देखने में सहायता करने के लिये बनाया गया है—कि आप न केवल अपने व्यवहार को बल्कि अपनी लालसाओं को भी समझ सकें। बहुत ही कम होता है कि जुआ केवल पैसे से सम्बन्धित होता है। बहुधा यह नियन्त्रण, बच निकलने, पुष्टि, भय, या खालीपन से सम्बन्धित होता है। परमेश्वर इस सब को देखता है—तथा कुछ और बेहतर प्रस्तावित करता है।
यह जीवन कौशल मार्गदर्शिका जुए के आकर्षण को और जो झूठ वह बोलता है उन का, तथा उसकी छिपी हुई कीमत का, बहुधा जिसका बोध नहीं होता है, उन मूर्तियों का जो हमें परमेश्वर से दूर खींच ले जाती हैं, तथा पश्चाताप, बहाली, और चिर-स्थाई स्वतन्त्रता के निमन्त्रण का विश्लेषण करेगी।
आप की कीमत का आँकलन, आप की जीत या हार से नहीं होता है—परन्तु मसीह के द्वारा होता है—जिसने कभी जुआ नहीं खेला, इसलिये नहीं कि कहीं वह हार न जाए, परन्तु उसने क्रूस पर अपना सब कुछ दाँव पर लगा दिया ताकि जो भी उसे पुकारे, उसे बचा सके। उसने अपना सब कुछ दे दिया ताकि आप स्वतन्त्र, क्षमा प्राप्त, और नए किये गये हो सकें।
एक बेहतर मार्ग है; वह सहज तो नहीं है—परन्तु एक सत्य मार्ग है। यीशु ने कहा, “यीशु ने उससे कहा, मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता” (यूहन्ना 14:6)। जुए से दूर और स्वतन्त्रता की ओर जाने वाला मार्ग स्वयं के प्रयासों, नियति, या इच्छा-शक्ति में नहीं मिलता है। यह केवल यीशु ही में मिलता है—जो सच्चे जीवन, आनन्द, और अनन्तकाल की शान्ति का एकमात्र मार्ग है।
चलिये यात्रा को आरम्भ करते हैं।
ऑडियो मार्गदर्शिका
ऑडियो#45 जुआ: छिपी हुई कीमत
भाग I: जुए का आकर्षण—वास्तव में दाँव पर क्या लगा हुआ है?
“जो रुपये से प्रीति रखता है वह रुपये से तृप्त न होगा; और न जो बहुत धन से प्रीति रखता है, लाभ से: यह भी व्यर्थ है।”
—सभोपदेशक 5:10
जीतने का खिंचाव
मैं सदा ही प्रतिस्पर्धात्मक रहा हूँ। मुझे हारने से नफरत थी (सच कहा जाए तो, अभी भी है)। जब मुझे जुए का पता चला, तो ऐसा लगा कि यह इस लालसा का सिद्ध विस्तार है। मैं गणित का एक शिक्षक बनने के लिये अध्ययन कर रहा था—एक ऐसा व्यक्ति जो प्रतिमानोंऔर सम्भावनाओं को देखता था, ऐसा जो यह सोचता था कि, “मैं इसे समझ सकता हूँ। मैं इसकी प्रणाली को हरा सकता हूँ।” और कुछ अवसरों पर मुझे लगा कि मैंने यह किया भी।
मुझे याद है कि मैं एक जुआघर से उससे हजारों अधिक लेकर बाहर आया, जितने लेकर मैं अन्दर गया था। मुझे लगता था कि मैं अजेय हूँ। मुझ में एक आवेग था, घमण्ड की एक भावना थी—मानो मैंने सम्भावनाओं को पराजित कर दिया है। जुए की मेज़ पर जब पासे फेंके जा रहे थे, और लोग बढ़ावा दे रहे थे, वातावरण उत्तेजनात्मक था। मुझे जैसे आग लगी हुई थी। वहाँ ताली बजाना, मित्रता दिखाना, और एड्रीनलीन थे। ऐसा लगता था कि मानो मैंने कोई प्रतियोगिता जीत ली थी।
वह केवल पैसे के बारे में नहीं था; वह पहचान के बारे में था—अर्थात् पुष्टि मिलने के। जुआ खेलने ने मुझे वह दिया, जिसकी मुझे लगता भी नहीं था कि मुझमें तीव्र लालसा है: सराहना। उससे एक ऐसा वातावरण बनता था जहाँ अपने जीतने के बारे में बात करने से ऐसा लगता था कि मानो आप कमरे में उपस्थित सभी लोगों से अधिक चतुर हैं। आखिरकार, आप लोगों को अपनी हार के लिये तो डींग मारते हुए नहीं सुनते हैं। आप जब भी सुनते हैं, तब कोई बड़ा दाँव लगाने, विभिन्न प्रकार के जुए खेलने में जीतते रहने, या उनकी मशीनों से $10,000 जीतने की बात ही सुनते हैं। जो भी जुए की बात करता है, लगता है कि वह हमेशा ही जीतता ही रहता है। इसलिये। मैंने सोचा, “तो फिर मेरे साथ क्यों नहीं? मैं ऐसा क्यों नहीं हो सकता हूँ जिसने खेल को समझ लिया, सम्भावनाओं को हरा दिया, और जीवन यापन की एक सफल प्रणाली बना ली?”
मैंने ताश के पत्ते गिनने पर किताबों को पढ़ा और क्रैप्स के खेल में जीतने की सर्वोत्तम प्रणाली बना ली। मैंने उन विशेषज्ञों की सदस्यता ली जो खेलों से संबंधित “अचूक” बातें बताया करते थे। मैंने विभिन्न पहलुओं को सीखने के लिये में समय और पैसा लगाया। यदि आगे निकल जाने का कोई भी तरीका हो सकता था, तो मैं उसे पता करना चाहता था।
मेरे दृष्टिकोण से यह दुस्साहसी होना नहीं था। मैं इसे तैयारी करना समझ रहा था। यद्यपि अन्य लोग जुए को संयोग समझते थे, मैंने स्वयं को आश्वस्त कर लिया था कि जुआ कौशल का खेल है। विरोधाभास यह था कि, जितना मैं यह समझता था कि नियन्त्रण मेरे ही हाथों में है, वास्तव में उतना ही अधिक मैं औरों के द्वारा नियन्त्रित किया जा रहा था।
और क्या आप सच को जानना चाहते हैं? जीत कभी पर्याप्त नहीं होती थी। मुझे हमेशा ही और अधिक चाहिये होती थीं—और भी अधिक बड़ी जीत, अगली उत्तेजना, सुनाने के लिये अगली कहानी। मैं केवल पैसे के लिये जुआ नहीं खेल रहा था, मैं सार्थक होने के लिये जुआ खेल रहा था। उसकी प्रणाली मुझे हरा रही थी, और मैं हर मिनट लत में और अधिक फँसता चला जा रहा था। जुआघर ने यह सुनिश्चित कर रखा था कि मैं वहाँ फँसा रहूँ: मुझे मुफ़्त भोजन, रहने के लिये मुफ्त कमरा, और जुआ घर में दाँव खेलने के लिये मुफ्त अवसर और खेल पुस्तिकाएँ दी जाती थीं। मैं स्वयं को राजसी ठाठ-बाठ वाला व्यक्ति समझने लगा था, जब कि अभी मैंने बस हाई स्कूल ही पास किया था। दुर्भाग्य यह था कि उन “उपहारों” में से कोई भी वास्तव में मुफ्त में नहीं था; वे सभी मुझे लौट कर आते रहने तथा और अधिक लम्बे समय तक वहीं फँसे रहने के लिये डाला गया चारा थे। अन्ततः, मैं वह सब जो मैंने जीता था हार गया—तथा उससे और बहुत अधिक भी।
ये जुआ घर और जुआ खेलने के साधन, हमेशा जीत जाते हैं। ये जीत जाने के लिये ही बनाए जाते हैं। इसीलिये ये करोड़ों डॉलर कीमत की संस्थाएँ होती हैं। आप के और मेरे जैसे लोग इन संस्थानों की सफलता को पैसे देते रहते हैं।
जुआ खेलना एक नकली पुरस्कार देने वाली प्रणाली बन गया था। वह उत्तेजना, सम्पत्ति, सराहना का वायदा करता था—परन्तु वास्तव में उससे मुझे बेचैनी, चिन्ता, और आत्मिक खालीपन मिला।
निपुणता की मिथ्या धारणा
जुआ मेरी जैसी विचारधारा वाले लोगों को शिकार बनाता है—ऐसे लोग जिन्हें हारने से नफरत है, जिन्हें लगता है कि वे सम्भावनाओं को हरा सकते हैं, लोग जो अपने अन्दर यह सोचते हैं कि उनके पास जितना अधिक धन होगा, जीवन उतना अधिक सन्तुष्टि भरा होगा।
मेरे पास एक “प्रणाली” थी (अन्य सभी के पास भी होती है), परन्तु जब खेल में धाँधली कि हुई होती है, तब प्रणालियाँ काम नहीं करती हैं। भ्रम यही है कि: यदि आप पर्याप्त चतुर, शीघ्रता से कार्य करने वाले, और युक्ति करने वाले होंगे, तो आप जीत जाएँगे—परन्तु यह झूठ है। जैसा कि सभोपदेशक 5:10 कहता है, “जो रुपये से प्रीति रखता है वह रुपये से तृप्त न होगा।” जुआ खेलने से सन्तुष्टि नहीं मिलती है—वह केवल झूठे वायदे फुसफुसाकर आप को लुभाता है। फिर वह आप को उन गहराइयों में खींच ले जाता है जिनमें जाने की आप ने कल्पना भी नहीं की थी। प्रत्येक चक्र के साथ, उसकी भूख और भी अधिक बढ़ती चली जाती है।
जो मज़े लेने के लिये आरम्भ हुआ था, शीघ्र ही आदत बन गया। मेरा दिमाग़ हमेशा काम करता रहता था—सम्भावनाओं का हिसाब लगाना, प्रस्तुतियों का आँकलन करना, अगली “निश्चित सम्भावना” को देखने का प्रयास करना। जीतने से मिली उत्तेजना शीघ्र ही समाप्त हो जाती थी, और हारने से हुई निराशा लम्बे समय तक बनी रहती थी। यह जीतने के बारे में कम, और सुन्न हो जाने के बारे में अधिक होता चला जा रहा था—सुन्न कर देने वाला भय, निराशा, और यह बढ़ता हुआ एहसास कि मेरे अन्दर की गहराई में कुछ टूट चुका था।
यह केवल एक शौक नहीं था—यह एक झूठी पहचान बन चुका था। जुआ खेलना मुझ से कहता था कि मैं तेज़, चतुर, और योजना से खेलता हूँ। वह मुझ से कहता था कि मैं अन्य सामान्य दाँव लगाने वालों से भिन्न था। परन्तु यह सब झूठ था। मैं प्रणाली को हरा नहीं रहा था। मैं उसमें डूबता चला जा रहा था, और अपनी लत पर नियन्त्रण करने का मेरे प्रत्येक प्रयास से, मुझ पर उसका शिकंजा कसता ही जा रहा था।
भावनाओं का उतार-चढ़ाव और झूठी ऊँचाइयाँ
मैंने ध्यान नहीं दिया कि जुए ने मेरी भावनात्मक दशा पर कितना नियन्त्रण रखना आरम्भ कर दिया था। जीतने पर मुझे अजेय अनुभव होता था, परन्तु हारने से मैं निराशा के चक्र में फँस जाता था। मेरी मनोदशा अब मेरी नहीं रह गई थी—अब वह प्रत्येक खेले गए दाँव के परिणाम के हाथों में थी। मेरे मूल्य का आभास संख्याओं और सम्भावनाओं द्वारा निर्धारित हो रहा था।
मित्र मुझ से दूर होने लगे। मैंने औरों के साथ जुआघर जाना छोड़ दिया, अब मैं अकेला ही जाने लगा। जिन खेलों पर मैंने दाँव लगाए थे उन्हें मैं अकेले ही देखता था। यदि मैं हार जाता था तो उस समय लोग मेरे आस-पास नहीं होना चाहते थे, और मैं उन्हें दोषी नहीं ठहरा सकता था। मैं चिड़चिड़ा, क्रोधित, और निराश हो जाता था। परन्तु फिर भी मैं स्वयं को आश्वस्त करता था कि अगली जीत सब कुछ ठीक कर देगी।
अन्ततः, मैंने उन बातों पर दाँव लगाना छोड़ दिया, मैं जिनकी परवाह करता था। मैं उन टेनिस की स्पर्धाओं पर, जिन्हें मैं देखता भी नहीं था और ऐसे स्थानों पर, जिनके बारे में मैंने कभी सुना भी नहीं था, आयोजित होने वाली क्रिकेट की प्रतियोगिताओं पर पैसे लगाने लगा था। उस समय पर यह आनन्द या कार्य विधि की बात नहीं थी। मैं तो बस अपने मन में परमेश्वर के आकार के खाली स्थान को भरने का प्रयास कर रहा था।
मुझे आज भी वह भावना याद है कि प्रातः उठते ही मैं आधी दुनिया दूर के आँकड़े देखने लगता था। मैं नपा-तुला जोखिम उठाने से एक अन्धे जुनून में जा चुका था। इस स्थिति में मैं समझ गया कि अब मैं सफलता के पीछे नहीं भाग रहा था। अब मैं बच निकलने के प्रयास कर रहा था।
यह भावनात्मक उतार-चढ़ाव बहुत थका देने वाला था। आनन्द का स्थान चिन्ता ने ले लिया था। शान्ति के स्थान पर घबराहट आ गई थी। अब मैं स्वयँ को भी नहीं पहचान पा रहा था।
अकल्पनीय
जुआ मुझे ऐसी बातों में ले गया जिनके बारे में मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि मैं करूँगा। मैंने चोरी करना आरम्भ कर दिया—मित्रों, परिवार, सहकर्मियों, और अजनबियों से। बहुतेरे ऐसे लोग थे जो मुझ पर भरोसा करते थे। मैंने क्रेडिट कार्ड्स की उच्चतम सीमा तक खर्च किया और फिर उसे छुपाने के लिये झूठ बोले। सबसे बुरी बात यह थी कि यह सब कुछ करना बिलकुल सामान्य सा लगता था। एक के बाद दूसरा समझौता होता चला गया, जब तक कि मेरे विवेक की आवाज़ दबकर एक हल्की सी फुसफुसाहट बन कर रह गई।
मैं जो कर रहा था, उसके लिये मुझे कोई दोष-बोध नहीं था। मुझे केवल इसी की परवाह थी कि मेरा पैसा वापस आ जाए, और अपने मन में मैं इन विचारों के द्वारा स्वयं को सही ठहरा लेता था कि, “एक बार मुझे एक बड़ी जीत मिल जाए, तब वे सब समझ लेंगे। मुझे बस एक प्रयास और करना है।” इस प्रकार के विचार विनाशक होते हैं—और यह भयानक है कि ये कितने आश्वस्त करने वाले हो जाते हैं।
परन्तु सच यही है कि, अब यह केवल जुआ खेलना मात्र नहीं रह गया था। इसका आरम्भ तो वहाँ से हुआ था, परन्तु इसका अन्त वहाँ नहीं हुआ—यह और अधिक फैल गया। एक बार जब झूठ बोलना मुझे सहज लगने लगा, मुझे छल करना सरल लगने लगा। एक बार जब मैंने चोरी करने को सही ठहरा लिया, मैंने लोगों को लोग समझना बन्द कर दिया—तब वे केवल लक्ष्य तक पहुँचने के साधन बन गये। मैं स्वयं को सुरक्षित बनाए रखने और आनन्द प्राप्त करने से ग्रसित हो गया। मैंने वो सीमाएँ भी लांघ लीं, जिन्हें मैं कभी सम्भव नहीं समझता था।
उस समय, मैं उसे पाप नहीं कहता। मैं यीशु को नहीं जानता था। मुझे पापों के प्रति कायल होने और पश्चाताप करने की भाषा समझ नहीं आती थी। मैं उसे “बाध्य होना” कहता था। मेरे लिए यह “बचे रहने” का तरीका था। मैं स्वयं से कहता था, “कमियाँ तो सभी में होती हैं। देखो, कम से कम मैं हत्यारा तो नहीं हूँ।” परन्तु अपने अन्दर की गहराइयों में मैं जानता था कि मैं किसी पवित्र को तोड़ रहा हूँ। बस अभी मेरे पास उसे व्यक्त करने के लिये शब्द नहीं थे।
जैसे-जैसे मैं बिलकुल तले के निकट आता गया, मेरे जीवन का अर्थ और उद्देश्य जाते रहे। मैं अब जी नहीं रहा था। बस किसी तरह से जान बचाए हुए था।
एक बुद्धिमान पास्टर ने एक बार कहा था, “पाप आप को इतनी दूर तक ले जाएगा जितना आप कभी जाना नहीं चाहते हैं, वहाँ उतनी देर रखेगा जितनी देर आप कभी रहना नहीं चाहते हैं, और आप से इतनी कीमत भरवाएगा जितनी आप कभी देना नहीं चाहते हैं।” मेरी कहानी भी यही थी।
और जुआ ही केवल एकमात्र पाप नहीं था जिस में मैं फँस चुका था। क्योंकि मैं यीशु को नहीं जानता था, और क्योंकि वह मेरे जीवन का लंगर नहीं था, वह पाप जो पैसे से आरम्भ हुआ था अन्ततः मेरे जीवन के अन्य भागों में भी फैल गया। जब आप एक स्थान पर कायल किये जाने की अवहेलना करते हैं, तब अन्य सभी स्थानों पर भी अवहेलना कर देना सहज हो जाता है।
पाप कभी निष्क्रिय नहीं रहता है—वह बढ़ता रहता है और संक्रमित करता है, और जब हम उसे मार डालने की बजाए उसे नियन्त्रित करने के प्रयास करते रहते हैं, तो पाप हमें नियन्त्रित करने लगता है जब तक कि वह हमें तोड़-मरोड़ नहीं देता है। सही समय पर परमेश्वर ने हस्तक्षेप किया और मेरे जीवन को पूरी तरह से बदल दिया, मुझे जुए में जकड़े होने से छुड़ा लिया। और वह आप को भी स्वतन्त्र करने के लिये इच्छुक और तैयार है।
वह दुःखद कहानी जो मेरी हो सकती थी
मैं एक ऐसे व्यक्ति को जानता हूँ जिस ने जुए की अपनी लत को वर्षों तक छुपाए रखा। उसके परिवार को इसका आभास भी नहीं था, और जब सब कुछ सामने आया, तब हानि अति विनाशकारी हो चुकी थी। उसे अपने घर, परिवार, और बेटियों को खो देना पड़ा। ऐसा नहीं था कि यह व्यक्ति अपने परिवार से प्रेम नहीं करता था परन्तु जुए की उसकी लत इतनी बढ़ चुकी थी कि अब छुप नहीं रही थी, और इतनी शक्तिशाली हो गई थी कि उसके लिये अकेले उससे लड़ पाना सम्भव नहीं था।
यही मेरी कहानी भी हो सकती थी। हो सकता है कि यह आप की कहानी है—या आप इसके बहुत निकट हैं। यहाँ पर पैसे से बढ़कर दाँव पर लगा हुआ है; आपकी शान्ति, ईमानदारी, सम्बन्ध, और आपकी आत्मा भी जोखिम में हैं।
वास्तविक प्रश्न
वास्तव में आप किस का पीछा कर रहे हैं? हो सकता है कि यह अनिश्चित लगने वाले जीवन में नियन्त्रण रखने की भावना है। हो सकता है कि यह एक बड़ी जीत से मिलने वाली सन्तुष्टि है, या वह आवेग जो आप को अपने तनाव, पीड़ा, या खेद को भूलने में सहायता करता है। हो सकता है कि यह अन्ततः आगे निकल जाने का सपना है—औरों पर या स्वयं को प्रमाणित कर देना कि आप असफल नहीं हैं।
जुआ केवल पैसा ही नहीं देता है। वह सार्थक होने की झूठी भावना भी देता है।
यीशु खोखले दावे नहीं करता है। वह विश्राम देता है। वह आहत लोगों से कहता है:
हे सब परिश्रम करने वालो और बोझ से दबे हुए लोगो, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूँगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो, और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूँ: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है। —मत्ती 11:28-30
यदि आप निढाल हो चुके हैं—मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक रीति से—तो, वह डाँट लगाने की प्रतीक्षा नहीं कर रहा है। वह आप को उठा कर लिये चलने के लिये तैयार है। आगे का मार्ग कठिन हो सकता है, परन्तु आप उस पर अकेले नहीं चलेंगे। केवल वही आप को सच्चा और अनन्तकालीन विश्राम दे सकता है। और अन्ततः जब आप धुन्ध में से बाहर आएँगे, तब आप वह पाएँगे जो जुआ आप को कभी नहीं दे सका: अर्थात् शान्ति को। जीतते चले जाने की किसी श्रृंखला की शान्ति नहीं, बल्कि उस उद्धारकर्ता की शान्ति जो आप से तब भी प्रेम करता है जब आप हार जाते हैं।
—
मनन के लिए प्रश्न:
1. आप के विचार से जुए ने आप को भावनात्मक, सामाजिक, या आत्मिक रीति से क्या दिया है?
2. आप की पहचान या मनोदशा की स्थिति जीतने या हारने के साथ कैसे सम्बन्धित रही है?
3. आप ने किन झूठे वायदों पर भरोसा किया है, और वास्तव में आप को क्या कीमत चुकानी पड़ी है?
—
आरम्भ करने के लिये एक प्रार्थना हे पिता, आप की बजाए, पैसे पर भरोसा रखने के लिये मुझे क्षमा करें। मेरी सहायता करें कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आप ही का अनुसरण करूँ, और आप के प्रति पूर्णतः समर्पित रहूँ। आमीन।
भाग II: छिपी हुई कीमत—भावनात्मक, सम्बन्धात्मक, और आत्मिक
“सच्चे मनुष्य पर बहुत आशीर्वाद होते रहते हैं, परन्तु जो धनी होने में उतावली करता है, वह निर्दोष नहीं ठहरता।”
—नीतिवचन 28:20
जो पहले आप को दिखाई नहीं देता है
कोई भी जुआ यह सोच कर आरम्भ नहीं करता है कि उससे उनका जीवन नष्ट हो जाएगा। आकर्षण शीघ्रता से धन प्राप्त करना, मज़ा लेना, और कुछ प्रमाणित कर के दिखाने का अवसर हो सकता है। यह उत्तेजना तथा एक सम्भावना के साथ आरम्भ होता है—यहाँ पर मिली एक जीत, वहाँ पर जीत की एक श्रृंखला, यह आभास कि आप को कुछ ऐसा मिल गया है जो कार्य करता है।
परन्तु जुए से जो हानि होती है, वह तुरन्त ही प्रकट नहीं होती है। वह बहुत चुपके से, दुबक कर, अन्दर आ जाती है, उस के रोमाँच और एड्रीनलीन के मुखौटे में छिपी हुई। आप के लिये हर बात के ऊपर, आप के सामने और मध्य में बस जीतना ही होता है। और जो आप हार रहे होते हैं, उन बातों पर ध्यान सबसे अन्त में ही होता है। जब तक आप जुए की उस कठोर पकड़ को जिसमें आप आ गए हैं, और उस वास्तविक कीमत को, जो इस लत के कारण आप को चुकानी पड़ रही है, समझ पाते हैं, यह आदत बन कर बहुत गहरी जड़ पकड़ चुकी होती है।
जो हार होती हैं, वे केवल आर्थिक ही नहीं होती—वे भावनात्मक, सम्बन्धात्मक, और आत्मिक भी होती हैं। जैसा कि नीतिवचन 28:20 में चेतावनी दी गई है, “जो धनी होने में उतावली करता है, वह निर्दोष नहीं ठहरता।” शीघ्रता से पैसा प्राप्त कर लेने की दौड़ से शान्ति प्राप्त नहीं होती है—उससे पीड़ा मिलती है। उसके पीछे विनाश की निशानियाँ होती हैं जिनकी अवहेलना करना सहज होता है, जब तक कि हानि सुधार पाना असम्भव नहीं हो जाता है।
यह सत्र इन निशानियों को स्पष्टता से देखने के बारे में है। यह उस छिपी हुई गहरी कीमत के बारे में है—जिस के बारे में बात, किसी जीत की सराहना करते हुए, हार को छिपाते हुए, या “केवल एक और दाँव लगाना,” कहते हुए कोई नहीं करता है।
भावनात्मक कीमत: कम आँकलन किया हुआ भार
जुआ खेलना केवल आप के बटुए को ही प्रभावित नहीं करता है—आपके मन पर भी असर करता है। वह आप को एक आकार देने लगता है कि आप स्वयं को किस प्रकार से देखते हैं, अपनी भावनाओं को कैसे नियन्त्रित करते हैं, और अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन का किस तरह से प्रयोग करते हैं। एक अच्छा दिन वह होता है जब आप जीतते हैं, एक बुरा दिन वह होता है जब आप हारते हैं, और इस मार्ग पर चलते-चलते, किसी स्थान से आपकी मनोदशा सम्भावनाओं, परिणामों, और संख्याओं पर, जो पूर्णतः आप के नियन्त्रण के बाहर हैं, निर्भर हो जाती है
जुए के साथ एक विशेष प्रकार की चिन्ता भी आती है। आप इसका अनुभव दाँव लगाते समय, दाँव के कार्यान्वित होते समय, या बाद में, जब आप इस बात से ग्रस्त रहते हैं कि आप क्या भिन्न कर सकते थे, या कर सकते हैं। यह आप के शरीर में बेचैनी, तनाव, या अनिद्रा के रूप में प्रकट हो सकती है। भावनात्मक रीति से आप क्रोध, सुन्नपन, या निराशा का भी अनुभव कर सकते हैं। और जब आप हारते हैं, तो उसे वापस जीत लेने का दबाव तुरन्त ही तेज़ी से बढ़ने लगता है—बहुधा आप की शान्ति, आप की नींद, और आप की मानसिक स्थिरता की कीमत पर।
भावनात्मक दासत्व ऐसा ही दिखाई देता है। अब आप अपनी भावनाओं को नियन्त्रित नहीं कर रहे हैं—वे आप को नियन्त्रित कर रही हैं। एक जीत आप को अजेय अनुभव करवा सकती है। एक हार आप को मूल्यहीन अनुभव करवा सकती है। दोनों ही स्थितियों में आप का मूल्य किसी ऐसी बात के साथ बँधा हुआ है जो आप की आत्मा के भार को नहीं उठा सकता है।
समय के साथ, आप की पहचान एक जुआरी के रूप में आप के प्रदर्शन के साथ उलझ जाती है। एक बार मैंने एक बहुत बड़ी 12-खेलों की स्पर्धा पर, मार्च मैडनेस के दौरान दाँव लगाया, सपनों के एक ऐसे परिणाम के लिये जिस में जीत जाने से छः अंकों वाला भुगतान मिल सकता था। एक के बाद एक कर के, पहली ग्यारह टीम जीतती चली गईं। मैं जीवन बदलने वाली जीत की कगार पर था—जब तक कि बारहवाँ और अन्तिम खेल और समय बढ़ाने में नहीं चला गया। मुझे अब तक याद है, मैं वहाँ बैठा हुआ था, मेरा हृदय तेज़ी से धड़क रहा था, और खेल बिलकुल अन्तिम चरण पर पहुँच गया था। विरोधी टीम के एक खिलाड़ी ने कोर्ट की लगभग तीन-चौथाई दूरी से निशाना लगाया। वह सफल रहा। खेल समाप्त हो गया। मेरी टीम हार गई। और बस यूँ ही, $9,000 गायब हो गए—और उसके साथ वह कल्पना भी कि यदि जीत जाता तो क्या कुछ ठीक कर लेता।
उस भावनात्मक उत्कर्ष का स्थान एक कुचल देने वाली निम्नता ने ले लिया। मैं केवल निराश नहीं था—मैं व्याकुल और टूटा हुआ था। मुझे लगा कि सब कुछ उस पल तक के लिये तैयार होता जा रहा था, और एक ही पल में सब धाराशाई हो गया। यही वह भावनात्मक पीड़ा है जो जुआ उत्पन्न करता है: अनुचित आशा और उसके बाद ध्वस्त कर देने वाला ढह जाना।
फिर यह ऐसा नहीं रहता है जो आप करते हैं—यह आप को परिभाषित करने लगता है, और यह रहने के लिये एक खतरनाक स्थान होता है।
सम्बन्धों की हानि: भरोसा बिना दिखे कटता चला जाता है
शायद ही कभी जुआ खेलना व्यक्तिगत समस्या होती है। इसके परिणामों के प्रभावों का दायरा चारों ओर बढ़ता चला जाता है, और आप के निकट के लोगों को प्रभावित करने लगता है। हो सकता है कि आप ने अपने जीवन में इसे पहले से ही देख लिया है—अर्थात् गुप्त रखने, दूरी बनाए, या आर्थिक तनाव के कारण सम्बन्धों में आए खिंचाव को। हो सकता है कि आप ने अपने जीवन-साथी, अपने माता-पिता, या अपने मित्रों से बातें छुपानी आरम्भ कर दी हैं। हो सकता है कि आप ने निर्धारित की हुई योजनाओं को टालने, प्रश्नों से बचने, या अपने प्रिय जनों से भावनात्मक दूरी बनाना आरम्भ कर दिया है।
चाहे उद्देश्य भले हों, परन्तु पतन का आरम्भ झूठ बोलने के साथ ही होता है। यहाँ पर एक छोटा बहाना, उसे पैसे चुकाने में थोड़ा विलम्ब करना। शान्ति बनाए रखने के लिये वायदे किये जाते हैं, परन्तु अन्ततः वे टूट जाते हैं। एक बार यदि भरोसा टूट जाए, तो उसे पुनःस्थापित करना बहुत कठिन होता है, और जब आप के चारों ओर के लोग आप की कही बात पर या आप के कार्यों पर भरोसा नहीं रख सकते हैं, तब सम्बन्धों में दरारें आने लगती हैं।
हो सकता है कि आप ने पैसा उधार लिया और फिर उसे लौटाया ही नहीं। या हो सकता है कि आप ने वायदे किये परन्तु उन्हें पूरा नहीं किया। या हो सकता है कि आप ने ऐसा पैसा ले लिया जो आप का था ही नहीं—स्वयं से यह कहते हुए कि जैसे ही हालात ठीक होंगे, उसे लौटा देंगे। परन्तु जुए के साथ समस्या यह है कि “जैसे ही हालात ठीक होंगे” शायद ही कभी होता है—और जब होता भी है, तब कभी पर्याप्त नहीं होता है।
और फिर इसके बाद अकेला पड़ जाना आता है। आप यह सोचना आरम्भ कर सकते हैं कि कोई नहीं समझता है कि आप किस परिस्थिति से होकर निकल रहे हैं—यदि वास्तव में लोगों को पता होता तो वे आप से दूर चले जाते हैं। इसलिये, आप भी दूरी बना लेते हैं, और ऐसे वार्तालापों से बचते रहते हैं जिन से आप की वास्तविकता प्रकट हो जाएगी। किसी भी अन्य बात से अधिक आप को जिस की आवश्यकता होती है, वह एक और जीत नहीं—बल्कि भली-भाँति जान लिया जाना और पूरा प्रेम प्राप्त करना होता है।
इस तरह का प्रेम केवल परमेश्वर में ही मिल सकता है, और उसे पहले से ही सब कुछ पता है। आप ने ऐसा कुछ नहीं छिपाया है जिसे उसने देखा नहीं है। परमेश्वर आप से मुँह नहीं मोड रहा है, वह टूटे हूए को चँगा करने की प्रतीक्षा कर रहा है।
आत्मिक खालीपन: आप के मन में क्या होता है
हो सकता है कि आरम्भ में जुआ एक आत्मिक समस्या प्रतीत नहीं हो। वह एक कार्य विधि, एक शौक, अपना तनाव कम करने का एक तरीका प्रतीत हो सकता है। परन्तु समय के साथ, धीरे-धीरे वह आप के मन को बदल देता है—और तब आत्मिक खतरा स्पष्ट होता है।
जुआ आप का स्नेह प्राप्त करने की स्पर्धा में आ जाता है। वह आप के ध्यान को जकड़ लेता है, आप के समय को खा जाता है, और आप के भरोसे को परमेश्वर से हटा कर किसी अन्य बात की ओर लगा देता है। जब जुआ आशा, राहत, नियन्त्रण, या सार्थक होने का स्त्रोत बन जाता है, तब वह एक देवता के समान कार्य करने लगता है। वह एक मूर्ति बन जाता है—ऐसी, जिस पर आप तब भरोसा करने लगते हैं जब जीवन अनिश्चित या दुःखद हो जाता है।
यदि आप जुए के प्रलोभन में पड़े हुए एक मसीही हैं, तो आप धीरे से, हल्के से स्वयं को प्रार्थना में रुचि न रखने, अपनी बाइबल को न खोलने, और परमेश्वर के खोजी न रहने वाला होते हुए पाएँगे, क्योंकि अब आप के ध्यान का केंद्र कहीं और है। अपने अन्दर की गहराइयों में आप जानते हैं कि आप जो कर रहे हैं वह गलत है, परन्तु आप उसका समाधान करना नहीं चाहते हैं—कम से कम अभी तो नहीं। अन्ततः, जीतने से यह आभास होने लगता है कि आप की कार्य विधि सही थी, और हारना “बुरी किस्मत” या दण्ड मिलना लगने लगते हैं। किसी भी तरह से देखें, आप के भरोसे का केंद्र अब परमेश्वर से हटकर स्वयं की ओर हो गया है।
यीशु ने मत्ती 6:21 में कहा, “क्योंकि जहाँ तेरा धन है वहाँ तेरा मन भी लगा रहेगा।” दूसरे शब्दों में, आप जिसे सबसे अधिक मूल्यवान समझते हैं, वही हमेशा निर्धारित करेगा कि आप सर्वाधिक प्रेम किस से करते हैं। यदि आप के विचार, आशा, और योजनाएँ जुए के चारों ओर घूमते हैं, तो आप का मन भी वहीं पहुँच जाएगा।
इस परिवर्तन के सबसे स्पष्ट चिन्हों में से एक है कि आप जुए के बारे में सोचने, योजनाएँ बनाने, या उससे उत्पन्न होने वाली परिस्थिति को संभालने के लिये कितना समय लगाते हैं। फोन पर अपने समय का हिसाब रखिये। अपने विचारों का आँकलन कीजिये। आप किस से अधिक परिचित हैं, दाँव खेलने की बातों से या पवित्रशास्त्र की बातों से? क्या आप की भावनाओं पर किस का अधिक प्रभाव पड़ता है, किसी आराधना के गीत, या उपदेश, या प्रार्थना के समय का, या जुए में हुई हार या जीत का?
परमेश्वर ने आप से प्रेम करना बन्द नहीं किया है, परन्तु हो सकता है कि आप ने उसकी सुनना बन्द कर दिया है। जब आप उसकी सुनना बन्द कर देते हैं, तब आप की आत्मा सुन्न पड़ जाती है। मृतक नहीं—परन्तु बहुत दूर हो जाती है। आप त्यागे नहीं गये हैं। आप का ध्यान भटक गया है। और ध्यान भटकाने वाली बातें मसीह से घनिष्ठता की शत्रु होती हैं।
अच्छा समाचार यह है कि परमेश्वर का प्रेम आप के कार्यों पर आधारित नहीं है। आप को वापस लौट कर आने के लिये कोई कीमत नहीं चुकानी होगी। आप को बस उसकी ओर मुड़ना है, और हमेशा ही वह आप को वहीं पर मिलेगा।
आत्मा पर एक छिपा हुआ कर
जुए की वास्तविक कीमत क्या है (और नहीं, यह पैसा गँवाना नहीं है)? वास्तविक कीमत आप की आत्मा पर आने वाला छुपा हुआ कर है—निरन्तर भावनाओं का खाली किया जाना, टूटे हुए सम्बन्ध, आप के और परमेश्वर के बीच की खामोशी। ये कीमतें आँकड़ों में तो व्यक्त नहीं होती हैं, परन्तु वे शीघ्रता से एकत्रित होती चली जाती हैं और वे आप को खाली, लज्जित, और निढाल कर देती हैं।
यदि आप इस स्थान पर पहुँच चुके हैं—या आप उसकी ओर बढ़ रहे हैं—तो आप को वहाँ बने रहने की आवश्यकता नहीं है। बच कर निकलने का एक मार्ग है। नीतिवचन 28:20 केवल धन के पीछे भागने के बारे में चेतावनी ही नहीं देता है; वह कुछ बेहतर की ओर भी संकेत करता है: विश्वासयोग्यता की ओर। विश्वासयोग्यता चाहे बहुत आकर्षक न लगे। वह आपको जीतते जाने की एक श्रृंखला के समान एड्रीनलीन नहीं देगी, परन्तु वह आप को कुछ ऐसा देगी जो जुआ आप को कभी नहीं दे सकता है—शान्ति: परमेश्वर के, औरों के, और स्वयं के साथ शान्ति।
विश्वासयोग्यता धीरे-धीरे विकसित होती है। वह किसी बड़ी जीत के बारे में नहीं है; वह प्रतिदिन चलने के बारे में है—परमेश्वर के सामने पश्चाताप और ईमानदारी और विनम्रता के साथ चलना। वह छुपाए रखने के स्थान पर खराई को, नियन्त्रण के स्थान पर भरोसे को, और परिश्रम करने के स्थान पर समर्पण करने को चुनने के बारे में है।
जुआ जीवन देने का वायदा करता है परन्तु हानि देता है। यीशु विश्राम का वायदा करता है—और हर बार उसे पूरा भी करता है। वह आप को केवल पाप से बचने के लिये नहीं बुलाता है। वह आप को जीवन के एक नये मार्ग के लिये बुलाता है—एक बेहतर और स्वतन्त्र जीवन के लिये, जिसके केन्द्र में वह स्वयं है। उस जीवन के द्वार पर ताला नहीं लगा है। वह उसी पल खुल जाता है जब आप सच बोलने का निर्णय लेते हैं, प्रभु यीशु मसीह में विश्वास और पश्चाताप करने के साथ परमेश्वर के सामने अपने पाप को ले आते हैं। आखिरकार, यीशु मसीह ने उस मृत्यु को सहा, जिसे आप को और मुझे सहना था। और जो भी उसमें विश्वास करते हैं, उन्हें एक नया जीवन देने के लिये वह फिर से जी उठा। अब से आप को अपने पाप के बोझ को उठाए नहीं रखना है। यीशु उसकी कीमत चुकता कर चुका है।
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मनन के लिए प्रश्न:
1. आप ने अपने भावनात्मक, सम्बन्धात्मक, और आत्मिक जीवन में से जुए को सबसे स्पष्ट प्रभाव कहाँ पर डालते हुए देखा है?
2. आप ने स्वयं में छिप कर रहने या बच कर रहने के कौन से नमूनों को देखा है?
3. यदि आप परमेश्वर पर भरोसा करने लगें, तो जिन बातों को आप स्वयं करने के प्रयास कर रहे हैं, उन में क्या बदल जाएगा?
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आरम्भ करने के लिये एक प्रार्थना
हे पिता, मैंने अपना जीवन अपने तरीके से जीने का, और अपना ही ईश्वर और उद्धारकर्ता होने का प्रयास किया है। कृपया मेरी सहायता करें कि मैं अपना सर्वस्व आप को समर्पित करूँ और आप के सत्य में चलूँ। मैं अब और छिपकर नहीं रहना चाहता हूँ। मुझे प्रकाश में चलने और स्वतन्त्र होकर जीना सिखाएँ। आमीन।
भाग III: मूर्तियों से पलटना—पश्चाताप और बहाली
“इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारे मन के नए हो जाने से तुम्हारा चाल–चलन भी बदलता जाए,
जिससे तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो।” —रोमियों 12:2
वे मूर्तियाँ जिन्हें हम पहचानते नहीं हैं
जब हम मूर्तियों के बारे में सोचते हैं, तब हो सकता है कि हम प्रतिमाओं या प्राचीन वेदियों की कल्पना करें। परन्तु हमारे संसार में मूर्तियाँ इससे कहीं अधिक छली होती हैं। एक मूर्ति ऐसी कोई भी वस्तु है—भली या बुरी—जो हमारे मनों में परमेश्वर का आधिकारिक स्थान लेने लग जाती है। यह, वह होती है, जिसकी ओर हम सान्त्वना, नियन्त्रण, अनुमोदन, बचाव, या पहचान पाने के लिये भागते हैं। हम में से अनेकों के लिये, जो जुए के फंदे में फँसे हुए हैं, यह कार्य कोई आदत नहीं है—वरन् यह एक देवता है।
धीरे और चुपके से, जुआ खेलना मनोरंजन से अधिक बन जाता है—वह स्वामी हो जाता है। यीशु के अतिरिक्त अन्य प्रत्येक स्वामी हमें अन्ततः विनाश ही में लेकर जाएगा।
मूर्तियाँ सब कुछ की माँग करती हैं और बदले में कुछ नहीं देती हैं। वे हमें नियन्त्रण करने का प्रलोभन देती हैं, परन्तु अनिश्चित परिणामों का दास बना देती हैं। वे सार्थक होना प्रस्तावित करती हैं परन्तु हमारी शान्ति चुरा लेती हैं। वे एक बेहतर जीवन का वायदा करती हैं, परन्तु हमारे पास जो जीवन है, उसे भी खाली कर देती हैं।
रोमियों 12:2 हमें कुछ बिलकुल ही भिन्न के लिए आह्वान करता है। संसार के नमूने—विलासिता, कुछ करके दिखाना, और शीघ्र समाधानों के पीछे भागने, के अनुरूप होने के स्थान पर—यह हमें अपने मनों को नया करने के द्वारा परिवर्तित हो जाने के लिए आमन्त्रित करता है। इस परिवर्तन का आरम्भ पश्चाताप के साथ होता है: मूर्तियों से पलट कर उस परमेश्वर की ओर मुड़ना जिस ने हमें बनाया है, जो हम से प्रेम करता है, और जो हमें सच्चा जीवन देता है।
नियन्त्रण का भ्रम
जुए का एक सबसे भ्रामक पक्ष होता है नियन्त्रण रखने का छल। आप बातों को देखते हैं, खेल के प्रवाह का विश्लेषण करते हैं, एक कार्य विधि बनाते हैं, स्वयं को आश्वस्त करते हैं कि इस बार यह कार्य करेगा। कभी-कभी वह करता है—कुछ देर के लिये, परन्तु चाहे कैसी भी और कैसी भी कार्य विधि क्यों न बना लें, आप एक ऐसी प्रणाली पर विजयी नहीं हो सकते हैं, जिसे आप को पराजित करने के लिये ही बनाया गया है।
गहराई का विषय वह कार्य प्रणाली नहीं है—बल्कि वह है, जिसे वास्तव में हम नियन्त्रित करना चाह रहे हैं। बहुतेरों के लिये, जुआ केवल पैसे के लिये नहीं है। यह स्वयं की कीमत, स्थिरता, या इस कल्पना के बारे में है कि अन्ततः हम प्रमाणित कर रहे हैं कि हम एक असफल व्यक्ति नहीं हैं। जुआ, किसी ऐसी बात को जो हमें अपने अन्दर टूटी हुई प्रतीत होती है, ठीक कर देने का एक तरीका बन जाता है।
सच तो यह है कि: जुए की मेज़ों पर, एप्पस के द्वारा, या कोई दाँव लगाने के द्वारा मिली कोई भी सफलता, उसे ठीक नहीं कर सकती है, जिसे केवल परमेश्वर ही कर सकता है। हम केवल जीत मिलने की ही प्रतीक्षा नहीं कर रहे हैं—हम शान्ति, उद्देश्य, और पहचान को खोज रहे हैं—जो सम्भावनाओं और परिणामों में नहीं मिल सकते हैं। परमेश्वर हमें आमन्त्रित करता है कि हम छलावे को त्याग दें, हर बात को अपने नियन्त्रण में रखने की आवश्यकता को समर्पित कर दें, और उन मूर्तियों के द्वारा, जो बचा नहीं सकती हैं, स्वयं को ठीक करने के प्रयास बन्द कर दें। इसके स्थान पर परमेश्वर हमें बुलाता है कि हम उसके सत्य और अनुग्रह के द्वारा परिवर्तित हो जाएँ।
मेरे अन्त से एक कहानी
जब मैं अन्तिम बार एक जुआ घर में गया था, तब मैं 20 वर्ष का था। मैं अकेले ही चार घण्टे कार चलाकर कनाडा में स्थित विंडसर को गया। मुझे वहाँ पहुँचने का सही समय तो याद नहीं है, परन्तु मुझे यह याद है कि कितनी शीघ्रता से मैंने अपना नियन्त्रण खो दिया था। द्वार से प्रवेश करने के 30 मिनट में, मैं $2,000 हार चुका था। मैं केवल निराश नहीं था—मैं अवसाद में था।
मैं वापस सीमा पार कर के डेट्राइट आया, अपने बैंक की एक शाखा खोजी, और $5,000 से अधिक की रकम—जो कॉलेज के अगले सत्र के खर्चे के लिये मेरे खाते में जमा की गई थी, निकाल ली। मेरे सभी क्रेडिट कार्ड्स सर्वाधिक सीमा तक प्रयोग किये जा चुके थे, मेरे पास और पैसा प्राप्त करने का अन्य कोई वैध साधन नहीं था। मैं स्पष्ट नहीं सोच पा रहा था, मैं केवल एक बड़ी जीत चाहता था। इसलिये, मैं वापस विंडसर गया, और इससे पहले कि कुछ समझ पाता, पूरे $5,000 हार चुका था।
जब मैं वापस घर की ओर की लम्बी यात्रा पर चला, तब कार की टंकी में कठिनाई से घर पहुँचने लायक ही पेट्रोल शेष था, और फिर मेरे घर के द्वार से दो घण्टे पहले, मेरी गाड़ी के एक पहिये की हवा निकल गई। मैंने गाड़ी को एक किनारे लगा दिया, मैं बिलकुल टूट चुका था। मुझे फँस जाने का केवल एहसास ही नहीं हो रहा था—मैं वास्तव में फँस चुका था। सड़क के किनारे, बिना किसी पैसे के, बिना किसी विकल्प के, और बिना किसी आशा के, मेरे पास किसी भी ओर मुड़ने, या छुपने का कोई स्थान नहीं था।
मेरी स्थिति यह थी—अंधेरे में, अपने घुटनों पर, गाड़ी का पहिया बदल रहा था, यह जानते हुए कि मेरे पास जाने के लिये कोई स्थान नहीं था और देने के लिये मेरे पास कुछ भी नहीं था। मैं बिलकुल खाली हो चुका था। आप जानते हैं कि ऐसी परिस्थितियों में कुछ यादें ताज़ा हो उठती हैं। मुझे याद आया कि जब मैं कुछ छोटा था, तब कुछ अवसरों पर मुझे कलीसिया में आने का निमन्त्रण मिला था। मैं सोचा करता था कि कलीसिया उबाऊ और मसीही अजीब लोग होते हैं। मेरा मतलब है, मैं परमेश्वर में विश्वास करता था, और यीशु का विचार अच्छा था—इसलिये मैं समझता था कि मैं सही हूँ, ठीक है? परन्तु उस समय पर, मेरे पास जाने के लिये कोई और स्थान नहीं था।
जब तक मैं घर पहुँचा, तब तक कलीसिया की उस प्रातः सभा में सम्मिलित होने का लगभग समय हो रहा था, जिसे मैं पहले नकार चुका था। उस दिन, परमेश्वर ने मेरे जीवन को पूरी तरह से बदल दिया।
मैं जो अनुभव कर रहा था, उस सभी को शब्दों में तो व्यक्त नहीं कर पा रहा था, परन्तु मैं यह जानता था कि मैं एक पापी था। यह स्वीकार करना तो सहज था। मैं जानता था कि मुझे कुछ भिन्न चाहिये था—कुछ वास्तविक। मैं उस पिता के लिये जीना चाहता था जो मुझ से प्रेम करता था और उस उद्धारकर्ता के लिये, जो मेरे लिये मरा था। वह दिन, एक नये जीवन का आरम्भ था। इसलिये नहीं क्योंकि मैंने स्वयं को ठीक कर लिया था, परन्तु यीशु मुझ से मेरे टूटेपन में मिला और मेरे सारे ऋण को पूर्णतः चुका दिया।
यह हमेशा ही सिद्ध तो नहीं रहा है। ऐसे पल भी आए हैं, जब मैंने शर्म के साथ संघर्ष किया। कभी-कभी मुझे फिर से जुआ खेलने के आकर्षण का खिंचाव अनुभव होता है। इस सब में से परमेश्वर मेरे साथ धीरजवन्त, अनुग्रहपूर्ण, और विश्वासयोग्य बना रहा है। उसने मुझे केवल क्षमा ही नहीं किया है—वह मेरे साथ चलता है, और मैं जानता हूँ कि मैं अब फिर कभी पहले के समान नहीं रहूँगा।
आज भी, 17 वर्षों के बाद, यह लिखते हुए मेरी आँखों में आँसू भर आते हैं। इसलिये नहीं कि मैं इतनी दूर तक गिर चुका था—बल्कि मुझे घर वापस लाने के लिए उसने कितनी दूर तक मेरे लिये अपना हाथ बढ़ाया। परमेश्वर ने जो मुझे में किया, वही वह आप के लिये भी करने के लिये तैयार है।
सच्चा पश्चाताप सम्भव है
पश्चाताप खेद से बढ़कर होता है। वह दुःखी होने से अधिक होता है। वह पापों से पलट जाना और परमेश्वर की ओर फिर जाना होता है। यह केवल बुरे व्यवहार को बन्द कर देना नहीं होता है—यह परमेश्वर को अपने मन, मस्तिष्क, और लालसाओं को नया कर लेने देना होता है।
जुआ खेलना एक पाप है—एक विशेषतः विनाशकारी पाप। यदि आप को जुआ खेलने की लत लग गई है, या आप में खेलना आरम्भ करने का प्रलोभन है, मेरा आप से आग्रह है—अपने पाप से पश्चाताप करें और यीशु में विश्वास करें।
रोमियों 12:2 हमें केवल संसार के नमूनों से बच कर रहने के लिये नहीं कहता है। वह हमें परिवर्तित होने के लिये आमन्त्रित करता है। यह परिवर्तन इच्छा-शक्ति के द्वारा नहीं होता है—इसके लिए समर्पण करना होता है। इसके लिये परमेश्वर के वचन के सत्य को आत्मसात करना, अंगीकार करना, और अपनी गलतियों से अधिक उसकी दया पर भरोसा रखना होता है।
पश्चाताप करने के लिये आप को सिद्ध होने की आवश्यकता नहीं है; आप को केवल ईमानदार होना होगा। आप को अभी सब कुछ समझ लेने की आवश्यकता नहीं है। आप को केवल अपने टूटेपन को उसके पास लाना होगा, जो उसे ठीक कर सकता है। जिन मूर्तियों ने हमें दास बनाकर रखा हुआ था, उनसे मुँह मोड़ लेने—और हम से प्रेम करने वाले परमेश्वर की ओर लौट आने का तरीका ही पश्चाताप है। उस मुड़ जाने में, सब कुछ बदलने लग जाता है।
“बस, एक अन्तिम बार” का झूठ
हो सकता है कि आप ने सोचा होगा, “बस, एक अन्तिम बार, उस के बाद मैं छोड़ दूँगा।” यह लगी हुई लत की आवाज़ है। वह धीमे से किन्तु छल के साथ बोलती है। वह “एक बार और” कभी नहीं आता है।
एक बार, एक ऐसे समय में, जब मैं बहुत परेशानी की स्थिति में था, मैंने एक घोड़े पर $900 का दाँव लगाया। वह कोई अच्छा घोड़ा भी नहीं था। मुझे पता था कि वास्तव में उसके जीतने की कोई वास्तविक आशा नहीं थी (मूलतः वह तीन टाँगों वाला घोड़ा था)। परन्तु यह विचार कि, हो सकता है—शायद ऐसा हो जाये—यही वह जीत हो जो सब कुछ बदल दे, बहुत प्रबल था। मैंने, एक चमत्कार खोने की आशा से, इस बहुत दूर की सम्भावना पर $300 लगा दिए।
दौड़ के आरम्भ होने से पहले ही घोड़ा टूट गया…उस दिन मैंने कुचला हुआ अनुभव किया। केवल पैसा गँवाने के कारण नहीं, परन्तु उससे मेरे अन्दर की जो बात प्रकट हुई, उसके कारण। मैं मनोरंजन का पीछा नहीं कर रहा था—मैं अपनी कल्पनाओं का पीछा कर रहा था। यह आशा कर रहा था कि एक दाँव खेलने से टूटा हुआ ठीक हो जाएगा। यह, कि यदि, किसी तरह, मैं सही दाँव खेल जाऊँ, तो मेरे जीवन की हर बात ठीक हो जाएगी।
परन्तु मूर्तियाँ बचाती नहीं हैं। वे नष्ट करती हैं। वे ऐसे वायदे करती हैं, जिन्हें वे पूरा नहीं कर सकती हैं, और जब सब कुछ बिखर जाता है, तब आप केवल लज्जा को थामे हुए खड़े रह जाते हैं।
परिवर्तित मन, परिवर्तित जीवन
परमेश्वर केवल आप के व्यवहार को ही साफ करना नहीं चाहता है। वह आप को एक नया मन, मस्तिष्क, और पहचान देना चाहता है। जब आप उद्धार पाते हैं, तब आप को उसके परिवार में अपना लिया जाता है। आप एक नई सृष्टि बन जाते हैं—पवित्र आत्मा आप में निवास करने लगता है, आप जीवित परमेश्वर के साथ सहभागिता के लिये तैयार कर दिये जाते हैं, और आप को मसीह की समानता में आराधना करने और बढ़ने के लिये बुलाया जाता है। आप को छुप कर और लज्जा के साथ रहने के लिये नहीं सृजा गया है; आप को उन सभी पर मसीह के प्रकाश और सत्य को चमकाने के लिये बनाया गया है, जिनके सम्पर्क में आप आते हैं।
नए होने का आरम्भ तब आरम्भ होता है जब हम संसार के नमूनों में बैठने के स्थान पर परमेश्वर के सत्य को हमारी सोच को बदलने देते हैं। यह धर्म के बारे में नहीं है। यह परिवर्तित हो जाने के बारे में है। आप को जुआ खेलने के प्रति खिंचाव अनुभव हो सकता है और आप के मस्तिष्क में झूठ फुसफुसाने की आवाज़ें आ सकती हैं, परन्तु आप को उन्हें सुनने की आवश्यकता नहीं है। परमेश्वर का वचन उनसे ऊँचा बोलता है, और उसका अनुग्रह अधिक सबल है।
वह आप की कहानी को बदल सकता है, और वह बदल भी देगा—यदि आप उसे बदलने देंगे तो।
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मनन के लिए प्रश्न:
1. आप के जीवन में जुए ने किन मूर्तियों—जैसे कि नियन्त्रण, सफलता, अनुमोदन, या बच निकलने—को स्थापित कर दिया है?
2. पश्चाताप के बारे में आप क्या समझते हैं, और इसे किस प्रकार से विकसित होने की आवश्यकता है?
3. आप को किन बातों के लिये ऐसा लगता है कि परमेश्वर आप को समर्पित होने तथा और अधिक गहराई से उस पर भरोसा करने के लिये कह रहा है?
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नवीनीकरण के लिये एक प्रार्थना
हे पिता, मैं स्वीकार करता हूँ कि मैं उन बातों के पीछे भागता रहा जो कभी सन्तुष्टि नहीं दे सकती हैं। मैं अब और इस संसार के सदृश नहीं रहना चाहता हूँ—मैं आप के द्वारा परिवर्तित होना चाहता हूँ। मेरे मन को बदल दें और मुझे केवल मसीह में मिलने वाली स्वतन्त्रता में चलने में सहायता करें। आमीन।
भाग IV: स्वतन्त्र होकर चलना—नई आदतें, नया मन
“मसीह ने स्वतंत्रता के लिये हमें स्वतंत्र किया है; अत: इसी में स्थिर रहो,
और दासत्व के जूए में फिर से न जुतो।”—गलातियों 5:1
परमेश्वर ने जैसा अन्दर से बनाया है, उसी के अनुसार चलना
स्वतन्त्रता कोई ऐसी बात नहीं है जिसे आप एक पल में ही अनुभव कर लें—यह ऐसी बात है जिसे आप को दिन प्रतिदिन जीना होता है। अब तक आप जुए की वास्तविकता को पहचान गए होंगे: एक विनाशकारी धोखा जो उत्तेजना और इनामों का वायदा करता है, परन्तु दासत्व, टूटेपन, और निराशा में ले जाता है। साथ ही आपने गम्भीरता से उस कीमत पर भी ध्यान किया, जो आपने भावनात्मक, सम्बन्धात्मक, और आत्मिक बातों में चुकाई है। पिछले सत्र में, आप ने देखा है कि सच्चे पश्चाताप का अर्थ होता है झूठे ईश्वरों से पलट कर जीवते परमेश्वर के लौट आना, जो आप से पापों के लिये पश्चाताप करने और यीशु में विश्वास करने के लिये कहता है।
यह अन्तिम सत्र यहाँ से आगे बढ़ने—स्वतन्त्रता में चलने के बारे में है। यह ऐसा जीवन जीना सीखने के बारे में है जिसे परमेश्वर ने अपना लिया है, आप को पृथक कर लिया है, और अपनी आत्मा के द्वारा एक नया जीवन जीने के लिये सामर्थी बना दिया है। यह एक ही रात में सिद्ध बन जाने के बारे में नहीं है। यह नये मन से प्रवाहित होने वाली नई आदतों का अभ्यास करने के बारे में है। यही पवित्रीकरण का मार्ग है, निरन्तर यीशु की समानता में बनते चले जाने की यात्रा।
आप अभी भी दुर्बल अनुभव कर सकते हैं। आप पर प्रलोभन अभी भी आ सकता है। जीवन जब कठिन होता है, तब फुसफुसाये गये झूठ आप को अभी भी सुनाई दे सकते हैं। परन्तु हिम्मत रखिये—आप में परमेश्वर का कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है, और न ही वह आप से अकेले चलने के लिये कह रहा है।
दृढ़ खड़े रहें—लौटकर पीछे मत जाएँ
गलातियों को कहे गए पौलुस के शब्द आवेगपूर्ण हैं, “दासत्व के जुए में फिर से मत पड़ो।” ये आरम्भिक मसीही सुसमाचार के द्वारा स्वतन्त्र किये गये थे, परन्तु उन्हें प्रलोभन दिया जा रहा था कि परमेश्वर के प्रेम को प्राप्त करने के लिये नियमों का पालन करने की ओर लौट आएँ, उस प्रेम को मसीह में होकर मुफ्त में प्राप्त करने के बजाए। पौलुस इसे स्पष्ट देख सकता था—यह एक अन्य प्रकार का दासत्व था, और वह उन से विनती करता है, “लौट कर वापस मत जाओ!”
आप के लिये दासत्व, जुए के रूप में आया। हो सकता है कि इसका आरम्भ एक अहानिकारक मनोरंजन के रूप में हुआ हो, एक खेल, एक रोमांच, परन्तु शीघ्र ही यह एक बेड़ी बन गया। यदि आप सावधान नहीं रहेंगे, तो वापस लौट जाने का खिंचाव फिर से उभर कर आ जाएगा—बहुधा तब जब आप थके हुए, निराश, या अकेले हों।
आप यह सोचेंगे, “अब की बार तो मैं इसे संभाल लूँगा। अब मैं बदल गया हूँ। मैं सीमाएँ निर्धारित कर दूँगा। मैं केवल थोड़े से और छोटे दाँव ही खेलूँगा।” परन्तु यही वह झूठ है जिसने आप को पहले फँसाया था। मसीह में स्वतन्त्रता का अर्थ है एक स्पष्ट और दृढ़ सीमा स्थापित कर देना। इसलिये नहीं क्योंकि आप परमेश्वर के प्रेम को कमाना चाह रहे हैं, परन्तु इसलिये क्योंकि वह प्रेम आप को पहले से उपलब्ध है। अब आप स्वयं को प्रमाणित करने का प्रयास नहीं कर रहे हैं—आप उसे सुरक्षित रख रहे हैं जिसे परमेश्वर ने आप को दे रखा है। आप स्वतन्त्र हैं। फिर से अधीन मत हों।
प्रलोभन को हटा दें
यदि आप स्वतन्त्रता में चलने के बारे में गम्भीर हैं, तो आपको उस स्वतन्त्रता को बढ़ने के लिये स्थान बनाना होगा। इसका अर्थ है उस चारे को हटा देना जिसने कभी आप को फँसा दिया था।
इसका आरम्भ अपने फोन से प्रत्येक जुआ खेलने और खेल स्पर्धाओं में दाँव लगाने वाली सभी एप्पस को हटा देने के द्वारा करें—यह ठीक अभी करें। इस सत्र के समाप्त होने तक प्रतीक्षा मत करें—इसे तुरन्त कर दें। यह करने के साथ ही, अपने ब्राउज़र से वेबसाइट्स के इतिहास को मिटा दें, सभी जुए की साइट्स को ब्लॉक कर दें, “जुआ विशेषज्ञों” से सम्बन्ध समाप्त कर दें, और यदि आवश्यक हो तो प्रतिबन्ध स्थापित कर दें। सबसे महत्वपूर्ण बात, किसी से जवाबदेही बनाए रखने के लिये सहायता लें। हो सकता है कि आप को उन्हें अपने ब्राउज़र में जुए की वेबसाइट्स के लिये पासवर्ड लगाने देना पड़े, जिससे कि आप के लिये जुआ खेलना कठिन हो जाए।
कुछ लोग यह सोच सकते हैं कि यह सब बहुत अधिक लगता है, परन्तु यीशु ने कहा, “यदि तेरा दाहिना हाथ तुझे ठोकर खिलाए, तो उस को काटकर फेंक दे” (मत्ती 5:30)। वह शाब्दिक नहीं हो रहा था—परन्तु वह बहुत गम्भीर अवश्य था। यदि कोई बात आप को उससे अलग खींच रही है, तो आप को उसे काबू में लेने का प्रयास नहीं करना चाहिये—आप को उसे मिटा देना चाहिए, और यह शीघ्रता से करना चाहिये। आखिरकार, दाँव पर आपकी आत्मा लगी है।
यह न्यायोचित होने के बारे में नहीं है। यह स्वतन्त्रता के बारे में है। आप उसे मिटाने का प्रयास कर रहे हैं जिस ने आप को दास बना लिया है, ताकि आप परमेश्वर द्वारा आप के लिये इच्छित जीवन की भरपूरी में चल सकें। आप स्वयं को किसी बात से वंचित नहीं कर रहे हैं—आप अपनी आत्मा की रक्षा कर रहे हैं।
आत्मा द्वारा सामर्थी—आप अकेले नहीं हैं
जो सबसे बड़े झूठ शत्रु हम से बोलता है, उन में से एक यह कहना है कि हम अपने ही सहारे हैं, अकेले ही हैं, और एक बार जब हम जुआ घर से बाहर निकलेंगे या एप्प को बन्द कर देंगे, तो इस नये जीवन को हमें अपनी इच्छा-शक्ति से निभाना होगा, परन्तु यह बिलकुल झूठ है।
जब आप ने अपना जीवन मसीह को समर्पित किया, तब आप को केवल क्षमा ही नहीं किया गया—आप को भर दिया गया। अब पवित्र आत्मा आप के अन्दर निवास करता है। वह आप का सहायक, मार्ग-दर्शक, सान्त्वना देने वाला है। जब आप भटक जाते हैं तो वह आप को कायल करता है, आज्ञा पालन के लिये सामर्थी बनाता है, और आपको आप की पहचान याद दिलाता है कि आप परमेश्वर की प्रिय सन्तान हैं।
गलातियों 5:16 हम से कहता है कि, “पर मैं कहता हूँ, आत्मा के अनुसार चलो तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे।” स्वतन्त्रता में चलना और अधिक परिश्रम के साथ चलना नहीं है—यह आप में पवित्र आत्मा के कार्य के प्रति और अधिक समर्पित हो जाना है।
अपने दिन का आरम्भ एक सीधी सी प्रार्थना के साथ कीजिये: “हे पिता, मुझे अपने पवित्र आत्मा से भरें। मेरे अपने नहीं बल्कि आप के मार्ग पर चलने में मेरी सहायता करें।” आप चकित होंगे कि किस प्रकार वह कोमलता के साथ आप के विचारों को नई दिशा देता है, आप की सामर्थ्य को नया कर देता है, और समय के साथ आप की पसन्द को एक नया आकार दे देता है। आप अकेले नहीं हैं। वही आत्मा जिस ने यीशु को मृतकों में से जिलाया था, अब आप के अन्दर निवास करता है।
एक परिवार में रखे गए
एक मसीही बनने के बारे में उल्लेखनीय बातों में से एक यह एहसास करना है कि यीशु से जुड़ने का अर्थ उसके लोगों से जुड़ना है। परमेश्वर का आप का पिता होने का अर्थ है उसकी सन्तानों का आप के भाई-बहन होना। मसीहियों के लिये यह सत्य सर्वाधिक रीति से स्थानीय कलीसिया में स्पष्ट होता है। निश्चय ही स्थानीय कलीसियाएँ सिद्ध नहीं हैं। परन्तु यदि वे बाइबल के अनुसार व्यवस्थित और स्वस्थ हैं, तो पापियों के लिये प्रकाश में चलने के सबसे उत्तम तरीकों में से एक है
चाहे वह प्रोत्साहक उपदेशों को सुनने के द्वारा हो, या साथी सदस्यों से प्रेम पूर्वक जवाबदेही अनुभव करने के द्वारा हो, सुधारने के लिये अनुशासन को लागू लिए जाने को देखना और पाप के परिणामों का सही भय मानना हो, या अपने किसी प्राचीन से डाँट मिलना हो, स्थानीय कलीसिया यीशु की योजना है कि आप उसकी समानता में बढ़ते चले जाएँ। यदि आप जुए की लत से निकल रहे हैं, तो अपने किसी प्राचीन या कलीसिया के मित्रों के साथ ईमानदार रहने के बारे में विचार करें, कि वे आप के साथ चल सकें। यदि आप के पास कोई कलीसिया नहीं है, तो एक स्वस्थ और आप को यीशु में बढ़ने में सहायता करने के लिये तैयार कलीसिया को खोजने के लिए “www.9Marks.org/churchsearch” पर जाने के बारे में विचार करें।
नई आदतों का अभ्यास करें
पुरानी आदतों को छोड़ देना पर्याप्त नहीं होता है—आप को नई आदतें चाहिये होती हैं। आप को केवल जुआ खेलना बन्द नहीं करना है; आप को भिन्न तरह से जीना आरम्भ करना है। यहीं पर पवित्रीकरण व्यावहारिक होता है। पवित्रीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा परमेश्वर आप को और भी अधिक यीशु की समानता में ढालता है। हाँ, आप अभी पवित्र किये गये हैं, परन्तु महिमा के इस ओर, पवित्रीकरण निरन्तर ज़ारी रहता है। जैसे-जैसे आप अपने मन और मस्तिष्क को शरीर की बजाए आत्मा के अनुसार चलने के लिये तैयार करते रहते हैं, यह होता रहता है।
यह कुछ प्रमुख आदतें हैं, जिन्हें आरम्भ करना है:
1. अपने मस्तिष्क को प्रतिदिन नया करें
रोमियों 12:2 हमें याद दिलाता है कि, “तुम्हारे मन के नए हो जाने से तुम्हारा चाल–चलन भी बदलता जाए।” इसका अर्थ है कि जुआ खेलने की संस्कृति के असत्यों के स्थान पर परमेश्वर के वचन के सत्यों को स्थापित कर देना। जितना अधिक आप पवित्रशास्त्र को पढ़ेंगे और उस पर मनन करेंगे, उतनी ही अधिक आप की लालसाएँ बदलने लग जाएँगी।
आप भजन संहिता या सुसमाचारों को पढ़ने से आरम्भ कर सकते हैं। पढ़ने की एक योजना का या भक्तिपूर्ण पाठों की किसी पुस्तक का प्रयोग करें। हर प्रातः बाइबल के साथ दस मिनट बिताना भी आप के मस्तिष्क को उन बातों की ओर केन्द्रित कर सकता है जो वास्तव में महत्वपूर्ण हैं। युद्ध, आप के विचारों में जीता या हारा जाता है—इसलिये स्वयं को तैयार करें।
2. ईमानदारी से और बहुधा प्रार्थना करें
आप को अति उत्तम शब्दों का प्रयोग करने या आलंकारिक भाषा के शब्दकोष के समान सुनाई देने की आवश्यकता नहीं है; अपने प्रेमी पिता से एक विनम्र और श्रद्धा पूर्ण भाव के साथ वार्तालाप कीजिये। उस के साथ अपना सब कुछ बाँटिए: अपने विचार, डर, जीत, और प्रलोभन। प्रार्थना स्वतन्त्रता की जीवन रेखा है।
दानिय्येल, निर्वासन में भी, दिन में तीन बार प्रार्थना किया करता था। यीशु पिता से सहभागिता के लिये प्रातः तड़के उठा करता था। आरम्भिक कलीसिया सताव के मध्य में भी प्रार्थना में लगी रहती थी। जब प्रार्थना आप की आदत बन जाएगी, तब आप स्वयं को तथा अपनी परिस्थितियों को परमेश्वर की दृष्टि से देखने लगेंगे—केवल अपनी ही दृष्टि से नहीं।
3. सत्य बोलें—जवाबदेह बने रहें
आप को यह युद्ध अकेले नहीं लड़ना है। चाहे वह कोई मित्र, पास्टर, छोटा समूह, या सहायता देने वाले कार्यक्रम के लोग हों, आप को ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो आप के संघर्ष को जानते हैं और आप से सच बोलते हैं।
अकेले रहना पुनः समस्या में पड़ जाने का स्थान है, परन्तु समुदाय में रहने से बहाली बढ़ती जाती है। किसी ऐसे को चुनिये, जो कठोर प्रश्न पूछे। ईमानदार रहें, और यदि आप ठोकर खाएँ—तो जवाबदेही की ओर भागें, न कि उससे दूर।
4. उसमें निवेश करें जो स्थाई है
जुए ने आप के मन को तेज़ी से जीतने और शीघ्रता से उत्साहित होने के लिये तैयार किया परन्तु परमेश्वर हमें विश्वासयोग्यता, धैर्य, और दीर्घ-कालीन परिणामों को बहुमूल्य समझना सिखाता है।
छोटे से आरम्भ करें—अपने किसी परिवार जन से नियमित वार्तालाप करने, अपनी कलीसिया में कार्यों को करने के लिये स्वयं को अर्पित करने, किसी की आवश्यकता में उनकी सहायता करने, या किसी को पत्र लिखकर यह बताने के द्वारा कि आप के जीवन में उनका कितना महत्वपूर्ण स्थान है, अपने सम्बन्धों में निवेश करें। विश्वासयोग्यता का हर छोटा कार्य आनन्द मनाने के लिये नींव को बनाता है।
स्थिर व्यवहार में बने रहने की सामर्थ्य को कम मत समझिये। आप को अनायास ही एक बार मिली बड़ी रकम नहीं चाहिये—आप को एक फसल चाहिये, और फसल समय के साथ आती है।
बढ़ोतरी में समय लगता है—एक अच्छे स्टॉक के समान दीर्घ कालीन दृष्टिकोण रखें
आत्मिक बढ़ोतरी एक दम से ही पूरी नहीं हो जाती है। यह तुरन्त मिलने वाले लाभान्श की बजाए एक दीर्घ कालीन निवेश के समान अधिक है। पवित्रीकरण को बाजार में एक दृढ़ स्टॉक के समान सोचिये। एक दिन से दूसरे दिन, कीमत बढ़ या घट सकती है, उतार चढ़ाव हो सकते हैं, सन्देह के पल, संघर्ष, और असफलताएँ भी। परन्तु यदि आप पाँच, दस, या बीस वर्ष की प्रगति को देखेंगे, तो वह ऊपर की ओर ही होगी।
मसीही जीवन ऐसा ही होता है। आप गिर सकते हैं, ठोकर खा सकते हैं, परन्तु यदि आप मसीह के खोजी बने रहेंगे, पवित्र आत्मा के अनुसार चलते रहेंगे, और नई आदतों का अभ्यास करते रहेंगे, तो आप के जीवन की प्रगति मसीह की समानता की ओर ऊपर को बढ़ती रहेगी। दैनिक उतार-चढ़ाव से चिन्तित न हों—दीर्घ कालीन प्रगति पर ध्यान केन्द्रित रखें।
जब आप गिरें, तब फिर से उठ कर खड़े हो जाएँ
चलिए ईमानदारी से बात करते हैं: नई आदतों, दृढ़ सीमाओं, और गहरी लालसाओं के होते हुए भी, आप ठोकर खा सकते हैं। मसीह में स्वतन्त्रता का यह अर्थ नहीं है कि आप को फिर कभी प्रलोभन या असफलता का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसका यह अर्थ है कि आप को पता है कि जब ऐसा हो, तो भाग कर कहाँ जाना है।
यदि आप गिर जाएँ, तो हार न मान लें। लज्जित होकर आशा न छोड़े और न ही उसे छुपाने का प्रयास करें। उसे परमेश्वर के सामने स्वीकार कर लें, उसे प्रकाश में ले आएँ, और सहायता के लिये किसी की ओर हाथ बढ़ाएँ। शीघ्रता से पश्चाताप करें और फिर से आरम्भ करें। परमेश्वर का अनुग्रह एक बार दिया गया प्रस्ताव नहीं है—वह दैनिक निमन्त्रण है।
नीतिवचन 24:16 कहता है, “धर्मी चाहे सात बार गिरे तौभी उठ खड़ा होता है।”
आप की स्वतन्त्रता आप के सिद्ध होने पर आधारित नहीं है। वह आप के सिद्ध उद्धारकर्ता पर आधारित है।
अपनी दृष्टि यीशु पर रखें
अन्ततः, स्वतन्त्र हो कर चलना व्यवहार का प्रबन्धन करने के बारे में नहीं है—यह मन परिवर्तन के बारे में है, जो अपनी दृष्टि यीशु पर लगे रखने के द्वारा आता है।
जब आप वह याद करते हैं जो उसने आप के लिये क्रूस पर किया. . .जब आप देखते हैं कि वह आप को नया जीवन देने के
लिए किस प्रकार कब्र से चलकर बाहर आ गया. . .जब आप समझ पाते हैं कि आप के लिये उसका प्रेम कितना गहरा और चौड़ा है. . .
. . .आप उन बातों के पीछे भागना छोड़ देंगे जो केवल थोड़ा सा रोमांच देती हैं। फिर आप का मन झूठी आशा से कभी सन्तुष्ट नहीं होगा।
यही मसीही जीवन है—नियमों का पालन करने वाला नीरस जीवन नहीं, परन्तु यीशु मसीह में प्रेम और आनन्द का जीवन्त जीवन, और आप इसी के लिए सृजे गए हैं।
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मनन के लिए प्रश्न:
1. जुए तक अपनी पहुँच को मिटा देने के लिये आप क्या व्यावहारिक कदम उठा चुके हैं? अभी मिटा देने के लिये क्या शेष रह गया है?
2. आप इस सप्ताह कौन सी नई आदत (बाइबल पढ़ना, प्रार्थना, जवाबदेही, सेवा) को विकसित करने की ओर आकर्षित हैं?
3. आप की पहचान के बारे में कौन से झूठ अभी भी आप को परिभाषित करने के प्रयास करते हैं? उनके स्थान पर पवित्रशास्त्र क्या कहता है?
4. आप प्रतिदिन स्वयं को किस प्रकार याद दिला सकते हैं कि पवित्रीकरण एक प्रक्रिया है, न कि एक दौड़?
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आरम्भ करने के लिये प्रार्थना
हे पिता, मुझे मसीह में स्वतन्त्र कर देने के लिये धन्यवाद। उस स्वतन्त्रता में प्रतिदिन चलते रहने में मेरी सहायता करें—मेरे मन को सामर्थी करें, मेरी लालसाओं को नया स्वरूप दें, और अपनी आत्मा के द्वारा मेरी अगुवाई करें। मेरी सहायता करें कि आप की महिमा के लिये मसीह की समानता में बढ़ता चला जाऊँ। आमीन।
निष्कर्ष
मसीह में स्वतन्त्र होना केवल किसी विनाशकारी बात से मुड़ कर उस से दूर चले जाना नहीं है—वह इससे भी बहुत बड़ी किसी बात में चले जाना है। जीवन कौशल की इस पूरी मार्गदर्शिका में, आप ने जुए की छिपी हुई कीमतों का एक गम्भीर अवलोकन किया है: भावनात्मक उतार-चढ़ावों का, किसी प्रणाली में भरोसा रखने के छल का, आत्मिक कटाव का, और सम्बन्धों की हानि का। परन्तु, आप ने सुसमाचार के सामर्थी निमंत्रण को भी देखा है—पिता के पास वापस लौट आने के आह्वान को, कि उसके प्रिय सन्तान के समान जीवन जीयें, और जीवन की नवीनता में चलें।
हो सकता है कि आप की यात्रा में गहरा खेद रहा हो। हो सकता है कि आप ने पैसा, सम्बन्ध, या वर्ष गँवा दिये हैं, जिन्हें आप वापस लौटा कर ला नहीं सकते हैं। परन्तु सत्य यह है: आप चाहे कितने भी दूर क्यों न चले गए हों, आप अनुग्रह की पहुँच से बाहर नहीं हैं। यीशु भले और चंगों के लिये नहीं आया था—वह टूटे हुओं, निराश, और दासत्व में पड़े हुओं के लिये आया था। वह आप के लिये आया है, यदि आप अपने पापों से पश्चाताप करें और उद्धार के लिये उस पर भरोसा करें।
आपने सीखा है कि पश्चाताप केवल व्यवहार परिवर्तन करना ही नहीं है—यह मन का परमेश्वर की ओर वापस मुड़ना है। आप को याद करवाया गया है कि पवित्रीकरण सिद्ध बनाने की स्पर्धा नहीं, एक प्रक्रिया है। आप के सामने परमेश्वर के वचन, प्रार्थना, जवाबदेही, और सेवा पर आधारित नई आदतों को विकसित करने की चुनौती भी रखी गई है। इनमें से कोई भी बात सहज
नहीं है परन्तु इन्हें करना लाभदायक है क्योंकि मसीह हमें केवल स्वतन्त्र ही नहीं करता है—वह हमें स्वतन्त्र बने रहना भी सिखाता है।
फिर भी दुर्बलता के पल भी होंगे। हो सकता है कि कुछ बातों में पिछड़ भी जाएँ, परन्तु आप अब वही व्यक्ति नहीं रहे हैं, जो इस यात्रा को आरम्भ करते समय थे। आप उस के समान जीना सीख रहे हैं जिसे चुना, अपनाया, पवित्र आत्मा से भरा, और परिवर्तित किया गया है। अब पुराने नमूने आप को परिभाषित नहीं करते हैं—बल्कि मसीह करता है।
आप को अभी सारे परिणाम दिखाई नहीं देंगे, परन्तु कोई बात नहीं। बढ़ोतरी में समय लगता है, एक दीर्घ कालीन निवेश के समान। यह तभी होगा, जब आप यीशु के साथ चलते रहेंगे, अपने मस्तिष्क को नया करते रहेंगे, और स्वयं को सत्य तथा जवाबदेही से घेरे रखेंगे।
यदि आप इस जीवन कौशल मार्गदर्शिका से होकर अकेले ही निकले हैं, तो मैं आप को प्रोत्साहित करना चाहता हूँ—अकेले मत रहिये क्योंकि स्वतन्त्रता समुदाय में ही फलती-फूलती है। किसी कलीसिया, छोटे समूह, विश्वासयोग्य मार्गदर्शक को खोज लीजिये जो आप के साथ चले, और अपनी कहानी साझा करने से डरें नहीं। आप का अनुभव—आप का संघर्ष और आप की बहाली—वह बात हो सकती है जिस की सहायता से परमेश्वर किसी अन्य को स्वतन्त्र कर दे।
आगे का मार्ग हमेशा सहज नहीं होगा, परन्तु आप उस पर अकेले नहीं चल रहे हैं। मसीह आप के साथ चलता है, उसका आत्मा आप में निवास करता है, और उसकी प्रतिज्ञाएँ आप को कभी निराश नहीं करेंगी। इसलिये, अगला कदम बढ़ाइये—सिद्धता के साथ नहीं, प्रार्थना के साथ—डर के साथ नहीं, परन्तु विश्वास के साथ। बेड़ियाँ टूट चुकी हैं, द्वार खुला हुआ है। स्वतन्त्रता में चलिये—पूर्णतः और उन्मुक्त होकर, परमेश्वर के प्रिय सन्तान के समान।
“क्योंकि तुम को दासत्व की आत्मा नहीं मिली कि फिर भयभीत हो, परन्तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिससे हम हे अब्बा, हे पिता कहकर पुकारते हैं।” —रोमियों 8:15
जीवनी: ल्यूक रिनिनगर ओहायो प्रांत के कोलंबस में हाई स्कूल में शिक्षक हैं। उनके और उनकी पत्नी के तीन बेटे हैं। ल्यूक के पास ओहायो विश्वविद्यालय (गणित की शिक्षा), ग्रैंड कैन्यन विश्वविद्यालय (शिक्षा में स्नातकोत्तर), सदर्न सेमीनरी (डिविनिटी में स्नातकोत्तर और शैक्षिक सेवकाई में डॉक्टरेट) की उपाधियाँ हैं।
लेखक के बारे में
ल्यूक रिनिनगर संयुक्त राज्य अमेरिका के ओहायो राज्य के कोलंबस शहर में एक हाई स्कूल शिक्षक हैं। वे अपनी पत्नी के साथ रहते हैं और उनके तीन बेटे हैं। ल्यूक ने ओहायो विश्वविद्यालय से गणित शिक्षा में डिग्री प्राप्त की है, ग्रैंड कैन्यन विश्वविद्यालय से शिक्षा में स्नातकोत्तर (Master of Education), और सदर्न सेमिनरी से दिव्यता में स्नातकोत्तर (Master of Divinity) तथा शैक्षिक सेवकाई में डॉक्टरेट (Doctorate of Educational Ministry) की उपाधियाँ प्राप्त की हैं।
विषयसूची
- भाग I: जुए का आकर्षण—वास्तव में दाँव पर क्या लगा हुआ है?
- जीतने का खिंचाव
- निपुणता की मिथ्या धारणा
- भावनाओं का उतार-चढ़ाव और झूठी ऊँचाइयाँ
- अकल्पनीय
- वह दुःखद कहानी जो मेरी हो सकती थी
- वास्तविक प्रश्न
- मनन के लिए प्रश्न:
- भाग II: छिपी हुई कीमत—भावनात्मक, सम्बन्धात्मक, और आत्मिक
- जो पहले आप को दिखाई नहीं देता है
- भावनात्मक कीमत: कम आँकलन किया हुआ भार
- सम्बन्धों की हानि: भरोसा बिना दिखे कटता चला जाता है
- आत्मिक खालीपन: आप के मन में क्या होता है
- आत्मा पर एक छिपा हुआ कर
- मनन के लिए प्रश्न:
- भाग III: मूर्तियों से पलटना—पश्चाताप और बहाली
- वे मूर्तियाँ जिन्हें हम पहचानते नहीं हैं
- नियन्त्रण का भ्रम
- मेरे अन्त से एक कहानी
- सच्चा पश्चाताप सम्भव है
- “बस, एक अन्तिम बार” का झूठ
- परिवर्तित मन, परिवर्तित जीवन
- मनन के लिए प्रश्न:
- भाग IV: स्वतन्त्र होकर चलना—नई आदतें, नया मन
- परमेश्वर ने जैसा अन्दर से बनाया है, उसी के अनुसार चलना
- दृढ़ खड़े रहें—लौटकर पीछे मत जाएँ
- प्रलोभन को हटा दें
- आत्मा द्वारा सामर्थी—आप अकेले नहीं हैं
- एक परिवार में रखे गए
- नई आदतों का अभ्यास करें
- बढ़ोतरी में समय लगता है—एक अच्छे स्टॉक के समान दीर्घ कालीन दृष्टिकोण रखें
- जब आप गिरें, तब फिर से उठ कर खड़े हो जाएँ
- अपनी दृष्टि यीशु पर रखें
- मनन के लिए प्रश्न:
- निष्कर्ष
- लेखक के बारे में