#35 उदारता का मनोभाव: प्रचुरता या अभाव का संसार

By द्वारा The Christian Lingua Team

परिचय

हर कोई इस बात से डरता है कि कहीं यह पर्याप्त न हो। चाहे वह धन हो, समय हो, या कोई भी संसाधन, यह चिंता अभाव की मानसिकता को जन्म देती है। यह लालच को भी बढ़ावा देता है, जिसके परिणामस्वरूप संचय करने और दूसरों के प्रति उदारता न दिखाने की प्रवृत्ति पैदा होती है। किन्तु, बाइबल हमें प्रचुरता अर्थात् बहुतायत, भरोसा और भण्डारीपन का एक भिन्न दृष्टिकोण देती है।

परमेश्वर वही है जो हमें संभालता और प्रदान करता है, इसलिए हमें बंद मुट्ठियों के बजाय खुले हाथों से जीना चाहिए। एक बार जब हम समझ जाते हैं कि सब कुछ परमेश्वर से आता है, तब उदारता कोई जोखिम नहीं रह जाती है बल्कि विश्वास का आनंददायक कार्य बन जाती है। संसाधनों की कमी के भय में बँधे रहने के जगह आवश्यकता के स्थान पर स्वतंत्रतापूर्वक देने का निमंत्रण वास्तविकता बन जाता है जो सर्वशक्तिमान परमेश्वर के संसाधनों की अंतहीन आपूर्ति पर विश्वास द्वारा समर्थित है।

यह शिक्षण इस बात पर दृष्टि डालेगा कि परमेश्वर, धन और अन्य संपत्तियाँ हमारी उदारता या उसकी कमी को कैसे प्रभावित करती हैं। क्या हम अभाव के भय को प्रकट करते हैं या आशावाद की सुखद उमंग के साथ जीते हैं? आइए हम पवित्रशास्त्र में वर्णित परमेश्वर की उदारता का अभ्यास करने का प्रयास करें।

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#35 उदारता का मनोभाव: प्रचुरता या अभाव का संसार

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