#23 खेल भावना: मसीही जीवन में खेलकूद
परिचय
मैं इस बात को कभी नहीं भूलूँगा। यह हृदय स्पर्शी आरम्भ जो कहानी के महत्वपूर्ण और स्मरणीय निष्कर्ष का संकेत देता है। एक ऐसा दिन जिसका आरम्भ कुछ लड़कों के समूह के द्वारा लॉस एंजिल्स डॉजर्स बेसबॉल खेल का आनन्द लेने से हुआ था। अर्थात् दक्षिणी कैलिफोर्निया की एक सुन्दर दोपहर, डॉजर डॉग्स और अमेरिका के पसंदीदा खेल के साथ आरम्भ हुआ, जिसके बाद कोने पर स्थित स्टेपल्स सेंटर में एक भारी वर्ग मुक्केबाजी खेल के लिए हमें निशुल्क टिकट मिल गए। लेनॉक्स लुईस की प्रतिस्पर्धा व्लादिमिर क्लिट्स्को से होनी थी। हम भी वहाँ थे और कुश्ती के छह या सात चक्र पूरे हो चुके थे, हम चिल्ला रहे थे और उत्साह से उत्साहवर्धन कर रहे थे साथ ही हवा में मुक्केबाज़ी कर रहे थे, मानो इन विशालकाय खिलाड़ियों को लगातार प्रहार करने में सहायता कर रहे हों। तभी, कोने पर मेरी दृष्टि एक अस्सी वर्ष की वृद्ध महिला पर पड़ी— जो अति सुन्दर ढँग से सजी हुई थी, बाल भी बहुत अच्छे ढँग से सँवारे हुए थे—वह भी हमारे ही समान पूरे जोश और उत्साह से हाथ हिला रही थी और चिल्ला रही थी। यही तो खेल भावना होती है। यह लगभग हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है। यह स्टेडियमों को भर देता है और ऑनलाइन सेवाओं पर इतना अधिक छा जाती है कि खिलाड़ी हमारे समाज के सबसे अधिक सम्मानित और सर्वाधिक पारिश्रमिक पाने वाले लोगों में गिने जाते हैं।
परन्तु ऐसा ध्यान और ऐसा उत्साह केवल व्यावसायिक खिलाड़ियों तक ही सीमित नहीं रहता है। थोड़ा सा लिटिल लीग पार्क की ओर चलें और देखें कि सामान्यतः शान्त दिखने वाले लोग भी कैसे अपनी आवाज़ खो बैठते हैं, जब छोटे जॉनी की चार-बेस की गलती को हम परिहास करते हुए होमरन कहकर पुकारते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि खेलों ने संसार पर अपनी पकड़ बना ली है, और यह शीघ्रता से कम होने वाली नहीं है। टी-बॉल से लेकर पिकलबॉल तक, खेल हमारी संस्कृति में हर स्थान में विद्यमान हैं। हम उन्हें खेलते हैं, देखते हैं, और हम उन खेलों के विषय में अपने मित्रों से तर्क-वितर्क भी करते हैं। इसे आधुनिक युग की घटना मान लेना आकर्षक लग सकता है, परन्तु यह कोई नई बात नहीं है। आठवीं शताब्दी ईसा पूर्व से ही ओलंपिक या पैनहेलेनिक खेलों के साथ व्यायाम खेलकूद, जीवन और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। सफल खिलाड़ियों को सदियों से विभिन्न संस्कृतियों में सम्मान और पुरस्कार दिया जाता रहा है, तथा प्रतिस्पर्धा का विचार प्रत्येक जाति, भाषा और राष्ट्र में फैला हुआ है।
परन्तु मसीह के अनुयायी को खेलों के विषय में कैसे सोचना चाहिए? यदि खेल हर स्थान पर हैं और हमें सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिए करना है, तो हम खेलों के विषय में कैसे विचार करें?
जैसा कि प्रेरित पौलुस हमें प्रोत्साहित करता है, कि हमें संसार का अनुसरण केवल इसलिए नहीं करना चाहिए क्योंकि कुछ कार्य स्वीकार करने योग्य हैं। मसीह के अनुयायी को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र का मूल्याँकन करना चाहिए और ऐसा जीवन बनाने का प्रयास करना चाहिए जो राजा को सबसे अधिक प्रसन्न करे। इसी दृष्टिकोण के साथ, और अनंत जीवन को ध्यान में रखते हुए देखें कि खेलों का स्थान कहाँ है? क्या यह एक अनावश्यक ध्यान भटकाना है, या एक ईश्वरीय वरदान हैं, या जीवन के अधिकाँश भाग के समान आराधना करने के अवसर हैं, चाहे वे सही रीति से हों या गलत रीति से हों?
यह क्षेत्रीय मार्गदर्शिका मसीह के अनुयायी के जीवन में खेलों के कई लाभों और कुछ जोखिमों की समीक्षा करेगी। यह मार्गदर्शिका तीन हिस्सों में विभाजित है: अपराध (लाभ), रक्षा (खतरा), और विशेष समूह (ट्रैवल बॉल, कॉलेज छात्रवृत्तियाँ, कलीसिया सॉफ़्टबॉल आदि पर चर्चा)। खेल हमारी संस्कृति का बहुत अधिक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इस पर गम्भीर चर्चा करना आवश्यक है।
ऑडियो मार्गदर्शिका
ऑडियो#23 खेल भावना: मसीही जीवन में खेलकूद
1 अपराध
इसमें कोई संदेह नहीं है कि खेल समाज को कुछ न कुछ लाभ तो पहुँचाते ही हैं, और मैं मसीही समुदाय से भी यही कहना चाहता हूँ। प्रेरित पौलुस स्वयं खिलाड़ी का उदाहरण एक सकारात्मक दृष्टान्त के रूप में देता है, जो पुरस्कार पाने के लिए प्रयत्नशील होता है। किसान और सैनिक के साथ-साथ, खिलाड़ी को भी एक योग्य उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है; अर्थात् अनुशासन, साहस और दृढ़ संकल्प का एक आदर्श नमूना। सच में अनन्तकाल का प्रतिफल कहीं अधिक मूल्यवान है, और मसीह की खोज करना कहीं अधिक महत्वपूर्ण दौड़ है, परन्तु पौलुस के द्वारा खिलाड़ी को लज्जित नहीं किया गया है; वरन् उसे एक उपयुक्त नमूने के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
ऐसा क्यों है, और क्या पौलुस आज भी विश्वासियों के लिए खेलों की संस्तुति करता है? जहाँ तक खेलों की बात है, मुझे पता नहीं है कि पौलुस क्या संस्तुति करता, फिर भी मेरा मानना है कि कम से कम तीन महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं जहाँ खेल मसीही व्यक्ति के जीवन में लाभ प्रदान करते हैं: वे क्षेत्र विश्वासियों का स्वास्थ्य, चरित्र, और साक्षी है।
स्वास्थ्य
खिलाड़ी का पहला और संभवतः सबसे स्पष्ट लाभ स्वास्थ्य में सुधार होना है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि हमारी संस्कृति कम सक्रिय होती जा रही है। हम अपने पूर्वजों की तुलना में शारीरिक परिश्रम न के बराबर करते हैं, और यह परिवर्तन तेजी से आया है। यहाँ तक कि एक पीढ़ी पहले, बच्चे बाहर खेलते थे, जोड़े टहलते थे, और अधिक से अधिक लोग व्यायाम को जीवन का हिस्सा मानते थे, न कि जीवन से बाहर का हिस्सा। मोटापे की दर बहुत अधिक बढ़ गई है, तथा दवाओं पर निर्भरता भी अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गई है।
प्रौद्योगिकी के कारण हमारे जीवन में अनगिनत सुख-सुविधाएँ आ गई हैं, परन्तु इसका परिणाम एक अस्वस्थ और शारीरिक परिश्रम से दूर करने वाला समाज सामने आया है। बच्चे और बड़े दोनों ही अब कम सक्रिय समय बिता रहे हैं और अधिक समय बैठकर या स्क्रीन के सामने व्यतीत कर रहे हैं। जैसे ही मैं यह टाइप कर रहा हूँ, मुझे अपने शरीर के ढीला पड़ने का अनुभव हो रहा है।
प्रेरित पौलुस कुरिन्थुस की कलीसिया को कहता है कि “मैं अपने शरीर को अनुशासित करता है और उसे (अपना) दास बनाता हूँ।” जो लोग पौलुस का अनुसरण करते हैं, उन्हें भी वही मानसिकता अपनानी चाहिए जिसे पौलुस मसीह का अनुसरण करते समय अपनाता है। हमारे शरीर को इस जीवन में देखभाल की आवश्यकता हैं, इसलिए यदि हमें आत्मिक जीवन में सही रीति से आगे बढ़ना है, तो हमें नियमित रूप कुछ देर शारीरिक गतिविधि भी करनी होंगी।
विज्ञान लम्बे समय से हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के बीच के सम्बन्धों को लेकर उत्सुक रहा है और विश्वासियों के रूप में हम समझते हैं कि हमारा आत्मिक स्वास्थ्य भी हमारे मानसिक स्वास्थ्य से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। धर्मनिरपेक्ष अध्ययनों से पता चला है कि नियमित व्यायाम करने से निराशा, व्याकुलता, चिन्ता कम होती है, तथा सम्पूर्ण रूप से मनोदशा में सुधार होता है। हमारा शारीरिक स्वास्थ्य हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, और हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी सीधे हमारे आत्मिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ होता है। यदि हमारा शरीर स्वस्थ नहीं है, तो यह हमारे सोचने के तरीके को प्रभावित करता है, और हमारा सोचने का तरीका ही हमारे आत्मिक जीवन को दिशा देता है।
शारीरिक रूप से स्वस्थ होने पर भी पाप बना रहता है, परन्तु शारीरिक रूप से बीमार होना, आत्मिक रूप से विश्वासयोग्य बने रहना और भी कठिन हो जाता है। सामान्यतः, लोगों को व्यायाम करने की आवश्यकता होती है, और खेल इसमें सहायता करते हैं।
खेल हमें अपना स्वास्थ्य अच्छा बनाने के लिए प्रेरणा और अवसर देते हैं। मैंने सीखा है कि व्यायाम के विषय में मैं ही अकेला नहीं हूँ। अधिकाँश लोग किसी खेल में या किसी खेल की तैयारी के लिए व्यायाम करना पसन्द करते हैं। जब गेंद और खिलाड़ियों का समूह सम्मिलित होता है, तो मेरे शरीर का नियमित रूप से हिलना-डुलना बहुत आसान हो जाता है। किसी अधिक स्पष्ट और ठोस लक्ष्य की ओर काम करना, जैसे कि ट्रायथलॉन दौड़ या हाई स्कूल फ़ुटबॉल के समूह में स्थान बनाने का प्रयास करना, या सुबह-सुबह किए जाने वाले व्यायाम या मिठाई से परहेज करने के लिए बहुत आवश्यक प्रेरणा देते हैं। इसके अतिरिक्त हमारे आस-पास के अन्य लोगों का अतिरिक्त उत्तरदायित्व और प्रोत्साहन भी होता है, जो हमें बिस्तर से बाहर निकलने में सहायता करता है, या व्यायामशाला में अतिरिक्त व्यायाम करने में सहायता करता है, या अतिरिक्त चक्कर दौड़ने में सहायता करता है।
खेल न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में सहायक सिद्ध होते हैं, वरन् अपने आप में एक मनोरंजन भी है, जो स्कूल, काम और परिवार के उत्तरदायित्वों के नियमित बोझ से विराम देते हैं, और आगे आने वाली चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से हरा-भरा और पुनः ऊर्जावान होने का समय देते हैं। चाहे मनोरंजन के लिए हो या प्रतिस्पर्धा के रूप में, खेल मसीह के शिष्यों को एक स्वस्थ जीवन जीने में सहायता करते हैं।
चरित्र
विश्वासी के जीवन में खेलकूद की दूसरी और संभवतः सबसे महत्वपूर्ण स्मर्ति वह है जो चरित्र को उजागर करती है और नए चरित्र का निर्माण करती है। खेल हमें ऐसे अनोखे तनाव और स्थिति प्रदान करते हैं जो खेल के बाहर के जीवन में अधिकाँश नहीं होते हैं, और यदि कोई उद्देश्यपूर्ण है, तो ये स्थितियाँ मसीह के स्वरूप में हमारी उन्नति को और अधिक आगे बढ़ा देती हैं। अतः हमें प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा के साथ आने वाले तीव्र उत्साह और दबाव में उजागर होने वाले पाप का पूर्वानुमान लगाना चाहिए और उससे आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए। खेल तापमान बढ़ाते हैं और अशुद्धियों को उजागर करते हैं, और हमें उनका समाधान करने के लिए तैयार और इच्छुक होना चाहिए। खेलों के द्वारा विकसित किए जाने वाले चरित्र से सम्बन्धित विशेषताओं की सूची इस मार्गदर्शिका में विस्तार से देखने के लिए बहुत व्यापक है, इसलिए हम केवल खेलों में उजागर की गई तीन सबसे प्रभावशाली विशेषताओं की सूची पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
- विनम्रता एवं निस्वार्थ भाव
पहला चरित्र गुण जो आसानी से दिखाई देता है और अविश्वसनीय रूप से सहायक है, वह निःस्वार्थ भाव का होना है। बाइबल हमें जीवन में दूसरों को प्राथमिकता देने के लिए कहती है, और सामूहिक खेल हमें ऐसी प्राथमिकता के प्रति हमारे स्वाभाविक प्रतिरोध को उजागर करने का भरपूर अवसर देते हैं तथा दूसरों को प्राथमिकता देने का अच्छा अभ्यास कराते हैं। एक अच्छा खिलाड़ी वह होता है जो पूरे समूह की सफलता के लिए उत्तम कार्य करता है; और यही बात घर और कलीसिया में भी अच्छी रीति से लागू होती है, क्योंकि हम सभी को दूसरों की भलाई के विषय में सोचने और दूसरों को स्वयं से अधिक महत्वपूर्ण समझने के लिए कहा गया है (फिलिप्पियों 2:3-4)।
निःस्वार्थ की यह बाहरी अभिव्यक्ति विनम्रता और अहंकार के प्रति प्रतिरोध की आन्तरिक भावना से आती है। घमण्ड सभी मनुष्य जाति के लिए एक सामान्य सा पाप है; यहाँ तक कि तर्क यह दिया जा सकता है कि घमण्ड वास्तव में सभी पापों की जननी है। घमण्ड और नम्रता अधिकाँश दैनिक जीवन में छिपे और शान्त रहते हैं, परन्तु खेल के मैदान में ये खुले रूप में टकराते हैं।
हम घमण्ड के विषय में बहुत अधिक प्रत्यक्ष और स्पष्ट रूप से सोचते हैं। हम छाती पीटने, “मैं सबसे बड़ा हूँ” चिल्लाने और उल्टी-सीधी बात करने के विषय में सोचते हैं। परन्तु घमण्ड इससे कहीं अधिक व्याप्त है। यह केवल मिलनसार या प्रसिद्ध व्यक्तियों तक ही सीमित नहीं रहता है। घमण्ड आने पर हमारी मूल इच्छा यह होती है कि हम स्वयं को अच्छे रूप में देखें या प्रस्तुत करें। यह कम से कम दो तरीकों से किया जा सकता है। हम सफल होने पर अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर सकते हैं, या असफलता के डर से लोगों की दृष्टि से दूर भाग सकते हैं। एक युवा बास्केटबॉल खिलाड़ी जो बहुत अधिक शॉट लगाता है, वह देखे जाने की इच्छा से प्रेरित हो सकता है, परन्तु मैदान में अन्य युवा खिलाड़ी जो बहुत कम शॉट लगाता है, वह अधिकतर असफल होने पर दिखाई न देने की इच्छा से प्रेरित होता है। एक खिलाड़ी शॉट मारता है ताकि हर कोई उसे सफल होते हुए देख सके; वहीं दूसरा खिलाड़ी शॉट नहीं मारता ताकि कोई उसे असफल होते हुए न देखे। दोनों ही खिलाड़ी सांसारिक तुलना और मनुष्य के भय की पकड़ में फँसे हुए हैं। दोनों ही घमण्ड के करण बाधित हैं, और खेल इसे ऐसे तरीकों से उजागर कर सकते हैं जो जीवन के अन्य क्षेत्रों में सम्भव नहीं है।
वास्तव में, हमारे भीतर जड़ जमाए हुए इस कैंसर को उजागर करने के लिए कोर्ट, मैदान या पिच से अच्छा कोई और स्थान नहीं हो सकता। परन्तु घमण्ड के विरुद्ध संघर्ष करने में एक सामान्य और अनपेक्षित क्षति आत्मविश्वास की होती है, मानो घमण्ड का उत्तर योग्यता को अस्वीकार करना है। परन्तु विश्वासी व्यक्ति को इस बात को अच्छे ढँग से समझना चाहिए कि अभिमान केवल अपनी योग्यता का अधिक आकलन करना नहीं है, वरन् उस योग्यता के स्रोत की गलत पहचान करना है। अभिमान कहता है, “मुझे देखो,” जब मैं शॉट मारता हूँ, जबकि नम्रता कहती है, “मेरे पास जो कुछ भी है वह एक वरदान है, मुझे क्यों घमण्ड करना चाहिए?” अभिमान सफलता का स्रोत अपने भीतर खोजता है, जबकि धार्मिकता से भरा आत्मविश्वास हर बात को — अर्थात् गति से लेकर हाथ-आँख समन्वय तक, यहाँ तक कि दृढ़ कार्य नैतिकता तक — को ऊपर से प्राप्त एक बरदान के रूप में देखता है। खेल किसी को अपनी योग्यताओं से पीछे हटने या झूठी विनम्रता के साथ उसे कम आँकने की अनुमति नहीं देता है। इसके लिए लोगों को अपनी योग्यताओं और कौशल का उपयोग समूह की भलाई और सफलता के लिए करना चाहिए। एक घमण्डी और स्वयं पर ध्यान देने वला खिलाड़ी हानिकारक होता है, और एक बड़ा खिलाड़ी बनने के लिए आत्मविश्वासी होना चाहिए परन्तु घमण्डी नहीं।
खेल के बाहर के जीवन में भी यह बात सच है। आत्मविश्वास महत्वपूर्ण है और घमण्ड विनाशकारी होता है, चाहे वह कार्यस्थल में हो, घर में हो, कलीसिया में हो, या समुदाय में हो। यदि हम इस बात को मैदान में सीखते हैं, तो परिवार में हमारा व्यवहार बहुत अच्छा होगा। घर को आत्मविश्वास की कमी वाले पिता की आवश्यकता नहीं है, वरन् एक ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता होती है जो विनम्र हो। कलीसिया को ऐसे सदस्यों की आवश्यकता नहीं है जो मानते हैं कि उनके पास देने के लिए कुछ नहीं है; परन्तु कलीसिया को ऐसे सदस्यों की आवश्यकता है जो अपने वरदान का उपयोग करें और परमेश्वर का धन्यवाद करें कि उसने उन्हें ऐसी योग्यता दी है।
हम सभी को पौलुस के शब्दों को हृदय से ग्रहण करना चाहिए क्योंकि वह हमें स्मरण कराता है कि, “और तेरे पास क्या है जो तूने (दूसरे से) नहीं पाया और जब कि तूने (दूसरे से) पाया है, तो ऐसा घमण्ड क्यों करता है, कि मानो नहीं पाया?” (1 कुरिन्थियों 4:7) खेलकूद आत्मविश्वास से भरी विनम्रता सीखने के लिए एक उत्तम प्रशिक्षण स्थल है, और यह विनम्रता निस्वार्थ भावना को उत्पन्न करेगी, तथा निस्वार्थ सफलता लाएगी, चाहे वह मैदान पर हो, कलीसिया में हो या घर में हो।
- नेतृत्व
सामूहिक खेलों की एक और अच्छी विशेषता यह है कि इसमें पुरुषों और महिलाओं को नेतृत्व का अभ्यास करने और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। यह बात युवाओं के खेलों के विषय में भी सही है। युवा पुरुष और महिलाएँ अधिकाँश ऐसे वातावरण से वंचित रहते हैं जहाँ वे नेतृत्व कर सकें, परन्तु खेल उन्हें कम गम्भीर परिस्थिति में भी ऐसा अवसर प्रदान करते हैं। एक दस वर्षीय छोटे खिलाड़ी का सम्भवतः कोई छोटा भाई-बहन न हो या उसे कभी नेतृत्व करने का अवसर न मिला हो, परन्तु जब वह नौ और दस वर्ष की आयु वर्ग में खेलता है, तो उसे अपने से छोटे खिलाड़ियों को उत्साहित करने, सलाह देने और उनके लिए आदर्श बनने का अवसर मिलता है।
जैसे-जैसे खिलाड़ी बड़े होते चले जाते हैं तो दाँव भी बड़े होते चले जाते हैं, इसलिए नेतृत्व की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। अच्छे प्रशिक्षक इसे अपने खिलाड़ियों में आजीवन नेतृत्व की शिक्षा देने के अवसर के रूप में देखते हैं, ताकि जब वे मैदान से बाहर हों तो जीवन में अच्छा नेतृत्व कर सकें।
जबकि नेतृत्व का अधिकाँश भाग सही दृष्टिकोण और प्रयास करने के नमूने में पाया जाता है, खेलों में संचार कौशल और अन्य कौशल सीखे जाते हैं जो मसीही जीवन में अनमोल सिद्ध होते हैं। इस प्रकार से संवाद करना सीखना कि लोग सही ढँग से प्रतिक्रिया करें और साथ ही अनुसरण भी करना चाहें, अच्छे नेतृत्व का एक अनिवार्य तत्व है। निर्णय लेने से पहले साथियों के सुझावों या उनकी निराशाओं को सुनना, व्यक्ति को घर, कलीसिया और समुदाय में नेतृत्व करने के लिए तैयार करता है। कलीसिया और घर में अगुवाई करने के लिए वही धैर्य और त्याग के साथ प्राथमिकता आवश्यक है, जो मैदान पर सीखी जा सकती है। सच तो यह है कि नेतृत्व करना सरल नहीं होता है, और यह एक बड़ा वरदान है कि जब असफलता के परिणाम कम हों, तब कठिन निर्णय लेने और प्रतिदिन एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करने का अभ्यास किया जा सके। अच्छे संगी साथी खिलाड़ी ही अच्छे अगुवे बनते हैं।
खेल न केवल खिलाड़ियों में नेतृत्व को विकसित करते हैं, वरन् प्रशिक्षकों में भी करते हैं। प्रशिक्षण लेना एक ऐसा उत्तम अवसर होता है जहाँ महत्वपूर्ण नेतृत्व कौशल सीखे जा सकते हैं,
और जहाँ हमारी कुछ पापी मानसिकताएँ भी उजागर होती हैं, जो अधिकाँश प्रतिदिन के जीवन में निष्क्रिय दिखाई देती हैं। इतना ही नहीं, मसीही पुरुष और महिलाएँ समाज में अविश्वसनीय प्रभाव डाल सकते हैं और जब वे खिलाड़ी से नेतृत्व करने की भूमिका में आते हैं तो वे भक्ति और सुसमाचार के लिए प्रकाशस्तंभ बन सकते हैं। घर और कलीसिया के बाहर बहुत कम भूमिकाएँ होती हैं जिनका प्रभाव प्रशिक्षक से अधिक होता है। कितनी बार प्रशिक्षक वही बात कहते हैं जो माता या पिता कहते हैं, परन्तु फिर भी युवा खिलाड़ी माता-पिता की तुलना में प्रशिक्षक की बात को अच्छे ढँग से सुनते हैं और उन की बात पर प्रतिक्रिया करते हैं? प्रशिक्षण एक शक्तिशाली सौभाग्य है, कि मसीही प्रशिक्षक इस वास्तविकता का लाभ उठाकर न केवल समाज में, वरन् राज्य में भी प्रभाव डाल सकते हैं।
- दृढ़ता और अनुशासन
अनुशासन बनाए रखना और देर से सन्तुष्टि पाना लगभग सभी खेल प्रशिक्षण का मूल आधार हैं। व्यायाम करना और कौशल विकास कठोर, नीरस और अधिकाँश रूप से अकेलेपन से भरे होते हैं। बिना किसी शीघ्र पुरस्कार पाने के कठिन काम करने की योग्यता एक फलदायी जीवन का मूलभूत गुण है। ये ऐसे गुण हैं जिन्हें सभी युवा पुरुषों और महिलाओं को विकसित करने चाहिए, और हमारी संस्कृति में अधिकतर इन्हें निर्मित करना पड़ता है। हम में से बहुत कम लोग सूर्योदय से पहले उठकर गायों का दूध निकालते हैं और खेतों की जुताई करते हैं, और छोटी आयु के बच्चों को इस प्रकार के अनुशासन में रहने के लिए विवश किया जाता है जिसका सामना मनुष्य जाति ने पूरे इतिहास में स्वाभाविक रूप से किया है। इसके विपरीत हमने तुरन्त सन्तुष्टि, होटल से भोजन घर पर मँगवाना और आरामदायक जीवन शैली सीख ली है। तो फिर हम इस आराम दायक जीवन से कैसे लड़ सकते हैं? बच्चों (विशेषकर बड़ों) में दृढ़ता विकसित करने के खेलों से बढ़िया तरीका और क्या हो सकता है? अधिकाँश सुबह-सुबह मेरे बच्चे सूर्योदय के साथ ही उठकर व्यायामशाला या अभ्यास करने के लिए मैदान में जाते हैं। उनकी आँखों में नींद होती है फिर भी वे आराम करने के विपरीत बिस्तर छोड़कर बार-बार कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं।
विश्वासी को केवल खेलों के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और तैयारी से ही लाभ नहीं मिलता, वरन् प्रतियोगिता के बीच में दिखाया गया धैर्य और दृढ़ता मैदान की सीमाओं से बाहर जीवन के लिए भी अद्भुत प्रशिक्षण है। किसी हार या बड़ी असफलता के बाद पुनः उठ खड़े होने और प्रतिस्पर्धा करने की प्रतिबद्धता का सीधा सम्बन्ध मसीही जीवन से होता है। यद्यपि पौलुस भक्ति में बढ़ने को शारीरिक उन्नति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण मानता है, फिर भी वह यह स्वीकार करता है कि शारीरिक प्रशिक्षण लाभकारी होता है (1 तीमुथियुस 4:8)। वास्तव में, पौलुस अपने सम्पूर्ण आत्म-नियंत्रण और आत्म-अनुशासन के दृष्टिकोण का वर्णन खेल-कूद की शब्दावली में करता है:
प्रत्येक खिलाड़ी हर बात में संयम रखता है। वे ऐसा नाशवान पुरस्कार पाने के लिए करते हैं, जबकि हम अविनाशी पुरस्कार पाने के लिए करते हैं। इसलिए मैं तो इसी रीति से दौड़ता हूँ, परन्तु बेठिकाने नहीं, मैं भी इसी रीति से मुक्कों से लड़ता हूँ, परन्तु उसके समान नहीं जो हवा पीटता हुआ लड़ता है।परन्तु मैं अपनी देह को मारता कूटता, और वश में लाता हूँ; ऐसा न हो कि औरों को प्रचार करके, मैं आप ही किसी रीति से निकम्मा ठहरूँ। (1 कुरि. 9:25-27)
मसीही जीवन कठिन है, और कठिन कार्य करना सीखना तथा निराशा और असफलता के होते हुए भी आगे बढ़ने की इच्छा उन लोगों की महत्वपूर्ण पहचान बन जाती है जो मसीह के समान बनने के अभिलाषी हैं।
शारीरिक प्रशिक्षण का एक और गुण है जो विशेष रूप से युवाओं के लिए अत्यंत लाभकारी है। कुछ खेलों में शारीरिक सम्पर्क और शक्ति प्रशिक्षण, जो मूल रूप से युद्ध की नकल करने के लिए बनाया गया था, मनुष्य के लिए अच्छी तैयारी है, क्योंकि उसे अपने घर और उन लोगों की रक्षा करने के लिए कहा जाता है जो स्वयं की रक्षा नहीं कर सकते हैं। यह एक ऐसा लाभ है जिसे अधिकाँश अनदेखा कर दिया जाता है, परन्तु समाज को पति, पिता और पुत्रों की आवश्यकता होती है जो बुराई के विरुद्ध खड़े हो सकें और निर्दोषों की रक्षा करें। खेल मनुष्य को शारीरिक योग्यताओं को विकसित करने और बनाए रखने के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करते हैं, जिससे वह परमेश्वर की इच्छा के अनुसार रक्षा करने वाला बन सके।
सम्बन्ध
खेलों का एक बड़ा लाभ यह है कि यह लोगों के साथ रहने का अवसर प्रदान करता है। चाहे सुसमाचार के अवसर हों या मसीही संगति के, खेल हमें लोगों के साथ इस प्रकार से जोड़ते हैं जो कि जीवन के अन्य क्षेत्र नहीं जोड़ते हैं। कई मसीहियों को अपने समुदायों में खोए हुए लोगों के साथ जुड़ना कठिन लगता है। पड़ोसियों के बीच आपसी भाईचारा कम होता जा रहा है, और सुसमाचार के लिए सम्बन्ध स्थापित करने के अवसर भी कम होते जा रहे हैं। यद्यपि खेल आपके आसपास के समाज से जुड़ने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है, परन्तु जब खेल की बात आती है, तो विभिन्न पृष्ठभूमि और विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ आ जाते हैं।
अपने पड़ोसी को कचरा उठाकर रास्ते के किनारे ले जाते समय देखने की तुलना में, एक घंटे के फुटबॉल के खेल को ऊँची कुर्सी पर बैठकर देखना और बातचीत आरम्भ करना कहीं सरल होता है। यह बात खिलाड़ी पर भी लागू होति है। यदि कोई विश्वासी अविश्वासियों के साथ किसी समूह में खेल रहा है, तो बस की सवारी, व्यायाम करना, और समूह के साथ भोजन करते हुए इस बीच सार्थक बातचीत करने के अनेक अवसर मिलते हैं।
मसीहियों को स्थानीय खेलों में “फसल के लिए तैयार खेत” के रूप में देखना चाहिए और यह सोच-समझ कर, प्रार्थना के साथ विचार करना चाहिए कि वे अविश्वासियों से कैसे सबसे अच्छे तरीके से जुड़ सकते हैं। अपने समूह के सदस्यों के परिवारों के लिए प्रार्थना करके आरम्भ करें और समूह के लिए भोजन या सत्र के अन्त में प्रीतिभोज आयोजित करने पर विचार करें। परिवारों को अपने घर में आमंत्रित करना न केवल अतिथि सत्कार को प्रदर्शित करता है और न ही केवल मित्र भाव को बढ़ाता है, वरन् उन्हें एक मसीही घर की झलक भी देखने को मिलती है। इस वातावरण में, आप भोजन के लिए प्रार्थना कर सकते हैं, सेवा करने का उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं, और उन व्यक्तिगत प्रश्नों को पूछ सकते हैं जो आप कुर्सी पर बैठकर खेल देखते हुए नहीं पूछ पाए थे।
इनमें से कई सम्बन्ध लम्बे समय तक आगे चलते रहेंगे, और यह असामान्य बात नहीं है कि खिलाड़ी वर्षों तक साथ खेलते और समय बिताते हैं। यह सुसमाचार प्रचारक को लम्बा समय और अवसर प्रदान करता है ताकि वह मित्रता को अधिक विकसित कर सके और विभिन्न तरीकों से मसीह के प्रेम को प्रदर्शित कर सके। मसीही प्रशिक्षकों के पास मसीह के समान चरित्र का अनुकरण करने और खिलाड़ियों को परमेश्वर के मार्गों की भलाई की ओर मार्गदर्शन करने का और भी अधिक अवसर होता है। एक बेसबॉल के कुशल खिलाड़ियों के समूह के प्रशिक्षक के रूप में, मैंने कई अवसरों पर खिलाड़ियों, माता-पिता और दादा-दादी को होटल और बड़े-बड़े सम्मेलनों में सुसमाचार सुनाया है।
अन्य विश्वासियों के साथ समय बिताना, खेलों से अतिरिक्त लाभ हो सकता है। साथ में समय बिताए बिना दृढ़ सम्बन्ध बनाना असम्भव होता है। मसीही खिलाड़ी या परिवार जो एक साथ खेलते हैं, वे वास्तव में शिष्यत्व को और अधिक तीव्र कर सकते हैं और खिलाड़ियों के साथ बिताए गए समय के कारण सच्ची बाइबल आधारित संगति को और उत्तम बना सकते हैं। मैंने अपनी ही कलीसिया में पुरुषों को गोल्फ का चक्कर लगाते हुए या कलीसिया परिसर में सॉफ्टबॉल खेलों में बेंच पर बैठकर अन्य पुरुषों के साथ शिष्यत्व सम्बन्धी बातचीत करते हुए सुना है। चाहे सम्बन्ध जो भी हों, परन्तु मसीहियों को उद्देश्य के साथ आगे बढ़ना चाहिए और हमारे खेल-संस्कृति के साथ आने वाले समय और बातचीत का पूरा-पूरा लाभ उठाना चाहिए।
चाहे आप मसीह में किसी भाई के साथ समोसा खा रहे हों या अविश्वासियों के समूह के साथ गाड़ी खड़ी करने के स्थान पर समोसा के लिए प्रार्थना कर रहे हों, सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिए करें।
चर्चा एवं मनन:
- आपके विचार में खेलों के सबसे बड़े लाभ क्या हैं?
- आत्मविश्वास और अहंकार में क्या अन्तर है, और सफलता की मानसिकता को समझने में बाइबल हमारी कैसे सहायता करती है?
- खेलों से मिलने वाले अवसरों का पूरा लाभ उठाने के रचनात्मक तरीके क्या हो सकते हैं?
- आपने मसीहियों को खेलों का लाभ उठाते हुए किस प्रकार से देखा है?
2 रक्षा
मैं चाहता हूँ कि खेल केवल सकारात्मक हों, परन्तु इस संसार में विद्यमान अधिकाँश वस्तुओं के समान खेल प्रतियोगिता में भी जोखिम होते हैं। खेलों की शक्ति और उनका सदैव उपस्थित रहने वाला स्वभाव उन्हें एक अद्भुत साधन बनाता है, परन्तु यदि इन्हें सावधानी से नहीं किया जाए तो ये गम्भीर हानि भी पहुँचा सकते हैं। एक मसीही खिलाड़ी को खेलों से उत्पन्न होने वाले जोखिम और प्रलोभनों के प्रति सतर्क रहना चाहिए, ताकि वह उनसे बच सकें और साथ ही खेलों द्वारा मिलने वाले लाभों का सही ढँग से लाभ उठा सकें।
पहचान
सम्भवतः खेलों में सबसे बड़ा खतरा गलत पहचान का होता है। चाहे किकबॉल में अन्तिम स्थान पर चुना जाना हो, या खिलाड़ियों को सम्मानित करने वाली सूची में स्थान बनाने का प्रयास करना हो, खेल का अपना मूल्य, महत्व और यहाँ तक कि अपनी पहचान खोजने का प्रलोभन प्रबलता से बना रहता है। परमेश्वर के स्वरूप में सृजे गए और उसके पुत्र के स्वरूप में ढाली गई सन्तान के रूप में, हमें बनाने और उद्धार करने वाले के अतिरिक्त किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति में अपनी पहचान ढूँढना मूर्खता का काम है।
खेलों को दिया जाने वाला समय और संसाधन, पहचान बनाने के लिए एक स्वाभाविक आकर्षण उत्पन्न करता है। निश्चित रूप से यह बात केवल खेलों के सम्बन्ध में ही सत्य नहीं है, परन्तु जो भी वस्तु आपका समय, धन और ध्यान खींचती है, वह आपकी पहचान छीनने के बहुत निकट होती है। परन्तु खेलों में इतना अधिक निवेश और समाज के द्वारा इस पर इतना अधिक ध्यान दिए जाने के कारण, इसका आकर्षण अत्यधिक शक्तिशाली हो जाता है। अनगिनत घंटों का अभ्यास, प्रशिक्षण और यात्रा, खेलों में सफलता किसी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने या राजनीतिक शक्ति बनाने में सहायता कर सकती है। हमारा धन न केवल यह प्रकट करता है कि हमारे लिए क्या महत्वपूर्ण है, वरन् यीशु कहता है कि हम जहाँ निवेश करते हैं, वास्तव में वह हमारे हृदय को उसी दिशा में मोड़ देता है: “क्योंकि जहाँ तेरा धन है वहाँ तेरा मन भी लगा रहेगा” (मत्ती 6:21)।
केवल खेलों में किया गया निवेश ही किसी की पहचान को खेलों में खोजने का बड़ा प्रलोभन नहीं बनाता, वरन् प्रतियोगिता स्वयं भी ऐसा करती है। प्रतिस्पर्धा का अर्थ तुलना करना है, और इसलिए खेलों में तुलना सदैव विद्यमान रहती है। औसतन बल्लेबाजी से लेकर तैराकी में व्यक्तिगत रिकॉर्ड तक, खेलों की प्रतिस्पर्धात्मक स्वभाव दूसरों के साथ तुलना और निरन्तर मूल्याँकन करता है। हम पवित्रशास्त्र और अनुभव से जानते हैं कि तुलना अधिकाँश अहंकार की ओर ले जाती है। यहाँ तक कि सबसे परिपक्व शिष्य भी अपनी तुलना में पाए जाने वाले घमण्ड से संधर्ष कर रहे थे। याकूब और यूहन्ना इस बात पर तर्क-वितर्क कर रहे थे कि सबसे बड़ा शिष्य कौन है कुरिन्थुस में लोग इस बात पर तर्क करते थे कि सबसे बड़ा उपदेशक कौन है, और भले ही यह बात ऊँची आवाज में कहने पर अटपटी लगे, परन्तु हम अपने पड़ोसी से अच्छा पिकलबॉल खिलाड़ी होने पर गर्व महसूस करते हैं।
दूसरी ओर, जब हम असफल होते हैं तो तुलना करने से निराशा और हृदय टूटने की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है। यदि हमारी पहचान उस खेल पर आधारित है जिसे हम खेलते हैं, तो जब हमारा व्यक्तिगत या समूह का प्रदर्शन हमारी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता, तो हम पूरी रीति से डगमगा जाते हैं और हमारे पास टिकने के लिए कोई आधार नहीं होता है। कुछ खिलाड़ी प्रशिक्षण में हजारों हजार घंटे व्यतीत करते हैं और भोजन तथा सामाजिक सहभागिता का भी गम्भीर रीति से त्याग करते हैं, परन्तु फिर भी वे अपने इच्छा के अनुसार लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाते हैं। यह विनाशकारी हो सकता है, और यदि खिलाड़ी की पहचान उस खेल में है, तो लक्ष्य के साथ-साथ उसका आनन्द और सन्तुष्टि भी समाप्त हो जाती है।
वास्तव में, जीत में भी एक खिलाड़ी को अधिकतर सांसारिक लाभ का व्यर्थ में सामना करना पड़ता है। इस निराशा का अनुभव इतना सामान्य है कि “ओलंपिक के बाद की निराशा” जैसे शब्द बनाए गए हैं, और यह तब उन स्वर्ण पदक विजेताओं की निराशा को दर्शाते हैं जब राष्ट्रीय गान समाप्त हो जाता है। ओलंपिक में पदक जीतने वाले 27% से अधिक खिलाड़ियों ने खेलों के बाद गम्भीर निराशा की बात कही है। मिस्सी फ्रैंकलिन से लेकर कैलेब ड्रेसेल और माइकल फेल्प्स तक, तैराकी में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी उस प्रकार से सन्तुष्ट नहीं हुए जैसा उन्होंने सोचा था। ड्रेसेल ने 2020 में टोक्यो में पाँच स्वर्ण पदक जीतने के बाद, स्वयं को जीत पर नहीं, वरन् उन अवसरों पर ध्यान केंद्रित करते हुए पाया जो उन्होंने नहीं किए: “और यह मेरे लिए उचित नहीं है। यह बिल्कुल भी उचित नहीं है… जैसे, मैंने खेलों के सबसे बड़े विश्व मंच पर पाँच स्वर्ण पदक जीते हैं, और मैं सोच रहा हूँ कि अच्छा होता कि मैं कुछ स्पर्धाओं में और तेज होता।”1 जिन खिलाड़ियों की पहचान उनके द्वारा खेले जाने वाले खेल से जुड़ी होती है, उन्हें अंततः यह अनुभव होता है कि खेल उनकी पहचान और उद्देश्य को बनाए रखने के लिए दृढ़ता से पर्याप्त नहीं हैं। जैसा कि सुलैमान ने सभोपदेशक में कहा है कि, पुरस्कार और ओलंपिक स्वर्ण पदक दोनों ही हवा के साथ उड़ जाएँगे। खेल हमें न केवल उस समय लुभाते हैं, परन्तु वे समय के साथ भी लुभाते रहते हैं। और आँकड़े दूसरों की तुलना में हमारे प्रदर्शन का निरन्तर स्मरण कराते रहते हैं। अपनी पहचान को एक सांख्यिकीय माप, 100 मीटर दौड़ के समय से या कुल जीत से जोड़ दें, और तब आप एक विनाशकारी शक्ति या इकाई का निर्माण करते हैं और फिर अपने ही निर्माण के नकारात्मक परिणामों को भुगतते हैं।
इस दृष्टिकोण से, खेल मनोविज्ञान एक बड़ा व्यवसाय बन गया है, क्योंकि प्रशिक्षक और महाप्रबन्धक खिलाड़ियों को खेलों में सफलता और असफलता का समाधान करने में सहायता करने का प्रयास करते हैं। यदि किसी की पहचान खेल से ही होती है है, तो भले ही यह असम्भव काम न हो, परन्तु कठिन अवश्य है। यद्यपि एक मसीही खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा के उतार-चढ़ाव को सबसे अच्छे ढँग से सहन कर सकता है, क्योंकि उसकी पहचान मसीह में गहराई से जड़ पकड़ी हुई होती है। और रोचक बात यह है कि कई मसीही खिलाड़ी खेल के समय अपने शरीर पर फ़िलिप्पियों 4:13 प्रदर्शित करते हैं, जिससे वे मसीह की सामर्थ्य पर अपने विश्वास की सार्वजनिक साक्षी देते हैं। फिर भी, हमें सावधान रहना चाहिए और यह समझना चाहिए कि उस आयत में उल्लिखित सामर्थ्य जीवन में जीतने पर लागू नहीं होती, वरन् जीत और हार दोनों को पर लागू होती है। अतः यह अध्याय सन्तोष पर आधारित है और इस प्रकार मसीही खिलाड़ी को यह महत्वपूर्ण बात स्मरण कराता है कि जीत हो या हार, हमारा आनन्द मसीह में सुरक्षित है।
निवेश
जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, कि खेलों में भारी निवेश इसे चुनौतीपूर्ण बना सकता है कि कोई अपनी पहचान उनमें न बनाए, परन्तु खेलों पर व्यय किए गए धन और समय में एक और प्रत्यक्ष जोखिम समाया हुआ होता है। हमारा धन और हमारा समय परमेश्वर के द्वारा हमें एक भण्डारी के रूप में दिया गया है, और हमें उन्हें सही रीति से प्रबन्ध करने के लिए कहा गया है। जब हमारे संसाधनों की बात आती है, तो खेलकूद में एक विश्वासयोग्य सन्तुलन ढूँढ पाना एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाता है। समय और धन दोनों ही पृथ्वी पर सभी के लिए सीमित साधन हैं, और खेलों को इन दोनों की अधिक आवश्यकता होती है।
खेलों में समय लगता है। यद्यपि खेलों के लिए एक निश्चित और सामान्यतः कम समय की ही आवश्यकता होती है, परन्तु उन खेलों की तैयारी और प्रशिक्षण में बहुत अधिक समय लगता है। इसलिए खेल आरम्भ होने से पहले प्रशिक्षण और अभ्यास में कई घण्टों का समय लगता है। अतः हमें सावधान रहना चाहिए कि हम खेलों में बिताए गए समय पर विचार करें और उस समय को नियंत्रित करें, और इसका अपने अन्य उत्तरदायित्वों के साथ मूल्याँकन करें। हमारे कार्यक्रम और हमारे समय का निवेश हमारी प्राथमिकताओं को दर्शाता है, और यदि हम सतर्क न रहें, तो खेल हमारा पूरा समय को ही नष्ट कर देंगे। खेलों में समय लगता है, और यदि कोई दृढ़ न बने रहे, तो ये खेल बहुत अधिक समय ले लेंगे।
खेलों में धन भी व्यय करना पड़ता है। अधिकाँश खेलों में केवल भाग लेने के लिए ही किसी न किसी रूप में वित्तीय निवेश करना आवश्यक होता है। चाहे वह सॉफ्टबॉल लीग के लिए पंजीकरण हो या गोल्फ के एक राउंड के लिए ग्रीन शुल्क हो, परन्तु अधिकाँश खेल निशुल्क नहीं होते हैं। वास्तव में, कई खेल महँगे हो सकते हैं, और युवा बेसबाल (उच्चस्तरीय) का व्यय बिल्कुल अलग स्तर का होता है, इस विषय पर बाद में चर्चा की जाएगी।
पंजीकरण के अतिरिक्त, खेल से सम्बन्धित अन्य समान भी खिलाड़ियों को खरीदने पड़ते हैं, जिसमें धन का व्यय होता है। वह नया तैराकी वस्त्र आपको अधिक दूरी तक जाने और तेजी से तैरने में सहायता करने का वचन देता है। खिलाड़ी हमेशा अपने पसंदीदा खेलों में अधिक से अधिक व्यय करने के प्रलोभन में रहते हैं, और यदि वे सतर्क न रहे, तो खेल खेलने के लिए संसाधनों पर अत्यधिक और अनावश्यक राशि व्यय कर देंगे। टी-बॉल से लेकर सीनियर टीज़ तक, यह बात सच है। नए संसाधनों के आकर्षण से हम कभी थकते नहीं हैं। हमें स्वयं को नियमित रूप से स्मरण कराना चाहिए कि पिछले वर्ष का नमूना पिछले वर्ष खिलाड़ियों के लिए बहुत अच्छा काम कर रहा था। एक पुरानी कहावत है कि “यह तीर नहीं, यह योद्धा है” यहाँ सही बैठती है, जिसका अर्थ है कि यह सब व्यक्ति की कार्य करने की योग्यता पर निर्भर करता है, न कि संसाधनों पर। कभी-कभार ही कोई नया संसाधन वह अन्तर लाता है जिसकी वह प्रतिज्ञा करता है। किसी खेल सम्बन्धी संसाधन को पकड़े हुए व्यक्ति का कौशल उस संसाधन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होता है। यह कहा जाता रहा है कि भले ही खेलों पर व्यय करने से कोई अच्छा बन जाए, परन्तु विश्वासी जन को यह पूछना चाहिए कि क्या यह व्यय करना इसके लिए उचित है।
मसीह के अनुयायी को खेल के सम्बन्ध में समय और धन व्यय करने का नियमित रूप से मूल्याँकन करना चाहिए और यदि वे सीमा से बाहर हो जाएँ तो अपनी प्राथमिकताओं में परिवर्तन करने के लिए तैयार रहना चाहिए। हमें जो संसाधन दिए गए हैं हमें उनका भण्डारी बनने के लिए कहा गया है, और हमारे पास जो समय और धन है, वह हमारा अपना नहीं है, वरन् वह समय और धन परमेश्वर की महिमा के लिए उपयोग किया जाना चाहिए।
प्रभाव
जबकि खेल हमें सुसमाचार-प्रचार में संसार के साथ जुड़ने का अवसर देते हैं, और यही खेल हमें संसार को प्रभावित करने का भी अवसर देते हैं। परन्तु जब तक हम कलीसियाई सॉफ्टबॉल की बात नहीं करते हैं, तब तक सामान्यतः विश्वासियों का खेल में भाग लेने पर संख्या उनके विरुद्ध हो जाती है। इस संसार में, इस प्रकार की बातचीत अनिवार्य है, और यदि हम बड़ी आज्ञा में विश्वासयोग्यता के साथ भाग लेते हैं, तो अवश्य लेना चाहिए — परन्तु यह खतरे का वातावरण भी तैयार करती है। अपरिपक्व विश्वासी अधिकाँश अपने आस-पास की नकारात्मक संस्कृति से प्रभावित हो सकते हैं, जहाँ उनके साथ हानिकारक और दुर्व्यवहार किया जा सकता है। इससे बचाव के लिए, मसीह के अनुयायियों को स्मरण रखना चाहिए कि वे किसका प्रतिनिधित्व करते हैं इसलिए संसार और संसार के व्यवहार के प्रति सचेत होकर तैयार रहना चाहिए। सरल स्वीकृति और तैयारी अधिकाँश सांसारिक संगति से आने वाले भ्रष्ट प्रभाव को कम करने के लिए पर्याप्त होती है, परन्तु हमारे व्यवहार की रक्षा करने के लिए अन्य उपाय भी किए जा सकते हैं।
यदि मसीह के अनुयायी खेल को अपने लक्ष्य के एक भाग के रूप में देखें, न कि उससे अलग कुछ और ही समझें, तो इससे उन्हें बहुत सहायता मिलेगी। खेलों के समुदाय को पकी हुई फसल के खेत के रूप में देखना केवल सुसमाचार प्रचार के लिए ही अच्छा नहीं है, वरन् खेल हमें सांसारिक संस्कृति के विरुद्ध खड़ा होने में भी सहायता करते हैं।
युवा खिलाड़ियों में हानिकारक और दुर्व्यवहार के प्रभाव विनाशकारी हो सकते हैं। माता-पिता को अपने बच्चों के साथ किसी विषय पर चर्चा करते समय सचेत और सक्रिय रहना चाहिए तथा जो कुछ कहा और किया जा रहा है, उसके विषय में कठिन प्रश्न पूछने चाहिए। माता-पिता को इस बात से अवगत रहना चाहिए कि युवा खिलाड़ियों का संसार के साथ अत्यधिक समय बीतता है और सम्पर्क भी होता है, इसलिए उन्हें इसका सन्तुलन बनाने के लिए कलीसिया और घर में गुणवत्तापूर्ण (और पर्याप्त) समय देना चाहिए। माता-पिता अधिकाँश अपने बच्चों पर पड़ने वाले पाप के प्रभाव और उसके आरम्भ होने की आयु के विषय में अनभिज्ञ रहते हैं। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के आने से यह समस्या और भी बढ़ गई है। माता-पिता और खिलाड़ी दोनों को ही हर हाल में सांसारिक प्रलोभनों को पहचानने, उनसे भागने और उनसे बचाव करने के लिए सतर्क रहना चाहिए।
जब खेल संस्कृति की बात आती है तो न केवल प्रत्यक्ष पापपूर्ण प्रभाव का खतरा होता है, परन्तु प्राथमिकताओं के लिए संघर्ष भी निरन्तर चलता रहता है। जब समूह के साथ इतना अधिक समय और ऊर्जा लगाई जाती है, तो बच्चे के सम्पूर्ण विकास अर्थात् सामाजिक और आत्मिक उन्नति को आकार देने और उसका सहयोग करने में कलीसिया की भी भूमिका होती है। यह विशेष रूप से यात्रा-खेलों में एक समस्या है, परन्तु उस पर आगे चर्चा करेंगे। खेलों का वातावरण जो गहरा प्रभाव डालता है, उससे माता-पिता भी अछूते नहीं हैं, इसलिए उन्हें अपने बेटों और बेटियों के साथ नियमित बातचीत और मूल्याँकन की योजना बनानी चाहिए।
इस प्रभाव को कम करने का एक तरीका यह है कि भक्तिपूर्ण माता-पिता स्वयं प्रशिक्षक बनें और युवा खिलाड़ियों की अगुवाई करने में सहायता करें। छह वर्ष की आयु से बास्केटबॉल खेलने से लेकर शुक्रवार की शाम को आयोजित होने वाले सामुदायिक कार्यकर्मों और खेलकूद प्रतियोगिता तक, मेरे बच्चों को कई मसीही प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में खेलने का सौभाग्य मिला है, जिन्होंने प्रभाव का उत्तरदायित्व बड़ी गम्भीरता से लिया, और इस कारण मेरे बच्चे बहुत अधिक अच्छे हैं।
अपने बच्चों के लिए तथा भक्तिपूर्ण प्रशिक्षकों के लिए प्रार्थना करें और उन्हें ढूँढें, और यदि कोई उपलब्ध न हो, तो स्वयं प्रशिक्षक बनने पर विचार करें। मैंने अपने चार बच्चों के माध्यम से कई खेलों में बारह से भी अधिक सत्रों में प्रशिक्षक का कार्य किया है, और इससे मुझे अधिक समय और प्रभाव मिला है, विपरीत इसके कि मैं उन्हें किसी और को सौंप देता।
चाहे जो भी चुनाव करना हो, परन्तु मसीह के अनुयायी को अपने आस-पास के वातावरण के प्रभावों को पहचानना होगा और उनके अनुसार योजना बनानी होगी। यीशु का यह उद्देश्य नहीं था कि हम संसार से अलग हो जाएँ, परन्तु वह हमसे यह उम्मीद करता है कि हम संसार के समान नहीं, वरन् संसार से भिन्न जीवन जिएँ। क्योंकि सक्रिय और बाइबल आधारित दृष्टिकोण के बिना, संसार का हम पर उससे कहीं अधिक प्रभाव पड़ेगा जितना कि हम संसार पर डालते हैं।
चर्चा एवं मनन:
- आप खेलों की सबसे बड़ी त्रुटियाँ क्या मानते हैं?
- एक विश्वासी को खेलों से जुड़े समय और वित्तीय प्रतिबद्धताओं पर सावधानी पूर्वक विचार क्यों करना चाहिए?
- कोई व्यक्ति खेलों में अपनी पहचान को अत्यधिक न जोड़ने से कैसे बच सकता है?
- हम स्वयं को और अपने बच्चों को उस अधार्मिकता से कैसे बचा सकते हैं जो स्वाभाविक रूप से संसार में फैली हुई है?
3 विशेष समूह
ट्रैवल बॉल
खिलाड़ियों के माता-पिता के रूप में, आपके सामने तुरन्त ही यात्रा खेलों से सम्बन्धित प्रश्न होगा। “ट्रैवल बॉल” लगभग तीन लाख तैंतीस हज़ार छह सौ दस करोड़ के उद्योग के रूप में विकसित हो चुका है2 और प्रति वर्ष बढ़ता ही जा रहा है। खेल के समूह दिन-प्रतिदिन छोटे होते जा रहे हैं और खेल का क्षेत्र बड़ा होता जा रहा है।
जब मेरे तीसरे बेटे ने सात वर्ष की आयु में अपना पहला ऑल-स्टार प्रतियोगिता पूरी की, तो मुझे पता था कि आगे क्या होने वाला है। बच्चों का यह समूह एक असाधारण समूह था, और उस समूह का मुख्य हिस्सा दस वर्ष की आयु में पोनी लीग वर्ल्ड सीरीज में दूसरे स्थान पर आया। जब मैं और एक अन्य बच्चे का पिता प्रशिक्षकों से बात करने के लिए गए, तो मैंने उनसे कहा कि, “वे इस समूह के साथ एक यात्रा समूह आरम्भ करना चाहते है,” और वास्तव में, यह बात अभी पाँच मिनट भी नहीं हुई थी कि इन युवा खिलाड़ियों की अच्छी खेल योग्यता की चर्चा करते हुए ही यात्रा समूह का विचार उत्पन्न हो गया। मैंने अपना सिर हिलाया और दूसरे बच्चे के पिता की ओर देखकर मुस्कुराया।
बास्केटबॉल यात्रा का आकर्षण स्पष्ट है। यह सुधार के अधिक अवसर, दोस्तों के साथ अधिक समय, माता-पिता के लिए अपने बच्चों को खेलते देखने का अधिक समय, अधिकतर अच्छी प्रतियोगिता, और आगे चलकर कॉलेज के प्रशिक्षाओं के लिए अधिक स्पष्टता प्रदान करता है। इसमें कोई सन्देह नहीं है कि यात्रा करते हुए खेले गए खेल और भी अधिक लाभ प्रदान करते हैं, परन्तु जो बात कम स्पष्ट है वह सम्भवतः इसके नाकारात्मक पक्ष से है। इसमें जोखिम सामान्य खेलों से भिन्न नहीं हैं, परन्तु यह अत्यधिक बढ़ गया है। उदाहरण के लिए, बच्चों और किशोरों के लिए अंतरराष्ट्रीय बेसबॉल संगठन में निवेश लगभग ₹13,500/- है जो एक सीमित, निर्धारित अवधि में, विशेष रूप से तीन महीनों के लिए प्रति सप्ताह कई बार, और लगातार होने वाले कार्य या गतिविधि की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। परन्तु यात्रा बेसबॉल में वित्तीय प्रतिबद्धता हजारों में होती है, जिसमें आरम्भिक समूह का पंजीकरण, बगुत सी वर्दी, ब्रांडेड प्रचार सामग्री और माता-पिता का व्यापार, साथ ही व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा से जुड़े टिकट, भोजन और होटल आदि का व्यय सम्मिलित होता है। इस बड़े वित्तीय निवेश के लिए और भी समय की आवश्यकता होती है। यदि आप इतना अधिक धन व्यय करते हैं, तो खिलाड़ियों के समूह को भी अच्छा होना आवश्यक है।
जब यह निवेश कई बच्चों पर किया जाता है तो घर में एक बड़ा परिवर्तन आता है। अब युवा खेलों का आकर्षण बहुत अधिक हो जाता है, तो शेष सब गतिविधियाँ व उत्तरदायित्व पीछे छूट जाते हैं। गम्भीर रोकथाम उपाय के बिना यह बच्चों को घर का केंद्र बना देता है और परिवार के लिए एक अस्वस्थ तथा बिना बाइबल आधारित ढाँचा तैयार करता है। अधिकाँश यात्रा-प्रतियोगिताएँ सप्ताह के अन्त में होने के कारण, न केवल खिलाड़ी वरन् माता-पिता भी कलीसिया की सहभागिता से दूर हो जाते हैं। प्रत्येक रविवार परमेश्वर के लोगों के साथ संगति करने के विपरीत मैदान या व्यायामशाला में ही बीत जाता है। मैंने कई अच्छे और विश्वासयोग्य माता-पिता को इस संगति से दूर रहने के कारण निराश होते हुए देखा है, और बहुत से लोगों को यह कहते हुए सुना है कि यदि उन्हें फिर से अवसर मिलता तो वे बहुत कम खेल यात्रा करते।
यात्रा-खेल के सन्दर्भ में अन्तिम चेतावनी वास्तव में प्रदर्शन से जुड़ी हुई होती है। भले ही खेल में सफलता ही एकमात्र लक्ष्य क्यों न हो, परन्तु मैं माता-पिता को यात्रा-खेलों से होने वाले वास्तविक लाभ के प्रति सावधान करना चाहता हूँ। कॉलेज प्रशिक्षकों के अनुभव और उनकी साक्षी ने मुझे यह समझ दी है कि वर्षों तक खेल यात्रा करने से वास्तव में प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। जब एक ही खेल को लम्बे समय तक खेला जाता है, तो चोट लगने की सम्भावना बढ़ जाती है, विशेषकर उस समय जब बच्चों का विकास हो रहा होता है। गेंदबाज का हाथ एक सीमित और कमजोर साधन होता है, जिसके अत्यधिक उपयोग करने से थकान होती है और गम्भीर चोटें भी लग सकती हैं, इसलिए कई तो हाई स्कूल पूरा करने से पहले ही थक जाते हैं। यह केवल शारीरिक थकान नहीं होती है वरन् प्रतिस्पर्धात्मक थकान भी होती है। खेलों की अत्यधिक संख्या और यात्रा, खेलों के साथ ले जाने वाले बहुत अधिक सामान के कारण हाई स्कूल स्तर के खिलाड़ियों का उत्साह कम हो जाता है साथ ही खिलाड़ियों की प्रतिस्पर्धात्मक भावना भी कम हो जाती है। इसमें खेल यात्राओं का ढँग भी सम्मिलित होता है, जो खिलाड़ियों या अभिभावकों को अपनी भूमिका से या खेलने के समय से सन्तुष्ट नहीं होते हैं, और अपने स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा करने के स्थान पर समूह बदलने के लिए प्रोत्साहित करता है। यात्रा से सम्बन्धित खेल निश्चित रूप से अतिरिक्त अभ्यास और अनुभव प्रदान करते हैं, परन्तु ऐसा अनुभव बिना किसी कीमत चुकाए नहीं मिलता है।
स्पष्ट रूप से कहें तो, यात्रा करने वाले समूह में खेलने के सकारात्मक पहलू होते हैं, परन्तु इसमें सम्मिलित होने से पहले विश्वासी जन को लागत का सावधानीपूर्वक मूल्याँकन कर लेना चाहिए। प्रत्येक परिवार को सामान्य रूप से खेलों में भाग लेने के विषय में अपने निर्णय स्वयं लेने चाहिए, और यात्रा-खेल भी इससे अछूता नहीं है।
छात्रवृत्ति की खोज
यात्रा खेलों के विषय में सामान्य धारणा यह है कि अन्त में मिलने वाला लाभ सार्थक होगा। फिर भी मैं हाई स्कूल के अन्त में देखी गई निराशा के स्तर को नहीं बता सकता हूँ। मैंने हाई स्कूल के अन्त में ऐसा देखा है जो न तो व्यक्तिगत प्रदर्शन खराब होने के कारण और न ही समूह की विफलता के कारण हुआ, परन्तु विद्यालयों से ध्यान या छात्रवृत्ति के अवसरों की कमी के कारण ऐसा हुआ है। भर्ती प्रक्रिया में अपेक्षाओं का पूरा न होने के कारण अभिभावक और छात्र दोनों ही निराश और लज्जित होते हैं। इस समस्या का मुख्य भाग पहचान की अवधारणा से जुड़ा हुआ होता है। माता-पिता को अपने बेटे या बेटी की पहचान को आधार नहीं बनाना चाहिए, और खिलाड़ियों को भी अपनी खेल सम्बन्धी पहचान को यह सोचकर नहीं देखना चाहिए कि वे विद्यालय में खेल खेलने के लिए कोई प्रस्ताव या छात्रवृत्ति प्राप्त करेंगे।
छात्रवृत्तियाँ बहुत कम मिलती हैं, और आपका युवा खिलाड़ी सम्भवतः उतना अच्छा नहीं है। मेरे कहने का अर्थ कुछ और नहीं हैं परन्तु मैं ऐसा गणितीय रूप से कह रहा हूँ। इस मार्गदर्शिका को पढ़ने वाले अधिकाँश लोग महाविद्यालय स्तर के खिलाड़ी नहीं हैं और न ही उनके बच्चे महाविद्यालय स्तर के खिलाड़ी हैं, और यह बिल्कुल ठीक है। उन्हें छोटी-छोटी खेल प्रतियोगिताओं, जैसे माध्यमिक स्कूल या हाई स्कूल के खेलों का आनन्द लेने दें बिना इस बोझ के कि उन्हें अगले स्तर तक पहुँचना है।
जिन को कॉलेज में प्रवेश के प्रस्ताव मिलते हैं, वे सम्भवतः ही कभी उस स्कूल या क्षेत्रीय स्तर तक पहुँच पाते हैं, जिसकी वे अपेक्षा करते हैं, या जिस राशि की उम्मीद करते हैं। अधिकाँश छात्रवृत्तियाँ आंशिक होती हैं और बहुत कम खिलाड़ी प्रथम श्रेणी के खेल स्तर तक पहुँच पाते हैं, जहाँ छात्रवृत्ति उपलब्ध होती है।3 यद्यपि किसी के खेल के भविष्य का मूल्याँकन अगले स्तर पर खेलने के आधार पर मूर्खता पूर्वक किया जाता है, तो खिलाड़ी और माता-पिता उस स्कूल को स्वीकार कर लेते हैं जिसे वे खेलों के बिना पहले कभी न चुनते। मैंने नियमित रूप से खिलाड़ियों को ऐसे कॉलेजों में जाते देखा है जिनके विषय में उन्होंने भर्ती होने से पहले कभी नहीं सुना था या ऐसे स्कूलों में जाते देखा है जहाँ बहुत कम छात्र थे और हाई स्कूल की तुलना में सुविधाएँ भी कम उपलब्ध थीं।
खेलों में भाग लेने और पढ़ने के लिए किसी छोटे स्कूल में जाने में कोई बुराई नहीं है। परन्तु केवल इस बात से सावधान रहें कि कहीं प्रेरणा किसी अनकहे आकलन या विद्यालय के खेलों में गलत मूल्य को मान्यता देने की न हो। मैं जानता हूँ कि यह कहने का प्रलोभन होता है कि, “मेरा लड़का अलग है,” और हो सकता है कि वह अलग हो भी, परन्तु हमें कम से कम यह स्वीकार करना चाहिए कि हम सभी के मन में स्वयं को या अपने बच्चों को दूसरों से अच्छा समझने का प्रबल प्रलोभन होता है।
मुझे आज भी स्मरण है कि मुझे एक भर्ती करने वाले व्यक्ति से बात करने के लिए कक्षा से बाहर बुलाया गया था। परन्तु स्मरण रखिए, मैं केवल एक औसत से ऊपर का हाई स्कूल स्तर का फुटबॉल खिलाड़ी था, इससे अधिक कुछ विशेष नहीं था। जब मैं कार्यालय की ओर गया तो मुझे उम्मीद थी कि अलाबामा के प्रशिक्षण देने वाले कर्मचारियों से भेंट होगी, जबकि वास्तविकता यह है कि वहाँ मर्चेंट मरीन विद्यालय का अस्सी वर्ष का वृद्ध स्थानीय पहरेदार बैठा हुआ था। मैं यह बात मर्चेंट मरीन्स या उनके फ़ुटबॉल कार्यकर्मों को नीचा दिखाने के लिए नहीं कह रहा हूँ — वास्तव में वह एक बहुत ही अच्छा स्कूल है और साथ ही उच्च कोटि की फ़ुटबॉल प्रतियोगिता भी आयोजित करवाता है — मैं यह इसलिए कह रहा हूँ ताकि उस भ्रम को उजागर कर सकूँ जो मेरे मन में था, और किसी न किसी स्तर पर अधिकतर छात्र-खिलाड़ियों और उनके माता-पिता के मन में भी रहता है।
मसीहियों को उत्तम और अधिक सच्चाई से परिपूर्ण दृष्टिकोण रखना चाहिए तथा अपने खेल-सम्बन्धी भविष्य के लिए भी एक अच्छे और प्रभुता संपन्न परमेश्वर पर भरोसा करने में योग्य होना चाहिए। कठिन परिश्रम करो और देखो कि प्रभु के पास आपके लिए क्या है, साथ ही सन्तुष्ट भी रहो। मुझ पर भरोसा करो, यदि आप पहरेदार की चिन्ता नहीं करोगे तो टी-बॉल आपके लिए और आपके छोटे बच्चों के लिए बहुतअधिक मनोरंजक हो जाएगा।
अस्पष्ट लिंग
बाइबल स्पष्ट रूप से बताती है कि पुरुष और स्त्री अलग-अलग हैं। यद्यपि दोनों परमेश्वर के स्वरूप में बनाए गए हैं, फिर भी पुरुष और स्त्री की रचना उसने अलग-अलग की है। पिछले कुछ वर्षों में, पारलैंगिक की स्वीकृति के लिए सांस्कृतिक दबाव ने खिलाड़ियों के वस्त्र बदलने वाले कक्ष में भी अपना स्थान बना लिया है। जैविक रीति से जन्मे पुरुष अब जैविक रीति से जन्मी महिलाओं के विरुद्ध प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। संस्कृति न केवल लिंग के विषय में परमेश्वर की रचना को अस्वीकार कर रही है, वरन् यह गोपनीयता को भी ख़तरे में डाल रही है, खेल की निष्पक्ष नींव को निर्बल बना रही है, और कुछ खेलों में तो ऐसी संस्कृति महिलाओं को शारीरिक ख़तरे में डाल रही है। इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका में इस विषय पर और अधिक विस्तार से चर्चा करने के लिए न तो समय है और न ही स्थान है; इसलिए इस खतरे पर विश्वासियों को बहुत अधिक ध्यान देना चाहिए।
परन्तु पारर्लैंगिक विषय से अलग भी, पुरुषों और महिलाओं के प्रतिस्पर्धा करने की वास्तविकता खिलाड़ियों में एक रोचक और अधिकतर अनदेखा किया जाने वाला खतरा उत्पन्न करती है। बहुत से लोग जो लिंग के सम्बन्ध में परमेश्वर की रचना में विद्यमान विशेष सुन्दरता और भलाई के लिए दृढ़तापूर्वक संघर्ष करते हैं, वे प्रायः प्रतिस्पर्धा करने के लिए खेलों के प्रति बुलाहट को अनदेखा कर देते हैं। खेल चाहे कोई भी हो, पुरुषों को पुरुषत्व के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होती है और स्त्रियों को भी अपनी स्त्रीत्व को बनाए रखने के लिए संघर्ष करना होता है। कुछ खेल इसे दूसरों की तुलना में अधिक कठिन बना देते हैं, और कुछ विषयों में यह प्रतिबंधित भी हो सकते हैं। चाहे जो कुछ भी हो, परन्तु विश्वासी का दायित्व यह है कि वह न केवल पुरुषों और महिलाओं में परमेश्वर की विशेष रचना को बनाए रखे, वरन् उसका उत्सव भी मनाए।
काल्पनिक खेल
यदि आप व्यावसायिक खेल नहीं खेल सकते है तो क्या होगा? तो आप काल्पनिक खेल खेल सकते हैं! हाँ, बिल्कुल सही है। हमें न केवल वास्तविक खिलाड़ियों और मसीही जीवन पर विचार करना है, वरन् इसकी असाधारण लोकप्रियता के कारण, हमें एक क्षण के लिए उन खेलों पर अनुमान लगाए जाने और देखे जाने पर विचार करना चाहिए: जैसे काल्पनिक फ़ुटबॉल, बास्केटबॉल और बेसबॉल।
पिछले दस वर्षों में काल्पनिक खेलों में तेजी से वृद्धि हुई है, जब कि इसका आरम्भ 1950 के दशक में ही हो गया था। इंटरनेट और स्मार्टफोन के आने और प्रचलन ने काल्पनिक खेलों को हमारे समाज के सबसे बड़े और सबसे तेजी से बढ़ते हुए क्षेत्रों में से एक बना दिया है। इन खेलों में पाँच करोड़ से अधिक प्रतिभागी अब हमारे घरों, कार्यालयों और कलीसियाओं में स्थान बना चुके हैं।
अब, शारीरिक खेलों के विरुद्ध दी गई अनेक चेतावनियाँ काल्पनिक संसार के लिए भी सत्य हैं। हमें अपनी पहचान अपने व्यक्तिगत विकास और रचनात्कम कार्यों में नहीं ढूँढनी चाहिए, वरन् हमें अपनी विभिन्न छोटी-छोटी प्रतियोगिताओं में अपने साथियों पर और उनके प्रभाव पर ध्यान देना चाहिए। परन्तु काल्पनिक खेलों के साथ समय और पैसे का ख़तरा विशेष रूप से चिन्ता का विषय बना रहता है। क्योंकि ऑनलाइन होने के कारण, यह चौबीसों घंटे उपलब्ध रहता है। वास्तविक खेल से पहले अभ्यास, शोध और समूहों के बीच खिलाड़ियों और अन्य सामान का आदान-प्रदान, तथा प्रत्येक खेल को देखने और प्रत्येक सप्ताह सैकड़ों प्रदर्शनों की जाँच करने की इच्छा, एक काल्पनिक प्रतियोगिता के लिए घंटों समय समर्पित करने के द्वार खोल देती है। मसीहियों को अपने समय का पूरा-पूरा उपयोग करने और अपनी समय-सारिणी के प्रति अनुशासित रहने के लिए परिश्रम करना चाहिए।
धन का जोखिम होना भी काल्पनिक खेलों की एक विशेषता है, जिस पर मसीह के अनुयायी को ध्यान देना चाहिए। जबकि कई काल्पनिक खेलों में प्रवेश निःशुल्क होता है और उन पर कोई दाँव नहीं लगाया जाता है, अतः काल्पनिक खेल जुआ जगत की रीढ़ का हिस्सा बन गए हैं। इसमें पैसा लगाकर जल्दी से पैसा कमाने का प्रलोभन लगातार बना रहता है।
खेल जगत में जुआ कोई नया जोखिम नहीं है। 1919 के विश्व सीरीज में षड्यंत्र से लेकर सातवीं और आठवीं शताब्दी ईसा पूर्व के ओलंपिक खेलों तक, जहाँ भी खेल आयोजित हुए है, वहाँ जुआ भी रहा है। परन्तु काल्पनिक खेल के विकास और इंटरनेट के प्रसार के साथ, सट्टेबाजी खेल जगत के हर कोने में फैल गई है और यह चिन्ता जनक दर से बढ़ती ही जा रही है। मसीहियों को शीघ्र धन कमाने के प्रलोभन को जानकर और उससे बचकर (नीतिवचन 13:11) बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए तथा जुआ खेलने की लत को पहचानना चाहिए, जिसने बहुत से परिवारों को दिवालिया बना दिया है।
इन चेतावनियों के साथ, मसीहियों को यह भी पहचानना चाहिए कि खेलों के कुछ मूल्य काल्पनिक खेलों में भी दिखाई देते हैं। इससे कलीसिया के विभिन्न समुदायों और समूहों के बीच एक सामुदायिक और भाईचारा उत्पन्न होता है। यह सभी आयु के लोगों के लिए बातचीत आरम्भ करने और सम्बन्ध स्थापित करने के लिए एक स्वाभाविक प्रोत्साहन है। हमारी कलीसिया ने पिछले कुछ वर्षों में एक छोटी खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया था जिसमें किशोरावस्था से लेकर सत्तर वर्ष तक के लोग सम्मिलित हुए थे। हाई स्कूल स्तर का एक छोटा किशोर एक सेवानिवृत्त व्यक्ति जो खिलाड़ियों का चुनाव करता है उसके साथ हँसता है, और यह योजना प्रस्ताव में उनके रणनीतिक निर्णय ऐसे उदाहरण प्रस्तुत करेंगे जो भविष्य के वार्तालापों, खिलाड़ियों के सम्बन्धों और संगठनात्मक संस्कृति को आकार देंगे।
सभी कलीसिया के समुदायों को काल्पनिक फ़ुटबॉल एक सहायक साधन नहीं लगेगा, परन्तु कुछ को लग सकता है। फिर भी, एक मसीही व्यक्ति को खेलों के प्रति जागरूक और सक्रिय रहना चाहिए, चाहे वे काल्पनिक ही क्यों न हों।
कलीसियाई सॉफ्टबॉल
एक अन्तिम बात कलीसिया में होने वाले खेलों पर विचार करना है। मैंने इस खण्ड का शीर्षक कलीसियाई सॉफ्टबॉल रखा है, परन्तु यह बास्केटबॉल, फ्लैग फुटबॉल या यहाँ तक कि किकबॉल (जिसमें हाल ही में हमारी कलीसिया ने भाग लिया) पर भी लागू होगा। जैसा कि हम पहले भी कई बार उल्लेख कर चुके हैं कि, खेल एक साधन है और इसका उपयोग उन्नति करने या विनाश लाने के लिए किया जा सकता है। यदि आपकी कलीसिया का खेल कार्यक्रम केवल छोटे बच्चों या “दिग्गजों” के लिए सप्ताह में एक बार खेलने के लिए जूता पहनने का अवसर देता है, तो सम्भव है कि आप एक बड़े अवसर को खो रहे हैं और वास्तव में यह लम्बे समय में आगे चलकर हानिकारक भी हो सकता है।
कलीसिया के अन्तर्गत खेले जाने वाले खेलों की छवि शीघ्र गुस्सा होने, उलटी-सीधी बातें करने, तथा कुल मिलाकर भक्ति के अभाव में हो सकती है। परिणामस्वरूप, कई कलीसियाओं ने खेलों को वर्जित माना है। परन्तु जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है कि, खेलकूद का एक लाभ यह है कि यह पापी स्वभाव को ऐसे तरीक़ों से प्रकट करता है, जिसे जीवन के अन्य क्षेत्र नहीं करते हैं। जब प्रतिस्पर्धा आरम्भ होती है तो घमण्ड, आत्म-केंद्रितता और आत्म-नियंत्रण दोनों की कमी के दबाव में आ जाता है। इस अवसर को ठुकराने के विपरीत, मैं सुझाव दूँगा कि कलीसिया सुसमाचार प्रचार और शिष्यत्व दोनों में ऐसे वातावरण का उपयोग करे।
नीचे कुछ सुझाव दिए गए हैं ताकि कलीसिया के खेलकूद समूह से अधिक से अधिक लाभ उठाया जा सके:
- एक अधिक परिपक्व और अनुभवी विश्वासी व्यक्ति को समूह की देखरेख करनी चाहिए—चाहे वह प्रशिक्षण के द्वारा हो
या केवल एक पर्यवेक्षक और मार्गदर्शक के रूप में की गई सेवा के द्वारा हो।
- समस्याओं के विषय में बातचीत करें। और इस बात को समझें कि प्रतिस्पर्धा उन कमजोरियों को उजागर करती है जिन पर हमें कार्य करने की आवश्यकता है और उन क्षेत्रों में आगे बढ़ना समूह के लक्ष्य का हिस्सा बनाएँ।
- कलीसिया के शेष सदस्यों को भी समूह का उत्साह बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करें। इससे न केवल समूह का उत्साह बढ़ेगा, वरन् क्रोध और चिड़चिड़ापन को भी कम करने में सहायता मिलेगी।
- यदि समूह में अविश्वासी खिलाड़ी हैं, तो विश्वासी खिलाड़ियों के साथ आगे की बातचीत करने की व्यवस्था करें ताकि उन्हें भी सुसमाचार सुनाया जा सके।
निष्कर्ष
फिर से आरम्भ की ओर चलते हैं। क्या मसीहियों के जीवन में खेलों का कोई स्थान है? हाँ, बिल्कुल है। यह व्यायाम करने और स्वास्थ्य सुधारने के लिए एक अच्छा वातावरण प्रदान करता है, यह चरित्र के विकास और वृद्धि को प्रोत्साहित करता है, और साथ ही यह विश्वासी को विश्वासी और अविश्वासी दोनों के साथ सम्बन्ध स्थापित करने के अवसर प्रदान करता है। इनमें से कई लाभ उस समाज में कहीं और से प्राप्त करना कठिन हैं जो आराम और सुविधा से भरा हुआ है, इसलिए विश्वासी पुरुष एवं स्त्री को चाहिए कि वह परमेश्वर की महिमा के लिए खेलों को अपने जीवन से जोड़ने के लिए गम्भीरता से विचार करे।
क्या खेलों में भी स्वाभाविक रूप से जोखिम और तीव्र प्रलोभन होते हैं? हाँ, बिल्कुल होते हैं। इसलिए, जीवन के कई क्षेत्रों के समान, विश्वासी को खेलकूद के क्षेत्र में भी समझदारी से चलना और सीखना चाहिए।
अधिकाँश संसाधन जितने अधिक प्रभावी होते हैं, उनका उपयोग करते समय उतनी ही अधिक सावधानी रखनी पड़ती है। और खेल भी इससे अछूते नहीं हैं। एक तेज चाकू या तेज धारदार आरी के समान, खेल मसीहियों के लिए अच्छा हो सकता है, परन्तु यदि हम खेलों को लापरवाही से खेलेंगे, तो लोगों का घायल होना निश्चित है और बिल्कुल भी लाभ नहीं मिलेगा। इसलिए हर दृष्टि से खेल के मैदान पर विचार करें, और परमेश्वर से पूछें कि वह आपको खेल जगत में किस प्रकार से सम्मिलित करना चाहता है, और जब आप खेलें, तो परमेश्वर की महिमा के लिए खेलें।
अन्तिम टिप्पणियाँ
- https://www.si.com/olympics/2022/04/27/caeleb-dressel-faced- मेंटल-हेल्थ-स्ट्रगल्स-बिफोर-टोक्यो-गेम्स
- शोध से पता चलता है कि यात्रा-खेलों का व्यवसाय 2029 तक सात हज़ार दो सौ करोड़ रुपए तक पहुँच सकता है। (https://www.wusa9.com/article/news/investigations/youth-baseball- lake-point-sports-big-buisness-of-youth-sports-snyder-bucks-prime- time-aces/65-8c190607-3e18-4da5-a1c8-b52be3853cdc)
- एन.सी.ए.ए के नियमों के अनुसार स्कूलों को प्रति वर्ष 11.7 डिवीजन 1 बेसबॉल छात्रवृत्ति के बराबर छात्रवृत्ति दी जा सकती है। अध्यापन शुल्क को सामान्यतः पूरे चालीस खिलाड़ियों के समूह में बाँट दिया जाता है, जिसका अर्थ है कि अधिकाँश डी-1 बेसबॉल खिलाड़ियों को उनका अध्यापन शुल्क का लगभग 30% भुगतान किया जाता है, परन्तु इस राशि को विद्यालय की छात्रवृत्ति से भी पूरा किया जा सकता है। डिवीजन 2 में केवल नौ बेसबॉल छात्रवृत्तियाँ दी जाती हैं। डिवीज़न 3 के स्कूलों को किसी भी प्रकार की खेल छात्रवृत्ति राशि देने की अनुमति नहीं है। आँकड़े बताते हैं कि हाई स्कूल के केवल 7% बेसबॉल खिलाड़ी ही महाविद्यालय बेसबॉल में जाने के योग्य होते हैं।