#30 जब तक मृत्यु हमें अलग न कर दे: पति या पत्नी की मृत्यु के
परिचय: इस कठिन अभियान में आप का स्वागत है
क्योंकि आप ने इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका के शीर्षक को पढ़ लिया है और आप को याद है कि ये शब्द वैवाहिक रीतियों में प्रयोग होते हैं, इसलिये आप जानते हैं कि ये पृष्ठ किस के बारे में हैं।
हो सकता है कि आप अपने साथी की मृत्यु का अनुभव कर चुके हैं। या, क्योंकि वह बीमारी से मरणासन्न है, इसलिये आप उस बड़ी खाई में गिरने की कगार पर हैं। इसलिये, आप यह जाने के लिये आतुर हैं कि आने वाले समयों का सामना किस प्रकार किया जाए, जिससे आप स्थिर रह सकें और अपने प्रिय को आदर दे सकें। क्या मैंने सही कहा? ठीक है। मैं प्रसन्न हूँ कि आप यहाँ पर हैं। आप का स्वागत है।
विवाह के लगभग 45 वर्ष के बाद, मैंने अपनी पत्नी को दफनाया। यदि आप ने ध्यान से सुना होता, तो 14 नवम्बर 2014 के दिन, लगभग दोपहर के समय, ओरलैन्डो के निकट के डॉ. फिलिप्स कब्रिस्तान में, जब उस की शवपेटी को भूमि में उतारा जा रहा था, तब जो आवाज़ आ रही थी, वह माँस के फटने की थी। मेरे माँस के। इससे पहले मैंने कभी ऐसी वेदना अनुभव नहीं की थी।
मैं पैर घसीटते हुए, कुछ सौ गज़ दूर स्थित अपने घर को गया, और वहाँ पर एकत्रित कुछ दर्जन मित्रों का अभिनन्दन किया, जो पहले से ही वहाँ पर उपस्थित थे, और भोजन के कक्ष की मेज़ पर ढेर सारा भोजन रखा हुआ था। उस समय के दुःख को, मैंने अपने परिवार के प्रिय जनों और मित्रों के साथ के वार्तालाप में दबा दिया, अगले कुछ घण्टे धुँधले हैं। मुझे ध्यान आता है कि वे मधुर थे, परन्तु वास्तव में क्या हुआ, मुझे वह बहुत ही कम याद है।
फिर, अगली सुबह, जल्दी ही, सूर्य के पूर्वी क्षितिज से ऊपर उठने से पहले, मैं चलकर फिर से कब्रिस्तान को गया। चल कर जाने से, मेरी टाँगों का जो व्यायाम हुआ, वह अच्छा लगा। जब मैं वहाँ पहुँचा, वहाँ पर फूलों का एक पहाड़ सा बना हुआ था, जो अब मुरझाने और गन्ध देने लगे थे।
“अब मैं क्या करूँगा? मैं क्या करूँगा?” मैंने स्वयं को धीमे से फुसफुसाते हुए सुना।
अगले कुछ मिनट तक, जब आप यह पढ़ रहे हैं, मेरे लिये आदर की बात होगी कि आप इस दबी आवाज़ के वार्तालाप में मेरे साथ जुड़े रहें। उस पल के लिये स्वयं को तैयार करने के लिये, मैंने क्या किया था, और मैं आगे बढ़ने के लिये क्या करूँगा?
ऑडियो मार्गदर्शिका
ऑडियो#30 जब तक मृत्यु हमें अलग न कर दे: पति या पत्नी की मृत्यु के
1 जब तक मृत्यु हमें
अलग न कर दे
हमने अपने विवाह के समय क्या कहा था
“मेरे पीछे-पीछे कहें,” पास्टर बोलता है, “जब तक मृत्यु हमें अलग न कर दे।” वर और वधू इसका पालन करते हैं, और शब्द दोहराए जाते हैं।
वर्षों से, इस विवाह और जीवन साथी की मृत्यु का अनुभवी होने के नाते, समारोह के समय में लोगों के मध्य होने पर मैं मुस्कराने लगता हूँ। रूखेपन से नहीं, बल्कि सच में सहानुभूति के साथ। अधिकांशतः, अपने परिवार और मित्रों के आगे खड़े हुए स्त्री और पुरुष, जवान, जोशीले, और उत्सुक होते हैं। वे स्वास्थ्य के चरम पर होते हैं। मृत्यु उनके विचारों में भी नहीं होती है — और उस समय पर उनके मनों में ऐसी किसी घटना की कल्पना भी करने से अधिक दूर, और कुछ नहीं होगा।
परन्तु, अब जब आप उम्र में, उन नव-विवाहितों से कुछ बड़े हो चुके हैं, सम्भव है कि आपने इसके बारे में कुछ विचार किया होगा, हो सकता है कि अपने साथी के साथ इसके बारे में चर्चा भी की हो। एक दिन, आप का और आप के साथी का देहान्त हो जाएगा।
अज्ञात केवल यही है कि, पहले कौन जाएगा, और कब?
जैसा कि आप जानते हैं, यह वास्तव में होता है। पतियों का देहान्त होता है; पत्नियों का देहान्त होता है। वे अपनी अन्तिम साँस लेते हैं, उनके साथी उनके पास बैठे होते हैं, और उन्हें कुछ पता नहीं होता है कि इसके बाद वे क्या करेंगे।
यकी
दो बेटियों का पिता होने के नाते, कई वर्ष पहले, मेरी बेटियों ने मेरा परिचय इस शब्द “यकी” से करवाया था। इसे तब बोला जा सकता था जब पड़ोसी के कुत्ते को कोई तेज़ रफ्तार कार मार कर चली जाए, या रसोई की चिकनी मेज़ पर कोई चिपचिपी चीज़ लगी हुई पाई जाए। तनाव के समय, लड़के अपने मुँह से आवाज़ें निकालते हैं, या अपने भाई की बाँह पर मारते हैं; लड़कियाँ मूर्खता भरी बातें करती हैं, या इस तरह के शब्द बोलती हैं।
अकाट्य सत्य यही है कि मृत्यु वास्तविक है और आप का तथा आप के साथी का देहान्त होगा। यदि एक शब्द में इसे कहें, यही “यकी” है।
यह मेरी कहानी है। और इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका के द्वारा, मेरे पास अवसर है कि लगभग पैंतालीस वर्ष तक मेरी पत्नी के साथ क्या हुआ, उसका वृतान्त खोल कर प्रस्तुत कर सकूँ। और उसका भी, जो मेरे साथ हुआ। योजना, वेदना की इस सम्भावना का सामना करने की तैयारी के समय में, आप को प्रोत्साहित करने की है।
यहाँ कुछ नया नहीं है
बाइबल की पहली पुस्तक, उत्पत्ति, के पहले दो अध्याय, सब कुछ अच्छा और भला होना दिखाते हैं। कुछ बातों के लिये…बहुत अच्छा। परन्तु जब हम अध्याय तीन पर आते हैं, सब कुछ बदल जाता है। और उत्पत्ति की शेष पुस्तक में हम पाते हैं कि, बुराई — यकी — कैसा होता है। कुछ बातों में, बहुत बुरा। बहुत अधिक यकी।
और आदम तथा हव्वा की अनाज्ञाकारिता के परिणामों में से एक, मृत्यु थी। उस पल तक कोई नहीं मरा था। सब कुछ जीवित था, और जीवित ही रहता। हर प्रकार और आकार के फूल और जानवर, जिराफ और इल्लियों सहित। आरम्भ में लोगों की आयु पूरी होने की कोई अवधि नहीं थी। फिर, उन्होंने परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता की और एक भयानक दण्डाज्ञा घोषित हो गई कि अन्ततः सब कुछ नष्ट हो जाएगा।
“तू मिट्टी तो है और मिट्टी ही में फिर मिल जाएगा” (उत्पत्ति 3:19)।
और परमेश्वर द्वारा बोले गए इस निर्देश का सबसे अधिक गम्भीर भाग है कि शब्द “तू” केवल आदम से ही नहीं कहा गया था। यह उपनाम बहुवचन में है। उसमें हम भी सम्मिलित हैं — आप और मैं। साथ में वे लोग भी जिन से हमने प्रेम किया, जिन लोगों से हम प्रेम करते हैं, और कल जिन लोगों से प्रेम करेंगे, वे सभी उसमें सम्मिलित हैं। और आदम के कारण, मरने की यह प्रक्रिया उसी पल से आरम्भ हो जाती है, जब हम नंगे नवजात के रूप में अपनी पहली साँस खींचते हैं। हमारे जीवन की अवधि की उलटी गिनती वहीं से आरम्भ हो जाती है। उसके बाद, इस गिनती को फिर से सीधा गिनना कर देने का कोई उपाय नहीं है। हम एक ही दिशा में जाने वाले मार्ग पर अग्रसर रहते हैं। और, एक बार फिर, जैसा कि कोई भी आत्म-सम्मान रखने वाली किशोरी कहेगी, यह “यकी” है। यह सच में है।
और अदन की वाटिका के बाद से, सम्पूर्ण बाइबल में, और दर्ज सम्पूर्ण इतिहास में, मृत्यु के बारे में और बहुत कुछ लिखा गया है।
उदाहरण के लिये, वह जन अय्यूब, अपनी हताशा की गहराइयों से इसके सत्य होने की पुष्टि करता है: “मनुष्य जो स्त्री से उत्पन्न होता है, वह थोड़े दिनों का और दु: ख से भरा रहता है। वह फूल के समान खिलता, फिर तोड़ा जाता है; वह छाया की रीति पर ढल जाता, और कहीं ठहरता नहीं” (अय्यूब 14:1-2)।
एक फूल “सदा बना नहीं रहता है।” यह मृत्यु का एक उत्कृष्ठ और पर्याप्त से बढ़कर रूपक है, है न?
दाऊद, अपने लिखे सबसे प्रिय और विनम्र भजन में, जीवन के समाप्त होने को मान कर चलता है। चरवाहे के इस भजन में वह इस बात को “यदि ऐसा हुआ तो” या “सम्भवतः” के साथ आरम्भ नहीं करता है, बल्कि शब्द “चाहे” के साथ करता है। यह ऐसा है मानो इस बारे में कोई विकल्प नहीं है — क्योंकि नहीं है।
“चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में होकर चलूँ…” (भजन 23:4)
इसलिये, अतीत में अदन की वाटिका में आदम और हव्वा की मूर्खता, अवज्ञा, अदूरदर्शिता, और उसके परिणाम के बाद से, क्योंकि मृत्यु निश्चित है, जैसा मैंने कहा, बाइबल में परुषों और स्त्रियों की मृत्यु की कहानियाँ मिलती हैं। इन वृत्तान्तों से आप और मैं कुछ महत्वपूर्ण बातें सीख सकते हैं। मेरे सबसे पसन्दीदा उदाहरणों में से एक यह है।
लोगों, चारों ओर एकत्रित हो जाओ
याकूब — जो इस्राएल भी कहलाता है — बहुत बूढ़ा हो गया था, अपने जीवन की समापन रेखा के निकट पहुँचने वाला था। उसके जीवन की पूरी कहानी, हॉलीवुड की फिल्म की कहानी के समान है, उससे ज़रा भी कम नहीं है। अब उसे दिखाई नहीं देता था, उस दुर्बल हो चुके कुलपिता ने अपने पुत्र, यूसुफ को, और अपने दोनों पोतों एप्रैम और मनश्शे को बुलवाया। याकूब ने उन्हें अपनी गोदी में लिया और बोला। यूसुफ ने अपने मरने वाले पिता के सामने दण्डवत् किया। कितना मार्मिक दृश्य था।
तब याकूब ने यूसुफ को आशीष दी और कहा, “परमेश्वर जिसके सम्मुख मेरे बापदादे अब्राहम और इसहाक चले, वही परमेश्वर मेरे जन्म से लेकर आज के दिन तक मेरा चरवाहा बना है; और वही दूत मुझे सारी बुराई से छुड़ाता आया है, वही अब इन लड़कों को आशीष दे; और ये मेरे और मेरे बापदादे अब्राहम और इसहाक के कहलाएँ; और पृथ्वी में बहुतायत से बढ़ें” (उत्पत्ति 48:15-16)।
इसके बाद याकूब ने अपने बारह पुत्रों को बुलाया, और कौन जानता है कि उनके साथ और कौन वहाँ आ गया होगा? उसका उद्देश्य था कि वह उनके साथ भी वही करे जो अभी उसने यूसुफ के, और यूसुफ के पुत्रों के साथ किया था, अर्थात् उन्हें निर्देश और आशीर्वाद दे।
“याक़ूब जब अपने पुत्रों को यह आज्ञा दे चुका, तब अपने पाँव खाट पर समेट प्राण छोड़े, और अपने लोगों में जा मिला” (उत्पत्ति 49:33)।
यद्यपि ये शब्द हजारों वर्ष पहले लिखे गए थे, परन्तु जब आप और मैं इन पर गहराई से विचार करते हैं, ये अभी भी बहुत प्रभावी हैं। याकूब, चाहे वह बहुत बूढ़ा था, फिर भी बहुत जीवन्त है, इतना कि अपने बच्चों से बोल सके। फिर वह लेटता है, अपने पाँव समेट कर गेंद के समान हो जाता है, और उसका देहान्त हो जाता है।
आप के बाद — पहले कौन जाएगा?
इन शब्दों को पढ़ते समय, अन्ततः आप की मृत्यु होने का तथ्य, बहुत विचलित करने वाला हो सकता है। मैं यह समझता हूँ। सच में, सम्भवतः मेरी अपनी मृत्यु के पूर्वाभास के कारण, मैं जो कुछ भी करता हूँ, उसमें मैं सावधानी का भाव बनाए रखता हूँ। आप भिन्न हो सकते हैं, सतर्क रहने का ध्यान किये बिना, स्वयं को जीवन को जीने में लगा देते होंगे। स्काई-डाइविंग करना, पहाड़ों पर चढ़ना, तेज गति वाली मोटरसाइकल चलाना आप के संसार के अभिन्न अंग हो सकते हैं। अच्छा है। परन्तु मेरे लिये नहीं।
मुझ में आनुवँशिक तौर से जोखिम और मृत्यु के प्रति चिन्ता है, जो मुझे ऊँचाई से अत्याधिक डर लगने के कारण है। और, यद्यपि मैं जानता हूँ कि संसार में मृत्यु का सबसे प्रमुख कारण हृदय रोग हैं, परन्तु गिरना उससे कुछ अधिक पीछे नहीं है। यह मेरे जैसे, पचास से अधिक आयु वाले लोगों के लिये विशेषकर सत्य है। मुझे यह तथ्य विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेब साइट से मिला है। और यदि आप इस बात के लिए स्पष्ट नहीं हैं कि “गिर जाने” का अर्थ क्या होता है, तो अमेरिका की सरकारी नौकरशाही ने समय निकाल कर इसे एक वाक्य में बताया है, जो बहुत सहायक है:1 “गिर जाने की परिभाषा, एक ऐसी घटना घटित होना है जिस के कारण व्यक्ति अनायास ही भूमि या फर्श या अन्य किसी निचले स्तर पर आ टिकता है।”2
मैं ठीक इसी कारण से ऊँचाइयों से डरता हूँ। यह गिरने की सम्भावना — और उस “अनायास ही टिक जाने”3 से होने वाली मृत्यु के कारण है — जो, यदि मैं एक बारह फुट की सीढ़ी के सिरे पर होने, या एक गहरी खाई के किनारे पतली सी पगडंडी पर चलने के बारे में विचार भी करूँ, तो भी मेरे पेट में एक खोखली गाँठ सी उत्पन्न कर देती है। यदि मुझे कभी किसी ऊँचे पुल पर गाड़ी चलानी पड़ जाए, तो मैं अन्दर वाली सड़क पर आ जाता हूँ। आप कभी भी अत्याधिक सावधान तो नहीं हो सकते हैं, है न?
यदि आप एक मनोचिकित्सक हैं, या यदि आपने कॉलेज में मनोविज्ञान 101 पढ़ा है (और स्वयं को योग्य परामर्श देने वाला समझते हैं), तो सम्भव है कि आप मेरे डर के लिये मुझे परामर्श देने के बारे में सोच रहे होंगे। मेरी कल्पना एक ऐसे कमरे में आने के बारे में है जो मुझे पता चले बिना ही, मेरे मित्रों से भरा हुआ है, और वे सभी वहाँ इसी उद्देश्य से एकत्रित हुए हैं कि ऊँचाइयों के मेरे डर का सामना करने में, और सम्भवतः उस पर विजयी होने में मेरी सहायता करें। कमरे के मध्य में 8-फुट की एक सीढ़ी है।
प्रवक्ता मुझे बताता है कि इस हस्तक्षेप को करने का उद्देश्य ऊँचाइयों के मेरे डर का सामना करने में, और सम्भवतः उस पर विजयी होने में मेरी सहायता करना है। फिर वह मुझ से कहता है कि मैं सीढ़ी की अन्तिम से एक नीची वाले पायदान तक चढ़ूँ (वहाँ ऊपर एक चेपी लगी हुई है जो सबसे ऊपर के पायदान पर नही चढ़ने के लिये सचेत करती है।), जब कि मेरे मित्र मुझे देख, और प्रोत्साहित कर रहे हैं।
मूर्खतापूर्ण परिदृश्य है, है न?
क्योंकि, इतनी सारी घटनाओं में, गिरने का अर्थ मृत्यु होता है, इसलिये, यदि ऊँचाइयों को लेकर मेरी चिन्ता की बजाए, मुझे अक्षम कर देने वाला डर, मृत्यु हो, तो? क्या हो यदि मृत्यु का विचार भी मुझे पागल के समान कर दे? इसमें अचम्भे की कोई बात नहीं है, जिस प्रकार एक्रोफोबिया एक शब्द में ऊँचाई के डर को परिभाषित करता है, मृत्यु के इस डर का भी नाम है: थानैटोफोबिया।
सम्भवतः अगले कुछ पृष्ठ इस डर के बारे में कुछ सहायता करेंगे।
चर्चा और मनन:
- मृत्यु के बारे में अपने विचारों का वर्णन आप किन शब्दों में करेंगे? क्या कभी आप इस पर अधिक विचार करते भी हैं?
- इब्रानियों 2:14-16 पढ़िये। मसीह के कार्य को, मृत्यु के बारे में हमारे विचारों और भावनाओं को किस प्रकार से प्रभावित करना चाहिये?
2 मृत्यु निश्चित और अन्तिम है
हाँ, उसका देहान्त हो गया है
वह पहली बार था, जब मैं एक मृत देह को देखा था।
मैं केवल दस या बारह वर्ष का था। मेरा परिवार इन्डयाना प्रान्त की विनोना झील पर, अपनी सालाना यात्रा के लिये गया हुआ था, जहाँ पर मेरे पिता यूथ फॉर क्राइस्ट के सालाना सम्मेलन का एक भाग थे। अपने अधिकाँश वयस्क जीवन में, वे, इस विशिष्ट सेवकाई में एक प्रबंधक रहे थे।
उत्तरी मध्य इन्डयाना प्रान्त में स्थित उस छोटे से नगर में एक विश्व-विख्यात सम्मेलन केन्द्र था — और हम इसीलिये वहाँ पर थे — और एक झील भी थी। मैंने यहीं पर तैरना सीखा था, परन्तु स्वेच्छा से नहीं।
मैं उस लम्बे से घाट पर खड़ा था, जो किनारे से लेकर पानी की सतह पर अन्दर की ओर दूर तक गया था, और मेरे सबसे बड़े भाई ने निर्णय लिया कि मुझे तैरना सिखाने का यही सबसे अच्छा समय है। ध्यान कीजिये, मैं यह नहीं कहा कि मुझे किस तरह से तैरना है, वह सिखाने का। उसने बस मुझे पानी में धक्का दे दिया, और वहाँ पानी की गहराई मेरे सिर से काफी ऊपर की थी, उसका मानना था कि उस समय अत्याधिक डर लगने के कारण, जो कुछ मुझे सीखना चाहिये, मैं तुरन्त ही सीख जाउँगा। धन्यवाद की बात है कि — मेरे बच्चों, नातियों, और भावी पीढ़ियों के लिये — कि वह सही था। उस घटना के धोखे, और उसके बाद के पानी में गोते खाने, पानी के मेरे अन्दर जाने, और मेरे खाँसने के साथ बाहर आने के कारण मैं तैर कर सतह पर, और फिर किनारे पर पहुँच गया।
लगभग उसी समय की बात है कि झील पर मेरे उस दिन में, एक विवाहित छात्र की मृत्यु को देखना भी सम्मिलित था। वह बेथेल थियोलौजिकल सेमीनरी में पढ़ने के लिये आया हुआ था। और यह पृथ्वी पर उसका अन्तिम दिन था। उसके बारे में मुझे इतना याद है कि जहाँ मैंने तैरना सीखा था, उसके सामने के दूसरे छोर पर, घाट पर खड़ी उसकी पत्नी सहायता के लिये चिल्ला रही थी, लोग भाग कर वहाँ पहुँचे, जहाँ वह पानी में से सतह पर नहीं आ सका था, और कुछ मिनटों के बाद उन्होंने उसकी मृत देह को पानी में से खींच कर निकाला। मैं भी भाग कर वहाँ गया कि निकटता से देख सकूँ।
यह उस समय से पहले की घटना है, जब चिकित्सकों के अतिरिक्त किसी ने भी ऐसे समय में की जाने वाली जान बचाने वाली प्रक्रिया के बारे नहीं सुना था, न ही किसी को इसका कोई आभास था। इसलिये, उन्होंने मुँह ऊपर करके उसे घाट पर लेटा दिया और मैं एक सुरक्षित दूरी पर खड़ा, उसकी देह को देखता रहा। उसकी पत्नी बहुत छटपटा रही थी, परन्तु किसी ने भी उस देह पर जीवन रक्षा प्रणाली उपयोग करने का प्रयास नहीं किया। हमने हमारी ओर आते हुए सायरनों की आवाज़ सुनी। सब कुछ देखने के प्रयास में, मैंने उस व्यक्ति की देह के रंग को काला पड़ते हुए देखा, जो कुछ मिनट पहले, झील पर हम अन्य सभी के समान, मित्रों के साथ पानी में मजे ले रहा था। मैं इतना निकट तो था कि देख सकूँ कि सम्भवतः उसकी आँखें खुली हुई थीं। वास्तव में इस अनुभव का यह वाला भाग मुझे लम्बे समय तक याद आता रहा था।
पिछले साठ के लगभग वर्षों में, मैंने अनेकों शवों को देखा है। बहुधा अन्तिम संस्कार की तैयारी के स्थानों में, जहाँ पर शवों को अच्छे से तैयार किया जाता है, बाल सँवारे जाते हैं, उनके धँसे हुए चेहरों को सुधार कर, रंग लगाकर उनके वास्तविक स्वरूप को बेहतर किया जाता है, अच्छे कपड़े पहनाए जाते हैं। फिर भी वे होते तो मृत ही हैं।
हाँ, उसका देहान्त हो गया है
जब मुझ से इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका को लिखने के लिये कहा गया, तो इसके लिये मेरी कोई ऐसी योग्यता नहीं थी जिसके लिये मैंने अध्ययन किया हो। न ही मुझे यह विषय पसन्द था। न मैंने कभी इसके बारे में कोई डींग मारी थी। वास्तव में यह करने के लिये मेरी योग्यता, जैसा मैंने ऊपर कहा है, अपनी पत्नी का देहान्त होते हुए देखना थी।
अक्टूबर 2014 के अन्त के निकट, लगभग 45 वर्ष से मेरी जीवन संगनी का, देहान्त हो गया या जैसा मुझे कहना पसन्द है, उसने “स्वर्ग में कदम रखा।”
मेरी बेटियाँ, मिस्सी और जूली (उस समय उनकी आयु 43 और 40 वर्ष थी), बॉबी के लिए अस्पताल से किराये पर लिये गये पलंग के किनारे, जिसे अक्टूबर 2014 में हमारे घर की बैठक में ला कर बेढंगी तरह से रख दिया गया था, मेरे साथ ही बैठी थीं। विश्वासयोग्यता के साथ देखभाल करने वाली नर्स, एनिड, भी वहीं थी। वह, मेरी पत्नी के देहान्त से लगभग पन्द्रह मिनट पहले ही घर में आई थी। एनिड ने बॉबी का ब्लड-प्रेशर लिया। वह बहुत कम था। फिर उसने कलाई पर अपने अँगूठे को लगाकर उसकी नब्ज़ देखने का प्रयास किया। पहले तो एनिड ने कहा कि वह बहुत धीमी है। फिर उसने कहा कि उसे नब्ज़ नहीं मिल रही थी। अद्भुत रीति से हम जान गये कि यह इसलिये था, क्योंकि बॉबी ने उससे पूछा था।
“तुम्हें नब्ज़ नहीं मिल पा रही है, है न?” बॉबी ने प्रश्न किया।
“नहीं मिस बॉबी। मुझे नहीं मिल रही है।”
फिर बॉबी ने कहा कि अस्पताल के उस पलंग के सिरहाने को नीचे कर दे, जिससे कि वह पूरा सपाट हो जाये। फिर उसने मेरी ओर करवट ली, दोनों हाथ बढ़ाकर मेरी कमीज को पकड़ा, मेरे चेहरे को अपने चेहरे से कुछ इन्च की दूरी पर लाई, और कहा, “मैं तुम से बहुत प्यार करती हूँ,” उतनी ही स्पष्टता से, जितना उसने 1967 में कहा था, जब हमें एक-दूसरे से प्रेम हुआ था। उसने लम्बी साँस ली और उसका देहान्त हो गया।
“क्या उनका देहान्त हो गया?” मिस्सी ने घबराए हुए नहीं, दृढ़ स्वर में पूछा।
“हाँ,” एनिड ने बराबर से उत्तर दिया।
मैंने बॉबी के चेहरे की ओर हाथ बढ़ाया और धीरे से उसकी आँखें बन्द कर दीं, क्योंकि विनोना झील में डूबने वाले उस व्यक्ति के समान, वह भी अपनी आँखें बन्द नहीं करने पाई थी।
फिर मैं कुछ मिनट तक अस्पताल के उस बिस्तर के पास बैठा रहा, और बॉबी की देह के रंग को काला पड़ते हुआ देखता रहा। फिर वह छूने में ठण्डी होने लगी। फिर ठण्डी पड़ गई।
मेरे द्वारा उन्हें बुलाने के लिए कहे जाने पर, अन्तिम संस्कार की तैयारी के स्थान से दो जन शव को ले जाने वाले थैले और पहिये वाले स्ट्रेचर को लिये हुए आए। मैं और मेरी बेटियाँ, हम घर की बैठक से बाहर आ गए और उन लोगों ने मेरी पत्नी की देह को अस्पताल के पलंग से उठाकर थैले में रखा और उसे लगभग ऊपर तक बन्द कर दिया। उन्होंने उसे गाड़ी पर रखा और हमें यह बताने के लिये बुलाया कि वे जाने के लिए तैयार थे। कभी उत्साही रहने वाली मेरी पत्नी, और हम, उनके साथ हमारे घर के आँगन में आ गये। उन्होंने केवल बॉबी के चेहरे को ही खुला छोड़ा हुआ था। वे लोग नम्रता से पीछे को हो गए।
मिस्सी, जूली, और मैंने एक-दूसरे के हाथ थामे। हम, मेरी दिवंगत पत्नी, उनकी दिवंगत माँ, के स्ट्रेचर को घेरे हुए खड़े थे। हमने एक गीत गाया, जिसे हमने…ओह, हजारों बार गाया होगा, जब भी हम में से कोई शहर के बाहर जा रहा होता था, कॉलेज वापस जा रहा होता था, या हमारे घर पर आयोजित कोई पार्टी समाप्त हो रही होती थी। बॉबी ने यह गीत, मेरीलैन्ड में किसी स्थान पर स्थित रिवर घाटी रैंच में तब सीखा था, जब वह एक छोटी लड़की थी।
शुभ-विदाई, हमारा परमेश्वर तुम्हारा ध्यान रख रहा है।
शुभ-विदाई, उसकी दया तुम्हारे आगे जा रही है।
शुभ-विदाई, हम तुम्हारे लिये प्रार्थना करते रहेंगे।
इसलिये, शुभ-विदाई, और परमेश्वर तुम्हें आशीष दे।4
जब हम गीत गा चुके, मैंने इस स्त्री के जीवन और प्रेम और विश्वास और सुन्दरता के लिये “धन्यवाद” की एक छोटी प्रार्थना की। मैंने उन दो जनों की ओर सिर हिलाया, और उस संकेत पर उन्होंने बॉबी के चेहरे को भी ढाँप दिया, और सामने के द्वार से उसे अपनी गाड़ी में ले गए।
उसके बाद से मैंने यह गीत फिर कभी नहीं गाया। यह बहुत पवित्र है, उसे अब किसी भी अन्य परिस्थिति में दोहराया नहीं जा सकता है।
जब, 1970 में हमारा विवाह हुआ था, तब बॉबी केवल बीस वर्ष की थी, मैं उससे से बहुत अधिक बड़ा, बाईस वर्ष का था। यद्यपि मृत्यु वाला वाक्यांश हमारे विवाह की प्रतिज्ञाओं का एक भाग था, परन्तु हमारे मन-मस्तिष्क में, वह कहीं था ही नहीं।
इसके बाद के साढ़े चार दशकों में बॉबी ने मुझे से कई बार कहा कि “वह पहले मरना चाहती है।” मैं हमेशा आपत्ति करता था। जब जीवन का अधिकाँश समय अभी आप के सामने है, तो मृत्यु के बारे में बात कौन करना चाहता है? मैं तो नहीं चाहता।
परन्तु अब, मैं बॉबी की इच्छा की वास्तविकता का सामना कर रहा था। उसका देहान्त हो गया था। मैं अब एक विधुर था। मिस्सी और जूली अपनी जवानी के शेष समय को, अपनी माँ के बिना आरम्भ कर रहे थे।
बॉबी का अस्पताल जाना
सारे संसार भर में अनेकों लोगों के समान, उसे 64 वर्ष की आयु में कैंसर ने ग्रस्त कर लिया था। यह रोग हमें जिस यात्रा पर लेकर गया, उसका आरम्भ 2012 में, ऑरलैंडो में, जहाँ हम रहते हैं, स्थित एमडी एन्डर्सन के महिलाओं के कैंसर चिकित्सालय में हुआ। जब बॉबी, जूली, और मैं, लिफ्ट से निकल कर दूसरी मंज़िल पर स्थित प्रतीक्षा कक्ष में आए — जो एक शव-गृह के समान शान्त था — वह महिलाओं से भरा हुआ था। कुछ कोई पुस्तक पढ़ रही थीं, या ध्यान से अपने स्मार्टफोन देख रही थीं, या शान्ति से पास में बैठे हुए अपने पतियों से बात कर रही थीं। कुछ अन्य अकेली थीं, कुछ नहीं कर रही थीं। लगभग सभी गँजी थीं। कुछ ने अपने गँजे सिर दुपट्टे, या किसी अन्य कपड़े से ढाँप रखे थे।
काश कि उस दिन मुझे जैसा लगा, मैं शब्दों की सीमा के बिना, उसका वर्णन कर पाता, परन्तु मैं कर भी नहीं सकता हूँ। वह मेरी स्मृति में जैसे दाग़ दिया गया है, जहाँ वह तब तक रहेगा जब तक मेरी बारी नहीं आ जाती है। तो इस तरह, इस दूसरी मंज़िल पर आने के साथ तीस महीने की यात्रा का आरम्भ हुआ, जिसका अन्त अक्टूबर की उस ठण्डी सुबह हुआ, जब हमने वह “शुभ-विदाई” का गीत गाया। बॉबी किसी योद्धा से कम नहीं थी। मैंने भी होने का प्रयास किया, और अधिकाँश समय सफल भी रहा।
मैं अभी यहाँ पर, इस क्षेत्रीय मार्गदर्शिका में यह कहना चाहता हूँ कि अपनी पत्नी के साथ मृत्यु के द्वार से होकर जाने के अनुभव ने, उसे लेकर मेरे डर को लगभग समाप्त कर दिया। इसका अधिकाँश श्रेय बॉबी के उस अद्भुत रवैये को जाता है, जो उसने अपने अंडाशय के कैंसर के चौथे स्तर पर होने का पता चलने के बाद, उसकी मृत्यु के अवश्यम्भावी होने के प्रति दिखाया था।
यद्यपि मैं अभी अपने जीवित होने के लिये बहुत कृतज्ञ हूँ, बॉबी ने मुझे दिखाया कि जिस परमेश्वर पर उसने अपने भले समयों में भरोसा रखा था, उस पर क्रोधित हुए बिना कैसे मर सकते हैं। मेरे, उसके साथ होते हुए भी, उसे जिन शर्मनाक कंपकंपाने से होकर निकलना पड़ा, उसने कभी कोई शिकायत नहीं की।
मैंने लोगों को बताया कि बॉबी ने कभी कोई विरोध नहीं किया, कीमोथेरपी के भयानक प्रभावों, और एक शोध परीक्षण से होकर निकलने पर भी, जिसमें उसे ऐसा लगता था मानों वह ठण्ड से जमकर मर जाएगी, जबकि वह फ्लोरिडा में गर्मी का समय था। सुनने वाले लोगों के चेहरों पर विस्मय के भाव यह प्रकट कर देते थे कि उन्हें लगता था मानो मैं बढ़ा-चढ़ा कर बता रहा हूँ। ऐसा बिल्कुल नहीं था। ज़रा सा भी नहीं। उसने कभी कोई शिकायत नहीं की, ना खिसियाई, तब भी नहीं जब वह शौचालय में, उसके पेट में जो थोड़ा सा पोषण शेष रह गया था, उसे भी उलटी कर रही होती थी। जब वह उलटी कर चुकती, कठिनाई से अपने पैरों पर खड़ी होने पाती, और मुस्कराती। ओह, और उसके साथ वहाँ होने के लिये मेरा धन्यवाद करती।
मेरी पत्नी की मृत्यु के जीवित उदाहरण के कारण ही मैंने निर्णय लिया कि मैं आप के साथ वह बाँटूँगा, जिसे मैं बाँट रहा हूँ। मैं प्रसन्न हूँ कि आप मेरे साथ मृत्यु की इस मार्गदर्शिका के अभियान में जुड़े हैं — आप के जीवन साथी की मृत्यु, और किसी दिन आप की मृत्यु।
अब मेरी बारी है
मैं बॉबी के इस अभियान को एक किनारे से देखते रहने वाला दर्शक ही था, अब कुछ ही छोटे वर्षों में, मुझे अवसर मिला है कि मैं अपने उस प्रशिक्षण को जी कर दिखाऊँ।
जनवरी 2020 में, मैं एक चर्म-रोग विशेषज्ञ के पास गया, कि उसे मेरे दाहिने कान में बन गई “एक महत्वहीन लगने वाली छोटी सी फुंसी” को दिखाऊँ। आप के कान से नीचे लटके हुए उस नरम, गुदगुदे भाग पर हो जाने वाले दाने से अधिक अहानिकारक भला और क्या होगा?
सुन्न कर देने वाली दवा के अद्भुत कार्य लिए धन्यवाद, बिना किसी पीड़ा के उस छोटे से भाग को निकाल दिया गया, और उस माँस के टुकड़े की जाँच करने के लिये शीघ्रता से प्रयोगशाला ले जाया गया। एक सप्ताह के बाद, मैं और नैन्सी दक्षिणी अमेरिका में एक सम्मेलन के लिए जाने की तैयारी कर रहे थे, जिसकी मेज़बानी, वह कर रही थी। मेरे डॉक्टर के पास से, जिसके पास मेरी रिपोर्ट थी, मेरे पास एक फोन आया। वह कूटनीति, बात कहने की व्यावहारिक-कुशलता, या बात को हल्के से कहने से पूर्णतः अनभिज्ञ थी, उसने सीधे से मुद्दे की बात बोल दी। उसके, रोग के बारे में बताने में, बात को नरम करके कहना सम्मिलित नहीं था।
“रॉबर्ट, तुम्हें मेलनोमा नामक कैंसर है।”
एक दम से मेरा दिमाग पीछे, ऑरलैंडो में एमडी एन्डर्सन को चला गया। मैं अपनी बेटी और अपनी दिवंगत पत्नी के शल्य-चिकित्सक के परामर्श कक्ष में बैठा था, मैंने ये शब्द सुने, “तुम्हारी पत्नी को अंडाशयों का कैंसर है, जो चौथे स्तर तक बढ़ चुका है।”
अब, मेरी बारी आ गई थी।
मैं सौभाग्यशाली था कि मेरे लिए इस दौड़ को दौड़ने के लिये एक पथ था…वह जो बॉबी ने तैयार किया था। कैंसर, और उसके साथ एक उदार माप भरकर अनुग्रह।
तो, अब फोन से समाचार आ चुका था। मुझे कैंसर था। नैन्सी ऊपर व्यस्त थी, अपना सूटकेस तैयार कर रही थी, और सम्मेलन के लिये अपने नोट्स और अन्य सामग्री एकत्रित कर रही थी, इसलिये मैंने उसे उस फोन के…और न ही उस समाचार के बारे में, कुछ नहीं बताया।
अगले दिन, हम मेक्सिको के लिये अपनी हवाई यात्रा की प्रतीक्षा करते हुए, उस विशाल स्थान डीएफडब्ल्यू पर समय बिता रहे थे।
“कल मेरी डॉक्टर का फोन आया था,” मैंने कहा। नैन्सी मुस्कराई। फिर जड़ हो गई। कल, चर्म-रोग विशेषज्ञ का फोन आया था, मैंने एक लम्बी साँस लेते हुए दोहराया। “मुझे मेलनोमा नामक कैंसर है।”
ध्यान रखिये, यह 2020 की बात है, जब सारा संसार अस्त-व्यस्त होने वाला था।
इस वर्ष तक “महामारी” शब्द बहुत ही कम सुनने में आता था। परन्तु तब, वह प्रत्येक समाचार की सुर्खी बन गया था। इसलिये, मेरे कैंसर ने उस सम्भावित चिन्ता को बढ़ा दिया जो कोविड-19 के कारण मेरे और नैन्सी के लिये थी। अद्भुत बात थी, कि नब्बे दिन के बाद, मेरे कान के निचले एक तिहाई भाग को काट कर निकाल देने के बाद, ताकि कैंसर को रोका जा सके, मुझमें एक अन्य, बिल्कुल असम्बन्धित कैंसर के होने का पता भी चला।
दो महीने के बाद, मैं अभी उस ऑपरेशन से उभर ही रहा था, मैं एक मशीन पर व्यायाम कर रहा था। उस पर मुझे पाँच मिनट भी नहीं हुए थे, कि अचानक ही मेरी साँस टूटने लगी। मैंने ऊँची आवाज में कहा, “मेरे साथ हो क्या रहा है?”
तो, जैसे कोई जन गाड़ी के इंजन की गति बढ़ाता है, कि “कार्बन बाहर धकेला जा सके,” मैंने भी और ज़ोर लगाया। कुछ फर्क नहीं पड़ा। मेरी साँस ठीक से नहीं आ रही थी।
मैंने अपने सामान्य-रोगों के चिकित्सक से बात की, और उसे बताया कि क्या हुआ था। उसकी आज्ञा का पालन करते हुए, मैं जल्दी से अपने स्थानीय अस्पताल गया कि मेरे खून की जाँच की जा सके। दो घण्टे से भी काम समय में, और क्योंकि परीक्षण के परिणाम, ऑनलाइन उपलब्ध थे, मुझे पता चला कि मेरे रक्त की लाल-कोशिकाओं की संख्या बहुत कम हो चुकी थी। फिर से, मेरे डॉक्टर ने मुझे वापस अस्पताल, वास्तव में आपात-चिकित्सा में जाने के लिए कहा। इसके बाद मुझे कुछ स्वस्थ रक्त चढ़ाया गया, रात भर भर्ती रखा गया, और एक के बाद एक डॉक्टर आते चले गए, साथ ही एक और कुछ अधिक गम्भीर समाचार भी आया। मुझे लिम्फोमा था।
अब इस भिन्न प्रकार के कैंसर के साथ, कीमोथेरपी लेने का भी समय आ गया था। छाती में बने एक साधन के द्वारा विष के कई थैले मेरे अन्दर पहुँचाए गए, इस प्रयास में कि वे, मुझे मारे बिना, कैंसर की कोशिकाओं को मार डालें।
परन्तु इस भयावह जंगल से होकर जाने वाला रास्ता, साफ किया जा चुका था। मेरी दिवंगत पत्नी ने मुझे दिखाया था कि यह कैसे करना है। तो, मेरे अपने कैंसर — दो प्रकार के — के साथ मैं यथासम्भव तैयार था। परमेश्वर के अनुग्रह से, मैं दिन-प्रति-दिन, अपनी पत्नी को मृत्यु का सामना करते हुए देखने के द्वारा, एक अविस्मरणीय पाठ को सीख चुका था।
चर्चा और मनन:
- क्या आप ने कभी अपने किसी निकट जन को खोया है? प्रभु ने उस स्थिति में आप को किस तरह से संभाला? आप ने क्या सीखा?
- क्या आप ने किसी अन्य को इस प्रकार की हानि का विश्वासयोग्यता के साथ सामना करते हुए देखा है? आप ने जो देखा, उससे क्या पाठ सीखे?
3 तूफान के लिये तैयार
सत्रह वर्ष तक, चमकती हुई धूप के प्रदेश में रहने के कारण, मैं मौसम की भविष्यद्वाणी से, जिसमें किसी आने वाले तूफान को दिखाने के लिये एक घूमता हुआ चिन्ह होता है, बहुत परिचित था। यदि आप उत्तरी प्रदेशों में रहते हैं, तो इस छोटे से घूमने वाले लाल चिन्ह को कम्प्यूटर पर देखना रोचक हो सकता है। परन्तु यदि आप उसके मार्ग में रहते हों, तब यह बहुत भिन्न होता है। तब यह भयावह होता है।
जब आप के अनमोल जीवन साथी को एक जानलेवा बीमारी के होने का पता चलता है, तब यह उस तूफान के चिन्ह के समान है, जो आपके पड़ोस की ओर बढ़ता चला आ रहा है। यह बहुत गम्भीर है।
क्या मैं आप को बताऊँ कि तूफान बॉबी के मार्ग में रहने का अर्थ क्या होता है? और मेरे अनुभव से आप क्या सीख पाएँगे? यदि मैं और आप कॉफी पीने के हमारे प्रिय स्थान पर, एक प्याला कॉफी पी रहे हों, और आप को बस पता ही चला है कि आपका साथी बहुत बीमार है, तो मेरे अनुभव के आधार पर — तूफान के आने की तैयारी करने के समान, मेरा सुझाव है कि आप को यह करना:
- अपनी यात्रा को प्रार्थना से ढाँप दें।
बॉबी और मेरा विवाह 1970 में हुआ था। हमारी पहली रात को, वाशिंगटन डी.सी. के सुन्दर हे एडम्स होटल में, मैंने उसे, इस प्रार्थना के साथ हृदय के आकार वाला एक गले का हार दिया, कि हमारे जीवन प्रार्थना से सुसज्जित होंगे। बिस्तर के किनारे बैठे हुए, हम दोनों ने निर्णय लिया कि हमारे जीवनों में जब भी कोई भी परेशानी आएगी, हमारा पहला, स्वाभाविक कदम होगा कि उस परिस्थिति में प्रभु को सम्मिलित कर लें। लगभग पैंतालीस वर्ष तक हम यह भली-भाँति करते रहे।
यदि आप विवाहित हैं, और आप दोनों शारीरिक रीति से स्वस्थ भी हैं, आप के लिये मेरा प्रोत्साहन है कि अपने साथी के साथ प्रार्थना करें। इसे, सेवकाई के कार्यों को लेकर की गई एक लम्बी प्रार्थना होने की आवश्यकता नहीं है (यद्यपि यह विषय महत्वपूर्ण है), यह हमारे स्वर्गीय परमेश्वर पिता के प्रति, उसकी भलाइयों, प्रावधानों, और दया के लिये, कृतज्ञता की एक अभिव्यक्ति हो सकती है। और उस उपहार के लिये, जो आपका जीवन साथी है।
आप के साथी की बीमारी का यह समय, निश्चित ही चुनौतीपूर्ण होगा, साहस पूर्वक इसका सामना करने के लिये स्वर्गीय पिता के हस्तक्षेप और सहभागिता की प्रतिज्ञा से बढ़कर और क्या होगा? इससे आप को बहुत सहायता मिलेगी — आप दोनों को ही।
- समाचारों पर ध्यान देना कम कर दें।
यह अभिव्यक्ति कि, “टीवी पर कुछ भी भला नहीं है,” यहाँ पर बिल्कुल सटीक बैठती है। आप के और आप के साथी के विचारों और व्यवहार को, सम्भवतः शब्द “तनावपूर्ण” परिभाषित करेगा। आप दोनों ही ऐसी बातों का सामना कर रहे हैं, जिनका सामना आप ने इससे पहले कभी नहीं किया। और, यदि आप ने इस पर कभी ध्यान न दिया हो तो, आप के फोन, कम्प्यूटर, या टेलीविज़न पर आप को मिलते रहने वाले समाचारों में “भला” कुछ भी नहीं होता है।
आप ने हमेशा इस बात पर गर्व किया है कि आप सभी बातों की जानकारी रखते हैं, परन्तु डॉक्टर द्वारा कही गई बात के कारण, अब इसे एक ओर रख देना अच्छा होगा, बिना उन सभी मुख्य समाचारों की जानकारी प्राप्त किए ही आप को आगे बढ़ने का साहस करना। उससे होने वाली शान्ति के लिये, बहुत सम्भव है कि आप का साथी धन्यवादी हो।
- संगीत को बजाइये।
मैं आप को प्रोत्साहित करना चाहूँगा कि हवा के रिक्त स्थानों को भरने के लिये कुछ ढूँढिये। जैसा कि आप जानते हैं, यू ट्यूब पर आप को अपने साथी की रुचि के अनुसार अद्भुत, निरन्तर बजते रहने वाला संगीत मिल जाएगा। उस “आज रात के सारे बुरे समाचारों” की परेशान करने वाली आवाज़ के स्थान पर अपनी आत्माओं को उभारने वाली आवाज़ों को भर लें। कितना अच्छा विचार है, है न?
यदि आप और आप का साथी एक ही प्रकार का संगीत पसन्द करते हैं, तो जितना अधिक उसे बजा सकते हैं, बजाते रहिए। पिछली रात भी, मैं और मेरी पत्नी, नैन्सी, बात कर रहे थे कि अपनी शाम को कैसे व्यतीत करें। यह शनिवार था। कॉलेज के फुटबॉल के खेल या तो पूरे हो चुके थे, या हमारे लिये महत्वहीन थे। समाचार भी वही पुरानी बातें दोहराते रहना ही थे। इसलिये, मैं अपना लैपटॉप निकाला और यू ट्यूब को आरम्भ कर लिया। अगले कुछ घण्टों तक हम, हमारे मनपसन्द संगीत का आनन्द लेते रहे। यद्यपि, अभी तो, हम दोनों ही अच्छे स्वास्थ्य का आनन्द ले रहे हैं, यह एक मधुर, आत्मा को उभारने वाला, परस्पर सम्बन्धों को सुदृढ़ करने वाला समय था। एक तरह से बैंक में जमा किये गए धन के समान, यदि आप समझते हैं कि मैं क्या कर रहा हूँ।
बॉबी और मैंने भी, उसके जीवन के अन्तिम महीनों में, यही किया था। क्योंकि वह बहुत अच्छा गा लेती थी, और मैं भी उसका साथ दे लेता था, इसलिये हम गाया करते थे। जब हमारे बच्चे और नाती मिलने आते थे, तब हम यह साथ मिलकर करते थे। वास्तव में मेरे पास यहाँ पर, मेरे कम्प्यूटर में एक वीडियो रखा हुआ है, जिसमें बॉबी और हमारी नातिन, ऐब्बी, साथ मिलकर “जीसस पेड इट ऑल अर्थात् यीशु ने सब कुछ चुका दिया” गा रहे हैं।5 और यह उसके देहान्त से कुछ सप्ताह पहले की बात है।
- अपनी कलीसिया का सहारा लें।
परमेश्वर का घर उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना वह अस्पताल या दवाखाना जहाँ आप के साथी का इलाज हो रहा है। वास्तव में, उससे भी बहुत अधिक महत्वपूर्ण। जिस प्रकार कौवे आकर्षित होकर कीड़ों पर आ जाते हैं, उसी प्रकार से विश्वासियों की भी प्रतिक्रिया होती है, जब “प्रार्थनाओं के निवेदन” बताए जाते हैं। वे उन पर टूट पड़ते हैं। इस समय में आप यह बिल्कुल सोचना नहीं चाहते हैं कि किसी को हमारी परवाह है या नहीं। सामान्यतः, मसीही, बहुत निपुण “सहायता देने वाले” होते हैं।
जब कीमो आरम्भ हुई, तब सुन्दर सुनहरे बाल, भूमि पर गिर गये, वह कलीसिया जाने में हिचकिचाने लगी। कलीसिया से पूरे प्रेम और सहारे की अपेक्षा रखते हुए, मैंने उसे प्रोत्साहित किया कि, गंजे सिर और अन्य सभी कुछ के होते हुए भी, मेरे साथ आए। हमारी कलीसिया ने निराश नहीं किया। आप की कलीसिया भी नहीं करेगी।
- अपने दुःख सहते हुए साथी के साथ के लिये कुछ विश्वासयोग्य मित्र ढूँढिये।
यह इससे पहले वाली बात से जुड़ी हुई बात है। अपने साथी के चारों ओर उसी के लिंग के मित्रगण एकत्रित कर दें। यद्यपि पहले उसने “हाँ” कहने में संकोच किया, परन्तु बॉबी ने महिलाओं के बाइबल अध्ययन में पहले तो सम्मिलित होने, और उसके बाद लगभग बीस महिलाओं के बाइबल अध्ययन की अगुवाई करने की स्वीकृति दे दी। यह हम दोनों के लिये जीवन रक्षक बन गई।
ये मित्र सुरक्षा के जाल के समान थे, तब, जब बॉबी परेशानियों में इधर से उधर उछाली जा रही थी। उनके शब्द, उनके कार्ड, उनकी प्रार्थनाएँ सभी अनमोल थे।
यहाँ पर मुझे मित्रों और मिलने आने वालों के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बात बताने दीजिये। कुछ मिलने आने वाले प्रोत्साहित करने वाले होते हैं। अन्य, स्पष्ट कहूँ तो, विनाशकारी होते हैं। आप, आधिकारिक रीति से तालाब के मगरमच्छ हो जाते हैं, और कभी-कभी यह ज़िम्मेदारी मनोहर नहीं होती है।6 एक समय पर, जब बॉबी के जाने का समय निकट था, उसने एक मिलने वाले के बारे में मुझे बताया कि जब भी वह आती है, उसे निराश कर देती है। इसलिये, मैं जितनी भी विनम्रता से कह सकता था, मैंने इस जन से कहा — बॉबी के सामने तो नहीं — कि अब से वह मिलने न आए। यद्यपि यह वार्तालाप, जिसे सम्बोधित किया गया, उसके लिये बहुत कष्ट देने वाला था, परन्तु मुझे प्रत्येक भावनात्मक चिन्ता को एक किनारे करना पड़ा था। मैं द्वारपाल था, और बॉबी की भलाई मेरी प्राथमिकता थी। यही आपकी भी होनी चाहिये।
- अपने निकट के मित्रों और परिवार जनों को स्थिति से अवगत रखिये।
बॉबी के कैंसर के महीनों बाद तक, मैं मित्रों को उसके बारे में ईमेल भेजता रहा।7 इससे संसार भर में हमारे निकट के लोगों को प्रभु की दयालुता, बॉबी के विश्वास तथा गवाही के बारे में पता चलता रहा। उसके देहान्त के एक वर्ष से भी कम समय पहले, मैंने अपने मित्रों को यह लिखा था: “हमारी कलीसिया की महिलाएँ सच में परिवार के समान हैं। वे यीशु के प्रेमी हाथ और पैर बन गई हैं, सूप बनाती हैं, भोजन तैयार करके लाती हैं, और साथ मिलकर प्रार्थना करती हैं, उन्होंने हर मोड़ पर समय और देखभाल के उपहार दिये हैं। हम परमेश्वर के लोगों के प्रेम से बहुत अधिक प्रभावित रहते हैं।”
जब आप स्वयं से जुड़े हुए लोगों को नियमित रीति से अवगत रखने में पहल करते हैं, तो यह बहाली की मनसा रखने वाले उत्सुक लोगों के प्रश्नों की उस बौछार को बहुत कम कर देगा, जो आप के लिए ध्यान बँटाने और खिसिया जाने का कारण हो सकता है।
- किन्तु टीएमआई (बहुत अधिक जानकारी) देने से बचें
जब आप नई जानकारी बता रहे हों, तो यद्यपि जाँचों, स्कैन और इलाज के विस्तृत विवरण देने का प्रलोभन रहता है, परन्तु सावधान रहें। हाँ, सभी को उचित जानकारी देने के लिये, कुछ आधारभूत चिकित्सा जानकारी देनी होती है, परन्तु आप के सम्पर्क के लोगों को सामान्यतः मन खराब कर देने वाले विवरण नहीं चाहिये होते हैं। उन्हें आप के प्रिय जन के बारे में ऐसी जानकारी की आवश्यकता होती है जिससे वे प्रोत्साहित हों। आप को इसके लिए माध्यम होने की महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है; जानकारी की, परेशान कर देने वाली चिकित्सीय जानकारी की भी, ध्यान से रक्षा करें।
- हँसने के कारण ढूँढिये
सच में, इस यात्रा में कुछ भी हास्यास्पद नहीं है, इसलिये आप को हास्य के लिए स्वयं ही कुछ बनाना पड़ेगा। हँसना उन कारणों में से एक था जिनके कारण आरम्भ में आप को प्रेम हुआ था, और यद्यपि अब गम्भीर रहने के कई कारण हैं, कृपया मुस्कराते रहने के यथासम्भव प्रयास करते रहें।8
सम्भव है कि जब बॉबी बीमार थी, उस समय जो हास्यास्पद बातें हमने परस्पर बाँटी थीं, उनमें से कुछ अरुचिकर थीं, परन्तु हम फिर भी हँसा करते थे। उदाहरण के लिये, अस्पताल से आने वाले डॉक्टरों में से एक ने “मरीजों के प्रति शिष्टाचार” को ऐसे त्याग रखा था, मानो उसने कभी उसे जाना ही नहीं था। जब भी वह हमारे घर में आता था, वह बॉबी से कभी “नमस्ते,” या “आज आप का क्या हाल है?” आदि, कुछ भी नहीं बोलता था। उसकी ओर देखे बिना, वह सीधे से प्रश्न पूछता, “एक से दस के माप के अनुसार, तुम्हारे दर्द का माप आज कितना है?”
जब भी वह आता था, उसके घर से जाने के बाद, बॉबी उसे “डॉ. यमदूत” कहकर सम्बोधित करती थी। जब उसने पहली बार यह कहा, तब मुझे कुछ बुरा लगा। फिर वह मज़ाक करने का एक साधन बन गया।
हँसने का एक अन्य अवसर तब आया, जब मैंने उससे कहा, “तुम्हें पता है, तुम्हारे जाने के बाद, मुझे तुम्हारी कमी बहुत खलेगी।” इस कथन का अपेक्षित प्रत्युत्तर निश्चय ही होता है, “धन्यवाद, मुझे भी तुम्हारी कमी खलेगी।” परन्तु उसने यह नहीं कहा। बल्कि, सच में मुझे जो मिला वह थी एक हल्की सी मुस्कान और चुप्पी। यह स्पष्टतः इसलिये था, क्योंकि उसे पता था कि जब वह स्वर्ग में होगी, तब वास्तव में उसे मेरी कमी नहीं खलेगी। और मेरे लिये, यह बिल्कुल सही था। हम दोनों ने ही इस बात का एहसास एक साथ ही किया, और हम दोनों इसे लेकर खूब हँसे।
- परमेश्वर के वचन के साथ अकेले समय बिताएँ। प्रतिदिन।
क्योंकि अब जो मैं कहने जा रहा हूँ वह मेरे लिये बहुत महत्वपूर्ण है, और आशा है कि आप के लिए भी होगा, इसलिये मैं इसके लिये कुछ समय लगाने जा रहा हूँ।
बॉबी बाइबल का बड़ी लगन से अध्ययन करती थी। हर सुबह, तड़के ही, अँधियारे में ही, वह अपनी लाल कुर्सी पर बैठ जाती थी और उसकी खुली हुई बाइबल उसकी गोदी में रखी होती थी। मैं हमेशा ही इसके लिए उसकी सराहना करता था, क्योंकि मैं कई वर्षों से मसीही पुस्तकों का एक लेखक और सन्डे स्कूल का एक शिक्षक था, परन्तु मैं इसके बारे में चुप ही रहता था। वही यह कार्य किया करती थी।
हमने अस्सी के दशक में किसी समय, शिकागो में फर्नीचर के कारोबार में लगे अपने एक मित्र से एक अच्छी सी आराम-कुर्सी खरीदी। उस समय उस पर चटकीला पीला कपड़ा चढ़ा हुआ था (बॉबी को हमेशा ही चटकीले रंग पसन्द थे), उस कुर्सी का पहला स्थान, इलिनॉए प्रांत के जेनेवा नगर में स्थित हमारे घर की बैठक था। बॉबी को उस शान्त स्थान पर बैठकर अपनी बाइबल पढ़ना और प्रार्थना करना बहुत पसन्द था। वह उस कुर्सी को अपनी तड़के प्रातः की “वेदी” कहा करती थी।
जब हमने 2000 में चमकीली धूप वाले प्रदेश में स्थानान्तरित होने का निर्णय लिया, तब वह कुर्सी भी हमारे साथ गई। क्योंकि हमारे घर के अन्दर के रंगों के साथ पीला रंग मेल नहीं खाता था, इसलिये बॉबी ने उस पर नया कपड़ा चढ़वाया। उसका नया रंग लाल था और फिर चौदह अन्य वर्षों तक वह “तड़के अँधियारे” में, प्रतिदिन वहीं पाई जाती थी।
बॉबी अपने आप में एक अच्छी चित्रकार थी, और एक दिन बॉबी
ने अपनी कुर्सी का चित्र बनाने का निर्णय लिया।
मुझे यह पता था क्योंकि प्रति दिन प्रातः मैं ऊपर, अपने अध्ययन कक्ष को जाते हुए उसके निकट से निकलता था। मैं उसे हल्की आवाज़ में, आदत के अनुसार परन्तु सप्रेम “शुभ प्रात:” बोलता, और ऊपर अपने कम्प्यूटर पर जाकर अपना दिन आरम्भ करता था। यद्यपि मैं अपनी पत्नी द्वारा इस मूल्यवान समय को प्रार्थना और मनन में बिताने का पूर्णतः अनुमोदन करता था, परन्तु मेरे पास करने के लिये और भी महत्वपूर्ण कार्य होते थे। जैसे कि, चिट्ठियों को देखना। दिन-भर के लिये समय-सारणी निर्धारित करना। लेखों पर सर-सारी दृष्टि दौड़ाना। ग्राहकों से बातें करना। प्रस्तावों की समीक्षा करना। अनुबंधों पर अन्तिम निर्णय लेना।
घर में होने वाली पार्टियों के दौरान, जब घर मित्रों से भरा होता था, कभी-कभी मैं उस लाल कुर्सी पर बैठ जाया करता था। परन्तु वह बॉबी ही की कुर्सी थी। अवश्य ही इसके बारे में कोई लिखित नियम कहीं नहीं लगाए गए थे, परन्तु बैठने, पढ़ने, और अध्ययन करने के लिये यह उसी का स्थान था। इसलिये, सामान्यतः मैं अन्य कुर्सियों को प्रयोग करता था, और मेरे लिये यह साधारण सी बात थी।
बॉबी के अन्तिम संस्कार और दफनाए जाने के दिन, हमारा घर एक व्यस्त स्थान था। पड़ोसियों ने दोपहर का भोजन बनाने के लिये ज़िम्मेदारी ले ली थी और हमारा घर पड़ोसियों और परिवार के अन्य लोगों से भरा हुआ था। नए और पुराने सम्बन्ध बन रहे थे, सजीव वार्तालाप चल रहे थे। बॉबी बहुत प्रसन्न होती। मैं पहले जिन प्रतिष्ठित लोगों के घरों में जा चुका था, उनकी रीति के अनुसार, मैंने उस लाल कुर्सी के एक हत्थे से दूसरे तक एक फीता लगा दिया था। उस दोपहर, यद्यपि बैठने का स्थान मिलना कठिन था, परन्तु किसी ने भी उस फीते का उल्लंघन नहीं किया। सभी उस लाल कुर्सी के बारे में जानते थे, और बिना किसी से कुछ कहे मेहमानों को उसे प्रयोग न करने का संकेत देना, सही लग रहा था। लोगों ने कृपालु होकर उस कुर्सी को बिल्कुल नहीं छेड़ा, और उनकी टिप्पणी, अनुग्रहपूर्वक, “कृपया यहाँ मत बैठिये” के अलिखित निवेदन का पालन करना मात्र ही थी।
अगली प्रातः, मैं चौंक कर उठा। लगभग पैंतालीस वर्षों में पहली बार, मैं अकेला पुरुष था। एक विधुर। मेरी नई वास्तविकता मुझे घूर रही थी। परन्तु आँखों से नींद को पोंछते हुए, मुझे पता था कि मेरे करने के लिये कुछ कार्य था। एक नया गंतव्य। बॉबी की लाल कुर्सी। बहुत धीरे से, लगभग श्रद्धा के साथ, मैंने उस फीते को, जो कल लोगों के एकत्रित होने के बाद से अभी भी वहीं पर था, उतारा, और बैठ गया। फुसफुसाने से ज़रा सी ऊँची आवाज़ में, मैंने अँगीकार किया, “प्रभु मैं एक आलसी मनुष्य रहा हूँ। मैंने इतने वर्षों से अपनी पत्नी को अपने दिन का आरम्भ इसी स्थान पर आप के साथ समय बिताने के साथ करते हुए देखा है।” उस पल की गम्भीरता और अपने मन के निर्णय का एहसास करते हुए, मैंने एक लम्बी साँस ली।
उस लाल कुर्सी से मैंने ऊँची आवाज़ में कहा, “जब तक आप मुझे साँस देंगे, मेरा निर्णय है कि मैं प्रति दिन का आरम्भ आप के साथ करूँगा।” प्रयोग करते रहने के कारण भली-भाँति घिस चुकी, साल भर में पढ़ लिये जाने के लिये मुद्रित, बॉबी की बाइबल निकट की एक छोटी मेज़ पर रखी हुई थी। मैंने उसे खोला, और उस दिन, नवम्बर 15, के लिये चिन्हित भाग को पढ़ना आरम्भ किया। उस शान्त प्रातः वहाँ पर यह लिखा हुआ था:
यहोवा का नाम
अब से लेकर सर्वदा तक धन्य कहा जाय!
उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक,
यहोवा का नाम स्तुति के योग्य है। (भजन 113:2-3)
इन शब्दों: “उदयाचल से लेकर…” तथा “यहोवा का नाम स्तुति के योग्य है।” की सामर्थ्य की कल्पना कीजिये। उस प्रातः की शान्ति में, मैं प्रभु के उस मधुर टोके जाने, और तब से आज तक प्रति प्रातः यह किये जाने के लिये हमेशा कृतज्ञ रहूँगा। और मेरे लिये तो, चाहे मेरे अध्ययन कक्ष की आरामदेह भूरी कुर्सी हो, या यात्रा के समय किसी होटल के कमरे की कोई साधारण से कुर्सी हो, मैंने प्रातः के समय में परमेश्वर के साथ बिताए गए उस समय में प्रतिदिन जो शान्ति और आनन्द अनुभव किया है, उसका वर्णन नहीं किया जा सकता है।
बहुत सम्भव है कि आप के पास, आप की बैठक में या आप के अध्ययन कक्ष में कोई लाल रंग की कुर्सी न हो। परन्तु आप के पास बैठने का स्थान होगा। कि आप अपनी आँखें और मन को — स्वयं पर से तथा पृथ्वी की माँगों और समस्याओं से ऊपर — स्वर्ग की ओर लगा सकें। और उस प्रेमी परमेश्वर के अद्भुत आलिंगन का अनुभव करें, जो प्रति दिन आप से मिलने के लिये आतुर रहता है। मेरी सच्ची आशा है कि मेरी कहानी आप को प्रोत्साहित करेगी, और आप निर्णय लेंगे कि प्रभु से मिला करेंगे, उसके वचन को पढ़ेंगे, और प्रार्थना करेंगे। यदि आप यह निर्णय लेते हैं, तो आप उस पुरानी लाल कुर्सी को, तथा मेरी दिवंगत पत्नी को धन्यवाद कर सकते हैं, जिसने मुझे दिखाया कि उसके साथ क्या करना है।
- कुछ चुने हुए पद अपने साथी के साथ बाँटें
बॉबी के स्वर्ग में कदम रखने से दो महीने पहले, उसने दो स्त्रियों को बताया कि वह क्या चाहती है कि मैं उसके जाने के बाद करूँ। जिन स्त्रियों से उसने बात की थी, उन में से एक हमारी पड़ोसन थी। दूसरी एक व्यवसायी सहकर्मी की पत्नी थी। “मेरे जाने के बाद,” उसने उन से कहा था, “मैं चाहती हूँ कि रॉबर्ट विवाह कर ले।” फिर उसने आगे यह भी कहा कि, “और मैं चाहती हूँ कि वह नैन्सी लेह डिमौस से विवाह करे।”
मैं इसके पहले भाग को जानता था। हमने इसके बारे में कई बार बात की थी। परन्तु जब तक वह स्वर्ग नहीं चली गई और उन दो स्त्रियों ने मुझे उसकी इच्छा से अवगत नहीं करवाया, मुझे और कुछ नहीं पता था।
इसलिये, एक वर्ष से थोड़ा से समय के बाद, नवम्बर 2015 में, मैंने बॉबी की इच्छा को पूरा किया और नैन्सी से विवाह कर लिया, जो एक अकेली स्त्री थी, और छोटी आयु में ही सेवकाई के लिये बुलाई गई थी।
इससे पहले मैंने नव-विवाहितों को अपने विवाह-वचन बोलते समय, जिनमें “जब तक मृत्यु हमें अलग न कर दे” भी सम्मिलित था, दोहराते हुए सुना था। आप को याद होगा कि मैंने माना था कि मैं इसके लिये मुस्कराता था क्योंकि ये जवान, जीवन की वास्तविकता के असली स्वरूप के बारे में बहुत ही कम जानते थे। परन्तु अब मैं, 67 वर्ष की आयु में, उन शब्दों को फिर से बोलने जा रहा था, और अब वह मुस्कराहट मौजूद नहीं थी। मेरी आयु के लिये, “जब तक मृत्यु” मेरे या नैन्सी के लिये विशेषकर मेरे लिये एक अशुभ वास्तविकता थी।
इसलिये, अब अपनी दुल्हन को आशीष देने के लिये, “इस दूसरी बार में,” मैं क्या कर सकता था?
एक प्रातः, तड़के ही, मेरे दिमाग़ में एक विचार आया। मेरी गोदी में मेरी बाइबल रखी हुई थी, और मैं पवित्रशास्त्र के अंश — भजन, नीतिवचन, पुराना नियम, और नए नियम के भाग पढ़ रहा था। नैन्सी अवश्य ही इनमें से कुछ पदों से आशीषित होगी, मैंने सोचा। इसलिये उनमें से कुछ पद मैंने उसे सन्देश के रूप में भेजने लगा। दो, या तीन, और कभी चार पद, जो भी पृष्ठ में से उभरते थे। जब उन्हें भेजता था, तब वह सो रही होती थी, परन्तु मैं जानता था कि जैसे ही वह उठेगी, ये वहाँ उसके लिए होंगे।
जैसे ही नैन्सी उठी, उसने एक आनन्दित और कृतज्ञता से भरा सन्देश मुझे वापस भेजा। यह पर्याप्त प्रोत्साहन था कि इसे फिर से किया जाये।
इस समय, यह लिखने के समय पर, हम अपने विवाह की नौवीं वर्षगाँठ के निकट आ आ रहे हैं। और मेरे आँकलन के हिसाब से, मैं उसे दस हज़ार से भी अधिक बाइबल के पद भेज चुका हूँ। और यह ऐसा रहा है, मानो मेरी पत्नी रोज़ सुबह मेरे साथ बैठी हुई होती है। जैसा कि आप कल्पना कर सकते हैं, यह बहुत उत्साहवर्धक होता है।
- कहिये और सन्देश भेजिये “मैं तुम से प्रेम करता हूँ।”
अगले कुछ मिनटों तक मैं आपको एक रूपक देना चाहता हूँ। मुझे किसी से इस प्रश्न के उत्तर की पुष्टि करवाने की आवश्यकता नहीं है कि: पहले किसका देहान्त होगा: “नैन्सी का या मेरा?”
क्योंकि मैं उससे पूरे दस वर्ष बड़ा हूँ, इसका उत्तर समझ पाने में कुछ अधिक समय नहीं लगेगा।
इसलिये, जिस तरह से वह अपने फोन में बाइबल के पदों को एकत्रित करती चली जा रही है, मैंने उसके प्रेम-प्याले को भी यथासम्भव भर दिया है। हर समय। अपने सारे बल द्वारा। मैं आप को प्रोत्साहित करना चाहूँगा कि आप भी, जब तक जीवित हैं, अपने साथी के साथ ऐसा ही करें। और वह अभी होगा, है ना? ये तीन शब्द तो जादू से भरे हैं। उसे बताएँ। उसे सन्देश भेजें। फिर से आरम्भ करें और इसे दोहराएँ।
चर्चा और मनन:
- इन ग्यारह में से कौन से सुझाव पर आप को सबसे अधिक कार्य करने की आवश्यकता है, ताकि आप विश्वासयोग्यता से अपने साथी के साथ दुःख उठाने के लिये तैयार रहें?
- अपनी विशिष्ट परीक्षाओं में, इनमें से कौन से सुझाव सहजता से निभाए जा सकते हैं, और किन को नियमित रीति से करते रहना कठिन है?
4 न्याय के लिये तैयार
तैयार रहना अच्छा है
आप और मैं, क्षेत्रीय मार्गदर्शिका के इस अभियान से साथ होकर चले हैं, कुछ घण्टे वार्तालाप में बिताये हैं। हमने हर प्रकार की उन बातों के बारे में देखा है, जिन्हें मैं समझता हूँ कि वास्तव में आप के लिये सहायक होंगी, यदि आप को किसी कठिन परिस्थिति में अपने साथी की सेवा करनी पड़ जाए।
आप की आयु चाहे जो भी हो, आप और मैं नहीं जानते हैं कि सीधे मार्ग पर कब हमारी बारी आ जाएगी कि समापन रेखा पर लगे फीते से टकरा जाएँ। परन्तु एक व्यस्त स्थल पर गोल्फ खेलने वालों के समान, जिन्होंने अपनी बारी पर खेलने के लिये समय व्यर्थ न करने, बल्कि खेलने के लिये हमेशा तैयार रहने का निर्णय लिया हुआ है, मेरी सबसे गहरी इच्छा है कि आप और मैं भी ऐसे ही होंगे: तैयार।
अपने स्कूल के दिनों को याद कीजिये। कोई फर्क नहीं पड़ता है कि कितना अतीत में जाना पड़ेगा। वह किसी भी स्तर का स्कूल हो सकता है।
जब आप को अपने प्रोफेसरों के सामने जाना होता था, जो आपके निबन्ध या कार्य के आँकलन के लिये वहाँ पर थे, और आप को उनके प्रश्नों के मौखिक उत्तर देने होते थे, यदि आप को यह भरोसा होता था कि आप तैयार हैं, तो आप शान्त होते थे।
इसके विपरीत, तैयारन होने की घबराहट के समान, अन्य कोई घबराहट नहीं है। यह आतंक का वह आवेग है जो साँस लेना भी कठिन कर देता है। आप के चेहरे पर आया हुआ वह पसीना जो चिल्ला कर कह रहा होता है, “मैंने अपना गृह-कार्य नहीं किया है। मैं इसके लिये तैयार नहीं हूँ।”
यह अपने विवाह के लिये भरोसे के साथ, वेशभूषा में, पूरी तैयारी के साथ पवित्र स्थान में कदम बढ़ाते हुए आने का भरोसा है। या किसी व्यवसायी सभा में पूरी तैयारी के साथ बैठने का। यह विवाह या यह सभा चुपके से आप पर नहीं आ पड़े। आप को बहुत समय से उनके बारे में पता था और आप के पास उनके लिए तैयारी करने का काफी समय था।
साठ के दशकों के अन्त की ओर, पश्चिमी तट के एक लोकप्रिय गायक/ गीत-लेखक, लैरी नॉरमन ने एक गम्भीर विषय पर एक गीत लिखा था। वह यीशु मसीह के दूसरे आगमन के बारे में था, जो, पवित्रशास्त्र के अनुसार, अनायास ही हो जाएगा। पालक झपकते ही।
तो, इस अन्तिम अध्याय के विचारों के लिये उपयुक्त, इस गीत का शीर्षक था, “काश कि हम सभी तैयार रहते।” गीत के शब्दों में ये भी थे:
एक पुरुष और उसकी पत्नी बिस्तर में सोये हुए हैं
वह कुछ शोर सुनती है और अपना सिर घुमाती है
वह जा चुका है
काश कि हम सभी तैयार रहते
दो जन एक पहाड़ी पर चढ़ रहे हैं
एक ओझल हो जाता है, दूसरा खड़ा रह जाता है
काश कि हम सभी तैयार रहते9
बात यही है। क्योंकि गोल्फ के स्थल पर बहुत से लोग हैं, इसलिये अपने खेल की गति बढ़ा लेना, या यदि वायु-यान दुर्घटना हो तो उसके लिये तैयारी करना, ऐसी स्थितियों के लिये कार्यकारी शब्द है “तैयार।”
हमारे भविष्य में, दो में से एक बात हमारी प्रतीक्षा कर रही हैं। ये अंदाज़ा लगाना नहीं हैं। ये तथ्य हैं। और हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।
पहली बात है कि या तो हमारे जीवनकाल में, या उसके बाद, यीशु मसीह पृथ्वी पर लौट आएगा। उसका पुनरुत्थान हुआ शारीरिक स्वरूप विद्यमान हो जाएगा, जैसा कि वह क्रिसमस की पूर्व-सन्ध्या पर हुआ था। उस समय वह एक मासूम बालक के रूप में, एक निर्धन दम्पत्ति के घर जन्मा था। परन्तु इस बार ऐसा नहीं होगा। अब वह एक निःसहाय, औरों पर निर्भर, खुजली कर देने वाले भूसे पर, भूसा खाने के स्थान में लिटाया हुआ शिशु नहीं होगा। नहीं, अब वह वैसा दिखाई देगा जैसा प्रेरित यूहन्ना ने प्रकाशितवाक्य के पहले अध्याय में उसका वर्णन किया है:10
उसके सिर के बाल ऊन के समान श्वेत थे, पाले के समान उज्ज्वल, और उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान थीं। उसके पाँव भट्टी में तपाए हुए उत्तम पीतल के समान थे, और उसका शब्द बहुत जल के समान था। वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिये हुए था, और उसके मुख से तेज़ दोधारी तलवार निकलती थी। और उसका मुँह ऐसा प्रज्वलित था, जैसा सूर्य कड़ी धूप के समय चमकता है। (प्रकाशितवाक्य 1:14-16)
एक पल, इस छवि को अपने अन्दर समा लेने दीजिये। और जब उसने अपनी आँखों से यह देखा, तब यूहन्ना ने क्या किया? उसने वही किया जो हम करेंगे जब हम यीशु को देखेंगे।
“जब मैं ने उसे देखा तो उसके पैरों पर मुर्दा सा गिर पड़ा” (प्रकाशितवाक्य 1:17a)।
और जब हम उसके सामने औंधे मुँह पड़े होंगे, तब यीशु हम से क्या कहेगा?
“उसने मुझ पर अपना दाहिना हाथ रखकर कहा, ‘मत डर’” (प्रकाशितवाक्य 1:17b)।
प्रेरित पौलुस भी उद्धारकर्ता के इसी दृष्टिकोण को बताता है। वह ऐसे शब्दों का प्रयोग करता है, जिन्हें हम पूर्णतः समझ सकते हैं: “क्षण भर में” और “पलक मारते ही।”
देखो, मैं तुम से भेद की बात कहता हूं: कि हम सब नहीं सोएँगे, परन्तु सब बदल जाएँगे। और यह क्षण भर में, पलक मारते ही पिछली तुरही फूँकते ही होगा। क्योंकि तुरही फूँकी जाएगी और मुर्दे अविनाशी दशा में उठाए जाएँगे, और हम बदल जाएँगे। (1 कुरिन्थियों 15:51-52)
या जैसा कि दिवंगत जॉन मैडन कहते थे, जब अमरीकन फुटबॉल के खेल में रक्षक पंक्ति का कोई खिलाड़ी, बिना उसका ध्यान रखे हुए बॉल लेकर भागते हुए आ रहे प्रतिस्पर्धी टीम के खिलाड़ी को गिरा देता था, और फिर वह बॉल को फेंकने नहीं पाता था: “बूम!”
दूसरी निश्चित बात है कि आप की और मेरी मृत्यु होगी। बॉबी के समान, हम उस अन्तिम साँस को लेंगे और हमारी देह धूसर और ठण्डी पड़ जाएगी। यह अन्त किसी लम्बी बीमारी के अन्त में हो सकता है। आप के तथा आप के प्रिय जनों के लिये, यह कोई अचम्भे की बात नहीं होगी।
या यह वैसे हो सकता है जैसे मेरी पत्नी नैन्सी के पिता, आर्थर डिमौस के साथ हुआ था। एक शनिवार की साफ सुबह, अपने तीन मित्रों के साथ टेनिस खेलते हुए, 53 वर्ष की आयु में, मेरे भावी ससुर, जिनसे स्वर्ग में मिलने के लिये मैं उत्सुक हूँ, को हृदय का एक बड़ा दौरा पड़ा, एक जानलेवा दौरा। डॉक्टरों का कहना था कि उनके शरीर के टेनिस कोर्ट की कठोर सतह पर गिरने से पहले ही वे मर चुके थे।
आश्चर्यजनक तकनीकी के उपलब्ध होने कारण, जब मैं इस लेख पर कार्य कर रहा था, नैन्सी और मैंने उसके पिता के अन्तिम संस्कार की DVD को देखा, जो 10 सितम्बर, 1979 को हुआ था। ठीक वहीं, सबसे आगे की पंक्ति में, मेरी पत्नी, जो उस समय 21 वर्ष की थी, उसके साथ उसकी चालीस वर्षीय माँ, और छः अन्य छोटे भाई बहन बैठे हुए थे। उसकी आठ वर्षीय बहन तो लगभग सारे संस्कार के दौरान, सोती ही रही थी।
वक्ताओं में विख्यात मसीही अगुवे थे और दो अन्य जन, आर्ट डिमौस ने जिन का यीशु से परिचय करवाया था, भी थे। प्रत्येक वक्ता ने इस व्यक्ति के शब्दों और जीवन की अविरल गवाही के बारे में बताया। और उस पल के दुःख के बावजूद, वे सभी एक तथ्य के लिये प्रसन्न थे: यद्यपि आयु में वह वृद्ध नहीं थे, पचास के दशक में ही थे, परन्तु आर्ट डिमौस तैयार थे। इस बात के लिये मैं बहुत कृतज्ञ हूँ। और उनके लिये भी।
चाहे आपकी मृत्यु अचानक हो या लम्बी खिंच कर हो, या आप के किसी गाड़ी से टकराने या बीमार पड़ने से पहले ही यीशु लौट आता है, हालात कुछ भी हों, महत्व केवल एक ही प्रश्न का है। केवल एक।
क्या आप तैयार हैं?
देखिये, न्यायी आ रहा है
हो सकता है कि आप को साप्ताहिक मज़ाकिया कार्यक्रम रोअन एण्ड मार्टिन्स लाफ़-इन याद हो। यह 1968 से 1973 तक चला था, और इसमें उन्नति करते हुए कई मज़ाकिया कलाकार आते थे, जैसे कि सेना की हेलमेट पहने हुए आर्टे जॉनसन, जो अपने विशेष अंदाज़, भेंगी आँख, टेढ़े होंठ और हल्की सी तुतलाती आवाज़ में “बहुत रोचक” बोलने के लिये जाने जाते थे। याद है?
उसी कार्यक्रम में लगभग हर सप्ताह हम एक और वाक्यांश सुना करते थे, जिसे सैमी डेविस जूनियर बड़ी सी सफेद विग और काला चोगा पहन कर बोलते थे, “देखिये, न्यायी आ रहा है।” वह इन शब्दों को बोलते हुए, हमारे टीवी के स्क्रीन पर, एक से दूसरी ओर जाते थे। यह हमेशा ही हास्यास्पद होता था।
परन्तु “क्या हम तैयार हैं?” के बारे में बात करते हुए, मृत्यु के बाद हमें जिसका सामना करना पड़ेगा, हम बाइबल से उसके बारे में देखते हैं कि, हम चरम न्यायी, परमेश्वर, के न्याय सिंहासन के सामने खड़े होंगे। और वहाँ पर कुछ भी हास्यास्पद नहीं होगा।
प्रेरित पौलुस कहता है, क्योंकि अवश्य है, कि “हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के सामने खुल जाए, कि हर एक व्यक्ति अपने अपने भले बुरे कामों का बदला जो उसने देह के द्वारा किए हों पाए” (2 कुरिन्थियों 5:10)।
इसका अर्थ यह है यदि आप इसे समझने के लिये तैयार हैं कि जब आप और मैं परमेश्वर के सामने खड़े होंगे, हम यह कह सकेंगे, “हम आप के सामने, आप के पुत्र यीशु मसीह के समान धर्मी हैं।” अब, यह बहुत घमण्डी प्रतीत हो सकता है। परन्तु फिर यदि आप यह पूछेंगे, “अच्छा, यह सत्य कैसे है?,” तो उत्तर है, क्योंकि वह एकमात्र धार्मिकता, जिसके द्वारा मैं धर्मी ठहराया जाता हूँ, “वह यीशु मसीह की धार्मिकता है।”11
यीशु के कारण इस न्याय से डरने का कोई कारण नहीं है। इसके बारे में पहले से आशावान रहने का हर कारण है। यह कितना अच्छा है।
मसीही मुसाफिर की यात्रा
मेरी माँ, उनका नाम ग्रेस (अर्थात अनुग्रह) था, जो उनके लिये बिल्कुल सटीक था, जब हम छोटे थे, तब मुझे और मेरे भाई-बहनों को मसीही मुसाफिर में से पढ़ कर सुनाया करती थी। यह पुस्तक मसीही नामक एक व्यक्ति की, उसके जन्मे से लेकर, वांछित स्वर्गीय देश तक पहुँचने तक की जीवन यात्रा की आलंकारिक भाषा में लिखी गई कहानी है।
यद्यपि मैं स्वीकार करता हूँ कि मुझे पुस्तक का वह भाग याद नहीं है, जिसे माँ ने मृत्यु के बारे में इतने वर्ष पहले पढ़ा था, परन्तु मैंने जाकर पुस्तक में से कुछ वाक्यों को निकाला है, जो इसे ऐसे व्यक्त करते हैं कि हम सभी की साँसें अटक जाएँगी।
इस वैभवशाली नगर में पहुँचने से पहले, पार करने के लिये एक उफनती हुई तेज़ बहाव वाली नदी थी। इसने मसीही और उसके मित्र आशावान को घबरा दिया, परन्तु फिर भी वे पानी में से होकर आगे बढ़ने लगे।
जब वे नदी को पार कर रहे थे, मसीही डूबने लगा, और उसने पुकार कर अपने अच्छे मित्र आशावान से कहा, “मैं गहरे पानी में डूब रहा हूँ; तेज़ लहरें मेरे सिर के ऊपर से जा रही हैं; उसकी सभी लहरें मेरे ऊपर से निकल रही हैं”…तब दूसरे ने कहा, “मेरे भाई प्रसन्न हो: मुझे तला महसूस हो रहा है, और वह भला है।”12
मेरे लिये “तला महसूस करने” के तुल्य है वायुयान यान में यात्रा करते हुए गहने बादलों में से होकर उतरने की तैयारी करना। खिड़की के बाहर अविरल सफेदी, फिर सफेदी में से निकलना और नीचे धरती दिखाई देना। मुझे यह दृश्य बहुत पसन्द है। और यह अनुभव भी।
मसीही ने अपने पाँव से नदी के रेतीले तल को अनुभव किया और उससे वह सुरक्षित महसूस करने लगा। उसने बादलों में से धरती को देखा और प्रसन्न हो गया।
यह आप, मैं, या हमारा साथी हो सकता है, जो महिमा में प्रवेश करने जा रहा है। सुरक्षित।
बॉबी तैयार थी
बॉबी के अन्तिम संस्कार के समय उसे अलविदा कहने के कुछ महीने बाद, मैंने अपने उन अनेकों मित्रों को, जो हमारी इस यात्रा में हमारे साथ धैर्य और प्रार्थनाओं के साथ बने रहे थे, यह लिखा। मुझे और मेरे परिवार को प्रेम और कृपा के उँडेले जाने से ढाँप कर रखा गया था।
- समाप्ति…एक अन्तिम अलविदा…और कृतज्ञता
“यह यहोवा की महाकरुणा का फल है,
क्योंकि उसकी दया अमर है।
प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है।”
प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है” (विलापगीत 3:22-23)
अनमोल परिवारजनों और मित्रों:
आप को लिखे मेरे पिछले सन्देश के बाद से, हमारे परिवार ने बहुत सारी “प्रथम” बातों का अनुभव किया है। धन्यवादी पर्व। क्रिसमस। नया वर्ष। वैलेंटाइन दिवस। तीन नातियों के जन्म दिन। मेरा जन्मदिन।
बहुतों ने पूछा है कि हम कैसे हैं। हमने इस प्रश्न का उत्तर बहुत बार दिया है। वास्तव में बॉबी के स्वर्ग में कदम रखने के बाद के पहले इतवार, मैं हमारी बेटी जूली के साथ फोन पर बात कर रहा था। उसने पूछा “हम कया कहें जब लोग पूछें कि हम कैसे हैं?”
हमने इसके बारे में बात की और कई विकल्पों पर विचार किया। और फिर हम एक शब्द पर आकर स्थिर हो गए। हमने उस शब्द को अब बारम्बार कहा है।
कृतज्ञ। हम कृतज्ञ हैं।
जो लोग यीशु को नहीं जानते हैं, उनके लिए यह माँ लेना सहज होगा कि हम तथ्यों का सामना नहीं करना चाहते हैं। उस दु:खद सत्य का कि अब बॉबी जा चुकी है। हम इतने भोले कैसे हो सकते हैं? परन्तु यह सत्य है। परमेश्वर की विश्वासयोग्यता अचल रही है। और निश्चित भी। हमारा चरवाहा होने के नाते, वह अपनों की देखभाल करता है। सच में, हम कृतज्ञ हैं।
जब पहली बार बॉबी की बीमारी के बारे में पता चला था, हमारे परिवार ने निर्णय लिया था कि…हम क्रोधित नहीं हैं, हम डरे हुए नहीं हैं, हमें इसे एक उपहार के समान स्वीकार करते हैं, और हमारा सर्वोच्च लक्ष्य है कि यीशु ऊँचे पर उठाया जाए। क्या हमने बॉबी की चँगाई के लिये प्रार्थनाएँ कीं? हाँ, हमने कीं। परन्तु हमारे कुछ मित्रों ने—वे लोग जिन से हम बहुत प्रेम करते हैं—पूछा हम उसकी चँगाई की “माँग” क्यों नहीं करते हैं। “क्या यह परमेश्वर की इच्छा में नहीं होगा कि बॉबी जैसे जन को चंगाई मिले?” वे सप्रेम पूछते थे।
उनकी चिन्ता के लिये उन्हे धन्यवाद कहने के बाद, हमारा उत्तर यह होता था: “जो लोग यीशु से प्रेम करते हैं, कभी वे शारीरिक चँगाई प्राप्त करते हैं। और कभी नहीं करते हैं।”
इसलिये हमारे परिवार ने इसके बारे में प्रार्थना की। हमने प्रभु से पूछा, “आप की इच्छा क्या है?”
उसका उत्तर स्पष्ट और दृढ़ था। असंदिग्ध। और क्या आप नहीं जानते होंगे, कि उत्तर सीधे उसके वचन से आया?
“प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले” (2 पतरस 3:9)।
हमारे लिए यही था। हमारा उत्तर। परमेश्वर की इच्छा है कि खोए हुए लोग पश्चाताप करें और “पा जाएँ” … ताकि, जैसा फ्रांसिस थॉमपसन ने लगभग एक शताब्दी पहले लिखा था, उनके मन “स्वर्ग के शिकारी” द्वारा पकड़ लिये जाएँ।
और बॉबी के कैंसर के परिणामस्वरूप, सारे संसार से आने वाले उन सन्देशों ने, कि वे इससे किस प्रकार प्रभावित हुए हैं, यीशु के साथ चलने के लिए प्रोत्साहित हुए हैं, इस यात्रा में हमारे परिवार को अवर्णनीय आनन्द और उद्देश्य प्रदान किया है।
पिछले सप्ताहान्त, मेरे बच्चे और नाती कैरोलीनास से, ऑरलैन्डो तक गाड़ी चलाकर आए, कि मेरा जन्मदिन मनाने में मेरी सहायता करें। उनके आने का एक और उद्देश्य था कि नम्रता और प्रेम के साथ घर में से बॉबी की सभी चीजों को निकालने में मेरी सहायता करें। इसलिये, अब उसकी अलमारी खाली है, रसोई अब फिर से एक रसोई है, कपड़े धोने और चित्रकारी का कमरा अब फिर से केवल कपड़े धोने का स्थान है।
फिर, एक शनिवार की दोपहर, बारिश पड़ रही थी और मौसम ठण्डा था, हम छोटी सी यात्रा करके कब्रिस्तान को गए जहाँ बॉबी नवम्बर से शान्ति से विश्राम कर रही है। यह बहुत गहरी भावनाओं का समय था। कृतज्ञ होने का। और अध्याय को समाप्त करने का।
क्या इसका यह अर्थ है कि हम इस अद्भुत महिला को भुला देंगे, जिसे हमारे स्वर्गीय पिता ने एक पत्नी और एक माँ होने के लिये 44 वर्ष और उस दिन ठीक 7 महीनों के लिए उधार दिया था? नहीं। परन्तु, उसके इस दृढ़ निर्णय के कारण कि हम उसके चले जाने के बाद “अपने जीवनों में आगे बढ़ें,” हमने एक लम्बी साँस ली है… और यही कर रहे हैं। और इस दृढ़ निश्चय के साथ कि हम फिर से उसे देखेंगे। वह तैयार थी। कृतज्ञ होने का एक और कारण।
इन तीन वर्षों में आप लोगों की ओर से मिलने वाला प्रेम और देखभाल, हमारी अपेक्षा से कहीं अधिक था। आपकी प्रार्थनाओं ने हमें संभाले रखा है।
इसलिये, बहुत धन्यवाद। मेरे साथ…हमारे साथ खड़े रहने के लिये बहुत धन्यवाद। और अब जब हम विश्वास में आगे कदम बढ़ाते हैं, यह देखने के लिए उत्सुक कि प्रभु ने हमारे लिये क्या रखा है, आप के प्रोत्साहन के लिये बहुत धन्यवाद।
हम आप से प्रेम करते हैं।
रॉबर्ट
- तो, हम कृतज्ञ क्यों थे?
क्योंकि, यद्यपि “अलविदा” का अर्थ था कि हम उसे अब कभी नहीं देखेंगे, महिमा की इस ओर, बॉबी इसके लिये तैयार थी।
मैं जब अपनी मृत्यु के इस ओर हूँ, मेरा लक्ष्य है कि मैं भी तैयार रहूँ। जब आप का साथी यह कदम बढ़ाता है — और किसी दिन आप भी यही करेंगे। आप के लिये मेरी यही प्रार्थना है।13
पाद-टिप्पणियाँ
- करों के रूप में दिए आपके पैसे कार्य कर रहे हैं।
- https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/falls
- क्या हमारी नौकरशाही बातों को रोचक तरीके से नहीं कहती है?
- वेंडल पी. लवलेस, कॉपीराइट © 1938, व्हीटन, इलिनॉए, होप पब्लिशिंग.
- https://www.youtube.com/watch?v=itmtM0hMGLk
- मगरमच्छ इसीलिये ऐसे दिखते हैं।
- लोगों को अवगत बनाए रखने और “बुद्धिमानी” से प्रार्थनाएँ करने के लिये CaringBridge.org एक अद्भुत साधन हो सकता है।
- मुस्कराहट लाने के लिये, हास्य अभिनेता टीम हॉकिन्स ने बहुत बार हमारी सहायता की है। इस गुणी जन के मेरे पसन्दीदा हास्यों में से एक यह है: https:// www.youtube.com/watch?v=1Xv10gHvPYo
- लैरी नॉरमन, कॉपीराइट © 1969, सर्वाधिकार सुरक्षित।
- मैंने वर्षों पहले एक कार के पीछे लगा एक स्टिकर देखा था, जिसे मैं कभी भूल नहीं सकता हूँ; उस पर लिखा था: “यीशु वापस आने वाला है, और इस बार वह बहुत अप्रसन्न हो रखा है।”
- डॉ. सिंकलेयर फर्ग्यूसन के एक उपदेश में से: https://www.ligonier.org/learn/qas/will-christians-answer-for-their-sins-in-judgment
- जॉन बनयन, Pilgrim’s Progress (मसीही मुसाफिर), पहली बार 1678 में प्रकाशित। सार्वजनिक उपलब्ध।
- रॉबर्ट वॉलगेमुथ की The Finish Line से लिये और अनुकूलित किये गये अंश। कॉपीराइट ©2023 रॉबर्ट वॉलगेमुथ द्वारा लिखित। हार्परकॉलिन्स क्रिश्चियन पब्लिशिंग की अनुमति से प्रयोग किये गए।
विषयसूची
- 1 जब तक मृत्यु हमेंअलग न कर दे
- यकी
- यहाँ कुछ नया नहीं है
- लोगों, चारों ओर एकत्रित हो जाओ
- आप के बाद — पहले कौन जाएगा?
- चर्चा और मनन:
- 2 मृत्यु निश्चित और अन्तिम है
- हाँ, उसका देहान्त हो गया है
- हाँ, उसका देहान्त हो गया है
- बॉबी का अस्पताल जाना
- अब मेरी बारी है
- चर्चा और मनन:
- 3 तूफान के लिये तैयार
- चर्चा और मनन:
- 4 न्याय के लिये तैयार
- तैयार रहना अच्छा है
- देखिये, न्यायी आ रहा है
- मसीही मुसाफिर की यात्रा
- बॉबी तैयार थी
- पाद-टिप्पणियाँ