#62 वित्तीय उत्तरदायित्व विवाह: अपने जीवनसाथी के साथ पैसे का तालमेल

By JUNIOR JAMREONVIT

परिचय

मैं एक टूटे हुए परिवार में पला-बड़ा हुआ हूँ। मेरे पिताजी भी हमारे आसपास नहीं थे, और हमें अपने आप ही अपनी आजीविका का निर्वाह करना पड़ता था। बचपन में मैंने अपनी माँ को एक नौकरानी के रूप में प्रतिदिन चौदह से सोलह घंटे काम करते हुए देखा है—केवल जीवन निर्वाह करने के लिए ही नहीं, वरन् सात से ग्यारह की अधिकारिक व्यापार व्यवस्था लेने के लिए पर्याप्त धन बचाने के उद्देश्य से भी देखा है। ऐसा करने के बाद भी, उन्होंने अपने व्यवसाय को बाजार में जमाने के लिए कई-कई घंटों तक काम करना जारी रखा। सबसे बड़ा खर्च वेतन देना था, इसलिए उसने अकेले ही काम करके पैसे बचाए।

तनाव और बोझ ने मेरी माँ को शारीरिक और भावनात्मक, दोनों ही तरह से थका दिया था। और वह तनाव परिवार के शेष सदस्यों तक भी फैल गया। ऐसी चिन्ता और अस्थिरता थी जिसने मेरी बहन को और मुझे गहराई से प्रभावित किया। उस प्रकार की कमी का अनुभव करने के बाद, मैंने निश्चय किया कि मैं अपने परिवार को कभी भी उस स्थिति से नहीं जाने दूँगा।

इसके विपरीत, मेरी पत्नी केटी एक स्थिर मसीही परिवार में पली-बढ़ी थी। वह छह बच्चों में से एक थी। यद्यपि यह कहना कि वह “बहुतायत” में पली-बढ़ी थी, कुछ बढ़ा-चढ़ाकर कहना होगा, फिर भी उसकी आवश्यकताएँ हमेशा पूरी होती थीं। उसके माता-पिता अपने पास उपलब्ध संसाधनों के साथ उदार थे। हमारे विवाह के बाद, केटी के पिता फिल डेविस ने अपनी निवेश-सम्बंधी सम्पत्ति हमें बाज़ार मूल्य से बहुत कम किराए पर दे दी, क्योंकि वे चाहते थे कि हम अपने स्वयं के घर के लिए बचत कर सकें। लगभग एक वर्ष तक बचत करने के बाद, हम कुछ गिरवी रखकर ऋण लेकर अपना पहला घर खरीदने में सक्षम हुए।

आप यह कह सकते हैं कि मेरी पत्नी और मैं दो बिल्कुल भिन्न परिवारिक पृष्ठभूमि से आए थे। अपने आरम्भिक वर्षों में अपनी वित्तीय व्यवस्था को व्यवस्थित करना कोई सरल कार्य नहीं था।

अंततः धन का प्रबंधन केवल रुपये-पैसे का ही विषय नहीं है। यह प्रायः मूल्यों, प्राथमिकताओं और पारिवारिक पृष्ठभूमि से भी जुड़ा हुआ होता है—कभी-कभी गहरे भावनात्मक घावों से भी जुड़ा हुआ होता है। भिन्न-भिन्न पृष्ठभूमि वाले दो लोगों के लिए वित्तीय योजना तैयार करना कैसा दिखाई देता है? हम खर्च और बचत को कैसे देखते हैं? हम विवाह में कितना ऋण लेकर आ रहे हैं—और हमने साथ मिलकर कितना ऋण लिया है? हम इन सबका प्रबंधन कैसे करते हैं? और हम अपने बच्चों को पैसे के विषय में क्या सिखाते हैं?

ये सभी उचित प्रश्न हैं। यह जीवन कौशल मार्गदर्शिका आपको और आपके जीवन साथी को व्यावहारिक बुद्धि और बाइबल आधारित सिद्धांतों के माध्यम से इन प्रश्नों का मिलकर सामना करने में सहायता करने के लिए है, ताकि आप न केवल अपने पैसे को, वरन् अपने हृदयों को भी एक-दूसरे के साथ जोड़ सकें।

धन को समझना

धन का विषय अक्सर कलीसिया के भीतर और मसीहियों के बीच एक वर्जित विषय माना जाता है। यह ऐसा विषय है जिसके बारे में बहुत कम ही बात की जाती है। यह वर्जित क्यों माना जाता है? मेरा मानना है कि वित्तीय उत्तरदायित्व के विषय में बात करने में मसीहियों की झिझक प्रायः उन टेलीविजन के प्रचारकों से जुड़ी हुई होती है—अर्थात् ऐसे धोखेबाज लोग जो अपने आत्मिक अधिकार का उपयोग करके लोगों को पैसा देने के लिए धूर्तता से प्रेरित करते हैं। इन बातों के अतिरिक्त, जब लोग कलीसिया में आते हैं और भेंट की थाली घुमाई जाती है, तो संसार के लोगों की अक्सर गलत धारणा बन जाती है। गैर-मसीहियों को ऐसा लगता है कि कलीसिया और मसीही लोग हमेशा पैसा ही माँगते रहते हैं।

मसीहियों को पैसे के विषय में झिझकने का एक और कारण समृद्धि की सुसमाचार नामक शिक्षा है। समृद्धि का सुसमाचार यह मानता है कि आर्थिक आशीष और शारीरिक कुशलता उसके अनुयायियों के जीवन के लिए हमेशा से परमेश्वर की इच्छा है। यह सत्य नहीं है। आप यीशु मसीह और उसके प्रेरितों के जीवन को देखकर समझ सकते हैं कि कष्ट सहना मसीही जीवन का एक सामान्य हिस्सा है। क्योंकि अधिकाँश मसीही लोग जानते हैं कि समृद्धि का सुसमाचार एक झूठा सुसमाचार है, इसलिए वे उन वचनों को जो समृद्धि का आश्वासन देते हैं, पढ़ते समय इस भय से कतराते हैं, कहीं वे भी उस धारा के प्रभाव में न आ जाएँ।

मसीहियों के लिए धन को वर्जित विषय मानने का एक कारण यह भी है कि सांस्कृतिक दृष्टि से हम धन को “व्यक्तिगत विषय” मानते हैं। यह हमारी अपनी ही दृढ़ व्यक्तिगत सोच होती है जो कहती है कि, “मेरे पैसे का मुझे क्या करना है, यह मुझे कोई नहीं बताएगा!” परन्तु यह विचार बाइबल आधारित विचार से अधिक अमेरिकन सोच को दर्शाता है।

परिणामस्वरूप, कलीसिया—और सामान्य रूप से मसीही लोग—धन के विषय पर बात करने से कतराते हैं। आप कितने उत्तरदायित्व समूहों में गए हैं जहाँ कभी यह पूछा गया हो, “अरे, आप धन का प्रबंध कैसे करते हैं?” मेरा अनुमान है कि ऐसे समूह अधिक नहीं होंगे।

धन के विषय में बात करने से यह परहेज़ अजीब है, क्योंकि बाइबल वास्तव में धन के विषय में बहुत अधिक बात करती है। इसका अर्थ है कि मसीही लोग अपनी बाइबल को खोल सकते हैं और खोलना भी चाहिए, ताकि वे धन का प्रबंध कैसे करें इसके लिए बुद्धि पाएँ। बुद्धि पाने का एक तरीका यह है कि हम आपस में इस विषय में बात करें कि बाइबल क्या कहती है।

और पवित्रशास्त्र स्वयं धन और सम्बन्ध के विषय में ऐसे उद्धरण देता है जो हमारी गलत चुप्पी को चुनौती देते हैं। यीशु मसीह स्पष्ट रूप से चेतावनी देता है, “क्योंकि जहाँ तेरा धन है वहाँ तेरा मन भी लगा रहेगा” (मत्ती 6:21)। यह कथन प्रकट करता है कि धन सम्बन्धों को इतनी गहराई से क्यों प्रभावित करता है—इसलिए नहीं कि धन अपने आप में बुरा है, वरन् इसलिए कि वह यह उजागर कर देता है कि हम सबसे अधिक महत्व किसको देते हैं।

आज के संसार में, हम सामान्यतः आर्थिक स्थिति को धन, गणित या संसाधनों के प्रबंधन से जोड़कर देखते हैं। बाइबल आधारित दृष्टिकोण से यह भण्डारीपन, भरोसे और आराधना के विषय में है। इसलिए सबसे अच्छा यही है कि आप अपने पैसे को केवल व्यक्तिगत संपत्ति आवंटन के रूप में न देखकर, आपसी दायित्व के रूप में देखें। अब यदि हम धन को सम्बन्धों के उत्तरदायित्व के रूप में देखें, तो एक दम्पति के रूप में, धन केवल आपकी जीवनशैली को सुरक्षित करने का साधन नहीं है— वरन् यह साथ मिलकर परमेश्वर का आदर करने के लिए एक साझा बुलाहट है।

चिन्तन के लिए प्रश्न:

  1. आपने बचपन में धन के विषय में कौन से सन्देश सुने थे, या सबक सीखें थे?
  2. आपके मूल परिवार ने धन से जुड़ी हुई आपकी वर्तमान आदतों को किस प्रकार से आकार दिया है?
  3. एक दम्पति के रूप में आपके वित्तीय निर्णयों को कौन-कौन से डर या अनकहे अनुमान प्रभावित कर सकते हैं?

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