#68 विश्वासघात से उबरना: जब लोग आपको असफल कर दें तब परमेश्वर पर भरोसा रखना

By Allen Duty

परिचय

मार्क ने 20 से अधिक वर्षों तक अपनी कंपनी के लिए अपना सब कुछ दे दिया, जिसमें उसकी पत्नी और बच्चों से दूर रहकर बिताई गई कई रातें और सप्ताह भी सम्मिलित थे। एक शुक्रवार की दोपहर में मार्क का अधिकारी उसके कार्यालय में आया और उसे बताया कि खर्चे कम करने के उनके उपायों के कारण उसको तत्काल प्रभाव से उसके पद से हटाया जा रहा है।

सारा अपने पास्टर से प्रेम और आदर करती थी। जब वह छोटी बच्ची थी तभी से वही उस कलीसिया की अगुवाई कर रहे थे जहाँ सारा जाती थी, और हाल ही में उन्होंने उसे बपतिस्मा भी दिया था। पिछले रविवार को कलीसिया के एक प्राचीन ने मण्डली के सामने खड़े होकर घोषणा की कि नैतिक पतन के कारण पास्टर ने अपना इस्तीफा दे दिया है और अब वह कलीसिया की सेवा नहीं करेंगे।

रायन अपनी पत्नी और अपने तीन बच्चों से प्रेम करता था। उसके मित्र अक्सर उससे कहा करते थे कि वे चाहते हैं कि उनका पारिवारिक जीवन भी उतना ही सुखी हो जितना उसका दिखाई देता है। कल, रायन की पत्नी ने स्वीकार किया कि पिछले नौ महीनों से उसका अपने एक सहकर्मी के साथ अनैतिक सम्बन्ध चल रहा था।

क्रिस्टीन के पास मानो सब कुछ था—एक उत्तम कार्यक्षेत्र, परिवार और मित्रों का बड़ा समूह, और एक उत्तम कलीसियाई संगति। बाहरी रूप से वह प्रसन्न और संतुष्ट दिखाई देती थी, परन्तु भीतर ही भीतर वह अपने माता-पिता के प्रति गहरी कड़वाहट रखती थी, क्योंकि वह कभी भी उनके मानकों पर खरी उतरती हुई प्रतीत नहीं हुई।

हो सकता है कि आपको मार्क, सारा, रायन, या क्रिस्टीन के समान उसी प्रकार से ठेस न पहुँची हो। लेकिन मेरा विश्वास है कि आपको कभी न कभी ठेस पहुँची होगी। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि पतित लोगों से भरे इस पतित संसार में ठेस पहुँचाना जीवन का एक भाग है। यदि आप यीशु मसीह के अनुयायी हैं, तो आप जानते होंगे कि आपको हर समय परमेश्वर पर भरोसा करने के लिए बुलाया गया है। परन्तु जब आपको ठेस पहुँची हो, तब आप परमेश्वर पर कैसे भरोसा करेंगे? धोखा मिलने के बाद फिर से भरोसा करना सीखने की यह प्रक्रिया, लोगों द्वारा ठेस पहुँचाए जाने के बाद परमेश्वर पर भरोसा करने के तरीके को समझने से शुरू होती है।

पवित्रशास्त्र में ऐसे बहुत से उदाहरण मिलते हैं जिनमें लोगों को बहुत अधिक ठेस पहुँची है। केवल यीशु मसीह को छोड़ दें, तो सम्भवतः भविष्यद्वक्ता यिर्मयाह से अधिक बार या अधिक गहराई से किसी और को ठेस नहीं पहुँची। उसने अपने आप को वध होने के लिए ले जाने वाले अनजान मेम्ने के समान बताया (यिर्म. 11:19)। उसका जीवन लगभग निरन्तर दुःख से ही भरा हुआ था:

  • उसे एक साथी धार्मिक अगुवे के द्वारा मारा-पीटा गया और काठ में डाल दिया गया
    (यिर्म. 20:2)। यह उनकी कहानी में धोखे के बारे में बाइबल के कई दर्दनाक वचनों
    में से एक है।
  • उसे गिरफ़्तार किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई (यिर्म. 26:8-11)।
  • उस पर झूठा आरोप लगाया गया कि वह शत्रु से जा मिला है, और उसे बंदीगृह में डाल दिया गया, जहाँ उसे लम्बे समय तक रखा गया (यिर्म. 37:14-16)।
  • उस पर देशद्रोही होने का झूठा आरोप लगाया गया, उसे मल्कीय्याह के हौज़ में डाल दिया गया, और वहीं मरने के लिए छोड़ दिया गया (यिर्म. 38:1-6)। उनके दुःख में, हम एक स्पष्ट चित्र देखते हैं कि बाइबल धोखे के बारे में क्या कहती है।

मानो यह सब पर्याप्त न हो, यिर्मयाह का कोई परिवार भी नहीं था, जिसके साथ वह अपने दुःख को बाँट सके और अपनी अनेक परीक्षाओं के समय सांत्वना पा सके। एक समय ऐसा भी आया जब यिर्मयाह इतना अधिक दुःखी हुआ कि उसने परमेश्वर से पुकारकर कहा कि भला होता कि वह अपनी माता के गर्भ में ही मर गया होता (यिर्म. 20:13-18)। फिर भी, किसी रीति से यिर्मयाह ने अपने जीवन के अन्तिम समय तक परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखा।

उसने ऐसा कैसे किया? कोई भी व्यक्ति ऐसा कैसे कर सकता है?

बहुत से लोग अपनी पीड़ा को स्वीकार करने से मना कर देते हैं, और ऐसा करने के बजाय अपनी भावनाओं को दबा देते हैं। वे कड़वे स्वभाव के हो जाते हैं, उनके साथ जो कुछ भी हुआ उसी के बारे में सोचते रहते हैं, और स्वयं को पीड़ित मानने वाली मानसिकता अपना लेते हैं। वे उन लोगों के साथ मेल-मिलाप करने का प्रयास नहीं करते जिन्होंने उन्हें ठेस पहुँचाई होती है, वरन् वे उनके पापों और असफलताओं को उनके विरुद्ध पकड़े रहते हैं। वे स्वयं को अच्छे सम्बन्धों से दूर कर लेते हैं, ताकि उन्हें दोबारा ठेस न पहुँचे।

आप भी ऐसा ही करना चुन कर सकते हैं। इस संसार में जीवन की समस्याओं के कई समाधानों के समान, यह भी आपको सबसे सुरक्षित और सबसे अच्छा चुनाव लग सकता है। कम समय के लिए यह अच्छा लग सकता है और कुछ हद तक ठीक भी प्रतीत हो सकता है। परन्तु दीर्घकाल में, अज्ञानता के मार्ग पर चलकर आप न तो प्रसन्न, न स्वस्थ, और न ही पवित्र बने रह सकते हैं, क्योंकि यह वह विश्वास का मार्ग नहीं है जो आशीष की ओर ले जाता है।

तो जब आपको ठेस पहुँची हो, तब आप परमेश्वर पर कैसे भरोसा कर सकते हैं? इस जीवन-कौशल मार्गदर्शिका में हम विश्वास पर आधारित चार सिद्धान्तों पर चर्चा करेंगे

  • अपनी ठेस को स्वीकार करें
  • कडवाहट से संघर्ष
  • मेल-मिलाप का प्रयास करें
  • फिर से प्रेम करने का चुनाव करें

इस पुस्तक का प्रत्येक भाग इन चार सिद्धान्तों में से किसी एक पर चर्चा करेगा और अन्त में ऐसे प्रश्न होंगे जिनका उपयोग मार्गदर्शन के सम्बन्ध में किए जा सकते हैं। जब आपको ठेस पँहुचती है, तब परमेश्वर पर भरोसा करना एक कठिन काम होता है। परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह से यह एक ऐसा चुनाव है जिसे आप कर सकते हैं, और यह ऐसा चुनाव है जो आपको कडवाहट और अकेलेपन से स्वतंत्र कर देगा। आइए, आरम्भ करें।

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