#70 अत्यधिक मानसिक थकावट से कैसे उबरें और जीवन तथा विश्वास में फिर से सन्तुलन कैसे बनाएँ

By Joshua Ludlow (जोशुआ लडलो)

परिचय: बाइबल आधारित अत्यधिक मानसिकथकावट को समझना

आइए मैं आपका परिचय सैली, जॉन, और एनी से करवाता हूँ।

सैली एक अत्यन्त कुशल चिकित्सक है, और उसे काम करना बहुत ही अधिक पसन्द है। कनिष्ठ चिकत्सकों के एक समूह का नेतृत्व करते हुए उसने बीते दो दशकों में निरन्तर उन्नति की सीढ़ियाँ चढ़ी हैं, और उसके धीमा होने का कोई संकेत बही दिखाई देता है। परन्तु काम वास्तव में कभी रुकता नहीं। परिवार के साथ समय बिताते हुए भी रोगियों से सम्बन्धित सन्देश उसके फोन पर आते रहते हैं, और बच्चों के साथ खेलते समय भी वह अगले दिन के कार्यक्रम के विषय में सोचती रहती है। रात को सोने का समय तो मानो उसके दिन के पहले दो घंटों की योजना बनाने की तैयारी के लिए होता है। अत्यधिक मानसिक थकावट? सैली इस बात को हँसी में उड़ा देती है। “विश्राम? हँसते हुए हा-हा! मैं तो मरने के बाद ही विश्राम करूँगी!” इस बीच, उसका पति ग्रेग उस प्रभाव को देख रहा होता है जो इस कारण उसके जीवन पर पड़ रहा था, बच्चों पर झुँझलाना, छुट्टियों या सप्ताह की योजनाओं में सम्मिलित होने से बचना, और रविवार की सुबह प्रायः कलीसिया से अनुपस्थित रहना। ये अत्यधिक मानसिक थकावट के आरम्भिक लक्षण हैं, जो प्रायः ध्यान नहीं खींचते, क्योंकि समाज में अत्यधिक उपलब्धि और आवश्यकता से अधिक काम करने को प्रोत्साहन और सम्मान दिया जाता है।

जॉन एक विश्वविद्यालय के व्यस्त सूचना-प्रौद्योगिकी विभाग का संचालन करते हैं। उन्हें अपना कार्य बहुत पसन्द है, परन्तु तभी एक नया, अत्याचारी अधिकारी उनका कार्यभार इतना बढ़ा देता है कि सब कुछ असहनीय हो जाता है। घर पर वह अपने विकलांग पुत्र की देखभाल का उत्तरदायित्व भी निभाते हैं, और अब प्रत्येक दिन पहले से अधिक तनावपूर्ण बनता जा रहा था। जॉन धैर्य के लिए प्रार्थना करता है, परन्तु महीनों तक बने रहने वाले दबाव के कारण वह अपने कार्यालय में बैठकर फूट-फूटकर रोने लगते हैं और सोचते हैं कि वह कैसे जीवित रह पाएगा। यह हमें स्मरण दिलाता है कि अत्यधिक मानसिक थकावट के कारण केवल हमारी आन्तरिक दुर्बलताएँ ही नहीं उत्पन्न होतीं, वरन् बाहरी दबाव, अव्यवस्थित कार्य-प्रणालियाँ, और निरन्तर भावनात्मक तनाव भी इसके बड़े कारण होते हैं।

एनी एक युवा पत्रकार है, जो हर समय काम के लिए तैयार रहती है। नए विवाह, नए घर, और निरन्तर समाचार-प्रतिवेदन की माँगों के बीच वह संभवतः कभी “न” नहीं कह पाती है। जन्म दिन के उत्सव, बाइबल अध्ययन, या घर पर बिताए जानी वाली शान्त रातों में भी वह किसी समाचार के प्रतिवेदन के लिए सब कुछ छोड़ देने को तैयार रहती है। इन सबके अतिरिक्त, वह सप्ताह के मध्य में होने वाली दो खेल-समूहों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और अपने आपको लगातार आगे बढ़ाती रहती है, क्योंकि उसके समूह के साथी उस पर निर्भर रहते हैं। वह सोचती है कि, “यदि मैंने मना कर दिया, तो लोग मुझे भूल जाएँगे!” जबकि उसके आसपास के सभी लोग जानते हैं कि उसने अपने ऊपर अस्थिर और अत्यधिक उत्तरदायित्व ले रखे हैं। उसकी कहानी यह दिखाती है कि सीमाएँ निर्धारित न कर पाना, युवा व्यावसायिक लोगों और सेवकाई में लगे लोगों के बीच अत्यधिक मानसिक थकावट के सबसे सामान्य कारणों में से एक है।

इन तीनों किरदारों में से प्रत्येक, अपने-अपने अनोखे तरीकों से अत्यधिक मानसिक थकावट की ओर आगे बढ़ रहा है। कुछ लोगों में अत्यधिक मानसिक थकावट के चिन्ह बहुत छोटे होते हैं और धीरे-धीरे समय के साथ-साथ बढ़ते चले जाते हैं, जबकि अन्य लोगों में यह अचानक से सामने आते हुए प्रतीत होते हैं। अत्यधिक मानसिक थकावट के लक्षणों को आरम्भ में ही समझ लेना अत्यन्त आवश्यक है, ताकि गहरे भावनात्मक या आत्मिक पतन से बचा जा सके।

अतः अत्यधिक मानसिक थकावट क्या होती है?

अत्यधिक मानसिक थकावट वह अवस्था है, जब आप अपनी क्षमता की सीमा तक पहुँच जाते हैं—भावनात्मक, मानसिक, शारीरिक, और यहाँ तक कि आत्मिक रूप से भी, जिसके परिणामस्वरूप गहरी थकान की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। यह लम्बे समय तक बने रहने वाले तनाव, अत्यधिक कार्यभार, या जीवनशैली में असन्तुलन के कारण उत्पन्न हो सकती है। अत्यधिक मानसिक थकावट के साथ प्रायः लगातार बनी रहने वाली थकान, सब कुछ छोड़कर “भाग जाने” की इच्छा, संसार के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण, मानसिक या भावनात्मक रूप से हार मान लेना, और यहाँ तक कि निराशा और हताशा तथा विनाश की भावनाएँ भी जुड़ी होती हैं (डब्लू. एच. ओ. 2019)। मसीही और गैर-मसीही—दोनों ही अत्यधिक मानसिक थकावट का अनुभव कर सकते हैं, और यह विषय विशेष रूप से पासबानी सेवकाई तथा कलीसियाई कार्य के सन्दर्भ में दिन-प्रतिदिन अधिक चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

जब हम पवित्रशास्त्र को पढ़ते हैं और अत्यधिक मानसिक थकावट का अध्ययन बाइबल आधारित तथा ईश्वर विज्ञान के दृष्टिकोण से करते हैं, तब हम इसे और भी गहरी श्रेणियों के माध्यम से पहचान कर इसका निदान कर सकते हैं। अत्यधिक मानसिक थकावट वह अवस्था है, जो तब उत्पन्न होती है जब…

— हम मनुष्य की सीमाओं और परमेश्वर पर उसकी निर्भरता के लिए परमेश्वर के द्वारा ठहराई गई व्यवस्था के बाहर जीने और कार्य करने का प्रयास करते हैं,
— हम ऐसे बोझ उठाते हैं, जिन्हें उठाने के लिए हमें नहीं बनाया गया है,
— हम कार्य और विश्राम के लिए परमेश्वर के द्वारा ठहराए गए नियम की अनदेखी करते हैं,
— हम सृष्टि को सृष्टिकर्ता से अधिक महत्व देते हैं,
— हम परमेश्वर की सामर्थ्य के स्थान पर अपनी ही सामर्थ्य पर भरोसा करते हैं,
— हम आत्मिक रूप से सूख जाते हैं, क्योंकि हम उसके साथ बिताए जाने वाले समय की तुलना में अपनी व्यस्तता को अधिक प्राथमिकता देते हैं।

पवित्रशास्त्र हमें यह समझने में सहायता करता है कि अत्यधिक मानसिक और शारीरिक थकावट के कारण शायद ही कभी एक आयामी होते हैं, वे शारीरिक, भावनात्मक, सम्बन्धों से जुड़े हुए, और गहराई से आत्मिक भी होते हैं। जब हम उस स्थिति में पहुँच जाते हैं, तब प्रश्न यह उठता है कि अत्यधिक मानसिक थकावट से इस प्रकार कैसे बाहर निकला जाए कि शरीर और आत्मा दोनों फिर से तरोताजा हो सकें। बाइबल आधारित बुद्धि यह सिखाती है कि ठीक होने की प्रक्रिया में में विश्राम, प्रार्थना, सब कुछ अपने नियन्त्रण में रखने की इच्छा को छोड़ देना, और आत्मिक अनुशासनों की ओर लौटना, तथा अपने बोझों में दूसरों को सहभागी बनाना सम्मिलित होता है।

मैंने स्वयं अत्यधिक मानसिक थकावट का अनुभव किया है, इस नाते मैं प्रार्थना करता हूँ कि जब आप इस जीवन-कौशल मार्गदर्शिका का अध्ययन करें, तब आप अत्यधिक मानसिक थकावट और तनाव को पहचानने के लिए बाइबल आधारित दृष्टिकोण और व्यवहारिक साधनों से तैयार हों, और अत्यधिक मानसिक थकावट के लक्षणों को स्पष्ट रूप से समझ सकें, और मसीह-केंद्रित तरीके से मानसिक थकावट से उबरना सीख सकें, ऐसा तरीका जो मनुष्य की सीमाओं और फलता-फूलता जीवन के लिए परमेश्वर की ठहराई हुई व्यवस्था, दोनों का सम्मान करता है।

चिन्तन के लिए प्रश्न:

  1. अत्यधिक मानसिक थकावट, तनाव, या कार्य से उत्पन्न होने वाली चिन्ता के साथ आपका अपना व्यक्तिगत अनुभव कैसा रहा है?
  2. आपको किस बात से तनाव होता है? आपको कैसे पता चलता है कि आप अपनी पूरी क्षमता तक पहुँच रहे हैं?
  3. सैली मानती है कि अत्यधिक मानसिक थकावट जैसी कोई वास्तविकता नहीं होती है। “कठोर परिश्रम करते रहने” या “हर हाल में आगे बढ़ते रहने” जैसी धारणाएँ लोगों के लिए अपनी देखभाल करना और भी कठिन कैसे बना देती हैं?
  4. अत्यधिक मानसिक थकावट की बाइबल आधारित या ईश्वर विज्ञान समझ में से कौन सी बात आपको सबसे अधिक प्रभावित करती है? और क्यों?

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