#76 बाइबल में: विवाह जो स्थिर बना रहता है

By Tiago Olivera

परिचय

 

मृत सागर की पुस्तकें प्राचीन यहूदी हस्तलिपियों का एक संग्रह हैं, जो सन् 1947 से यहूदिया के मरुभूमि क्षेत्र में स्थित कुमरान की गुफाओं में पाई गई थीं। इनमें अन्य बातों के साथ-साथ बाइबल की अब तक की सबसे सुरक्षित प्राचीन प्रतिलिपियाँ भी सम्मिलित हैं, जिनका मूल्य अनमोल है। परन्तु जब कुछ बद्दू चरवाहों को पहली हस्तलिपियाँ मिलीं, तब उन्होंने उन्हें केवल उपयोगी चमड़ा समझा और बैतलहम के एक मोची को बेच दिया। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि वे बहुमूल्य हस्तलिपियाँ केवल इसलिए जूतों की मरम्मत में प्रयोग होने वाली थीं, क्योंकि वे लोग उनका वास्तविक मूल्य नहीं पहचान पाए थे?

यह सच्ची घटना आधुनिक विवाह का एक दुःखद दृष्टान्त प्रस्तुत करती है। जिस प्रकार मोची ने उन हस्तलिपियों के साथ किया, उसी प्रकार लोग भी किसी महिमामय वस्तु को लेकर उसे अपनी इच्छाओं के अनुसार ढाल लेते हैं। वे एक पवित्र वाचा को अपनी व्यक्तिगत अभिलाषाओं का मंच बना देते हैं, जो सांस्कृतिक अपेक्षाओं और काल्पनिक आदर्शों से प्रभावित होती हैं। लोग अपने विवाह को लेकर अनेक सपने संजोते हैं और योजनाएँ बनाते हैं, वे किससे विवाह करना चाहते हैं, कहाँ रहना चाहते हैं, कितने बच्चे चाहते हैं, आदि। अब हम ऐसे “मनचाहे” विवाहों के आदी हो गए हैं, जहाँ हम स्थान, अतिथियों की सूची, प्रचारक, आराधना का क्रम, गीत, और यहाँ तक कि प्रतिज्ञाएँ भी स्वयं चुनते हैं। मानो परमेश्वर को केवल हमारी योजनाओं पर आशीष देने के लिए बुलाया जाता है। व्यक्तिगत सुख और अपने सपनों को पूरा करना ही विवाह का मुख्य अर्थ बन गया है। इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं कि विवाह संकट में है, यहाँ तक कि मसीही समाज में भी।

यदि मैं आपसे पूछूँ, कि “बाइबल के अनुसार विवाह क्या है?” तो क्या आप इसका उत्तर बाइबल के दृष्टिकोण से दे पाएँगे? मेरा अभिप्राय केवल विवाह के विषय में सामान्य सच्चाइयों से नहीं है, परन्तु उस विशेष उद्देश्य से है जिसके लिए विवाह की रचना की गई है। जब आप विवाह की तैयारी कर रहे होते हैं, तब सबसे महत्वपूर्ण बात यह जानना होता है कि आप किसके लिए तैयारी कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि हमारे विवाह केवल अच्छी शुरुआत ही न करें, वरन् उससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि उसका अन्त भी अच्छा हो। हम ऐसा दृढ़ आधार चाहते हैं जो जीवन भर बना रहे।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए, इस जीवन-कौशल मार्गदर्शिका का अधिकाँश भाग हम विवाह को समझने में लगाएँगे। हम यह सीखेंगे कि विवाह की रचना ऐसे बड़े काम के रूप में की गई है, जो हमारे सपनों से कहीं बढ़कर है। बाइबल में विवाह का अर्थ समझने के लिए हमें परमेश्वर के वचन की ओर, विशेषकर उत्पत्ति के पहले तीन अध्यायों की ओर जाना होगा। ऐसा करके हम यीशु के उदाहरण का अनुसरण करते हैं। जब उससे तलाक के विषय में प्रश्न किया गया, तब उसने उत्तर दिया: “परन्तु आरम्भ से ऐसा नहीं था” (मत. 19:8ब)।

यह जीवन कौशल मार्गदर्शिका सृष्टि, पतन, और फिर छुटकारे की क्रमबद्ध शिक्षा का अनुसरण करती है। विवाह को समझने के लिए हमें उसकी रचना, उसके असफल हो जाने, और उस कारण को समझना होगा जिसमें मसीह उसे छुटकारा देता है। पूर्णता हमारी आशा है — वही वास्तविकता जिसे हमारे विवाहों को दर्शाना चाहिए और जिसका हमें पहले से अनुमान होना चाहिए।

यह मार्गदर्शिका बाइबल आधारित विवाह अध्ययन के रूप में व्यवस्थित की गई है। मैं आपको आमंत्रित करता हूँ कि आप अपनी बाइबल खोलें और साथ के साथ अध्ययन करते जाएँ। जब हम इस पाठ का अनुसरण करेंगे, तब हमारा ध्यान इसी विषय पर टिका रहेगा: अर्थात् विवाह। हम पाठ के प्रत्येक विवरण पर विचार नहीं करेंगे; इसका कारण यह नहीं कि वे महत्वपूर्ण नहीं हैं, परन्तु इसलिए कि हमारे पास उतना समय नहीं है, और वे उस मुख्य विषय का हिस्सा भी नहीं हैं जिसे हम समझना चाहते हैं।

यदि परमेश्वर की इच्छा हुई, तो इस जून में मार्टा और मैं अपने विवाह के 25 वर्ष पूरे करेंगे। ये वे बातें हैं जिन्हें मैं उस समय सीखना चाहता था जब मैं अविवाहित था, और मसीही सम्बन्धों के विषय में सलाह पाना चाहता था। काश, तब किसी ने मुझे सलाह दी होती। इस मार्गदर्शिका में लिखी गई सच्चाइयों ने मसीही सम्बन्ध के विषय में हमारी समझ को बदल दिया है, और मैं प्रार्थना करता हूँ कि वे आपके लिए भी ऐसा ही करें।

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