#77 आलोचना का सामना कैसे करें—राय के द्वारा आगे बढ़ना

By Jamie Southcombe

परिचय

 

“यह बिलकुल भी सही नहीं है; आपको इस पूरे काम को फिर से करना होगा।” जब मैंने पहली बार ये शब्द सुने, तो ये मुझे बहुत चुभे, परन्तु मैं जानता था कि ये सच थे। मैं एक प्रशिक्षु मुनीम था और मैंने अपने कार्य प्रबन्धक को उस काम का एक ऐसा हिस्सा सौंपा था, जिसके बारे में मुझे मालूम था कि वह मेरा सबसे अच्छा काम नहीं था। उसके शब्द कठोर, परन्तु सही थे। और उस पूरे लेखे-जोखे पर फिर से काम करने के बाद, मैंने एक बहुमूल्य सबक सीखा कि: अपने उच्च अधिकारी को कोई परियोजना सौंपने से पहले हमें उस पर और अधिक मेहनत करनी चाहिए। बाद में उस पल ने आलोचना का सामना करने की मेरी समझ को, केवल भावनात्मक रूप से प्रतिक्रिया देकर नहीं, बल्कि उससे सीखकर और सुधार करके आकार दिया।

किसी तरह की आलोचना का अनुभव करने के लिए आपको लम्बा जीवन जीने की आवश्यकता नहीं है। और यह बात हमेशा दयालुतापूर्ण नहीं लगती, और न ही यह हमेशा उचित होती है। कभी-कभी यह सही होती है, और कई बार सही नहीं होती, और आमतौर पर यह दोनों का मिला-जुला रूप होता है। परन्तु एक बात तो निश्चित है कि: हम सभी को अपने जीवन में किसी न किसी तरह की आलोचना का सामना करना पड़ेगा। इसी कारण से विनम्रता, बाइबल-आधारित ज्ञान और भावनात्मक परिपक्वता के साथ आलोचना का सामना करना सीखना इतना महत्वपूर्ण हो जाता है।

अत:, प्रश्न यह है कि जब हमारे सामने आलोचना आए, तो हम कैसी प्रतिक्रिया दें? और, हे मेरे मित्र, ऐसा अवश्य होगा। टिप्पणियाँ चाहे सही हों या गलत, कोमल हों या तीखी, हमें इस बात पर विचार करना होगा कि ऐसे तरीकों से आलोचना का सामना कैसे करें, जो परमेश्वर का आदर करें और हमारे चरित्र को आकार दें।

सबसे पहले, आइए आलोचना की एक परिभाषा पर विचार करें। आलोचना वे शब्द हैं, जो किसी व्यक्ति या उसकी गतिविधि में किसी वास्तविक या कथित कमी को उजागर करते हैं।

और इस तरह समझने पर, आलोचना को आमतौर पर स्वाभाविक रूप से नकारात्मक माना जाता है। अर्थात् कुछ ऐसा, जिससे हर कीमत पर बचा जाना चाहिए। इसी कारण से हममें से अधिकांश लोग स्वाभाविक रूप से आलोचना से कतराते हैं। हम सुधार की आवश्यकता बताने वाले शब्दों के बजाय, बड़ाई के शब्द सुनने की लालसा रखते हैं। वैसे भी, कौन अपनी गलतियों पर ध्यान देना चाहता है, या अपनी विफलताओं के बारे में किसी व्यक्ति के साथ चिन्ता से भरी बातचीत करना चाहता है?

परन्तु मैं यह तर्क देना चाहता हूँ कि जबकि आलोचना नकारात्मक हो सकती है, फिर भी उसे सकारात्मक बनाया जा सकता है। अर्थात्, हम किसी व्यक्ति या उसकी गतिविधि में किसी कमी को धर्मी तरीके से उजागर कर सकते हैं, जो उनके भले के लिए हो। और इसके अलावा, परमेश्वर के द्वारा—अनुग्रह में होकर—हमें परिपक्व बनाने के लिए अधार्मिकता से भरी आलोचना का भी उपयोग किया जा सकता है, कि हम मसीह की समानता में बढ़ सकें। आलोचना का सामना कैसे करें, इस बात को समझना चिन्ता करने या रक्षात्मक होने के बजाय हमें बढ़ोतरी के लिए एक ढाँचा प्रदान करता है।

और इस जीवन कौशल मार्गदर्शिका का लक्ष्य आपको उस समय के लिए सुसज्जित होने में सहायता करना है, जब आपको आलोचना से भरे शब्दों का सामना करना पड़े, और उन समयों के लिए भी तैयार होने में सहायता करना है, जब आपको दूसरों की आलोचना करनी पड़े। मेरा उद्देश्य आपको ऐसे साधन उपलब्ध कराना है, जो आपको विभिन्न प्रकार की आलोचनाओं को पहचानने में सहायता करें, और आपको बुद्धिमानी, शालीनता तथा सच्चाई के साथ उनका उत्तर देने के तरीके सुझाएँ।

रणनीति

यह जीवन कौशल मार्गदर्शिका पाँच हिस्सों में बँटी होगी। सबसे पहली बात, हम अपनी अपेक्षाओं को ठीक करेंगे, ताकि आलोचना आने पर हम हैरान न हों। दूसरी बात, हम अलग-अलग प्रकार की आलोचनाओं पर विचार करेंगे। तीसरी बात, हम धार्मिकता से भरी आलोचना को समझने के तरीके पर विचार करेंगे। चौथी बात, हम अधार्मिकता से भरी आलोचना से निपटने के तरीके पहचानेंगे। और अन्त में, हम देखेंगे कि जब आपको दूसरों की आलोचना करने के लिए कहा जाए, तो कोमलता और स्पष्टता के साथ आलोचना का सामना कैसे करें।

आइए, आरम्भ करें:

 

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