#60 आलसी होना कैसे छोड़ें: उद्देश्य के साथ जीवन जिएँ

By Taylor Hartley (टेलर हार्टली)

परिचय

हर सुबह लगभग साढ़े चार बजे, मिलर्सबर्ग, ओहायो के ठीक पूर्व में, मेरे दादा जी प्रभु के साथ समय बिताने के लिए जागते हैं और फिर अपने कार्य पर चले जाते हैं। उनकी आयु अस्सी वर्ष है। संभवतः आप सोच रहे होंगे, “वाह, इस व्यक्ति को अपनी सेवानिवृत्ति के लिए बेहतर योजना बनानी चाहिए थी।” परन्तु बात यह है कि—पैसा उनकी प्रेरणा नहीं है। वह काम करते हैं, क्योंकि यही उनकी पहचान है—यही उनका काम है। उन्हें आलसी बने रहने में कोई रुचि नहीं है। अब वह न तो घड़ी देखकर काम करते हैं, न ही जनवरी में किसी न्योक्ता से उन्हें वेतन और कर विविरण फॉर्म मिलता है, और आप उन्हें काम के दौरान कभी भी आलसी नहीं पाएँगे। लेकिन परमेश्वर के वचन पढ़ने और प्रार्थना में समय बिताने के बाद, वह अपनी गाड़ी में बैठकर हमारे शहर के ठीक उत्तर में स्थित एक कस्बे के बॉब इवांस के भोजनालय में जाते हैं, जहाँ वह दो में से किसी एक समूह के सज्जनों—जैसे नल ठीक करने वाले मिस्त्री और पासबानों (या कभी-कभी किसी रेल अभियन्ता) के साथ भेंट करने के लिए पहुँच जाते हैं।

आप देखिए, साठ वर्ष पहले मेरे दादाजी ने नलसाज का काम आरम्भ किया था, पहले एक सहायक के रूप में, और फिर अंततः एक मुख्य नलसाज अर्थात् प्लंबर बन गए। आज वह अपनी प्रशिक्षण देने वाली संस्था के माध्यम से नलसाजों को पढ़ाते हैं, जो ओहायो के नलसाजों के लिए है, जिन्हें हर वर्ष निश्चित घण्टों की अतिरिक्त शिक्षा लेना आवश्यक होता है। लगभग उसी समय के आसपास उन्हें सेवकाई के लिए बुलाहट हुई, और इसलिए उन्होंने अपने परिवार को साथ लिया और वर्जीनिया के लिंचबर्ग शहर में चले गए, जहाँ उन्होंने ईश्वर विज्ञान की शिक्षा प्राप्त की। तब से वह विश्वासयोग्यता के साथ पासबानी और प्रचार करते चले आ रहे हैं। आज वह ओहायो के वाड्सवर्थ में स्थित रिजवुड बैपटिस्ट चर्च के अल्पकालिक पास्टर के रूप में सेवकाई कर रहे हैं।

मैं आपको यह सब क्यों बता रहा हूँ? सच कहूँ तो, मुझे अपने दादाजी पर गर्व है। उससे भी बड़ी बात यह है कि मैं उनके ही जैसा बनना चाहता हूँ। मैंने अपना पूरा जीवन उन्हें देखते हुए बिताया है और यह आशा की है कि मैं भी उन्हीं के समान परिश्रमी बनूँगा ताकि मुझे कभी स्वयं से यह न पूछना पड़े कि “मैं इतना आलसी क्यों हूँ?” इस प्रकार आप उन्हें मेरे मार्गदर्शक के रूप में समझ सकते हैं। सच कहूँ तो, मुझे बहुत ही अच्छा मार्गदर्शक मिला है।

इसलिए जब मुझे आलस्य छोड़कर परिश्रम करने के विषय में यह मार्गदर्शिका लिखने का अवसर मिला, तो मैंने तुरन्त इसे स्वीकार कर लिया। वैसे मैं कोई परिपूर्ण व्यक्ति नहीं हूँ। क्योंकि आलस्य पर विजय पाने और परिश्रम करने के विषय में मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है। मेरा अनुमान है कि आप भी मेरे ही समान हैं—“मैं आलसी हूँ” यह स्वीकार करने के बजाय कार्य-नैतिकता के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं। मेरे पास आपके लिए एक शुभ सन्देश है। मेरे जीवन में उत्तम कार्य-नैतिकता के अद्भुत उदाहरण हैं, और आशा है कि आपके जीवन में भी होंगे। इसके अतिरिक्त, बाइबल में इस विषय पर बहुत कुछ कहा गया है, और आलस्य के विषय में कई आयतें भी मिलती हैं। इसीलिए इस मार्गदर्शिका में हम अपना ध्यान बाइबल में वर्णन किए गए आलस्य पर केंद्रित करेंगे।

हम पतन से पहले और उसके बाद हमारे कार्य के लिए परमेश्वर के उद्देश्य पर विचार करते हुए आरम्भ करेंगे। इसके बाद, हम इस विषय को ध्यान से देखेंगे कि आलस्य क्या है और उसके कारण क्या हैं, साथ ही उन परिणामों पर भी विचार करेंगे जो इसके कारण होते हैं। आलस्य पर विचार करने के बाद, हम परिश्रम के क्यों और कैसे पर ध्यान देंगे। और अन्त में हम कुछ व्यावहारिक तरीकों पर विचार करेंगे कि आलस्य पर कैसे विजयी हों और परिश्रम तथा अनुशासन के क्षेत्र में कैसे आगे बढ़ा जाए। इसलिए बिना देर किए आरम्भ करते हैं।

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