#81 प्रतिशोध लेने से बचना: न्याय परमेश्वर पर छोड़ देना

By Dr. Richard John Perhai, Dr. Larry Oats

परिचय

जिम के हाथ काँप रहे थे। वह एक हट्टा-कट्टा व्यक्ति है, उस प्रकार का मनुष्य जिसने चालीस वर्ष तक घरों के ढाँचे बनाने का काम किया है। उसकी उँगलियों के जोड़ों पर पड़े निशान घावों और कठिन परिश्रम की कहानी बताते हैं। वह सामान्यतः अधिक नहीं बोलता है। वह अपने काम को ही बोलने देता है। हम अपने घर के पीछे वाले बरामदे में बैठे थे। सूर्य धीरे-धीरे अस्त हो रहा था, और वह मुझे अपने व्यापारिक साथी के विषय में बताने का प्रयास कर रहा था। वह व्यक्ति एक बड़े काम का अन्तिम भुगतान की धनराशि लेकर भाग गया था। वह सब कुछ ले गया। लकड़ी के बिल अभी भी जिम की मेज पर ही बिना भुगतान के पड़े हुए थे, और मानो वे उसका मजाक उड़ा रहे थे।

“मैं उसे मिट्टी में मिला देना चाहता हूँ”, जिम ने कहा। उसने मेरी ओर नहीं देखा। वह अपने जूतों के बीच पड़ी हुई मिट्टी को देख रहा था। “मैं देखना चाहता हूँ कि उसका जीवन धुएँ में उड़ जाए। मैं वह व्यक्ति बनना चाहता हूँ जिसके हाथ में माचिस हो।”

मैं समझता हूँ। मेरा कहने का अर्थ यह है, कि मैं सचमुच उस भीतर उठने वाली जलन को समझता हूँ। यह एक विशेष प्रकार के न्याय की भूख होती है, जो ऐसा प्रतीत होती है कि मानो आपके सीने में बने हुए खालीपन को भर देगी। आप सोचते हैं कि यदि आप पलटकर वार करेंगे—यदि आप हिसाब बराबर कर देंगे—तो मन का बोझ हल्का हो जाएगा। परन्तु ऐसा नहीं होता है। अन्ततः आप उसी व्यक्ति से बँध जाते हैं जिससे आप घृणा करते हैं। आप जागते हैं तो उसी के विषय में सोचते हैं। आप सोते हैं तो उसी संघर्ष को मन में दोहराते रहते हैं। उसने पहले ही आपका धन ले लिया है; अब वह आपकी आत्मा को भी ले रहा है। यह ऐसी सड़न है जो आपके हृदय के भीतरी हिस्से से आरम्भ होती है और धीरे-धीरे ऊपर की ओर फैलती चली जाती है।

परमेश्वर न्यायी है। हम इस बात को कलीसिया में भी कहते हैं, इसे अपने विश्वास-वचनों में भी सम्मिलित करते हैं, परन्तु जब लकड़ी के बिलों का भुगतान नहीं होता, तब हम वास्तव में इस पर विश्वास नहीं करते। हम सोचते हैं कि हमें उसका काम स्वयं करना होगा, क्योंकि वह वास्तविक संसार की उलझनों के लिए बहुत धीमे हैं या संभवतः बहुत अधिक कोमल हैं। परन्तु हमारे तराजू टूटे हुए हैं। जो व्यक्ति हमारे साथ अन्याय करता है, उसके लिए हम पूर्ण न्याय चाहते हैं और अपने लिए बहुत अधिक दया चाहते हैं। यह न्याय नहीं है; यह तो केवल और भी अधिक पाप है।

वाटिका में हुए पतन के समय से ही यह संसार पूरी तरह बिगड़ चुका है। लोग चोरी करते हैं। जीवनसाथी झूठ बोलते हैं। माता-पिता अपने उत्तरदायित्वों में असफल हो जाते हैं। और ऐसी न जाने कितनी और अव्यवस्थाएँ हैं। यह पतित संसार में जीवन बिताने का संघर्ष है, और यही आपको एक गहरी खाई में पहुँचा देता है। मैंने जिम से कहा कि उसे यह सब छोड़ देना चाहिए। मैंने उससे कहा, कि “आप वह काम करने का प्रयास कर रहे हैं जिसके लिए आपको नहीं ठहराया गया है। परमेश्वर ने कहा है कि पलटा लेना उसी का काम है। उसे ही पलता लेने दें।”

यदि आप वास्तव में उस पर भरोसा करते हैं, तो यह बड़ी शान्ति की बात है। इसका अर्थ है कि आपको अपने साथ हुए हर अन्याय का लेखा लेने वाला व्यक्ति बनकर जागते रहने की आवश्यकता नहीं है। कोई भी व्यक्ति अपने किए से बच कर नहीं सकता है। प्रत्येक पाप का दण्ड दिया जाता है—या तो मसीह ने क्रूस पर उसके लिए वह दण्ड सह लिया, या फिर उस व्यक्ति को स्वयं उसका सामना करना पड़ेगा। परमेश्वर का न्याय-तराजू सिद्ध है। हमारे तराजू तो अस्त-व्यस्त हैं।

जिम ने पूछा कि इसे कैसे छोड़ दूँ। उसे लगा कि वह निर्बल हो रहा है, मानो वह हार मानकर पीछे हट रहा है। परन्तु मेरी बात सुनिए: चुप रहना चीखने से अधिक साहस का काम है। क्षमा कोई भावना नहीं है। यह एक निर्णय है। यह आपके अपने हृदय का प्रबंध है। यदि आप कड़वाहट को अपने भीतर रहने देते हैं, तो आप भीतर से सड़ जाएँगे। आप एक कठोर और निर्दयी व्यक्ति बन जाएँगे। आपके बच्चे भी आपके निकट नहीं रहना चाहेंगे। आप ऐसे चोर के दास बन जाएँगे जो आपके विषय में सोच भी नहीं रहा है।

क्रूस को देखिए। परमेश्वर ने केवल “इसे जाने नहीं दिया।” उसने अपने ही पुत्र पर दण्ड की आग उँडेल दी। यदि आप क्षमा नहीं करेंगे, या यदि आप उन मार्गों का आदर नहीं करेंगे जिन्हें परमेश्वर ने आपके लिए निर्धारित किया गया है, तो आप यह कह रहे हैं कि यीशु पर्याप्त नहीं था। आप यह कह रहे हैं कि आपका न्याय उससे भी उत्तम है। ऐसी स्थिति में खड़ा होना भय उत्पन्न करने वाली बात है।

जिम को इसे समझने में बहुत समय लगा। हम प्रत्येक सप्ताह साथ में चाय पीते थे। कुछ दिन तक तो वह ठीक रहता था। परन्तु कुछ दिन के बाद वह उस व्यक्ति का चित्र देखता तो उसके भीतर फिर से क्रोध की आग भड़क उठती थी। परन्तु वह न्यायी पर भरोसा करना सीखने लगा था। उसने उस कार्य पर ध्यान केन्द्रित किया जो अभी उसके सामने था। वह समझ गया था कि उसका जीवन अब भी एक वरदान है। वह पीड़ित नहीं था। वह केवल एक ऐसा मनुष्य था जो चरवाहे का अनुसरण कर रहा था। मन में पाली हुई कड़वाहट को छोड़ दें। यह आपके कन्धों के लिए बहुत भारी बोझ है। न्यायी को अपना कार्य करने दें।

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