#98 संगति के बारे में बाइबल क्या कहती है?

By Joshua Chatman (जोशुआ चैटमैन)

परिचय

सन् 2015 की एक रात में, मेरी पत्नी और मैं अपने भोजनकक्ष की मेज पर बैठे हुए अपने अकेलेपन पर दु:खी हो रहे थे। हाँ, हम एक दूसरे के साथ थे, परन्तु हमारे पास कोई संगति नहीं थी। हमारी नियमित दिनचर्या में सोकर उठना, कसरत करना, काम करना, भोजन करना, सो जाना, और इसे फिर से दोहराना था। सप्ताह के अन्त की हमारी दिनचर्या में घर की साफ-सफाई करना, किराने का सामान खरीदना, और कलीसिया जाना भर था। हम लोगों के साथ केवल काम पर और कलीसिया में ही समय बिताते थे। उस रात अपने भोजनकक्ष की मेज पर बैठे हुए हमें बहुत ही पीड़ादायी रूप से यह एहसास हुआ कि हम कितने अकेले हैं। उस रात, हमें बहुत पीड़ादायी रूप से यह एहसास हुआ कि हमारे पास कोई संगति नहीं है। उस रात, हमें बहुत पीड़ादायी रूप से यह एहसास हुआ कि हम अकेलेपन में जी रहे हैं।

परमेश्वर की दया से, हमें बहुत पीड़ादायी रूप से यह भी एहसास हुआ कि हम दूसरों के लिए एक संगति बनने को प्राथमिकता नहीं दे रहे थे। हमने दूसरों के साथ समय बिताने की पहल नहीं की। हमने कलीसिया के लोगों के साथ बातचीत करने की पहल नहीं की। हमने कलीसिया के सदस्यों को अपने घर पर आमंत्रित नहीं किया। हम उन लोगों के साथ मित्रता नहीं बढ़ा रहे और इसे गहरा नहीं कर रहे, जिन्हें हम अपने निकट मानते थे। हम अकेलेपन से उबरने के लिए संघर्ष कर रहे थे, क्योंकि हम इसे हमारे साथ होने की प्रतीक्षा कर रहे थे, इसके बजाय कि हम स्वयं संगति के अर्थ की खोज करें।

उस रात, प्रभु ने हमें विनम्र सेवा और त्यागपूर्ण प्रेम के उसके उदाहरण पर विचार करने के लिए प्रेरित किया (मर. 10:45; फिलि. 2:1-11)। हमने संगति के मामले में अपनी आत्म-केन्द्रितता के लिए पश्चाताप किया। और हमने यह ठान लिया कि हम दूसरों के लिए एक संगति बनेंगे और हमारे लिए भी एक संगति उपलब्ध करवाने के लिए परमेश्वर पर भरोसा रखेंगे।

आपका क्या विचार है? क्या आप अकेले हैं? क्या आपकी जीवनशैली अकेलेपन वाली है? शायद आप पूछ रहे होंगे, “मुझे कलीसिया में भी अकेलापन क्यों महसूस होता है?” या आप यह खोज रहे होंगे कि भीड़ में भी अकेलेपन का एहसास कैसे दूर किया जाए।

यदि आप अपनी दिन-दर्शिका देखकर अपने जीवन के पिछले दो-तीन महीनों को परखें, तो यह लोगों के साथ आपके रिश्तों के बारे में क्या उजागर करता है? यह मसीही संगति और मसीही मेल-जोल को दी गई आपकी प्राथमिकता के बारे में क्या कहता है? उस पर कितने नाम लिखे हुए हैं? आपने कितनी बार कलीसिया के सदस्यों को या किसी परिवार को अपने घर पर आमंत्रित किया है? आप कितनी बार उन्हीं लोगों से दोबारा मिले हैं? आपने कितनी बार लोगों के साथ सप्ताह के अन्त का समय बिताया है? यदि आपने लोगों के साथ बहुत कम समय बिताया है, तो शायद आप अकेलेपन का जीवन जी रहे हैं।

अकेलेपन का अर्थ दूसरों से अलग-थलग हो जाना है। और सच बात तो यह है कि यह अच्छा नहीं है। यह मानवता के लिए परमेश्वर की भली योजना के विरुद्ध जाता है। उत्पत्ति 1 और 2 अध्यायों में, परमेश्वर ने एक परिपूर्ण संसार बनाया। सात बार उसने अपने सृजन-कार्य का मूल्यांकन करके उसे “अच्छा” कहा (उत्प. 1:4, 10, 12, 18, 21, 25, 31)। पहली बार जब परमेश्वर ने कहा कि कोई बात अच्छी नहीं है, तो वह तब था, जब उसने कहा, “आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं” (उत्प. 2:18)। बाइबल के आधार पर संगति की यही नींव है। परमेश्वर ने हमें अकेले रहने के लिए नहीं बनाया था।

परमेश्वर ने हमें लोगों के साथ रिश्ते रखने के लिए बनाया है। आपका जन्म एक परिवार में हुआ, और वह परिवार एक ऐसे मोहल्ले में रहता था, जो एक समाज का हिस्सा था। इसी कारण से, अकेलापन कोई ऐसी परिस्थिति या अवस्था नहीं है, जिसका पीछा किया जाए, बल्कि इससे बचना चाहिए। कई लोग पूछते हैं, “क्या अकेलापन एक पाप है या फिर यह एक दौर है?” जबकि शान्ति के भी कुछ दौर होते हैं, परन्तु सामाजिक मेल-जोल का महत्व हमारे स्वभाव में ही बुना हुआ है।

अक्सर, अकेलापन किसी अनुशासनहीनता का दुष्परिणाम होता है। मैं कक्षा में एक शरारती बच्चा था, इसलिए मुझे इसका दुष्परिणाम अक्सर विद्यालय के भीतर ही निलम्बन के रूप में मिलता था। मुझे एक छोटे से कमरे में, सबसे दूर एक शान्त जगह पर बैठना पड़ता था, और कभी-कभी मुझे पूरे विद्यालय के समय तक वहीं रहना पड़ता था। यह बहुत ही दु:खद अनुभव था। ऐसा क्यों था? क्योंकि मेरा किसी भी व्यक्ति से कोई मेल-जोल नहीं होता था। एकांत कारावास के बारे में सोचें, जहाँ एक बन्दी को दिन के 22-24 घण्टे एक कोठरी में रखा जाता है और उसका लोगों से बहुत ही कम सम्पर्क होता है। इस तरह का दण्ड उत्पत्ति 2:18 को दोहराता है: “आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं।” जब हम बाइबल के आधार पर अकेलेपन को देखते हैं, तो हम पाते हैं कि यह अक्सर एक ऐसी अवस्था होती है, जिससे परमेश्वर अपने लोगों को छुटकारा देता है।

यद्यपि अकेले रहना अच्छा नहीं है, फिर भी ऐसा करना बहुत आसान है। अकेलापन आरामदायक और सुविधाजनक होता है। आपको लोगों की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती। आपको यह निर्णय लेते समय दूसरों के बारे में नहीं सोचना पड़ता कि कहाँ खाना है, क्या देखना है, या कब कसरत करनी है। अकेले रहने में कम गड़बड़ होती है। फिर भी, यह अकेलेपन से भरा और बिना आनन्द वाला भी होता है, और यह परमेश्वर के स्वरूप-धारी लोगों के लिए और विशेष रूप से उसकी कलीसिया के लिए उसकी भली योजना के विपरीत होता है। सामाजिक चिन्ता या संगति में अपनी कमजोरी के डर पर काबू पाना कठिन हो सकता है, परन्तु इसका दूसरा विकल्प तो जीवन का एक खोखला रूप है, जो परमेश्वर ने सोचा था।

अकेलापन विनाश की ओर ले जाता है। एक नीतिवचन अकेलेपन के खतरे से चिताने के लिए एक ऊँची आवाज वाले भोंपू की तरह गूँजता है। नीतिवचन 18:1 कहता है, “जो दूसरों से अलग हो जाता है, वह अपनी ही इच्छा पूरी करने के लिये ऐसा करता है, और सब प्रकार की खरी बुद्धि से बैर करता है।” यह वचन हमारी आत्मिक सुरक्षा के लिए संगति के महत्व पर जोर देता है।

तो हम अकेलेपन से कैसे बचें? ऐसा लोगों के साथ रिश्ते बनाने और उन्हें प्राथमिकता देने से होता है। आप संगति में कैसे जुड़ते हैं? ऐसा दूसरों के लिए एक संगति बनकर होता है। बाइबल संगति के बारे में क्या कहती है, इसे समझने का आरम्भ इस बात को महसूस करने से होता है कि हमें दूसरों की ओर वैसे ही आगे बढ़ने के लिए बुलाया गया है, जैसे मसीह हमारी ओर बढ़ा था।

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