#98 संगति के बारे में बाइबल क्या कहती है?
परिचय
सन् 2015 की एक रात में, मेरी पत्नी और मैं अपने भोजनकक्ष की मेज पर बैठे हुए अपने अकेलेपन पर दु:खी हो रहे थे। हाँ, हम एक दूसरे के साथ थे, परन्तु हमारे पास कोई संगति नहीं थी। हमारी नियमित दिनचर्या में सोकर उठना, कसरत करना, काम करना, भोजन करना, सो जाना, और इसे फिर से दोहराना था। सप्ताह के अन्त की हमारी दिनचर्या में घर की साफ-सफाई करना, किराने का सामान खरीदना, और कलीसिया जाना भर था। हम लोगों के साथ केवल काम पर और कलीसिया में ही समय बिताते थे। उस रात अपने भोजनकक्ष की मेज पर बैठे हुए हमें बहुत ही पीड़ादायी रूप से यह एहसास हुआ कि हम कितने अकेले हैं। उस रात, हमें बहुत पीड़ादायी रूप से यह एहसास हुआ कि हमारे पास कोई संगति नहीं है। उस रात, हमें बहुत पीड़ादायी रूप से यह एहसास हुआ कि हम अकेलेपन में जी रहे हैं।
परमेश्वर की दया से, हमें बहुत पीड़ादायी रूप से यह भी एहसास हुआ कि हम दूसरों के लिए एक संगति बनने को प्राथमिकता नहीं दे रहे थे। हमने दूसरों के साथ समय बिताने की पहल नहीं की। हमने कलीसिया के लोगों के साथ बातचीत करने की पहल नहीं की। हमने कलीसिया के सदस्यों को अपने घर पर आमंत्रित नहीं किया। हम उन लोगों के साथ मित्रता नहीं बढ़ा रहे और इसे गहरा नहीं कर रहे, जिन्हें हम अपने निकट मानते थे। हम अकेलेपन से उबरने के लिए संघर्ष कर रहे थे, क्योंकि हम इसे हमारे साथ होने की प्रतीक्षा कर रहे थे, इसके बजाय कि हम स्वयं संगति के अर्थ की खोज करें।
उस रात, प्रभु ने हमें विनम्र सेवा और त्यागपूर्ण प्रेम के उसके उदाहरण पर विचार करने के लिए प्रेरित किया (मर. 10:45; फिलि. 2:1-11)। हमने संगति के मामले में अपनी आत्म-केन्द्रितता के लिए पश्चाताप किया। और हमने यह ठान लिया कि हम दूसरों के लिए एक संगति बनेंगे और हमारे लिए भी एक संगति उपलब्ध करवाने के लिए परमेश्वर पर भरोसा रखेंगे।
आपका क्या विचार है? क्या आप अकेले हैं? क्या आपकी जीवनशैली अकेलेपन वाली है? शायद आप पूछ रहे होंगे, “मुझे कलीसिया में भी अकेलापन क्यों महसूस होता है?” या आप यह खोज रहे होंगे कि भीड़ में भी अकेलेपन का एहसास कैसे दूर किया जाए।
यदि आप अपनी दिन-दर्शिका देखकर अपने जीवन के पिछले दो-तीन महीनों को परखें, तो यह लोगों के साथ आपके रिश्तों के बारे में क्या उजागर करता है? यह मसीही संगति और मसीही मेल-जोल को दी गई आपकी प्राथमिकता के बारे में क्या कहता है? उस पर कितने नाम लिखे हुए हैं? आपने कितनी बार कलीसिया के सदस्यों को या किसी परिवार को अपने घर पर आमंत्रित किया है? आप कितनी बार उन्हीं लोगों से दोबारा मिले हैं? आपने कितनी बार लोगों के साथ सप्ताह के अन्त का समय बिताया है? यदि आपने लोगों के साथ बहुत कम समय बिताया है, तो शायद आप अकेलेपन का जीवन जी रहे हैं।
अकेलेपन का अर्थ दूसरों से अलग-थलग हो जाना है। और सच बात तो यह है कि यह अच्छा नहीं है। यह मानवता के लिए परमेश्वर की भली योजना के विरुद्ध जाता है। उत्पत्ति 1 और 2 अध्यायों में, परमेश्वर ने एक परिपूर्ण संसार बनाया। सात बार उसने अपने सृजन-कार्य का मूल्यांकन करके उसे “अच्छा” कहा (उत्प. 1:4, 10, 12, 18, 21, 25, 31)। पहली बार जब परमेश्वर ने कहा कि कोई बात अच्छी नहीं है, तो वह तब था, जब उसने कहा, “आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं” (उत्प. 2:18)। बाइबल के आधार पर संगति की यही नींव है। परमेश्वर ने हमें अकेले रहने के लिए नहीं बनाया था।
परमेश्वर ने हमें लोगों के साथ रिश्ते रखने के लिए बनाया है। आपका जन्म एक परिवार में हुआ, और वह परिवार एक ऐसे मोहल्ले में रहता था, जो एक समाज का हिस्सा था। इसी कारण से, अकेलापन कोई ऐसी परिस्थिति या अवस्था नहीं है, जिसका पीछा किया जाए, बल्कि इससे बचना चाहिए। कई लोग पूछते हैं, “क्या अकेलापन एक पाप है या फिर यह एक दौर है?” जबकि शान्ति के भी कुछ दौर होते हैं, परन्तु सामाजिक मेल-जोल का महत्व हमारे स्वभाव में ही बुना हुआ है।
अक्सर, अकेलापन किसी अनुशासनहीनता का दुष्परिणाम होता है। मैं कक्षा में एक शरारती बच्चा था, इसलिए मुझे इसका दुष्परिणाम अक्सर विद्यालय के भीतर ही निलम्बन के रूप में मिलता था। मुझे एक छोटे से कमरे में, सबसे दूर एक शान्त जगह पर बैठना पड़ता था, और कभी-कभी मुझे पूरे विद्यालय के समय तक वहीं रहना पड़ता था। यह बहुत ही दु:खद अनुभव था। ऐसा क्यों था? क्योंकि मेरा किसी भी व्यक्ति से कोई मेल-जोल नहीं होता था। एकांत कारावास के बारे में सोचें, जहाँ एक बन्दी को दिन के 22-24 घण्टे एक कोठरी में रखा जाता है और उसका लोगों से बहुत ही कम सम्पर्क होता है। इस तरह का दण्ड उत्पत्ति 2:18 को दोहराता है: “आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं।” जब हम बाइबल के आधार पर अकेलेपन को देखते हैं, तो हम पाते हैं कि यह अक्सर एक ऐसी अवस्था होती है, जिससे परमेश्वर अपने लोगों को छुटकारा देता है।
यद्यपि अकेले रहना अच्छा नहीं है, फिर भी ऐसा करना बहुत आसान है। अकेलापन आरामदायक और सुविधाजनक होता है। आपको लोगों की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती। आपको यह निर्णय लेते समय दूसरों के बारे में नहीं सोचना पड़ता कि कहाँ खाना है, क्या देखना है, या कब कसरत करनी है। अकेले रहने में कम गड़बड़ होती है। फिर भी, यह अकेलेपन से भरा और बिना आनन्द वाला भी होता है, और यह परमेश्वर के स्वरूप-धारी लोगों के लिए और विशेष रूप से उसकी कलीसिया के लिए उसकी भली योजना के विपरीत होता है। सामाजिक चिन्ता या संगति में अपनी कमजोरी के डर पर काबू पाना कठिन हो सकता है, परन्तु इसका दूसरा विकल्प तो जीवन का एक खोखला रूप है, जो परमेश्वर ने सोचा था।
अकेलापन विनाश की ओर ले जाता है। एक नीतिवचन अकेलेपन के खतरे से चिताने के लिए एक ऊँची आवाज वाले भोंपू की तरह गूँजता है। नीतिवचन 18:1 कहता है, “जो दूसरों से अलग हो जाता है, वह अपनी ही इच्छा पूरी करने के लिये ऐसा करता है, और सब प्रकार की खरी बुद्धि से बैर करता है।” यह वचन हमारी आत्मिक सुरक्षा के लिए संगति के महत्व पर जोर देता है।
तो हम अकेलेपन से कैसे बचें? ऐसा लोगों के साथ रिश्ते बनाने और उन्हें प्राथमिकता देने से होता है। आप संगति में कैसे जुड़ते हैं? ऐसा दूसरों के लिए एक संगति बनकर होता है। बाइबल संगति के बारे में क्या कहती है, इसे समझने का आरम्भ इस बात को महसूस करने से होता है कि हमें दूसरों की ओर वैसे ही आगे बढ़ने के लिए बुलाया गया है, जैसे मसीह हमारी ओर बढ़ा था।
ऑडियो मार्गदर्शिका
ऑडियो#98 संगति के बारे में बाइबल क्या कहती है?
भाग I: किसी कलीसिया से जुड़ें
संगति के लिए सृजे गए
सच्चा और जीवित परमेश्वर सभी वस्तुओं का सृष्टिकर्ता है (उत्प. 1 अध्याय)। वह रिश्ता रखने वाला है, और अपने आप में एक प्रेमपूर्ण रिश्ते में मौजूद है। संगति के लिए एक आदर्श के रूप में त्रिएकत्व हमें दिखाता है कि परमेश्वर अपने सार में एक है, और वह तीन अलग-अलग व्यक्तियों के रूप में उपस्थित है: अर्थात् पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा (उत्प. 1:1-2; यूहन्ना 1:1-4)। त्रिएकत्व का प्रत्येक जन पूरी तरह से परमेश्वर है, फिर भी परमेश्वर केवल एक ही है। उसने मनुष्यों को अपनी सृष्टि के मुकुट-रत्नों के रूप में बनाया। उसने हमें अपने ही स्वरूप में बनाया (उत्प. 1:26-27)।
परमेश्वर के स्वरूप में होने का अर्थ उसे प्रतिबिम्बित करना और उसका प्रतिनिधित्व करना है। उसने हमें उसके साथ और उसके जैसे अन्य स्वरूप-धारियों के साथ रिश्ता रखने के लिए बनाया। जिस तरीके से हम उसके चरित्र (प्रेम, धीरज, कृपा, सच्चाई) को प्रतिबिम्बित करते हैं, वह दूसरों के साथ रिश्तों में जीवन जीना है। बाइबल संगति के बारे में क्या कहती है, यह जानने का प्रयास करने पर मालूम चलता है कि उसने हमें संगति में रहने के लिए बनाया है। उसने हमें अन्य लोगों के साथ जीवन बिताने, उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने, और जीवन के उतार-चढ़ावों का एक साथ अनुभव करने के लिए बनाया है। उसकी बुद्धिमानी से भरी योजना के कारण, हम अकेलेपन में नहीं, बल्कि उसके लोगों के साथ जान-बूझकर बनाए गए रिश्तों के माध्यम से बढ़ते और परिपक्व होते हैं (इफि. 4:15-16)।
संगति की खोज
पुस्तक गोष्ठियाँ, चुस्त रहने की कक्षाएँ, सामान्य ज्ञान की रातें, इत्यादि। हालाँकि, मसीही संगति को खोजने के लिए सबसे अच्छी जगह एक स्वस्थ, सुसमाचार का प्रचार करने वाली स्थानीय कलीसिया है। कलीसिया परमेश्वर का परिवार है (यूहन्ना 1:12-13; इफि. 1:4-5; 2:19)। इसमें ऐसे लोग शामिल होते हैं, जो सुसमाचार पर विश्वास करते हैं, जो मसीह से प्रेम करते हैं, जो दूसरों को उसके पीछे चलने में सहायता करने के लिए समर्पित हैं, और जिनके साथ आप अनन्तकाल को बिताएँगे, यदि आप एक मसीही हैं।
ये उसी प्रकार के लोग हैं, जिन्हें मसीह अपने अनुग्रह से आपको मसीही संगति के लिए देता है। ये उसी प्रकार के लोग हैं, जिन्हें आप अपनी संगति के रूप में पाना चाहेंगे। अकेलेपन की समस्या का परमेश्वर के द्वारा दिया गया उत्तर स्थानीय कलीसिया है। परमेश्वर के अनुग्रह से, जब आपने अपने पापों से पश्चाताप किया और सुसमाचार पर विश्वास किया, तो पवित्र आत्मा ने आपको यीशु मसीह के साथ एक कर दिया (इफि. 1:13-14)। उसने आपको मसीह में अपने लोगों के साथ भी जोड़ा है (1 कुरि. 12:12-13; इफि. 2:11-16)। मसीह ने व्यक्तिगत् रूप से आपका उद्धार किया, परन्तु अकेले रहने के लिए नहीं किया। वह चाहता है कि आप उन लोगों के बीच रहें, जो सार्वजनिक रूप से उसके—अर्थात् कलीसिया—के साथ अपनी पहचान रखते हैं और उनके साथ मिलकर जीवन जिएँ। जब आप किसी कलीसियाई संगति की अपनी खोज को आरम्भ करते हैं, तो याद रखें कि कोई भी कलीसिया सिद्ध नहीं होती। कलीसिया में ऐसे पापी लोग होते हैं, जिन्हें मसीह पर विश्वास करने के द्वारा अनुग्रह से उद्धार मिला है (इफि. 2:1-10)। इसमें ऐसे पापी लोग होते हैं, जिन्हें मसीह में पवित्र किया जा रहा है (1 थिस्स. 5:23-24)। इसका अर्थ है कि कलीसिया ऐसे उद्धार पाए हुए पापियों से भरी हुई है, जो अभी भी पाप करते हैं और जिनके विरुद्ध भी पाप किया जाता है। कलीसिया में ऐसे पापी लोग होते हैं, जो क्षमा करते हैं और जिन्हें क्षमा किया जाता है। इसी कारण से, यह जान लें कि संगति की आपकी खोज और अनुभव में कुछ गड़बड़ियाँ होंगी। आपको कुछ निराशा, पीड़ा और मानसिक व्यथा का अनुभव होगा, जो आपको अकेलेपन की ओर धकेल सकता है।
होने दें कि यह आपको हतोत्साहित न करे। जब हम अकेलेपन के बारे में बाइबल के वचन पढ़ते हैं, तो हम देखते हैं कि परमेश्वर दया का और सब प्रकार की शान्ति का पिता है (2 कुरिं. 1:3-5)। वह आपकी पीड़ा में आपको सांत्वना दे सकता है। साथ ही, संगति में होना, कुछ निराशा और हतोत्साहन को सहने और अनुभव करने के योग्य है। सी.एस. लुईस हमें इसकी याद दिलाते हैं, जब वे कहते हैं:
प्रेम करना ही कमजोर हो जाना है। किसी भी बात से प्रेम करें, और आपका हृदय निचोड़ दिया जाएगा और सम्भवत: वह टूट भी जाएगा। यदि आप यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आपका हृदय ज्यों का त्यों रहे, तो आपको इसे किसी को भी नहीं देना है, यहाँ तक कि किसी पशु को भी नहीं। इसे अपनी रुचियों और छोटी-मोटी विलासिताओं में सावधानी से लपेटकर रखें; सभी उलझावों से बचकर रहें। इसे अपने स्वार्थ के सन्दूक या ताबूत में सुरक्षित रूप से बन्द कर दें। परन्तु उस सन्दूक के भीतर यह बदल जाएगा, जहाँ यह सुरक्षित है, अंधकार में है, गतिहीन है और हवा-रहित है। यह टूटेगा तो नहीं; परन्तु यह अभेद्य और अमोचनीय बन जाएगा। प्रेम करना ही कमजोर हो जाना है।[1] यद्यपि कलीसिया सिद्ध नहीं है, फिर भी उसके पास एक सिद्ध उद्धारकर्ता है। वह अपनी कलीसिया को परिपक्व कर रहा है और अन्तिम दिन में उसे सिद्धता प्रदान करेगा (2 कुरिं. 5:21; फिलि. 1:6)। कलीसिया अभी वैसी नहीं है, जैसी वह एक दिन बनेगी (1 यूहन्ना 3:1-3)। आपको कोई भी सिद्ध कलीसिया नहीं मिलेगी। हालाँकि, परमेश्वर के अनुग्रह से, आप एक स्वस्थ कलीसिया ढूँढ़कर वहाँ एक बढ़िया संगति बना सकते हैं। अपनी खोज में, उस कलीसिया को प्राथमिकता दें, जो खरी शिक्षाओं और व्याख्यात्मक उपदेशों के प्रति समर्पित हो। आप एक ऐसी कलीसिया की चाह करेंगे, जो अपनी सभाओं में, और विशेष रूप से अपने उपदेशों में, मसीह को ऊँचा उठाए। सुसमाचार का विश्वासयोग्यता से किए जाने वाले प्रचार का संगति पर वैसा ही प्रभाव पड़ता है, जैसा एक गाड़ी पर उसके इंजन का पड़ता है। यह केवल एक पुर्जा नहीं है, परन्तु यह सबसे महत्वपूर्ण पुर्जा है। आप यह भी जानना चाहेंगे कि क्या वह कलीसिया बाइबल के अनुसार अतिथि-सत्कार का अभ्यास करती है (रोमि. 15:7)? और क्या एक दूसरे के प्रति उनका प्रेम स्पष्ट दिखाई देता है (यूहन्ना 13:34-35)? नीचे विचार करने के लिए कुछ ऐसे प्रश्न दिए गए हैं, जिन्हें आपको स्वयं से पूछना चाहिए:
– क्या यह कलीसिया प्रेमपूर्वक एक दूसरे का और आगंतुकों का स्वागत एवं अभिवादन करती है?
– क्या सदस्यों ने आपको अपना परिचय दिया है, आपसे बातचीत आरम्भ की है, या सभा समाप्त होने के बाद आपको अपने साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित किया है?
यदि इन प्रश्नों का उत्तर “हाँ” है, तो यह एक प्रबल संकेत है कि यह आपके लिए जुड़ने हेतु एक अच्छी जगह है, और संगति में अपनी कमजोरी के डर पर काबू पाने का एक तरीका है। संगति की अपनी खोज में, सबसे अच्छा यही होगा कि आप एक ऐसी कलीसिया चुनें, जहाँ आपका किसी की दृष्टि से बच पाना कठिन हो, और दूसरों के साथ जुड़ना आसान हो। इस प्रकार की कलीसिया आपको अकेलेपन से बचने और संगति के वास्तविक अर्थ को समझने के लिए एक बेहतर अवस्था में रखेगी।
कलीसिया के सदस्य बनें
एक बार जब आपको ऐसी कलीसिया मिल जाए, तो उसकी सदस्यता लेने का प्रयास करें। यह उस संगति से जुड़ने की दिशा में पहला कदम है। आप चाहेंगे कि उस संगति में ऐसे लोग हों, जो पूरी तरह से आपके प्रति समर्पित हों, और आप उनके प्रति समर्पित हों। यह समर्पण सार्थक रिश्तों के लिए एक सुरक्षित माहौल का काम करता है। यह उस संगति को फलने-फूलने के लिए विषय प्रदान करता है। यह पारदर्शिता और कमजोरियों के लिए द्वार खोलता है, जिससे आप अपनी झिझक को दूर कर पाते हैं।
यह समर्पण जोर देकर कहता है, “आप चाहे कुछ भी बताओ, मैं यहाँ आपके लिए हूँ, और मैं आपके बोझ उठाऊँगा (गला. 6:1-2)।” कलीसिया की सदस्यता के माध्यम से, आप आधिकारिक तौर पर उस परिवार के एक सदस्य बन जाते हैं। आपकी सदस्यता उस देह के लिए एक निमंत्रण का काम करती है, कि वे आपको जानें और आप उन्हें जानें। इस तरह से आपने अपने लिए अकेलेपन में जीना कठिन, और संगति में जीना सरल बना दिया है। परमेश्वर के अनुग्रह से, आप एक ऐसी संगति के मेले के मुख्य द्वार से प्रवेश कर चुके हैं, जो इन लोगों के साथ समृद्ध, सार्थक और उत्साहवर्धक रिश्ते बनाने के लिए आपका स्वागत करता है।
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मनन के लिए प्रश्न:
- संगति में जीवन बिताने की दिशा में कलीसिया की सदस्यता पहला कदम क्यों है?
- परमेश्वर ने आपको संगति रखने के लिए बनाया है, यह जानना संगति की खोज में आपके प्रयासों पर कैसे प्रभाव डालता है?
- आपने संगति की खोज कहाँ-कहाँ की है? और क्यों की है?
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भाग II: रविवार की सभा: समय से पहले पहुँचें, और बाद में वहीं रुकें
अब जब आप कलीसिया के सदस्य बन चुके हैं, तो संगति में जुड़ने के लिए और भी सक्रिय कदम उठाने का समय आ गया है। यद्यपि आप कलीसिया में शामिल हो गए हैं, परन्तु संगति में जुड़ाव शायद अपने-आप या तुरन्त नहीं हो जाएगा। इसके लिए आपकी ओर से अनुशासन और प्रयास की आवश्यकता होगी। आपको हर रविवार कलीसिया की सभा में वही लोग दिखाई देंगे (इब्रा. 10:24-25)। यह निरन्तरता संगति के निर्माण को अनुकूल बनाती है। इस अवसर का लाभ उठाना एक अच्छी बात है।
अपनी कलीसिया के भीतर एक संगति बनाने के लिए स्वयं को तैयार करने का एक बेहतर तरीका यह है कि आप अपने रविवार की दिन-दर्शिका को खाली रखें। जहाँ तक हो सके, इस दिन को कलीसिया के सदस्यों के साथ बिताने के लिए सुरक्षित रखें। फिर उनके साथ पहल करें। इसी तरह आप सामाजिक चिन्ता या संगति में अपनी कमजोरी के डर पर काबू पाना आरम्भ करते हैं। यह कैसा दिखाई पड़ेगा? यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं:
सभा में समय से पहले पहुँचें
जब कलीसिया सामूहिक आराधना के लिए इकट्ठा होती है, तो इसे सिनेमा देखने जाने जैसा ही समझना सामान्य बात है। आप फिल्म आरम्भ होने से ठीक पहले पहुँचते हैं। आप अपने आसपास बैठे किसी भी व्यक्ति से बात नहीं करते। आप वहाँ केवल अपनी भलाई के लिए होते हैं। उसके बाद, आप किसी से बात किए बिना ही निकल जाते हैं। अब, फिल्म देखते समय ऐसा करना सही हो सकता है, परन्तु इस तरह के काम कलीसिया के अनुभव को खराब कर देते हैं। ये अकेलेपन में योगदान देते हैं और संगति बनाने में विकर्षण के रूप में काम करते हैं। आप अपने सामाजिक मेल-जोल के महत्व की क्षमता को सीमित कर देते हैं, जिससे सार्थक रिश्ते बनाने की आपकी क्षमता में बाधा उत्पन्न होती है। इसी कारण, समय से पहले पहुँचने को प्राथमिकता देना ही बुद्धिमानी की बात है।
सभा आरम्भ होने से 10-15 मिनट पहले पहुँचने का प्रयास करें। इससे कार्यक्रम आरम्भ होने से पहले एक-दो लोगों से बात करने का समय मिल जाता है। जब आप भवन में प्रवेश करें, तो स्वयं से यह न पूछें, “मुझसे कौन बात करेगा? मुझसे बातचीत करना कौन आरम्भ करेगा?” ये प्रश्न एक आत्म-केन्द्रित सोच से उत्पन्न होते हैं। याद रखें कि मसीह इसलिये नहीं आया कि उसकी सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे (मर. 10:45)। वह आपको दूसरों से वैसा ही प्रेम करने के लिए बुलाता है, जैसा उसने आपसे प्रेम किया है (यूहन्ना 13:34-35)।
इसी कारण से, प्रभु से प्रार्थना करें कि वह आपको कलीसिया में दूसरों के हितों का ध्यान रखते हुए प्रवेश करने में सहायता करे (फिलि. 2:1-4)। यह बात शायद अजीब लगे, परन्तु एक संगति बनाने के लिए, आपको दूसरों के निमित्त उसमें योगदान देना होगा। प्रेम से भरे रिश्ते बनाने के लिए आपको दूसरों की परवाह करनी होगी। मित्र बनाने के लिए, आपको स्वयं एक मित्र बनने को प्राथमिकता देनी होगी और मित्रता के बारे में बाइबल के वचनों को अपना आदर्श बनाना होगा। जब आप लोगों को जानने का प्रयास करते हैं, तभी आमतौर पर वे भी आपको जान पाते हैं। इसलिए, एक सेवक की सोच के साथ कलीसिया में प्रवेश करें और स्वयं से पूछें, “मैं किससे बात कर सकता हूँ? मैं किसे प्रोत्साहित कर सकता हूँ?” बातचीत में पहल करना अजीब और कठिन हो सकता है। मेरा भरोसा करें कि मैं भी ऐसा ही महसूस करता हूँ! साथ ही, अधिकांश बातचीत छोटी और ऊपर-ऊपर वाली होती है। आप पूछते हैं, “आप कैसे हैं?” और कोई उत्तर देता है, “मैं ठीक हूँ,” और बातचीत समाप्त हो जाती है। आपको ऐसी बातचीत से बचना चाहिए। सार्थक बातचीत में पहल करने का एक सहायक तरीका यह है कि आप बातचीत को बढ़ाने के लिए कुछ प्रश्न पहले से सोचकर रखें। नीचे कुछ ऐसे प्रश्न दिए गए हैं, जो आप पूछ सकते हैं:
– आपका यह सप्ताह कैसा रहा?
– पिछले सप्ताह किस बात से आपको प्रोत्साहन मिला?
– इस समय आपको किस बात से आनन्द मिल रहा है?
– क्या आपको आज का लिखा हुआ उपदेश देखने का अवसर मिला? क्या आपके पास कोई ऐसा प्रश्न है, जिसके लिए आप आशा रखते हैं कि प्रचारक उसका उत्तर देगा?
– इस सप्ताह आपके विश्वास को किस बात से प्रोत्साहन मिला?
– पिछले सप्ताह किस बात से आपको निराशा हुई?
– क्या पिछले सप्ताह में कुछ ऐसा हुआ है, जिसके विषय में मैं आपके लिए प्रार्थना कर सकूँ?
– पिछले सप्ताह का सबसे अच्छा या सबसे बुरा पल कौन-सा था?
– इस सप्ताह आप किस बात के लिए आभारी हैं?
– आपका एक आम सप्ताह कैसा होता है?
जान-बूझकर पूछे गए एक या दो प्रश्नों से बातचीत स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ेगी। जैसे-जैसे वह व्यक्ति आपके प्रश्नों के उत्तर देगा, वैसे-वैसे आप उसे बेहतर जान पाएँगे, और वह आपको बेहतर जान पाएगा। जब आप पहल करते हैं, तो आप प्रभु के हाथों में एक ऐसा माध्यम बन सकते हैं, जो दूसरों का भला करता है। एक वयस्क के तौर पर धार्मिकता से भरे मित्र कैसे ढूँढ़ें, इस विषय में यह एक व्यावहारिक कदम है। जब आप उनके लिए प्रार्थना करते हैं और अगले सप्ताह उनसे फिर मिलते हैं, तो बहुत सम्भावना है कि आपकी उनसे मित्रता हो जाएगी। जब आप इसे अपनी नियमित दिनचर्या बना लेते हैं, तो आप और भी अधिक लोगों को जान पाएँगे और मसीही संगति बनाने की नींव रख पाएँगे।
सभा के बाद वहीं रुकें
जब सभा समाप्त होती है, तो सबसे बड़ी परीक्षा यही होती है कि अपना सामान उठाकर निकल जाएँ। आप एक घण्टे से भी अधिक समय तक सभा में रहे हैं। हो सकता है कि आप घर जाना चाहते हों। आपको भूख लगी हो। और हो सकता है आप किसी को न जानते हों। हो सकता है कि आपको भी कोई न जानता हो। आप अकेले खड़े रहने की अजीब स्थिति से भी बचना चाहते होंगे। फिर भी, मैं आपको इस काम के प्रति चिताना चाहूँगा, क्योंकि सभा समाप्त के तुरन्त बाद निकल जाने की आदत अकेलेपन में योगदान देती है। आप दूसरों को जानने और उनके द्वारा आपको जानने का द्वार बन्द कर देते हैं।
इसलिए, बाहर निकलने का नहीं, बल्कि दूसरों के साथ बातचीत करने का अवसर ढूँढ़ें। सभा के बाद दूसरों में निवेश करने और ऐसे रिश्ते बनाने का सबसे अच्छा अवसर होता है, जिनसे गहरी मित्रता हो सकती है। इसी तरह हम संगति के बारे में बाइबल के वचनों को अपने जीवन में उतारते हैं। आप उन लोगों से बातचीत आरम्भ करने की सोच सकते हैं, जो आपके आसपास बैठे थे। वैसे भी, उनके सबसे निकट तो आप ही थे। आप अपने आसपास यह भी देख सकते हैं कि कौन अकेला है या किसी से बात नहीं कर रहा है। आप सीधे उनके पास जाकर उनसे बात कर सकते हैं। आप उन्हें अपना परिचय दे सकते हैं और पूछ सकते हैं कि वे कितने समय से इस कलीसिया में आ रहे हैं। आप यह भी पूछ सकते हैं कि क्या वे इसी क्षेत्र के रहने वाले हैं। किसी को थोड़ा-बहुत जानने के बाद, आप सभा और उपदेश के बारे में प्रश्न पूछ सकते हैं। नीचे कुछ ऐसे प्रश्न दिए गए हैं, जो आप पूछ सकते हैं:
– प्रभु ने उस उपदेश से आपको कैसे प्रोत्साहित किया?
– वह कौन सी विशेष बात, संदर्भ, या कोई पंक्ति थी, जिसने आपको आशीष दी?
– उस उपदेश की कोई ऐसी बात, जिस पर आप और अधिक मनन करना चाहते हैं?
– उस उपदेश को अपने जीवन में उतारने का कोई एक तरीका जो आप अपनाना चाहते हैं?
– उस उपदेश को ध्यान में रखते हुए, इस सप्ताह मैं आपके लिए किस तरह प्रार्थना कर सकता हूँ?
– हमने जो गीत गाया, उसने प्रभु के लिए आपके मन में कैसी भावनाएँ जगाईं?
– इस सप्ताह मैं आपके लिए कैसे प्रार्थना कर सकता हूँ?
बातचीत लम्बी नहीं होनी चाहिए; बस वह जान-बूझकर की जानी चाहिए। जब आप प्रश्न पूछते हैं और उनके उत्तर देते हैं, तो आप दूसरों की परवाह करने का प्रयास करते हैं, और आप स्वयं को उनकी परवाह के लिए भी खोलते हैं। आपकी एक सार्थक बातचीत हुई है। अब आप जानते हैं कि आप उनके लिए कैसे प्रार्थना कर सकते हैं। मेरे एक पास्टर मित्र ने सभा के बाद बातचीत के लिए एक “3-2-1” सिद्धान्त बनाया है। वह तीन लोगों का अभिवादन करता है, दो लोगों से प्रश्न पूछता है, और एक व्यक्ति के साथ जान-बूझकर गहरी बातचीत करता है। वह उस व्यक्ति के लिए प्रार्थना भी करता है और उससे दोबारा सम्पर्क भी करता है, जिसके साथ उसने गहरी बातचीत की थी। यह सिद्धान्त व्यावहारिक और दोहराने योग्य है। यदि आप इसे अपनाते हैं, तो हर बार जब आप कलीसिया में होंगे, तो आप छह अलग-अलग लोगों के साथ बातचीत आरम्भ कर चुके होंगे। इस बातचीत का स्तर तरणताल में होने जैसा है; आप लगातार गहरे पानी की ओर बढ़ते जाते हैं। अकेलेपन पर काबू पाने का यह एक उत्कृष्ट तरीका है। सोचकर देखें कि इस आसान तरीके से प्रभु कितने लोगों को आशीष देने के लिए आपको उपयोग कर सकता है!
सभा के बाद दोपहर का भोजन
सभा समाप्त होने पर, दोपहर का भोजन एक ऐसी गतिविधि है, जिसमें हर कोई शामिल हो जाएगा। आमतौर पर लोगों को भूख लगी होती है। उनमें से कई लोगों ने या तो दोपहर के भोजन की योजना बना ली होती है या वे योजना बनाने वाले होते हैं। आप भी सभा के बाद दोपहर का भोजन करेंगे। इस मामले में, अकेलापन दूर करने के लिए आपको अपने कार्यक्रम में कोई बड़ा बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि अपनी नियमित दिनचर्या में लोगों का साथ बढ़ाने की आवश्यकता है। इसी कारण से, इसे अपना लक्ष्य बनाएँ कि आप सभा के बाद नियमित रूप से दूसरों के साथ दोपहर के भोजन का आनन्द लें (उत्प. 2:18)। बाइबल के आधार पर अतिथि-सत्कार का अभ्यास करने का यह एक सुन्दर तरीका है। ये प्रबन्ध अलग-अलग तरह के हो सकते हैं। आप ये कर सकते हैं:
– एक पतीला दलिया या खिचड़ी बनाकर, एक से तीन लोगों को अपने घर आमंत्रित करें।
– लोगों को अपने घर आमंत्रित करें और पोटलक के साथ आने के लिए कहें, जिसमें सबके द्वारा भोजन लाया जाता है।
– लोगों को अपने घर आमंत्रित करें और पिज़्ज़ा के कुछ डिब्बे मँगवा लें, और उसमें हर कोई पैसों का योगदान करे।
– लोगों को अपने घर आमंत्रित करें और अपना खाना स्वयं लाने के लिए कहें।
– लोगों को अपने साथ दोपहर का भोजन करने के लिए आमंत्रित करें।
यदि आप लोगों को अपने साथ दोपहर का भोजन करने के लिए किसी रेस्त्राँ में आमंत्रित करते हैं, तो यह सुनिश्चित कर लें कि वह रेस्त्राँ कुछ शर्तों को पूरा करता हो। ऐसी ही एक शर्त यह है कि वह जगह महँगी न हो। यदि रेस्त्राँ महँगा होगा, तो लोग आपके साथ आने से हिचकिचाएँगे। इसका लक्ष्य आपकी कलीसिया में रिश्ते बनाना और मजबूत करना है। इसका लक्ष्य अकेलापन दूर करना है। इसी कारण से, लक्ष्य बनाएँ कि खाना महँगा न हो। एक और बात जिसका ध्यान रखना है कि वहाँ अच्छा वातावरण हो। जब आप लोगों को दोपहर के भोजन पर आमंत्रित करें, तो खाने के लिए ऐसी जगह चुनें, जहाँ बातचीत करना अनुकूल हो। शोर-शराबे वाला वातावरण बातचीत को समाप्त कर देता है। हालाँकि, यदि बातचीत के लिए सही वातावरण मिले, तो आप ज्ञानवर्धक चर्चाएँ कर सकते हैं। दोपहर के भोजन के दौरान, आप ऊपर बताए गए प्रश्न पूछ सकते हैं। और आप इस तरह के प्रश्न भी पूछ सकते हैं:
– आपकी कहानी क्या है?
– प्रभु ने अपने अनुग्रह से आपका उद्धार कैसे किया?
– प्रभु आपको इस कलीसिया में कैसे लाया?
– उन तीन मसीहियों के नाम बताएँ, जिनका आपके विश्वास पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है?
– वे तीन पुस्तकें कौन सी हैं, जिनका आपके विश्वास पर गहरा प्रभाव पड़ा है?
जब आप ये प्रश्न पूछते हैं और उनके उत्तर देते हैं, तो आप मसीही संगति बनाने में सक्रिय हो जाते हैं। जब यह एक नियमित दिनचर्या हो जाएगी, तो आप पाएँगे कि आप अकेले कम और लोगों के साथ अधिक समय बिता रहे हैं। जब आप ऐसा उन्हीं लोगों के साथ बार-बार करते रहेंगे, तो आपकी मित्रता फलने-फूलने लगेगी। एक संगति धीरे-धीरे बनती है, जब आप उन्हीं लोगों के साथ लगातार समय बिताते हैं। यह आपको दूसरों के निकट लाता है, और बाइबल के अनुसार अकेलेपन और अलगाव के बीच सन्तुलन बनाने में सहायता करता है। इसलिए, सभा के बाद दूसरों के साथ दोपहर का भोजन करने की आदत डालें।
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मनन के लिए प्रश्न:
- इस लेख से मिली कौन-सी सीख आपने अपने जीवन में लागू करने की योजना बनाई है?
- एक आत्म-केन्द्रित मानसिकता (मुझसे कौन बात करेगा, इत्यादि) के विपरीत दूसरों पर केन्द्रित मानसिकता (मैं किससे बात कर सकता हूँ? मैं किसे प्रोत्साहित कर सकता हूँ?) के साथ आपने कितनी बार रविवार के दिन बिताए हैं?
- एक अलग मानसिकता आपके कामों और उद्देश्यों पर कैसा प्रभाव डालेगी?
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भाग III: शिष्यत्व—मिल-जुलकर जीवन जीना
जब आप अकेलेपन से भरा जीवन छोड़कर, संगति वाले जीवन की ओर बढ़ते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप जान-बूझकर कुछ लोगों के साथ मिलकर जीवन बिताने को प्राथमिकता दें। शरीर के लिए प्राणवायु जो काम करती है, वही काम संगति के लिए कुछ लोगों के साथ लगातार और जान-बूझकर बिताया गया समय करता है। यह आवश्यक होता है। प्राणवायु के बिना आप एक शव मात्र ही हैं। और लोगों के साथ लगातार, जान-बूझकर बिताए गए समय के बिना, आप अकेले ही है। संगति के महत्व को समझने का अर्थ यह पहचानना है कि हमें अकेले दौड़ने के लिए नहीं बनाया गया है। जैसा बताया गया है कि परमेश्वर के द्वारा अकेलेपन का समाधान कलीसिया ही है। कलीसिया के भीतर मसीही संगति से जुड़ने का एक तरीका शिष्यत्व वाले रिश्ते हैं।
मसीह की सांसारिक सेवकाई के दौरान, उसकी मुख्य संगति उसके शिष्यों से ही बनी थी (मर. 3:14)। यीशु ने उनके साथ ही जीवन बिताया। जब वह चलता था, सिखाता था, प्रार्थना करता था, आश्चर्यकर्म करता था, भोजन करता था या सोता था, उन समयों में वे उसके साथ ही होते थे (मर. 4:1-5:43; लूका 11:1-4)। वही हमारा पैमाना और उदाहरण है, जिसने मानवीय रूप में संगति के लिए एक आदर्श स्वरूप त्रिएकत्व को प्रदान किया है। इसके अलावा, प्रेरित पौलुस की सेवकाई के दौरान भी हमेशा कुछ लोग उसके साथ रहते थे (प्रेरि. 16:3-4, 20:4-5)। इसलिए, संगति की खोज करते हुए, आप शिष्यत्व वाले रिश्तों को ही प्राथमिकता दें और उन्हें पाने का प्रयास करें। शिष्यत्व के माध्यम से, आप कुछ लोगों को बहुत ही गहरे और सार्थक तरीके से जान पाएँगे। ये रिश्ते आपको और उन्हें पाप से लड़ने और मसीह जैसा बनने की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता करेंगे (इब्रा. 3:12-14; फिलि. 1:25-26)। पवित्रता एक व्यक्तिगत् प्रयास भी है और एक सामुदायिक परियोजना भी है (फिलि. 3:12-14; 2 तीमु. 2:22)। मसीह के ज्ञान और उसके प्रेम में हम एक दूसरे के साथ रहकर सबसे अच्छी तरह से बढ़ते हैं (इफि. 3:17-29)।
शिष्यता जीवन-से-जीवन वाला एक ऐसा रिश्ता है, जिसका उद्देश्य एक दूसरे को मसीह में बढ़ने में सहायता करना है। यह दूसरों के साथ सुसमाचार की सच्चाई और अपने जीवन को साझा करना है (1 थिस्स. 2:8-10)। इसका अर्थ वचन को और अपने कार्यक्रम को किसी और के लिए खोल देना है। अकेलापन दूर करने का यह एक व्यावहारिक तरीका है। यह आरामदायक होने से कोसों दूर है और जितना आप सोचेंगे, यह उससे कहीं अधिक उलझा हुआ हो सकता है, क्योंकि हम ऐसे पापी लोग हैं, जो जान-बूझकर दूसरे पापियों के साथ समय बिताते हैं। यद्यपि यह थोड़ा असहज करने वाला होता है, परन्तु समय के साथ यह मजबूत और मधुर रिश्तों में फलवन्त होता है। इनके माध्यम से, आप और वे मसीह जैसे और अधिक दिखने लगते हैं, जो कि परमेश्वर का लक्ष्य है (रोमि. 8:28-29)। शिष्यता वाले रिश्तों के माध्यम से, आपको वह सच्ची मसीही संगति मिलेगी, जिसकी आपको आवश्यकता है।
किसे शिष्य बनाएँ
कलीसिया में शिष्यता वाले रिश्तों की विशेषता यह है कि अधिक परिपक्व सदस्य, कम परिपक्व सदस्यों को शिष्य बनाते हैं (1 कुरि. 11:1; फिलि. 3:14-17)। इसका सामान्य अर्थ यह होता है कि वृद्ध लोग, जवान लोगों को शिष्य बनाते हैं (तीतुस 2:1-8)। प्रेरित पौलुस ने तीमुथियुस और तीतुस को शिष्य बनाया था। उसने उन्हें विश्वास में अपने पुत्र कहा था (1 तीमु. 1:2; तीतुस 1:4)। इसी कारण से, जब आप कलीसिया का सर्वेक्षण करें, तो किसी ऐसे व्यक्ति को ढूँढ़ें, जो उसी लिंग का अधिक परिपक्व सदस्य हो। इसी तरह एक वयस्क के तौर पर, आप अक्सर ऐसे धार्मिकता से भरे हुए मित्र पा सकते हैं, जो आपको निखार सकें। आपके पास्टर और अगुवे को इस खोज में आपकी सहायता करके अच्छा लगेगा। साथ ही, कुछ ऐसे सदस्यों को भी ढूँढ़ें, जो विश्वास में कम परिपक्व हों, ताकि आप उन्हें शिष्य बनाएँ। और अगला कदम पहल करना है।
नियमितता: साप्ताहिक
एक बार जब आप शिष्यता का कोई समूह बना लें, तो हर सप्ताह मिलने की आदत डालें। साप्ताहिक मुलाकातों की नियमितता, बाइबल के आधार पर अच्छे शिष्यत्व वाले रिश्ते बनाने और संगति का निर्माण करने के लिए संदर्भ निर्धारित करती है। इन मुलाकातों के दौरान क्या होना चाहिए? मेरा सुझाव है कि आप पवित्रशास्त्र या किसी अच्छी मसीही पुस्तक को पढ़ने, अनुप्रयोगों पर चर्चा करने, पापों का अंगीकार करने और प्रार्थना करने में वह समय बिताएँ। इस समय का अधिकांश भाग वचन के चारों ओर ही व्यतीत होना चाहिए, क्योंकि आप अपनी संगति का निर्माण मसीह पर करना चाहते हैं।
परमेश्वर के अनुग्रह से, जब आप मसीह में बढ़ते हैं, तो आप एक साथ बढ़ते हैं (इफि. 4:15-16)। यही शिष्यत्व का लक्ष्य है। हम मसीह के ज्ञान के माध्यम से प्रेम और पवित्रता में परिपक्व होते हैं (रोमि. 12:2; फिलि. 1:9-11; 2 पत. 1:2-11)। जब आप पवित्रशास्त्र की बातें सुनते और साझा करते हैं, तो प्रभु उनका उपयोग अपने प्रति हमारे प्रेम को बढ़ाने के लिए करता है। जब आप एक साथ और एक दूसरे के लिए प्रार्थना करते हैं, तो प्रभु एक दूसरे के प्रति आपका स्नेह बढ़ाता है, और जब आप इस साप्ताहिक नियमितता को स्थापित करते हैं, तो अकेले रहना और अधिक कठिन तथा संगति में रहना और अधिक आसान हो जाता है। आपके पास कुछ लोगों से मिलने के लिए एक साप्ताहिक समय निर्धारित होता है। और केवल इतना ही नहीं, आप उन्हें रविवार की सभा और अपने शिष्यत्व समूह के कारण सप्ताह में कम से कम दो बार देखेंगे। जब आप नियमित रूप से मिलते हैं और एक साथ उद्देश्यपूर्ण समय बिताते हैं, तो आप एक संगति का निर्माण करना आरम्भ कर देंगे और एक ठोस तरीके से संगति के अर्थ का अनुभव करेंगे।
पारदर्शिता और कमजोरी
एक सच्ची गहराई वाली संगति, लोगों का एक छोटा समूह होता है, जो वास्तव में एक दूसरे को जानते हैं। यह समूह अपनी ताकतों, कमजोरियों और संघर्षों के बारे में पारदर्शी होता है। यीशु के क्रूस पर चढ़ाए जाने की रात, उसने अपने कुछ शिष्यों के सामने अपना मन खोला था (मर. 14:32-35)। प्रेरित पौलुस एक दूसरे का बोझ उठाने के लिए कलीसिया को प्रोत्साहित करता है (गला. 6:1-2)। आपकी संगति आपका बोझ तभी उठा सकती है, यदि आप उनसे खुलकर साझा करेंगे। हम सभी को कुछ विशेष और लगातार बने रहने वाले पापों से संघर्ष करना पड़ता है। जब हम बाइबल के आधार पर अकेलेपन को देखते हैं, तो अक्सर हम पाते हैं कि यह अकेले बोझ उठाने के भारीपन से जुड़ा होता है।
हम सभी उन विशिष्ट पापों के परीक्षाओं से संघर्ष करते हैं (याकू. 1:13-15)। हम सभी के कुछ न कुछ भय होते हैं। हम सभी विशिष्ट तरीकों से हतोत्साहित होने के प्रति संवेदनशील होते हैं। यदि आप एक सच्ची और ईमानदार संगति में रहना चाहते हैं, तो आपको अपना हृदय खोलना होगा और दूसरों के सामने अपनी आत्मा को उजागर करना होगा। संगति में अपनी कमजोरी के डर पर काबू पाने का यही मार्ग है। प्रभु इस प्रकार की ईमानदारी का उपयोग निकटता उत्पन्न करने के लिए करता है। पारदर्शिता से और अधिक पारदर्शिता उत्पन्न होती है। यह हवा का वह प्रवाह है, जो समूह के भीतर कमजोरी और घनिष्ठता को प्रवाहित होने देता है। आप अपने समूह को जानना चाहते हैं, और चाहते हैं कि वे भी आपको जानें। इस स्तर की घनिष्ठ जानकारी आपके हृदयों को एक दूसरे से जोड़ देती है।
पारदर्शिता और कमजोरी का कारण मसीह में बढ़ना है। आप ऐसा इसलिए करते हैं, ताकि अपने शिष्यता समूह के माध्यम से आपको परमेश्वर की सहायता मिल सके। पारदर्शी होने से, आपके समूह को यह पता चलता है कि वे किन विशेष तरीकों से आपके लिए प्रार्थना कर सकते हैं, आपको प्रोत्साहित कर सकते हैं, और आपका हालचाल पूछ सकते हैं। और आप भी उनके साथ ठीक वैसा ही कर सकते हैं। जैसा कि मैंने कहा, पवित्रता और दृढ़ता एक सामुदायिक परियोजना है (इब्रा. 3:12-14; 12:14-17)। और यह इस प्रश्न का उत्तर देता है, “क्या अकेलापन एक पाप है या फिर यह एक दौर है?”—और यह दिखाता है कि हमें अंधेरे में अकेले ही संघर्ष करने के लिए नहीं बनाया गया है।
एक साथ समय बिताने को प्राथमिकता दें
वचन में एक साथ बिताया गया साप्ताहिक समय, शिष्यता वाले रिश्तों का एक अभिन्न हिस्सा है। यह आत्मिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है (यूहन्ना 17:17)। हालाँकि, शिष्यता केवल हर सप्ताह होने वाले बाइबल अध्ययन से कहीं बढ़कर है। यीशु के शिष्य केवल उसके शिक्षा देते समय ही उसके साथ नहीं होते थे; वे हर समय उसके साथ होते थे (मर. 3:14)। नियमित बाइबल अध्ययन के बाहर एक साथ समय बिताना थोड़ा डरावना लग सकता है और असुरक्षा की भावना उत्पन्न कर सकता है, क्योंकि हम सब पापी हैं। स्वाभाविक रूप से, हम अपनी कमियों को ढाँपना चाहते हैं, अपनी कमजोरियों पर परदा डालना चाहते हैं, और अपने पापों को छिपाना चाहते हैं। हालाँकि, हम लोगों को अपने जीवन में इसलिए आमंत्रित नहीं करते, क्योंकि हम परिपूर्ण हैं। और न ही हम ऐसा दिखावे के लिए या लोगों को प्रसन्न करने के लिए करते हैं। उनके लिए प्रेम ही इसे प्रोत्साहित करता है।
समय एक बहुमूल्य वस्तु है। इसे वापस नहीं किया जा सकता। इसे लौटाने का कोई नियम नहीं है। इसी कारण, लोगों को अपने जीवन में आमंत्रित करने की इच्छा रखना, उनके लिए आपके सच्चे स्नेह को दिखाता है (1 थिस्स. 2:8)। सच्चा प्रेम संगति के लिए एक महत्वपूर्ण बात है और इसमें बाइबल वाला अतिथि-सत्कार झलकता है। एक साथ समय बिताने को प्राथमिकता देने के लिए आपको अपनी दिनचर्या में पूरी तरह से बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए आपको बस इस बात की इच्छा रखनी है कि आप दूसरों के लिए अपना समय निकालें और यह सीखें कि अपने दैनिक जीवन में दूसरों से मेल-जोल करके आप अकेलापन महसूस करना कैसे दूर कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपनी दिनचर्या पर थोड़ा सा चिन्तन करना होगा और यह देखना होगा कि किन गतिविधियों में आप दूसरों को अपने साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं। ये गतिविधियाँ और एक साथ बिताए जाने वाले समय की अवधि अलग-अलग हो सकती है। आप पूरा दिन, कुछ घण्टे, या 30 मिनट एक साथ बिता सकते हैं। समय चाहे जितना भी हो, हर पल मूल्यवान होता है, क्योंकि यह एक संगति को बनाने में अपना योगदान देता है। उनके साथ बिताया गया हर पल रिश्ते में किया गया एक बढ़ता हुआ निवेश है, तथा यह संगति बनाने के लिए रखी गई एक और ईंट की तरह है।
आपके कार्यक्रम में कौन-कौन सी नियमित दिनचर्या शामिल हैं? यदि आपको कसरत करना पसन्द है, तो आप लोगों को व्यायाम करने हेतु अपने साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं। व्यायामशाला में या दौड़ते हुए साथ बिताया गया समय गहरी बातचीत करने और सामाजिक मेल-जोल के महत्व को समझने के लिए एक बढ़िया माहौल देता है। यह एक दूसरे को प्रोत्साहित करने और सहारा देने का एक तरीका है। साथ मिलकर किया गया यह अनुभव एक प्यारी याद बन जाता है। इन अनुभवों के जमा होने से बढ़ता हुआ प्रभाव उत्पन्न होता है, जिससे संगति और निकटता के निर्माण में तेजी आती है। ऐसी कई गतिविधियाँ हैं, जिनमें आप अपने शिष्यता-समूह को आपके साथ शामिल होने के लिए बुला सकते हैं:
– आपके परिवार के साथ रात का भोजन
– घर का कोई काम
– सेवा का कोई काम
– उद्यान में बाहर टहलना
– शोरगुल से दूर प्रकृति के बीच जैसे कि जंगलों में, पहाड़ों पर, या नदियों के किनारे तम्बू में रात बिताना
– प्राकृतिक वातावरण, जैसे कि जंगलों में, पहाड़ों पर या ग्रामीण इलाकों में लम्बी दूरी तक पैदलयात्रा करना
– सप्ताह के अन्त में घूमना-फिरना
– किराने का सामान खरीदना
– फिल्म देखना
– रात में खेल खेलना
– खेल-कूद का कोई मुकाबला देखना
– अलाव जलाना
जिन लोगों को आप शिष्य बनाते हैं, या जो आपको शिष्य बनाते हैं, उनके साथ जान-बूझकर समय बिताना आपको एक संगति बनाने और मित्रता के बारे में बाइबल के वचनों को अपने जीवन में उतारने में सहायता करेगा। आप उनके साथ जितना अधिक समय बिताएँगे, आपके रिश्ते उतने ही मजबूत होंगे। आप एक प्यारी और प्रोत्साहित करने वाली संगति में रहने के आनन्द का अनुभव करेंगे।
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मनन के लिए प्रश्न:
- आप अपने शिष्यता समूह को अपनी दिनचर्या के किन कामों में अपने साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं?
- क्या इस अध्याय ने शिष्यता के बारे में आपके दृष्टिकोण को बदला है, उसे चुनौती दी है, या उसकी पुष्टि की है? यदि हाँ, तो कैसे?
- क्या आप किसी शिष्यता समूह का हिस्सा हैं? यदि हाँ, तो क्या आपने अपने समूह के लोगों के सामने अपने मन को खोला है?
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भाग IV:अतिथि-सत्कार: अपना घर खोलें, अपना हृदय खोलें
संगति बनाने के लिए एक दूसरे के साथ जान-बूझकर समय बिताने की आवश्यकता होती है। एक दूसरे के साथ जितना अधिक सार्थक समय बिताया जाएगा, संगति उतनी ही गहरी होगी। अकेलापन दूर करने और संगति बनाने का एक महत्वपूर्ण तरीका अतिथि-सत्कार करना होता है। संगति का असली अर्थ तब सबसे अच्छे से समझ आता है, जब हम एक दूसरे के सामने अपना जीवन खोल देते हैं। बाइबल के अनुसार अतिथि-सत्कार की परिभाषा अजनबियों से प्रेम करना है; और इसका अर्थ अतिथियों का अपने घर में स्वागत करना और उन्हें अपनाना है।
परमेश्वर अतिथि-सत्कार करने वाला है। उसने प्रेम से इस संसार को बनाया और अपने संसार में हमारा स्वागत किया (उत्प. 1 अध्याय)। उसने अदन की वाटिका बनाई और आदम को अपनी उपस्थिति में ले आया, जहाँ आदम परमेश्वर के साथ-साथ चलता था (उत्प. 2:15, 3:8)। आदम के पाप करने के बाद, परमेश्वर ने उसे अपनी उपस्थिति से निकाल दिया (उत्प. 3:24)। परमेश्वर पवित्र है, और मनुष्य पापी है। पाप ही के कारण मनुष्य परमेश्वर से अलगाव में जन्म लेता है (यशा. 59:2)। जब हम बाइबल में अकेलेपन के बारे में पढ़ते हैं, तो हम देखते हैं कि इसकी जड़ें असल में इसी अलगाव में छिपी हैं। परमेश्वर ने हमेशा से पापियों के साथ मेल-मिलाप करने की योजना बनाई है कि वह उन्हें अपनी उपस्थिति में वापस लेकर आए।
पुरानी वाचा में, परमेश्वर ने अपने अनुग्रह से एक ऐसा प्रबन्ध किया था, जिसमें महायाजक कुछ समय के लिए उसकी उपस्थिति में जाकर अपने पापों और इस्राएल के पापों के प्रायश्चित के लिए बलिदान चढ़ा सकता था (लैव्य. 16 अध्याय)। बलिदान का यह काम, मसीह के काम की एक झलक थी। वह दिव्य पुत्र, मसीह, मनुष्य बना, ताकि अपनी मृत्यु और पुनरुत्थान से पापियों का परमेश्वर के साथ मेल-मिलाप कराए (1 पत. 3:18)। वह ऊँचे पर चढ़ाया गया मसीह अब स्वर्ग में है और हमारे लिए एक जगह तैयार कर रहा है (यूहन्ना 14:2-3)। मसीह वापस आएगा, तथा नये आकाश और नयी पृथ्वी में परमेश्वर हमारे साथ रहेगा (प्रका. 21:1-5; 22:14)। इन सब बातों को देखते हुए, यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि परमेश्वर सबसे अधिक अतिथि-सत्कार करने वाला है! परन्तु बात यह है कि जो परमेश्वर सबसे अधिक अतिथि-सत्कार करने वाला है, वह बाइबल में अपने लोगों को आज्ञा देता है कि वे एक दूसरे के प्रति अतिथि-सत्कार दिखाकर उसकी तरह बनें (रोमि. 12:13; 1 पत. 4:9)। हम एक दूसरे से प्रेम करने, सेवा करने और आशीष देने के लिए अपने घरों को वैसे ही खोलते हैं, जैसा हमारे लिए किया गया है। यही मसीही संगति का मूल है।
हमारे समय में अतिथि-सत्कार करना एक अलग ही बात है। हम ऐसे समय में जी रहे हैं, जब लोग दूसरों के लिए अपने दरवाजे नहीं खोलते। लोग आमतौर पर घर से बाहर ही एक दूसरे के साथ समय बिताते हैं। घर को आमतौर पर किसी का निजी ठिकाना माना जाता है। बहुत से लोग चाहते हैं कि उनका घर निजी ही बना रहे। फिर भी, सुसमाचार हमें अपने घरों को एक अलग दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा देता है।[1] हम एक दूसरे का प्रेम से वैसे ही स्वागत करते हैं, जैसे मसीह ने हमारा स्वागत किया है (रोमि. 15:7)। यदि हम मसीही संगति में रहना और हमारे आपसी रिश्ते मजबूत रखता चाहते हैं, तो हमें अतिथि-सत्कार के लिए स्वयं को समर्पित करना होगा। जब आप अपने घर के दरवाजे खोलते हैं, तो आप निकटता के अवसर उत्पन्न करते हैं। अपने घर के भीतर एक दूसरे के साथ जान-बूझकर समय बिताना आपकी संगति को एक परिवार जैसा महसूस करने में सहायता करता है।
अतिथि-सत्कार का अर्थ क्या नहीं है
यह स्पष्ट करना बहुत महत्वपूर्ण है कि अतिथि-सत्कार का अर्थ क्या नहीं है। सबसे पहले, अतिथि-सत्कार का अर्थ यह नहीं है कि आपको एक मिलनसार व्यक्ति होना ही है। और ऐसा भी नहीं है कि जिन लोगों का व्यक्तित्व मिलनसार है, केवल उन्हें ही अतिथि-सत्कार करना चाहिए। पवित्रशास्त्र सभी मसीहियों को आज्ञा देता है कि चाहे उनका व्यक्तित्व कैसा भी क्यों न हो, वे बिना कुड़कुड़ाए अतिथि-सत्कार करें (1 पत. 4:9)। यदि कोई व्यक्ति स्वयं में खोए रहने वाला है, तो हो सकता है कि अतिथि-सत्कार करने में उसे अधिक प्रयास और ऊर्जा लगानी पड़े। फिर भी, प्रभु का अनुग्रह उसके लिए बहुत है (2 कुरिं. 12:9-10)। पवित्र आत्मा वह सहायक है, जो सामाजिक घबराहट को दूर करने में आपकी सहायता करने के लिए हमेशा तैयार रहता है (यूहन्ना 14 अध्याय)। अतिथि-सत्कार का अर्थ यह भी नहीं है कि आप मनोरंजन का प्रबन्ध करें। जब आप अतिथि-सत्कार करते हैं, तो आप अपने अतिथियों के सामने कोई प्रस्तुति नहीं दे रहे होते हैं।
अतिथि-सत्कार का अर्थ यह नहीं है कि आप अतिथियों को खुश करने और उनके अच्छा समय बिताने के लिए काम करते रहें। रंगशालाएँ, खेल के मैदान और अखाड़े मनोरंजन, आनन्द और मौज-मस्ती के साधन होते हैं। आप केवल मनोरंजन के लिए अतिथि-सत्कार नहीं करते, बल्कि लोगों से जुड़ने, प्रेम करने और सेवा करने के लिए करते हैं। इससे ध्यान दिखावे से हटकर सामाजिक मेल-जोल के महत्व पर चला जाता है। अतिथि-सत्कार का अर्थ यह नहीं है कि आपके पास लोगों को दिखाने के लिए कोई बहुत आलीशान घर हो, या आप उन्हें खाने के लिए सबसे बढ़िया भोजन परोसें। आपका घर कोई कला दीर्घा नहीं है, जहाँ आप चित्रकलाएँ, तस्वीरें, सजावटी सामान और बहुत से यंत्र दिखाते जाएँ। आपका घर आपके जमा किए हुए सामान और ट्राफियों या पुरस्कारों का कोई संग्रहालय भी नहीं है। इसके बजाय, आपका घर लोगों से जुड़ने, बातचीत करने, एक दूसरे को प्रोत्साहित करने और ताजगी पाने की जगह है। जब आप अतिथि-सत्कार करते हैं, तो यह महत्व नहीं रखता कि भोजन किसी मिशेलिन-स्टार वाले रेस्त्राँ जैसा ही हो! आपको कोई बहुत बड़ा भोज या कोई बहुत शानदार खानपान रखने की आवश्यकता नहीं है। आपको अपने अतिथियों के लिए बहुत सारा पैसा खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं है। आप बस एक पतीला खिचड़ी या पराँठे ही बना लें! अतिथि-सत्कार करते समय, आपका लक्ष्य अपने अतिथियों को हैरान करना नहीं, बल्कि संगति बनाने के बाइबल के उन वचनों के अनुसार उन्हें प्रभु में मजबूत करना होना चाहिए।
मेरे कुछ मित्र हैं, जो कई वर्षों से अपने घर पर हर मंगलवार को पराँठे की दावत का आयोजन करते आ रहे हैं। पराँठे सस्ते होते हैं। ये खाने की कोई महंगी वस्तु नहीं है, फिर भी मेरे मित्र यही परोसते हैं। उनके लिए, हर मंगलवार वाली यह पराँठे वाली दावत मित्रों के एक छोटे समूह के साथ सस्ते भोजन का आनन्द लेने से आरम्भ हुई थी, और अब यह एक बड़े समूह के लिए साप्ताहिक मिलन समारोह में बदल गई है। उनकी एक समृद्ध संगति और मधुर मित्रता है, जो हर सप्ताह लोगों के लिए पराँठे की दावत आयोजित करने के कारण सम्भव हो पाई है। यदि आप उन अतिथियों से बात करेंगे, तो वे आपको बताएँगे कि वे पराँठों के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए और एक साथ बिताए गए मधुर समय के लिए आते हैं। यह एक व्यावहारिक उदाहरण है कि वयस्क होने पर कैसे धार्मिकता से भरे मित्र बनाए जा सकते हैं।
अतिथि-सत्कार का अर्थ क्या है
अतिथियों को आशीष देने और उनकी सेवा करने के लक्ष्य के साथ अपने घर में उनका स्वागत करना ही अतिथि-सत्कार है। उन्हें प्रोत्साहित करना ही आपका लक्ष्य है। आप चाहते हैं कि प्रभु उनके प्यालों को भरने और उन्हें प्रेरणा देने के लिए आपके घर में बिताए गए समय का उपयोग करे। इसी कारण, जब आप अतिथि-सत्कार करें, तो उन्हें बढ़ाने के अवसर के रूप में इसे देखें। आपके घर में एक साथ बिताया गया समय आपके रिश्ते को और इसी प्रकार, आपकी संगति को भी मजबूत करता है।
जब आप अतिथि-सत्कार करने का संकल्प लेते हैं, तो आपको अपने लिए एक अच्छी, निरन्तर बनी रहने वाली दिनचर्या बनानी होगी। पवित्रशास्त्र यह नहीं बताता कि आपको कितनी बार अतिथि-सत्कार करना चाहिए। यह आपके अतिथि-सत्कार की आवृत्ति को अनिवार्य नहीं करता, बल्कि इसके लिए केवल हृदय का भाव बताता है (1 पत. 4:9)। लम्बी दूरी के धावक आपको बताएँगे कि एक अच्छी गति बनाए रखना ही एक अच्छी दौड़ की कुंजी है। यदि आप बहुत तेज और बहुत जोरदार आरम्भ करते हैं, तो आप थक जाएँगे। एक स्वस्थ संगति को बनाए रखना एक कम दूरी की तेज दौड़ नहीं, बल्कि एक मैराथन दौड़ है। हो सकता है कि प्रतिदिन या सप्ताह में तीन बार अतिथि-सत्कार करना आपके लिए निरन्तर सम्भव न हो। मेरा सुझाव है कि आप धीरे-धीरे आरम्भ करें और समय के साथ गति बढ़ाएँ। यह बाइबल के अनुसार एकांत और अकेलेपन के बीच सन्तुलन बनाने में सहायता करता है। जब आप लगातार अतिथि-सत्कार करते रहेंगे, तो आपकी संगति का बंधन दिनों में नहीं, बल्कि महीनों और वर्षों में मजबूत होता जाएगा।
सार्थक बातचीत
अतिथि-सत्कार करते समय, आपके पास कार्य-सूची तय करने और बातचीत को सुगम बनाने का अवसर होता है। यदि आप चाहते हैं कि यह समय सार्थक और यादगार हो, तो आपके पास कुछ ऐसे प्रश्न होने चाहिए, जो मधुर बातचीत की ओर ले जाएँ और संगति में अपनी कमजोरी के डर पर काबू पाने में सहायता कर सकें। नीचे उन प्रश्नों की सूची दी गई है जो आप पूछ सकते हैं:
– प्रभु ने आपका उद्धार कैसे किया?
– इस मौसम की प्यारी बात क्या है (एक गुलाब)?
– इस मौसम की कठोर बात क्या है (एक काँटा)?
– वह क्या है, जो प्रभु आपको सिखा रहा है (एक कली)?
– आपकी पसन्द का मसीही गीत कौन सा है (भजन, समकालीन गीत, सुसमाचार) (एक सुगंध)?
– पवित्रशास्त्र का कौन सा अंश हाल ही में आपके लिए सचमुच प्रेरणादायक रहा है? और ऐसा क्यों हुआ?
– आप पवित्रशास्त्र में क्या पढ़ रहे हैं? इसने आपको कैसे प्रोत्साहित किया है?
– इस समय, परमेश्वर के चरित्र का कौन सा पहलू आपके लिए सबसे अधिक गहरा और प्रेरणादायक रहा है?
– इस समय, परमेश्वर के चरित्र के किस पहलू पर आपको सन्देह हो रहा है? और ऐसा क्यों है? पवित्रशास्त्र का कौन सा अंश आपको इससे लड़ने में सहायता कर सकता है?
जब आप बातचीत को आगे बढ़ाते हैं, तो जो प्रश्न आप पूछते हैं, उनके उत्तर देने का भी लक्ष्य रखें। जब आप अपना हृदय खोलते हैं, तो आप चाहते हैं कि लोग आपको जानें। आप अपने दु:खों, संघर्षों और उन सुखद पलों को साझा करना चाहते हैं, जो प्रभु आपको देता है। अकेलापन दूर करने के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। आप जितना अधिक अपना हृदय खोलेंगे, उतना ही अधिक आप दूसरों को सचमुच आपको जानने का अवसर प्रदान करेंगे, जिससे आपको एक संगति मिल जाएगी। उस संगति की समृद्धि तभी बढ़ेगी, जब आप लोगों का अतिथि-सत्कार करने और उनके सामने अपना हृदय खोलने के लिए स्वयं को समर्पित करेंगे।
मित्रता के विषय में बाइबल के वचनों पर चिन्तन करते हुए, हम देखते हैं कि एक सच्चा मित्र हर समय प्रेम करता है। लोगों को अपने जीवन में आमंत्रित करके, आप बाइबल में बताई गई उसी संगति का अभ्यास कर रहे हैं, जो हमारी आत्मा को सहारा देती है। भले ही कभी-कभी आपको ऐसा लगे कि आप अकेलेपन से जुड़े हुए बाइबल के वचनों के साथ संघर्ष कर रहे हैं, तौभी यह याद रखें कि परमेश्वर अकेले लोगों को भी परिवारों में बसाता है।
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मनन के लिए प्रश्न:
- इस अध्याय ने अतिथि-सत्कार के प्रति आपके दृष्टिकोण को कैसे प्रभावित किया है?
- मसीह के द्वारा परमेश्वर ने आपके प्रति जो अतिथि-सत्कार दिखाया है, वह दूसरों के प्रति अतिथि-सत्कार करने वाला बनने के लिए आपको कैसे प्रेरित करता है?
- अगले सप्ताह आप अपने घर पर किसे आमंत्रित कर सकते हैं? सार्थक बातचीत को बढ़ावा देने के लिए आप कौन से प्रश्न पूछ सकते हैं?
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भाग V: लम्बी दौड़ के लिए तैयार रहें
एक सच्ची, सार्थक और समृद्ध संगति रातों-रात नहीं बन जाती। इसमें समय और उद्देश्य की आवश्यकता होती है। यदि संगति एक भोजन है, तो यह भट्टी में नहीं, बल्कि धीमी आँच वाले बर्तन में पकता है। धीमी आँच वाले बर्तन के भोजन को पकने में कई घण्टे लगते हैं। इसके लिए धीरज की आवश्यकता होती है। इसी तरह, एक सच्ची संगति बनने और उसका आनन्द लेने में समय लगता है। इसके लिए प्रयास और धीरज की आवश्यकता होती है। इसमें स्वयं को नकारना और दूसरों की लगन से परवाह करना शामिल है (लूका 9:23-24; फिलि. 2:3-5)। अकेलापन दूर करने और मसीही संगति में जीवन बिताने की जीवनशैली, लम्बी दौड़ के लिए तैयार रहने का एक वादा है। और यह कैसा दिखता है?
दृष्टिकोण
यदि आप संगति में जीवन बिताना और उसमें बने रहना चाहते हैं, तो आपको एक सही दृष्टिकोण बनाए रखना होगा। एक बात जो ध्यान में रखनी है, वह यह है कि आपकी संगति छोटी होगी। परमेश्वर ने आपको एक सीमा से बँधे हुए प्राणी के रूप में बनाया है, जिसकी क्षमता, ज्ञान और समय सीमित हैं। यह असम्भव है कि आप हर किसी को जानें और हर कोई आपको जाने। आप एक मील तक फैले और एक इंच गहरे हो सकते हैं, परन्तु आपके पास सच्चा मसीही मेल-जोल नहीं होगा। या आप “कम-ही-अधिक-है” वाली मानसिकता अपना सकते हैं। आप कुछ ही लोगों को जानते हैं, परन्तु उन्हें गहराई से जानते हैं। आप जान-बूझकर लोगों के एक छोटे समूह को प्रोत्साहित करने को प्राथमिकता दे सकते हैं, और साथ ही कलीसिया के दूसरे सदस्यों के लिए भी प्रार्थना कर सकते हैं (इब्रा. 3:12-14)। आप जितना अधिक कम लोगों को जानेंगे, उतना ही अधिक आप उनको विशेष देखभाल और प्रोत्साहन दे पाएँगे। संगति का सच्चा अर्थ यही है।
प्रार्थना
एक समृद्ध संगति के लिए लगातार प्रार्थना करना, एक बहुत अच्छा प्रार्थना का निवेदन है। यह एक ऐसी प्रार्थना है, जिसका उत्तर देना परमेश्वर को अच्छा लगेगा, क्योंकि उसने आपको अपने और अपने लोगों के साथ रिश्ते में रहने के लिए बनाया है। वह आपको अपने परिवार में ले आया है। वह चाहता है कि उसकी शान्ति और प्रेम, उसके लोगों के माध्यम से आप तक पहुँचे (यूहन्ना 13:34-35; 2 कुरिं. 1:3-7)। यीशु ने प्रार्थना करने की आज्ञा दी और वादा किया कि यदि हमारे निवेदन उसकी इच्छा के अनुसार होंगे, तो उनका उत्तर अवश्य मिलेगा (मत्ती 7:7-11; यूहन्ना 14:13-14)। कलीसिया के सदस्यों के साथ संगति में बिताया गया जीवन, निश्चित रूप से प्रभु की इच्छा के अनुरूप होता है। इसी कारण, संगति के लिए लगातार प्रार्थना करने में स्वयं को समर्पित करना और उन प्रार्थनाओं को और मजबूत बनाने के लिए बाइबल में संगति से जुड़े वचन ढूँढ़ना अच्छा है। इसके लिए आपकी प्रार्थनाएँ परमेश्वर पर आपकी निर्भरता को दर्शाती हैं।
जब भी प्रभु आपको एक समृद्ध संगति प्रदान करे, तो उसके लिए प्रार्थना करते रहना अच्छा होता है। इसे बढ़ाने के लिए आपको प्रभु की आवश्यकता होती है। संगति के लिए प्रार्थना न करना, उसके एक मरे हुए पौधे की तरह मुरझा जाने का कारण बन सकता है। हालाँकि, इसके लिए लगातार प्रार्थना करने से यह फल-फूल सकती है। प्रार्थना करें कि रिश्ते और गहरे हों तथा उनमें और मधुरता आए। प्रार्थना करें कि वह संगति नये नियम में पाए जाने वाले उन वचनों को अपने जीवन में उतारने के लिए समर्पित हो, जो एक दूसरे के बारे में बात करते हैं (यूहन्ना 13:34-35; गला. 6:1-2, 1 थिस्स. 4:18)। अकेलेपन पर काबू पाने के लिए यह अत्यन्त आवश्यक है। एक स्थायी संगति के लिए प्रार्थना करना एक प्रभावी और आवश्यक साधन है।
उपस्थिति
अपनी परिभाषा के अनुसार, संगति के लिए आमने-सामने के रिश्तों की आवश्यकता होती है। यही एकमात्र तरीका है, जिससे कोई एक वास्तविक संगति का हिस्सा बन सकता है। साथ बिताया गया समय ही वह मुख्य तरीका है, जिससे एक संगति का निर्माण होता है और वह मजबूत बनती है। अकेलेपन से बचने के प्रयास में दूसरों के साथ रहने की प्रतिबद्धता शामिल होती है। यदि कोई आपकी संगति का हिस्सा है, तो वे आपके लिए और आप भी उनके लिए उपलब्ध रहते हैं। यदि आप एक मजबूत और स्थायी संगति चाहते हैं, तो स्वयं को उपस्थिति की सेवा के लिए समर्पित करें (नीति. 17:17)। पवित्रशास्त्र मसीहियों को इसी तरह से जीने के लिए प्रोत्साहित करता है (रोमि. 12:15)।
उपस्थिति की सेवा लोगों को आपकी सोच से कहीं अधिक आशीष देती है। यह करुणा और परवाह को दर्शाती है। अय्यूब के मित्रों के कार्यों में, उपस्थिति की सेवा ही एकमात्र ऐसी बात थी, जिसकी हम प्रशंसा कर सकते हैं (अय्यू. 2:11-13)। इस डिजिटल युग में, शारीरिक रूप से उपस्थित होना प्रेम और प्रतिबद्धता को एक ऊँची आवाज वाले माइक से चीख-चीखकर व्यक्त करता है। पवित्रशास्त्र सिखाता है कि हर बात का एक समय होता है (सभो. 3:1-8)। जब आप अच्छे और बुरे, दोनों ही समयों में उपस्थित रहने को प्राथमिकता देते हैं, तो आप अपने रिश्तों की निकटता को और अधिक मजबूत बनाते हैं। आपको किन अवसरों पर उपस्थित होना चाहिए? अपनी संगति के लिए उपस्थित रहना अपना लक्ष्य बनाएँ, विशेष रूप से तब जब:
– किसी को पदोन्नति मिले।
– किसी की नौकरी चली जाए।
– कोई रिश्ता टूट जाए।
– किसी की मंगनी हो जाए
– कहीं कोई विवाह हो।
– कहीं कोई अन्तिम संस्कार हो।
– किसी की कोई बीमारी पता चले।
– किसी की कोई शल्य-चिकित्सा सफल रहे।
– किसी का गर्भपात हो जाए।
– किसी के घर बच्चा जन्म ले।
– किसी के माता-पिता का तलाक हो जाए।
– किसी के घर में नली फट जाए।
– कोई नया घर खरीदे।
जैसे आप अपने जीवन के लिए संगति को एक सहारा मानते हैं, वैसे ही दूसरों के लिए भी एक संगति बनकर अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करने का प्रयास करें (गला. 5:14)। सामाजिक मेल-जोल का यही महत्व है। जब आप लगातार दूसरों के दु:ख-सुख में शामिल होते रहेंगे, तो आपकी संगति आपको उस आत्मिक परिवार जैसी लगेगी, जिसका हिस्सा आप मसीह में हैं। आप जितना अधिक दूसरों के लिए उपस्थित रहेंगे, उतना ही आप अकेलेपन से बचेंगे। आप जितना अधिक दूसरों के लिए उपस्थित रहेंगे, उतना ही अधिक आप बाइबल के अनुसार एक संगति में जीवन बिताएँगे। आप जितना अधिक दूसरों के लिए उपस्थित रहेंगे, उतना ही अधिक उन्हें लगेगा कि आप उनसे प्रेम करते हैं। आप जितना अधिक दूसरों के लिए उपस्थित रहेंगे, आपका रिश्ता उतना ही अधिक समृद्ध और मधुर होगा। आप केवल कुछ समय के लिए नहीं, बल्कि अपना पूरा जीवन एक संगति में बिताना चाहते हैं। दूसरों के साथ उपस्थित रहने का आपका यह संकल्प निश्चित रूप से आपको उस लक्ष्य को पूरा करने में सहायता करेगा और इस प्रश्न का उत्तर देगा कि अकेलेपन को महसूस करना कैसे बन्द करें।
धीरज
संगति रातों-रात नहीं बनती। और न ही आप इसे बनाने की प्रक्रिया में जल्दबाजी कर सकते हैं। यह आमतौर पर उस समयावधि के अनुसार नहीं बनती, जिसे हम अनजाने में तय कर लेते हैं। इसके बजाय, यह समय बीतने के साथ-साथ, जान-बूझकर किए गए मेल-जोल और साथ बिताए गए पलों से विकसित होती है। इसमें “समय बीतने के साथ-साथ” एक मुख्य बात है। इसके लिए धीरज की और बिना कुड़कुड़ाए या हार माने, प्रतीक्षा करने और सहन करने की क्षमता की आवश्यकता होती है। प्रभु अपने लोगों के प्रति धीरजवन्त हैं (निर्ग. 34:6-7)। वह अपने लोगों से कहता है कि वे भी दूसरों के प्रति वैसा ही धीरज दिखाएँ (गला. 5:22-23; इफि. 4:1-3; कुलु. 3:12-14; 1 थिस्स. 5:14)। प्रेम धीरज धरता है (1 कुरि. 13:4)। यदि आप किसी संगति में जीवन बिताना चाहते हैं, तो आपको धीरज की आवश्यकता होगी।
संगति बनाने का प्रयास में आपको धीरज धरना होगा। हो सकता है कि आप तुरन्त एक दूसरे के साथ घुल-मिल न पाएँ। हर मेल-जोल सुखद या एकदम सफल नहीं होगा। हर बातचीत आसान नहीं होगी। इसमें कुछ पल अजीब भी हो सकते हैं। हो सकता है कि दूसरों के सामने खुलकर अपनी बात कहने में आपको कुछ समय लगे। और हो सकता है कि उन्हें भी आपके सामने खुलकर अपनी बात कहने में समय लगे। यह संगति में अपनी कमजोरी के डर पर काबू पाने का ही एक हिस्सा है। हो सकता है कि कुछ समय तक, साथ समय बिताने की पहल करने वाले मुख्य व्यक्ति आप ही हों। फिर भी, हर मेल-जोल और साझा किया गया अनुभव, संगति बनाने की दिशा में बढ़ाया गया एक कदम होता है।
संगति में रहने के लिए आपको धीरज की आवश्यकता होगी। आप दूसरों में ऐसी कुछ आदतें देखेंगे, जो आपको पसन्द नहीं आएँगी। कुछ पल चुनौतीपूर्ण भी होंगे। आप दूसरों को सलाह देंगे और डाँटेंगे-फटकारेंगे, और आपके साथ भी ऐसा ही होगा (नीति. 27:5-6)। लोग आपके साथ गलत व्यवहार कर सकते हैं, और ऐसे में आपको उन्हें क्षमा करना होगा (लूका 17:3-4)। आप भी पाप करेंगे, और आपको दूसरों से क्षमा माँगनी पड़ेगी। आपकी संगति का उपयोग करके प्रभु आपको और भी अधिक अपने जैसा बनाएगा (फिलि. 1:6)।
दृढ़ता
संगति बनाने और उसे बनाए रखने के लिए सहनशक्ति और दृढ़ता की आवश्यकता होती है। आप थक सकते हैं, और सम्भव है कि कई बार आप सब कुछ छोड़ देने की परीक्षा में पड़ जाएँ। ऐसे समय में दृढ़ता की आवश्यकता होती है। प्रेरित पौलुस ने कहा था, “हम भले काम करने में साहस न छोड़ें, क्योंकि यदि हम ढीले न हों तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे” (गला. 6:9)। जब आप संगति में रहने का प्रयास कर रहे हों और एक वयस्क के रूप में धार्मिकता से भरे मित्र खोजने का प्रयास कर रहे हों, तो यह एक ऐसा जीवन्त वचन है, जिसे आप थामे रह सकते हैं। जब आप दूसरों के साथ जुड़ने के अपने प्रयास में दृढ़ रहते हैं, तो अन्त में आप अपने परिश्रम का मीठा फल चखेंगे।
संगति को बनाए रखने के लिए भी दृढ़ता की आवश्यकता होती है। आप चाहते हैं कि यह और गहरी हो। आप चाहते हैं कि इसमें निकटता बढ़े। आप उन लोगों को प्रोत्साहित करना चाहते हैं, जिनके साथ आप अपना जीवन बिताते हैं (इब्रा. 3:12-14)। जब जीवन व्यस्त हो जाता है, तब विशेष रूप से आप उनके साथ समय बिताने को प्राथमिकता देना जारी रखना चाहते हैं। इसके लिए और भी अधिक जान-बूझकर प्रयास करने की आवश्यकता होगी। यह दृढ़ता के द्वारा ही सम्भव होता है। एक अच्छी तरह से संवारी गई वाटिका सुन्दर होती है, जो आँखों को सुखद लगती है। उसकी मिट्टी अच्छी दिखती है। पौधे स्वस्थ और छँटनी किए हुए दिखते हैं। जंगली पौधे उखाड़ दिए जाते हैं। यह आलस्य का परिणाम नहीं है। यह निष्क्रियता का परिणाम नहीं है। यह बहुत कम प्रयास करने का परिणाम नहीं है। यह कड़े परिश्रम का परिणाम है। यह जान-बूझकर की गई देखभाल का परिणाम है। यह वाटिका की देखरेख में निरन्तरता का परिणाम है। आपकी संगति दृढ़ता से ही फल-फूल सकती है। जब आप लगातार उन्हें बुलाते हैं, प्रोत्साहित करते हैं, उनका अतिथि-सत्कार करते हैं, उनसे जुड़ते हैं और उनकी सेवा करते हैं, तो आप न केवल संगति में जीवन बिताते हैं, बल्कि उसके फलने-फूलने में सक्रिय रूप से योगदान भी देते हैं। व्यवहार में संगति का महत्व यही है।
एक स्वस्थ संगति में रहने के अपने प्रयास में, पौलुस के इस उपदेश को अपने सामने रखें: “इसलिये हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि यह जानते हो कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है” (1 कुरिं. 15:58)।
स्वस्थ संगति एक ऐसी बात है जिसके लिए प्रयास करना अर्थपूर्ण होता है। यद्यपि इसे बढ़ने में समय लगता है, फिर भी आप दूसरों के साथ एक समृद्ध और उत्साहवर्धक जीवन का अनुभव कर सकते हैं। जब आप इस लम्बी यात्रा पर निकलें, तो अनन्त महिमा के दर्शन को अपने सामने रखते हुए ऐसा करें। सुसमाचार के द्वारा, मसीह में परमेश्वर ने आपको अपने राज्य का नागरिक, अपनी वाचाई संगति का सदस्य, और अपने परिवार की सन्तान बनाया है (इफि. 2:11-22)। बाइबल संगति के बारे में जो कुछ कहती है, यह उसकी परम परिपूर्णता है। इसी कारण, आप अनन्तकाल तक परमेश्वर की उपस्थिति में, छुड़ाए हुए लोगों के साथ एक संगति में रहेंगे (प्रका. 21:1-5; 22:3-5)। भविष्य की सच्चाई इस जीवन में संगति की आपकी खोज को निरन्तर आकार दे और प्रेरित करे।
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मनन के लिए प्रश्न:
- अपनी संगति के लोगों के लिए उपस्थित रहने के मामले में आप कैसा कर रहे हैं?
- ऊपर बताई गई पाँच बातों में से कौन सी बात आपको सबसे अधिक प्रभावित करती है?
- संगति के लिए आपका प्रार्थना का जीवन कैसा है?
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निष्कर्ष
हो सकता है कि आप कुछ समय तक अकेलेपन में रहे हों और यह मान लिया हो कि यह ऐसा ही रहेगा। फिर भी, परमेश्वर ने आपको किसी अलग बात के लिए बनाया है। परमेश्वर ने आपको किसी बेहतर बात के लिए बनाया है। परमेश्वर ने मसीह में आपका उद्धार, अकेलेपन से कहीं अधिक बेहतर और मधुर बात के लिए किया है—जो कि उसके और उसके लोगों के साथ एक रिश्ता है। उसने प्रभावी रूप से आपको अपनी देह, अर्थात् कलीसिया में बुलाया है (1 कुरिं. 12:12-14)। वह चाहता है कि आप उसके साथ और उसके लोगों के साथ सहभागिता में जीवन का अनुभव करें।
पहल करने और दूसरों की ओर बढ़ने के लिए सुसमाचार आपका मार्गदर्शन करे (मर. 10:45; फिलि. 2:1-11)। मसीह का प्रेम आपको दूसरों के लिए एक संगति बनने हेतु प्रेरित करे। सृष्टि और छुटकारे में मनुष्य के लिए परमेश्वर के उद्देश्य, आपको अकेलेपन से बचने और संगति में जीवन बिताने के लिए विवश करें।
लेखक के बारे में
जोशुआ चैटमैन मेम्फिस, टेनेसी में मिडटाउन बैपटिस्ट चर्च के पास्टर के रूप में सेवा करते हैं। वह और उनकी पत्नी, स्टेफनी, अपने चार बच्चों जेयस, ब्रेली, ब्रिएल और स्काइलर के साथ मिडटाउन में रहते हैं।
विषयसूची
- भाग I: किसी कलीसिया से जुड़ें
- संगति के लिए सृजे गए
- संगति की खोज
- कलीसिया के सदस्य बनें
- मनन के लिए प्रश्न:
- भाग II: रविवार की सभा: समय से पहले पहुँचें, और बाद में वहीं रुकें
- सभा में समय से पहले पहुँचें
- सभा के बाद वहीं रुकें
- सभा के बाद दोपहर का भोजन
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- मनन के लिए प्रश्न:
- भाग III: शिष्यत्व—मिल-जुलकर जीवन जीना
- किसे शिष्य बनाएँ
- नियमितता: साप्ताहिक
- पारदर्शिता और कमजोरी
- एक साथ समय बिताने को प्राथमिकता दें
- मनन के लिए प्रश्न:
- भाग IV:अतिथि-सत्कार: अपना घर खोलें, अपना हृदय खोलें
- अतिथि-सत्कार का अर्थ क्या नहीं है
- अतिथि-सत्कार का अर्थ क्या है
- सार्थक बातचीत
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- मनन के लिए प्रश्न:
- भाग V: लम्बी दौड़ के लिए तैयार रहें
- दृष्टिकोण
- प्रार्थना
- उपस्थिति
- धीरज
- दृढ़ता
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- मनन के लिए प्रश्न:
- निष्कर्ष
- लेखक के बारे में