#54 ईमानदारी से जीना: भ्रष्ट संसार में खराई

By विल्सन रामसे

परिचय

अपने ही शिष्यों के द्वारा विश्वासघात किया गया, गिरफ्तार किया गया, और अस्वीकार किया गया, सत्य न्याय के कटघरे में खड़ा था। क्रूस की ओर जाते समय अगुवों ने सत्य से प्रश्न किए। रोमी राज्यपाल पुन्तियुस पिलातुस ने सत्य को स्वयं उसी के पक्ष में बोलने का अवसर दिया। एक महत्वपूर्ण क्षण में यीशु ने कहा, “मैंने इसलिए जन्म लिया, और इसलिए जगत में आया हूँ कि सत्य पर गवाही दूँ जो कोई सत्य का है, वह मेरा शब्द सुनता है” (यूहन्ना 18:37)। राज्यपाल ने एक ऐसा प्रश्न पूछा जिसे हमारा आधुनिक युग या तो अनदेखा करता है या तोड़-मरोड़ देता है, “सत्य क्या है?” यदि हम ईमानदारी से और सत्य के अनुसार जीना चाहते हैं, तो यह एक ऐसा प्रश्न है जिस पर हमारा ध्यान जाना चाहिए। हमारे सामाजिक माध्यमों के मंच और समाचार प्रवाह अधिकाँश सत्य के प्रश्नों के प्रति उदासीन प्रतीत होते हैं। हमारे ऑनलाइन संसार में झूठ का लाभ उठाने का प्रयास करने वाले लोगों की कोई कमी नहीं है। नकली वीडियो, नकली स्वास्थ्य सम्बन्धी दिनचर्या और नकली व्यक्तित्व हमारे समाचार प्रवाह को भर देते हैं, जो तेजी से फैलने की होड़ में लगे रहते हैं। शीघ्रता से खोज करने पर धोखाधड़ी और छल-कपट करने में पकड़े गए लोगों के विरुद्ध मुकदमों के एक के बाद एक उदाहरण सामने आते हैं। पूरी रीति से प्राकृतिक आहार योजना में रासायनिक दवाइयों का प्रभाव भी देखी दे रहा है। और वह चित्र अंततः ए.आई. द्वारा बनाई गई छवि निकलती है। दुःख की बात यह है कि तकनीकी क्षेत्र में इतनी प्रगति होने के बावजूद भी यह ‘जादूई नुस्खे’ बेचने वाले ठगों का खात्मा नहीं कर पाई है। बेईमानी प्रचुर मात्र में है, इसलिए यिर्मयाह के समान विलाप करने और यह कहने का कारण है कि, “देश में सत्य नहीं, वरन् असत्य प्रबल हो गया है” (यिर्म. 9:3)। इस पतित संसार में हम सत्य कहाँ ढूँढ सकते हैं?

मसीही होने के नाते हम जानते हैं कि सत्य प्राप्त किया जा सकता है। न केवल यह प्राप्त किया जा सकता है, वरन् परमेश्वर ने अपने पुत्र, यीशु मसीह के द्वारा अपने आप को प्रकट करके इसे वरदान के रूप में दिया है। इसके अतिरिक्त, हम जानते हैं कि परमेश्वर हमसे यह अपेक्षा करता है कि हम सत्य से प्रेम करें, क्योंकि यह उसी से आता है। हमारा परमेश्वर और छुटकारा देने वाला सत्य है। वह सत्य को प्रकट करने वाला है। उसकी दुल्हन, अर्थात कलीसिया, को अपने विश्वासयोग्य दूल्हे के द्वारा कहे गए सत्य के अनुसार कार्य करने के लिए बुलाया गया है। ईमानदारी और सच्चाई ऐसे सुन्दर गुण हैं, जिनके द्वारा विश्वासियों को परमेश्वर के स्वरूप को धारण करने वाले होने के नाते इस संसार में प्रज्वल्लित होना चाहिए।

ईमानदारी का जीवन वह है जो सत्य के प्रति समर्पित रहता है, चाहे उसकी कीमत कुछ भी क्यों न हो। इस अध्ययन के माध्यम से मेरी आशा है कि परमेश्वर के प्रति आपका समर्पण एक ईमानदार जीवन के रूप में प्रकट होगा, यहाँ तक कि इस कपटी संसार में भी। इस प्रकार की मसीही ईमानदारी, सच्चे देहधारी यीशु मसीह के साथ गहरे अनुभव से उत्पन्न होती है। यह उस हृदय का परिणाम है, जो यीशु के साथ गहराई से बंधा हुआ होता है, और जो अब उसी के द्वारा इस संसार में ईमानदारी से जीवन जीने के लिए प्रेरित है। एक बार धर्मी ठहराए जाने के बाद, मसीही विश्वासी सत्य के प्रति निरन्तरता और समर्पण के ऐसे मार्ग पर चल पड़ते हैं, जो धीरे-धीरे और अधिक प्रकाशमान होता चला जाता है, ठीक अपने परमेश्वर और उद्धारकर्ता के समान। सत्य को सही ढँग से समझने के लिए, हमें अपने अध्ययन का आरम्भ सत्य के स्रोत और मापदंड, अर्थात् परमेश्वर से करना चाहिए।

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