#88 आत्मिक युद्ध: कानूनी लड़ाई में परमेश्वर की बुद्धि कैसे पाएँ

By Dr. Richard Perhai Dr. Larry Oats

परिचय

कुछ समय पहले मैं डेव नाम के एक व्यक्ति को जानता था। वह एक ऐसा व्यक्ति था, जिसे आप पड़ोसी के तौर पर पसन्द करेंगे—कम से कम, आरम्भ में तो ऐसा ही था। वह स्थिर स्वभाव का था, कड़ी मेहनत करता था, और अपने बगीचे की देखभाल इतने अच्छे से करता था कि मानो यह उसका शौक हो। परन्तु डेव एक ऐसी समस्या में फँस गया, जिसने अन्त में उसका पूरा जीवन ही निगल लिया: वह समस्या भूमि की तीन-फुट की एक पट्टी थी।

इसका आरम्भ एक नयी बाड़ से हुआ। उसके पड़ोसी ने, जो उससे छोटी आयु का था और जिसे भूमि की सीमाओं को लेकर डेव जैसी परवाह नहीं थी, लकड़ी का एक घेरा लगाया, जिसके लिए डेव को निश्चय था कि यह घेरा उसकी सीमा के भीतर 36 इंच तक आ गया है। कॉफी पीते हुए बातचीत करने के बजाय, डेव ने भूमि के सर्वेक्षण वाले नक्शे निकाल लिए। जब पड़ोसी अपनी बात से पीछे नहीं हटा, तो डेव एक कानूनी प्रतिष्ठान के द्वारा अदालत की चिट्ठियाँ ले आया। इसके बाद उसके ऊपर दस वर्षों तक चलने वाला एक ऐसा जुनून सवार हुआ, जिसके कानूनी शुल्क में डेव के पचास लाख रुपये खर्च हो गए।

अन्त में वह कचहरी में खड़ा था और उसने न्यायाधीश को यह कहता सुना कि वह सही था। वह बाड़ हटा दी गई। डेव को अपनी 36 इंच घास वापस मिल गई। परन्तु भूमि के उस छोटे से टुकड़े पर खड़े होकर, वह असल में अपने ही बनाए हुए कब्रिस्तान में खड़ा था। वह मुकदमा तो जीत गया था, परन्तु अपना आनन्द खो चुका था। उसने अपने शहर के लोगों से मिलने वाला आदर भी खो दिया था, जो अब उसे ऐसे व्यक्ति के तौर पर देखते थे, जो अपनी परछाई पर भी मुकदमा कर दे, यदि वह सीमा पार कर जाए। और सबसे महत्वपूर्ण बात, उसने परमेश्वर में शान्ति पाने के बारे में बात करने की अपनी क्षमता खो दी थी। कोई भी ऐसे व्यक्ति से उस उद्धारकर्ता के बारे में नहीं सुनना चाहता था, जिसने घास काटने की मशीन जितनी जगह के लिए दस वर्षों तक लड़ाई लड़ी हो। उसके पास उस भूमि के कागजात तो थे, परन्तु उसकी आत्मा एक सूखी और खाली जगह बन चुकी थी।

न्याय के बारे में बात करते समय हम अक्सर इसी सच्चाई को अनदेखा कर देते हैं। हमें लगता है कि सही होना ही सबसे बड़ा लक्ष्य है, परन्तु हम भूल जाते हैं कि सही होने की कीमत आत्मा के ऊपर बहुत भारी पड़ सकती है। हम एक ऐसी संस्कृति में रहते हैं, जो हमें हर कीमत पर अपनी वस्तुओं की रक्षा करने के लिए कहती है, फिर भी, हम शायद ही कभी अपने चरित्र पर पड़ने वाली कीमत का हिसाब लगाते हैं।

हममें से अधिकांश लोगों में डेव वाली खुजली का कोई न कोई रूप होता है। जब कोई हमारे साथ बुरा करता है, चाहे वह कोई बिगड़ा हुआ व्यापारिक सौदा हो, कानूनी समस्या हो या पड़ोसियों से झगड़ा हो, तो हमारी पहली स्वाभाविक प्रवृत्ति यह नहीं होती कि बाइबल के तरीके से झगड़ा सुलझाएँ या मार्गदर्शन माँगे। बल्कि हम फोन नम्बरों वाली पुस्तक में कोट-पेंट पहने किसी व्यक्ति को ढूँढ़ने लगते हैं। हमने एक तरह का कानूनी जुनून विकसित कर लिया है। हम ऐसा व्यवहार करते हैं कि मानो कानूनी अदालत ही एकमात्र ऐसी जगह है, जहाँ सब बातें सीधी की जा सकती हैं। हमें विश्वास है कि यदि हमारे पक्ष में निर्णय आ जाए, तो दु:ख दूर हो जाएगा और हमारी सुरक्षा बहाल हो जाएगी।

परन्तु मुकदमा करने या अदालत में अपनी बात रखने की यह स्वाभाविक प्रतिक्रिया हमारे हृदयों के बारे में कुछ गहरी बात बताती है। यह दिखाती है कि हमें असल में भरोसा नहीं है कि परमेश्वर हमारे जीवन को नियंत्रित करता है। हम रविवार को परमेश्वर की सब बातों पर अधिकार रखने के बारे में चर्चा करते हैं, परन्तु सोमवार की सुबह, जब कोई अनुबंध टूटता है, जब बातें गलत हो जाती हैं, तो उस समय परमेश्वर पर भरोसा करने के बजाय, हम ऐसा व्यवहार करते हैं कि मानो इस संसार को हमें ही सम्भालना है। हम कानून का सहारा इसलिए लेते हैं, क्योंकि हम डरे हुए होते हैं। हमें डर होता है कि कोई हमारा लाभ उठा लेगा, हमने जो बनाया है, उसे खो देने का डर होता है, और इस बात का डर होता है कि यदि हम स्वयं के लिए नहीं लड़ेंगे, तो कोई दूसरा भी नहीं लड़ेगा।

कानूनी व्यवस्था अक्सर एक दर्पण की तरह काम करती है, यद्यपि यह ऐसा दर्पण नहीं है, जिसमें हमें देखना अच्छा लगता है। यह नियंत्रण की हमारी छिपी हुई आवश्यकताओं को प्रतिबिम्बित करता है। जब हम कोई बात साबित करने के लिए किसी रिश्ते को समाप्त करने या अपने बच्चों की विरासत को खर्च करने को तैयार हो जाते हैं, तो हम एक मूर्ति की पूजा कर रहे होते हैं। हमने स्वयं को सही साबित करने की इच्छा को ही अपना देवता बना लिया है। हमें लगता है कि यदि हम जीत गए, तो हम सुरक्षित रहेंगे। परन्तु कानून आपको सुरक्षा नहीं दे सकता; यह आपको केवल कागज का एक टुकड़ा दे सकता है। यदि आपकी भलाई का एहसास किसी न्यायाधीश के निर्णय से जुड़ा हुआ है, तो आपने अपनी नाव एक बहुत ही कमजोर घाट से बाँध रखी है।

हमें यह मानना होगा कि न्याय की हमारी खोज भी अक्सर हमारे अपने घमण्ड से दूषित होती है। हम कहते हैं कि हम सिद्धान्तों पर खड़े हैं, परन्तु आम तौर पर, हम बस हमारे अपने अहंकार पर खड़े हुए होते हैं। हम चाहते हैं कि लोग हमें विजेता के रूप में देखें। हम चाहते हैं कि सामने वाला व्यक्ति लज्जित हो। कानूनी तौर पर सही होने की जल्दबाजी में, हम बाइबल में बताई गई दया और विनम्रता की उन आवश्यकताओं को अनदेखा करके आगे निकल जाते हैं, जिनकी प्रभु हमसे असल में अपेक्षा करता है।

यह मार्गदर्शिका आपको कानूनी सलाह देने या नियमों से बचने का कोई तरीका ढूँढ़ने में आपकी सहायता करने के लिए नहीं है। ऐसे बहुत से लोग हैं, जो आपको अपनी बात मनवाने का तरीका बताने के लिए आपसे हर घण्टे के हिसाब से पैसा लेंगे। इसके बजाय, यह मार्गदर्शिका इस बारे में है कि एक ऐसे संसार में कैसे जीवन बिताया जाए, जो मौलिक रूप से बिखरा हुआ है, और उस बिखराव को अपने हृदय में न आने दिया जाए। यह मार्गदर्शिका इस बारे में है कि झगड़ों, अनुबंधों और टकराव को उस तरीके से कैसे सम्भाला जाए, जिससे आपका विश्वास बना रहे, जिससे आपका हृदय सही जगह पर रहे, और जिससे शान्ति बनी रहे—जितना कर पाने में आप सक्षम हों।

हम इस मुश्किल सच्चाई को देखने जा रहे हैं कि विश्वास रखने वाला व्यक्ति होने का क्या अर्थ है, जब कोई उस वस्तु को लेने का प्रयास कर रहा हो, जो आपके विचार से आपकी है। हम यह भी पूछेंगे कि हम ऐसी मानवीय व्यवस्था पर इतनी जल्दी भरोसा क्यों कर लेते हैं, जो अक्सर हमारी ही तरह उलझन में होती है। स्वामित्व पाने की जिद में पड़े बिना, जो कुछ भी हमें मिला है, हम उसके जिम्मेदार प्रबन्धक बनने का तरीका खोजना चाहते हैं।

इसका लक्ष्य यह है कि हम हर समय बचाव करने वाला जीवन छोड़कर, विश्वासयोग्यता के साथ सेवा करने वाला जीवन अपनाएँ। हो सकता है कि आपको अभी भी कागजों पर हस्ताक्षर करने पड़ें या वकीलों से बात करनी पड़े, परन्तु इसकी अपेक्षा और लक्ष्य यही है कि आप यह काम ऐसे मनुष्य के तौर पर करें, जिसे पता है कि उसकी असली विरासत पहले से ही सुरक्षित है। जब आपको पता हो कि पूरा संसार आपके पिता का है, तो आपको भूमि के एक छोटे से टुकड़े के लिए किसी अनाथ की तरह लड़ने की आवश्यकता नहीं है। आप ऐसे मनुष्य बन सकते हैं, जो तीन-फुट की भूमि जीतने के बजाय शान्ति को चुनता है।

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