#89 बाइबल में पहुनाई—अपना घर खोलें
परिचय
कुछ वर्ष पहले, जनवरी की ठण्ड में एक शनिवार सुबह, मुझे हमारे एक पास्टर का संदेश मिला। उन्होंने पूछा कि क्या मैं और मेरी पत्नी एक ऐसे व्यक्ति को एक रात के लिए अपने घर में ठहरा सकते हैं, जो पहले कभी हमारी कलीसिया का सदस्य हुआ करता था। वह लंदन से रिचमंड की उड़ान पर था, परन्तु खराब मौसम के कारण उसका विमान डी.सी. में उतर गया था, और उसे रात बिताने के लिए एक स्थान की आवश्यकता थी। पहली दृष्टि में यह अनुरोध पूरा करना बहुत ही सरल लगा: जैसे उसके लिए बिस्तर तैयार करना, उसे चाबी कहाँ है यह बता देना, और शायद अगली सुबह उसके प्रस्थान से पहले उसे एक प्याला चाय देना। अंततः वह व्यक्ति सात वर्षों तक हमारी कलीसिया का सदस्य रहा था। सम्भवतः बहुत से लोग होंगे जिनसे वह मिलना और बातचीत करना चाहेगा। शायद हम उससे अधिक मिल भी न सकें! अपनी पत्नी की सहमति से, हमने उसे अपने यहाँ ठहराने के लिए हामी भर दी।
कुछ घंटों के बाद मेरा वर्तमान मित्र, ऑस्टिन, हमारे घर पहुँचा। हमारे लिए आश्चर्य की बात यह थी कि उसकी दोपहर और शाम कहीं और बिताने की कोई योजना या इच्छा नहीं थी; वह केवल हमारे साथ ही समय बिताना चाहता था। आरम्भ में यह हमें कुछ अजीब सा लगा और सच कहूँ तो थोड़ा खीझ उत्पन्न करने वाला भी लगा। हमने अपना दिन इस प्रकार बिताने की योजना नहीं बनाई थी, और ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह हमारी उन योजनाओं पर पानी फेरने पर तुला हुआ है। प्रारम्भिक बातचीत में हमें यह भी पता चला कि वह भाई आर्थिक रूप से सम्पन्न था, अर्थात् उसके लिए किसी होटल का कमरा लेना शायद कोई समस्या नहीं थी। यदि वह चाहता तो हिल्टन में ठहर सकता था, फिर उसे हमारे यहाँ ठहरने की क्या आवश्यकता थी? यहाँ तक कि वह तो हमें भली-भाँति जानता तक नहीं था!
उस दिन ऑस्टिन के व्यवहार की एक बात ने बहुत शीघ्र ही मेरे मन में उसकी उपस्थिति के प्रति भाव बदल दिया: वह कृतज्ञ था, वह हममें वास्तविक रुचि रखता था, और वह उत्साह बढ़ाने वाला व्यक्ति भी था। यह स्पष्ट था कि हमारा उसे अपने घर में स्वीकार करना उसके लिए बहुत महत्व रखता था। परमेश्वर का धन्यवाद हो कि वह मेरे भीतर की उस आवाज़ को नहीं सुन सकता था, जब मैं यह समझने के लिए संघर्ष कर रहा था कि अपने सबसे सच्चे रूप में पहुनाई करना वास्तव में क्या होता है। एक और बात भी स्पष्ट थी कि उसे सचमुच हममें रुचि थी। उसने हमसे पूछा कि हम कौन हैं, हमारी मुलाकात कैसे हुई, और हम डी.सी. में क्यों रह रहे हैं। परन्तु उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह था कि उसने पूछा कि हम परमेश्वर को कैसे जान पाए और तब से उसका अनुसरण करना हमारे लिए कैसा रहा है।
अंततः वह उत्साह बढ़ाने वाला भी था। सबसे पहले तो उसकी उपस्थिति ही प्रोत्साहन देने वाली थी। वह मुस्कुराता था, धन्यवाद कहता था, और भरपूर रोचक बातचीत करता था। साथ ही, जहाँ कहीं भी उसने हमारे जीवन में परमेश्वर के अनुग्रह का प्रमाण देखा, वहाँ उसने जानबूझकर हमारा उत्साह बढ़ाने का प्रयास किया। ऑस्टिन हमें बाइबल में वर्णित सहभागिता को व्यवहार में दिखा रहा था—ऐसी सहभागिता, जो केवल औपचारिक बातचीत तक सीमित नहीं रहती, वरन् आत्मा को गहराई से छू लेने वाले सम्बन्ध तक पहुँचती है।
उस जनवरी की रात, जब ऑस्टिन हमारे यहाँ ठहरा, उसने मुझे बाइबल में वर्णित पहुनाई के विषय में बहुत कुछ सिखाया। मैं कभी नहीं भूलूँगा कि उसने मुझे यह बताते हुए कहा था कि जब भी सम्भव हो, वह होटलों के बजाय अन्य मसीहियों के यहाँ ठहरना क्यों पसन्द करता है। उसने कहा, “चूँकि हम यीशु में एक हैं, इसलिए उन अन्य मसीहियों के साथ अधिक समय बिताना मुझे बहुत आनन्ददायक और उत्साहवर्धक लगता है, जो मेरे लिए पहले अपरिचित होते हैं। किसी के घर में ठहरना ऐसा अवसर प्रदान करता है। जब मैं पहुँचता हूँ, तब शायद मैं उन्हें नहीं जानता, परन्तु वे मसीह में मेरे भाई-बहन हैं, इसलिए उन्हें जानना हमेशा लाभदायक सिद्ध होता है।”
अपरिचित व्यक्ति का स्वागत करने के विषय में बाइबल क्या कहती है, इसे ऑस्टिन मुझसे कहीं अधिक उत्तम रीति से समझता था। वह मेरे परिवार का ही एक हिस्सा था, इसलिए उसका मेरे घर में ठहरना उतना अजीब नहीं था जितना आरम्भ में मुझे लगा था। उसने मेरी सहायता की कि मैं यीशु को अतिथि और पहुनाई करने वाला—अर्थात् दोनों रूपों में देखूँ, जो यह दिखाता है कि मसीह किस प्रकार अपनी उपस्थिति में हमारा स्वागत करता है।
जब से ऑस्टिन पहली बार हमारे यहाँ ठहरा, तब से मेरी पत्नी और मैंने पहुनाई की सेवकाई करने का भरपूर प्रयास किया है। हमने संसार के विभिन्न भागों से आए पासबानों और कलीसिया के सदस्यों की पहुनाई की है। हमने अपरिचित लोगों के साथ हँसी बाँटी है और आँसू भी बहाए हैं। हमने ऐसे लोगों के साथ शीघ्र गहरी मित्रता की है, जिन के लिए यदि हम पहुनाई करने का प्रयास न करते, तो शायद हमारी कभी मुलाकात ही न होती। मुझे पहुनाई करने से प्रेम है। मुझे उन अवसरों से भी प्रेम है जो दूसरों के लिए भौतिक और आत्मिक भलाई करने के अवसर होते हैं—मानो हम अपने बैठक-कक्ष में वास्तव में दूसरों की सेवा करने सम्बन्धी बाइबल की आयतों को जीवन में उतार रहे हों।
मुझे यह बहुत अच्छा लगता है कि जब पहुनाई भली प्रकार से की जाती है, तो उसका परिणाम प्रायः एक नई मित्रता के रूप में सामने आता है। मुझे यह भी अच्छा लगता है कि पहुनाई यीशु की महिमा को बढ़ाती है। यह जीवन-कौशल मार्गदर्शिका पूरी रीति से इस उद्देश्य से लिखी गई है कि आप पहुनाई करने से प्रेम करना सीखें और आरम्भ करने के लिए कुछ विचार प्राप्त करें। हम पहुनाई से सम्बन्धित पवित्रशास्त्र की शिक्षाओं पर विचार करेंगे, और साथ ही ऐसे व्यावहारिक विषयों पर भी चर्चा करेंगे, जैसे सीमित साधनों के होने पर भी में बाइबल आधारित पहुनाई करना।
मैं प्रार्थना करता हूँ कि आपकी पहुनाई की सेवकाई बहुतों के लिए आशीष का कारण बने। फिर भी, मुझे भीतर ही भीतर ऐसा लगता है कि यदि आप कुछ-कुछ मेरे ही समान हैं, तो आप पाएँगे कि सबसे अधिक आशीषित प्रायः आप स्वयं ही होते हैं। हो सकता है कि आप यह भी समझें कि पहुनाई का आत्मिक वरदान केवल कुछ चुने हुए लोगों के लिए नहीं है, परन्तु उन सभी के लिए एक बुलाहट है जो चाहते हैं कि संगति और सहभागिता से सम्बन्धित पहुनाई सम्बन्धी ईश्वर विज्ञान साकार रूप से उभर सके। तो चलिए अब आरम्भ करते हैं!
ऑडियो मार्गदर्शिका
ऑडियो#89 बाइबल में पहुनाई—अपना घर खोलें
भाग I: पहुनाई क्या है?
पहुनाई” के लिए जो शब्द उपयोग किया गया है वह यूनानी भाषा के शब्द फिलोक्सेनिया से आया है, जो दो शब्दों से मिलकर बना है: फिलो जिसका अर्थ है “प्रेम,” और क्सेनिया जिसका अर्थ है अपरिचित। इसलिए, फिलोक्सेनिया का अर्थ हुआ “अपरिचितों से प्रेम” या अपरचितों का मित्र। परन्तु हमारे उद्देश्य के लिए, हमें इसके अर्थ को और गहराई से समझने की आवश्यकता है, क्योंकि परमेश्वर की दृष्टि में पहुनाई का अर्थ इससे कहीं अधिक गहरा है।
परमेश्वर के प्रेम पर आधारित
यदि आप इस मार्गदर्शिका से और कुछ न भी ग्रहण करें, तो मैं आशा करता हूँ कि कम-से-कम यह बात अवश्य समझें कि पहुनाई का आधार परमेश्वर के प्रेम में निहित है। और अधिक स्पष्ट रूप से कहें, तो बाइबल में वर्णित पहुनाई हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम पर आधारित है। देखिए, पाप ने हमें परमेश्वर से दूर करके उसके लिए हमें अपरिचित बना दिया है। परमेश्वर के साथ सहभागिता करने और उसमें आनन्दित होने के बजाय, जो कि उसका उद्देश्य था जब उसने हमें अपने स्वरूप में रचा, हममें से प्रत्येक ने परमेश्वर की इच्छा के स्थान पर पापमय मार्ग को चुन लिया है, और आज भी ऐसा ही करते रहते हैं। इस प्रकार हम उसके लिए पराए बन गए हैं। फिर भी, परमेश्वर ने हमें हमारे पाप और दुःख की दशा में नहीं छोड़ा। वह इस बात से सन्तुष्ट नहीं था कि हम वहीं पड़े रहें जहाँ हमारे पाप हमें ले गए थे। इसके विपरीत, परमेश्वर ने अपने पुत्र, प्रभु यीशु को भेजा, जिसने हमारे स्थान पर जीवन जिया, मृत्यु सही, पुनर्जीवित हुआ, और स्वर्गारोहित हो गया। पूर्ण रीति से जीवन जीकर और हमारे स्थान पर मृत्यु सहकर, प्रभु यीशु ने वह मार्ग तैयार किया जिसके द्वारा आप और मैं परमेश्वर के निकट लाए जा सकते हैं।
इसी बात को पौलुस ने इफिसुस की कलीसिया से इस प्रकार कहा:
पर अब मसीह यीशु में तुम जो पहले दूर थे, मसीह के लहू के द्वारा निकट हो गए हो। क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने यहूदियों और अन्यजातियों को एक कर दिया और अलग करनेवाले दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया। और अपने शरीर में बैर अर्थात् वह व्यवस्था जिसकी आज्ञाएँ विधियों की रीति पर थीं, मिटा दिया कि दोनों से अपने में एक नई जाति उत्पन्न करके मेल करा दे, और क्रूस पर बैर को नाश करके इसके द्वारा दोनों को एक देह बनाकर परमेश्वर से मिलाए। और उसने आकर तुम्हें जो दूर थे, और उन्हें जो निकट थे, दोनों को मेल-मिलाप का सुसमाचार सुनाया।क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पहुँच होती है। इसलिए तुम अब परदेशी और मुसाफिर नहीं रहे, परन्तु पवित्र लोगों के संगी स्वदेशी और परमेश्वर के घराने के हो गए… (इफ. 2:13-19; पर मेरा विशेष बल)
इन सबका अर्थ यह है कि परमेश्वर ने, जो यीशु में हम से प्रेम करता है, हमें अपनी पहुनाई में ग्रहण किया, तब भी जब हम पाप से मलिन परदेशी थे। यदि आप अपने पापों की क्षमा के लिए मसीह पर भरोसा रखते हैं, तो आप जानते हैं कि निकट लाया जाना क्या होता है, जब परमेश्वर आपसे कहता है, कि “अब आप मेरे साथ सम्बन्ध रखते हैं, और सदा रखते रहेंगे।” यही बाइबल में संगति का आधार है।
मेरे मित्र, परमेश्वर की यह बुलाहट कि आप दूसरों की पहुनाई करें, इस सत्य पर आधारित है कि उसने पहले आपकी पहुनाई की है। जब तक आप यह महसूस नहीं कर लेते कि पहुनाई की जड़ आपके प्रति प्रकट किए गए परमेश्वर के प्रेम में है, तब तक आप उस सौभाग्य की पूरी रीति से सराहना नहीं कर पाएँगे, जो पहुनाई आपको दूसरों—यहाँ तक कि अपरचित लोगों के प्रति परमेश्वर का प्रेम दिखाने का अवसर देती है। इसे दूसरे शब्दों में कहें तो, जब तक आप सुसमाचार को नहीं समझते, तब तक आप पहुनाई को भी नहीं समझ सकते हैं। जितनी अन्य सेवकाइयाँ मसीहियों को दी गई हैं, उन्हीं के समान पहुनाई भी सुसमाचार से सामर्थ्य और आधार पाती है। यही पहुनाई में ईश्वर विज्ञान का मूल आधार है।
परन्तु पहुनाई करने का अर्थ क्या है? मेरी आशा है कि यह संपूर्ण जीवन-कौशल मार्गदर्शिका आपके लिए इस प्रश्न को स्पष्ट कर देगी। यहाँ मैं दो बातों पर ध्यान दिलाना चाहता हूँ: 1. पहुनाई का अर्थ देखभाल की सेवकाई करना है, और 2. पहुनाई उदारता दिखाने का एक अवसर है।
देखभाल की सेवकाई
देखभाल क्या है? क्या आपने कभी ठहरकर अपने आप से यह प्रश्न पूछा है? मेरा मानना है कि देखभाल उन बातों में से एक है, जिसके विषय में प्रत्येक व्यक्ति सोचता है कि वह उसे समझता है, परन्तु उसकी स्पष्ट परिभाषा देने में कठिनाई अनुभव करता है। मुझे इसकी एक परिभाषा देने का प्रयास करने दीजिए:
देखभाल स्वाभाविक रूप से मूल्यवान स्थान, व्यक्ति या वस्तु के प्रति स्नेहपूर्ण और ध्यानपूर्वक सम्मान प्रकट करना है।
मेरी दादी मेरे लिए आत्मिक वरदान स्वरूप पहुनाई करने का सबसे उत्तम उदाहरण रही है, विशेषकर उनकी गहरी देखभाल के कारण मुझे कभी यह सोचने की आवश्यकता नहीं पड़ी कि वह मुझसे प्रेम करती हैं या नहीं, क्योंकि वह इसे सदैव बहुत स्पष्ट कर देती थी। उसी प्रकार, मुझे कभी यह जानने की आवश्यकता नहीं हुई कि उनका ध्यान मुझ पर है या नहीं, क्योंकि उनका ध्यान हमेशा मुझ पर ही होता था। वह मेरी पसन्द का भोजन बनाकर, चुटकुले सुनाकर जिन्हें सुनकर मैं हँसता था, और अपने घर में मेरा कमरा उस कंबल के साथ तैयार रखती थी जो मुझे सबसे अधिक पसन्द था, वह बचपन में भी मेरा आदर करती थी। वह हम सब पोते-पोतियों के साथ ऐसा ही करती थी।
मुझे एक घटना स्मरण है, जब मेरी छोटी चचेरी बहन ने रंगीन मोम की खड़ियों से मेरी दादी के बरामदे की दीवार रंगने की योजना बनायी थी। जब मेरी दादी ने उस नन्ही “पिकासो” की कलाकारी देखी, तो उन्होंने उससे कहा, “कारा, मेरी दीवार पर यह सब किसने रंग दिया?” कारा ने ऐसे उत्तर दिया जैसा कोई कुशल कारीगर गर्व से कहकर उत्तर देता है कि, “मैंने किया! क्या यह सुंदर नहीं है?” डाँटने या निराश करने के बजाय, मेरी दादी ने उससे कहा कि, “यह बहुत सुंदर है, कारा।” यद्यपि यह घटना हमारे विषय से कुछ अलग प्रतीत हो सकती है, फिर भी यह हृदय से निकली हुई पहुनाई का एक उदाहरण है। प्रेमपूर्ण देखभाल के साथ उत्तर देकर, मेरी दादी ने मेरी छोटी चचेरी बहन का सम्मान किया, वह उसी के स्तर तक उतर गई, और बात को उसकी ही दृष्टि से देखा, और जिस बात से वह प्रसन्न थी, उससे स्वयं भी प्रसन्न हुई। वास्तव में, मेरी दादी ने अपने हृदय में कारा और उसकी सुंदरता की समझ के लिए स्थान बनाया। और क्या आप जानते हैं? मेरा विचार है कि वह दीवार कई वर्षों तक उन मोम की खड़ियों के रंगों से रंगी रही, जब तक कि मेरी दादी ने अंततः उसे दोबारा रंगवाने का मन नहीं बना लिया।
आप देखिए, कि पहुनाई वास्तव में देखभाल की सेवकाई है। क्या आपने कभी गंभीरता से इस बात पर विचार किया है कि परमेश्वर आपसे और मुझसे कितना ऊपर है? मेरे मित्र, परमेश्वर के समान कोई नहीं है (निर्ग. 15:11)। फिर भी परमेश्वर हमारे समान बनकर नीचे आया, ताकि हमें अपने निकट ला सके। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह हमसे प्रेम करता है और हमारी देखभाल करता है। पहुनाई हमें उसी प्रकार प्रेम और देखभाल करने का अवसर देती है जैसा परमेश्वर करता है, यद्यपि इसमें एक महत्वपूर्ण भिन्नता है। परमेश्वर हमारी देखभाल करता है, जबकि हम उससे बहुत नीचे हैं। फिर भी वह हमें बुलाता है कि हम एक-दूसरे की देखभाल करें, जबकि हम सब मूल्य में समान हैं। यदि परमेश्वर हमारी देखभाल कर सकता है, तो निश्चय ही हम भी एक-दूसरे की देखभाल कर सकते हैं। यही बात बाइबल अपरिचित लोगों का स्वागत करने के विषय में सिखाती है।
देखभाल की बात में आगे बढ़ने से पहले, मैं सोचता हूँ कि क्या आपने उसके दो महत्वपूर्ण पक्षों पर ध्यान दिया: स्नेह और ध्यान। स्नेह, परमेश्वर के प्रेम को ग्रहण करके उसे दूसरों के प्रति प्रकट करता है। सच्ची पहुनाई प्रेम की अभिव्यक्ति है। परन्तु ध्यान का पक्ष पहले थोड़ा असामान्य सा लग सकता है। यहाँ ध्यान से मेरा अर्थ केवल वैसा नहीं है जैसा आप गणित की कक्षा में या दूरदर्शन देखते समय देते हैं। मेरा अर्थ उस ध्यान से है जिसमें आप किसी दूसरे व्यक्ति और उसके कुशल-मंगल की चिन्ता करते हैं। ध्यान का अर्थ है कि जो कुछ आपके पास है, उसका उपयोग करके आप दूसरे व्यक्ति के भले और सम्मान को बढ़ावा देने के लिए करें, उस व्यक्ति का भी, जो आपके ही समान परमेश्वर के स्वरूप में रचा गया है (उत. 1:26-27)। एक अच्छा पहुनाई करने वाला बनने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है।
पहुनाई को इस दृष्टि से समझना क्यों उपयोगी है? क्योंकि इससे हम पहुनाई को केवल एक बोझ या कर्तव्य मात्र समझने से बचते हैं। आपको स्मरण होगा, जब आप बच्चे थे और आपकी माँ कहती थी कि, “जाकर अपना कमरा साफ करो!” तब आप तुरन्त पूछते थे, “मैं क्यों करूँ?” और उसके उत्तर में वह यह शब्द कहती थी, जिन्हें सुनना लगभग हर बच्चे के लिए कठिन होता है: “क्योंकि मैंने कहा है!”
यदि आप पहुनाई इसलिए कर रहे हैं क्योंकि परमेश्वर ने आपसे कहा है कि “आपको करना ही पड़ेगा,” तो संभव है कि आप सच्ची पहुनाई नहीं कर रहे हैं। पहुनाई कोई बोझ नहीं है! यह ऐसा काम नहीं है जिसे स्नेह, ध्यान, और आदर के बिना पूरा कर दिया जाए। इसके विपरीत, पहुनाई प्रेम की एक सेवकाई है, जिसमें आप वैसे ही प्रेम करते हैं जैसे आपसे प्रेम किया गया है, और वैसे ही आदर देते हैं जैसे आपको आदर मिला है। पहुनाई के द्वारा आप उन सब का केवल एक छोटा-सा अंश दूसरों को देते हैं, जो परमेश्वर ने आपको मसीह में दिया है। पहुनाई करने के भय पर विजय पाने के लिए यह दृष्टिकोण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यदि आप हृदय से पहुनाई करने में संघर्ष कर रहे हैं, तो मैं आपको सलाह दूँगा कि थोड़ा यहीं पर रुककर साधारण रूप से प्रभु से प्रार्थना करें: “हे प्रभु, मुझे दूसरों को वैसे देखने में सहायता कर जैसे तू उन्हें स्वयं देखता है। मुझे अपने प्रति तेरे प्रेम को समझने में सहायता कर, और उसी प्रेम के द्वारा मुझे दूसरों से प्रेम करने दे।” प्रभु आपकी सहायता कर सकता है और करना भी चाहता है।
उदार बनने का एक अवसर
ठीक है, पहुनाई का अर्थ देखभाल करना होता है, परन्तु अभी तक देखभाल कुछ हद तक व्यावहारिक नहीं लगती है। इसलिए अब हम व्यावहारिक पक्ष की ओर बढ़ते हैं, और यही हमें इस मार्गदर्शिका के अन्त तक ले जाएगा। सुसमाचार से प्रेरित और देखभाल से आकार पायी हुई पहुनाई का एक अर्थ उदार होना भी है! और अधिक स्पष्ट रूप से कहें तो, पहुनाई का अर्थ यह है कि जो कुछ आपके पास है, उसमें उदार होना है। यही बात प्रायः उन बाइबल आयतों में दिखाई देती है जो दूसरों की सेवा करने की शिक्षा देती हैं। कुरिन्थियों के नाम अपनी पहली पत्री में एक स्थान पर पौलुस यह प्रश्न पूछता है: “तेरे पास ऐसा क्या है, जो तूने (दूसरों) से न पाया हो?” (1 कुर. 4:7)। यदि हम स्मरण रखें कि सुसमाचार ही पहुनाई के लिए प्रेरित करता है, तो अगला कदम यह समझना होगा कि जैसे परमेश्वर ने हमसे प्रेम किया है और चाहता है कि हम उसे दूसरों के साथ बाँटें, वैसे ही उसने हमें शेष सब कुछ भी दिया है! तो फिर आप क्या सोचते हैं कि उसकी क्या इच्छा है कि हम उन सब वस्तुओं के साथ क्या करें? यही करें कि हम उन वस्तुओं को दूसरों के साथ भी बाँटें!
मेरे मित्र, यदि आप स्वयं को निराश या अभाव में महसूस कर रहे हैं (ऐसा वाक्यांश जिसे मसीहियों को वास्तव में केवल बोलचाल के रूप में ही प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि हम जानते हैं कि भाग्य जैसी कोई वस्तु नहीं होती), तो आपके लिए यह स्मरण करना अच्छा होगा कि परमेश्वर ने आपको कितनी वस्तुएँ दी हैं। सबसे पहले, आपके पास जीवन है। संभवतः आपके पास भोजन, वस्त्र, और रहने के लिए स्थान भी हो। शायद आपके पास परिवार है। और क्योंकि आप एक मसीही हैं, तो आपके पास विश्वासियों की संगति भी होनी चाहिए, और स्थानीय कलीसिया में यह संगति स्वयं प्रभु यीशु के द्वारा आपको दी गई एक आशीष है! इसी संगति के द्वारा आपके पास मित्र हैं, और फलवन्त होने के अनेक अवसर भी होते हैं। और ये तो केवल आवश्यक बातें हैं! हममें से बहुत से लोग यह गवाही दे सकते हैं कि परमेश्वर ने हमें बहुतायत से दिया है, उसने केवल हमारी आवश्यकताओं को ही नहीं, वरन् हमारी अनेक इच्छाओं को भी पूरा किया है। ऐसी कौन-सी वस्तु है जो आपके पास हो और आपने पाई न हो? इनमें से किस बात का श्रेय आप स्वयं को देंगे? इसका उत्तर यही होना चाहिए: “कुछ भी नहीं! यह सब प्रभु की ओर से मिला है।”
ठीक है, तो फिर आपको क्या करना चाहिए? आपको उदारतापूर्वक इन वस्तुओं को दूसरों के साथ बाँटना चाहिए। यही पहुनाई के विषय में पवित्रशास्त्र की मूल शिक्षा है। मेरी आशा है कि आप इस तर्क को समझ रहे होंगे। परमेश्वर ने सुसमाचार में और अनेक दूसरी छोटी, फिर भी वास्तविक, वस्तुओं को आपके साथ बाँटा है। वह आपको बुलाता है कि आप उसके प्रेम को दूसरों के साथ बाँटें, और उन अनेक दूसरी वस्तुओं को भी, जो उसने आपको दी हैं ताकि आप उसकी महिमा के लिए उनका भलीभाँति प्रबन्ध कर सको। इस प्रकार, पहुनाई का मूलभूत आधार उदारता है। वास्तव में, कंजूस व्यक्ति पहुनाई नहीं कर सकता है। पहुनाई का आधार देना होता है,अपने आप को दूसरों के लिए देना, और उसके साथ वह सब भी जो आपके पास है।
क्या आप पहुनाई करने में बढ़ना चाहते हैं? यदि हाँ, तो आप अपनी वस्तुओं को अपनी मुट्ठी में भींचकर नहीं रख सकते हैं। एक और बात है कि आपको ऐसा करने की आवश्यकता भी नहीं है। आपके भले और सिद्ध स्वर्गीय पिता ने आपकी प्रत्येक आवश्यकता को पूरा करने की प्रतिज्ञा की है। जैसा कि हम पवित्रशास्त्र और जीवन दोनों से जानते हैं, इसका यह अर्थ नहीं कि हम हमेशा सरल और आरामदायक जीवन की अपेक्षा करें। कभी-कभी प्रभु, अपने अनुग्रह के प्रावधान में, हमें अभाव से होकर जाने देता है ताकि वह हमें सिखाए कि हम और भी पूरे मन से उस पर निर्भर रहें। परन्तु वह कभी भी हमसे ऐसी किसी वस्तु के बिना रहने के लिए नहीं कहता जिसकी हमें सचमुच आवश्यकता होती है। और वह हमारी आवश्यकताओं को हमसे भी अधिक भली-भाँति जानता है। इसलिए कंजूस मत बनिए। इसके स्थान पर उदार बनिए! इकट्ठा करके मत रखिए। इसके स्थान पर पहुनाई करने वाला बनिए! सीमित साधनों में भी बाइबल आधारित पहुनाई करने का यही सार है।
—
चिन्तन के लिए प्रश्न:
- सुसमाचार और पहुनाई के बीच क्या सम्बन्ध है?
- पहुनाई में देखभाल तथा उदारता का क्या सम्बन्ध है?
- आपको पहुनाई करने में कौन सी बात सबसे कठिन लगती है?
- यह भाग आपको किस प्रकार बढ़ने के लिए परमेश्वर की सहायता खोजने की चुनौती देता है?
—
भाग II: मुझे किन लोगों की पहुनाई करनी चाहिए?
अब हम सबको यह समझ लेना चाहिए कि मसीहियों के लिए पहुनाई करना इतना महत्वपूर्ण क्यों है, क्योंकि परमेश्वर ने सुसमाचार में हमारे प्रति इतनी बड़ी पहुनाई दिखाई है। अब हमारा अगला उद्देश्य यह होना चाहिए कि हम अपनी पहुनाई विशेष रूप से उन लोगों के लिए करें, जिनके प्रति परमेश्वर चाहता है कि हम पहुनाई करें। मेरा मानना है कि यद्यपि हर मिलने वाला व्यक्ति पहुनाई करने का एक अवसर हो सकता है, फिर भी आपको विशेष रूप से अपने कलीसियाई परिवार और उन लोगों की पहुनाई करनी चाहिए जिनके साथ आप सुसमाचार बाँटते हैं।
मेरा पड़ोसी कौन है?
लूका अपने सुसमाचार के दसवें अध्याय में एक व्यवस्थापक और हमारे प्रभु के बीच एक अद्भुत बातचीत का वर्णन करता है। आप इसे दयालु सामरी के दृष्टांत के रूप में जानते होंगे। यह कहानी इस प्रकार आरम्भ होती है कि वह व्यवस्थापक यीशु से पूछता है कि अनन्त जीवन का उत्तराधिकारी होने के लिए मैं क्या करूँ? इस प्रश्न के उत्तर में यीशु कहता है, “तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी शक्ति और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख; और अपने पड़ोसी से अपने जैसा प्रेम रख।” (लूक. 10:27)। बात सीधी और स्पष्ट है।
स्पष्टता के लिए धन्यवाद, यीशु। “इतनी जल्दी नहीं,” व्यवस्थापक आगे कहता है। और प्रश्न पूछता है: “मेरा पड़ोसी कौन है?” इसके उत्तर में यीशु उसे एक कहानी सुनाता है:
“एक मनुष्य यरूशलेम से यरीहो को जा रहा था, कि डाकुओं ने घेरकर उसके कपड़े उतार लिए, और मार पीट कर उसे अधमरा छोड़कर चले गए। और ऐसा हुआ कि उसी मार्ग से एक याजक जा रहा था, परन्तु उसे देखकर कतराकर चला गया। इसी रीति से एक लेवी उस जगह पर आया, वह भी उसे देखकर कतराकर चला गया। परन्तु एक सामरी यात्री वहाँ आ निकला, और उसे देखकर तरस खाया। और उसके पास आकर और उसके घावों पर तेल और दाखरस डालकर पट्टियाँ बाँधी, और अपनी सवारी पर चढ़ाकर सराय में ले गया, और उसकी सेवा टहल की। दूसरे दिन उसने दो दीनार निकालकर सराय के मालिक को दिए, और कहा, ‘इसकी सेवा टहल करना, और जो कुछ तेरा और लगेगा, वह मैं लौटने पर तुझे दे दूँगा। अब तेरी समझ में जो डाकुओं में घिर गया था, इन तीनों में से उसका पड़ोसी कौन ठहरा? उसने कहा, “वही जिस ने उस पर तरस खाया।” यीशु ने उससे कहा, “जा, तू भी ऐसा ही कर।”
अब मैं आपसे पूछता हूँ: क्या यीशु ने इस दयालु सामरी के दृष्टांत के द्वारा व्यवस्थापक के प्रश्न का उत्तर दिया? मेरा मानना है कि उसने निश्चित रूप से दिया है, लेकिन उसके उत्तर को समझने के लिए हमें यह जानना होगा कि यहूदी और सामरी कौन थे और उनके बीच क्या अन्तर था। समय की दृष्टि से संक्षेप में कहूँ तो, इन दोनों का एक-दूसरे के प्रति दृष्टिकोण यही था कि वे एक-दूसरे को पसंद नहीं करते थे। यह तीव्र घृणा उनके बीच लम्बे समय से चले आ रहे राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक मतभेदों से उत्पन्न हुई थी, जिसे यहाँ विस्तार से जानने की आवश्यकता नहीं है।
लेकिन, आपको इन अन्तरों के बारे में जानने की आवश्यकता क्यों है, इसका कारण सीधा-सा है: यीशु की कहानी में जो सामरी व्यक्ति है, वह ठीक वैसा ही है जिससे आप सबसे कम उम्मीद करेंगे कि वह उस यहूदी व्यक्ति की पहुनाई करेगा, जिसे लूटा गया था। और फिर भी वह सामरी ही था जो उस व्यक्ति की सहायता करने के लिए आगे आया। यह इस बात का सबसे उत्तम उदाहरण है कि बाइबल अपरिचितों का स्वागत करने के विषय में क्या कहती है।
यह कहानी हमें पहुनाई के विषय में क्या सिखाती है? यह हमें सिखाती है कि एक बहुत वास्तविक अर्थ में हर व्यक्ति हमारा पड़ोसी है। यदि सामरी उस घायल व्यक्ति को, यहूदी और अन्यजातियों के बीच की गहरी दूरी को पार करते हुए, अपना पड़ोसी मानकर पहुनाई कर सकता है, तो आपको भी, कम से कम कुछ अवसरों पर, अपने उस पड़ोसी के प्रति पहुनाई करनी चाहिए जो राजनीतिक, धार्मिक या सामाजिक स्तर पर आपसे बहुत अलग हो सकता है। कोई भी इतना अलग नहीं होता है कि वह आपकी पहुनाई को पाने के योग्य न हो, जैसा कि यीशु के अनुसार है। हर व्यक्ति आपकी पहुनाई पाने के योग्य है।
तो क्या इसका अर्थ यह है कि हमें हर व्यक्ति के प्रति बिल्कुल एक ही प्रकार से पहुनाई करनी चाहिए? पूरी रीति से नहीं। यदि आप ऐसा करने का प्रयास करेंगे, तो संभव है कि आप आर्थिक रूप से टूट जाएँगे। और ऐसा करने पर आप उस आत्मिक भलाई को भी पूरी रीति से नहीं कर पाएँगे, जो आप अपनी पहुनाई की सेवा के द्वारा करना चाहते थे। इसलिए, यद्यपि हर व्यक्ति हमारे प्रेम और पहुनाई के योग्य है, फिर भी हमें यह समझने की आवश्यकता है कि परमेश्वर चाहता है कि हम किन लोगों पर विशेष ध्यान दें, ताकि हम सबसे अधिक आत्मिक भलाई कर सकें।
कलीसिया के सदस्यों के लिए पहुनाई
एक सार्वजनिक सूचना के रूप में मैं यह बात जानबूझकर विस्तार से नहीं बता रहा हूँ कि अपने स्वयं के परिवार की देखभाल करना और उनके प्रति उदार होना आपको परमेश्वर के द्वारा दिया गया उत्तरदायित्व है। मैं इस बात को इसलिए छोड़ रहा हूँ, क्योंकि वास्तविक अर्थ में पहुनाई का अर्थ उन लोगों की देखभाल करना और उनके प्रति उदार होना है, जो किसी न किसी अर्थ में दूर हों या अपरिचित हों। इसलिए, हाँ, अपने परिवार की भी “पहुनाई” करें! उनके प्रति उदारता और भरपूर प्रेम प्रकट करें। परन्तु यह मार्गदर्शिका मुख्य रूप से उन लोगों के प्रति पहुनाई करने पर ध्यान देती है, जिनके पास जाने के लिए परमेश्वर आपको बुलाता है, भले ही चाहे वे आपकी प्राथमिकता की सूची में बहुत ऊपर न हों।
इस बात को ध्यान में रखते हुए, इस भाग में मैं यह तर्क देना चाहता हूँ कि जिन लोगों के प्रति आपको सबसे अधिक उत्सुकता से पहुनाई करनी चाहिए, वे आपकी स्थानीय कलीसिया के सदस्य हैं। पौलुस ने रोम की कलीसिया को उन बातों की एक सूची लिखी, जो उनके सामूहिक जीवन की पहचान होनी चाहिए। अपनी शिक्षाओं के बीच पौलुस ने लिखा, “पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उसमें उनकी सहायता करो; पहुनाई करने में लगे रहो।” (रो. 12:13)। यह पहुनाई के विषय में पवित्रशास्त्र की आधारभूत शिक्षा है। यह बात तुरन्त मसीही विश्वास की उस अत्यधिक व्यक्तिगत समझ के विरुद्ध जाती है, जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका में बहुत से लोग मानते हैं। कल्पना कीजिए कि यदि आपके सम्पूर्ण मसीही जीवन का अर्थ केवल आप और यीशु ही हैं, तो आप पवित्रशास्त्र की इस आज्ञा को पूरा करने का प्रयास कैसे करेंगे? स्पष्ट है कि पौलुस की समझ में मसीही जीवन ऐसा जीवन है, जो संगति में जिया जाता है। और ध्यान दीजिए, ऐसी संगति जिसमें आप इस प्रकार की सीधी आज्ञाओं को पूरा कर सकें!
इसका अर्थ यह है कि यदि आप किसी आत्मिक स्थानीय कलीसिया के सदस्य नहीं हैं, तो आपको अवश्य बनना चाहिए! पहुनाई में बढ़ने के लिए इसे उन मुख्य कदमों में से एक बनाइए, जिन्हें आप उठाते हैं। इस रविवार के दिन ऐसी कलीसिया में जाइए, जो आपकी समझ के अनुसार सुसमाचार का प्रचार करती हो और सदस्यता को गंभीरता से लेती हो। स्थानीय कलीसिया उन पवित्र लोगों से मिलकर बनी होती है, जिनके प्रति पवित्रशास्त्र आपको पहुनाई करने के लिए बुलाता है। रोम की कलीसिया के लिए भी यही सत्य था, और आज हमारे लिए भी यही सत्य है। यही बाइबल में संगति का मूल भाव है।
परमेश्वर हमारे प्रति दयालु रहा है और उसने हमारी अगुवाई एक ऐसी कलीसिया तक पहुँचने में की है, जो सिद्ध तो नहीं है, परन्तु आत्मिक रूप से दृढ़ है। वास्तव में, मैं कभी भी इससे अधिक आत्मिक रूप से दृढ़ कलीसिया में नहीं रहा, और इसका कारण यह है कि मैं कभी ऐसी कलीसिया का हिस्सा नहीं रहा जहाँ पहुनाई को इतना अधिक गंभीरता से लिया जाता हो। हम सार्वजनिक रूप से प्रार्थना करते हैं कि हमारे प्रत्येक सदस्य पहुनाई करने में आगे बढ़ें। हम रविवार को अपने मूल शिक्षण सत्रों में पहुनाई के विषय में शिक्षा देते हैं। हम अपने शिष्यत्व के समूहों में एक-दूसरे को अधिक पहुनाई करने के लिए चुनौती देते हैं। हम पहुनाई से जुड़ी ऐसी घटनाओं को साझा करते हैं, जिनके द्वारा आत्मिक भलाई होती है।
मैं हमारी कलीसिया में बहुत से लोगों के द्वारा बाइबल में दिखाई देनेवाली उस प्रकार की पहुनाई को जीवन में उतारने के लिए किए जाने वाले प्रयासों से बहुत प्रोत्साहित होता हूँ। जब हमने पहली बार कलीसिया की सदस्यता ली, तब मेरी पत्नी और मुझे कलीसिया के लगभग बीस-बाईस वर्ष के एक अविवाहित युवक का संदेश मिला, जिसमें उसने पूछा कि क्या हम उसके घर भोजन के लिए आना चाहेंगे। यह कुछ अजीब सा अनुरोध था, क्योंकि इससे पहले हम कभी अपने से लगभग दस वर्ष छोटे किसी अविवाहित अपरिचित व्यक्ति के साथ समय बिताने नहीं गए थे। फिर भी, हमने एक समय निश्चित किया, और उसने हमें अपना पता भेज दिया। हमारे आश्चर्य के लिए, वह यहाँ कैपिटल हिल पर एक बहुत अच्छे पंक्तिबद्ध मकान में रहता था। बाद में हमें पता चला कि वह उसके माता-पिता का घर था, और वे एक सप्ताह के अवकाश पर शहर से बाहर गए हुए थे।
हमें यह देखकर भी आश्चर्य हुआ कि भीतर प्रवेश करते ही एक अद्भुत सुगंध हमारी नाक से टकराई। बाद में पता चला कि यह भाई अलग-अलग देशों के व्यंजन बनाता था; कलीसिया के प्रत्येक नए सदस्य के लिए हर बार किसी एक देश का प्रिय भोजन बनाता था। अब हमारी बारी थी, और हमारे हिस्से में कंबोडिया का भोजन आया यह छोटे समूहों के लिए सोच-समझकर की गई संगति के विचारों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
भोजन अत्यंत स्वादिष्ट था। संगति उससे भी अधिक उत्तम थी। उस भाई ने हमसे पूछा कि हम इस संघीय नगर में कैसे आकर रहने लगे, हमें कलीसिया कैसी लग रही है, इस समय हम किन कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, और वह हमारे लिए कैसे प्रार्थना कर सकता है। उस अन्तिम बात में, उसने हमारे जाने से पहले हमारे लिए प्रार्थना करने का भी प्रस्ताव रखा! हम वहाँ से तृप्त और अपनी देखभाल किए जाने का अनुभव लेकर लौटे। आज भी आपको यह घटना सुनाते समय मैं परमेश्वर का धन्यवाद कर रहा हूँ कि उसने उस भाई के भीतर हमारे प्रति पहुनाई करने की ऐसी साकार सेवा उत्पन्न की।
आप अपनी कलीसिया में किसकी पहुनाई कर सकते हैं? जब आप इस प्रश्न के विषय में सोचें, तो मैं आपको प्रोत्साहित करना चाहता हूँ कि केवल उन्हीं लोगों को न चुनें जो सबसे अधिक आपके समान हों। मेरा जो मित्र अब बन चुका है, उसका नाम योशिय्याह है, और वह हमारे जैसा नहीं है। हम विवाहित थे; वह अविवाहित है। हम बीस की अपेक्षा तीस वर्ष के अधिक निकट थे; वह इसके विपरीत था। हम नए थे; वह अपने जीवन के आरम्भ से ही उस कलीसिया में रहा था। परन्तु इन सभी भिन्नताओं के बावजूद भी उसने हमारी पहुनाई करने का निर्णय लिया।
जो लोग आपसे भिन्न हैं, उनकी पहुनाई करने से अनेक प्रकार के लाभ होते हैं। आपके विचारों को सही दिशा में ले जाने के लिए यहाँ कुछ लाभ दिए गए हैं:
– यीशु को सबसे अधिक महत्व दिया गया—आपके लिए और दूसरों के लिए यह समझना अधिक सरल हो जाता है कि पहुनाई का सबसे बड़ा कारण किसी और बात से बढ़कर यीशु है! संसार अपने मित्रों को पसंदीदा खेल दलों, समान आय-वर्ग, व्यवसाय, या अन्य समान रुचियों के आधार पर चुनता है। मसीहियत लोगों को इन सब बातों से बढ़कर यीशु के द्वारा एक साथ बाँधती है। वास्तव में, मसीहियत आपको उन लोगों के साथ भी अर्थपूर्ण मित्रता बनाने का मार्ग प्रदान करती है, जिनके साथ आपकी केवल यीशु के रूप में ही कोई बात मिलती-जुलती हो।
– आप बढ़ते हैं!—यदि आप केवल उन्हीं लोगों के साथ समय बिताते हैं जो आपके जैसे हैं, तो आपके बढ़ने के अवसर सीमित रह जाते हैं। जो लोग आपसे भिन्न हैं, उनके लिए पहुनाई करने का एक विशेष लाभ यह है कि आपको ऐसे लोगों से सीखने का अवसर मिलता है जिनके अनुभव आपसे अलग हैं, जो संसार को उस दृष्टिकोण से देखते हैं जिसे शायद आप साझा नहीं करते, और जिन्होंने उन कठिनाइयों में यीशु की विश्वासयोग्यता को देखा है जिनका अनुभव आपने नहीं किया है। जब आप पहुनाई के द्वारा अपने से भिन्न लोगों के साथ सम्बन्ध रखते हैं, तब आप बढ़ते चले जाते हैं!
– बाहरी लोग आकर देखने के लिए प्रेरित होते हैं—कल्पना कीजिए कि आप सोमवार को अपने काम पर जाएँ और अपने धर्मनिरपेक्ष सहकर्मियों को बताएँ कि पिछले दिन कलीसिया सेवकाई के बाद आपने कुछ लोगों को भोजन के लिए अपने घर बुलाया था। उनमें से एक आपसे चालीस वर्ष बड़ा था, एक आपकी जातीय पृष्ठभूमि से भिन्न था, एक की रुचियाँ आपसे पूरी रीति से भिन्न थीं, और दूसरा अभी तक महाविद्यालय से स्नातक भी नहीं हुआ था। मुझे विश्वास है कि आपकी बात सुनकर वे कुछ आश्चर्य अवश्य करेंगे। वही आश्चर्य आपको यीशु और अपनी कलीसिया के विषय में उन्हें बताने का अवसर प्रदान करता है। पहुनाई सुसमाचार प्रचार को जन्म देती है! किसने सोचा होगा!
बाहरी लोगों के लिए पहुनाई
सुसमाचार प्रचार की बात करें तो . . . पहुनाई सुसमाचार सुनाने का एक अद्भुत माध्यम है! पिछले उदाहरण में मैंने कहा था कि कलीसिया के सदस्यों की पहुनाई करना बाहरी लोगों के सामने आपके प्रभु और आपकी कलीसिया की अच्छी गवाही देता है। यह सत्य है। और क्या आप जानते हैं कि उन्हें यीशु पर विश्वास करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु और क्या कर सकते हैं? उन्हें भी अपने घर आमंत्रित कीजिए! जो लोग आपके जीवन में हैं और यीशु को नहीं जानते, उनकी भी चिन्ता करें (अर्थात् स्नेहपूर्ण और ध्यानपूर्वक आदर करना) और उदार बनिए (जो कुछ आपको दिया गया है उसका उपयोग कीजिए) ताकि आप उन्हें आशीष दे सकें जो यीशु को नहीं जानते हैं—दूसरों की सेवा करने सम्बन्धी बाइबल की आयतों का यही मूल अर्थ है।
इस समय आपके जीवन में ऐसा कौन सा व्यक्ति है जो अभी तक यीशु को नहीं जानता है? ऐसे लोग सप्ताह के किसी दिन रात्रि-भोजन, कलीसिया की खेल-संध्या, या रविवार के दोपहर के भोजन के लिए निमंत्रण सूची में रखने हेतु बिल्कुल उपयुक्त हैं। उनका अपने घर में स्वागत कीजिए, उनके साथ भोजन साझा कीजिए, और सबसे बढ़कर, यीशु के विषय में बात कीजिए। उन्हें बताइए कि पहुनाई आपके लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों है। मेरा अनुमान है कि जो लोग मसीही नहीं हैं, उनमें से अधिकाँश ने शायद बहुत कम, या बिल्कुल भी, मसीही पहुनाई का अनुभव नहीं किया होगा। यह दुःख की बात है, परन्तु आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपके गैर-मसीही मित्रों के साथ ऐसा न हो।
इस विषय पर अन्तिम बात: अपनी कलीसिया के सदस्यों और अपने गैर-मसीही मित्रों…दोनों के लिए एक साथ पहुनाई करिए! पहुनाई एक सामूहिक कार्य बन सकता है, और इस प्रकार वह शीघ्र ही सुसमाचार प्रचार का कार्य भी बन जाता है। सेवा-कार्य के लिए एक स्वागत करने वाला घर बनाने का यह एक उत्तम तरीका है।आशा है कि इससे आपको ऐसे लोगों को संदेश भेजने के लिए प्रेरणा मिलेगी, जिन्हें शायद आपके घर आने और आपकी देखभाल में रहने के लिए ठीक ऐसे ही न्योते की आवश्यकता हो।
—
चिन्तन के लिए प्रश्न:
- पहुनाई करने में आपको किस बात से डर लगता है?
- इस सप्ताह या अगले सप्ताह आप अपनी कलीसिया में किसकी पहुनाई कर सकते हैं?
- इस सप्ताह या अगले सप्ताह आप ऐसे किस व्यक्ति की पहुनाई कर सकते हैं, जिसे आप जानते हैं और जो यीशु के पीछे नहीं चल रहा है?
- किस प्रकार किसी अन्य व्यक्ति की पहुनाई से आप आशीषित हुए हैं ?
—
भाग III: मैं पहुनाई करने में कैसे आगे बढ़ूँ?
आशा है कि अब आप यह समझ चुके होंगे कि पहुनाई केवल एक आज्ञा ही नहीं, परन्तु एक सौभाग्य है—अर्थात् सुसमाचार से मिला सौभाग्य। इस भाग में, मैं कुछ व्यावहारिक कदम प्रस्तुत करना चाहता हूँ जिन्हें अपनाकर आप शीघ्र पहुनाई करना आरम्भ कर सकते हैं। परन्तु कुछ विचार प्रस्तुत करने से पहले, मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि पहुनाई करने के असंख्य तरीके हैं। ये केवल मेरे विचार हैं। इनमें आप अपने विचार भी जोड़ दीजिए, तब तो सचमुच आनन्द का अवसर बन जाएगा!
स्थिति का आकलन करें
क्या आपको मेरी दादी स्मरण है? वह बाइबल की एक अद्भुत शिक्षिका थीं—विशेषकर जब बाइबल की महान घटनाओं को सिखाने की बात आती थी। जिन घटनाओं को वह सुनाया करती थीं, उनमें से मेरी एक प्रिय घटना उस व्यक्ति के विषय में थी जिसने अपना गदहा और उसका बच्चा यीशु के चेलों को दे दिया था, ताकि यीशु क्रूस पर चढ़ाए जाने से केवल एक सप्ताह पहले अपने विजयी प्रवेश के समय उन पर चढ़कर यरूशलेम में प्रवेश कर सके। मत्ती इस घटना का वर्णन इस प्रकार करता है:
जब वे यरूशलेम के निकट पहुँचे और जैतून पहाड़ पर बैतफगे के पास आए, तो यीशु ने दो चेलों को यह कहकर भेजा, अपने सामने के गाँव में जाओ, वहाँ पहुँचते ही एक गदही बंधी हुई, और उसके साथ बच्चा तुम्हें मिलेगा; उन्हें खोलकर, मेरे पास ले आओ। यदि तुम से कोई कुछ कहे, तो कहो, कि प्रभु को इनका प्रयोजन है: तब वह तुरन्त उन्हें भेज देगा। यह इसलिए हुआ, कि जो वचन भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हो: “सिय्योन की बेटी से कहो, ‘देख, तेरा राजा तेरे पास आता है; वह नम्र है और गदहे पर बैठा है; वरन् लादू के बच्चे पर।’ चेलों ने जाकर, जैसा यीशु ने उनसे कहा था, वैसा ही किया। और गदही और बच्चे को लाकर, उन पर अपने कपड़े डाले, और वह उन पर बैठ गया। (मत.21:1-7)
पहली दृष्टि में यह घटना पहुनाई के विषय में प्रतीत नहीं होती। ठीक है। परन्तु मेरी दादी हमेशा इस बात पर ध्यान दिलाती थी कि उस व्यक्ति ने अपने प्रभु की सेवा के लिए वही दिया जो उसके पास था। फिर वह हमसे पूछती थीं, “आपके हाथ में ऐसा क्या है जिसे आप अपने प्रभु को दे सकते हैं?”
आपके हाथ में क्या है? पहुनाई के विषय में यह आरम्भ करने के लिए एक बहुत अच्छा प्रश्न है। इसका कारण दो बातों में है। पहली बात, हम प्रायः सोचते हैं कि पहुनाई करने के लिए पहले हमें किसी वस्तु की अधिक आवश्यकता होगी—जैसे एक बड़ा या अधिक सुन्दर घर। मित्र, पहुनाई करने के लिए आपको बड़े घर की आवश्यकता नहीं है। केवल मेरे उस मित्र को स्मरण करें जिसने मेरी पत्नी और मुझे कंबोडियाई भोजन के लिए बुलाया था। उसके पास अपना घर भी नहीं था, फिर भी उसने हमारी कितनी अच्छी सेवा की!
आपके हाथ में क्या है? आपके पास ऐसा क्या है जिसे आप पहुनाई के द्वारा प्रभु और दूसरों की सेवा में अर्पित कर सकते हैं? आपके पास जो कुछ है उसका आकलन कीजिए, और फिर उसे काम में लगाने में जुट जाइए। पहुनाई करने के भय पर विजय पाने की दिशा में यह पहला कदम है।
हमारी कलीसिया में एक और युवा भाई है, जिसके पास केवल एक छोटा सा घर है, और उसमें रसोई बहुत ही छोटी है। प्रत्येक रविवार को, वह प्रातःकालीन और सायंकालीन सभाओं के बीच कलीसिया के अलग-अलग सदस्यों और अतिथियों को दोपहर के भोजन के लिए बुलाता है। वह भोजन की तैयारी में बहुत परिश्रम करता है और सदैव यह सुनिश्चित करता है कि सब लोगों को उनकी आवश्यकता की वस्तुएँ मिलें तथा वे तृप्त और प्रेम पाने के अनुभव के साथ वहाँ से जाएँ। जहाँ तक मैं जानता हूँ, कि उस भाई ने कभी यह नहीं सोचा कि उसका घर परमेश्वर की महिमा के लिए उपयोग करने हेतु बहुत छोटा है। इसके विपरीत, उसके पास जो था उसने उसका आकलन किया, और फिर उसे अपने साथी कलीसिया सदस्यों की देखभाल में लगा दिया। वह छोटे से घर में भी पहुनाई करने में निपुण है।
मेरा विचार है कि आपको हमारे उस प्रिय भाई के समान बनने की इच्छा रखनी चाहिए। घर बड़ा हो या छोटा। बहुत धन हो या थोड़ा। यदि आप महँगा भोजन नहीं करा सकते, तो साधारण भोजन परोसिए। यदि आप भोजन कराने में असमर्थ हैं, तो चाय या कॉफी ही परोस दीजिए। आपके पास जो कुछ है उसका उपयोग कीजिए और जो आप कर सकते हैं वही कीजिए। जब आप परमेश्वर पर भरोसा रखते हुए अपनी पहुनाई की सेवा के द्वारा उसके प्रेम को प्रकट करने का प्रयत्न करते हैं, तब परमेश्वर की महिमा होती है। यह सीमित साधनों में बाइबल आधारित पहुनाई का एक उत्तम उदाहरण है।
निमंत्रण दीजिए
यहीं पर वास्तविकता सामने आती है। आप इस रविवार कलीसिया में हैं। आप सभा-भवन में इधर-उधर देखते हैं और एक वृद्ध दम्पति को देखते हैं जो हमेशा उसी स्थान पर बैठते हैं। पहुनाई करने की शुरुआत तब होती है जब आप उनके पास जाकर उनसे पूछते हैं कि क्या वे अगले रविवार कलीसिया के बाद दोपहर के भोजन के लिए आपके घर आना चाहेंगे। “लेकिन मैं उन्हें जानता ही नहीं हूँ!” तो और भी अच्छा है! साथ में भोजन करने से आपको उन्हें जानने का एक अच्छा अवसर मिलेगा।
आपको आश्चर्य होगा, कि ऐसा सुनकर वे तुरन्त ही बहुत प्रसन्न होंगे कि लगभग तीस वर्ष की आयु वाला कोई व्यक्ति उन्हें दोपहर के भोजन पर आमंत्रित कर रहा है। वे तैयार हो जाते हैं। बहुत अच्छा। जब आप सभा-भवन के पीछे से बाहर निकल रहे होते हैं, तो आप प्रवेश-हॉल में खड़े कॉलेज के छात्रों के एक समूह को देखते हैं। आपके घर में स्थान है, और आप जानते हैं कि ये विद्यार्थी उसी अर्धवार्षिक पाठ्यक्रम की शुरुआत से आपकी कलीसिया में आ रहे हैं। तो उन्हें भी क्यों न आमंत्रित किया जाए? अंततः कब कॉलेज के विद्यार्थियों को एक युवा परिवार और सत्तर वर्ष के एक दम्पति के साथ समय बिताने का निमंत्रण मिलता है? मैं मज़ाक नहीं कर रहा हूँ। ऐसा अवसर बहुत दुर्लभ होता है! यही वह तरीका है जिससे आप छोटे समूहों के लिए अपनी मंशा से संगति के विचार उत्पन्न करते हैं।
आप देखिए कि पहुनाई की माँग यह कहती है कि आप सामने वाले को आमंत्रित करने के लिए अनुरोध करें। अब मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि यह अनुरोध कभी-कभी कठिन नहीं होता है। परन्तु मेरा कहने का अर्थ यह है, कि किसी अच्छे मित्र को फुटबॉल मैच देखने के लिए घर बुलाना एक बात है, लेकिन अपरिचित लोगों को बुलाना थोड़ा कठिन होता है! निश्चित ही, कलीसिया के ऐसे सदस्य जिन्हें आप ठीक से नहीं जानते, वे भी आपको अपरिचित लोगों के समान लग सकते हैं। लेकिन आपको स्वयं को यह स्मरण कराना चाहिए कि जो कोई भी परमेश्वर को पिता कहता है, यदि आप भी परमेश्वर को पिता कहते हैं, तो वह आपका भाई या बहन है। इसका अर्थ यह है कि आपके साथी विश्वासी अपरिचित लोग नहीं हैं—वे भाई-बहन हैं। इसी कारण आप अपने भय के बीच भी आगे बढ़ सकते हैं और निमंत्रण देने का साहस कर सकते हैं। और यही कारण है कि आपको ऐसा करना भी चाहिए! क्योंकि शर्मीले मसीही लोगों के लिए यह पहुनाई करने का एक बहुत अच्छा सुझाव है।
सच्ची एवं खुली जिज्ञासा से प्रश्न पूछें
आपके अतिथि आ चुके हैं। वे आपके घर में हैं। अब आप क्या करेंगे? प्रश्न पूछें! सामान्य रूप से देखा जाए तो लोगों की बातचीत का सबसे पसंदीदा विषय वे स्वयं होते हैं। और मैं यह आपके अतिथियों की आलोचना के रूप में नहीं कह रहा हूँ। हम सभी सामान्यतः ऐसे ही होते हैं! स्मरण रखें कि यीशु हमें बताता है कि दूसरी सबसे बड़ी आज्ञा यह है कि: “तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम कर” (मत. 22:39)। आप कैसे चाहते हैं कि आपको प्रेम किया जाए? मुझे विश्वास है कि इसके कई उत्तर हो सकते हैं, लेकिन उनमें से एक संभवतः यह होगा कि कोई व्यक्ति आप में वास्तविक रुचि दिखाए, जैसे आपकी रुचियाँ, आपका उत्साह, आपकी कहानी, आपके परिवार आदि के विषय में। आप शायद सचमुच इसकी सराहना करते हैं कि जब लोग जो आपकी चिन्ता करते हैं, आपसे उद्देश्यपूर्ण प्रश्न पूछते हैं। जब आपके अतिथि आएँ, तो उनसे वैसे ही प्रश्न पूछना आरम्भ करें जैसे आप स्वयं से पूछे जाने की इच्छा रखते हैं। यहाँ उदाहरण के रूप में कुछ प्रश्न दिए गए हैं जिन्हें आप पूछने के बारे में सोच सकते हैं:
– आप इस शहर में रहने के लिए कैसे आए?
– आप क्या काम करते हैं? आपको अपने काम में क्या अच्छा लगता है? आपको अपने काम में क्या पसन्द नहीं आता है?
– आपके क्या-क्या शौक हैं?
– आपने प्रभु को कैसे जाना?
– पिछले रविवार के उपदेश से आपको क्या मुख्य बातें सीखने को मिलीं?
– इस समय प्रभु आपको क्या सिखा रहा है?
ध्यानपूर्वक सुनें
ठीक है, आप प्रश्न पूछ रहे हैं, तो यह बहुत अच्छी बात है। लेकिन यदि आप चाहते हैं कि उन प्रश्नों का पूरा प्रभाव पड़े, तो यह आवश्यक है कि आप सुनने में सचेत रहें। ऐसा दिखाने का एक अच्छा तरीका यह है कि आप सच में सुन रहे हैं, आप सामने वाले के उत्तर के आधार पर आगे के प्रश्न पूछें। मैंने एक बार सुना था कि आपको बातचीत में तीसरे स्तर तक प्रश्न पूछने चाहिए, तभी सामने वाले को वास्तव में विश्वास होता है कि आप उनकी बात सुन रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि जब आप किसी से प्रश्न पूछते हैं कि वे कैसे हैं, तो सामान्यतः आपको उनके उत्तर पर कम से कम दो बार और प्रतिक्रिया व्यक्त करनी चाहिए, तब उन्हें लगेगा कि आप वास्तव में उनकी बात में रुचि ले रहे हैं। इसलिए सुनें, और फिर अधिक प्रश्न पूछें!
प्रार्थना
मुझे यह कहते हुए शर्म आती है कि सामाजिक कार्यक्रमों के दौरान प्रार्थना करते समय मैं कभी-कभी असहज महसूस करता हूँ। फिर भी, जब मैं किसी के साथ अपने मन की बात साझा कर रहा होता हूँ, और वे उसी समय मेरे लिए प्रार्थना करने की इच्छा जताते हैं, तो मैं हमेशा इस बात की बहुत सराहना करता हूँ। इसलिए, मुझे अपने भीतर जो भी असहजता महसूस होती है, उसके बावजूद भी उसमें आगे बढ़ने का प्रयास करता हूँ और अपने घर आए हुए लोगों के लिए प्रार्थना करने की इच्छा जताता हूँ। जब आप लोगों के लिए प्रार्थना करते हैं, तो आप यह स्वीकार कर रहे होते हैं कि उनकी आवश्यकताएँ केवल आपकी क्षमता से पूरी नहीं हो सकती हैं। साथ ही आप यह भी घोषणा कर रहे होते हैं कि उनकी आवश्यकताएँ परमेश्वर की सामर्थ्य से भी बाहर नहीं हैं। इसलिए प्रार्थना करें। अपने अतिथि के लिए प्रभु पर निर्भर होकर ऊँची आवाज में प्रार्थना करें। आप यह नहीं जानते कि उनके लिए यह कितना उत्साहजनक हो सकता है जब वे आपके द्वारा उनके लिए प्रभु का नाम पुकारते हुए सुनते हैं।
आवश्यकताएँ पूरी करें
आइए हम कम महत्वपूर्ण बातों से अधिक महत्वपूर्ण बातों की ओर बढ़ें, और इसके लिए मुझे आप से अनुमति चाहिए कि मैं अपनी दादी के विषय में एक और कहानी सुनाऊँ। वह हमारी कलीसिया में अतिथियों की देखभाल और स्वागत करने के मामले में बहुत प्रसिद्ध थीं। मुझे हमेशा स्मरण रहता है कि वह मुझे बताती थी कि अपने अतिथियों के लिए जितना आवश्यकता है, उससे थोड़ा अधिक भोजन बनाना कितना महत्वपूर्ण है। वह यह इसलिए कहती थी क्योंकि वह कभी नहीं चाहती थी कि उनके अतिथियों के लिए भोजन, चाय या जो भी वे परोस रही थी, उनके लिए कम पड़ जाए।, और फिर पता चले कि उनके पास पर्याप्त मात्र में वह वस्तु उपलब्ध नहीं है। यहाँ मुख्य बात यह है: कि जब आप लोगों को अपने घर बुलाते हैं, तो यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि आपके पास उनकी देखभाल करने के लिए आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध हों। इसका अर्थ यह नहीं है कि आपको बहुत अधिक पैसा खर्च करना होगा। इसका अर्थ केवल यह है कि आप जितना संभव हो, उतना पहले से तैयारी करने का प्रयास करें, ठीक वैसे ही जैसे आप उम्मीद करते हैं कि दूसरे लोग आपके लिए करते यदि आप उनकी जगह होते।”
ठीक है, यह तो कम महत्वपूर्ण बात हुई। अब हम अधिक महत्वपूर्ण बातों की ओर बढ़ते हैं। आप किसी भी व्यक्ति की सभी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकते हैं। फिर भी, प्रभु आपको उनमें से कुछ आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए कह सकता है। हमारे पड़ोसी पिछले लगभग दो वर्षों से हमारे पास रहते हैं। इस दौरान हमने देखा है कि उन्होंने हमारी कलीसिया की दो अलग-अलग बहनों को अपने घर में रहने के लिए स्थान दिया, जिन्हें विवाह से पहले के अन्तिम महीनों में रहने के लिए स्थान की आवश्यकता थी। निश्चित ही, मुझे लगता है कि निक और केटलिन ने प्रभु से प्रार्थना की होगी कि वह व्यवस्था करे। लेकिन उन्होंने केवल प्रार्थना तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा। उन्होंने स्वयं से और प्रभु से यह प्रश्न पूछा: कि “क्या हमें अपने घर का उपयोग इन बहनों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करना चाहिए?” और उन्होंने इस प्रश्न का उत्तर ‘हाँ’ में दिया। मुझे उनका यह उदाहरण बहुत पसन्द है। वे पहुनाई के लिए बाइबल आधारित सीमाओं को अच्छी रीति से समझते हैं, और अभी भी वे बहुत खुले और उदार हैं।
आप देखिए, कभी-कभी पहुनाई का पहला कदम आपको यह दिखाता है कि आप और भी बहुत कुछ कर सकते हैं। हो सकता है कि आपको यह पता चले कि किसी व्यक्ति की कार खराब हो गई है और उसके पास काम पर जाने का कोई दूसरा साधन नहीं है। और आपके पास उस हफ्ते उपयोग में न आने वाली एक अतिरिक्त कार है। क्या प्रभु आपको इस रीति से प्रेरित कर सकता है कि आप उस व्यक्ति को अपनी कार कुछ समय के लिए दे दें? संभव हो, तो उनसे पूछिए और फिर विश्वास में वही कीजिए जो आपको उचित लगता है। शायद आपके अतिथि को कार की नहीं, परन्तु भोजन की आवश्यकता हो। हमारी कलीसिया में एक ऐसी एक अकेली माँ है जिसके तीन बच्चे हैं और उसका पति उसे कई वर्ष पहले छोड़ चूका है। मैं ऐसे दस से अधिक लोगों के नाम बता सकता हूँ जो नियमित रूप से उसकी और उसके बच्चों की देखभाल इस प्रकार से करते हैं कि जब माँ को देर तक काम करना पड़ता है, तब परिवार को ठीक समय पर गर्म भोजन मिल जाता है। यह पहुनाई करने का एक सुन्दर तरीका है, जो मनोरंजन से भिन्न है—अर्थात् मसीही दृष्टिकोण से ऐसा करना केवल दिखावा नहीं, वरन् प्राणों की देखभाल करना है।
आपके हाथ में क्या है? जो कुछ भी है, क्या आप उसका उपयोग उस व्यक्ति की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कर सकते हैं जिसकी आप पहुनाई के द्वारा देखभाल करना आरम्भ कर चुके हैं? हो सकता है कि आपके प्रेम के साथ किए गए कार्य ही वह साधन हों जिनके द्वारा वे परमेश्वर के प्रेम को कुछ हद तक समझ सकें। यह कितना बड़ा सौभाग्य है।
मत्ती रचित सुसमाचार के अन्त में यीशु अपने शिष्यों को पहुनाई और देखभाल की सेवकाई के महत्व के विषय में कुछ सिखाता है। उसने कहा:
“जब मनुष्य का पुत्र अपनी महिमा में आएगा, और सब स्वर्गदूत उसके साथ आएँगे तो वह अपनी महिमा के सिंहासन पर विराजमान होगा। और सब जातियाँ उसके सामने इकट्ठी की जाएँगी; और जैसा चरवाहा भेड़ों को बकरियों से अलग कर देता है, वैसा ही वह उन्हें एक दूसरे से अलग करेगा। और वह भेड़ों को अपनी दाहिनी ओर और बकरियों को बाईं ओर खड़ी करेगा। तब राजा अपनी दाहिनी ओर वालों से कहेगा, ‘हे मेरे पिता के धन्य लोगों, आओ, उस राज्य के अधिकारी हो जाओ, जो जगत के आदि से तुम्हारे लिये तैयार किया हुआ है। क्योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को दिया; मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी पिलाया, मैं परदेशी था, तुम ने मुझे अपने घर में ठहराया; मैं नंगा था, तुम ने मुझे कपड़े पहनाए; मैं बीमार था, तुम ने मेरी सुधि ली, मैं बन्दीगृह में था, तुम मुझसे मिलने आए। तब धर्मी उसको उत्तर देंगे, ‘हे प्रभु, हमने कब तुझे भूखा देखा और खिलाया? या प्यासा देखा, और पानी पिलाया? हमने कब तुझे परदेशी देखा और अपने घर में ठहराया या नंगा देखा, और कपड़े पहनाए? हमने कब तुझे बीमार या बन्दीगृह में देखा और तुझ से मिलने आए? तब राजा उन्हें उत्तर देगा, ‘मैं तुम से सच कहता हूँ, कि तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया।”
(मत. 25:31-40)
अपनी कलीसिया के साथियों की आवश्यकताओं को पूरा करना, एक बहुत वास्तविक अर्थ में, प्रभु यीशु की आवश्यकताओं को पूरा करना है। वह अपने लोगों के साथ इतना गहरा सम्बन्ध रखता है कि उनका भला करना मानो परमेश्वर का भला करना है। क्या आप यह समझ रहे हैं कि पहुनाई और देखभाल की सेवकाई वास्तव में कितनी महत्वपूर्ण है? यही एक ऐसे घर को बनाने का मूल कारण है जो सेवकाई के लिए स्वागत करता हो।
—
चिन्तन के लिए प्रश्न:
- इस समय आपके पास ऐसा क्या है जिसका उपयोग आप पहुनाई करने के लिए कर सकते हैं?
- आपनी कलीसिया में पहुनाई की सेवकाई को आगे बढ़ाने के विषय में आपको किस बात से डर लगता है?
- आपको पहुनाई के विषय में कौन सी बात उत्साहित करती है?
—
निष्कर्ष
मुझे पहुनाई करने से प्रेम है। मैं स्वयं बहुत से लोगों की पहुनाई का लाभ पा चुका हूँ, और मेरी पत्नी तथा मैंने भी धीरे-धीरे दूसरों के प्रति अधिक पहुनाई करने का प्रयास किया है। दूसरों के यहाँ ठहरने और स्वयं दूसरों की पहुनाई करने के द्वारा, मैंने सचमुच संसार के कई भागों से मित्र बनाए हैं। परमेश्वर ने कृपा करके हमारे प्रयासों और हमारे लिए दूसरों के प्रयासों, दोनों का उपयोग करके हमें बहुतायत से आशीष देने और अपने प्रेम के विषय में सिखाने के लिए किया है।
मेरा विश्वास है कि यदि आप उन लोगों के प्रति पहुनाई करना आरम्भ करेंगे जिन्हें प्रभु ने आपके मार्ग में रखा है, तो आप भी कुछ ऐसा ही अनुभव करेंगे। जो कुछ आपके हाथ में है, उसका उपयोग पूरे मन से ऐसे कीजिए मानो आप यह सब कुछ प्रभु के लिए कर रहे हैं। इससे दूसरे लोग आशीष पाएँगे। सम्भव है, कि आप स्वयं भी ऐसा करके अधिक आशीष पाएँगे। और परमेश्वर को बहुत अधिक महिमा मिलेगी।
लेखक के बारे में
टेलर हार्टली वॉशिंगटन, डी.सी. स्थित 9मार्क्स में संपादकीय निदेशक के रूप में सेवा करते हैं। उनकी पत्नी का नाम रेचल है, और उनका एक पुत्र है जिसका नाम बोड है। टेलर ने सदर्न बैपटिस्ट थियोलॉजिकल सेमिनरी से एम.डिव. की उपाधि प्राप्त की है और वर्तमान में यूनाइटेड किंगडम के लंदन सेमिनरी में एम.टीएच. की पढ़ाई कर रहे हैं।
विषयसूची
- भाग I: पहुनाई क्या है?
- परमेश्वर के प्रेम पर आधारित
- देखभाल की सेवकाई
- उदार बनने का एक अवसर
- चिन्तन के लिए प्रश्न:
- भाग II: मुझे किन लोगों की पहुनाई करनी चाहिए?
- मेरा पड़ोसी कौन है?
- कलीसिया के सदस्यों के लिए पहुनाई
- बाहरी लोगों के लिए पहुनाई
- चिन्तन के लिए प्रश्न:
- भाग III: मैं पहुनाई करने में कैसे आगे बढ़ूँ?
- स्थिति का आकलन करें
- निमंत्रण दीजिए
- सच्ची एवं खुली जिज्ञासा से प्रश्न पूछें
- ध्यानपूर्वक सुनें
- प्रार्थना
- आवश्यकताएँ पूरी करें
- चिन्तन के लिए प्रश्न:
- निष्कर्ष
- लेखक के बारे में