#89 बाइबल में पहुनाई—अपना घर खोलें

By Taylor Hartley

परिचय

 

कुछ वर्ष पहले, जनवरी की ठण्ड में एक शनिवार सुबह, मुझे हमारे एक पास्टर का संदेश मिला। उन्होंने पूछा कि क्या मैं और मेरी पत्नी एक ऐसे व्यक्ति को एक रात के लिए अपने घर में ठहरा सकते हैं, जो पहले कभी हमारी कलीसिया का सदस्य हुआ करता था। वह लंदन से रिचमंड की उड़ान पर था, परन्तु खराब मौसम के कारण उसका विमान डी.सी. में उतर गया था, और उसे रात बिताने के लिए एक स्थान की आवश्यकता थी। पहली दृष्टि में यह अनुरोध पूरा करना बहुत ही सरल लगा: जैसे उसके लिए बिस्तर तैयार करना, उसे चाबी कहाँ है यह बता देना, और शायद अगली सुबह उसके प्रस्थान से पहले उसे एक प्याला चाय देना। अंततः वह व्यक्ति सात वर्षों तक हमारी कलीसिया का सदस्य रहा था। सम्भवतः बहुत से लोग होंगे जिनसे वह मिलना और बातचीत करना चाहेगा। शायद हम उससे अधिक मिल भी न सकें! अपनी पत्नी की सहमति से, हमने उसे अपने यहाँ ठहराने के लिए हामी भर दी।

कुछ घंटों के बाद मेरा वर्तमान मित्र, ऑस्टिन, हमारे घर पहुँचा। हमारे लिए आश्चर्य की बात यह थी कि उसकी दोपहर और शाम कहीं और बिताने की कोई योजना या इच्छा नहीं थी; वह केवल हमारे साथ ही समय बिताना चाहता था। आरम्भ में यह हमें कुछ अजीब सा लगा और सच कहूँ तो थोड़ा खीझ उत्पन्न करने वाला भी लगा। हमने अपना दिन इस प्रकार बिताने की योजना नहीं बनाई थी, और ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह हमारी उन योजनाओं पर पानी फेरने पर तुला हुआ है। प्रारम्भिक बातचीत में हमें यह भी पता चला कि वह भाई आर्थिक रूप से सम्पन्न था, अर्थात् उसके लिए किसी होटल का कमरा लेना शायद कोई समस्या नहीं थी। यदि वह चाहता तो हिल्टन में ठहर सकता था, फिर उसे हमारे यहाँ ठहरने की क्या आवश्यकता थी? यहाँ तक कि वह तो हमें भली-भाँति जानता तक नहीं था!

उस दिन ऑस्टिन के व्यवहार की एक बात ने बहुत शीघ्र ही मेरे मन में उसकी उपस्थिति के प्रति भाव बदल दिया: वह कृतज्ञ था, वह हममें वास्तविक रुचि रखता था, और वह उत्साह बढ़ाने वाला व्यक्ति भी था। यह स्पष्ट था कि हमारा उसे अपने घर में स्वीकार करना उसके लिए बहुत महत्व रखता था। परमेश्वर का धन्यवाद हो कि वह मेरे भीतर की उस आवाज़ को नहीं सुन सकता था, जब मैं यह समझने के लिए संघर्ष कर रहा था कि अपने सबसे सच्चे रूप में पहुनाई करना वास्तव में क्या होता है। एक और बात भी स्पष्ट थी कि उसे सचमुच हममें रुचि थी। उसने हमसे पूछा कि हम कौन हैं, हमारी मुलाकात कैसे हुई, और हम डी.सी. में क्यों रह रहे हैं। परन्तु उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह था कि उसने पूछा कि हम परमेश्वर को कैसे जान पाए और तब से उसका अनुसरण करना हमारे लिए कैसा रहा है।

अंततः वह उत्साह बढ़ाने वाला भी था। सबसे पहले तो उसकी उपस्थिति ही प्रोत्साहन देने वाली थी। वह मुस्कुराता था, धन्यवाद कहता था, और भरपूर रोचक बातचीत करता था। साथ ही, जहाँ कहीं भी उसने हमारे जीवन में परमेश्वर के अनुग्रह का प्रमाण देखा, वहाँ उसने जानबूझकर हमारा उत्साह बढ़ाने का प्रयास किया। ऑस्टिन हमें बाइबल में वर्णित सहभागिता को व्यवहार में दिखा रहा था—ऐसी सहभागिता, जो केवल औपचारिक बातचीत तक सीमित नहीं रहती, वरन् आत्मा को गहराई से छू लेने वाले सम्बन्ध तक पहुँचती है।

उस जनवरी की रात, जब ऑस्टिन हमारे यहाँ ठहरा, उसने मुझे बाइबल में वर्णित पहुनाई के विषय में बहुत कुछ सिखाया। मैं कभी नहीं भूलूँगा कि उसने मुझे यह बताते हुए कहा था कि जब भी सम्भव हो, वह होटलों के बजाय अन्य मसीहियों के यहाँ ठहरना क्यों पसन्द करता है। उसने कहा, “चूँकि हम यीशु में एक हैं, इसलिए उन अन्य मसीहियों के साथ अधिक समय बिताना मुझे बहुत आनन्ददायक और उत्साहवर्धक लगता है, जो मेरे लिए पहले अपरिचित होते हैं। किसी के घर में ठहरना ऐसा अवसर प्रदान करता है। जब मैं पहुँचता हूँ, तब शायद मैं उन्हें नहीं जानता, परन्तु वे मसीह में मेरे भाई-बहन हैं, इसलिए उन्हें जानना हमेशा लाभदायक सिद्ध होता है।”

अपरिचित व्यक्ति का स्वागत करने के विषय में बाइबल क्या कहती है, इसे ऑस्टिन मुझसे कहीं अधिक उत्तम रीति से समझता था। वह मेरे परिवार का ही एक हिस्सा था, इसलिए उसका मेरे घर में ठहरना उतना अजीब नहीं था जितना आरम्भ में मुझे लगा था। उसने मेरी सहायता की कि मैं यीशु को अतिथि और पहुनाई करने वाला—अर्थात् दोनों रूपों में देखूँ, जो यह दिखाता है कि मसीह किस प्रकार अपनी उपस्थिति में हमारा स्वागत करता है।

जब से ऑस्टिन पहली बार हमारे यहाँ ठहरा, तब से मेरी पत्नी और मैंने पहुनाई की सेवकाई करने का भरपूर प्रयास किया है। हमने संसार के विभिन्न भागों से आए पासबानों और कलीसिया के सदस्यों की पहुनाई की है। हमने अपरिचित लोगों के साथ हँसी बाँटी है और आँसू भी बहाए हैं। हमने ऐसे लोगों के साथ शीघ्र गहरी मित्रता की है, जिन के लिए यदि हम पहुनाई करने का प्रयास न करते, तो शायद हमारी कभी मुलाकात ही न होती। मुझे पहुनाई करने से प्रेम है। मुझे उन अवसरों से भी प्रेम है जो दूसरों के लिए भौतिक और आत्मिक भलाई करने के अवसर होते हैं—मानो हम अपने बैठक-कक्ष में वास्तव में दूसरों की सेवा करने सम्बन्धी बाइबल की आयतों को जीवन में उतार रहे हों।

मुझे यह बहुत अच्छा लगता है कि जब पहुनाई भली प्रकार से की जाती है, तो उसका परिणाम प्रायः एक नई मित्रता के रूप में सामने आता है। मुझे यह भी अच्छा लगता है कि पहुनाई यीशु की महिमा को बढ़ाती है। यह जीवन-कौशल मार्गदर्शिका पूरी रीति से इस उद्देश्य से लिखी गई है कि आप पहुनाई करने से प्रेम करना सीखें और आरम्भ करने के लिए कुछ विचार प्राप्त करें। हम पहुनाई से सम्बन्धित पवित्रशास्त्र की शिक्षाओं पर विचार करेंगे, और साथ ही ऐसे व्यावहारिक विषयों पर भी चर्चा करेंगे, जैसे सीमित साधनों के होने पर भी में बाइबल आधारित पहुनाई करना।

मैं प्रार्थना करता हूँ कि आपकी पहुनाई की सेवकाई बहुतों के लिए आशीष का कारण बने। फिर भी, मुझे भीतर ही भीतर ऐसा लगता है कि यदि आप कुछ-कुछ मेरे ही समान हैं, तो आप पाएँगे कि सबसे अधिक आशीषित प्रायः आप स्वयं ही होते हैं। हो सकता है कि आप यह भी समझें कि पहुनाई का आत्मिक वरदान केवल कुछ चुने हुए लोगों के लिए नहीं है, परन्तु उन सभी के लिए एक बुलाहट है जो चाहते हैं कि संगति और सहभागिता से सम्बन्धित पहुनाई सम्बन्धी ईश्वर विज्ञान साकार रूप से उभर सके। तो चलिए अब आरम्भ करते हैं!

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