#96 सेवक वाली अगुवाई: बिना घमण्ड के अगुवाई करना

By Sam Koo

परिचय

अगुवाई और प्रभाव

जब आप पूछते हैं कि अगुवाई करने का क्या अर्थ है, तो आपके मन में क्या आता है?

अपनी कहूँ, तो विशेष रूप से वाशिंगटन डी.सी. में रहते हुए, मेरा ध्यान तुरन्त राजनीति की ओर चला जाता है। मैं उन लोगों के बारे में सोचता हूँ, जो शक्तिशाली राजनेताओं के लिए भाषण लिखते हैं, समाचार चैनलों पर दिखाई देते हैं, या सैकड़ों लोगों का प्रबंधन करते हैं। कुछ लोग विभिन्न विधेयकों का मसौदा तैयार करते हैं, संसार भर के देशों के साथ शान्ति संधियाँ करते हैं, और ऐसे निर्णय लेते हैं, जो लाखों लोगों के जीवन पर प्रभाव डालेंगे। परन्तु हो सकता है कि आपका ध्यान राजनेताओं की ओर न जाए। आप सोशल मीडिया पर उपस्थित लोगों के बारे में सोच सकते हैं। संसार के कई हिस्सों में, “इन्फ्लुएंसर” (प्रभाव डालने वाले) की उपाधि का महत्व किसी राजनेता या प्रोफेसर से कहीं अधिक होता है। अगुवाई के ये उदाहरण साबित करते हैं कि अगुवाई और प्रभाव कई रूप ले सकते हैं—और कभी-कभी वे अधिकार का प्रयोग करने वाले एक कठोर व्यक्ति की तरह दिखते हैं, और कभी-कभी वे ऐसे किसी व्यक्ति की तरह दिखते हैं, जिसके लाखों अनुयायी हैं।

परन्तु अगुवाई के केवल यही रूप नहीं हैं। सामान्य लोग (आप और मेरे जैसे सामान्य मसीही!) अपने आसपास के मित्रों और परिवार पर प्रभाव डालते हैं। मसीही अगुवाई केवल विशिष्ट वर्ग के लोगों के लिए ही आरक्षित नहीं है। यदि आप अभिभावक हैं, तो उन लोगों पर आपका प्रभाव छोटा (कम मात्रा में) परन्तु बहुत महत्वपूर्ण (अधिक गुणवत्ता में) होता है, जिनकी देखभाल के लिए परमेश्वर ने उन्हें आपको सौंपा है। हो सकता है कि आप अपनी कलीसिया में या अपने कार्यस्थल पर भी किसी अगुवाई के पद पर हों। भले ही वहाँ सैकड़ों लोग न हों, परन्तु रविवार की पाठशाला के एक शिक्षक, या एक सेवक अर्थात् डीकन, या एक सदस्य के रूप में आपकी भूमिका आपको अपने अधीन लोगों के बारे में सोचने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित करती है। प्रभाव का आकार अलग-अलग हो सकता है, परन्तु चाहे वह वैश्विक हो या व्यक्तिगत्, उसका प्रभाव महत्वपूर्ण होता है।

दूसरे शब्दों में कहें तो हम सभी प्रभाव डालते हैं। और हम सभी अगुवाई करते हैं।

“अगुवा कौन है?” जबकि इस प्रश्न का उत्तर हर एक व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकता है, परन्तु हम सभी उन परीक्षाओं और खतरों से परिचित हैं, जो अगुवों के पीछे-पीछे चलते हैं। प्रभाव का दुरुपयोग करने का सबसे स्पष्ट तरीका, घमण्ड के साथ और अपने निजी लाभ के लिए अगुवाई करना है। घमण्ड अधिकार को विकृत कर देता है। घमण्ड धीरे-धीरे, परन्तु निश्चित रूप से, अपने महत्व को बढ़ाता है और सेवक वाली अगुवाई का गला घोंट देता है। यह दूसरों को देने के बजाय अपने लिए लेता है; चंगा करने के बजाय यह घाव देता है; निर्माण करने के बजाय यह तोड़ डालता है।

दुर्भाग्य से, इस तरह की त्रासदी केवल सांसारिक अगुवों तक ही सीमित नहीं रहती। अधिकार का दुरुपयोग और घमण्डी अगुवे न केवल धर्मनिरपेक्ष संसार में पाए जाते हैं, बल्कि हमारी कलीसियाओं में भी यह बहुत अधिक फैले हुए हैं। पास्टर और अगुवे लगातार अपने प्रभाव का उपयोग करके अधार्मिकता से भरा लाभ उठाने के कारण सुर्खियों में रहते हैं। घमण्डी अगुवों से न केवल कलीसिया की बेंचें भरी हुई हैं, बल्कि घर भी भरे हुए हैं। यह दु:ख की बात है कि दुर्व्यवहार अब बहुत आम हो गया है, क्योंकि पति-पत्नी या माता-पिता यह गलत समझ लेते हैं कि वे कौन हैं और परमेश्वर के द्वारा दिए गए अधिकार का गलत उपयोग करते हैं।

हममें से कोई भी अपने ऊपर बुरे अगुवे नहीं चाहता। और कौन चाहता है कि उसे डाँट-फटकार कर सिखाया जाए? कौन चाहता है कि उसे कोई भ्रष्ट प्रोफेसर पढ़ाए? कौन ऐसे पति या पत्नी के पास घर जाना चाहता है, जो उसकी बात न सुने?

और आपका क्या? चाहे आप पास्टर हों, माता-पिता हों, या किसी कम्पनी के अध्यक्ष हों, हम सभी को इस बारे में मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है कि अपने प्रभाव का सही उपयोग कैसे करें, बिना घमण्ड के अगुवाई कैसे करें, और विनम्रता से दूसरों की सेवा कैसे करें। हमें यह जानने की आवश्यकता है कि एक उत्तम अगुवा कैसे बनते हैं। इसलिए, हम ऐसा कैसे कर सकते हैं, जिससे परमेश्वर की महिमा हो?

अगुवाई के बारे में बाइबल की आयतों और अपने आसपास के उदाहरणों से प्रेरणा लेते हुए, मैं आपको अगुवाई के तीन ऐसे गुण दिखाना चाहता हूँ, जो धार्मिकता से भरे हुए अगुवों की विशेषताएँ हैं। इसमें कोई सन्देह नहीं कि और भी कई गुण गिनाए जा सकते हैं। परन्तु मैं अच्छे अगुवों की इन तीन गुणों पर इसलिए ध्यान दे रहा हूँ, क्योंकि मेरे जीवन में जो आत्मिक अगुवाई है, उनमें ये गुण सबसे स्पष्ट दिखाई देते हैं। ये कोई ऐसे-वैसे गुण नहीं हैं; मुझे उन धार्मिकता से भरे अगुवों के नाम और चेहरे याद आते हैं, जो अपने जीवन से उन बातों का उदाहरण पेश करते हैं, जिनकी चर्चा हम करने वाले हैं।

तो वे गुण कौन से हैं? सबसे पहले, हम देखेंगे कि विनम्र अगुवे परमेश्वर में, और विशेष रूप से, उसके वचन से उसके बारे में सीखकर आनन्द पाते हैं। इसके बाद, धार्मिकता से भरे हुए अगुवे स्वयं को स्थिर रखते हैं और परमेश्वर की कलीसिया के प्रति समर्पित रहते हैं। और अन्त में, वे जीवन के हर क्षेत्र और हर पहलू में, जिसमें दु:ख उठाना भी शामिल है, परमेश्वर के प्रबन्ध पर भरोसा रखते हैं।

उसका वचन, उसकी कलीसिया, और उसका प्रबन्ध

यह मार्गदर्शिका जल्दी वाले सुझावों या किसी सांसारिक, परिस्थितिजन्य अगुवाई वाले उदाहरण पर आधारित नहीं है। असल में, एक विनम्र अगुवा बनने का कोई भी जल्दी वाला तरीका नहीं है। एक अगुवा धीरे-धीरे निखरता है और उन्हें सुदृढ़ बनाने वाली परीक्षाओं के द्वारा परखा जाता है, जो न केवल उन्हें कठोर त्वचा, बल्कि एक कोमल हृदय भी प्रदान करेंगी। अपने प्रभाव का सही उपयोग करने के लिए परमेश्वर-केन्द्रित बुद्धि, और वातावरण, और निर्भरता की आवश्यकता होती है। मैं आशा करता हूँ कि इस मार्गदर्शिका के अन्त तक, आप यह देख सकेंगे कि अपने प्रभाव का सही उपयोग करना और बिना घमण्ड के अगुवाई करना, हमारे पास स्वाभाविक रूप से नहीं आता। हम केवल तभी धार्मिकता से भरे तरीके से अगुवाई कर सकते हैं, जब हम प्रभु में आनन्द मनाएँ, उसके अधीन रहें और उस पर भरोसा रखें।

चर्चा के लिए प्रश्न:

  1. आप किन क्षेत्रों में अपने प्रभाव को काम करते हुए देख पा रहे हैं?
  2. प्रभाव के कुछ अच्छे/बुरे उदाहरण कौन से हैं?
  3. आरम्भ करने से पहले, धार्मिकता से भरी अगुवाई की कुछ अन्य बुनियादें कौन सी हैं?

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