#58 लालच से बचना: भौतिकवादी संसार में संतोष

By जॉन सार्वर

परिचय

क्या आप आनन्दित हैं?

यह संतोष पर आधारित जीवन-कौशल मार्गदर्शिका है, परन्तु इसके स्थान पर मैं आन्दन्दित शब्द का उपयोग कर रहा हूँ। संतोष को स्पष्ट रूप से समझना कुछ अधिक कठिन प्रतीत होता है। और वास्तव में संतोष यही है कि अपनी दशा या परिस्थिति में आनन्दित रहना। इसलिए मैं आपसे पूछना चाहता हूँ कि: क्या आप आनन्दित हैं? और अधिक स्पष्ट रूप से कहूँ तो क्या आप अपने जीवन से, जैसे वह अभी है, आनन्दित हैं? यदि आप आन्दनित नहीं हैं, तो मेरा अनुमान है कि इसका कारण यह है कि आपके पास वह कुछ नहीं है जिसे आप चाहते हैं या जिसे आप अपनी आवश्यकता समझते हैं, जैसे नौकरी, जीवनसाथी, सन्तान, घर, वेतनवृद्धि, या एक मित्र। यदि आपके पास ये सब चीजें हैं, तो सम्भव है कि आप सोचते होंगे कि ये सब गलत है। यदि आप के पास इनमें से किसी एक चीज़ का और भी अधिक उत्तम रूप होता तो आप आन्दनित होते।

अब, मैं आपसे एक और प्रश्न पूछता हूँ: यदि आपको वह सब मिल जाए जिसकी आप के पास कमी है (अधिक वेतन वाली नौकरी, बड़ा घर, प्रेम करने वाला/वाली जीवनसाथी, आज्ञाकारी सन्तान, विश्वासयोग्य मित्र, या जो भी आप चाहें), तो क्या इससे आपका आनन्दित होना निश्चित हो जाएगा? क्या आनन्दित होने का उपाय आप स्वयं और वह वस्तु है, जिसकी आप के पास कमी है?

दूसरे शब्दों में कहें तो, क्या आपके और आनन्द के बीच केवल परिस्थितियों में बदलाव ही आड़े आ रहा है?

बॉबी जैमीसन, एक पास्टर, विद्वान और लेखक हैं, जो पास्टर सेवकाई तथा ईश्वर विज्ञान सम्बन्धी लेखन में अपने कार्य के लिए जाने जाते हैं, वह गहरी समझ के साथ यह कहते हैं कि आप दो कारणों में से किसी एक कारण से दुःखी हो सकते हैं—या तो इसलिए कि आपके पास वह नहीं है जिसे आप चाहते हैं, या फिर, ध्यान दीजिए, इसलिए कि आपके पास सब कुछ है और फिर भी आपको लगता है कि वह पर्याप्त नहीं है। [1]

मैं सभोपदेशक की पुस्तक से आपको यह विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि प्रसन्नता परिस्थितियों पर निर्भर करने वाली वस्तु नहीं है। मैं विशेष रूप से आपकी सहायता करना चाहता हूँ कि आप प्रसन्नता को अपनी भौतिक संपत्ति से अलग कर दें। आप धनी हों या निर्धन, दोनों ही दशाओं में दुःखी हो सकते हैं। आप धनी हों या निर्धन, दोनों ही दशाओं में आनन्दित भी हो सकते हैं। सरल शब्दों में कहें तो, आनन्द (या सामान्य रूप से जीवन) ऐसी वस्तु नहीं है जिसे प्राप्त किया जा सकता है; यह परमेश्वर का वरदान है।

संतुष्ट रहने की कुंजी यह है कि संसार से अपनी अपेक्षाएँ घटाएँ और परमेश्वर में उन अपेक्षाओं को बढ़ाएँ।

परन्तु पहले, आइए विचार करें कि आप असंतुष्ट क्यों हैं।

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