#51 संघर्ष समाधान: लड़ाई-झगड़ों को फलदायी बातचीत में बदलना

By रॉब केन

संघर्ष समाधान: लड़ाई-झगड़ों को फलदायी बातचीत में बदलना

मुझे संघर्ष बिल्कुल भी पसन्द नहीं है। स्वभाव से मैं एक मिलनसार व्यक्ति ही रहा हूँ, जो लड़ाई-झगड़े के बजाय आपसी मेलजोल को अधिक महत्व देता है। मुझे गलत न समझें, मैं अलग-अलग विचार रखने और आवश्यकता पड़ने पर वाद-विवाद करने में आनन्दित होता हूँ। आख़िरकार, एक पास्टर होने के नाते, संसार अक्सर कई बातों पर मुझसे असहमत रहता है।

फिर भी, उन असहमतियों के बावजूद भी मैं अपने आसपास के लोगों के साथ मिल-जुलकर रहना पसन्द करता हूँ। परन्तु कभी-कभी मेरी मुलाकात ऐसे व्यक्ति से हो जाती है जिसके साथ संघर्ष का होना लगभग निश्चित सा लगता है। वह वही क्षण होता है जब एक साधारण सा मतभेद बढ़कर अधिक गम्भीर हो जाता है—अर्थात् एक तनावपूर्ण बातचीत, या लगातार बना रहने वाला तनाव, या यहाँ तक कि सम्बन्ध टूटते हुए से लगते हैं। एक पास्टर होने के नाते मैंने इसे अपने जीवन में और दूसरों के जीवन में भी देखा है। ऐसा लगता है कि संघर्ष एक अनचाहे अतिथि के समान है जो बिना बुलाए ही आ जाता है, फिर भी हमें इसे अनुग्रह और बुद्धिमानी के साथ सुलझाना सीखना चाहिए।

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